विशेष

युवा दीपक तिवारी ने मुलमुला-नरियरा क्षेत्र के लोगां को पंक्षी और पर्यावरण संरक्षण पर जागरूक किया

जांजगीर चाँपा:- प्रदेशस्तर पर चल रहे इस अभियान में दीपक ने जांजगीर जिले सहित दुसरें जिलों में भी जाकर अबतक 4,000 चार हजार से ज्यादा लकड़ी के कलरफुल घोसला का निःशुल्क वितरण कर लिया है। साथ ही पंक्षीयों को भुख प्यास से बचाने दाना -पानी देने के लिए हजारों की संख्या में मिटट्ी के बर्तन व ब्राउन पेपर से बने दाने के पैकेट का निःशुल्क वितरण युवा दीपक तिवारी स्वयं के खर्च पर कर चुके है । और निरंतर वह इन सामाग्रीयों का निःशुल्क वितरण कर रहे है। युवा दीपक तिवारी पंक्षी संरंक्षण व संवंर्धन पर कार्य कर लोगों को जागरूक कर प्रेरित कर रहें है । इसी कड़ी में उन्होंने नरियरा , मुलमुला क्षेत्र में जगह-जगह चौक चौराहों व गलियों में लोगों को प्रेरित करने लकड़ी के कलरफुल घोसला , मिटट्ी के सकोरे ,ब्राउन पेपेर से बने आनाज वाले दानां के पैकेट व पाम्पलेट का निःशुल्क वितरण किया । साथ ही ग्रामीणों से संकल्प -पत्र भरवाकर पंक्षी और पर्यावरण संवंर्धन का संकल्प दिलाया। जांजगीर-चांपा जिले से विलुप्त हो रहे पंक्षीयों के संरंक्षण व संवंर्धन का बीड़ा उठाने वाले व स्वयं के खर्च पर पंक्षी संरंक्षण पर निरंतर अपनी सेवा दे रहे ग्राम तिलई के युवा दीपक तिवारी ने लोंगो को जागरूक करने मुलमुला नरियरा क्षेत्र में जगह -जगह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। विगत दिनों मुलमुला और नरियरा क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक स्थानों में दीपक ने अपने हाथों से तैयार किए लकड़ी के कलरफुल घोसले, मिटट्ी के सकोरे,पाम्पलेट,अनाज के दानों वाला ब्राउन पेपर के पैकेट व संकल्प पत्र का निःशुल्क वितरण किया और लोंगों को बेजुबान पंक्षीयों के लिए घर में लकड़ी के कलरफुल घोसले में सुरक्षित आसरा देने ,भुख-प्यास से बचाने मिटट्ी के सकोरे में दाना पानी रखकर उनके लिए दाना - पानी की व्यवस्था करने तथा अभियान में अपनी महत्पूर्ण सहभागिता निभाने हाथ जोड़कर आग्रह किया । दीपक ने नरियरा के पेट्रोल पंप के पास भी राह चल रहे लोंगो को घोसला,मिटट्ी के सकोरे, पाम्पलेट,व अनाज के दानों का वितरण किया और अपने साथ-साथ दुसरें लोगों को भी पंक्षी संरंक्षण पर जागरूक कर प्रेरित करने को कहा। नरियरा ,मुलुमुला क्षेत्र में आयोजित जन जागरूकता कार्यक्रमों को युवा दीपक तिवारी ने किया संबोधित।

युवा दीपक ने कहा की आप लोगों से मुझे कोई पैसा या वस्तु नहीं चाहिए आप केवल इस अभियान के लिए लोंगों को जागरूक कर प्रेरित करने में मेरा साथ दें। आज हम सभी अपनी आवश्कताओं को पूर्ण करने पुरी तरह से सक्षम है और जो चाहिए वह हासिल कर रहे है , अपने खुशी से कोई समझौता नहीं करते हमारी जिन्दगी हमें स्वतंत्र जीना अच्छा लगता है। क्योंकि हम हमारी जीवन में आने वाली समस्त समस्याओं को स्वयं हल कर लेतें है । लेकिन क्या सिर्फ अपने सुख के लिए ही जिना सही है? नही अगर हम एैसा जीवन जितें है तो यह एक स्वार्थ पूर्ण जीवन होगा ईश्वर ने सिर्फ इंसान को ही इस काबिल बनाया है। की वह अपने साथ-साथ दुसरे प्राणियों की सहायता कर सकता है, तो हमारा भी कर्तव्य बनता है कि ईश्वर के दिए इस वरदान को व्यर्थ न जाने दें।अपने इस समय और अवसर सदुपयोग करें । जीवन उसी का सार्थक जों दुसरों के काम आय। मृत्यु सत्य है जाना सभी को है एक दिन इस दुनिया से , तो क्यो ना कोई अच्छा कर्म करके जाए ,बेजुबान पंक्षीयों के प्रजाति को सुरक्षित बनाकर उन्हेंं एक नया जीवन देंतें जाए। तो हमारा जीवन निश्चित ही सार्थक बन जाएगा।

निस्वार्थ भाव से हजारों लोगों को अभियान से जोड़ा लेकिन अभियान के नाम पर किसी से कोई पैसा नही लिया है। शुरू से अभीतक स्वयं के खर्च से सभी सामान बांट रहें हैं दीपक तिवारी।

दीपक ने जिस अभियान की नीवं अपने ग्राम तिलई से रखी थी वह आज प्रदेशस्तर पर पहुंच गया है। और प्रदेशस्तर पर इसका प्रचार प्रसार हो रहा है। साथ ही हजारों लोंग भी उनके अभियान से जुड़ गए है , लेकिन दीपक आज भी अभियान के नाम पर किसी से कोई पैसा नहीं लेतें । दीपक तिवारी जांजगीर के ज्ञानज्योति उ0मा0 विद्यालय जांजगीर में शिक्षक है सारा खर्च वें अपने सैलरी का पैसा दैनिक खर्च से बचाकर करते है। उनका कहना है कि यह परोपकार का कार्य है और किसी परोपकार के कार्य को करने में किसी से पैसे नहीं लेना चाहिए। अगर हम कार्य को करने के बदले पैसे लेते है तो वह कोई परोपकार नही हुआ। मैने शुरूआत से अभी तक किसी से पैसा नही लिया और आगे भी नहीं लुगां , आगे भी यह अभियान मेरे स्वयं के खर्च पर एैसे ही चलता रहेगा। और पंक्षी संरंक्षण अभियान को बेहतर से बेहतर दिशा देने की हर संभव प्रयास इसी प्रकार करता रहुंगा। जिससे विलुप्त हो रहे पंक्षीयों के प्रजाति को बचाया जा सके। युवा दीपक बेजुबान पंक्षीयों व पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि हमारे समाज के लिए भी एक अनुकरणी कार्य कर रहे है। उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व ही जांजगीर नेत्र विभाग में जाकर अपनी दोनों आखें दान करने की घोसणा कर मृत्युउपरांत किसी के अंधेरे जीवन को रौशन करने का नेक कार्य कर चुके है। दीपक समाज में पंक्षी और पर्यावरण के साथ-साथ लोगों को नेत्रदान के प्रति भी जागरूक कर प्रेरित करतें है।

पंक्षी संरंक्षण से किसानें को भी होगा लाभ खेती में आर्थिक बचत उत्पादन अधिक

अपने प्रचार -प्रसार के दौरान किसानां को दीपक ने खेति संबंधित जानकारी देते हुए कहां की पंक्षीयों को किसान मित्र कहा गया है। आप सभी अपने घर में आंगन के साथ-साथ अपने खेतों पर भी यह लकड़ी का घोसला रखें जिससे पंक्षी आपके खेतों में उपस्थित हानिकारक किड़ों मकोडों को नस्ट कर सके । पंक्षीयों को संरक्षण प्रदान करने से वे जैविक किटों के नियंत्रण का कार्य करती है। जिससे किसानों को आर्थिक बचत होती है।परागकण में भी सहायक होते है। किटनाशक के प्रयोग से खेतों के मिटट्ी को भी बहुत नुकसान होता है।जिससे खेतों में कई तरह की बिमारियों का आना व उत्पादन क्षमता कम होने वाली समस्या से जुझना पड़ता हैं। अगर हम पंक्षीयों का संरक्षण करें उन्हें सुरक्षित रखें तो ये बेजुबान पंक्षी हमारी खेती की आर्थिक खर्च बचाने के साथ-साथ पर्यावरण को संतुलित बनाय रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर हमारी सहायता करती है। इसलिए हमें भी उनके संरक्षण व संवर्धन कर आज अति आवश्यक हैं।H

