विशेष

नए साल में अब 130 रुपये में मिलेंगे 200 चैनल फ्री चैनल ट्राई ने केबल नेटवर्क ग्राहकों को दी बड़ी सौगात

नई दिल्‍ली:-नए साल पर टेलीकॉम रेगुलेटर (ट्राई) ने केबल नेटवर्क ग्राहकों को बड़ी सौगात दी है। ट्राई ने एक नई टैरिफ सूची जारी की है, जिसमें अब ग्राहक को 130 रुपए में 200 चैनल फ्री मिलेंगे। जबकि पहले 130 रुपये में 100 चैनल ही मुफ्त मिलते थे। यह व्‍यवस्‍था एक मार्च 2020 से लागू होगी। इसके साथ ही ट्राई ने एक और बदलाव किया है कि 12 रुपए से ज्यादा कीमत वाले चैनल बुके का हिस्सा नहीं होंगे। कंपनियों को टैरिफ की जानकारी 15 जनवरी को वेबसाइट पर डालनी होगी। बता दें कि बीते साल ट्राई ने नई ब्राडकास्ट टैरिफ व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत ग्राहकों को सिर्फ उन्हीं चैनलों के लिए भुगतान करना पड़ता है, जिन्हें वे देखना चाहते हैं। पहले ब्रॉडकास्टर्स पैकेज में चैनल देते थे, यानी मनपसंद चैनल देखने के लिए कुछ ऐसे चैनल्स के लिए भी पैसे देने पड़ते थे, जो आप कभी नहीं देखते हैं। जब ट्राई ने नई ब्राडकास्ट टैरिफ व्यवस्था लागू की थी, उसमें टीवी ग्राहकों को 100 फ्री टू एयर चैनल दिए गए थे। इनमें 26 चैनल दूरदर्शन के हैं। इसके लिए उन्हें टैक्स हटाकर 130 रुपये का भुगतान करना था। इसके अतिरिक्त अपने मनपसंद चैनल के देखने के लिए तय रकम का पेमेंट करना पड़ता है।

अनजानी मुलाक़ातें और नये साल का आग़ाज़-वर्षा

अनजानी मुलाक़ातें और नये साल का आग़ाज़ ..................................

वो अनजान था वो एक मुसाफ़िर था वो जो भी था पर इस सफर में वो मेरा एक लौटा जानने वाला था।

2019 खत्म होने की कगार पर है और हम 2020 के स्वागत करने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे है मानो घर मे कोई नई दुल्हन का गृहप्रवेश होना हो।सब बहुत खुश है जैसे शादी के बाद नया जोड़ा हनीमून की प्लानिंग करता है वैसे ही लोग नये साल के स्वागत के लिये बाहर जाने का प्लान बना रहे थे ।मेरा भी बाहर जाने का प्लान था पर नए साल के स्वागत के लिए नहीं दरसल मेरी बड़ी दीदी के बेटे के जन्मदिन रहता है 31 को और मेरे भैया का 1 जनवरी को तो जन्मदिन की खुशी और नए साल का स्वागत भी हम साथ ही मना लेते है इसी लिए मैं हज़रत निज़ामुद्दीन राजधानी B4 सीट नम्बर 20 में बैठ कर बैंगलौर जा रही हूं पीली कुर्ती और सफेद सलवाल बाल खुले है मेरे और कानों में ईयर फ़ोन लगा गाने चला रखे हैं मैंने और हाथों में चेतन भगत की बुक है "द गर्ल इन रूम 105" एक अनलव स्टोरी पढ़ते हुए सफ़र का आगाज किया मैंने।

