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Raipur Division has developed Remotely Operated Ultra-Violet Sanitization Robot,

Raipur Division has developed Remotely Operated Ultra-Violet Sanitization Robot, that can be used for sanitization of coaches in Raipur division without entering the coach. Key features of the robot include – remote based movement of robot, remote controlled blasting of UV-C rays to sanitize the coach, remote camera based vision. It will be helpful in sanitization of coaches and fighting against coronavirus. It is a non-chemical based technology, thus there will be no issue of residual contaminations. UV-C rays are effective in killing pathogens and viruses. It helps in keeping safety of the sanitization team as there is no contact, no physical presence necessary. Cost of similar item at market near about two and half Lakhs while in house developed cost is around twenty-five thousand. This is one more effort of Raipur division, Indian Railways to fight against coronavirus.

राज्य सभा की 18 सीटों के लिए 19 जून को होगा चुनाव, नतीजे शाम तक

चुनाव आयोग ने लाॅकडाउन के चलते टाले गये 18 सीटों के चुनाव 19 जून को करवाने की घोषणा की है । आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और राजस्थान के राज्य सभा की 18 सीटों के लिए 19 जून को वोटिंग होगी। चुनाव आयोग ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इसी दिन शाम पांच बजे वोटों की गिनती की जाएगी और नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। आपको बता दे की कोरोना संक्रमण की वजह से चुनाव टाल दिये गये थे। आपको बता दें कि इन सभी सीटों के पिछली बार चुने गए प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। कोरोना संकट के चलते निर्वाचन आयोग ने गत तीन अप्रैल को आदेश जारी कर इन सभी सीटों के लिए चुनाव अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिए था।

उद्धव राज में बाल ठाकरे ट्रॉमा सेंटर की उखड़ी सांसें, ऑक्सीजन की कमी से 12 मरे

मुम्बईः महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राज्य है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मुंबई के जोगेश्वरी स्थित हिंदू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती संक्रमितों के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं की जा रही है। इस अस्पताल का संचालन की जिम्मेदारी बीएमसी की है। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण दो सप्ताह के भीतर यहां कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है।

सूत्रों से पता चला है कि हालात को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या माने को पत्र लिखा है। डॉक्टरों ने लिखा है कि उन्हें आईसीयू में हुई मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र में यह भी कहा है कि साँस के लिए हांफते हुए मरीजों को मरते देखने के बाद उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक 200 बेड पर लगभग 90 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की आवश्यकता होती है। एक रेजिडेंट डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ICU की 25 बेड में से 15 मशीनें ऐसी होती हैं, जिसमें Low O2 प्रेशर की शिकायत रहती है।

एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर, जो पिछले हफ्ते ICU में ड्यूटी पर था, उसने भयावह दृश्य को याद करते हुए कहा, "दो मरीज साँस के लिए हाँफ रहे थे और उन्हें प्रति मिनट 8 से 10 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत थी। हालाँकि, आपूर्ति इतनी धीमी थी कि स्क्रीन लगातार कम दबाव वाले O2 का अलर्ट दे रही थी और जब तक मैंने अस्पताल के टेक्नीशियन के साथ दबाव को ठीक करने की कोशिश की, तब तक दोनों मरीजों की मृत्यु हो चुकी थी।"

एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर 51 वर्षीय मरीज की मौत से काफी आहत थे। उन्होंने उस घटना को याद करते हुए बताया, वह आईसीयू में उनका चैथा दिन था। उसकी स्थिति में काफी सुधार आ रहा था। मुझे यकीन था कि वह जल्द ही आईसीयू से बाहर निकल कर आ जाएगा। वे आगे कहते हैं,"उस दिन कम से कम सात वेंटिलेटर लो प्रेशर दिखा रहे थे, इसलिए मैं टेक्नीशियन को बुलाने गया। जब मैं पाँच मिनट में वापस आया, तब तक इमरान की मौत हो चुकी थी। उसकी स्क्रीन पर 'लो ऑक्सीजन प्रेशर' दिखाई दे रहा था। उसकी मृत्यु ने मुझे बहुत दुखी किया। आईसीयू हमारे लिए एक निराशाजनक स्थान बन गया है। इन परिस्थितियों की वजह से कोई भी यहाँ ड्यूटी पर नहीं करना चाहता।"

कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादातर मरीज जो भर्ती होते हैं वे गंभीर रूप से साँस लेने में कठिनाई से पीड़ित होते हैं। प्रत्येक मरीज को प्रति मिनट 3 से 10 लीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। एक आईसीयू डॉक्टर ने कहा, “अब आप अस्पताल में ऑक्सीजन की आवश्यकता की कल्पना कर सकते हैं।”