मकर संक्रांति विशेष-प्यार की पतंग ..वर्षा

प्यार की पतंग

तेरी नज़रों में ऐसी धार थी

तुमसे नज़रे क्या मिली हमारी,

पतंग के साथ-साथ दिल भी

काट के तुम अपने साथ ले गई।

तिल के लड्डुओं की ख़ुशबू पूरे घर में महक रही थी. साथ ही नमकीन भी खाने की टेबल पर सजी थी।दादा जी ने आवाज़ लगाई अरे सुधीर पतंगे खरीदे लाये हो ना और फिरकी भी सुनो वो बगल वाले शर्मा जी के घर में भी बता अना की जल्दी से वो अपने सारे काम करके हमारी छत पर आजाये सुधीर ने भी हाथ में एक तिल का लड्डू लेते हुए बोला दादा जी आप चिंता मत करो सारी तैयारी कर रखी है।पूजा को बीच में रोकते हुए दादी ने आवाज़ लगाई ममता अरी ओ ममता, ममता ने भी किचन से हड़बड़ाती हुई आवाज में कहा हां दादी।आज खाने में क्या बनाना है पता है न तुझे ममता ने भी धीमी आवाज में कहा जी दादी आज खिचड़ी बनती है तो उसी की तैयारी कर रही थी दादी ने भी तंज कसते हुआ कहा चलो कुछ तो सिखाया है तेरी माँ ने तुझे और फिर अपनी पूजा करने में मग्न हो गई।दादा जी और शर्मा जी भी छत पर पहुच चुके थे बच्चे भी सब अपनी पतंगों को हवा में उड़ा रहे थे मैंने कुछ पुराने गानों की धुन लगाई और पतंग उड़ाने में मस्त हो गया।दादा जी मूंगफलियों को हाथों में लेते हुए बोले शर्मा जी से कहने लगे यार वो भी क्या दिन थे जब हम भी खूब पतंगे उड़ाया करते थे शर्मा जी ने दादा जी को अपनी कोहनी मरते हुए मज़ाकिया अंदाज़ में कहा रुक्मणि भाभी और तुम्हारी पहली मुलाक़ात भी तो आज ही के दिन यानी मकर संक्रांति के दिन हुई थी याद है जब तुमने उनकी पतंग से कैसे ख़ुद ही अपनी पतंग कटवा ली थी और भाभी कितना ख़ुश हो गई थी की उन्होंने तुम्हारी पतंग काटी है।हां यार आज पूरे 55 साल हो गए हमारी उस पहली मुलाक़ात को पर लगता है जैसे कल की ही बात हो।उसे जब पहली बार देखा था और आज जब उसे देखता हूँ तो वो अब भी वही 20 साल पहले वाली रुक्मणि ही लगती है वो बिल्कुल नहीं बदली वही उसकी ठेठ बोली में बोलना,साधा पहनावा सब आज भी वैसा ही है हां अब थोड़ी झुर्रियां आ गई है उसके चैहरे पर ,पर वो भी अब उसकी खूबसूरती को और बड़ा देती है जब भी इन झुर्रियों को देखता हूँ उसके चैहरे पर तो हमारे प्यार की प्रगाढ़ता मुझे दिखती है और इतने सालों उसने जो मेरे और मेरे परिवार के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।कुछ देर बाद दादी ने भी एक पतंग ली और हवा में उड़ाने लगी सब की निग़ाहें उन पर ही टिक गई दादा ने भी जल्दी से एक पतंग उठाई और वो भी दादी की पतंग के पीछे अपनी पतंग से पेच लड़ाने लगे उस वक्त मानों समय 55 साल पीछे लौट गया था ।दादी और दादा की आंखों में एक चमक सी आ गई थी ज़ोर-ज़ोर से शर्मा जी की पोती कमौन दादी दादी के नारे लगाने लगी उसे देख हम सारे लड़के भी कमौन दादा दादा के नारे लगाने लगे दादा और दादी की तरफ सब की निगाहें टिक गई दादा ने एक नज़र दादी की ओर देखा तब तक दादा की पतंग हवा में लड़खड़ाती हुई नीचे गिरने लगी थी दादी ने ज़ोर से आवाज लगाई थारी पतंग कट गई से।दादा हर साल यही करते थे ताकि वो दादी की एक मुस्कान देख सके जो उन्होंने पहली बार उनकी पतंग कटने पर दादी के चैहरे पर देखी थी और दादी ने भी शरमा के पल्लू से अपना मुंह छुपा लिया। हम भी इस पल का हर साल बेसब्री से इंतज़ार करते थे कि कब दादा और दादी बीते पलों को ताज़ा करें।मैंने भी सोच रखा था कि मैं भी शर्मा जी की पोती की पतंग से खुद की पतंग कटवाऊंगा और मैंने भी ऐसा ही किया पीछे से ममता ने आवाज लगाई सुनो जी अब तक मैंने आपकी चार पतंगे काट दी है मुझे पता है आप ये जान बूझ के करते हो चलो नीचे चलते है धूप भी बहुत हो चुकी है।मैंने भी हँसते हुए उसके हाथों से पतंग का मंजा लेकर टेबल पर रख और उसको अपनी बाहों में भरते हुए हम सीढ़ियों नीचे उतर आये थे पर अब भी कई छतों में न जाने कितनी ही पतंगे अपने प्यार की तलाश में खुले आसमान में उड़ रही थी।

||वर्षा||

छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार 2020 का आयोजन वसुंधरा प्रकृति संरक्षण समिति द्वारा श्री दूधाधारी मठ के महंत राजेश्री डॉ रामसुंदर दास जी की अध्यक्षता में आयोजित

रायपुर छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार 2020 का आयोजन वसुंधरा प्रकृति संरक्षण समिति द्वारा श्री दूधाधारी मठ के महंत राजेश्री डॉ रामसुंदर दास जी की अध्यक्षता में आयोजितआयोजन का महत्वपूर्ण उद्देश्य छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजनों एवं विविध खानपान का प्रचार प्रसार कर राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करना है। आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ी थाली (३ अलग अलग रूप में) को संयोजित एवं परिभाषित किया जायेगा। तीन अलग अलग थालियों का नामकरण निम्न तरह से किया जायेगा: *1.आहारी थाली:* आहारी थाली छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबु लिए हुए है, जिसमें भात (चावल) दाल, सब्जी, भाजी, अचार, चावल का पापड़, एवं सिलबट्टे की चटनी सम्मिलित होती है। यह सामान्य रूप से सभी घरों में खायी जाती है। *2. व्यवहारी थाली:* यह छत्तीसगढ़ के संस्कार एवं परंपरा को प्रदर्शित करती है। यह किसी भी विशेष मेहमान के लिए जैसे दामाद, समधी, सम्मानित रिश्तेदारों आदि के लिए बनायीं जाती है। आमतौर पर इसमें चौसेला (चावल आटे की पूरी या पूड़ी), सोंहारी (पूरी या पूड़ी का छत्तीसगढ़िया स्वरुप) भात (चावल), जिमीकंद की सब्जी, बैगन अथवा भिंडी आदि की तली हुयी सब्जी, भजिया कढ़ी, अथान (साबुत आम का भरवां अचार), बिजौरी, लाई बड़ी, दही मिर्च आदि का समावेश होता है। *3. त्यौहारी थाली:* छत्तीसगढ़ की माटी के विविध संस्कृति, वेशभूषा एवं परम्पराओं की भांति यहाँ के परंपरागत भोजन भी रंग बिरंगे तथा विविध स्वाद एवं खुशबु लिए होते हैं। त्यौहारी थाली हमारे रंग बिरंगे त्योहारों का प्रतिनिधित्व करती है। यह एक छत्तीसगढिया के लिए गर्व का विषय है कि हमारी संस्कृति में हर तीज त्यौहार के लिए एक अलग व्यंजन, अलग तरह का खान पान अपनाया जाता है। उदाहरण के लिए होली पर यहाँ अनरसा या अइरसा (चावल आटे और गुड़ या शक्कर के साथ बनने वाली मिठाई), दीपावली में गुझिया, पपची, पुराण लड्डू, हरेली में गुड़ का चीला, तीजा पोरा में खुरमी और ठेठरी, गोवर्धन पूजा में कद्दू और कोचई की सब्जी अन्य खाद्यान्नों के साथ अनिवार्य रूप से बनती है। यहाँ तक कि पूर्वजों को श्राद्ध के समय पूड़ी एवं उड़द दाल के बड़े के साथ मालपुए का होम हवन में प्रयोग किया जाता है। आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ी खाने में निम्नलिखित व्यंजन, खानपान शामिल हैं। इसके अनुसार ही स्टाल वितरित किया जाएगा। 1. अंगाकर रोटी, घी, गुड़ और चटनी 2. चीला, चटनी 3. फरा तथा दूध फरा 4. आहारी थाली 1 : दाल, भात, जिमिकंद की सब्जी, चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान और गुड़ की खीर। 5. खमरछठ थाली: पसहर चावल, दही, घी, भाजी साग 6. आहारी थाली 2 : दाल, भात, इड़हर की सब्जी, चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान और मालपुआ। 7. छोटी थाली : चौसेला, टमाटर चटनी (सब्जी), अनरसा 8. व्यवहारी थाली : सोंहारी (पूरी) दाल, भात, जिमिकंद की सब्जी या इड़हर, हरी/लाल चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान, बिजौरी, लाई बड़ी, और गुड़ की खीर। 9. त्योहारी थाली : सोंहारी (पूरी) दाल, भात, जिमिकंद की सब्जी/ इड़हर, डुपकी कढ़ी, हरी/लाल चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान, बिजौरी, लाई बड़ी, और गुड़ की खीर। खाजा/लड्डू/पप्ची (त्योहारी थाली में तिहार के हिसाब से संयोजन रहेगा जैसे होली, दिवाली, गोवर्धन पूजा, दशहरा आदि) इसके अतिरिक्त भाजी, दही बड़ा, देहरोरी, मूंग/ उड़द बड़ा, बांटी रोटी, गुझिया, पूरन लड्डू, पीड़िया, चूरमा लड्डू, आयुर्वेदिक (छेवारी लड्डू) ठेठरी, खुरमी, सेवई (हाथ से बना), अथान, सुष्की या खोइला आदि के स्टाल का वितरण किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार 2020 आयोजन की खास विशेषताएं 1. सभी स्टाल की बिक्री सुनिश्चित करने कूपन का आयोजन के पूर्व विक्रय किया जाएगा । 2. कूपन धारकों को निश्चित उपहार एवं गिफ्ट तथा फूड वाउचर दिया जाएगा ताकि आयोजन के 15 दिनों के अंदर विभिन्न स्वाद का आनंद ले सकें। आयोजन स्थल के बाहर शहर के विभिन्न स्थलों पर स्थित खाद्य उत्पादों/ फ़ूड स्टाल्स द्वारा यह गिफ्ट वाउचर प्रायोजित किया जायेगा। 3. आयोजन स्थल में प्रतिदिन संगीत संध्या का आयोजन किया जाएगा। 4. आयोजन के पश्चात खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्वरोजगार हेतु स्वतंत्र/ महिला स्व सहायता समूह को प्रशिक्षण प्रदान कर, व्यवसाय प्रारंभ करने सफलतापूर्वक संचालित करने हेतु मार्गदर्शन दिया जाएगा।

छेरछेरा-छेरछेरा माई कोठी के धान ल हेरते हेरा जांजगीर ज़िले में मनाया जा रहा छेरछेरा का त्योहार

◆आशीष कश्यप BBN24NEWS.COM

जांजगीर-चांपा जिले में छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े त्यौहार छेरछेरा त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है, दरअसल आज पुष्पपुन्नी है और पुष्पपुन्नी के दिन को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े त्योहार के रूप में माना जाता है। जिसे छेरछेरा के रूप में पूरे छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है और आज के दिन गांव- गांव में बच्चो एवं बुढो के द्वारा घर-घर जाकर छेरछेरा मांगा जाता है, जिसमें उन्हें दान के रूप में रुपया पैसा और धान मिलते हैं, आज के दिन को अन्न दान के रुप में छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, इसी के चलते आज जांजगीर-चांपा जिले में छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े त्यौहार छेरछेरा को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, पुष्पपुन्नी पूर्णिमा के आने से पहले ही लगभग 15 दिन के पूर्व गांव के लोगों के द्वारा टोली बनाया जाता है, और लकड़ी के डंडे लेकर गांव- गाँव में घरों घर जाकर डंडा नृत्य किया जाता है। वही इस नृत्य में बच्चे बूढ़े एवं हर उम्र के लोगों के द्वारा घर-घर जाकर छेरछेरा मांगा जाता है जिसमें उन्हें धान व रुपए पैसे मिलते हैं।

विशेष:-छोटे सरकार का ये आक्रामक रूप सोशल मीडिया में छाया ..लोग कर रहे जमकर तारीफ ..पढ़े पूरी खबर

रायपुर:- इन दिनों सोशल मीडिया में चंद्रपुर विधानसभा के पूर्व विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव छाए हुए हैं दरसल में उनका सोशल मीडिया में छा जाना भी लाजमी है युद्धवीर सिंह जूदेव इन दिनों फुल फॉर्म में नजर आ रहे हैं क्षेत्र की जनता एवं अपने कार्यकर्ताओं के ऊपर हो रहे अत्याचार को लेकर काफी चिंतित हैं। इन दिनों युद्धवीर सिंह लगातार दौरा भी कर रहे हैं साथ ही साथ प्रशासनिक अधिकारियों को हिदायत भी दे रहे हैं कि अगर वह जनता के समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं तो वह जशपुरिया अंदाज में फैसला करेंगे। उनका यह अंदाज लोगों को काफी पसंद भी आ रहा है कोई उन्हें छत्तीसगढ़ का वीर कह रहे हैं तो कोई उन्हें बब्बर शेर तो कोई उन्हें नेता हो तो ऐसा जैसे शब्दों से उन्हें संबोधित कर रहे हैं और संबोधित करें भी क्यों ना .अगर कोई नेता अपनी जनता और अपने कार्यकर्ताओं के समस्याओं के लिए चिंतित होकर मैदान में आकर शासन-प्रशासन को ललकारे तो भला कोई तारीफ करने से रूके कैसे. और उनका आक्रामक रूप का हर एक वायरल वीडियो जमकर वायरल हो रहा है जिसे लाखों लोग देख रहे हैं और उसे पसंद भी कर रहे हैं और युद्धवीर सिंह जूदेव की जमकर तारीफ भी हो रही है चाहे वह पक्ष के लोग हो या विपक्ष के.

औकात में रहे SDM

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जशपुर जिले के पत्थलगाव नगर पंचायत में भाजपाईयों के द्वारा समारोह से बाहर आ जाने के मामले में युद्धवीर सिंह जूदेव काफी तैश में दिखे और मीडिया को दिये गए एक बयान में उन्होंने एसडीएम को दो कौड़ी का अधिकारी बता दिया औऱ कहा कि एसडीएम को औकात में रहंना चाहिए साथ ही साथ कलेक्टर और मुख्यमंत्री को भी नही छोड़ा ये वीडियो जमकर वाइरल हो रहा है और लोग इसमे युद्धवीर सिंह जूदेव की तारीफ भी कर रहे है.

पुलिस विभाग के लिए कही दो टूक

पुलिस कार्यवाही न करे तो फिर मैं कार्यवाही करूँगा और मेरा कार्यवाही तो जानते है न जॉन, जॉनी, जनार्दन, दे दनादन......

हालांकि जूदेव का ये अंदाज विरोधियों को रास नही आ रहा है मगर आम जनता और समर्थकों में इस अंदाज को जमकर पसन्द किया जा रहा है।साथ ही साथ जूदेव आक्रामक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वाइरल हो रहा है।

गरियाबंद : फलसापारा में आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह जर्जर , किराए के मकान में खाना बनाकर बच्चों को देती है आंगनवाड़ी साहिका

A REPORT BY : जुगेशर नेताम

गरियाबंद जिला के विकासखंड मैनपुर के ग्राम पलसापारा मैं आंगनवाड़ी भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है अभी तक नया भवन का निर्माण नहीं किया गया जिसके कारण आंगनवाड़ी साहिका श्रीमती भागवती नेताम किराए के मकान से खाना बनाकर बच्चों को देती है ग्राम फलसा पारा में नया भवन स्वीकृति 2016 में हुआ है लेकिन अभी तक नहीं बनाया हैं जिसके चलते भवन से वंचित रह गए हैं बच्चे आंगनवाड़ी सेहिका सरपंच सचिव एवं जिम्मेदारी अधिकारियों को कई बार आवेदन की है लेकिन अभी तक नहीं बना जिसके कारण बच्चे भवन से वंचित रह गए हैं बैठने के लिए जगह की कमी है बच्चों के बैठने के लिए बरसात के मौसम में परेशानियों का सामना करना पड़ता है नया भवन नहीं बनने के कारण आंगनवाड़ी सहिका परेशान है