ट्रैन भी अपनी रफ़्तार से चल पड़ी पूरे डिब्बो में आर्मी के जवानों की ज्यादा तादाद थी मेरे अलग बगल ज़्यादा लड़के ही थे इसलिए मुझे शांत बैठना पैड रहा था वैसे मैं बिल्कुल भी शांत नहीं बैठती ये मेरी ख़ासियत है पर कोई लड़की होती बगल में तो शायद मैं उसकी पूरी हिस्ट्री जान गई होती और वो मेरी।मेरी ट्रैन पहले ही 7 घंटे देरी से चल रही थी क्यों कि ये दिल्ली से आती है और वहां काफी ठंड थी और कोहरे की वज़ह से वो वही से देरी सी निकली थी।मेरा फ़ोन बजा बड़ी बहन का फ़ोन था वो मुझे कहने लगी तुम फ्लाइट से क्यों नहीं आती हो हर बार तुम्हारी ट्रैन लेट ही रहती है ठीक है ये बताओ कहाँ तक पहुँची हो खाने के लिए कुछ लाई हो या ट्रैन से लेने वाली हो टाइम पे कहा के सो जाना सुबह फ़ोन करना मैंने उसे उसके सब सवालों के जवाब देते हुए उसे कहाँ मैं सो जाऊंगी और सुबह उठ के फ़ोन करूंगी।राजधानी ट्रैन सुनते ही लग्ज़री गाड़ी की कल्पना थी मेरे दिमाग में ये मेरी पहली यात्रा थी इस ट्रैन से पर सच कहूं ये मेरी सबसे बेकार यात्रा थी लग्जरी जैसा कुछ भी नहीं था इससे अच्छी तो बाकी के ट्रेनों में सुविधा होती है खैर अब यही ट्रेन से मुझे बैंगलौर जाना था।वेंडर ने आवाज लगाई मैडम वेज या नॉनवेज मैंने बोली वेज फिर वो चला गया इस ट्रेन की बस एक ही बात अच्छी थी कि इसमें खाना नाश्ता सब मिलता था पर टेस्ट की बात मैं नहीं करना चाहती।सामने बैठे एक भैया मुझे काफ़ी देर से देख रहे थे आख़िर कर मैंने बहुत देर बाद अपनी चुप्पी तोड़ी और बात एक पानी की बोतल मांगते हुए शुरू की सबसे पहला सवाल की आप कहाँ जा रहे हो जो हर कोइ यही पूछकर अपनी बातें आगे बढ़ाता है ट्रैन में हल्की फुल्की पहचान हुई फिर उनके फ़ोन की घंटी बजी और वो बात करने लग गए हमारी बातों का सफर वहीं थम गया मैं भी अपनी बुक को लेकर वापस अध्याय 10 पढ़ना शुरू कर दी इससे पहले मैंने कभी चेतन भगत की कोई बुक नहीं पढ़ी थी ये भी इस ट्रेन के सफर की तरह पहली बार ही था जो मैं चेतन भगत की बुक पढ़ रही थी ये इतनी अच्छी तरह लिखी गई थी कि उसे पढ़ते-पढ़ते मेरा सफर बहुत अच्छा गुजर रहा था और समय का पता ही नहीं चल रहा था देखते ही देखते 11 बज चुके थे और मेरे ऊपर के भैया ने आवाज लगाई लाइट जल्दी बंद कर दीजिएगा मैंने 10 मिनट कहकर फिर पढ़ना शुरू कर दी थोड़ी देर बाद लाइट बंद कर मैं भी सो गई।सुबह होते ही चहल पहल से मेरी नींद जागी फिर नाश्ता मैडम बोल मुझे वेंडर ने नाश्ते की प्लेट मेरे हाथों में थमा दी मैं फ्रैश होते ही नाश्ता करते वक्त फिर वही भैया ने मुझे पूछा आप कहाँ जा रही हो मैंने कहाँ दीदी के यहां उनको विस्तार से सब बात बताई फिर वो भी बताना शुरू किए मैं दिल्ली से हूँ रेलवे में लोको पायलेट हूँ दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ नये साल को सेलिब्रेट करने रेल्वे का नाम सुनते ही मुझे लगा अरे ये तो मेरे परिवार के ही सदस्य है

आप सोच रहे होंगे कि परिवार का सदस्य हां क्यों कि मेरा पूरा परिवार की तीन पीढ़ियों ने रेल्वे में अपनी सेवा दी थी और दे रहे है इसलिए जहां रेल्वे की बात होती है लगता है ये घर की बात है हमारे बगल के एक भैया भी बोले मेरे पापा भी रेल्वे में वैल फेयर इंस्पेक्टर है लो भई अब तो और मेरा मन गदगद हो गया धीरे से फिर हमने कहाँ इसलिए आपको इस्पेशल वाली चाय सर्व की जा रही थी वो हंस पड़े फिर हमनें बातों का सिलसिला शुरू किया वो भी नए साल के अपने दोस्तों के पास जा रहे थे उनके भी बहुत से प्लान थे मैंने उन्हें कुर्ग और चिकमंगलूर जाने की सलाह भी दे डाली क्यों कि मैं इन जगहों में जा चुकी थी और मुझे ये जगहें काफी पसंद आई थी। ट्रैन जैसा कि मैं आपको बता चुकी हूं कि लेट चल रही थी हम बैठे बैठे काफ़ी बोर हो चुके थे सब के फ़ोन में जो बजी कॉल आ रहे थे सब के यही प्रश्न थे कि कब तक पहुँच रहे हो सब का एक ही जवाब 12 तक पहुच जाएंगे और फिर फोन कट।सफ़र भी कितना अजीब होता है ना हम ट्रेन में बैठने से पहले तक किसी को नहीं जानते है पर जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढ़ती है वैसे वैसे हम भी अपने आसपास के लोगों को जानना शुरू कर देते है जैसे कोई नई किताब को पढ़ना शुरू किया हो और सफ़र खत्म होते ही पूरी किताब पढ़ ली हो।उनसे बिछड़ते वक्त बुरा तो नहीं लगता पर एक अपना पन जरुर होता है उन्हें अलविदा करते वक्त फिर कभी मुलाक़ात न होगी फिर भी एक याद जरूर जुड़ जाती है

जब भी राजधानी के इस सफ़र का जिक्र होगा ये मेरी आँखों में इस सफ़र का जिक्र घूम जाएगा और हल्की मुस्कान होगी।ट्रेन रुकती है भैया ने आवाज लगाई बैंगलौर आ गया है मैं भी हां कहकर अपना सामान लेकर बाहर निकल पड़ी और कैब में सामान रख दीदी के घर की ओर निकल पढ़ी।

||वर्षा||

लग रहा बेचैनी का माहौल क्यों रो रहा है समाज ईश्वर उस बच्चे को दे परम् शांति :लेखक- ज्ञानेन्द्र पांडेय, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर

स्कूली बच्चों की असामयिक मौत से पूरे समाज का दिल रो रहा है, पालकों पर क्या बीतती होगी यह सोचकर ही बेचैनी होने लगती है। ईश्वर बच्चों की परम शांति प्रदान करें और परीजनों को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करे ऐसी प्रार्थना करता हूं।