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या माने ने स्वीकार किया कि वर्तमान में अस्पताल ऑक्सीजन की माँग को पूरा करने के लिए जूझ रहा है, लेकिन उन्होंने कम आपूर्ति के कारण किसी भी मौत से इनकार कर दिया।

डॉक्टर माने ने कहा, "जब हमने 50 कोविड -19 बेड शुरू किए थे तब 100 जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता थी। अब 200 बेड के साथ हमने सिलेंडर की संख्या 350 तक बढ़ा दिया है। यह सच है कि हमारी माँग अधिक है, क्योंकि वर्तमान में हमें कई गंभीर मामले मिल रहे हैं। इनमें से लगभग सभी को ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता होती है। मरीजों की मौत इसलिए हो गई है क्योंकि वे गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुँचे थे।"

उन्होंने कहा कि गुरुवार को रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा इस मुद्दे को उनके संज्ञान में लाने के बाद अस्पताल ने 500 सिलेंडरों के लिए ऑर्डर दिया है। डॉ. माने ने आगे कहा कि एचबीटी ट्रॉमा हॉस्पिटल फायर सेफ्टी मानदंडों के अनुसार एक बड़े ऑक्सीजन लिक्विड टैंक लगाने के लिए फिट नहीं है। उन्होंने कहा, "हम मेडिकल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाकर इस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं।"

श्रमिक स्पेशल ट्रेन में मुम्बई से लौटे मजदूर की डेड बाडी चार दिन तक पड़े रहने का मामला रेल्वे के माथे पर कलंक

रायपुर/BBN24NEWS। रेलवे द्वारा 21 डॉक्टरों की नियुक्ति आदेश जारी करने के बाद भी पूरा मई माह बीत जाने पर भी नियुक्ति न करने पर सवालिया निशान खड़े करते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि करोना से लड़ने के नाम पर केंद्र सरकार और रेलवे द्वारा खिलवाड़ लगातार जारी है।इन 21 डॉक्टरों की नियुक्ति 1 मई से होनी थी लेकिन पूरा मई माह बीत जाने के बावजूद रेलवे द्वारा इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं की गई है । कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि रेलवे ने 2500 डॉक्टरों और 352 नर्सों की तैनाती का झूठा और खोखला दावा किया था। छत्तीसगढ़ में भी डाक्टरों के पदों के लिए विज्ञापन निकाले गए और डॉक्टरों के साक्षात्कार भी लिए गए 20 अप्रैल को 21 डाक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी भी कर दिए । इन डॉक्टरों को एक मई से ड्यूटी ज्वाइन करना था लेकिन आज तक इन डाक्टरों की ड्यूटी ज्वाइन नहीं कराया गया है इससे केंद्र सरकार और रेलवे की करोना से लड़ने की गंभीरता को लेकर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं ।

रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा ट्रेनों को लेकर भी छत्तीसगढ़ के मामले में असत्य कथन किए जाने का उल्लेख करते हुए कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि रेल पहले समय पर चलने और यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए जानी जाती थी लेकिन मोदी सरकार में और पीयूष गोयल के रेल मंत्री रहते हुए अब सिर्फ ट्रेनें ही रास्ता नहीं भटक रहे हैं पूरा रेल मंत्रालय अपनी दिशा भटक गया है यह करोना के मामले में रेलवे के आचरण से स्पष्ट है।

शैलेश त्रिवेदी ने कहा है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन में मुम्बई से लौटे मजदूर की डेड बाडी चार दिन तक पड़े रहने का झांसी का मामला रेल्वे के माथे पर कलंक है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी रेल्वे की अव्यवस्था के परिणामस्वरूप मजबूर मजदूरों के साथ हुयी बर्बरता का संज्ञान लेते हुए इसे यात्रियों के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया है। रेल्वे के अन्य दावे भी खोखले निकले।

रेलवे ने कहा था कि देश में 5000 डब्बो को आइसोलेशन वार्ड में बदला जाएगा 35 हॉस्पिटल और ब्लॉक करो ना के लिए चिन्हित किए गए हैं लेकिन अगर डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होगी तो यह आइसोलेशन वार्ड और हॉस्पिटल ब्लॉक चिन्हित करने का क्या फायदा ?