सफलता की कहानी:- सबसे कम उम्र में आईपीएस से लेकर जज तक बने हैं ये लोग

22 साल के सफीन हसन जो देश के सबसे युवा आईपीएस अधिकारी हैं से लेकर 21 वर्षीय मयंक प्रताप सिंह जो सबसे कम उम्र में जज बने हैं ,ऐसे लोगों कहानियां देश भर के लोगों को प्रेरित करती हैं। 22 साल के देश के सबसे युवा आईपीएस अधिकारी जो 23 दिसंबर को सहायक पुलिस अधीक्षक का पदभार ग्रहण किये है। देश के सबसे युवा आईपीएस अधिकारी बनने के उनका सफर आसान नहीं था। उनका बचपन बहुत संघर्षपूर्ण रहा है। सफीन में मां ने बेटे की पढ़ाई के लिए रेस्टोरेंट से लेकर शादियों तक में रोटियां बनाने का काम किया। गुजरात के राजकोट में रहने वाले सफीन हसन 23 दिसंबर को नया इतिहास रचे। वह देश के सबसे युवा आईपीएस अधिकारी होंगे। सफीन की माता का नाम नसीम व पिता का नाम मुस्तफा है। सफीन हसन 23 दिसंबर को जामनगर के जिला पुलिस उपाधीक्षक का पदभार ग्रहण किये। गुजरात के बनासकांठा के एक छोटे से गांव कनौदर में प्राथमिक शिक्षा के बाद सफीन ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई सूरत में की है।21 साल के मयंक प्रताप सिंह भारत के सबसे कम उम्र के जज बनने वाले शख्स हैं। मयंक प्रताप सिंह राजस्थान के जयपुर शहर से हैं। मयंक ने न्यायिक सेवा परीक्षा साल 2018 में पास की थी। आपको बता दें, साल 2018 तक न्यायिक सेवा परीक्षा में बैठने की उम्र कम से कम 23 साल थी ,जिसको इस साल राजस्थान हाई कोर्ट ने घटाकर 21 साल कर दिया है। मयंक प्रताप सिंह हमेशा न्यायिक सेवाओं और समाज में न्यायाधीशों को मिलने वाले सम्मान के प्रति हमेशा आकर्षित रहे हैं। मयंक ने साल 2014 में राजस्थान यूनिवर्सिटी में एलएलबी के 5 साल के कोर्स में दाखिला लिए था जो इसी साल खत्म हुआ है।यूपीएससी सिविल सर्विसिज में टॉप करने वाले कनिष्क कटारिया की कहानी बहुत दिलचस्प है।विदेश में अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी करने वाले कनिष्क कटारिया ने कभी सोचा भी नहीं होगा की उन्हें पहली रैंक हासिल होगी। कनिष्क ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया हुआ है।कनिष्क ने सॉउथ कोरिया में एक करोड़ रुपए के पैकेज पर नौकरी की है। कनिष्क कटारिया की कहानी देश के कई युवाओं को प्रेरित करती है।

जिनपर है देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनपर भारतीय करते है सबसे ज्यादा भरोसा... और किनपर नही करते भरोसा जानने के लिए देखे

नई दिल्ली:- जिनके ऊपर देश की जिम्मेदारी है उन जवानो पर सबसे ज्यादा भरोसा करते है लोग यह बात सर्वे में साबित हुआ है ।सर्वे के मुताबिक भारतीयों की नजर में सुरक्षाबलों में तैनात जवान सर्वाधिक भरोसेमंद हैं तो राजनेता सबसे कम विश्वास करने लायक। मार्केट रिसर्च फर्म इप्सोस का हालिया सर्वे तो कुछ यही बयां करता है। ग्लोबल ट्रस्ट इन प्रोफेशंस सर्वे में शामिल 70 फीसदी से ज्यादा देशवासियों ने सेना को सबसे ज्यादा भरोसेमंद पेशा बताया। वहीं, 59 फीसदी ने राजनेताओं को संशय की दृष्टि से देखने की बात कही। वैज्ञानिकों (60 फीसदी), डॉक्टरों (56 फीसदी) और शिक्षकों (52 फीसदी) को भी बेहद भरोसेमंद माना गया है। सर्वे के मुताबिक 52 फीसदी लोग मंत्रियों और 41 प्रतिशत विज्ञापन अधिकारी को भरोसे लायक नहीं समझते। इप्सोस इंडिया के पारिजात चक्रवर्ती ने कहा, सशस्त्र बलों को सर्वाधिक समर्पित पेशा माना गया है। बलिदान, प्रतिबद्धता और अनुशासन के मूल्यों को इनकी पहचान बताया गया है। इसी तरह वैज्ञानिक शोध, चिकित्सा और शिक्षा के पेश को भी विश्वसनीय माना गया है, जो देश निर्माण में अपना योगदान देते हैं। चक्रवर्ती के मुताबिक सिस्टम को साफ करने की कोशिशों के बावजूद राजनेता अधिकतर लोगों का विश्वास नहीं जीत सके हैं। विज्ञापन पेशवरों, रुचिकर कॉपी लिखने वाले और रचनात्मकता का प्रदर्शन करने वाले, ब्रांड के गुणों को प्रदर्शित करने वाले लोगों को भी संदेह भरी नजरों से देखा जाता है। सर्वे के नतीजे 16 से 74 साल के 19587 वयस्कों की राय पर आधारित हैं।

मिस कॉल

सुबह के 7:30 का समय था मैं हमेंशा की तरह अपने बिस्तर पर गहरी नींद में थी अचानक फ़ोन की घंटी बजी और मैं हड़बड़ाहट में थोड़ी जागी थी थोड़ी नींद में थी और आंखों को हाथों से मलते हुए फ़ोन को इधर उधर ढूंढने लगी फ़ोन चादर में कहीं छुप गया था उसे ढूढने के चक्कर में फ़ोन की घंटी बजते बजते थम गई।मैं इतनी नींद में थी कि मैंने किसने फ़ोन किया था उसे भी देखने की कोशिश नहीं कि और फिर बिस्तर में सो गई।सुबह की नींद मुझे सबसे प्रिय थी क्यों कि रात को देरी सोना और सुबह देरी से उठना ये मेरी ख़ासियत थी।मैं हर रोज यही सोच के सोती की कल से जल्दी सोऊंगी और सुबह जल्दी उठूंगी पर वो कल अब तक नहीं आया।आख़िर कार 9 बजे मेरी नींद खुली और मैं अंगड़ाई लेते हुए एक हाथ रजाई से बाहर निकालते हुए मैंने फ़ोन को ऑन किया एक आंख को खोलते हुए मैंने फ़ोन पे आये मिस कॉल को देखी और देखते ही मैं झट से बिस्तर पर उठकर बैठ गई बालो को जल्दी-जल्दी ठीक कर उसे क्लच किया तब तक मेरी नींद जा चुकी थी मैंने मन ही मन सोच क्या ये उसी ने काल की थी या गलती से कॉल आगे उसकी नहीं फोन की बैल तो पूरी बजी थी तो ये मिस कॉल तो नहीं हो सकती थी अब मिस कॉल थी तो अब बहुत से सवाल दिमाग़ में आना शुरू हो गये। चार साल हो चुके थे हमें अलग हुए अब तो वो बड़े पद पर थे उन्होंने अपनी ही एक परिचित दोस्त से शादी भी कर ली थी और एक बिल्कुल उसी की तरह एक बेटा भी था ये सब जानकारी मुझे हमारी एक कॉमन दोस्त ने मुझे बताई थी।मैं अब भी उसी जगह पर ठहरी हुई थी जहां उसने मुझे छोड़ा था हां समय आगे निकल गया था और उसके साथ मैं भी पर दिल और दिमाग़ अब भी वहीं था हक्कीकत में अब वो किसी और का था पर मेरे लिए अब भी वो वही कुणाल था। मेरे पास उसकी कुछ चीजें अब भी थी जो उसने मुझे दी थी मैंने उसे गुस्से में कह जरूर दी थी कि उसकी सारी चीजें मैंने फेंक दी है कुछ चीजें उसे वापस भी कर दी थी उसकी एक पिक थी और उसका लिखा वो लेटर जिसने उसे पहली और आख़री बार मुझे लिखा था जिसमे उसने अपनी बात हमारी पहली मुलाक़ात से शुरुवात की थी और साथ बिताए उन सब पलों के ज़िक्र भी किया था जो हमने साथ बिताए थे फिर धोरे -धीरे बिगड़ते हमारें रिश्तों के कारण का भी जिक्र किया उसमें उसने केवल मेरे से जो गलतियां हुई थी केवल उन्हीं बातों का जिक्र किया गया था पर वो गलतियां क्यों कि थी वो बहुत अच्छे से जानते हुए भी उसने केवल मेरी ही गलतियां गिनवाने को ज़्यादा महत्व देते हुए उन्ही बातों का जिक्र किया था गलतियां उसने पहले की थी मेरे होते हुए किसी और के यहां रिश्ता लेकर गये थे और वो भी किसी और ने ये रिश्ता नहीं भेजा था ये ख़ुद वो लड़की का रिश्ता अपने घर वालों को बताये थे और वो रिश्ता घर वालों को मंजूर नहीं था जब ये बातें उनकी चाची ने ही मुझे बताई थी।मैं जब उनकी एक जान पहचान वाली भाभी के घर में किराए से रहती थी और वो उनकी चाची के घर में रहते थे तो मेरा उनकी चाची के घर में आना जाना था और वो चाची भी मेरा बहुत अच्छे से ख़्याल रखती थी आज भी उन्हें हमारे बारे में कुछ नहीं पता है वो मुझे केवल एक अच्छा दोस्त ही समझती है कुणाल का ।जब मुझे ये बातें पता चली तो मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई काटो तो खून नहीं ऐसी हालत हो गई थी मन कर रहा था अभी कुणाल को कॉल करूं और उसे पूछुं की मुझसे क्या गलती हो गई जो मेरे साथ होते हुए किसी और के यहां रिश्ते लेके जाने की क्या जरूत पढ़ गई क्यों कि वो उसी लड़की यहां रिश्ता लेकर गए थे इसलिए वो रायपुर में नहीं थे।चाची ने मुझे आवाज़ लगाई रिशिता मैं ख़्यालों से बाहर आते हुए लड़खड़ाती आवाज़ से हां चाची बोलिये उन्होंने कहाँ क्या हुआ मैंने झूठी मुस्कान देते हुए कहां कुछ नहीं चाची अच्छा है कुणाल की शादी हो गई तो वो भी उसकी पसंद की लड़की से मुझे तो सबसे ज़्यादा खुशी होगी ऐसा कहते हुए मैंने जैसे तैसे अपनी बात को संभाली और चाची ने चाय का कप मेरी ओर बढ़ाते हुए और उस लड़की के बारे में और बाते बतानी शुरू कर दी जैसे उसका नाम उसकी पढ़ाई लिखाई और हां वो सरकारी नॉकरी में थी।कुणाल मुझे हमेंशा सरकारी नॉकरी करते देखना चाहते थे और इसलिए वो मेरा एडमिशन भी एक कोचिंग में करवा दिए थे जहां सरकारी नॉकरी की तैयारी करवाई जाती थी पर मुझे सरकारी नॉकरी में कोई दिलचस्पी नहीं थी पर जब भी मैं कुणाल से हमारी शादी की बात करती तो वो हमेंशा इधर-उधर की बात करके उसे टालने की कोशिश करते थे और सरकारी नॉकरी लगने पर ही हम शादी कर सकते है उससे क्या होगा उसके बारे में कहां करते थे पर मैं कुणाल से कहती कि यदि मुझे सरकारी नॉकरी न लगी तो क्या तुम मुझसे शादी नहीं करोगे तब वो चुप हो जाते और कहते कि अभी समय है इन सबके लिए समय आएगा तब सोचेंगे।मैं भी शांत हो जाती।आगे उन्होंने लेटर में और भी बहुत सी बातें लिखी थी लास्ट में कुछ शब्द मेरी परवाह है उन्हें इसलिए हमेंशा ख़ुश रहो और मैं हमेंशा तुम्हारा भला ही चाहता हूं इन शब्दों के साथ अंत में तुम्हारा कुणाल लिख कर वो पत्र को समाप्त किया।न जाने मैंने कितने बार ये पत्र पढ़ चुकी थी और अंत में लिखे तुम्हारा कुणाल पढ़ कर मैं कुछ देर उन सारी बातों को भूल कर "तुम्हारा" शब्द पर थोड़े देर के लिए विश्वास करने लग जाती थी की वो मेरे है और किसी और के नहीं हो सकते थे पर वास्तविकता तो कुछ और ही थी।ये सब सोचते-सोचते लग भाग 11 बज चुके थे।मैं आज भी उन जगहों में जाती थी जहां हमनें साथ वक़्त गुजारा था मैं उसी गार्डन के उसी बैंच में अक़्सर बैठा करती जहां हम एक दूसरे के हाथों को पकड़े बैठा करते थे।कुणाल को करेले की सब्ज़ी बहुत पसंद थी जब भी मैं जब भी करेले की सब्जी बनाती हूँ उसकी याद जरूर आ जाती है ।हमें सबसे ज़्यादा मंदिर के दर्शन साथ ही किये थे।कुणाल की दो बहनें और माता-पिता थे कुणाल अकेले ही इस घर के वारिस थे उनकी एक बहन थी जिसका बचपन से ही दिमाग़ का विकास ज़्यादा नहीं हो पाया था एक बहन की शादी हो चुकी थी कुणाल घर में सबसे बड़े थे और उनके गावों में दूसरे जात की लड़की से शादी करने पर दंड का प्रावधान था ये सारी बातें मुझे वो हमेंशा बताते रहते थे।उन्हें उनकी छोटी बहन की बहुत चिंता होती थी उनकी चिंता देख मैं हमेंशा कहती थी हमारी शादी होगी तो हम खुद का बच्चा नहीं करेंगे हम इनका ही ख्याल रखेंगे हमारा बच्चा होगा तो हम इनका ध्यान नहीं रख पाएंगे मेरी ये बातें सुन वो खूब हँसा करते थे और मैं गुसा हो जाती थी और वो मुझे मनाने के लिए मेरे माथे पर किस करके गले से लगा लिया करते थे और उनकी बाहों में आने के बाद मैं सब भूल जाती थी उनकी बाहों में मेरी जन्नत थी ये बात वो बहुत अच्छे से जानते थे कुणाल अपनी गलती कभी नहीं मानते थे चाहे कुछ भी हो जाये शायद यही वजह थी...... किसी ने सच ही कहाँ है पहला प्यार कभी भुलाया नहीं जा सकता।सवाल अब भी वही था कि कुणाल ने सच में मुझे कॉल की थी या गलती से लग गई थी।मैं सोच में थी कि क्या मुझे वापस कॉल बैक करनी चाहिए या नहीं यदि कॉल कर भी दी कहीं उनकी जगह उनकी पत्नी ने कॉल अटेंड कर ली तो क्या होगा क्या जवाब दूंगी।फिर भी खुद को समझाते हुए मैंने कुणाल को कॉल करने का मन बना ही लिया।रिंग बजने लगी उसके साथ-साथ मेरा दिल भी जोरों से धड़कने लगा चौथी रिंग पर उधर से एक पुरुष की आवाज आई ये कुणाल की आवाज थी मेरा दिल बैठ गया था उस कुछ समय के लिए मुझे समझ नहीं आया क्या कहूँ फिर उधर से आवाज आई रिशिता क्या तुम हो मुझे अपना नाम कुणाल के मुंह से सुनकर बहुत अच्छा लगा और मैंने भी जवाब देते हुए कहां हां मैं हूँ आज तुमने सुबह कॉल की थी तुम्हारे पास अब भी मेरा नम्बर है किस काम के लिए कॉल किये थे मुझे?कुणाल हँसते हुये कहाँ पहले हालचाल तो पूछा होता मैंने भी मन ही मन सोची हां इतने दिनों के बाद कॉल पे बात हो रही है और मैंने भी ।हां मैंने काल किया था सुबह तुमको क्यों पता चला कि तुम अब मेरी बॉस बनकर यहां आई हो जब मैं आफिस गया था तो मुझे तुम्हारे बारे में पता चला सच कहूं मुझे बहुत ख़ुशी हुई कि आखिर कार तुमने सरकारी नॉकरी को चुना इसलिए मैंने तुम्हें बधाई देने के लिए कॉल की थी अब तो हम रोज मिला करेंगे आख़िर अब तुम मेरी बॉस जो ठहरी।उसकी बातों को सुन मैं मन ही मन सोचने लगी कि ये यदि मैं पहले होती तो शायद हम साथ होते तुम्हे मुझसे नहीं सरकारी नॉकरी से महौबत थी इसलिए तुमने सरकारी नॉकरी वाली लड़की से शादी की थी।कुणाल ने कहां क्या तुम कुछ नहीं कहोगी।मैंने कहां हां धन्यवाद बस इतना ही कहोगी मैंने कहाँ हां और क्या।कुणाल ने भी कल आफिस में मिलते है कहते हुए फ़ोन रख दिये। मन तो बहुत था कुणाल से बहुत सी बातें करूँ उसे बताऊं की मैं तो कभी सरकारी नॉकरी नहीं करना चाहती थी मैं तो राइटर बनना चाहती थी पर जब उसने मुझे सिर्फ सरकारी नॉकरी के लये बेइज्जत किया था और मुझपे इल्ज़ाम लगाए थे कि मैं उनसे प्यार केवल उनकी नॉकरी की वजह से करती हूं और शादी इसी वजह से करना चाहती थी तब मैंने भी सोच की सरकारी नॉकरी करके उन्हें बता दूंगी की मैं जो चहुं वो कर सब कर सकती हूं मैं भी सरकारी नॉकरी के सकती हूँ पर सच ये था मैंने कुणाल से प्यार की थी उनकी सरकारी नॉकरी से नहीं।आज जब उसकी बधाई के लिए कॉल आई तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई।कुणाल ने बधाई तो दी पर उसकी आवाज़ में पछतावा जरूर महसूस कर सकती थी वो भी मुझसे बिछड़ने के बाद बहुत दुखी थे ।सरकारी नॉकरी वाली लड़की से शादी तो जरूर कर ली थी कुणाल ने पर वो ज्यादा समय परिवार को नहीं दे पाती थी जिसकी वजह से हर रोज़ दोनों के बीच लड़ाइयां हुआ करती थी।जब आप किसी से बहुत प्यार करते हो तो रिश्ता खत्म होने के बावजूद भी कहीं न कहीं से उसकी सारी जानकारी जुगाड़ ही लेते है वैसे ही मुझे भी उसकी जिंदगी की हर बात पता थी हां कुणाल ने भी मेरी थोड़ी बहुत जानकारी ले रखी थी पर कभी कॉल नहीं किये थे इन चार सालों में हमनें।डोर बेल की आवाज मुझे सुनाई दी मैं उठ खड़े हुई और दरवाजा खोला दरवाज़े पर मेरे पति थे मैंने घड़ी की तरफ देखा तो 6 बज रहे थे उन्होंने कहाँ आज बहुत काम था सुनों एक कप चाय पिला दो मस्त अदरक डाल कर मैंने भी हल्की मुस्कान दी और किचन की ओर चल पड़ी। ||वर्षा||

नए साल में अब 130 रुपये में मिलेंगे 200 चैनल फ्री चैनल ट्राई ने केबल नेटवर्क ग्राहकों को दी बड़ी सौगात

नई दिल्‍ली:-नए साल पर टेलीकॉम रेगुलेटर (ट्राई) ने केबल नेटवर्क ग्राहकों को बड़ी सौगात दी है। ट्राई ने एक नई टैरिफ सूची जारी की है, जिसमें अब ग्राहक को 130 रुपए में 200 चैनल फ्री मिलेंगे। जबकि पहले 130 रुपये में 100 चैनल ही मुफ्त मिलते थे। यह व्‍यवस्‍था एक मार्च 2020 से लागू होगी। इसके साथ ही ट्राई ने एक और बदलाव किया है कि 12 रुपए से ज्यादा कीमत वाले चैनल बुके का हिस्सा नहीं होंगे। कंपनियों को टैरिफ की जानकारी 15 जनवरी को वेबसाइट पर डालनी होगी। बता दें कि बीते साल ट्राई ने नई ब्राडकास्ट टैरिफ व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत ग्राहकों को सिर्फ उन्हीं चैनलों के लिए भुगतान करना पड़ता है, जिन्हें वे देखना चाहते हैं। पहले ब्रॉडकास्टर्स पैकेज में चैनल देते थे, यानी मनपसंद चैनल देखने के लिए कुछ ऐसे चैनल्स के लिए भी पैसे देने पड़ते थे, जो आप कभी नहीं देखते हैं। जब ट्राई ने नई ब्राडकास्ट टैरिफ व्यवस्था लागू की थी, उसमें टीवी ग्राहकों को 100 फ्री टू एयर चैनल दिए गए थे। इनमें 26 चैनल दूरदर्शन के हैं। इसके लिए उन्हें टैक्स हटाकर 130 रुपये का भुगतान करना था। इसके अतिरिक्त अपने मनपसंद चैनल के देखने के लिए तय रकम का पेमेंट करना पड़ता है।

अनजानी मुलाक़ातें और नये साल का आग़ाज़-वर्षा

अनजानी मुलाक़ातें और नये साल का आग़ाज़ ..................................

वो अनजान था वो एक मुसाफ़िर था वो जो भी था पर इस सफर में वो मेरा एक लौटा जानने वाला था।

2019 खत्म होने की कगार पर है और हम 2020 के स्वागत करने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे है मानो घर मे कोई नई दुल्हन का गृहप्रवेश होना हो।सब बहुत खुश है जैसे शादी के बाद नया जोड़ा हनीमून की प्लानिंग करता है वैसे ही लोग नये साल के स्वागत के लिये बाहर जाने का प्लान बना रहे थे ।मेरा भी बाहर जाने का प्लान था पर नए साल के स्वागत के लिए नहीं दरसल मेरी बड़ी दीदी के बेटे के जन्मदिन रहता है 31 को और मेरे भैया का 1 जनवरी को तो जन्मदिन की खुशी और नए साल का स्वागत भी हम साथ ही मना लेते है इसी लिए मैं हज़रत निज़ामुद्दीन राजधानी B4 सीट नम्बर 20 में बैठ कर बैंगलौर जा रही हूं पीली कुर्ती और सफेद सलवाल बाल खुले है मेरे और कानों में ईयर फ़ोन लगा गाने चला रखे हैं मैंने और हाथों में चेतन भगत की बुक है "द गर्ल इन रूम 105" एक अनलव स्टोरी पढ़ते हुए सफ़र का आगाज किया मैंने।

ट्रैन भी अपनी रफ़्तार से चल पड़ी पूरे डिब्बो में आर्मी के जवानों की ज्यादा तादाद थी मेरे अलग बगल ज़्यादा लड़के ही थे इसलिए मुझे शांत बैठना पैड रहा था वैसे मैं बिल्कुल भी शांत नहीं बैठती ये मेरी ख़ासियत है पर कोई लड़की होती बगल में तो शायद मैं उसकी पूरी हिस्ट्री जान गई होती और वो मेरी।मेरी ट्रैन पहले ही 7 घंटे देरी से चल रही थी क्यों कि ये दिल्ली से आती है और वहां काफी ठंड थी और कोहरे की वज़ह से वो वही से देरी सी निकली थी।मेरा फ़ोन बजा बड़ी बहन का फ़ोन था वो मुझे कहने लगी तुम फ्लाइट से क्यों नहीं आती हो हर बार तुम्हारी ट्रैन लेट ही रहती है ठीक है ये बताओ कहाँ तक पहुँची हो खाने के लिए कुछ लाई हो या ट्रैन से लेने वाली हो टाइम पे कहा के सो जाना सुबह फ़ोन करना मैंने उसे उसके सब सवालों के जवाब देते हुए उसे कहाँ मैं सो जाऊंगी और सुबह उठ के फ़ोन करूंगी।राजधानी ट्रैन सुनते ही लग्ज़री गाड़ी की कल्पना थी मेरे दिमाग में ये मेरी पहली यात्रा थी इस ट्रैन से पर सच कहूं ये मेरी सबसे बेकार यात्रा थी लग्जरी जैसा कुछ भी नहीं था इससे अच्छी तो बाकी के ट्रेनों में सुविधा होती है खैर अब यही ट्रेन से मुझे बैंगलौर जाना था।वेंडर ने आवाज लगाई मैडम वेज या नॉनवेज मैंने बोली वेज फिर वो चला गया इस ट्रेन की बस एक ही बात अच्छी थी कि इसमें खाना नाश्ता सब मिलता था पर टेस्ट की बात मैं नहीं करना चाहती।सामने बैठे एक भैया मुझे काफ़ी देर से देख रहे थे आख़िर कर मैंने बहुत देर बाद अपनी चुप्पी तोड़ी और बात एक पानी की बोतल मांगते हुए शुरू की सबसे पहला सवाल की आप कहाँ जा रहे हो जो हर कोइ यही पूछकर अपनी बातें आगे बढ़ाता है ट्रैन में हल्की फुल्की पहचान हुई फिर उनके फ़ोन की घंटी बजी और वो बात करने लग गए हमारी बातों का सफर वहीं थम गया मैं भी अपनी बुक को लेकर वापस अध्याय 10 पढ़ना शुरू कर दी इससे पहले मैंने कभी चेतन भगत की कोई बुक नहीं पढ़ी थी ये भी इस ट्रेन के सफर की तरह पहली बार ही था जो मैं चेतन भगत की बुक पढ़ रही थी ये इतनी अच्छी तरह लिखी गई थी कि उसे पढ़ते-पढ़ते मेरा सफर बहुत अच्छा गुजर रहा था और समय का पता ही नहीं चल रहा था देखते ही देखते 11 बज चुके थे और मेरे ऊपर के भैया ने आवाज लगाई लाइट जल्दी बंद कर दीजिएगा मैंने 10 मिनट कहकर फिर पढ़ना शुरू कर दी थोड़ी देर बाद लाइट बंद कर मैं भी सो गई।सुबह होते ही चहल पहल से मेरी नींद जागी फिर नाश्ता मैडम बोल मुझे वेंडर ने नाश्ते की प्लेट मेरे हाथों में थमा दी मैं फ्रैश होते ही नाश्ता करते वक्त फिर वही भैया ने मुझे पूछा आप कहाँ जा रही हो मैंने कहाँ दीदी के यहां उनको विस्तार से सब बात बताई फिर वो भी बताना शुरू किए मैं दिल्ली से हूँ रेलवे में लोको पायलेट हूँ दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ नये साल को सेलिब्रेट करने रेल्वे का नाम सुनते ही मुझे लगा अरे ये तो मेरे परिवार के ही सदस्य है

आप सोच रहे होंगे कि परिवार का सदस्य हां क्यों कि मेरा पूरा परिवार की तीन पीढ़ियों ने रेल्वे में अपनी सेवा दी थी और दे रहे है इसलिए जहां रेल्वे की बात होती है लगता है ये घर की बात है हमारे बगल के एक भैया भी बोले मेरे पापा भी रेल्वे में वैल फेयर इंस्पेक्टर है लो भई अब तो और मेरा मन गदगद हो गया धीरे से फिर हमने कहाँ इसलिए आपको इस्पेशल वाली चाय सर्व की जा रही थी वो हंस पड़े फिर हमनें बातों का सिलसिला शुरू किया वो भी नए साल के अपने दोस्तों के पास जा रहे थे उनके भी बहुत से प्लान थे मैंने उन्हें कुर्ग और चिकमंगलूर जाने की सलाह भी दे डाली क्यों कि मैं इन जगहों में जा चुकी थी और मुझे ये जगहें काफी पसंद आई थी। ट्रैन जैसा कि मैं आपको बता चुकी हूं कि लेट चल रही थी हम बैठे बैठे काफ़ी बोर हो चुके थे सब के फ़ोन में जो बजी कॉल आ रहे थे सब के यही प्रश्न थे कि कब तक पहुँच रहे हो सब का एक ही जवाब 12 तक पहुच जाएंगे और फिर फोन कट।सफ़र भी कितना अजीब होता है ना हम ट्रेन में बैठने से पहले तक किसी को नहीं जानते है पर जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढ़ती है वैसे वैसे हम भी अपने आसपास के लोगों को जानना शुरू कर देते है जैसे कोई नई किताब को पढ़ना शुरू किया हो और सफ़र खत्म होते ही पूरी किताब पढ़ ली हो।उनसे बिछड़ते वक्त बुरा तो नहीं लगता पर एक अपना पन जरुर होता है उन्हें अलविदा करते वक्त फिर कभी मुलाक़ात न होगी फिर भी एक याद जरूर जुड़ जाती है

जब भी राजधानी के इस सफ़र का जिक्र होगा ये मेरी आँखों में इस सफ़र का जिक्र घूम जाएगा और हल्की मुस्कान होगी।ट्रेन रुकती है भैया ने आवाज लगाई बैंगलौर आ गया है मैं भी हां कहकर अपना सामान लेकर बाहर निकल पड़ी और कैब में सामान रख दीदी के घर की ओर निकल पढ़ी।

||वर्षा||

लग रहा बेचैनी का माहौल क्यों रो रहा है समाज ईश्वर उस बच्चे को दे परम् शांति :लेखक- ज्ञानेन्द्र पांडेय, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर

स्कूली बच्चों की असामयिक मौत से पूरे समाज का दिल रो रहा है, पालकों पर क्या बीतती होगी यह सोचकर ही बेचैनी होने लगती है। ईश्वर बच्चों की परम शांति प्रदान करें और परीजनों को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करे ऐसी प्रार्थना करता हूं।

स्कूली बच्चों के लिए पिकनिक तथा खेलकूद संबंधी अन्य गतिविधियां सस्ते और ढर्रे पर चलने वाली दुकान बन कर रह गई हैं। ऐसे किसी भी कार्य के लिए विशेषज्ञों की राय लेना जरुरी न होकर चंद रूपयों के बंदरबांट से सब खेल हो जाता है। जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़कर कभी पालकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र का खेल खेलते हैं और कभी कभी मुआवजा देकर। शैक्षणिक संस्थाओं को इस पर विचार करना चाहिए क्योंकि मुआवजा हर मर्ज की दवा नहीं होती और न ही इन पर रोक लगाना किसी समस्या का हल है। जरूरत सिर्फ थोड़ी सी इमानदार कोशिश करने की है।

शैक्षणिक संस्थाओं को विशेषज्ञों की राय तथा सेवाएं लेनी चाहिए और उनकी ही अगुआई में सभी खेलकूद, पिकनिक तथा एडवेंचर स्पोर्टस आयोजित किया जाना चाहिए।

आसानी से पैसा कमाने के चक्कर में लोग इसे व्यवसाय बनाकर काम कर रहे हैं, बिना किसी मापदण्ड और सुरक्षा मानकों के धड़ल्ले से यह धंधा चल रहा है। सरकार को भी तभी होश आता है जब कोई दुर्घटना होती है। कागजों पर चल रहे खेल संघ एवं विभाग का अस्तित्व महज अखबार में फोटो छपवाने के लिए रह गया है,ऐसा लगता है।

रेडी टू इट के पैकेट में निकल रहे कीड़े,,पोषण के नाम पर परोसा जा रहा जहर,,

नीलकमल सिंह ठाकुर मुंगेली- कुपोषण दूर करने के नाम पर सरकार किस तरह बच्चों और महिलाओं को जहर परोस रही है इसका खुलासा मुंगेली क्षेत्र के ग्राम बांकी में हुआ। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषण- सुपोषण कार्यक्रम के तहत खाद्य विभाग के साथ रेडी टू ईट मिल के पैकेट बांटे जा रहे हैं। मुंगेली के बाक़ी गांव में वाले हरिओम सिंह के घर भी इसी तरह के कुछ पैकेट दिए गए जिसमें निर्माण तिथि अक्टूबर और अगस्त 2019 अंकित है। सील बंद पैकेट को जब उन्होंने देखा तो उनके होश उड़ गए क्योंकि रेडी टू ईट मिल में बेहिसाब कीड़े मौजूद थे। उन्होंने इसे खोल कर देखा तो पाया कि रेडी टू ईट मिल के नाम पर जो पोषक आहार उन्हें दिया गया है उसमें कीड़े घूम रहे हैं । जाहिर है महिला एवं बाल विकास विभाग और खाद्य विभाग लोगों की सेहत से खुला खिलवाड़ कर रहा है। उन्हें दोयम दर्जे का रेडी टू ईट मिल प्रदान कर यह तसल्ली की जा रही है कि प्रदेश से कुपोषण दूर होगा। उल्टे इन्हें खाकर लोग बीमार पड़ेंगे। हरिओम सिंह तो जागरूक थे जिन्होंने इन्हें इस्तेमाल करने से पहले खोल कर देख लिया लेकिन कई ग्रामीण ऐसे भोले भाले और मासूम है जिन्हें सरकारी योजनाओं पर पूरा भरोसा होता है इसलिए पता नहीं ऐसे दूषित पोषाहार कितने ग्रामीणों ने ग्रहण भी कर लिया होगा। सरकारी योजनाओं को इसी तरह अधिकारी पलीता लगाते हैं, जिससे उनका मूल उद्देश्य पूरा नहीं होता। जाहिर है इसके पीछे विभागीय गफलत है । इसलिए शासन को तुरंत संज्ञान लेकर दोषी व्यक्तियों पर कार्यवाही करनी होगी , नहीं तो फिर लोग रेडी टू ईट मिल को खाने तक से इंकार कर देंगे और प्रदेश में कुपोषण हटाने की मुहिम खतरे में पड़ जाएगी। इस गंभीर मसले पर तत्काल कार्यवाही की आवश्यकता है।वही इस मामले की शिकायत सम्बन्धी अधिकारी से की गई तो उस अधिकारी के द्वारा शिकायत करता पर ही आरोप लगाने लगे कि तुम्हारे द्वारा ही पैकेट में कीड़ा डाल कर लाये हो,,,वही अधिकारी की भी इस मालमे में कार्यवाही करने से बचते नजर आ रहे हैं,,जानकारी के मुताबिक जो समूह के द्वारा ये रेडी टू इट का निर्माण कराया जा रहा है वो भाजपा पार्टी से सम्बंधित है जिसके चलते कार्यवाही करने से बचते नजर आ रहे हैं,,, ये पहला मामला नही है कि इस समूह के पोषण आहार में कीड़े नही मीले है इससे पहले भी मिला था और इसकी शिकायत किया भी गया था पर उस समय भाजपा का शासन था तो उस समय भी कार्यवाही नही हुए,,पर आज कांग्रेस की सरकार बन जाने के बाद भी उस समूह के खिलाफ कोई भी कार्यवाही होगी कि नही ये संसय बना हुआ है,,,

विशेष : मुंगेली के सीताफल की प्रसिद्धि छत्तीसगढ़ में ही नही अपितु दूसरे राज्य के लोग भी हैं इसके स्वाद के दीवाने,,

नीलकमल सिंह ठाकुर

मुंगेली- सीताफल का नाम आते ही मुह में पानी आ जाता है और कही मुंगेली का सीताफल हो तो बात ही कुछ ओर…. मुंगेली क्षेत्र का सीताफल पुरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ के सीताफल की सुगंध , सइज और स्वाद लोगो का मन मोह लेती है ,, क्षेत्र के सीताफल साइज में बड़े होने के कारण लोगो की पहली पसंद है ,, इसकी बाज़ार में आवक् दशहरा दिवाली के समय देखने को मिलती है,मुंगेली क्षेत्र के लोगो का आय का यह एक अच्छा जरिया है जिससे किसान त्यौहार के समय लाभान्वित होते है ।

मुंगेली जिले के किसान अब आधुनिक खेती में जुट गए है. अब किसानो का नगदी फसलो की तरफ झुकाव अधिक हो रहा है ! छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है क्योकि छत्तीसगढ़ की मुख्य फसल धान रही है और अधिकतर इलाके में धान की फसल ही बोई जाती है लेकिन कुछ वर्षो से किसानो का रुझान नगदी फसलो की तरफ बढ़ गया है ! आधुनिक खेती से जहा किसानो को पानी पर ज्यादा निर्भर नहीं होना पड़ता वही इस तकनीक से किसानो की आमदनी में बढ़ोत्तरी हुई है और किसान शासन की योजनाओ का भी लाभ लेते नजर आ रहे है ......

