राजधानी

निपाह वायरस संक्रमण के लक्षण समान्य इन्फ्लुएन्जा की तरह होता है निपाह के लक्षण पर हो जाए सावधान राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र ने सभी जिलों को जारी किया एडवायजरी

रायपुर निपाह वायरस संक्रमण के लक्षण समान्य इन्फ्लुएन्जा की तरह होता है जैसे - बुखार, सिर दर्द के साथ प्रारंभ होती है। संक्रमण की अवधि 4 से 18 दिन होता है। ऐसे मरीज जो बुखार के साथ मानसिक बदलाव अथवा झटके के साथ उपस्थित होते है तथा केरल के प्रभावित जिलों में विगत 21 दिन पूर्व भ्रमण किये हो अथवा उन जिलों के संभावित तथा पाॅजीटीव मरीज के संपर्क की आने की जानकारी प्राप्त होती है, निदान व उपचार के दौरान सावधानी बरती जावें । पाॅजीटीव मरीज का सर्वेलेंस अगामी 21 दिन तक किया जावें ।
किसी स्थान अथवा एक ही परिवार या समुदाय में अचानक बुखार के साथ मानसिक बदलाव अथवा झटके / बेहोशी के लक्षण वाले दो या तीन से अधिक मरीजो की जानकारी प्राप्त होती है, इसकी जानकारी जिला / राज्य सर्वेलेंस इकाई को तत्काल दी जावें । संभावित मरीजों के निपा वायरस (छपचंी टपतने)  पुष्टिकरण हेतु गले से सेंपल, ब्लड, यूरिन अथवा ब्ैथ् का  सेंपल बी.एस.एल. 4 मानक का पालन करते हुए ट्रिपल लेयर पैकिंग तथा निर्धारित तापमान के साथ राष्ट्रीय वाॅयरोलाॅजी संस्थान, पुणे(छप्ट च्नदम) के भेजा जाना चाहिए। इसकी पूर्व सूचना राज्य सर्वेलेंस इकाई को टेलीफोन अथवा ईमेल के माध्यम से अनिवार्य रुप से दी जावें । सेंपल के साथ मरीज की पूरी जानकारी भी संलग्न अनिवार्य है ।
इस वायरस का विशिष्ट ईलाज नही है, लक्षण के आधार पर ईलाज किया जाना है। संभावित अथवा पाॅजीटीव मरीजों के उपचार अथवा देखरेख में परिवार के सदस्य या स्टाॅफ द्वारा समुचित सावधानी बरती जावें।
फ्रूट बैट्स (चमगादड़) की वजह से यह बीमारी मुख्य रूप से फैलती है। जब इंसान या कोई जानवर चमगादड़ों द्वारा झूठे किए फल या सब्जियों को खाते हैं तो उनमें भी यह वायरस फैल जाता है। लिहाजा सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है कि जमीन पर गिरे फल न खाए जाएं।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र से जारी एडवायजरी सभी जिलों को जारी कर दिया गया है। 

छत्तीसगढ़ में तम्बाखू सेवन की दर में 14 फीसदी गिरावट ग्लोबल अडल्ट टेबेको सर्वे की रिपोर्ट

