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इतना तो तय है कि यह खेल है । पता बस इतना करना है कि यह कौन खेल रहा और किसके साथ ? स्वामिश्रीःअविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और गंगा "पाथवे" नाम की जिन योजनाओं का जिक्र वाराणसी की आकाश में विगत अनेक दिनों से तैर रहा है असल मे इस तरह की कोई योजना है ही नहीं । कम से कम श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के 94 वें बैठक दिनांक 18 मई 2018 का कार्यवृत्त तो यही कह रहा है । इससे तय हो जाता है कि काशी की धरती पर केन्द्र और राज्य की सरकारों के दिए गए करोडों रुपये से एक बहुत बड़ा खेल खेला जा रहा है पर यह खेल किसके साथ खेला जा रहा है और असली खिलाड़ी कौन है यह तय करना बाकी है । काशी का प्रशासन जनता को रख रहा धोखे में। क्या प्रशासन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी धोखे में रख रहा है ? इस बैठक की मिनट बुक के अंश जो कि काशी के लोगों से हम सब को प्राप्त हो रहे हैं उसके पृष्ठ चार और पैरा दो में कहा गया है कि "श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर के निकट एवं आसपास काफी भवन क्रय करके गिराए जा चुके हैं एवं काफी जगह खाली हो गई है" के दृष्टिगत एक विस्तृत कार्य योजना तैयार कर बोर्ड में अनुमोदन हेतु आर्किटेक्ट के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने के संबंध में न्यास परिषद द्वारा सर्वसम्मति से यह तय किया गया। इस वाक्यावली से स्पष्ट दिनांक 18 मई 2018 तक काशी विश्वनाथ काॅरीडार, गंगा पाथवे या किसी और तरह की कोई योजना शासन के पास नहीं है । स्पष्ट है कि शासन-प्रशासन आम जनता को धोखे में रखकर कार्य कर रहा है । और बिना किसी योजना के ही भवनों, मंदिरों और मूर्तियों को तोड़कर फेंक रहा है, जो की अत्यंत आपत्तिजनक है । सोच कर हंसी आती है कि अधिकारियों ने न जाने कितनी बार वक्तव्य दिया है कि "योजना सार्वजनिक की जाएगी" , मुख्यमंत्री को दिखाई जा रही है आदि । जबकि बैठक का कार्यवृत्त स्पष्ट करा देता है कि ऐसी कोई योजना है ही नहीं । तो फिर प्रश्न यह उठता है कि क्या वाराणसी का स्थानीय प्रशासन, जनता के साथ ही साथ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के साथ भी तो कोई खेल नहीं खेल रहे हैं ? "मंदिर बचाओ आन्दोलनम् का कार्यालय सबके लिए खुला" 3 जून 2018 को प्रातः 10 बजे शुभ चौघड़िया में काशी के नीलकंठ में सीके 33/21-22 भवन में "मंदिर बचाओ कार्यालय" का उद्घाटन संपन्न हुआ । इस अवसर पर स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने कहा कि यह कार्यालय उन सभी के लिए प्रातः 9:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक खुला रहेगा जो आन्दोलनम् से किसी भी प्रकार का संबंध स्थापित करना चाहते होंगे । कार्यालय में शीघ्र ही एक टोल फ्री नंबर भी स्थापित करने की योजना है । कार्यालय का अधीक्षक पद्माकर पांडे को बनाया गया है । काशी के धार्मिक सांस्कृतिक नक्शे "काशी- चित्रपटी" के निर्माण के लिए 21 सदस्यीय समिति का गठन संपन्न जैसा कि पूर्व में ही आन्दोलनम् की तरफ से घोषणा की गई थी - काशी के धार्मिक, सांस्कृतिक नक्शे "काशी- चित्रपटी" के निर्माण के लिए 21 सदस्यीय समिति का गठन संपन्न हो गया है । इस समिति की पहली बैठक कल दिनांक 4 जून को सायं 5:00 बजे से श्री विद्या मठ में संपन्न होगी । जनसभाओं का क्रम 5 जून से होगा प्रारंभ आन्दोलनम् के द्वितीय चरण में काशी के सभी गांवों और वार्ड में होने वाली मंदिर बचाओ सभाओं का क्रम 5 जून से आरंभ होगा । उत्तर दिशा से आरंभ होकर क्रमशः पूर्व, दक्षिण और पश्चिम के गांवों में सभाएं होंगी । जो क्रमशः बड़ा लालपुर, दोनूपुर, हरिहरपुर, अहमदपुर, कानुडीह, लोढान, लालपुर, सरसवां, बासुदेवपुर, होलापुर, हटिया, छतरीपुर, गणेशपुर, परमानंदपुर, चप्पेपुर,पिशोर, हटिया, डलियालपुर, भवानीपुर, लमही, रसूलपुर, वनवारीपुर, ऐढें और गढवा आदि १३०० ग्रामों से होते हुए सभाओं का क्रम आगे बढ़ेगा । आगे के गांवों की सूचना बाद मे यथावसर दी जाएगी ।