स्कूली बच्चों के लिए पिकनिक तथा खेलकूद संबंधी अन्य गतिविधियां सस्ते और ढर्रे पर चलने वाली दुकान बन कर रह गई हैं। ऐसे किसी भी कार्य के लिए विशेषज्ञों की राय लेना जरुरी न होकर चंद रूपयों के बंदरबांट से सब खेल हो जाता है। जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़कर कभी पालकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र का खेल खेलते हैं और कभी कभी मुआवजा देकर। शैक्षणिक संस्थाओं को इस पर विचार करना चाहिए क्योंकि मुआवजा हर मर्ज की दवा नहीं होती और न ही इन पर रोक लगाना किसी समस्या का हल है। जरूरत सिर्फ थोड़ी सी इमानदार कोशिश करने की है।

शैक्षणिक संस्थाओं को विशेषज्ञों की राय तथा सेवाएं लेनी चाहिए और उनकी ही अगुआई में सभी खेलकूद, पिकनिक तथा एडवेंचर स्पोर्टस आयोजित किया जाना चाहिए।

आसानी से पैसा कमाने के चक्कर में लोग इसे व्यवसाय बनाकर काम कर रहे हैं, बिना किसी मापदण्ड और सुरक्षा मानकों के धड़ल्ले से यह धंधा चल रहा है। सरकार को भी तभी होश आता है जब कोई दुर्घटना होती है। कागजों पर चल रहे खेल संघ एवं विभाग का अस्तित्व महज अखबार में फोटो छपवाने के लिए रह गया है,ऐसा लगता है।

रेडी टू इट के पैकेट में निकल रहे कीड़े,,पोषण के नाम पर परोसा जा रहा जहर,,

नीलकमल सिंह ठाकुर मुंगेली- कुपोषण दूर करने के नाम पर सरकार किस तरह बच्चों और महिलाओं को जहर परोस रही है इसका खुलासा मुंगेली क्षेत्र के ग्राम बांकी में हुआ। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषण- सुपोषण कार्यक्रम के तहत खाद्य विभाग के साथ रेडी टू ईट मिल के पैकेट बांटे जा रहे हैं। मुंगेली के बाक़ी गांव में वाले हरिओम सिंह के घर भी इसी तरह के कुछ पैकेट दिए गए जिसमें निर्माण तिथि अक्टूबर और अगस्त 2019 अंकित है। सील बंद पैकेट को जब उन्होंने देखा तो उनके होश उड़ गए क्योंकि रेडी टू ईट मिल में बेहिसाब कीड़े मौजूद थे। उन्होंने इसे खोल कर देखा तो पाया कि रेडी टू ईट मिल के नाम पर जो पोषक आहार उन्हें दिया गया है उसमें कीड़े घूम रहे हैं । जाहिर है महिला एवं बाल विकास विभाग और खाद्य विभाग लोगों की सेहत से खुला खिलवाड़ कर रहा है। उन्हें दोयम दर्जे का रेडी टू ईट मिल प्रदान कर यह तसल्ली की जा रही है कि प्रदेश से कुपोषण दूर होगा। उल्टे इन्हें खाकर लोग बीमार पड़ेंगे। हरिओम सिंह तो जागरूक थे जिन्होंने इन्हें इस्तेमाल करने से पहले खोल कर देख लिया लेकिन कई ग्रामीण ऐसे भोले भाले और मासूम है जिन्हें सरकारी योजनाओं पर पूरा भरोसा होता है इसलिए पता नहीं ऐसे दूषित पोषाहार कितने ग्रामीणों ने ग्रहण भी कर लिया होगा। सरकारी योजनाओं को इसी तरह अधिकारी पलीता लगाते हैं, जिससे उनका मूल उद्देश्य पूरा नहीं होता। जाहिर है इसके पीछे विभागीय गफलत है । इसलिए शासन को तुरंत संज्ञान लेकर दोषी व्यक्तियों पर कार्यवाही करनी होगी , नहीं तो फिर लोग रेडी टू ईट मिल को खाने तक से इंकार कर देंगे और प्रदेश में कुपोषण हटाने की मुहिम खतरे में पड़ जाएगी। इस गंभीर मसले पर तत्काल कार्यवाही की आवश्यकता है।वही इस मामले की शिकायत सम्बन्धी अधिकारी से की गई तो उस अधिकारी के द्वारा शिकायत करता पर ही आरोप लगाने लगे कि तुम्हारे द्वारा ही पैकेट में कीड़ा डाल कर लाये हो,,,वही अधिकारी की भी इस मालमे में कार्यवाही करने से बचते नजर आ रहे हैं,,जानकारी के मुताबिक जो समूह के द्वारा ये रेडी टू इट का निर्माण कराया जा रहा है वो भाजपा पार्टी से सम्बंधित है जिसके चलते कार्यवाही करने से बचते नजर आ रहे हैं,,, ये पहला मामला नही है कि इस समूह के पोषण आहार में कीड़े नही मीले है इससे पहले भी मिला था और इसकी शिकायत किया भी गया था पर उस समय भाजपा का शासन था तो उस समय भी कार्यवाही नही हुए,,पर आज कांग्रेस की सरकार बन जाने के बाद भी उस समूह के खिलाफ कोई भी कार्यवाही होगी कि नही ये संसय बना हुआ है,,,

विशेष : मुंगेली के सीताफल की प्रसिद्धि छत्तीसगढ़ में ही नही अपितु दूसरे राज्य के लोग भी हैं इसके स्वाद के दीवाने,,

नीलकमल सिंह ठाकुर

मुंगेली- सीताफल का नाम आते ही मुह में पानी आ जाता है और कही मुंगेली का सीताफल हो तो बात ही कुछ ओर…. मुंगेली क्षेत्र का सीताफल पुरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ के सीताफल की सुगंध , सइज और स्वाद लोगो का मन मोह लेती है ,, क्षेत्र के सीताफल साइज में बड़े होने के कारण लोगो की पहली पसंद है ,, इसकी बाज़ार में आवक् दशहरा दिवाली के समय देखने को मिलती है,मुंगेली क्षेत्र के लोगो का आय का यह एक अच्छा जरिया है जिससे किसान त्यौहार के समय लाभान्वित होते है ।