रायपुर । छत्तीसगढ़ में तम्बाखू सेवन की दर में 14 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है । छत्तीसगढ़ में गेटस (ग्लोबल अडल्ट टेबेको सर्वे) 1 एवं गेटस (ग्लोबल अडल्ट टेबेको सर्वे) 2 के तुलनात्मक रिपोर्ट के अनुसार तम्बाखू सेवन की दर गेटस 1 के सर्वे 53.2 प्रतिशत था, गेटस 2 में 14.1 प्रतिशत घटकर 39.1 प्रतिशत हो गया है । स्वास्थ्य संचालक ने बताया कि जन सामान्य में तम्बाखू से होने वाले दुष्प्रभाव के प्रति जागरूकता आने के कारण छोड़ने वाले की संख्या में कमी दर्ज की गई है । उन्होंने बताया कि इसी प्रकार छत्तीसगढ़ की महिलाओं में भी तम्बाखू व्यसन गेटस 1 की अपेक्षा गेटस 2 में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है । उन्होंने बताया कि इसी सर्वे के अनुसार शहरी क्षेत्रों में तम्बाखू व्यसन में 11 प्रतिशत की कटौती हुई है । छत्तीसगढ़ के इन माह में व्यापक प्रचार-प्रसार कर तम्बाखू के सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जायेगा ताकि यह रिपोर्ट में और कमी दर्ज की जा सके । स्वास्थ्य संचालक ने बताया कि 31 मई, 2018 को विश्व तम्बाखू निषेध दिवस है । इस दिवस में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए तम्बाखू उत्पादों के दुष्प्रभावों के प्रति आम जनता को जागरूक करने के लिये वार्ड पार्षदों का सहयोग लिया जावेगा । 29 मई से 31 मई, 2018 तक यह अभियान चलाया जाएगा । उन्होंने बताया कि कोटपा एक्ट 2003 के प्रावधानों को लागू किये जाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय तम्बाखू नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है । रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, जशपुर, मुंगेली, गरियाबंद, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद, बस्तर, कोरबा, सरगुजा व कांकेर के इन 14 जिलों में संचालित किया जा रहा है ।                                                                                                                                                                                                                                     
स्वास्थ्य संचालक ने बताया कि प्रदेश के समस्त जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियो को जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर 29 से  31 मई  2018 तक विशेष अभियान चलाकर कोटपा 2003 के प्रावधानो के उल्लंघन करने पर चालानी एवं विधिक कार्यवाही करने  तथा  31 मई  2018 को शहरी क्षेत्रों के पार्षदों द्वारा अपने-अपने वार्डो में सिगरेट एवं अन्य तम्बाखू उत्पादों के उपभोक्ता को एक स्थान पर एकत्रित कर उन्हें जागरूक करते हुए उनसे तम्बाखू उत्पादों को इकट्ठा करके जिलाधीश द्वारा निर्धारित स्थान पर  उन तम्बाखू उत्पादों को अभिशाप मानते हुए निष्पादित करवाने  का सुझाव दिया गया है । उन्होंने बताया कि जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर वाहनध्ई-रिक्शा में तम्बाकू विरोधी प्रचार सामग्री चस्पा कर आडियो के माध्यम से तम्बाखू उत्पादों के हानिकारक प्रभावों एवं कोटपा अधिनियम के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास किया जावेगा । इस दिवस पर रैली का आयोजन कर रैली में भाग लेने वालो को तम्बाखू उत्पादों का सेवन न करने का शपथ दिलवाया जायेगा। ट्रैफिक सिग्नलो में तम्बाखू उत्पादों के दुष्प्रभावों को बताते हुए व जिन स्थानों में वीडियो स्क्रीन लगे हुए हैं उन स्थानों पर माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी द्वारा तम्बाखू नियंत्रण पर दिया गया सन्देश प्रसारित किया जावेगा ।

 

प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन के लिए अग्रिम तैयारी शुरू : मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर  राज्य सरकार ने आगामी मानसून को ध्यान में रखकर प्रदेश के सभी जिलों में बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की अग्रिम तैयारियां शुरू कर दी है। इस सिलसिले में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव  अजय सिंह की अध्यक्षता में बाढ़ नियंत्रण के लिए राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समिति की बैठक हुई। श्री अजय सिंह ने संबंधित विभागों द्वारा बाढ़ नियंत्रण के लिए की जा रही तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान बाढ़ की स्थिति निर्मित होने पर जन-धन-फसल-पशु आदि के नुकसान को रोकने जरूरी कदम उठाए जाएं।
 मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि जून के पहले सप्ताह से ही राजधानी रायपुर सहित  सभी जिला मुख्यालयों में आपदा नियंत्रण कक्ष शुरू कर दिए जाएं। उन्होंने राज्य के पहुंच विहीन क्षेत्रों में वर्षा काल के लिए पर्याप्त खाद्यान्न के भण्डारण  के निर्देश दिए है। श्री सिंह ने नालियों की सफाई, कचरे का निपटान, बाढ़ प्रभावित स्थानों का चिन्हांकन, बाढ़ राहत शिविरों का पहचान, राहत सामग्रियों का समय पूर्व परीक्षण, जलाशय एवं नदियों के जल स्तर की सतत निगरानी, किसी भी किस्म की महामारी की रोकथाम के लिए कॉम्बेट टीम का गठन, स्वास्थ्य केन्द्रों में क्लोरिन की गोली की पर्याप्त उपलब्धता, पहुंच विहीन ग्रामों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मितानिन को पर्याप्त मात्रा में क्लोरिन एवं ओआरएस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने पेयजल के सभी स्त्रोतों का शुद्धिकरण करने, नदी किनारे और संवेदनशील क्षेत्रों के हेंडपम्प को ऊपर उठाने और चबूतरों का निर्माण करने कहा है। जल स्तर बढ़ने पर निचले जिलों एवं सीमावर्ती राज्यों को 12 घंटे पूर्व सूचित करने के निर्देश दिए है। संवेदनशील इलाकों के क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों का समय पूर्व मरम्मत करने और जलमग्न होने वाले पुल के दोनों ओर चमकदार साइन बोर्ड लगाकर कंट्रोल रूम का नम्बर अंकित करने कहा गया है। बचाव दल के रूप में प्रशिक्षित जवानों की सूची और उनके मोबाईल नम्बर जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में रखे जाने के निर्देश दिए गए है। प्रभावित क्षेत्रों में कानून और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की निर्देश दिए गए है। इस दौरान टेलीफोन सेवा र्निबाध रूप से चालू रखने कहा गया है। मौसम विभाग को समय पूर्व सम्भावित वर्षा एवं पूर्व चेतावनी की सूचना देने के निर्देश दिए गए है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि अल्प वर्षा अथवा अधिक वर्षा की स्थिति में आकस्मिक कार्ययोजना तैयार रखें। उन्होंने इस सिलसिले में कृषि विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को जरूरी निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि मानसून के दौरान भारी बारिश की स्थिति में रेल यातायात व्यवस्थित रखने, रेल्वे लाईन एवं पुल से जल निकासी की जिम्मेदारी रेल्वे को दी गयी है। वर्षा के दौरान नियमित विद्युत आपूर्ति तथा राहत शिविरों में प्रकाश व्यवस्था का काम ऊर्जा विभाग द्वारा सम्पन्न किया जाएगा। राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में बांस-बल्ली-जलाऊ लकड़ी उपलब्ध कराने का जिम्मा वन विभाग को सौपा गया है।आपदा के समय समन्वय और सहयोग का काम पंचायत एवं ग्रामीण विकास, भारतीय सेना और रेडक्रास सोसायटी देखेगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव कृषि  सुनील कुजूर, वन   सी.के. खेतान, पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री आर.पी.मण्डल, गृह  बी.व्ही.आर. सुब्रमण्यम, प्रमुख सचिव वित्त श्री अमिताभ जैन, सचिव स्वास्थ्य  निहारिका बारिक सिंह, खाद्य   ऋचा शर्मा, नगरीय प्रशासन डॉ. रोहित यादव, जल संसाधन श्री सोनमणि बोरा, राजस्व श्री एन.के. खाखा, विशेष सचिव लोक स्वास्थ्या यांत्रिकी श्री पी. अम्बलगन, ऊर्जा श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, पुलिस महानिदेशक   ए.एन.उपाध्याय सहित नगर सेना, स्टेशन कमाण्डर (भारतीय सेना), डिविजनल रेल्वे मेनेजर, निदेशक दूरदर्शन आकाशवानी, भारतीय रेडका्रर्स सोसायटी, मौसम विज्ञान केन्द्र, दूरसंचार निगम और रविशंकर जलाशय से संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।                
 