हर व्यक्ति के अच्छे काम का साथ देना चाहिए :: अविमुक्तेश्वरानंद:।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी ने आज श्रीविद्यामठ, काशी में अपने प्रवचन में उपस्थित भक्तों से कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के अच्छे कार्य की सराहना करनी चाहिए तथा अच्छे कार्य का साथ देना चाहिए। अच्छे कार्यों का साथ देने से , उसके सहभागी बनने से मन प्रसन्नचित रहता है तथा व्यक्ति सुकून से जीता है। आगे उन्होंने कहा कि हम न तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राहुल गांधी, अखिलेश यादव आदि की निंदा कर रहे हैं। हम तो काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर हेतु तोड़े गए पुराणों में वर्णित मंदिरों के लिए वर्तमान केंद्र सरकार व राज्य सरकार का विरोध कर रहे हैं। हम तो सन्यासी हैं। हम किसी राजनीतिक पार्टी के न तो प्रवक्ता हैं और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का प्रचार कर रहे हैं। हम केवल धर्म का प्रचार कर रहे हैं जिससे व्यक्ति अधर्म के पथ पर न चले। यह तो प्राचीन हिन्दू सनातन धर्म की रक्षा हेतु आंदोलन है जिससे हम अपने काशी के मंदिरों को ध्वंश होने से बचा पाए। आगे उन्होंने कहा आजकल लव-जेहाद शब्द बहुत सुनने को मिल रहे हैं। यदि हमारी बहने संस्कारवान होंगी, अपने धर्म के प्रति प्रेम होगा तो इस तरह की घटना घटित नहीं होंगी। मुस्लिम धर्म अलग हैं, उनके संस्कार अलग हैं जो किसी भी एंगल से सनातन धर्म से मेल नहीं खाता है। इस बाबत घर मे ही शुरू से एक शुक्ष्म रेखा पहले ही बना देना चाहिए जिससे बहनों को मालूम हो कि हमारे संस्कार क्या हैं और उनके संस्कार क्या है साथ ही एक दूरी भी होनी चाहिए जिससे कोई ज्यादा नजदीक न आ पाए और कोई व्यवहार बने। 

किस योजना के तहत काशी में मूर्तियों को तोड़ा गया बताएं मुख्यमंत्री :: अविमुक्तेश्वरानंद

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- काशी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने आज प्रैस वार्ता के दौरान यह प्रश्न उठाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि जिन मूर्तियों को तोड़ा गया है उनका विसर्जन गंगा जी में किया जाएगा। जबकि योगी जी ने इस बात पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया कि आखिर जिन खण्डित मूर्तियों का जिक्र वह स्वयं कर रहे हैं वह आखिर कैसे टूटी? किस के आदेश पर तोड़ी गई? किनके द्वारा तोड़ी गई? किस योजना के तहत इन्हे तोडा गया? यह कौन सी योजना है? तथा ऐसी किसी योजना में आगे और क्या क्या है? क्यूंकि बिना किसी योजना को उद्घाटित किए बगैर ही मन्दिर व देवविग्रह तोड़ दिए गए। इससे यह आशंका प्रबल होती है कि अभी न जाने कौन-कौन से मन्दिर देवविग्रह इस छिपी हुई योजना के तहत जमींदोज कर दिए जाएंगे। ऐसे में ऐसी अस्पष्टता की स्थिति में " मन्दिर बचाओ अभियानम्" जारी रखना होगा। जब तक मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री जी की ओर से कोई स्पष्ट योजना की जानकारी नहीं दी जाती तब तक चुप नहीं बैठा जा सकता। अभी तो अनेक प्रश्न हैं जो अनुत्तरित हैं।

वल्र्ड हेल्थ असेंबली में छत्तीसगढ़ प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे हुए सम्मिलित

डब्ल्युएचओ के डायरेक्टर जनरल ने   स्वास्थ्य  पर सक्रिय होने का किया आह्वान
 
रायपुर  दुनिया के सभी देशों के स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य के प्रतिनिधि मंडल का सबसे बड़ा सम्मेलन वल्र्ड हेल्थ असेंबली में छत्तीसगढ़ प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे सम्मिलित हुए। 
प्रतिनिधि मंडल में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे0पी0 नड्डा, भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव के प्रतिनिधि व तेलंगाना राज्य के स्वास्थ्य सचिव के साथ उन्होंने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ में संभवतः पहली बार ही होगा जो भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग से मिशन संचालक श्री भुरे को चुना गया। 
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 6 दिवसीय असंेबली जिनेवा, स्वीट्जरलेंड में आयोजित हुआ। अतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में डाॅ. भुरे ने भारत के  6 चरणों की पोषण नीति कार्यक्रमों का क्रियान्वयन के लिए निर्णय लिया जाने के बारे में सुझाव के साथ साथ स्वास्थ्य की रोकथाम और प्रबंधन पाॅलिसी की बात कही। 
वहीं भारत डिजिटल हेल्थ के संबंध में भी उन्होने जानकारी से अवगत कराया। भारत ने डिजिटल हेल्थ पर प्रस्ताव मरीजों का डिजिटल हेल्थ डाटा तैयार करना है। 
उन्होंने बताया कि डिजिटल डाटा तैयार करने में और भी देश शामिल हुए हैं। इसके अलावा भारत की ओर से पहले लाए गए सस्ती दवाईयों की उपलब्धता पर भी चर्चा की गई। यह सम्मेलन 21 मई से 26 मई 2018 तक आयोजित किया गया था। उल्लेख है कि इस सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से स्वास्थ्य सेवाओं बेहतर होगी की जानकारी दिये हैं। दुनिया भर के देशों के स्वास्थ्य मंत्री ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिये । 
विश्व स्वास्थ्य विषय पर डब्ल्यूएचओ निर्णय लेने वाला एक निकाय है। इसमें सभी डब्ल्यूएचओ सदस्य देशो के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया और कार्यकारी बोर्ड द्वारा तैयार एक विशिष्ट स्वास्थ्य एजेंडा पर केंद्रित जानकारी दी गयी। स्वास्थ्य के अलावा विश्व स्वास्थ्य असेंबली का मुख्य कार्य संगठन की नीतियों को निर्धारित करना, महानिदेशक नियुक्त करना, वित्तीय नीतियों की निगरानी करना और प्रस्तावित कार्यक्रम बजट की समीक्षा करना भी था। सम्मेलन में डब्ल्युएचओ के डायरेक्टर जनरल श्री टंेड्रोस एढेनाॅम ग्रिबेएसेस ने सर्वप्रथम संबोधित किया। श्री टंेड्रोस ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस साल की विश्व स्वास्थ्य सभा के सामान्य विषय ’’सभी के लिए स्वास्थ्य’’ सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय होने का आह्वान किये है। 

नवदिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ आयोजित।

"खबरीलाल" सुदीप्तो चटर्जी ::- सनातन धर्मानुरागी परिवार, वडोदरा, गुजरात द्वारा 1 जून 2018 से नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन सर सयाजीराव गायकवाड़ नगर में आयोजित किया जा रहा है। इस नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ में मुख्य वक्ता व कथावाचक के रूप में द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि तथा द्वारका शारदा पीठ के मंत्री दंडी स्वामी सदानंद जी सरस्वती अपने श्रीमुख से कथा का रसपान उपस्थित भक्तों एवं श्रद्धालुओं को करवाएंगे। उक्त जानकारी स्वामीजी के निज सचिव अंकित महाराज ने विज्ञप्ति जारी कर दिए तथा नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ में भक्तों एवं श्रद्धालुओं को उपस्थित रहने हेतु आग्रह किया। कथा रोजाना शाम 4:30 बजे से 7:30 बजे रात्रि तक होगा।

आज भी जागृत हैं काशी खण्डोक्त देव विग्रह ::- अविमुक्तेश्वरानन्दः

"खबरीलाल" सुदीप्तो चटर्जी (काशी) ::- मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के तहत ही सही काशी की पंचक्रोशी यात्रा करते समय देवताओं के जागृत होने का अनुभव हुआ । उनकी शक्ति और सामर्थ्य अतुल्य हैं। पंचक्रोशी यात्रा करते समय हम लोगों ने यह पाया कि अनेक देव विग्रह विलुप्त हो चुके हैं । यह तो शोध का विषय है कि वे कैसे और कब विलुप्त हुए ? आज हमलोग यहाँ श्रीविद्या मठ में उन सभी विलुप्त विग्रहों की सचल प्रतिष्ठा कर पूजन कर रहे हैं । आगे चलकर यह भी पता किया जाएगा कि ये विग्रह किन किन स्थानों पर थे तथा उन्हीं स्थानों पर जमीन खरीदकर मन्दिर बनाकर पुनः उन देवताओ की स्थापना की जाएगी। तब तक उन विग्रहों का श्रीविद्यामठ की ओर से पूजन किया जाता रहेगा । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने 30 मई 2018 को सायं 5 बजे श्रीविद्यामठ में आयोजित पंचक्रोशी के विलुप्त देवताओं के पूजन के अवसर पर कही । उन्होंने कहा कि हमें प्रशासन से कोई आशा नहीं है कि वह इन विग्रहों की स्थापना के लिए कोई सहयोग करेंगे । हम स्वयं ही देवताओं के नाम से जमीन खरीदेंगे या यदि कोई भक्त उस स्थान पर जमीन दे दे तो उस पर हम इन देवताओं के मन्दिर बनवाकर उनकी अचल स्थापना करेंगे ताकि यथा परम्परा पंचक्रोशी यात्रा के समय उसी उसी स्थान पर लोग इनका दर्शन कर आशीर्वाद लाभ प्राप्त कर सकें । आगे स्वामिश्री ने बताया कि पंचक्रोशी यात्रा के समय कुल 108 लोग साथ में थे, पर चलते चलते कुछ लोगों के शरीर ने साथ नहीं दिया । उसके बावजूद भी छप्पन लोग अन्त तक साथ में रहे । हम सभी ने कुल 832 देवताओं के दर्शन किये और 2,73,040 कदम चलकर 238.42 किमी की दूरी तय की गई । आज के इस शुभ अवसर पर आचार्य पं धनंजय दातार के आचार्यत्व में स्वामिश्रीः ने सभी शिवलिंगो की सचल प्राण प्रतिष्ठा कर अभिषेक और पूजन किया । पूजन समारोह में राजेन्द्र तिवारी (बबलू ), गिरीश तिवारी, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी मुरारी स्वरूप जी महाराज, ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानन्द जी महाराज, सावित्री पाण्डेय , रागिनी पाण्डेय, सुनीता जायसवाल, ब्रह्मबाला शर्मा, रूपेश तिवारी, नरसिंह मूर्ति , राजनाथ तिवारी, अभयशंकर तिवारी , उद्देश्य तिवारी व आदि भक्त उपस्थित थे । इस शुभ अवसर पर डॉ परमेश्वर दत्त शुक्ल ने कहा कि लोक कल्याण के लिए जिस प्रकार स्वामिश्रीः ने पदयात्रा की और काशी खण्ड के देवालयों का दर्शन कर विलुप्त देवी देवताओं की स्थापना कर रहे हैं वह इतिहास बन रहा है । अपने विचार व्यक्त करते हुए राजेन्द्र तिवारी (बबलू) ने कहा कि यात्रा के समय स्कन्दपुराण के वर्णित विषय से आज की काशी किस तरह अलग हो रही है, इसे संरक्षित करने की बहुत आवश्यकता है। उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि आज तक हमने अनेकों लोगों को दर्शन कराया पर ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ । किसी ने भी इतनी गहराई से पंचक्रोशी यात्रा नहीं की और विलुप्त देव विग्रहो के बारे में विचार नहीं किया । यह इतिहास में सम्भवतः पहली बार हुआ है। डॉ विजयनाथ मिश्र ने कहा कि स्वामिश्रीः ने पंचक्रोशी यात्रा कर इतिहास रच दिया है । आज धर्म कार्य के लिए युवाओं की आवश्यकता है । जब हम सब घाट पर से गुजरते हैं तो हमारा शीश करपात्री जी गुरुजी और स्वामिश्रीः के प्रति झुक जाता है । बिना गुरु और भगवान् के हमें निरोगी काया का आशीर्वाद नहीं मिल सकता । आज लोग काला धन खोजने में लगे हैं पर स्वामिश्रीः भगवान् और उनके मन्दिरो को खोजने में लगे हैं । आपकी यात्रा का जो सोशल मीडिया पर लाइव किया गया उससे अनेक लोगों को घर बैठे ही दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ । डॉ हरेन्द्र शुक्ल ने कहा कि यह धर्म की लडाई है और इसमें विजय धर्म की हो होनी है । जिस प्रकार फ़िल्म में अन्तिम समय तक खलनायक लडता है और अन्त में वह परास्त होता है उसी प्रकार धर्म के द्रोही लोग अन्त में समाप्त होंगे और विजय स्वामिश्रीः की ही होगी । राजनाथ तिवारी ने कहा कि आज काशी के लोग आन्दोलन के साथ नहीं आ रहे हैं , वे अपने पैर पर खुद ही कुल्हाडी मार रहे हैं । उनको अपना भविष्य नहीं दिख रहा है पर एक दिन उनको अवश्य समझ आएगा । स्वामी जी की तपस्या काशी को बचाने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी । अवधेश दीक्षित ने कहा कि आज का युवा हर चीज गूगल पर खोजता है । अतः हम सबको मिलकर एक सांस्कृतिक मैपिंग करानी चाहिए जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से मन्दिर , तालाबों तक पहुँच जाए । गिरीश तिवारी ने कहा कि काशी की धरती के लिए स्वामिश्रीः का योगदान अविस्मरणीय है । यात्रा पर जब निकले तो लोगों ने अपना कष्ट बताया । देवालय ही नहीं तालाब आदि भी कब्जा किए जा रहे हैं । यात्रा के बाद दृष्टि ही बदल जाती है । जब हम सब लौटे तो हर घाट में देव विग्रह के दर्शन होने लगे । यह यात्रा का आध्यात्मिक लाभ है ।