1 - मुंगेली क्षेत्र के किसान लगभग दो सो सालो से सीताफल की बाड़ी लगाते आ रहे है

2 -सीताफल की बाड़ी यहाँ की परंपरा बन गयी है

3 - क्षेत्र की कछारी जमीन सीताफल के लिए वरदान साबित हो रही है

मुंगेली जो की एक कृषि प्रधान जिला है , यहाँ के लोगो की मुख्य आमदनी कृषि से ही है ,ज्यादातर लोग कृषि पर आधारित है जैसा की प्रदेश में धान की अधिक खेती ली जाती है मुंगेली अंचल में भी किसान धान की फसले लेते है लेकिन कृषि प्रधान जिले मुंगेली में अब किसान आधुनिक किस्म की खेती में जुट गए है ! ऐसा ही एक नजारा मुंगेली विकासखंड के ग्राम बरईदहरा में देखने को मिला जहा के किसान नागेश्वर सिंह ने आधुनिक खेती करने की मिसाल पैदा की ! उन्होंने सीताफल की बाड़ी में पेड़ के निचे सोयाबीन , हल्दी , अदरक, आलू लगाकर अच्छी आमदनी अर्जित की वही एक मिसाल दुसरे किसानो के सामने पेश किया !

किसान की सफलता से अधिकारी भी गदगद है उन्होंने किसान नागेश्वर सिंह के कार्य की प्रशंशा करते हुए कहा की दुसरे किसानो को भी धान के फसलो पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और नगदी फसलो की तरफ ध्यान देना चाहिए जैसे सीताफल केला, गन्ना, पपीता अनानस , हल्दी अदरक ,,सब्जी में घोभी आलू, करेला , मिर्ची, प्याज या जिनकी बाजार में जरुरत हो

सीताफल के फायदे

सीताफल स्वास्थवर्धक होता है , इसमें प्रोटीन विटामिन की बहुतयात रहती है , सीताफल पेट को ठण्डकता पहुचाता है / बाज़ार में इसकी मांग और इसका अच्छा रेट किसानो को मिलता है

! अधिकारी ने यह भी बताया की सीताफल की खेती बाड़ी जिले में बरदान साबित हो रही है मुंगेली और आसपास के क्षेत्रो की मिटटी कछारी होने के कारण सीताफल के किये एकदम उपयुक्त हैं, अधिकारी की माने तो सीताफल की खेती में दो महीने में ही एक लाख से भी अधिक की आमदनी हो सकती है क्षेत्र में दस से बारह किसानो को सिताफल की फसल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है जिनकी जमीन कछारी है ,

शासन नगद फसल लगाने वाले किसानो को अनुदान,पौधा,दवा,खाद,हाइब्रिड बीज और लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत स्प्रिकलर सेट और ड्रिप सिस्टम में छूट देती है !

सीजन -

जून जुलाई में सीताफल की बहार आ जाती है और अगस्त सितम्बर में फल लगने लगते है और अक्टूबर नवम्बर में फल बाज़ार में आ जाते है

आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलीभगत से हो रहे भ्रष्टाचार ...

एक तरफ छत्तीसगढ़ शासन महिला बाल विकास विभाग को कुपोषण दूर करने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं चला रही है तो दूसरी तरफ उसके ही देखरेख मैं लगे अधिकारी उसकी बंदरबांट करने में लगे हुए हैं लोगों को अपने कमीशन खोरी से ही मतलब है चाहे वह महिला बाल विकास के परियोजना अधिकारी हो या फिर सुपरवाइजर या फिर सहायिका व कार्यकर्ता क्यों ना हो मस्तूरी में महिला बाल विकास विभाग पहले से ही विवादित एवं बड़े-बड़े घोटाले से चर्चित है लेकिन इसमें सुधार कहीं भी नहीं होता मस्तूरी क्षेत्र के 75 परसेंट आंगनबाड़ी सही समय पर नहीं खुलता और नहीं किसी भी आंगनबाड़ी में पोषण युक्त बच्चों को भोजन मिलता है कई आंगनबाड़ियों में तो बच्चे आंगनवाड़ी केंद्र ही नहीं आते लेकिन उनकी नाम से आए हुए राशि बराबर समय पर आरण हो रही है मस्तूरी क्षेत्र में महिला बाल विकास के जितने भी जवाबदार अधिकारी बनकर आए हैं सभी अपनी मुख्यालय में बैठकर कुर्सी तोड़ने में ही मस्त रहते हैं क्षेत्र में कभी भी दौरा कर आंगनबाड़ियों के चरमर आए हुए व्यवस्था को सुधारने में दिलचस्पी नहीं लेते. मस्तूरी ब्लाक के पचपेड़ी क्षेत्र के ग्राम पंचायत चिल्हाटी में आंगनबाड़ी क्रमांक 5 में कार्यकर्ता भगवती केवट और सहायिका रेखा पांडे देखरेख व संचालित करती है पर आसपास के लोगों ने बताया एवं गांव के कुछ जनप्रतिनिधियों ने उच्च अधिकारियों को लिखित में सूचना दी है कि ग्राम पंचायत चिल्हाटी के आंगनवाड़ी क्रमांक 5 कभी भी समय पर नहीं खुलता और ना ही कोई बच्चे वहां पढ़ने आते हैं शासन के पैसा को हजम करने के लिए एवं शासन को गुमराह करने के लिए वहां के आंगनबाड़ी के रजिस्टर्ड में लिखा पूछा घर बैठकर कंप्लीट करके पैसा आहरण कर लिया जाता है लेकिन वहां कभी भी आंगनबाड़ी जाकर खोल कर नहीं बैठते और ना ही वहां किसी भी प्रकार के बच्चों का पढ़ाई लिखाई होता है वहां की कार्यकर्ता भगवती केवट चिल्हाटी बस स्टैंड में अपनी फलों की दुकान वह फैंसी दुकान चलाती है और सहायिका रेखा पांडे बरोबर रजिस्टर्ड मेंटेन करके रखती है और ग्राम पंचायत चिल्हाटी में उसकी बेटी आवास मित्र का काम करती है और उसकी मां रेखा पांडे स्वयं आवास ठेकेदार बनती फिरती है रोजाना वह आवास बनवाने को लेकर अपने काम धाम में व्यस्तता है करके बिजी रहती है पर आंगनबाड़ी कभी नहीं जाती लेकिन उनकी रजिस्टर में सिग्नेचर बरोबर रहती है. इनके नाम पर कई आवास के हितग्राहियों ने भी लिखित में शिकायत कर चुके हैं कि कई लोगों के घर को अभी भी कंप्लीट नहीं किए हैं ग्राम पंचायत चिल्हाटी के आंगनबाड़ी क्रमांक 5 एक प्राइवेट भवन में संचालित होती है जिसे दिखावे के लिए बस रखे हैं यहां कोई भी प्रकार की आंगनबाड़ी जैसी सुविधा नहीं है और नहीं वह बच्चों की पढ़ाई होती है यह जानकारी स्वयं मकान मालिक ने दिया है मकान मालिक ने यह भी बताया है कि कई महीनों से आंगनबाड़ी के नाम से लिए हुए किराए के मकान का पैसा भी नहीं मिल पाया है. ग्राम पंचायत के रमेश वर्मा .बुद्धदेव वर्मा .हरि शंकर केवट .एवं मंजू वर्मा ने जानकारी दिया कि चिल्हाटी के आंगनबाड़ी क्रमांक 5 में कभी भी कोई प्रकार की उच्च अधिकारी कभी निरीक्षण करने नहीं आए हैं आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता एवं सहायिका और मस्तूरी मुख्यालय के कुछ कर्मचारी अधिकारी की की मिलीभगत के कारण यहां की आंगनबाड़ी की दैनिक स्थिति हुई है इन सभी लोगों की लापरवाही के ही चलते यहां के आंगनबाड़ी में कोई प्रकार की सुधार नहीं हो पाई है और न ही सुचारू रूप से यहां आंगनबाड़ी चल पा रही है l

वर्जन

वहां की सुपरवाइजर उत्तरा साहू का कहना है कि मुझे एक हफ्ता ही हुआ है वहां की प्रभार मिले बहुत जल्द वह निरीक्षण कर आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता एवं सहायिका पर गड़बड़ी पाए जाने पर उचित करवाही करूंगीl

परियोजना अधिकारी उषा श्रीवास्तव का कहना है कि आंगनबाड़ियों के आए दिन निरीक्षण करने के लिए एवं समय-समय पर कई क्षेत्रों के आंगनबाड़ियों की व्यवस्था एवं कमियों को बताने के लिए शासन के द्वारा सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं चिल्हाटी आंगनबाड़ी में मैं खुद जाकर या फिर तत्काल मैं सुपरवाइजर को बोलकर निरीक्षण करवाएगी गलती पाए जाने पर उचित कार्रवाई करेंगे l