 

मीजल्स और रूबेला जैसी घातक बीमारियों की सोशल मिडिया से मिलेगी जानकारी

रायपुर। मीजल्स-रूबेला जैसी बीमारियों को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार करेगा। इन घातक बीमारियों के लक्षण और उनसे बचाव की जानकारी अब सोशल मीडिया के जरिए दी जाएगी।मीजल्स-रूबेला के टीके लगे हैं तब भी अभियान के दौरान दोनों टीके अवश्य लगवायें । 85 लाख बच्चों को मीजल्स-रूबेला टीकाकरण करने व एक भी बच्चा न छूटे इसके लिए सोशल मीडिया, फेसबूक, टिवट्र आदि की बारिकी से जानकारी चिकित्सक, स्वास्थ्य प्रबंधक को दिये गये । दो दिवसीय कार्यशाला के आज के समापन मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डाॅ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे, संचालक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग डाॅ. आर.आर.साहनी तथा अतिरिक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा डाॅ. निर्मल वर्मा ने की । इस अवसर पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मीजल्स-रूबेला अभियान में 9 माह से 15 वर्ष तक के उम्र का कोई भी बच्च छूटने न पाये । वहीं विभिन्न जिलों से आये हुये स्वास्थ्य अधिकारियों को सोशल मीडिया के अधिक से अधिक उपयोग करने की जानकारी विस्तार से दी गई । संचार के रणनीति व माॅनीट्रिंग साफटवेयर की जानकारी दी गई । ताकि अभियान के दौरान निर्धारित आयु सीमा के बच्चों को यह टीका लग सके । महिला स्वास्थ्य अधिकारियों को बताया गया कि महिला  समिति, विभिन्न समाज के महिला मंडल के माध्यम से सोशल मीडिया ने अभियान के बारे में जानकारी दी जा सके । ताकि वे समझकर इस अभियान में अपने बच्चों को टीकाकृत करा सके । कार्यशाला का उद्देश्य राज्य स्तर पर जिले व ब्लाॅक स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों को सोशल मीडिया के संचालन व मेटर बनाने के तरीके के बारे में जानकारी देना था ताकि वे अपने-अपने जिले में इस अभियान का सफलतापूर्वक संपादन उनके द्वारा किया जा सके । 
कार्यशाला में राज्य नोडल अधिकारी टीकाकरण डाॅ. अमर सिंह ठाकुर ने रूबेला-मीजल्स टीकाकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी । उन्होंने बताया कि यह एक संक्रामक रोग है । एक संक्रमित व्यक्ति के द्वारा खांसने और छींकने से फैलता है । स्त्री को गर्भावस्था के आरंभ में रूबेला का संक्रमण हो सकता है, जन्मजात रूबेला सिंड्रोम विकसित हो सकता है जो भू्रण और नवजात शिशुओं के लिये गंभीर व घातक साबित भी हो सकता है । 9 माह से 15 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को मीजल्स-रूबेला का टीकाकरण किया जाना आवश्यक है । अभियान में उन बच्चों को भी टीका लगाया जायेगा जिन्हें पहले से खसरा-रूबेला का टीका लगाये गये हों या कभी उनको खसरा-रूबेला संक्रमण या रोग भी हुआ हो ।