पैरों में छालों के बावजूद इस भीषण गर्मी में मंदिरों को बचाने स्वामिश्री कर रहे हैं कठिन तपस्या।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल"(काशी) ::- मई माह के भीषण गर्मी तथा तप्ती धरती में काशी के प्राचीन मंदिरों को बचाने हेतु दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कर रहे हैं कठिन तपस्या। स्वामिश्री 13 दिनों से नंगे पांव निरंतर पदयात्रा कर रहे हैं जिसमे आज 28 मई पंचक्रोशी यात्रा का तीसरा दीन है। उनके पदयात्रा में छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित सलदाह धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज, जशपुर आश्रम के ब्रह्मचारी, साध्वी, अनुयायी, बटुक एवं आम जनता उनके साथ नंगे पांव पदयात्रा कर रहे हैं जिससे स्वामिश्री के मंदिर बचाओ तपस्या पूर्ण हो सके। ज्ञात हो विगत दिनों में पुराणों में वर्णित 3 विनायक मंदिरों को तोड़ दिए गए जिससे स्वामिश्री व्यथित हैं और आम जनता में रोष व्याप्त है। इस आन्दोलनम के क्रम में उत्तरप्रदेश प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व सांसद राज बब्बर, जदयूएस के युवा विंग तथा विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने मंदिर बचाओ आन्दोलनम को अपना पूर्ण सहयोग दे रहे हैं।  स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है - पैरों में छाले हों, फर्जी मुकदमें हों या कोई और व्यवधान हो हमें रोक नही सकती, हम ये नही कहते की हम सबकुछ ठीक कर लेंगे लेकिन जबतक शरीर है, धर्म के प्रति प्रतिबद्धता है, हम हर कोशिश करके अपने मूल्यों को अपनी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का हमारा परम दायित्व है । पदयात्रा में चल रहे संत महात्मा, बटुक व नागरिक लगातार इन नारों से लोगों को जागृत कर रहे हैं - हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ गंगे । बचाने हर मन्दिर प्रभु का, चले हैं काशी वासी संगे ।। जो विकास मंदिर तोडवाए, वो हमको स्वीकार नही । जनता का दुख-दर्द ना समझे, समझो वो सरकार नही ।। हमको मनकी कहने दो, काशी को काशी रहने दो । खुद को हिन्दू बोल रहे हो, फिर भी मंदिर तोड रहे हो ।। यदि अब मंदिर एक भी टूटा, समझो भाग्य तुम्हारा फूटा । हम समझेंगे तोड के मन्दिर, हमसे रिश्ता तोड रहे हो ।। आज 28 मई पंचक्रोशी यात्रा का तीसरा दीन है। 27 मई की रात स्वामिश्री लंगोटी हनुमान से चलकर रामेश्वर में विश्राम हेतु रुके तथा आज सुबह 5 बजे रामेश्वर से पदयात्रा शुरू हुई जो हरहुआ में कुछ पल विश्राम हेतु कमलेश यादव के निवास में रुका। यह पद यात्रा कल समाप्त होगा तथा स्वामिश्री आम जनों को संबोधित करेंगे।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पंचक्रोशी यात्रा प्रारम्भ।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पंचक्रोशी यात्रा प्रारम्भ। खबरीलाल सुदीप्तो चटर्जी - एक्सक्लूसिव लाइव रिपोर्टिंग (काशी) ::- पूज्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने काशी के मणिकार्णिका घाट से संकल्प कर मंदिर बचाओ आन्दोलनम हेतु पंचक्रोशी यात्रा आरम्भ किये। स्वामिश्री के साथ उनके सहायक मयंक शेखर मिश्रा, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, श्रीविद्या मठ के बटुक व अन्य काशी वासी मंदिर बचाओ आन्दोलनम हेतु स्वामिश्री के साथ 26 मई सुबह मणिकार्णिका घाट से कंधवा तक 15 कि.मि. की पदयात्रा किये तथा शाम को कंधवा से भीमचण्डी तक 15 किमी की और पदयात्रा किये जिससे काशी वासी जागृत हो कि काशी के मंदिर जो पुराणों में वर्णित है उन्हें तोड़े जा रहे हैं जिसमे तीन प्राचीन विनायक मंन्दिरों को विकास के नाम पर तोड़ दिए गए हैं। पूज्य स्वामिश्री का जगह जगह लोगों द्वारा माला पहनाकर स्वागत किया गया तथा मंदिर बचाओ आन्दोलनम को समर्थन देने की बात स्वामिश्री से कहा। स्वामिश्री रात्रि विश्राम भीमचण्डी में किये तथा अल सुबह 5 बजे पदयात्रा भीमचण्डी से शुरू होकर रामेश्वरम तक किये। भीमचण्डी से रामेश्वरम के बीच पड़ने वाले गांवों के लोग अपने घरों से निकलकर स्वामिश्री का स्वागत किये और समर्थन कि बात कही। पूज्य स्वामिश्री काशी नगरी के प्राचीन धरोहरों को बचाने हेतु नंगे पांव पदयात्रा कर रहे हैं साथ ही उनके साथ पदयात्रा में शामिल साधु, संत, बटुक व नागरिक भी नंगे पांव तप्ती गर्मी में पदयात्रा कर रहे हैं जिससे पुराणों में वर्णित मन्दिरों को बचाया जा सके तथा विकास के नाम पर विनाश बन्द हो । इसके साथ ही काशी को अपने मूल स्वरूप में ही रहने दिया जाए जिस हेतु देश विदेश के लोग, श्रद्धालु काशी नगरी के प्राचीन मंदिरों के साथ साथ गलियों का भी भ्रमण करते हैं।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है भरपूर जनसमर्थन।