मुंगेली जिले के किसान अब आधुनिक खेती में जुट गए है. अब किसानो का नगदी फसलो की तरफ झुकाव अधिक हो रहा है ! छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है क्योकि छत्तीसगढ़ की मुख्य फसल धान रही है और अधिकतर इलाके में धान की फसल ही बोई जाती है लेकिन कुछ वर्षो से किसानो का रुझान नगदी फसलो की तरफ बढ़ गया है ! आधुनिक खेती से जहा किसानो को पानी पर ज्यादा निर्भर नहीं होना पड़ता वही इस तकनीक से किसानो की आमदनी में बढ़ोत्तरी हुई है और किसान शासन की योजनाओ का भी लाभ लेते नजर आ रहे है ......

1 - मुंगेली क्षेत्र के किसान लगभग दो सो सालो से सीताफल की बाड़ी लगाते आ रहे है

2 -सीताफल की बाड़ी यहाँ की परंपरा बन गयी है

3 - क्षेत्र की कछारी जमीन सीताफल के लिए वरदान साबित हो रही है

मुंगेली जो की एक कृषि प्रधान जिला है , यहाँ के लोगो की मुख्य आमदनी कृषि से ही है ,ज्यादातर लोग कृषि पर आधारित है जैसा की प्रदेश में धान की अधिक खेती ली जाती है मुंगेली अंचल में भी किसान धान की फसले लेते है लेकिन कृषि प्रधान जिले मुंगेली में अब किसान आधुनिक किस्म की खेती में जुट गए है ! ऐसा ही एक नजारा मुंगेली विकासखंड के ग्राम बरईदहरा में देखने को मिला जहा के किसान नागेश्वर सिंह ने आधुनिक खेती करने की मिसाल पैदा की ! उन्होंने सीताफल की बाड़ी में पेड़ के निचे सोयाबीन , हल्दी , अदरक, आलू लगाकर अच्छी आमदनी अर्जित की वही एक मिसाल दुसरे किसानो के सामने पेश किया !

किसान की सफलता से अधिकारी भी गदगद है उन्होंने किसान नागेश्वर सिंह के कार्य की प्रशंशा करते हुए कहा की दुसरे किसानो को भी धान के फसलो पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और नगदी फसलो की तरफ ध्यान देना चाहिए जैसे सीताफल केला, गन्ना, पपीता अनानस , हल्दी अदरक ,,सब्जी में घोभी आलू, करेला , मिर्ची, प्याज या जिनकी बाजार में जरुरत हो

सीताफल के फायदे

सीताफल स्वास्थवर्धक होता है , इसमें प्रोटीन विटामिन की बहुतयात रहती है , सीताफल पेट को ठण्डकता पहुचाता है / बाज़ार में इसकी मांग और इसका अच्छा रेट किसानो को मिलता है

! अधिकारी ने यह भी बताया की सीताफल की खेती बाड़ी जिले में बरदान साबित हो रही है मुंगेली और आसपास के क्षेत्रो की मिटटी कछारी होने के कारण सीताफल के किये एकदम उपयुक्त हैं, अधिकारी की माने तो सीताफल की खेती में दो महीने में ही एक लाख से भी अधिक की आमदनी हो सकती है क्षेत्र में दस से बारह किसानो को सिताफल की फसल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है जिनकी जमीन कछारी है ,

शासन नगद फसल लगाने वाले किसानो को अनुदान,पौधा,दवा,खाद,हाइब्रिड बीज और लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत स्प्रिकलर सेट और ड्रिप सिस्टम में छूट देती है !

सीजन -

जून जुलाई में सीताफल की बहार आ जाती है और अगस्त सितम्बर में फल लगने लगते है और अक्टूबर नवम्बर में फल बाज़ार में आ जाते है

आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलीभगत से हो रहे भ्रष्टाचार ...