स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिलेगी अब सोशल मीडिया पर दो दिवसीय कार्यषाला का सुभारम्भ मीजल्स-रूबेला अभियान से सोशल मीडिया की होगी सुरुवात

रायपुर। स्वास्थ्य विभाग अब सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देगा । मीजल्स-रूबेला अभियान से सोशल मीडिया की तेजी से होगी शुरूआत । समाज के सभी वर्ग सरकारी और निजी स्कूल, बच्चों के माता-पिता, धार्मिक संस्थान, सामाजिक व्यक्ति, निजी डाॅक्टर आदि का सहयोग लेकर वर्तमान में चलाये जाने वाले खसरा-रूबेला के टीके का व्यापक प्रचार-प्रसार जमीनी स्तर तक किये जायेंगे । वहीं अभियान के संबंध में सकारात्मक व सहयोगात्मक माहौल भी बनाया जायेगा । उक्त बातें आज स्वास्थ्य संचालक श्रीमती रानू साहू ने दो दिवसीय कार्यशाला ’’स्टेट कम्यूनिकेशन वर्कशाॅप एंड टीओटी फाॅर मीजल्स-रूबेला वैक्सीनेशन कम्पैन’’ का शुभारंभ करते हुए कही । संचालक स्वास्थ्य ने कहा कि ग्राम स्तर तक के संचार गतिविधियों की कार्ययोजना बनाकर इस अभियान का प्रचार किया जाये । 
वहीं संचार के सबसे प्रमुख माध्यम गांव के छोटे कस्बे, मंजरे, पारे, टोले में मुनादि के माध्यम से इस अभियान की जानकारी दिया जाये । दो दिवसीय इस कार्यशाला में राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र के कार्यकारी संचालक डाॅ. प्रबीर चटर्जी, राज्य टीकाकरण अधिकारी डाॅ. अमर सिंह ठाकुर, अतिरिक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा व विभागाध्यक्ष कम्यूनिटी मेडिसिन डाॅ. निर्मल वर्मा, यूनिसेफ के डाॅ. अजय टकरू, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डाॅ. मनीष गंवडे, कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के डाॅ. मनीष प्रसाद सहित जिला टीकाकरण अधिकारी, शहरी स्वास्थ्य मिशन के सिटी प्रोग्राम मैनेजर, जिला टेªनिंग समन्वयक, आरएमएनसीएच कंसल्टेंट सहित जिले के मीडिया अधिकारी आदि उपस्थित थे । 
 
संचालक स्वास्थ्य ने कहा कि अभियान की सफलता के लिये छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग व स्वास्थ्य विभाग के सक्रिय भागीदारी से शत-प्रतिशत सफलता अर्जित की जा सकती है ।
 उन्होंने अभियान शुरू करने से कम से कम 8 सप्ताह पूर्व रणनीति बनाकर राज्य, जिला एवं ब्लाॅक व सब सेंटर तक संचार की कौन-कौन सी गतिविधियां की जानी है कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन किया जाये ।
 कार्यशाला में स्थानीय मीडिया, कलादल, मुनादि आदि का भी सहारा लिया जावेगा । राज्य स्तरीय कार्यशाला छत्तीसगढ़ शासन, संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें, पं.जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का भी सहारा लिया जावेगा

 

छगनलाल मूंधड़ा ने राजनाथ सिंह से मुलाकात किया।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- राजधानी रायपुर के अतिथि गृह पहुना में अभिषेक सिंह सांसद के साथ छत्तीसगढ़ औधोगिक विकास निगम के अध्यक्ष छगनलाल मूंधड़ा ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का स्वागत किया । इस अवसर पर विधायक लाभचंद बाफना , बजरंग खंडेलवाल , जयंती पटेल , अनूप खेलकर एवं रवि कुमार सहित काफी संख्या में कार्यकर्तागण उपस्थित थे। छगनलाल मूंधड़ा ने अलग से केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से अपने कार्य योजनाओं को लेकर विस्तृत जानकारी प्रदान किये साथ ही विकास यात्रा में मिल रहे जनसमर्थन के बारे में भी जानकर प्रदान किये।