।। "खबरीलाल" सुदीप्तो चटर्जी की विशेष टिप्पणी ।। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि एवं ज्योतिष पीठ के मंत्री पूज्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने काशी में कॉरिडोर बनाने हेतु पुराणों में वर्णित प्राचीन मंदिरों को तोड़े जाने पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इस कार्य का पुरजोर विरोध किया और इसी क्रम में स्वामिश्री ने काशी के धरोहरों को बचाने तथा जिस हेतु काशी विश्वविख्यात है उन सब मंदिरों को बचाने हेतु "मंदिर बचाओ आन्दोलनम" की शुरुवात की। स्वामिश्री के इस धार्मिक कार्य हेतु काशी वासियों का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है लेकिन बड़े दुःख की बात है कि आज तक किसी भी राजनीतिक पार्टी के बड़े नेताओं ने इस आन्दोलनम हेतु स्वामिश्री के साथ खड़े नजर नहीं आये। सभी राजनीतिक दल को समझना होगा कि धर्म नगरी काशी में देवताओं का वास होता है साथ ही साथ यह सिद्ध नगरी है जिसे देखने के लिए विदेशों से लोग आते हैं और बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के साथ साथ काल भैरव, दुर्गा मंदिर, दुर्गा कुंड, हनुमान मंदिर , कामाख्या मंदिर, सिद्ध पीठ महालाक्षी मंदिर आदि का दर्शन कर देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा मणिकर्णिका घाट में पूण्य स्नान भी करते हैं। भारत देश अपने प्राचीन सनातन धर्म और संस्कृति के लिए जाने जाते हैं जिसमे काशी समूचे विश्व में अपना अलग स्थान बनाये हुए हैं। लोगों की आस्था इस धर्म नगरी काशी से जुड़ी हुई है और इसी आस्था को विकास के नाम पर चोट पहुंचाने की कोशिश हो रही है जो ग्राह्य नहीं है। काशी क्षेत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यदि उनके संसदीय क्षेत्र में ऐसा हो तो अन्य राज्यो, जगह में फिर क्या होगा। कौन बचाएंगे भारत के प्राचीन धरोहरों को ?  उत्तरप्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी एक संत हैं तथा उन्हें भली भांति मालूम भी है कि किस तरह लोगों की आस्था काशी नगरी से जुड़ी हुई है। इस आन्दोलनम हेतु काशी वासियों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ स्वयं काशी में चल रहे मंदिर बचाओ आन्दोलनम को अपना समर्थन देंगे तथा वे पूज्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से इस बाबत चर्चा कर बीच का रास्ता निकालेंगे तथा उत्तरप्रदेश के प्राचीन धरोहरों को बचाने हेतु अपनी पूर्ण सहभागिता भी प्रदान करेंगे। कई सामाजिक संस्था जो मंदिर बचाओ आन्दोलनम से जुड़े हैं उनका कहना है चूंकि योगी आदित्यनाथ खुद एक बड़े संत हैं और उनकी भी आस्था है तो यह आशा हम कर ही सकते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस गंभीर विषय का हल स्वामिश्री से वार्ता कर  निकलेंगे ।