त्रिवेदी ने कहा है कि करोना से निपटने के नाम पर मोदी सरकार और रेलवे का रवैया लगातार निराशाजनक बना हुआ है । भारतीय रेल ने करोना महामारी से लड़ाई और लाक डाउन के समय देश को निराश किया है।

इस महामारी के समय लाकडाउन के समय भारतीय रेलवे आम आदमी का सहारा बन सकती थी। करोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग में भारतीय रेलवे ने भी पूरी ताकत से जुटने और अपनी भागीदारी निभाने के दावे किये थे. भारतीय रेलवे ने कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए 2500 डॉक्टरों और 35,000 नर्सों को तैनाती का भी झूठा खोखला दावा किया था। छत्तीसगढ़ में अभी तक नही हुई 21 है डॉक्टरों की ज्वाइनिंग। अधिकतर डॉक्टर्स और नर्सों की टेंपरेरी आधार पर विभिन्न जोन में नियुक्ति प्रस्तावित है और वह भी नहीं हो पायी। रेलवे ने अपने 17 डेकिकेटेड हॉस्पिटल्स और 33 हॉस्पिटल ब्लॉक कोरोना वायरस मरीजों के इलाज के लिए रेलवे द्वारा चिन्हित किए गए हैं। रेलवे ने बिना डॉक्टर के खड़ी ट्रेनों के 500 डिब्बों को कोरोना पीड़ितों की पहचान और इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड में बदलने का दावा भी किया था। लेकिन चिकित्सक की नियुक्ति भी नही की गयी है। रेलवे ने कहा था कि इन कोचों में कोरोना संक्रमण के संदिग्धों को क्वारनटीन किया जा सकेगा। रेलवे के भोजन से लेकर दवाइयों की भी व्यवस्था के दावे झूठे निकले। भूख प्यास दवाई चिकित्सीय सुविधा के अभाव में श्रमिकों की हो रही रेल यात्रा में मौत तक के मामले उजागर हुए हैं। रेलवे में सफर करने वालो को भी नही मिल रही है इलाज की सुविधा । कोरोना से लड़ाई में भागीदारी निभाने का रेलवे का दावा भी अभी तक जमीनी तौर पर कोई साकार रूप नहीं ले सका है। इसके पूर्व लॉक डाउन में भूख प्यास रोजी रोटी का संकट इलाज की बेबसी रहने की जगह की परेशानी भुगत रहे मजदूरों से किराया और वह भी बढ़ा हुआ किराया मांग कर रेलवे ने अपना जनविरोधी चरित्र पहले ही उजागर कर दिया है।

आगरा में तूफान ने मचाई तबाही, ताजमहल को नुकसान; मुख्य मकबरे की रेलिंग टूटी

A News Edit By : Yash Kumar Lata

मौसम में अचानक आये बदलाव से ताजमहल को काफी नुकसान पहुंचा है. मिडिया रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार देर रात आगरा में आंधी-तूफान ने दस्तक दी. हवा इतनी तेज थी कि  ताजमहल के मुख्य मकबरे की संगमरमर की रेलिंग टूट गई और उसकी जालियां भी बाहर आ गईं है   

 वही मिडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार तेज आंधी की वजह से जनपद में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए हैं. इसके अलावा, कई स्थानों पर पेड़ों के गिरने की भी खबर मिली है. भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ.बसंत स्वर्णकार ने शनिवार को बताया कि आंधी से ताजमहल में संगमरमर की जालियां और लाल पत्थर की जालियां क्षतिग्रस्त हुई हैं. परिसर में कई पेड़ और एक दरवाजा भी उखड़ गया है. इसके अलावा ताजमहल परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाई गई शेड की फॉल्स सीलिंग भी उखड़ गई है. ताजमहल के अतिरिक्त महताब बाग की दीवार और मरियम के मकबरे में कई पेड़ गिरे हैं.

प्रवासी मजदूरों की मजबूरी का दर्द, सियासतदां बनी बेदर्द

कोरोना महामारी काल में लाॅकडाउन का चैथा चरण लागू है। प्रवासी मजदूरों की घर पहुंचने की बेवसी के बीच बिहार के दरभंगा की ज्योति ने अपने साहस और ज़ज्बे से हर किसी को प्रभावित किया। साइकिल गर्ल ज्योति आत्मनिर्भर भारत की ब्रांड बन गई हैं, जिसकी उपलब्धि पर गर्व किया जा रहा है।

अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसी नौबत कैसे आ गयी कि प्रवासी मजदूरों ने अपने घरों को जाने के लिए नेशनल हाईवे से लेकर रेल की पटरियों पर पैदल चलने का खतरा उठा लिया। सिर पर सामानों से भरा बैग,गोद में बच्चा लिए हजारों लोग निकल पड़े। बैलगाड़ी में जुते किशोर की तस्वीर हो या अपने बीमार मां को कंधे पर लेकर चलते बेटे की तस्वीरें देख लोग बेचैन हो उठे। हजारों की भीड़ में पैसे और राशन के अभाव में 13 साल की बेटी अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठा कर 1200 किमी की यात्रा करने को मजबूर हो गयी। इन्हें क्यो नही उन प्रदेशों में रोकने का प्रयास किया गया। आज प्रवासी मजदूरों के कर्मभूमि और जन्मभूमि की सरकारें तनातनी की स्थिति में है। प्रवासी मजदूरों के देश में कहीं भी जाने, कोई भी व्यवसाय करने के मौलिक अधिकारों पर भी संशय नजर आ रहा है।प

दिल्ली AIIMS में एक और मेस कर्मचारी कोरोना पाॅजिटिव

नई दिल्लीः दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में RPC कैंटीन के कर्मचारी की Covid-19 से मौत के कुछ दिन बाद, एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि एक और मेस वर्कर कोरोना वायरस से सक्रंमित पाया गया है।

संक्रमित मेस कर्मचारी उन 15 लोगों में से है जो मृतक मेस वर्कर के संपर्क में था। कैंटीन को पहले ही बंद कर दिया गया था और 15 मेस कर्मचारियों को उनके साथी की मौत के बाद से ही क्वारंटाईन कर दिया गया था। डॉक्टरों ने सूचित किया कि उनमें से पांच के नमूने एकत्र किए गए थे जिनकी रिपोर्ट सोमवार रात को आई थी। उनमें से चार लोग नेगेटिव पाये गये, जबकि एक वर्कर पाॅजिटिव निकला। अभी दस मेस वर्करों की रिपोर्ट का इंतजार है।
मेस कर्मचारी की मौत के बाद, उन्होंने मांग की थी कि हॉस्टल सुपरीटेंडेंट और वरिष्ठ वार्डन दोनों को इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे दें। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि छात्रावास प्रशासन ने एक महीने से ज्यादा समय से एहतियाती उपाय बरतने की उनकी मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया जिससे उसकी मौत हो गई।
मार्च में, आरडीए ने छात्रावास प्रशासन को छात्रावास में रखे जाने वाले एसोसिएशन ने थर्मल स्कैनर, सैनिटाइजर, मास्क आदि जैसे सुरक्षा उपाय तथा नियमित जांच की मांग की थी ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि मेस के कर्मचारी सुरक्षित रूप से काम कर सकें।
पिछले सप्ताह एम्स निदेशक को पत्र लिखकर आरडीए ने कहा, ‘‘आरपीसी कैंटीन के एक मेस कर्मचारी की कोविड-19 से मौत हो गई क्योंकि एक महीने से भी ज्यादा समय पहले एहतियाती उपाय बरतने की आरडीए की मांग की तरफ छात्रावास ने ध्यान नहीं दिया।’’
आगे कहा गया, ‘‘ये मांगें नहीं मानी गईं जिसका ऐसा घातक परिणाम हुआ है.’’इसने एम्स प्रशासन ने मेस कर्मचारी के परिजन को मुआवजा देने की मांग की जो महामारी के दौरान उनकी सेवा में जुटा हुआ था।

Domestic air services resumed in the country with vague new guidelines

All passenger airlines were suspended from last week of March after a lockdown enforced to control COVID-19 in the country. After two months,  now the government has resumed domestic flights. These services have been restored with some certain conditions, which is completely different from the earlier guidelines.

On Monday, after the resumption of domestic flight service in the country, the aircraft, which left more than 150 passengers from Delhi, reached Patna Airport. It is the first passenger aircraft to arrive at Patna airport in the early morning after nearly two months. An official said that 16 passenger aircraft will leave from Patna and 17 passenger aircraft arrive here from other parts of the country. He informed that the thermal examination of all the passengers is being done by the medical team deployed at the airport. He said that the district administration has clarified that passengers will not be quarantined outside the airport.

Some states have made it mandatory for air travelers to be quarantined, while other states have issued instructions to stay quarantined at home. However, Civil Aviation Minister Hardeep Puri questioned the need to keep the passenger in quarantine despite the green status appearing in the Arogya Setu app in his phone. Green status shows that the passenger is safe from COVID-19.

The central government announced last week that domestic airlines would resume from May 25 under certain rules and guidelines. These included rules such as limiting ticket prices, wearing masks by passengers, not giving food inside the aircraft, and providing medical status details to passengers via the Arogya Setu app or self-declaration form.

बलवीर सिंह सीनियर का निधन, भारतीय हाॅकी टीम के स्वर्णिम युग का अंत

 

फील्ड पर जीत का जुनून रखने वाले ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भारतीय हाॅकी के सिरमौर बलवीर सिंह सीनियर का 96 वर्ष की आयु में सोमवार को मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन पर खेल जगत सहित पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल साइट के माध्यम से लेकर दिन भर शोक संवेदना व्यक्त किया जाता रहा।

हाॅकी लीजेंड बलवीर सिंह सीनियर के निधन पर पी एम नरेन्द्र मोदी ने ट्विटर पर शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि बलवीर सिंह सीनियर को उनके यादगार खेल के लिए जाना जाएगा।वे एक आदर्श थे। गृहमंत्री अमित शाह, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित कई राजनीतिज्ञों ने शोक व्यक्त करते हुए, उनके साथ बिताए लम्हों को याद किया।

Chhattisgarh CM writes to Union Railways Minister, urges him to operate trains with protective measures

Raipur, May 24, 2020Chhattisgarh Chief Minister Bhupesh Baghel today wrote a letter to Union Railways Minister Piyush Goyal and urged him to take effective measures and precautions before resuming more trains.

In his letter, the chief minister suggested that trains should run point to point like shramik special trains for labourers. He further said that trains should have maximum of two stoppages and from the perspective of social distancing, the number of passengers should be kept below the prescribed capacity. He also requested the Railway Minister to give concession in fares of all classes to passengers on humanitarian grounds in this hour of crisis.  

The Chief Minister said that the Railways ministry has decided to run 200 trains across the country from June 01 and without effective measures and guidelines, the possibility of spreading the infection by operating the train has increased.  

He said in view of the steady increase in the number of coronavirus cases across the country, there is a need to operate trains with considerable caution and protective measures to protect the citizens and to create normalcy in the country.

The Chhattisgarh government has taken effective measures to prevent the spread of the virus and has succeeded so far. 

Mr. Baghel has requested the Railway Minister that the trains should be run point to point, state to state, in accordance with the system laid down in relation to the labor special train operation. Only 02 stoppages of the train should be kept, so that contact with passengers can be controlled. From the point of view of social distancing, the number of passengers in the train should be kept below the prescribed capacity. This will help in proper screening of the travelling persons. 

Chain pulling facility should be disabled to prevent incidents such as chain pulling during the journey. Chain pulling should not be allowed under any circumstances and strict action should be taken. The Chief Minister said that as per the guidelines issued by the Government of India, Ministry of Health and Home Ministry from time to time, after reaching the destination, screening of citizens travelling in trains, managing quarantine, traffic etc. is a challenging task for the states.

Therefore, after leaving the train, be sure to provide detailed details of the list of citizens travelling, mobile number, Aadhaar number, address etc. to the states, so that necessary arrangements can be made by the state governments.

All citizens arriving by train should be made compulsory to stay in quarantine for 14 days. In view of the circumstances arising as a result of the lockdown, concession should also be provided to passengers by reducing the fare of all classes on humanitarian grounds.

Mr Baghel has expressed hope in the letter that with the implementation of the above suggestions and other necessary better arrangements, train operations will be taken up from 01 June 2020.

Chhattisgarh sets an example for the entire country on how to directly support poor and farmers in this time of crisis: Rahul Gandhi

Raipur, 22 May 2020 Chhattisgarh Government’s ambitious scheme- Rajiv Gandhi Kisaan Nyay Yojana was inaugurated today via video conferencing today on martyrdom day of Ex-Prime Minister Bharat Ratna late Mr. Rajiv Gandhi, in esteemed presence of Mrs. Sonia Gandhi and Mr. Rahul Gandhi. At his residence office today, Chief Minister Mr. Bhupesh Baghel with his Cabinet Ministers transferred Rs 1500 crore to the bank accounts of farmers in Chhattisgarh as the first installment of Rs 5750 crore provisioned under this scheme. This inaugural programme was attended by Senior Leader Mr. Motilal Vora, MP Mr. PL Punia, Mr. Randeep Singh Surjewala along with MPs, MLAs and beneficiary farmers via video conferencing.

In his address to the inaugural programme, Member of Lok Sabha Mr. Rahul Gandhi said that in view the crisis due to corona pandemic, I had requested Prime Minister to provide financial aid to poor people instead of loans, as they presently need cash more that credit. Chhattisgarh Government has found a commendable solution to the situation. Chhattisgarh is the first state of the country to transfer financial aid directly into the accounts of farmers. Chhattisgarh Government has set the example for entire country on how to help people in the time of crisis. Whether it is corona or any other crisis, we would not leave the side of poor people. He said that to help poor people, we will have to stand by them. We all know that the economic condition of the state is not that good, despite that Chhattisgarh Government has decided to bring relief to farmers. This is a big step. We have taken the decision to help farmers and poor people after proper considerations. This is not a decision of one person rather it is the voice of Chhattisgarh. People of Chhattisgarh have expressed their needs and guided us towards this decision. I congratulate Chief Minister Mr. Bhupesh Baghel and his Cabinet Ministers and also the people of Chhattisgarh for this initiative.

 

On the occasion, National President Mrs. Sonia Gandhi said that as per the vision of late Shri Rajiv Gandhi, Chhattisgarh Government has taken a great step of supporting poor, tribal people and farmers. Through Rajiv Gandhi Kisaan Nyay Yojana, financial aid is being provided to the farmers directly into their bank accounts. The decision to include rural landless labourers in the second phase of the scheme is commendable. Rajiv Gandhi Kisaan Nyay Yojana is an exemplary scheme to support poor farmers. This scheme will bring about prosperity and positive changes in lives of tribal people, villagers and poor people. Implementation of such schemes at ground-level to benefit each and every person will be the true tribute to late Shri Rajiv Gandhi. She said that Rajiv ji believed that agriculture is the foundation of development. Supporting farmers and poor people is important for development of India. She congratulated Chief Minister Mr. Bhupesh Baghel’s government and people of the state especially poor, farmers and labourers on inauguration of the scheme.
Chief Minister Mr. Bhupesh Baghel said in his address to the programme that Rajiv Gandhi Nyay Yojana aims to support farmers and economically weaker section of society, provide them opportunities to live a dignified life and to alleviate poverty. Inauguration of Rajiv Gandhi Kisaan Nyay Yojana is commencing a new era of prosperity for farmers of the state. He said that 90% of the beneficiaries of this scheme includes marginalized farmers, scheduled caste, scheduled tribe, OBC and poor people. First installment of Rs 1500 crore under this scheme has been transferred directly into the accounts of farmers. Under this scheme, Rs 5750 crore will be provided to 19 lakh farmers of the state. Under this scheme, exchange grant of Rs 13,000 per acre will be provided for sugarcane farming and Rs 10 thousand per acre for paddy farming. Chief Minister Mr. Bhupesh Baghel further said that we have directly transferred nearly Rs 40 thousand 700 crore into the accounts of farmers in form of payment against paddy procurement, loan waiver, crop insurance claim, irrigation tax waver and bonus.
Mr. Baghel said that this day is a historic day for farmers of the state. Today we are remembering the contribution of Ex-Prime Minister late Rajiv Gandhi Ji, who envisioned the Modern India of 21st century. Shri Rajiv Gandhi believed that building a poverty-free and self-reliant India is not possible without improving the economic condition of farmers. Rajiv Gandhi Kisaan Nayay Yojana is the first step towards realizing the vision of Shri Rajiv Gandhi. Under the guidance of Sonia ji and Rahul ji, Chhattisgarh is one of the first states of the country that are well-determined to follow Swaminathan Committee’s report.
Mr. Baghel said that inauguration of this scheme on death anniversary of late Shri Rajiv Gandhi is our humble tribute to him. In upcoming years as well, farmers will be provided incentives under Rajiv Gandhi Kisaan Nyay Yojana.  On the occasion, Chief Minister interacted with public representatives, beneficiary farmers, women of self-help groups and minor forest produce collectors from various districts.
 On the occasion, Vidhan Sabha Speaker Dr Charandas Mahant, Agriculture Minister Mr. Ravindra Choubey, Home Minister Mr. Tamradhwaj Sahu, Health Minister Mr. TS Singhdeo, Forest Minister Mr. Mohammad Akbar, Cooperatives Minister Mr. Premsai Tekam, Food Minister Mr. Amarjeet Singh Bhagat, Higher Education Minister Mr. Umesh Patel, Women and Child Development Minister Mrs. Anila Bhendiya, Labour Minister Dr Shivkumar Daharia, Revenue Minister Mr. Jai Singh Agrawal, Industry Minister Mr. Kawasi Lakhma, PHE Minister Guru Rudrakumar and senior officials were present.

Nepal includes Indian territory in its map, China hand suspected

The border dispute between Nepal and India has been intensified over the past few days. On Monday, Nepal released a new map that showed Kalapani, Lipulekh and Limpiyadhura of India as part of the Himalayan nation.

While foreign affairs experts believe that China is behind the controversy, diplomatic experts say that by issuing the controversial map Nepal has gone a step back on its commitment to a long-standing agreement with India under the influence of China. 

They said, “We could not understand the logic behind Communist Party of Nepal’s pro-China policy at this juncture. We thought there was a government in Nepal which believed in Gandhian ideology. Whereas the Communist Party government in Nepal continued to create an impression among the people that China was capable of fulfilling their needs.”

On May 8, India inaugurated the road from Lipulek in Uttarakhand to Kailash Mansarovar. Nepal had raised a strong objection to the move. Conceding that India could use the road built in Lipulek, Nepal's Prime Minister K P Oli said Nepal won’t give up its claim to even one inch of the land of its ancestors.

Nepal's Foreign Ministry lodged a protest through a statement just a day after the road link opened in Lipulek. 

India responded by saying that the road construction had taken place in the Indian territory itself, but given the close relationship with Nepal, it supports resolving this issue through diplomatic means. 

India also said that both countries should successfully deal with the coronavirus and after that the border dispute will be negotiated. However, Nepal rejected this request as well.