जिस देश की संस्कृति खत्म हो जाती है वह देश खत्म हो जाता है : रमेश मोदी

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- मौका था छत्तीसगढ़ योग आयोग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय योग महोत्सव का जिसमे विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रमेश मोदी ने कहा कि जिस देश की संस्कृति खत्म हो जाती है वह देश खत्म हो जाता है। मंदिरों में हम पूजा पश्चात कहते हैं धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, गौ हत्या बन्द हो, विश्व का कल्याण हो ठीक उसी प्रकार यदि विश्व का कल्याण करना है तो वह योग से ही संभव है। आगे उन्होंने कहा कि योग का मतलब जोड़ना है। सबसे पहले अपने आपको जोड़ना होगा। यह नहीं करेंगे तो हम कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। योग एक ऐसा माध्यम है जिससे हम अपने मन पर नियंत्रण कर सकते हैं और रोजाना योग अभ्यास से हम अपने अनुसार चलेंगे न कि मन का सुनकर तात्पर्य यह है कि योग विद्या से ही मन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। आगे उन्होंने कहा कि सभ्यता बदलती रहती है लेकिन संस्कृति कभी नहीं बदलती और इसी संस्कृति को हमे बचाना है।

योग आयोग की विशेष बैठक हुई।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- माना स्थित छत्तीसगढ़ योग आयोग के मुख्य कार्यालय में दोपहर को अध्यक्ष संजय अग्रवाल के अध्यक्षता में  18 से 20 मई 2018 तक होने वाले राष्ट्रीय योग महोत्सव हेतु विशेष बैठक आहूत की गई जिसमें अध्यक्ष महोदय ने 3 दिन व्यापी राष्ट्रीय योग महोत्सव हेतु विभिन्न दिशा निर्देश दिए साथ ही कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों को दिए गए विभिन्न जिमेदारी की समीक्षा कर व्यवस्था को दुरुस्त करने हेतु कहा गया है।  ज्ञात हो कि 18 मई को सुबह 11 बजे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारंभ संसद रमेश बैस तथा रमेश मोदी करेंगे। आज के इस विशेष बैठक में योग आयोग के सचिव एमएल पांडेय, सदस्य डॉ रवि श्रीवास, पतंजलि योग पीठ की राज्य प्रभारी गंगा अग्रवाल, भूपेंद्र पांडेय, अखिलेश तिवारी, मनीषा पांडेय व आदि अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर प्रदेश के पत्रकार रायपुर में एकदिवसीय धरना दिए।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर प्रदेश भर से राजधानी रायपुर पहुचे पत्रकारों ने मोतीबाग में धरना दिया और राष्ट्रपति के नाम प्रति राज्यपाल ज्ञापन सौंपा जिसे एडीएम श्रीवास्तव ने धरनास्थल पर पहुचकर लिया। धरना में शामिल होने के लिए प्रदेश के पांचों संभाग से पत्रकार आए थे। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित धरने को वरिष्ठ पत्रकार गोविंदलाल जी वोरा के देहांत की वजह से जल्द समापन कर दिया गया तथा धरने के पहले उपस्थित जनसमूह ने दो मिनट का मौन धारण कर मृतात्मा को श्रद्धांजलि अर्पित किए। धरना स्थल पहुचकर समर्थन देने वालो में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों के साथ विभिन्न सामाजिक,राजनीतिक लोग शामिल थे जिसमें छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष रहे वीरेंद्र पांडेय, आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक संकेत ठाकुर, समाजसेविका ममता शर्मा, आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला थे सभी ने पत्रकारों के अधिकार पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग का समर्थन किया और चुनौतीपूर्ण पत्रकारिता के लिए आज के माहौल में अतिआवश्यक बताया। धरना में विभिन्न पत्रकार संगठनों के पदाधिकारियों में प्रमुख रूप से गोविंद शर्मा प्रदेश अध्यक्ष अभा पत्रकार सुरक्षा समिति, छग सक्रिय पत्रकार संघ से राज गोस्वामी, दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ के अध्यक्ष बप्पी राय, जर्नलिस्ट यूनियन छत्तीसगढ़ से शंकर पांडेय, छग पत्रकार कल्याण संघ से हरजीत सिंह पप्पू के अलावा रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा अपने साथी पदाधिकारियों के साथ पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए आयोजित आंदोलन में शामिल हुए। इनके अतिरिक्त विरष्ठ पत्रकारों में कमल शुक्ला, राजकुमार सोनी, संदीप पौराणिक, शुभ्रांशु चौधरी, रुचिर गर्ग भी धरना स्थल पहुचे थे। धरना में शामिल सभी पत्रकारों ने पत्रकार सुरक्षा कानून को छत्तीसगढ़ में जल्द से जल्द लागू किए जाने की मांग की साथ ही पत्रकारों पर दर्ज प्रकरणों में जल्द न्याय संगत फैसला कर दर्ज फर्जी प्रकरणों को वापिस लेने की मांग की है साथ ही कमल शुक्ला पर राजद्रोह के मामले को वापस लेकर पत्रकारों पर द्वेष पूर्ण पुलिस कार्रवाई पर अंकुश लगाने पत्रकारों पर एफआईआर के पूर्व बड़े अधिकारियों से जांच और समन्वय समिति की अनुशंसा पश्चात निर्णय लेने की मांग की है ताकि बेवजह पत्रकारों को परेशान प्रताड़ित करने के फर्जी मामलों पर अंकुश लगे जिससे पत्रकार निर्भीकता से समाचार संकलन और प्रकाशन,प्रसारण कर सके।धरना में उपस्थित पत्रकारों की संख्या और आक्रोश को देखते हुए पत्रकारों की मांगों पर शासन को शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना उचित प्रतीत होता है क्योंकि शामिल सभी पत्रकारों ने पत्रकार सुरक्षा कानून को अनिवार्य बताया साथ ही जल्द से जल्द लागू नही किये जाने की दशा में आंदोलन के विस्तार की बात कही है उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका है जिसमें प्रदेश भर से विभिन्न संगठनों और स्वतंत्र पत्रकारिता करने वाले पत्रकार सर्वाधिक संख्या में एक मंच में साथ आकर अपनी मांग आंदोलन के माध्यम से शासन के समक्ष रख जल्द से जल्द पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की है और अब देखना होगा कि सरकार पत्रकारों के मांगो पर गम्भीरतापूर्वक सार्थक निर्णय लेती है अथवा ढुलमुल रवैया अपनाती है।

सुख समृद्धि बाहर नहीं- अपने अन्दर व्याप्त है; खोजें, उसे और सुख-समृद्ध रहें - हृदयेष

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::-  पीएसएसएम (पिरामिड स्पिरिच्युअल सोसायटीज मूवमेन्ट) की सहयोगी संस्था सीजीपीएसएसएम द्वारा संचालित कचहरी चौक बाल आश्रम के निकट स्थित ‘‘कैलाष ध्यान केन्द्र’’ में आज साप्ताहिक ध्यान सत्र के अंतर्गत ध्यान मास्टर एवं षिक्षा विज्ञान से जुडे़ विषेशज्ञ हृदयेष चौहान द्वारा ‘‘जीवन में सुख-समृद्धि’’ विशय पर ध्यान सत्र का संचालन किया गया। आपने जीवन को सुख-समृद्धि पूर्ण बनाने के लिए उपस्थित ध्यानियों को बारह टिप्स दिये जो इस प्रकार हैं।  जीवन में सुख समृद्धि के लिए ऐसे अनेक उपाय हो सकते हैं लेकिन जीवन को षांतिपूर्ण बनाने के लिए व्यक्ति के अन्दर पहला सकारात्मक मानसिक विचारधारा, दूसरा स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए, आपसी सम्बन्धों में मीठास और मृत्यु और मय से मुक्त होना चाहिए ऐसा व्यक्ति, सचमुच जीवन में हर सुख पा सकता है, उसके अन्दर दुख, पीड़ा, अफसोस जैसे तत्व नहीं होते वह भावनाओं के साथ स्वयं को हमेषा सन्तुश्ट रखता है। उन्होंने कबीर के दोहे - ‘‘साई इतना दीजिए जा मे कुटुम समाय।  मैं भी भूखा न रहूॅं, साधु न भूखा जाए।। का उदाहरण देकर कहा हमारे साधु-सन्तों ने अपनी सोच धर्मग्रंथों और भक्तिगीतों में उकेर कर समाज को सुखी रहने का साधन लगातार बताया है, लेकिन मानमन है कि कुछ पाकर भी संतुश्ट नहीं होता और वह, अधिक से अधिक पाना चाहता है। अधिक पाकर भी वह सन्तुश्ट नहीं हो सकेगा- क्योंकि यही, मानव का स्वभाव है। मास्टर हृदयेष ने बताया की संतुश्टि ही सुख की कुंजी है और स्वंय को सकारात्मक भावों में जोड़े रखना उसका सम्बल है। इसीलिए यदि कोई व्यक्ति सुख-समृद्धि में जीना चाहता है तो उसका संतुश्ट होना जरूरी है और उसके अन्दर रिष्तों की मीठास भी रहना चाहिए।  जिसके अन्दर यह सब नहीं रहा वह कितने भी प्रयास करे बेचैन और परेषान रहेगा, दुखी ही रहेगा। व्यक्ति अपने विकास से खुष होता है; इसलिए उसमें उदार भाव का होना आवष्यक है जो उसे आगे बढ़ाने और सुख की ओर ले जाने में सहायक होता है। अन्त में उन्होंने कहा कि इस सब गुणों के बावजूद भी एक गुण का होना व्यक्ति में सर्वाधिक जरूरी है वह है- समानता का भाव, अर्थात व्यक्ति किसी से भेदभाव पूर्ण व्यवहार न रखे या किसी के प्रति हीन भावना न रखे और न हीं प्रतिस्पर्धात्मक भाव बनाए। ईष्वर ने सबको एक जैसा बनाया है सबके अन्दर एक जैसे गुण हैं- वह अपने उन गुणों का जितना अच्छा उपयोग करता है वह उतना ही श्रेश्ठ और सुखी होता है। देवतुल्य होता है, उसका सभी सम्मान करते हैं वह सबका सम्मानीय होता है - इसे पाने की चाह ही जीवन की पराकाश्ठा होती है। आपने, उपस्थित साधकों को 20 मिनट का ‘‘ आनापानसति’’ ध्यान भी करवाया तथा उनके अनुभव पूछे।