काशी के मणिकर्णिका से आरंभ हुई पंचक्रोशी यात्रा।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- भगवान साक्षी विनायक के संरक्षण में व्यास पीठ ज्ञानवापी से संकल्पित होकर मणिकर्णिका से आरम्भ हुई पंचक्रोशी यात्रा । ज्ञात हो कि पूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती काशी के प्राचीन मंदिरों को बचन्द हेतु समूचे काशी के मंदिरों में वे जा रहे है साथ मे काशी के जनता भी मंदिरों को बचाने, काशी के धरोहर जो पुराणों में वर्णित है उसे बचाने हेतु संकल्प लेकर पूज्य स्वामिश्री के साथ पदयात्रा कर रहे है। आज 26 मई 2018 पदयात्रा का 11 वां दिन है। हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ गंगे । काशी के मंदिरों को बचाने स्वामिश्री ने नारा दिया - हर मन्दिर प्रभु का, चले हैं काशी वासी संगे ।। जो विकास मंदिर तोडवाए, वो हमको स्वीकार नही । जनता का दुख-दर्द ना समझे, समझो वो सरकार नही ।। हमको मनकी कहने दो, काशी को काशी रहने दो । खुद को हिन्दू बोल रहे हो, फिर भी मंदिर तोड रहे हो ।यदि अब मंदिर एक भी टूटा, समझो भाग्य तुम्हारा फूटा । हम समझेंगे तोड के मन्दिर, हमसे रिश्ता तोड़ रहे हो ।।