Significantly, Nepal makes its claim on Kalapani, Lipulek and Limpiyadhura on the basis of the Sugauli Treaty. The Treaty of Sugauli was signed between Nepal and British India in 1816 under which the Mahakali river was considered as the boundary line between the two nations. Experts believe that the Indo-Nepal border dispute is only about the origin of the Mahakali river. Nepal says that the river originates from Limpiyadhura near Lipulek and flows towards the south-west while India considers Kalpani as the origin of the river and flows to the south and partly to the east.

निर्मला सीतारमण : आर्थिक पैकेज में आत्मनिर्भर भारत के लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय, MSME को बिना गारंटी के तीन लाख का लोन

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी है, जिसमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का ब्लू प्रिंट देश के सामने पेश कर रही हैं। यानी यह बता रही हैं कि इस राहत पैकेज में किस वर्ग के लिए क्या है, किसे कितनी बड़ी राहत मिलेगी। वित्त मंत्री ने एमएसएमई यानी सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योग के लिए 6 बड़े कदम का ऐलान आज किया है। MSME क्षेत्र में बिना गारंटी के लोन दिया जाएगा। 2 लाख MSME को फायदा मिलेगा। MSME का दायरा बढ़ाया गया है और 1 करोड़ के निवेश और 5 करोड़ के टर्नओवर तक माइक्रो यूनिट ही रहेगा और MSME का दर्जा और फायदा मिलता रहेगा। ईपीएफ के लिए दी गई सहायता अगले तीन मई के लिए बढ़ाई जा रही है। 15 हजार से कम वेतन वालों का EPF अगस्त तक सरकार देगी। मौजूदा TDS व TCS दरों में 25 प्रतिशत कटौती की जा रही है। यह कटौती कल यानी गुरुवार से लागू होगी, इससे 50 हजार करोड़ की धनराशि लोगों को उपलब्ध होगी। यह कटौती 31 मार्च 2021 तक लागू रहेगी। MSMEs के लिए बड़े ऐलान लघु और मध्यम दर्जे के उद्योगों के साथ कुटीर और गृह उद्योगों को तीन लाख करोड़ का कर्ज, 4 साल में कर्ज लौटाना होगा, 45 लाख उद्योगों को फायदा होगा, कर्ज में डूबे लघु उद्योगों को 20 हज़ार करोड़ का कर्ज दिया जायेगा, किसी तरह के गारंटी की ज़रूरत नहीं होगी। निवेश सीमा को बढ़ाया जा रहा है, अब 1 करोड़ रुपये के निवेश वाली इकाई को भी सूक्ष्म माना जाएगा, इसी तरह 10 करोड़ के निवेश और 50 करोड़ के टर्न ओवर वाले उत्पादन आधारित उद्योग को लघु उद्योग माना जाएगा। 200 करोड़ तक का टेंडर अब ग्लोबल टेंडर नहीं होगा और आत्मनिर्भर इंडिया में मेक इन इंडिया की बड़ी भूमिका होगी। 31 अक्टूबर 2020 तक कोई गारंटी फीस नहीं। इससे 45 लाख यूनिट्स को फायदा होगा। फंड्स ऑफ फंड का ऐलान। अच्छा काम करने वाले एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए 50 हजार करोड़ रुपए का फंड रखा गया है। एमएसएमई का बिजनेस करना आसान होगा और आत्मनिर्भर भारत अब मेक इन इंडिया के तहत आगे बढ़ेगा। गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं NBFCs/HFC/MFIs के लिए धन की कमी दूर करने के लिए 30 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा, NBFCs के लिए 45 हज़ार करोड़ की आंशिक ऋण गारंटी योजना शुरू की हैं, इसमें शुरुआती 20 प्रतिशत घाटा भारत सरकार वहन करेगी। ई-मार्केट लिंक उपलब्ध कराए जाएंगे, लघु और सूक्ष्म उद्योगों के लिए, अगले 45 दिन में MSME के सरकारी उपक्रमों और सरकार के सभी बकाया बिल कलीयर किए जाएंगे। DISCOM के सामने आ रही पैसे की तंगी को कम करने के लिए 90 हज़ार करोड़ की आर्थिक सहायता देंगें, PFC और REC के माध्यम से दिया जाएगा, सरकारी बिजली कंपनियों को कहा जा रहा है कि उन डिस्कॉम कम्पनियों को लाभ दे जो लाभ को आम उपभोक्ता तक पहुंचा रही हैं। रेलवे और सड़क परिवहन मंत्रालय ठेकेदारों को काम पूरा करने के लिए 6 महीने तक का एक्सटेंशन दिया जाएगा, सरकारी कम्पनियां पूरे हो चुके कार्य के अनुपात में बैंक गारंटियों को जारी करेंगीं, ताकि ठेकेदार के हाथ में धन मिले। EFP पर बड़े ऐलान सरकार ने निर्णय लिया है कि वो बिजनेस और वर्कर्स के लिए तीन महीने और EPF सपोर्ट जारी रखेगी। यह मदद 15 हजार से कम सैलरी वालों के लिए है। यानी 15 हजार रुपये से कम वेतन वालों का ईपीएफ अगस्त तक केंद्र देगा। नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का योगदान सरकार कर रही है। इसमें करीब 2500 करोड़ रुपये का खर्च होगा। कंपनियों और कर्मचारियों को EPF में 10-10 प्रतिशत देना होगा। EPF में कटौती से एम्पलॉयर को ₹6800 करोड़ का फायदा होगा। 72 लाख 22 हजार कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा। वित्त मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस की बड़ी बातें वित्त मंत्री ने बताया कि पीएम मोदी ने सभी सेक्टर के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया है, जिसका उद्देश्य आत्म निर्भर भारत है। उन्होंने बताया कि किस तरह सरकारी योजनाओं (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, माइक्रो इंश्योरेंस स्कीम, पीएम आवास योजना, पीएम उज्ज्वला योजना) के जरिए इस मुश्किल समय में गरीबों और किसानों तक राहत पहुंचाई गई है। इसमें उज्ज्वला योजना भी शामिल है। इस दौरान वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी मीडियो को सरकार के इन कदमों की जानकारी दी। सभी पक्षों से मिले सुझावों के बाद आर्थिक पैकेज तैयार किया गया है। पीएम मोदी ने समाज के कई वर्गों और विभिन्न मंत्रालयों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद एक व्यापक दृष्टिकोण तैयार किया है। राहत पैकेज में खुद पीएम मोदी ने दिलचस्पी ली। देसी ब्रांड को वैश्विक ब्रांड बनाने पर जोर दिया है। समाज के कई वर्गों से बातचीत कर पैकेज तैयार किया गया है। पैकेज के जरिए ग्रोथ को बढ़ाना है। भारत को आत्मनिर्भर बनाना है, इसलिए इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान कहा जा रहा है। COVID-19 के चलते मोदी सरकार ने जो पहला कदम उठाया वो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के रूप में लेकर आए। देश के गरीब को भूखा न रहना पड़े इसलिए 1,70,000 करोड़ का ये पैकेज माननीय वित्त मंत्री जी ने आपके सामने रखा था।

With mass exodus, Bangalore feels the heat of labour crisis

The ongoing lockdown enforced in the wake of coronavirus outbreak caused labour crisis in the entire country. Karnataka is not immune from it. 

With all the economic activities coming to an abrupt halt the migrant workers are in the real soup. The migrant labourers, who have been the backbone of the state’s development, are a worried lot today. 

Left with no money to sustain themselves nor any work in an alien land, they are desperate to return home. But given the situation arising from the coronavirus threat the government is unlikely to resume transport service anytime soon. 

The patience of the migrant laborers everywhere is wearing thin with each passing day. With no work nor pay their condition has become pathetic. Under the circumstances, they are looking to return to their homes as the only solution.

They have spent all the accumulated wages they eared working in cities like Bangalore, Kalburgi, Davangere, Raichur, Shivamoga, Hubli, etc. on purchasing essentials.

From business to construction all work in the state as also in the country has come to a standstill. Factories are closed. After extending a month’s wages, businessmen and moneylenders too have thrown their hands up.


Bangalore, the state capital, too is feeling the heat of crisis with more than fifty thousand migrant workers from various places in the state descending on the city. From here, they are looking to proceed to their hometowns in neighbouring state of Karnataka as well as northern parts of India.

The state government has appointed Uday Singh as its representative to prevent exodus of the workers. Singh met with some success in his efforts. People listened to him. He assured the workers all the basic amenities and shelter. 

Meanwhile, the lockdown has completed 49 days today. While only five days are left for the completion of third phase of lockdown, the government is planning to extend it to fourth phase. If it happens the woes of the homeless workers are bound to multiply.

Rape complainant turns out Corona positive, test of accused conducted in Tihar

A few days ago, an accused in the rape case was brought to Tihar Jail. On May 9, the Tihar administration came to know that the girl who was raped by the accused is coronavirus positive.

When the Tihar Jail Administration got the information, a medical test of the accused along with two other prisoners lodged with him was carried out. The test report is still awaited. It is expected to today.

The accused was lodged in jail number 2. Bihar's underworld don Chhota Rajan and Shahabuddin are also lodged in the same jail. Since they are in a separate cell of the jail, they have not come in contact with any other inmate.

Tihar jail administration says social distancing norms are being followed in the jail. Every new prisoner is screened.

As a precaution, the jail administration has kept the trio away from other inmates and the jail staff.