सिटी महाकालीबाड़ी में अमावस्या पूजा हुआ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- रायपुर सिटी महाकालीबाड़ी एवं विश्वनाथ मंदिर समिति, गोविंद नगर पंडरी में 14 मई की रात अमावस्य के दिन माँ काली की विशेष पूजा अर्चना की गई। इस उपलक्ष्य पर बंगाली समाज के लोग खासकर महिलाएं पूजन में सम्मिलित हुई तथा सभी ने मिलकर माँ काली को पुष्पांजलि अर्पित कर चरणामृत ग्रहण कर उपवास तोड़े। इसकी जानकारी समिति के सत्यजीत राय एवं शम्भू राय ने दिया। आगे उन्होंने बताया कि पूजन, महाआरती तथा पुष्पांजलि पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं को भोग प्रसाद वितरित किये गए। साथ ही यह भी जानकारी दिए कि रंजन बनर्जी द्वारा बांगला भाषा का निःशुल्क प्रशिक्षण प्रत्येक रविवार शाम 5 से 6 बजे तक दिया जा रहा है तथा बांग्ला भाषा सीखने हेतु उत्सुक महिला, पुरुष व बच्चे गोविंद नगर पंडरी स्थित सिटी कालीबाड़ी में सम्पर्क कर सकते हैं।

14 मई को पत्रकारों का महाधरना ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- रायपुर। पत्रकार हित के लिए एक मंच से प्रदेशभर के पत्रकार कल रायपुर में एकत्रित होकर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर मोतीबाग में महाधरना देंगे। पत्रकारों के विभिन्न संगठनों से जुड़े सदस्य पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले 14 मई 2018 को राजधानी रायपुर में एकत्रित होकर छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर धरना देंगे जिसमें वरिष्ठ पत्रकारों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता,राजनेताओं के शामिल होने के भी संकेत मिल रहे है । 14 मई 2018 को आयोजित धरना के सम्बंध में पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति के पत्रकारों ने बताया की हम पत्रकार राजधानी रायपुर में एकत्रित होकर "पत्रकार सुरक्षा कानून" लागू करने की मांग करेंगे जो आने वाले दिनों में जनपक्षीय पत्रकारिता के लिए अति आवश्यक है अन्यथा आज की स्थिति से कही ज्यादा भयावह स्थिति का सामना हमें और आने वाले पीढ़ी के पत्रकारों को करना पड़ सकता है जो पत्रकारिता को अपना कैरियर चुनकर पढ़ाई कर रहे है या किसी संस्था से जुड़कर संस्था के लिए कार्य कर पत्रकारिता सीख रहे है इसलिए 14 मई को प्रदेशभर के पत्रकार एकत्रित होकर एकजुट होकर पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग सरकार के समक्ष रखेंगे।

रिटकॉम के विद्यार्थियों ने संदेश दिया कि माँ का रूप होती हैं नर्सें।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- नर्सेज डे के उपलक्ष्य पर आरआईटी कॉलेज ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने "नर्सेज अ वॉइस टू लीड - हेल्थ इस अ ह्यूमन राइट थीम पर नर्स डे आरआईटी कॉलेज कैंपस में मनाया। आज के इस विशेष दिन में आरआईटी के नर्सिंग विद्यार्थियों ने नाटक के जरिये यह संदेश दिया कि नर्स माँ होती है अपने पेशेंट की तथा उनका देखभाल वे अपने बच्चे की तरह करते हैं। प्राचार्य बालाकृष्णन ने विद्यार्थियों को फ्लोरेंस नाईटएंगल के जीवनी को पढ़ने हेतु कहा तथा उससे शिक्षा ग्रहण करने हेतु प्रेरित भी किया। रिटकॉन के विद्यार्थियों ने नर्सेज डे के उपलक्ष्य पर क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जिसमें जीतने वाले प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया गया साथ ही रिटकॉन के सभी प्राध्यापकों ने प्रत्येक विद्यार्थियों को संदेश के साथ ऑटोग्राफ दिए।

एसएसपी अमरेश मिश्रा बाल बाल बचे

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमरेश मिश्रा आज रायपुर के कैनाल रोड पर बाल बाल बचे। उन्होंने खुद बस ड्राइवर की लापरवाही देखी और दुर्घटना से बचे, अगर थोड़ी भी चूक होती, तो बहुत बड़ी दुर्घटना घट सकती थी। आज दोपहर रायपुर के केनाल रोड पर रायपुर से सरसींवा जा रही एक तेज रफ्तार बस ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की कार के आगे अचानक ब्रेक लगा दी। बस के ठीक पीछे एक कार और थी और उसके पीछे रायपुर आईपीएस अमरेश मिश्रा की कार थी और वे दोपहर का भोजन कर अपने कार्यालय वापस लौट रहे थे। सामने बस के अचानक ब्रेक लगाते ही दोनों कारों का नियंत्रण बिगड़ गया और ड्राइवर के सूझ बूझ से बहुत बड़ी दुर्घटना होने से बच गई। अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ट्रैफिक कंट्रोल के साथ साथ बस, ऑटो , दोपहिया, चार पहिया चालकों जो रफ़ ड्राइविंग करते हैं उनके ऊपर क्या कठोर कदम उठाते हैं यह देखने लायक होगा।

मनरेगा बना जिम्मेदारों का कमाई का जरिया -वंदना राजपूत...मनरेगा भ्रष्टाचार का बड़ा जरिया बन चुका है

रायपुर :-भाजपा के शासन मे भ्रष्टाचार का प्रसार हर क्षेत्र मे हैं. तो मनरेगा कैसा छूट सकता हैं। मनरेगा मे बड़ी लापरवाही देखने को मिल रहीं हैं। नियमों को अनदेखी कर जिम्मेदार अफसर पैसों का गबन कर रहे। छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि मनरेगा भ्रष्टाचार के बड़ा जरिया बन चुका हैं.भाजपा चुनाव मे वादा करते हैं .कि मनरेगा मे 100 दिन का रोजगार दिया जायेगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अौर हैं। मनरेगा मे मजदूरों को 70 दिन का ही काम मिल रहा हैं. मनरेगा मे मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं होता अौर ना ही मजदूरों को मूलभूत सुविधाएं मिंल पाती.मनरेगा मे काम करने वाले मजदूरों के लिये ना ही पीने की पानी की व्यवस्था रहती हैं.अौर ना ही छायादार टेंट की सुविधा अौर ना ही महिला मजदूरों के छोटे बच्चों के देख रेख के लिये आया .तत्काल उपचार के लिये कोई व्यवस्था नहीं . एक साल पहले जांजगीर मे एक मजदूर की मौत हुई थी.कारण तत्कालीन उपचार व्यवस्था नहीं थी .शासन उसके बाद भी सजग नहीं हुआ अौर ऐसी लापरवाही लगातार हो रही हैं। भारतीय जनता पार्टी के दोहरे चरित्र जनता के सामने उजागर हो रही हैं।मनरेगा मे भारी अनियमिता देखने को मिलती हैं.मनरेगा मे मजदूरों के प्रति दिन उपस्थिति दर्ज भी नहीं किया जाता. फर्जी नाम जोड़े जाते हैं. फर्जी दस्तावेज पेश कर करोड़ों के घोटाला सचिव,सरपंच ,CEO सब मिलकर करते है. मजदूर दिन भर कड़ी धूप मे मेहनत की कमाई कर अपनी घर चलाता है. भ्रष्टाचार शासन मजदूर के मेहनत की कमाई पर भी डाका डाला जा रहा हैं। सरकार जनकल्याण के लिये कई योजना बनाती हैं.लेकिन यह योजना भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ जाती हैं.जमीनी हकीकत कुछ अौर रहती हैं। मनरेगा मे काम करने वाले मजदूर को सचिव ,सरपंच सम्बन्धित अधिकारी उसे अपने घर के निजी काम करवाया जाता हैं।मनरेगा के लिये जो ईट, रेत, गिट्टी ,सीमेंट आता हैं, उसे अपने निजि उपयोग मे लाते हैं। । मनरेगा के तहत जो मजदूरों को लाभ मिलना चाहिए.अो नहीं मिल पाता.सिर्फ़ वादा एवं भाषणों से गरीबों का पेट नहीं भरता अौर नहीं घर चलता हैं। .मनरेगा मे काम के साथ सही समय मे भुगतान करना होगा.मजदूर मजदूरी कर रहे हैं लेकिन मजबूरी मे।