जनता अपने हितों की रक्षा के लिए खुद खडी हो - अविमुक्तेश्वरानन्दः

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- भारत के लोगों ने परम्परा से प्राप्त राजतंत्र को नकार कर लोकतन्त्र की स्थापना इसीलिए की थी कि तत्कालीन राजागण जनता के दुख दर्द को नहीं सुन रहे थे ।सोचा यही गया था कि जनता के बीच का कोई व्यक्ति यदि शासन संभालेगा तो जनता के दु:ख दर्द के समझ सकेगा, पर दुर्भाग्य से ऐसा हो न सका । पार्टियां सत्ता पाने और बनाये रखने में इतनी तल्लीन हो गई हैं कि उनके पास जनता का दु:ख दर्द सुनने व समझने का समय ही नही रह गया है । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने आज सायं धर्मसम्राट् स्वामी श्री करपात्री जी महाराज द्वारा स्थापित काशी विश्वनाथ मन्दिर परिसर में व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि जनता नेता को अपना कीमती नोट-वोट और सपोर्ट देती है इसलिए कि वह किसी विपत्ति के समय उनके साथ खड़े होंगे , पर काशी में हमारे हजारों वर्षों से पूजित मन्दिर टूट रहे थे तब किसी भी पार्टी का कोई भी नेता आकर खड़ा नहीं हुआ । स्वामिश्री ने आगे कहा कि आज जनता को अपने सरोकारों की रक्षा के लिये स्वयं खड़े होने का समय आ गया है । ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द ने अपने उद्बोधन में कहा कि काशी धर्म नगरी है । यहाँ से ही सब सन्देश विश्व में जाता है । यदि यहाँ ही गलत होने लगेगा तो यहाँ से गलत सन्देश ही बाहर जाने लगेगा। इसलिए यहाँ कुछ गलत न हो इसके लिए स्वामिश्रीः मन्दिर बचाओ आंदोलनम् चला रहे हैं। पद्माकर पाण्डेय ने कहा कि मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के कारण आज मन्दिरों पर हथौड़ा चलना बन्द हो गया है । यह स्वामिश्रीः की आध्यात्मिक शक्ति का परिणाम है । डा लता पाण्डेय ने कहा कि लोग आज घर से नहीं निकल रहे पर बके मन में मन्दिरो के लिए पीड़ा है । एक चिंगारी के रूप में स्वामिश्रीः निकले हैं, अब लोगों को निकलने में देर न लगेगी । आर्य शेखर ने कहा कि विक्स हमेशा ही विनाश पर ही खड़ा होता है । मैं इस आन्दोलनम् के लिए पूरी तरह से समर्पित होने आया हूँ । अमित पाण्डेय ने कहा कि हम सब आन्दोलनम् के साथ तन मन से जुड़े हैं । स्वामी जी पर लोग आरोप लगा रहे हैं कि वे राजनीति कर रहे हैं पर यह सबको जानना चाहिए कि कोई भी सरकार हो जब वह सनातन धर्म के विरुद्ध कुछ करती है तो सरकार के खिलाफ निडर होकर खड़े होते हैं । चेतन शर्मा वैदिक ने कहा कि सन्तो के पास राजनीति नहीं आध्यात्म नीति होती है । मोदी जी विकास करना चाहते हैं पर यह विनाश है । सच्चा विकास केवल आध्यात्मिक उन्नति ही है । डॉ विजय नाथ मिश्र ने कहा कि आज करपात्री जी के स्थान पर आकर सभी पुरानी बातें स्मरण में आ रही हैं । मन्दिरों की मर्यादा को सुरक्षित रखने का जो कार्य करपात्री महाराज ने आरम्भ किया था वह स्वामिश्रीः के नेतृत्व में अवश्य पूरा होगा । आज प्रमुख रूप से राजेन्द्र तिवारी बबलू , काशी के डोम राजा चौधरी , सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, कृष्ण कुमार शर्मा, डॉ लता पाण्डेय , रविकान्त यादव , आर्य शेखर, गौरीनाथ, हरि प्रकाश पाण्डेय , पद्माकर पाण्डेय , सुनीता जायसवाल, सावित्री पाण्डेय , ब्रह्मबाला शर्मा , कुशला दुबे आदि विशिष्ट जन उपस्थित रहे । कार्यक्रम का शुभारम्भ गौर भारती वैदिक मंगलाचरण से हुआ । पौराणिक मंगलाचरण प्रशान्त त्रिपाठी ने किया । संचालन रूपेश तिवारी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ श्रीप्रकाश मिश्र ने किया । राजनेताओं से हम निराश है राज बब्बर और प्रमोद तिवारी आज पूज्य स्वामिश्रीः से मिलने आए । स्वामिश्रीः ने उन लोगों से कहा कि हम लोगों ने वेद मन्त्रो से अभिषिक्त राजा को छोड़कर लोकतन्त्र को चुना पर आप सब अपनी कुर्सी को बचाने मे लगे हैं तो आप सब अपने मे ही रहो । हम सबको अपने हाल पर छोड़ दो । आप सबने जनता के हृदय से जुड़े मुद्दों को छोड़ दिया है इसलिए हम आप सबसे निराश हैं । जब अपने को हिन्दू कहकर आए नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ मन्दिरों पर हथौड़ा चला रहे हैं तो आप से क्या उम्मीद की जाए ? पर यह साफ समझ लीजिये कि सौ करोड़ हिन्दुओं के देश में मुस्लिम तुस्टीकरण से आप देश को नही चला सकेंगे । आज यात्रा का दसवाँ दिन आज मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के अन्तर्गत चल रही यात्रा का दसवाँ दिन है और आज काशी खण्डोक्त लगभग 900 मन्दिरों का दर्शन पूजन सम्पन्न हुआ । कल से यह यात्रा पंचक्रोशी के लिए प्रस्थान करेगी । सुबह 5 बजे ज्ञानवापी में यात्रा का संकल्प लेकर सभी भक्त स्वामिश्रीः के नेतृत्व में तीन दिन की पैदल यात्रा करेंगे ।

धर्म द्रोहियों से हमारा सम्बन्ध समाप्त - अविमुक्तेश्वरानन्दः

धर्म द्रोहियों से हमारा सम्बन्ध समाप्त - अविमुक्तेश्वरानन्दः हमारे शास्त्रों में कहा गया है मौनं स्वीकृति लक्षणम् माने जो लोग अपने सामने कुछ भी होता हुआ देखें और कोई प्रतिदिन करें, चुप रहें तो उनके मौन को स्वीकृति मान लिया जाता है। वर्तमान में काशी में अनेक मन्दिरों और मूर्तियों को तोडकर प्रशासन ने मलबे में मिला दिया है और सन्त और विशिष्ट जन इस पर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं इसलिए हम समझते हैं कि ऐसे धर्मद्रोहियों से अपना सम्बन्ध ही समाप्त कर लें । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने आज की सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी ने भी कहा था - तजिये ताहि कोटि वैरी सम ,यद्यपि परम सनेही । जाके प्रिय न राम वैदेही । उन्होंने आगे कहा कि हम संता के विरोधी नहीं हैं और न ही ये चाहते हैं कि कोई भी सन्त प्रशासन से अपना व्यवहार बिगाड़े परन्तु कम से कम जब हमारे सनातन प्रतीकों पर देवालयों पर हथौड़ी चल रही हो तो चुप रहना उचित नहीं। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि यह भी आवश्यक नहीं कि सब हमारे पीछे ही चल पड़े पर जहाँ हैं वहाँ रहकर भी अपने स्तर से अपना विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। सभा में ब्रह्मचारी उद्धव स्वरूप , ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द , ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानन्द , अधिवक्ता रमेश उपाध्याय एवं आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण से हुआ। संचालन मयंकशेखर मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन ब्रह्मचारी मुरारी स्वरूप ने किया।