एक तरफ छत्तीसगढ़ शासन महिला बाल विकास विभाग को कुपोषण दूर करने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं चला रही है तो दूसरी तरफ उसके ही देखरेख मैं लगे अधिकारी उसकी बंदरबांट करने में लगे हुए हैं लोगों को अपने कमीशन खोरी से ही मतलब है चाहे वह महिला बाल विकास के परियोजना अधिकारी हो या फिर सुपरवाइजर या फिर सहायिका व कार्यकर्ता क्यों ना हो मस्तूरी में महिला बाल विकास विभाग पहले से ही विवादित एवं बड़े-बड़े घोटाले से चर्चित है लेकिन इसमें सुधार कहीं भी नहीं होता मस्तूरी क्षेत्र के 75 परसेंट आंगनबाड़ी सही समय पर नहीं खुलता और नहीं किसी भी आंगनबाड़ी में पोषण युक्त बच्चों को भोजन मिलता है कई आंगनबाड़ियों में तो बच्चे आंगनवाड़ी केंद्र ही नहीं आते लेकिन उनकी नाम से आए हुए राशि बराबर समय पर आरण हो रही है मस्तूरी क्षेत्र में महिला बाल विकास के जितने भी जवाबदार अधिकारी बनकर आए हैं सभी अपनी मुख्यालय में बैठकर कुर्सी तोड़ने में ही मस्त रहते हैं क्षेत्र में कभी भी दौरा कर आंगनबाड़ियों के चरमर आए हुए व्यवस्था को सुधारने में दिलचस्पी नहीं लेते. मस्तूरी ब्लाक के पचपेड़ी क्षेत्र के ग्राम पंचायत चिल्हाटी में आंगनबाड़ी क्रमांक 5 में कार्यकर्ता भगवती केवट और सहायिका रेखा पांडे देखरेख व संचालित करती है पर आसपास के लोगों ने बताया एवं गांव के कुछ जनप्रतिनिधियों ने उच्च अधिकारियों को लिखित में सूचना दी है कि ग्राम पंचायत चिल्हाटी के आंगनवाड़ी क्रमांक 5 कभी भी समय पर नहीं खुलता और ना ही कोई बच्चे वहां पढ़ने आते हैं शासन के पैसा को हजम करने के लिए एवं शासन को गुमराह करने के लिए वहां के आंगनबाड़ी के रजिस्टर्ड में लिखा पूछा घर बैठकर कंप्लीट करके पैसा आहरण कर लिया जाता है लेकिन वहां कभी भी आंगनबाड़ी जाकर खोल कर नहीं बैठते और ना ही वहां किसी भी प्रकार के बच्चों का पढ़ाई लिखाई होता है वहां की कार्यकर्ता भगवती केवट चिल्हाटी बस स्टैंड में अपनी फलों की दुकान वह फैंसी दुकान चलाती है और सहायिका रेखा पांडे बरोबर रजिस्टर्ड मेंटेन करके रखती है और ग्राम पंचायत चिल्हाटी में उसकी बेटी आवास मित्र का काम करती है और उसकी मां रेखा पांडे स्वयं आवास ठेकेदार बनती फिरती है रोजाना वह आवास बनवाने को लेकर अपने काम धाम में व्यस्तता है करके बिजी रहती है पर आंगनबाड़ी कभी नहीं जाती लेकिन उनकी रजिस्टर में सिग्नेचर बरोबर रहती है. इनके नाम पर कई आवास के हितग्राहियों ने भी लिखित में शिकायत कर चुके हैं कि कई लोगों के घर को अभी भी कंप्लीट नहीं किए हैं ग्राम पंचायत चिल्हाटी के आंगनबाड़ी क्रमांक 5 एक प्राइवेट भवन में संचालित होती है जिसे दिखावे के लिए बस रखे हैं यहां कोई भी प्रकार की आंगनबाड़ी जैसी सुविधा नहीं है और नहीं वह बच्चों की पढ़ाई होती है यह जानकारी स्वयं मकान मालिक ने दिया है मकान मालिक ने यह भी बताया है कि कई महीनों से आंगनबाड़ी के नाम से लिए हुए किराए के मकान का पैसा भी नहीं मिल पाया है. ग्राम पंचायत के रमेश वर्मा .बुद्धदेव वर्मा .हरि शंकर केवट .एवं मंजू वर्मा ने जानकारी दिया कि चिल्हाटी के आंगनबाड़ी क्रमांक 5 में कभी भी कोई प्रकार की उच्च अधिकारी कभी निरीक्षण करने नहीं आए हैं आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता एवं सहायिका और मस्तूरी मुख्यालय के कुछ कर्मचारी अधिकारी की की मिलीभगत के कारण यहां की आंगनबाड़ी की दैनिक स्थिति हुई है इन सभी लोगों की लापरवाही के ही चलते यहां के आंगनबाड़ी में कोई प्रकार की सुधार नहीं हो पाई है और न ही सुचारू रूप से यहां आंगनबाड़ी चल पा रही है l

वर्जन

वहां की सुपरवाइजर उत्तरा साहू का कहना है कि मुझे एक हफ्ता ही हुआ है वहां की प्रभार मिले बहुत जल्द वह निरीक्षण कर आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता एवं सहायिका पर गड़बड़ी पाए जाने पर उचित करवाही करूंगीl

परियोजना अधिकारी उषा श्रीवास्तव का कहना है कि आंगनबाड़ियों के आए दिन निरीक्षण करने के लिए एवं समय-समय पर कई क्षेत्रों के आंगनबाड़ियों की व्यवस्था एवं कमियों को बताने के लिए शासन के द्वारा सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं चिल्हाटी आंगनबाड़ी में मैं खुद जाकर या फिर तत्काल मैं सुपरवाइजर को बोलकर निरीक्षण करवाएगी गलती पाए जाने पर उचित कार्रवाई करेंगे l

छत्तीसगढ़ के गोठानों से निकले गोबर के दीये से दीवाली में रौशन होंगी दिल्ली की गलियां : दीपावली में गाय और गोबर का होता है खास महत्व

रायपुर : छत्तीसगढ़ के गोठानों से निकले गोबर के दीये से दीवाली में रौशन होंगी दिल्ली की गलियां : दीपावली में गाय और गोबर का होता है खास महत्व

 

ईकोफ्रेण्डली होने की वजह से दिल्ली से मिला दो लाख दीये का आर्डर

    

इधर गोबर हैं। थोड़ा देख के चलो। उधर गोबर है थोड़ा बच के चलो। तुम्हारें दिमाग में तो गोबर भरा है। कुछ ऐस शब्दों और वाक्यों के साथ अक्सर कुछ लोग गाय की गोबर का इस तरह तौहीन उड़ाते है जैसे यह बहुत गंदी हो। पर यह गोबर कितना कीमती हो सकता है, कितना उपयोगी हो सकता है, यह बात तो शायद इस प्रदेश के मुख्यमंत्री को और गाँव में रहने वाली महिलाओं को मालूम है। तभी तो, कल तक सिर्फ कण्डे और खाद बनाने के लिए काम आने वाला यह गोबर अब इतना महत्व का हो गया है कि इससे बने उत्पादों का आर्डर देश की राजधानी दिल्ली से मिलने लगा है। यहा के गोठानों से निकलने वाले गोबर से तैयार पूजन सामग्री और उत्पाद की मांग दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। दिल्ली जैसे महानगर में जहां दीपावली त्यौहार के समय चाइनीज दीये,मोमबत्ती व झालर का बोलबाला रहता है ऐसे में पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिये उपयोगी छत्तीसगढ़ के गोबर से बने बायो दीये प्रदूषण की मार झेल रहे दिल्लीवासियों के लिये एक राहत जैसा है। ईकोफ्रेण्डली होने के साथ-साथ लक्ष्मी पूजन,दीवाली में गाय के गोबर का खास महत्व होता है। इन्हीं खास महत्व की वजह से ही गाय के गोबर से बने दीये की मांग दिल्ली और नागपुर से आई है। पहला आर्डर दो लाख दीये का है। जिसे स्वसहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा है।
      यह शासन द्वारा नरवा,गरूवा,घुरवा और बाड़ी विकास योजना की दिशा में उठाये गये कदम का ही परिणाम है कि गोठान के माध्यम से आरंग विकासखंड के ग्राम बनचरौदा की स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गोबर से बनाई गई कलाकृतियां दिन ब दिन प्रसिद्धि प्राप्त कर रही है। लाल, पीला हरा एवं सुनहरे सहित आकर्षक रंगों से सजे दीये, पूजन सामग्री के रूप में ओम,श्री,स्वास्तिक,छोटे आकार की मूर्तिया, हवन कुंड,अगरबत्ती स्टैण्ड, मोबाइल स्टैण्ड, चाबी छल्ला सहित अनेक उत्पाद देखने वालों को लुभा रही है। कीमत और अहमियत बढ़ने से गाय के गोबर की डिमांड तो बढ़ ही गई, गांव में आवारा घूमने वाले पशुओं का भी सम्मान बढ़ गया है। खासकर गोठान जहां गांव की सभी गाय इकट्ठी होती है वहा से निकलने वाला गोबर अब जैविक खाद और उपयोगी उत्पाद के रूप में गांव की बेरोजगार बैठी अनेक महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की राह पर ले जा रही है।

ग्राम बनचरौदा की स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा गोठान में आने वाले पशुओं के गोबर से कलाकृतियां बनाने का कार्य किया जा रहा है। लगभग 46 महिलाएं है जो गाय के गोबर से दीया, हवनकुंड,गमले,फ्रेण्डशिप बैण्ड, राखी एवं पूजन सामग्री बनाने की कला में निपुण हो गई है। समूह से जुड़ी श्रीमती टुकेश्वरी चंद्राकर ने बताया कि समूह की महिलाओं का अलग-अलग दायित्व है। गोबर लाने से लेकर गोबर का पाउडर तैयार करने और अन्य सामग्री के साथ मिश्रण कर एक आकर्षक उत्पाद तैयार करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि आकृति तैयार होने के बाद उसे फिनिशिंग टच देने और अलग-अलग रंगों के माध्यम से सही रूप देने में महिलाओं का योगदान होता है। इसकी पैकेजिंग और मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी है। हाल ही में सांचा आदि तैयार कर काम शुरू किया गया है। अभी दो हजार का आर्डर जिला स्तर पर पूरा किये है। उन्होंने बताया कि दिल्ली से दो लाख दीयें का आर्डर मिला है। जिसे पूरा करने महिलाएं लगी हुई है। समूह की सदस्य श्रीमती हेमीन बाई और ममता चंद्राकर ने बताया कि सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक सभी महिलाएं कुछ न कुछ काम करती है। एक दिन में एक महिला 300 तक दीये तैयार कर सकती है। दीया तैयार करने के बाद उसे मूर्त रूप देने का काम भी किया जाता है।
पांच रूपये के है एक दीये
गोठानों से निकलने वाले गाय के गोबर से तैयार डिजाइन किये दीये की कीमत फिलहाल पांच रूपये और छोटे दीये की कीमत दो रूपये रखी गई है। यह दिखने में भी बहुत आकर्षक है। स्वास्तिक, श्री, ओम की कलाकृति की कीमत पांच रूपये, शुभ लाभ, मोबाइल स्टैण्ड की कीमत 100 रूपये, गणेश भगवान की प्रतिमा की कीमत 101 रूपये रखी गई है। इनमें से दीया सहित अन्य उत्पादों का उपयोग तो जरूरत के हिसाब से किया ही जा सकता है साथ ही घरों एवं दफ्तरों में सजावट के लिये भी गोबर के इस उत्पाद का उपयोग सुदंरता बढ़ाने के लिये लिये किया जा सकता है।


पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिये है लाभदायक
गाय के गोबर से बने उत्पाद अनेक दृष्टिाकोण से उपयोगी है। मिट्टी की कटाई रोकने में मददगार और मिट्टी को दीये का रूप देकर उसे आग में पकाने जैसी प्रक्रियाओं से दूर गोबर के दीये को धूप में सूखाकर तैयार किया जाता है। इस प्रकार के दीये एवं सामग्री को आसानी से नष्ट करने के साथ खाद के रूप में किया जा सकता है। यह पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य के लिये भी लाभदायक है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री ने भी की तारीफ
गाय के गोबर से बने दीये सहित अन्य कलाकृतियां देखने वालों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। बनचरौदा में आदर्श गोठान देखने आये राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत और वहा के मंत्रियों ने जब स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को देखा तो गोबर से बने इन उत्पादों की जमकर प्रशंसा की। प्रतीक चिन्ह के रूप में उन्हें जब गोबर से बना उत्पाद और अपनी नाम लिखी सामग्री मिली तो उनकी खुशी दुगनी हो गई। उन्होंने अपने प्रदेश में में नंदी गौशाला प्रारंभ करने और गोबर से उत्पाद तैयार करने के इस तरह के नवाचार को अपनाने की बात कही।

विशेष : यहाँ शरद पुर्णिमा की रात माँ पाताल भैरवी मंदिर मे जडी-बुडी युक्त खीर प्रसाद का किया गया वितरण ,,,पढ़े ये है मान्यता

सूर्यकान्त यादव -

राजनांदगांव-- राजनांदगाँव के बर्फानी आश्रम मे शरद पुर्णिमा की रात माँ पाताल भैरवी मंदिर मे जडी-बुडी युक्त खीर प्रसाद का वितरण किया गया...जिसमे देश भर से लगभग 30 हजार से अधिक लोग यहा पहुकर खिर प्रसाद ग्रहण किया....ये मान्यता है,कि यहा जो प्रसाद वितरण किया जाता उसमे अस्थामा और दमा के रोगीयो के लिए लाभ दाई माना जाता है...साथ ही अन्य रोगो के लिए भी हितकारी माना जाता है...पाताल भैरवी मंदिर मे यह परंपरा पिछले 22 सालो से निरंतर चली आ रही है....हजारो की संख्या मे पहुचे यह भक्त रात भर जाग कर भजन किर्तन करते रहते है...उसके बाद सुबह चार बजे से प्रसाद का वितरण किया जाता है...और लोग प्रसाद लेते है...यह सिलसिला सुबह 10 बजे तक चलता रहा है....पाताल भैरवी मंदिर मे भक्तो का ताता देखा जा सकता है...लोगो को इस प्रसाद से लाभ मिलता है...और सैकडो कि संख्या मे लोग यह प्रसाद लेने आते है...मंदिर समिती द्वारा यह प्रसाद निशुल्क वितरण किया जाता है... छत्तीसगढ़ के अलावा, महाराष्ट्र,उड़ीसा,वेस्ट बंगाल, मध्यप्रदेश से लोग खीर ग्रहण करने पहुंचे है, इस जड़ीबूटी युक्त खीर से दमा, अस्थमा,सांस जैसी बीमारी से ग्रसित लोग खीर का सेवन कर रहे है, आज के दिन का इंतजार लोग पूरा साल इंतजार करते है। 

विश्व बालिका दिवस पर साइबर फोरेंसिक एक्सपर्ट मोनाली गुहा ने दीं सिक्योरिटी टिप्स

न सिर्फ भारत मे बल्कि पूरे विश्व मे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स की संख्या दिन पे दिन बढ़ती ही जा रही है । इसमें एक बड़ा वर्ग बालिकाओं और किशोरी युवतियों का भी है जो इन पर अकाउंट्स तो बना लेती हैं मगर सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी न होने के कारण अपने आप को साइबर अपराधों से सुरक्षित नहीं रख पातीं ; उन्ही की सुरक्षा के लिए पेश हैं साइबर फोरेंसिक एक्सपर्ट मोनाली गुहा द्वारा बताए गए ये खास सोशल मीडिया सिक्युरिटी टिप्स : *रखें स्ट्रांग पासवर्ड* आपका पासवर्ड जितना कठिन होगा उतना ही सुरक्षित आपका सोशल मीडिया अकाउंट होगा ,इसके लिए स्ट्रांग पासवर्ड का इस्तेमाल करें जिसमे स्पेशल कैरेक्टर , न्यूमेरिक और स्मॉल कैपिटल अल्फाबेट का यूनिक कॉम्बिनेशन हो , उदाहरण के लिए - 9io0k*%@ddH*7÷} एक स्ट्रांग पासवर्ड कहा जा सकता है जिसकी लेंथ 8 से 15 या उससे अधिक कैरेक्टर्स तक रखना सुरक्षित कहा जाएगा । *लेवल टू वेरिफिकेशन* केवल पासवर्ड अच्छा होना ही ज़रूरी नहीं ,अगर सुरक्षित पासवर्ड भी किसी को पता चल जाए तो ऐसे में एक और सिक्योरिटी लेयर का होना ज़रूरी है , जो हर भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपको मिलेगा , इसे लेवल टू वेरिफिकेशन के नाम से जाना जाता है । अपने सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स में जा कर आप इसे सेटअप कर सकते हैं । इसमें आपको एक ईमेल आईडी और फ़ोन नंबर रजिस्टर करना होता है ,जिसके बाद हर बार जब भी आप अपना अकाउंट लॉगिन करेंगे आपको इसी रेजिस्टर्ड ईमेल या फोन नंबर। पर ओटीपी यानी वन टाइम पासवर्ड आएगा ,जिसे डाले बिना आपका अकाउंट लॉगिन नहीं होगा । *निजी जानकारी साझा न करें* महिलाएं विशेषकर अपनी निजी जानकारी जैसे फोन नंबर ,ईमेल आईडी या लोकेशन शेयर करने से बचें । किसी भी व्यक्ति से अपनी निजी जिंदगी की परेशानियां या राज़ शेयर न करें । इससे वे फेक अकाउंट के ज़रिए आपकी मजबूरी का फायदा उठा सकते हैं । *सोशल मीडिया से जीवनसाथी ढूंढने से बचें* फेसबुक जैसे बहुत से ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं जिनसे लोग आपस मे जुड़ते हैं , कई बार बात शादी तक भी पहुँच जाती है , ज़रूरी नहीं कि हर शादी विफल हो मगर ध्यान रखें कि सोशल मीडिया पर डाली गई जानकारी सही हो ये ज़रूरी नहीं । कई बार अपराधी लड़कियों को अपने जाल में फांसने के लिए भी अच्छी तस्वीरों और स्टेटस को प्रदर्शित कर अपराध को अंजाम देते हैं ,जिन लोगो को आप पर्सनली नहीं जानते ,उन्हें ऐड करने से बचें । *फेस रिकॉग्निशन बताएगा किसने अपलोग की आपकी तस्वीर* फेस रिकॉग्निशन एक ऐसी सेटिंग है जो आपको यह बताएगी कि किसने कब और कहां स आपकी तस्वीर फेसबुक पर अपलोड की । यानी अगर कोई आपका फेक अकाउंट बनाता है और आपने अपने अकाउंट में यह सेटिंग की हुई है तो आपको तुरंत नोटिफिकेशन आजाएगा की आपकी तस्वीर किसी ने अपलोड की है । अब आप चाहें तो उसे तुरंत रिपोर्ट करके ब्लॉक कर सकते हैं या कानूनी कार्रवाई भी कर सकते हैं । *अपनी तस्वीरों को रखें सुरक्षित* आप अपनी जितनी भी तस्वीरें डालें ,लिमिटेड ऑडियंस को ही डालें ,साथ ही प्रोफ़ाइल पिक्चर को पिक्चर गार्ड से प्रोटेक्ट करना न भूलें ,जिससे कोई भी आपकी तस्वीर का स्क्रीनशूट नहीं ले पाएगा । *अगर कोई साइबरअपराधी परेशान करे ,तो क्या करें?* यदि कोई आपको बार बार कॉल करता है , अभद्र मेसेज या ईमेल के ज़रिए धमकियां देता है या आपको किसी भी तरह से परेशान करने की कोशिश करता है तो घबराएं नहीं ,अपने नजदीकी साइबर सेल जाकर तुरंत एफआईआर दर्ज कराएं। इसके लिए एविडेन्स हमेशा सहेज कर रखें जैसे मेसेज और कॉललॉग्स का स्क्रीनशूट ,कॉल रेकॉर्डिंग ,अगर कोई फेक प्रोफ़ाइल है तो उसका स्क्रीन शूट आदि । यदि आप पुलिस के पास जाने में असमर्थ हैं या किसी भय से नहीं जा सकतीं तो अपने नजदीकी साइबर एक्सपर्ट्स से तुरंत संपर्क करें , आपके कानूनी अधिकारों की जानकारी एवम मार्गदर्शन के लिए परामर्श लें । *विषम परिस्थिति में करें गुहा साइबर एक्सपर्ट्स से संपर्क* हेल्पलाइन नम्बर 07714020055 पर कॉल करके आप साइबर फोरेंसिक एक्सपर्ट मोनाली गुहा ,सोनाली गुहा अथवा आयुष गुहा किन्ही से भी मिलने का आग्रह कर सकते हैं । इसके अलावा अगर आपके साथ किसी ने साइबर अपराध किया भी है तो उस अपराधी के खिलाफ आगे कैसे बढ़ा जाए औऱ कैसे अब खुद को सुरक्षित रखा जाए आदि विषयों पर अधिक जानकारी के लिए भी आप इनसे संपर्क कर सकते हैं ।

BBN24 विशेष : छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा गांव जहाँ ...दशहरे में मेला लगेगा... राजा आएँगे.. पर रावण नहीं मरेगा..जानिए क्या है कारण,,

नीलकमल सिंह ठाकुर 【विशेष】

मुंगेली- जिला मुख्यालय से महज दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत कन्तेली में 16वीं सदी से चली आ रही है एक अनोखी परंपरा है। यहां राजा की सवारी निकलती है लेकिन रावण का दहन नहीं होता है। राजा के दर्शन के लिए 44 गांवों से ग्रामीण एकत्रित होते हैं। राजा कुल देवी मां महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली की पूजा कर पूरे क्षेत्र में खुशहाली की कामना करते हैं। 


छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा गांव

जिस प्रकार केरल में मान्यता है कि दशहरे के दिन राजा बली अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए पाताललोक से बाहर आते हैं और प्रजा उन्हें सोनपत्ती देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करती है। कुछ ऐसी ही परंपरा मुंगेली जिले के कन्तेली गांव में है, जो दशको से चली आ रही है। यह छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा गांव है, जहां दशहरा में मेला तो लगता है लेकिन रावण का दहन नहीं होता है।

44 गांव के लोग होते है एकत्रित

16वीं सदी से चली आ रही यह परंपरा दशहरे के दिन होता है। मेले में आस-पास के करीब 44 गांव के लोग शामिल होते है। यहां के राजा यशवंत सिंह के महल से एक राजा की सवारी निकलती है, जिसमें लोग शामिल होकर नाचते-गाते कुल देवी के मंदिर तक पहुंचते हैं। राजा यशवंत सिंह के सुपुत्र राजा गुनेंद्र सिंह के द्वारा कुल देवी मां महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली की पूजा कर पूरे क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हैं। इतना ही नहीं इसके बाद राजमहल में एक सभा का आयोजन किया जाता हैं, जहां ग्रामीणों के द्वारा राजा को सोनपत्ती भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।