सोनारी का काम लोहारों के हाथ में-अविमुक्तेश्वरानन्दः

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" :- सोनारी अर्थात् सोने का कार्य । जिसे सोनार भाई करते हैं । सोनारी काम की विशेषता यह है कि इस काम को बड़े धैर्य से धीरे धीरे करना होता है । सोने का एक कण भी व्यर्थ किये बिना सोने में नक्काशी करना । यह सोनारी काम की विशेषता है । इसलिए सोनार छोटी छोटी हथौड़ी आदि औजारों के साथ काम करते हैं । वहीं लोहे का काम करने वाले लोहार अपने हाथ में वज़नदार हथौड़ा या घन रखते हैं । और बेपरवाही से चोट करते हैं ।यह अन्तर इसीलिए आता है क्योंकि सोना और लोहा इन दोनों धातुओं के मूल्य में बड़ा अन्तर होता है । काशी और अन्य कोई नगर एक से नहीं हैं । काशी सोना है । पर आज काशी में जो हो रहा है वह लोहारी जैसा है ।इसका परिणाम यह है कि काशी की मूल्यवान धरोहरें, जीवन्त स्थापत्य और काशी की पहचान आदि सब के सब खतरे में पड़ गये हैं ।उक्त उद्गार मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् के अन्तर्गत अपने सहयोगियों सहित काशी की नंगे पाँव पदयात्रा कर रहे स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने यात्रा के पांचवे दिन के पड़ाव जैतपुरा के नागकूप पर आयोजित सभा में कहीं । उन्होंने आगे कहा कि हाँ, काशी पुरानी है । पर पुरानी चीजों का अपना महत्व होता है । आजकल उस महत्व को एन्टीक वेल्यू के रूप में कहा जाता है । विचार करिये कि कहीं नये के व्यामोह में हम अपने इस एन्टीक वेल्यू वाले नगर को खो तो नहीं रहे हैं ? यदि किसी के मन में नयेपन की अभिलाषा है तो वह भी गलत नहीं है । पर बहुत से लोग पुराने को भी पसन्द करते हैं । तो पुराने को बनाये रखते हुये नये का निर्माण स्वागत योग्य हो सकता है । ऐसे लोगों को नई काशी का निर्माण करना चाहिए । वे नई काशी को जितना चाहें सुन्दर बना सकते हैं ।

मुख्यमंत्री में नहीं रह गया जनता से सामना करने का साहस - स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती  

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- आज जिस तरह से पहले उत्तर प्रदेश के माननीय संवेदनशील मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी द्वारा काशी में मंदिरों, मूर्तियों को तोड़े जाने और पेंड़ को काटे  जाने के विरुद्ध चलाए जा रहे "मंदिर बचाओ आंदोलन" के लोगों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया और फिर जिस तरह उनको बीच रास्ते रोक कर वापस लौटाया गया , उससे यह पता चलता है कि मुख्यमंत्री के अंदर जनता को सामना करने का साहस समाप्त हो गया है । यह विचार स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती  ने लोहटिया चौराहे से लक्ष्मी कुंड लौटने के उपरांत लोगों से कही ।  ज्ञात हो की स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के अंतर्गत विगत 16 मई से काशी में  पुराणोक्त मंदिरों के दर्शन, पूजन की यात्रा पर हैं जिससे काशी के प्राचीन मंदिरों को बचाया जा सके ।   स्वामी जी जब  लगभग 2 किलोमीटर वापस आ गए तब पुलिस के कुछ अधिकारी आये और कहा स्वामी जी वापस चलिए। स्वामी जी ने बताया कि हम मर्यादा मानसम्मान सबकी परवाह किये बगैर इसीलिए मुख्यमंत्री जी के पास जा रहे थे क्योंकि हमको आशा थी शायद मुख्यमंत्री जी को काशी में जो कुछ हो रहा वो ठीक से नहीं पता नहीं होगा । जब उनको हम सब बताएंगे , उनको ध्यान में आएगा और कार्यों को जो कि काशी में अनर्थ के रूप में हो रहे हैं उसे वे रोक देंगे। लेकिन जिस तरह से हम सभी को लौटाया गया उससे  पता चल गया की जनता से सामना करने की हिम्मत माननीय मुख्यमंत्री में नही  है । जरुर उनको कहीं ना कहीं अंतर्मन में अपराध बोध होगा । आगे स्वामी जी ने बताया कि मंदिरों और मूर्तियों के तोड़ने से रोकें जाने तक आंदोलन चलता रहेगा और किसी भी प्रकार से रुकेगा नहीं। हम आशा करेंगे कि सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों को सद्बुद्धि आएगी और वह परिस्थिति की गंभीरता को समझेंगे और निर्णय लेंगे । 

देखा, सिसक रही थी काशी। नंगे पाँव चला सन्यासी :: अविमुक्तेश्वरानंद

:: सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" रिपोर्ट :: देखा, सिसक रही थी काशी। नंगे पाँव चला सन्यासी ।। काल अनादि रही संरक्षित, शिव का मयआनंद अलौकिक, घर-घर कंकर-शंकर पूजित, अब क्यूँ सिसकी भरती काशी, नंगे पाँव चला सन्यासी।। “मैंने तो गंगा से मिलकर, अविमुक्त ये क्षेत्र बनाया। अपने अंचल में ले, जलकर, तेरे पुरखे मुक्त कराया। मैंने बाबा शिव को, हठ कर, कैलाश से यहाँ बुलवाया। तेरे मन को शांति मिले, सारे देवों को यहाँ बसाया। मेरे अंग भंग कर अब क्या, मुझे बनायेगा क्योटो-सी” देखा, सिसक रही थी काशी। नंगे पाँव चला सन्यासी ।। ...स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद