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दिल्ली : कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर गृह मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक जारी

नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी अब कोरोना कैपिटल में तब्दील होती जा रही है। कोरोना से बदतर होते हालात पर मोदी सरकार हरकत में आ गई है। इस पर फैसला लेने के लिए दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक जारी है। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत स्वास्थ्य सेवाओं व प्रशासन के सीनियर अधिकारी हिस्सा लेंगे। इसके बाद अमित शाह दिल्ली के तीनों मेयरों से मिलकर दिल्ली की परिस्थिति पर चर्चा करेंगे। 

इससे पहले, दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली के 10 से लेकर 49 बेड के सभी नर्सिंग होम को कोविड नर्सिंग होम घोषित कर दिया। केजरीवाल सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा कि तीन दिन के अंदर मरीजों के लिए व्यवस्था करनी होगी, नहीं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। एलजी अनिल बैजल ने आदेश दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और उनसे जुर्माना वसूला जाए।  

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली केन्द्र सरकार के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। दिल्ली में शनिवार को फिर 2,000 से अधिक नए मामले सामने आए। महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद देश में कोरोना के सबसे अधिक मामले दिल्ली में हैं।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक शनिवार को राजधानी में 2,134 नए लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई और 57 लोगों की मौत हुई। इसके साथ ही दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की संख्या 38,958 पहुंच गई है। इनमें 22,742 ऐक्टिव केस हैं जबकि 14,945 मरीज इस महामारी से उबर चुके हैं। राजधानी में अब तक 1,271 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली में कोरोना के 2,137 नए मामले सामने आए थे जबकि 129 लोगों की मौत हुई थी।

अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं 15 जुलाई से : शिक्षकों की नियुक्ति और विद्यार्थियों का प्रवेश 30 जून तक होगा पूरा

रायपुर, 14 जून 2020 प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं 15 जुलाई से प्रारंभ होंगी। इन अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति और विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया 30 जून तक पूर्ण कर ली जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।

    अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालन के लिए कलेक्टरों से कहा गया है कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूल के लिए शिक्षकों की व्यवस्था के संबंध में राज्य शासन द्वारा कुछ पदों पर पदस्थापना की गई है, परंतु अधिकांश पद रिक्त हैं। रिक्त पदों पर स्थानीय स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति द्वार संविदा पर भर्ती की कार्रवाई पूर्व निर्देशानुसार की जानी है। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने जिला कलेक्टरों से कहा है कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए शिक्षकों की व्यवस्था की कार्रवाई आगामी 15-20 दिनों में पूर्ण कर ली जाए। जिससे जुलाई माह से वर्चुअल क्लास के रूप में प्रारंभ किया जा सके।

 कलेक्टर स्कूलों की अधोसंरचना के संबंध में अन्य अधिकारियों के साथ जिले के सर्वश्रेष्ठ निजी स्कूलों का भ्रमण करें और देखें की उन निजी स्कूलों में किस प्रकार की अधोसंरचनाएं हैं। कलेक्टरों का पूरा प्रयास होना चाहिए कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में निजी स्कूलों से बेहतर स्तर की अधोसंरचनाएं विकसित की जाएं। इसके लिए विशेष रूप से कक्षा के फर्नीचर, प्रयोगशाला, उपकरण और पुस्तकालय की अधोसंरचना और अच्छी पुस्तकों की सूची महत्वपूर्ण है। कलेक्टर स्वयं इस कार्य में रूचि लेकर उच्च गुणवत्ता के स्कूल तैयार करवाएं। इस कार्य की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग करें।

    अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में विद्यार्थियों की भर्ती के संबंध में जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि विद्यार्थियों की भर्ती एक जुलाई से अनिवार्य रूप से प्रारंभ कर दें और 15 जुलाई तक इसे पूर्ण कर लिया जाए। प्रवेश में प्राथमिकता का क्रम निर्धारित करने के लिए कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए एक किलोमीटर के भीतर निवासरत परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। कक्षा 6वीं से 8वीं तक के लिए 3 तीन किलोमीटर की परिधि में निवासरत परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए 5 किलोमीटर तथा कक्षा 11वीं, 12वीं के लिए 7 किलोमीटर की परिधि में रहने वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। इसी प्रकार कक्षा पहली से पांचवी तक हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हुए दोनों ही प्रकार के विद्यार्थियों को एक समान प्राथमिकता दी जा सकती है, परंतु इसके बाद की कक्षाओं में पूर्व में अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हुए विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाए। विद्यालयों में उपलब्ध स्थान से अधिक विद्यार्थी आवेदन करते हैं तो कक्षा पहली से पांचवी तक के लिए लॉटरी निकालकर प्रवेश प्रक्रिया की जाए। इसके ऊपर की कक्षाओं के लिए पूर्व की कक्षाओं के परीक्षा परिणाम के आधार पर मेरिट सूची बनाकर प्रवेश दिया जाए। मेरिट सूची में एक से अधिक विद्यार्थी का नाम एक ही स्थान पर हो तो उनका भी निर्णय लॉटरी निकालकर किया जाए। प्रवेश के समय विद्यार्थियों के अभिभावकों से यह सहमति पत्र लिया जाए कि वे विद्यार्थी को घर से पढ़ाई के लिए वर्चुअल कक्षा के लिए मोबाईल और डाटा उपलब्ध कराएंगे और प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर की कक्षाओं के लिए कक्षा की अवधि में विद्यार्थियों के कोई न कोई अभिभावक उनके साथ उपस्थित रहेंगे, जिससे शिक्षा द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार वे विद्यार्थियों की गतिविधियां आदि करा सकें। प्रवेश के समय यह भी बताया जाए कि विद्याथियों की वर्चुअल कक्षा में उपस्थिति 70 प्रतिशत से कम रहती है तो उसका नाम स्कूल से काटा जा सकेगा।

    जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में वर्चुअल कक्षा 15 जुलाई से प्रारंभ कर दी जाए। इसके लिए प्रत्येक स्कूल में एक हाई ब्राडबेंड का इंटरनेट कनेक्शन लगाया जाए। जहां संभव हो वहां ऑप्टिकल फायबर का इंटरनेट लगाया जा सकता है। इसके पश्चात विद्यालय के भीतर आंतरिक वायरिंग करके प्रत्येक कक्षा में पृथक वाई-फाई राउटर लगाया जाए, जिससे शिक्षक अपनी-अपनी कक्षाओं से वर्चुअल क्लास ले सकेंगे। प्राचार्य प्रत्येक कक्षा के लिए वर्चुअल कक्षाओं हेतु एक टाईम-टेबल निर्धारित करें और सभी शिक्षक टाईम-टेबल के अनुसार कक्षाओं में अध्ययन-अध्यापन का कार्य करें। टाईम-टेबल विद्यार्थियों को वाट्सअप आदि से सूचित किया जा सकता है। कलेक्टरों से कहा गया है कि यह ध्यान रखा जाए कि प्राथमिक स्तर की कक्षाओं में वर्चुअल कक्षाओं का समय प्रतिदिन एक-दो घंटे से अधिक न रखा जाए और वर्चुअल कक्षाएं इस रूप में आयोजित की जाए जिससे विद्यार्थी आनंददायी तरीके से अपने अभिभावकों से मिलकर शैक्षणिक गतिविधियां कर सके। इस स्तर के विद्यार्थियों के लिए स्क्रीन टाईम कम से कम रखा जाए। इसी प्रकार माध्यमिक स्तर की कक्षाओं में दो-तीन घंटे का समय और उससे ऊपर की कक्षाओं के लिए इससे अधिक समय निर्धारित किया जा सकता है। प्रत्येक विषय का पीरियड भी छोटा किया जा सकता है। वर्चुअल कक्षाओं में विद्यार्थियों को होमवर्क भी दिया जाए, जो स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर ’पढ़ई तुंहर दुआर’ से कराया जा सकता है। वर्चुअल कक्षाएं कराने के संबंध में विस्तृत निर्देश राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा पृथक से जारी किया जाएगा और एससीईआरटी वर्चुअल कक्षाएं आयोजित करने के लिए विद्यालयों के शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण भी कराएगा।

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छत्तीसगढ़ के घटमड़वा महानदी में अवैध रेत खनन का खेल जारी खनिज विभाग की मिलीभगत से ही रात में हो रहा है उत्तखनन

बलौदाबाजार जिला के घटमड़वा में महानदी में अवैध रेती खनन चल रहा जोरो पर शासन प्रशासन जानकर भी अनजान बने बैठे ।


रायपुरः शिवरीनारायण रेत ठेकेदार के द्वारा लठैत रखकर रात मे भी अवैध रेत का खनन किया जा रहा है। बलौदा बाजार जिला के कसडोल ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत घटमड़वा (गिधौरी) में अवैध खनन करने का मामला प्रकाश में आया है। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घाट ठेकेदार अभिषेक अग्रवाल के नाम से जिला जांजगीर चांपा के शिवरीनारायण रेत घाट स्वीकृति हुआ है। परंतु शिवरीनारायण के रास्ते से घटमड़वा रेत घाट पर दिन-रात महानदी से अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। उक्त ठेकेदार अपने लठैतों को साथ मे रखता है और मारपीट की धमकी देता रहता है। वह दूसरे जिला बलौदा बाजार के कसडोल विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत घटमड़वा के सीमा पर भी अवैध तरीके से लाखो रूपये की रेत खनन कर चोरी कर रहा है।
 जिस पर ग्राम पंचायत घटमड़वा के जनप्रतिनिधि राजेंद्र घृतलहरे, महाबीर गोड़, एवं ग्रामीणों में शिवनाथ चैहान, सूरज चैहान, छोटेलाल ब्रिजवानी, बद्री वर्मा, संतोष वर्मा, शैलेन्द्र चैहान, सहित आदि लोगो ने अवैध रेत खनन कर रहे मौके पर पहंचे। उन्होंने अपने गांव घटमड़वा में अवैध रेत खनन कर रहे लोगो को मना किया तो उन लोगों ने मारपीट की धमकी दी  और मंत्री तक पहुंच होने की धमकी देने लगे। जिससे लोगो को यह लग रहा है कि ये अवैध खनन उपरी लोगों के संरक्षरण में चल रहा है।

यह अवैध खनन का खेल खनिज विभाग प्रसाशन की मिलीभगत से ही रात में किया जा रहा है। शासन का कोई नियम यहां नहीं चल रहा है। घाट नियम में खनन शाम 6 बजे के बाद बंद होना चाहिए। परन्तु उक्त ठेकेदार द्वारा जिला बलौदाबाजार के कसडोल विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत घटमडवा सीमा की महानदी में अवैध तरीके से धडल्ले से बेखौफ रेत का खनन किया जा रहा है। जिस पर ग्राम पंचायत घटमडवा के सरपंच उपसरपंच पंच को जानकारी होने पर रेत की चोरी करने तथा राजस्व की लाखो रूपये क्षति पहुंच रहे लोगो को मना किया गया, पर रेत माफिया अपनी दादागिरी से बाज नही आ रहे पहंचे हैं।
ठेकेदार के गुंडों ने घटमडवा पंचायत के जनप्रतिनिधियों को धमकी दी है। जिसके बाद ग्राम पंचायत घटमडवा के जनप्रतिनिधियों ने दिनांक 08/06/2020 को गिधौरी थाना में आकर लिखित शिकायत की है। इतना सब होने के बाद भी जिम्मेदार लोग और जिला जांजगीर चांपा और बलौदाबाजार जिले का खनिज विभाग गहरी कुम्भकरणीय के नींद मे सोये हुये है और इस पर कोई कार्यवाही नही किया जा रहा है। जिससे रेत माफियो का हौसला और बुलंद हो रहा है। 
रेत के अवैध खनन करने वाले रेत माफियाओं पर प्रशासन रोक लगाने का लाख दावा करती है, लेकिन प्रशासन इस दावे पर नाकाम साबित हो रहा है। रेत के दाम इस समय आसमान छू रहे हंै। वर्तमान में बलौदाबाजार जिले के गिधौरी क्षेत्र के बलौदा हसुवा क्षेत्र में भी रेत का अवैध खनन जोरो पर चल रहा हैं। ग्राम बलोदा पंचायत के आस-पास महानदी और जोक नदी के आसपास की घाटां से रेत का अवैध खनन लगातार जोरो पर चल रहा है। 


नदी से रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर रेत का उत्खनन कर ले जाया जा रहा है। विभाग को जानकारी होने बावजूद भी यह खेल चल रहा है। अवैध रूप से रेत का खनन किया जा रहा है, जिससे हर दिन शासन को लाखो रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। लेकिन अधिकारियों के कान में जूं तक नही रेंग रही, जबकि इन रेत माफियाओ पर तत्काल छापा मार कार्यवाही करते हुए इन पर लगाम लगाना अति आवश्यक हो गया है, जिससे शासन को हो रहे लाखो रुपये के राजस्व के नुकसान को रोक जा सके। अब आगे देखना होगा कि इस पर प्रशासन सहित जिम्मेदार लोग इस पर क्या कार्यवाही करते है। यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। इस सम्बंध मे जिला बलौदाबाजार के माईनिंग स्पेक्टर बबलू पांडे से जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि मौके पर आकर वो जांच करेंगे।
इस सम्बंध मे जिला जांजगीर चांपा के असिस्टेंट माईनिंग स्पेक्डर आर. के. सोनी से बात की गयी। उनसे पूछने पर कि जांजगीर चांपा के शिवरीनारायण रेत ठेकेदार बलौदा बाजार सीमा से रेत मशीन से चोरी कर रहा है। यह बात पूछने पर उन्होंने कहा कि बलौदा बाजार खनिज विभाग को सूचना दे दी गयी है, वह उस पर कार्यवाही करेगा।

गरीब को किया जा रहा है बेघर। बिलासपुर के तिलक नगर से सैकड़ों घर उजाड़ गये।लॉक डाउन के दौरान बेघर हो रहे तकरीबन 145 गरीब।

अजीत मिश्रा : बिलासपुर छत्तीसगढ़

0 परेशान लोगों ने कहा- जहर दे दो हमें..!

0कार्रवाई पूर्णता शांतिपूर्ण तरीके से-पुलिस।

0 शासन ने कहा-दिया था 7 दिन पहले नोटिस।

0 गरीबों ने कहा-जहां भेज रहे हैं वहां कोई सुविधा नहीं।

बिलासपुर के तिलक नगर से तकरीबन 145 घरों को उजाड़ा जा रहा है..! जी हां लॉक डाउन के समय ऐसा किया जा रहा है। शासन के द्वारा की जा रही इस कार्रवाई के विरोध में गरीब और बेघर हो रहे इन लोगों ने यहां तक कहा कि, अगर सरकार उन्हें जहर दे दे तो ज्यादा बेहतर होगा..! लॉक डाउन और कोरोना महामारी के दौरान आखिरकार वे जाएं तो जाएं कहां..? वही प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने सरकार के कार्रवाई की कड़ी शब्दों में आलोचना की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की माने तो, बिना विस्थापन की पूरी तैयारी किए बगैर यू लोगों को बेघर करना गलत है..! सरकार को कम से कम इस कोरोना संक्रमण काल या महामारी का तो ध्यान रखना चाहिए । वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन की तरफ से अधिकारियों का कहना है कि, तिलक नगर स्थित नदी के किनारे बेजा कब्जा किए इन लोगों को 7 दिनों पहले ही नोटिस दिया जा चुका है। शासन ने घर खाली कराने के लिए पूरी व्यवस्था कर रखी है। लोगों को और उनके सामानों को सही सलामत विस्थापन की जगह पर पहुंचाया जा रहा है। इतना ही नही पुलिस प्रशासन ने भी बेजा कब्जा हटाने की इस कार्रवाई को पूर्णता शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होना बताया है। जबकि तस्वीर बताती है कि, किस तरह से बेघर हो रहे इन लोगों ने शासन और पुलिस के साथ जमकर संघर्ष किया है। पूरे परिवार और सामानों के साथ सड़कों पर बैठे ये लोग अब भी चाहते हैं कि उन्हें यहां से ना हटाया जाए। और कम से कम विस्थापन के लिए जहां भेजा जा रहा है वहां की व्यवस्था को पहले दुरुस्त कर लिया जाए।

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत संशोधन बिल समाज के गरीब तबकों, किसानों और आम जनता के हित में नहीं : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

रायपुर, 08 जून 2020  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत संशोधन बिल 2020 को समाज के गरीब तबको एवं किसानों के लिए अहितकारी बताते हुए इस संबंध में केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  आर.के. सिंह को पत्र लिखकर देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस संशोधन बिल को फिलहाल स्थगित रखने का आग्रह किया है। 

मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए संशोधन बिल को लागू करने से पूर्व सभी राज्य सरकारों से इस पर विचार-विमर्श करने तथा समाज के गरीब तबको एवं जन सामान्य के हितों का ध्यान रखने की बात कही है।

 मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने केन्द्रीय मंत्री को प्रेषित अपने पत्र में कहा है कि इस संशोधन बिल में क्रास सब्सिडी का प्रावधान किसानों और गरीबों के हित में नही है। समाज के गरीब तबके के लोगों और किसानों को विद्युत सब्सिडी दिए जाने का वर्तमान प्रावधान जांचा परखा और समय की जरूरत के अनुरूप है। किसानों को विद्युत पर दी जाने वाली सब्सिडी यदि जारी नहीं रखी गई तो किसानों के समक्ष फसलों की सिंचाई को लेकर संकट खड़ा हो जाएगा। इससे खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होगा और देश के समक्ष संकट खड़ा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों और मजदूरों की मेहनत का सम्मान होना चाहिए। जिन्होंने अपनी मेहनत से देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है। उन्होंने कहा है कि समाज के गरीब वर्ग के लोगों और किसानों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के लिए उन्हें रियायत दिया जाना जरूरी है। उन्होंने संशोधित बिल में क्रास सब्सिडी को समिति किए जाने के प्रावधान को अव्यवहारिक बताया है। 

 मुख्यमंत्री   भूपेश बघेल ने कहा है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर सिस्टम जो वर्तमान में लागू है, वह सही है। इसमें बदलाव करने से समाज के गरीब तबके के लोग और लघु एवं सीमांत कृषक लाभ से वंचित हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि खेती-किसानी के सीजन में प्रति माह फसलों की सिंचाई के लिए यदि कोई किसान एक हजार यूनिट विद्युत की खपत करता है तो उसे सात से आठ हजार रूपए के बिल का भुगतान करना होगा, जो उसके लिए बेहद कष्टकारी और असंभव होगा। 

       मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह संशोधन बिल वातानुकूलित कमरों में बैठ कर तैयार करने वाले उच्च वर्ग के लोगों और सलाहकारों के अनुकूल हो सकता है लेकिन यह जमीन सच्चाई से बिलकुल परे है। इस संशोधन बिल को लागू करने से देश के समक्ष कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होंगी । इससे गरीब, किसान और विद्युत कम्पनियों और आम लोगों को नुकसान होगा। रियायती दर पर किसानों को बिजली न मिलने से फसल सिंचाई प्रभावित होगी। खाद्यान्न उत्पादकता घटेगी जिसके चलते देश के समक्ष खाद्यान्न का संकट पैदा हो जाएगा। 

      मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संशोधन बिल के माध्यम से राज्य सरकारों के अधिकारों की कटौती तथा राज्य विद्युत नियामक आयोग की नियुक्तियों के अधिकारों को केन्द्र सरकार के अधीन किया जाना संघीय ढांचे की व्यवस्था के विपरीत है। यह बिल राज्य विद्युत नियामक आयोग के गठन के संबंध में राज्यों को सिर्फ सलाह देने का प्रावधान देता है। नियुक्ति के संबंध में राज्य की सहमति आवश्यक नहीं है। यह प्रावधान राज्य सरकार की शक्तियों का स्पष्ट अतिक्रमण है। 

             विद्युत संशोधन बिल 2020 में विद्युत के क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सब लाइसेंसी और फ्रेन्चाईजी की नियुक्ति का भी प्रावधान है। यह प्रावधान चेक और बेलेन्स की नीति के विरूद्ध है, क्योंकि नियामक आयोग से लाईसेंस लेने के लिए सब लाईसेंसी और फ्रेंचाईजी बाध्य नहीं हैं। इससे यह स्पष्ट है कि यह अधिकार और कर्तव्य के सिद्धांत के भी विपरीत है। 

          मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विद्युत वितरण प्रणाली को आम जनता की जीवन रेखा बताते हुए कहा है कि इसे निजी कम्पनियों का सौंपा जाना किसी भी मामले में उचित नहीं होगा। यह संशोधन विधेयक पूंजीवाद को बढ़ावा देने वाला और निजी कम्पनियों को इलेट्रिसिटी बोर्ड को कब्जा दिलाने वाला है। 

          मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह संशोधन बिल केंद्रीकृत विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ईसीईए) के गठन का प्रस्ताव करता है। उन्होंने इस संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपील के संबंध में दिए गए निर्णय का भी विस्तार से उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन पूरे देश में किया जा चुका है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए केंद्रीकृत विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ईसीईए) का गठन औचित्यहीन है। यदि ऐसा किया जाता है तो राज्य विद्युत नियामक आयोग अधिकार विहीन हो जाएंगे। 

    प्रस्तावित संशोधन केंद्र सरकार को नवीकरणीय और पनबिजली खरीद दायित्व को संरक्षित करने के लिए भी शक्ति प्रदान करता है। देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग संसाधन हैं। मुख्यमंत्री  बघेल ने कहा है कि इसे देखते हुए पूरे देश के लिए इसको लागू किया जाना उचित नहीं होगा।

टिड्डी दल के बड़े आक्रमण की आशंका फसलों के बचाव के लिए किसानों से सतर्क रहने का आग्रह वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अंगद सिंह राजपूत

  देश के कई राज्यों में फसलों को नुकसान पाहुचानें वाले टिड्डी दल का आक्रमण छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी हो सकता है । कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भाएकीकृत नाशीजीवरत सरकार के केंद्रीय  प्रबंधन केंद्र नें छत्तीसगढ़ राज्य को पहले से ही सतर्क कर दिया है।
 दाऊ कल्याण सिंह कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के अधिष्ठाता डॉ. राजेंद्र लाकपाले के अनुसार इन टिड्डी दलों के आक्रमण से खेतों को भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है। टिड्डी दलों में करोड़ों की संख्या में कीड़े एक साथ खेतों और खड़ी हुई फ़सलों पर हमला करते हैं और उनको खाने के बाद उसमें बहुत आसानी से छुप जाते हैं। इन दलों में एक दिन में एक कीड़ा अपने वज़न के बराबर फ़सल खा जाता है जो करीब 2 ग्राम होता है लेकिन आम तौर पर एक टिड्डी दल के सिर्फ़ एक छोटे से हिस्से के कीड़े एक दिन में उतनी ही खाद्य सामग्री खा जाते हैं जितनी की 2500 मनुष्य खा सकते हैं। डॉ. लाकपाले ने बताया इन कीड़ों की उम्र ज़्यादा नहीं होती, आमतौर पर यह तीन से पांच महीने ही जी पाते हैं।इन कीड़ों के इतनी ज़्यादा संख्या में होने के कारण खेती और हरियाली की व्यापक पैमाने पर तबाही होती है।

टिड्डी दल से फसलों के बचाव के लिए किसानों से सतर्क रहने का आग्रह कृषि विज्ञान केंद्र भाटापारा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख  डॉ. अंगद सिंह राजपूत ने किया है अभी अधिकांश जिले में ग्रीष्मकालीन धान,  मूंग, उर्द व मौसमी सब्जियों की फसल लगी हुई है ऐसे में जिले के किसान टिड्डी दल से सतर्क रहें। अपने खेतों की लगातार निगरानी रखें।  कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ तकनीकि अधिकारी सागर पाण्डे ने बताया कि टिड्डी दल रात्रि के समय खेतो में रूककर फसलों को नुकसान पहुचाता है। बताया गया कि जमीन पर लगभग 500 से 1500 अंडे प्रति मादा कीट देकर सुबह उड़कर के दूसरी जगह चला जाता है। टिड्डी दल के समूह में लाखों की संख्या में टिड्डीयां होती है, ये जहां भी पेड़ पौधे या अन्य वनस्पति दिखाई देती है उसको खाकर आगे बढ़ जाते हैं। टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए सभी किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने-अपने गांव में समूह बनाकर खेतो में रात्रिकालीन के समय निगरानी रखने का कार्य शुरू कर दें। 
कृषि विज्ञान केंद्र नें किसानों को दी यह सलाह

1. किसान भाई इस कीट की सतत् निगरानी रखें, यह कीट किसी भी समय खेतों भें आक्रमण कर क्षति पहुंचा सकता है। शाम 7 बजे से 9 बजे के मध्य यह दल रात्रिकालीन विश्राम के लिए कही भी बैठ सकते हैं। इसकी पहचान एवं जानकारी के लिए स्थानीय स्तर पर दल बनाकर सतत निगरानी रखें।


2. जैसे किसी गांव में टिड्डी दल के आक्रमण एवं पहचान की जानकारी मितलती है तो तत्काल स्थानीय प्रशासन कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर जानकारी दें।
3. टिड्डी दल आकाश में दिखे तो उसको उतरनें से रोकनें के लिए धुआं करें इससे टिड्डी दल खेत में नहीं बैठेगा ।


4. यदि टिडडी दल का प्रकोप हो गया है तो सभी किसान भाई टोली बनाकर विभिन्ना तरह की परम्परागत उपाय जैसे ढोल, डीजे बजाकर, थाली, टीन के डिब्बे से शोर मचाकर, ट्रैक्टर का साइलेंसर निकालकर चलाकर, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज कर खेतों से भागाया जा सकता है।


5. यदि शाम के समय टिड्डी दल का प्रकोप हो गया है तो टिड्डी की विश्राम अवस्था में सुबह 3 बजे से 5 बजे के बीच में तुरंत कीटनाशी दवाएं, ट्रैक्टर चलित स्प्रे पम्प (पावर स्प्रेयर) दवा क्लोरोपायरीफास 20 ईसी 200 मि.ली. या लेम्डासाईलोयिन 5 ईसी 400 मिली या डाईफ्लूबेन्जूसन 25, 240 ग्राम प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
6. रासायनिक कीटनाशी पाउडर फेनबिलरेड 0.4 प्रतिशत 20-25 किग्राया क्यूना लफास 5 प्रतिशत 25 किग्रा. प्रति हेक्टेयर भुरकाव करें।

फिर दौड़ेगी सिटी बसें, सरकार ने दी संचालन की अनुमति

A News Edit By : Yash Kumar Lata

रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने सीटी बसों के संचालन की अनुमति दे दी है। जारी निर्देश के अनुसार अब सिटी बसें एक जिले से दूसरे जिले में चलेगी । आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार सिटी का परिचलन रोक दिया गया था। लेकिन अब सरकार ने फिर बसों को शुरू करने की अनुमति दे दी है।

कुलपतियों की कमेटी की रिपोर्ट के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने आज विवि परीक्षाओं के बारे में आदेश किया जारी

रायपुर, 1 जून 2020 कुलपतियों की कमेटी की रिपोर्ट के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने आज विवि परीक्षाओं के बारे में आदेश जारी कर दिया। विश्वविद्यायों के फायनल ईयर के छात्रों को परीक्षा देनी होगी। बाकी फर्स्ट एवं सेकेंड ईयर के छात्रों को परीक्षा में बैठने की जरूरत नहीं होगी। इसके अनुसार फायनल ईयर के छात्रों एवं सेमेस्टर में फायनल के लिए लॉकडाउन के बाद एग्जाम लिए जाएंगे। बाकी फर्स्ट एवं सेकेंड ईयर के लिए जितने परीक्षा हो गई है। उसका मूल्यांकन किया जाएगा। और बचे पेपर के लिए तीन केटेगरी बनाए गए हैं। पिछली परीक्षा, आंतरिक मूल्यांकन या असाईनमेंट वर्क। सेमेस्टर फायनल की भी परीक्षा होगी। विस्तृत आदेश इस प्रकार है-

मन की बातः देश अब खुल गया है, देशवाशियों को ज्यादा सतर्कता बरतने की जरुरत...प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को रेडियो पर 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्यम से एक बार फिर देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने 'मन की बात' कार्यक्रम के 65वें भाग में संबोधन के आरम्भ में कहा कि पिछली बार जब मैंने आपसे मन की बात साझा की थी, तब देश में पूर्णतः लॉकडाउन लागू था। यानी अत्यंत आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाएं बंद थी। अनावश्यक यात्राएं बंद थी, यात्री ट्रेनें बंद थीं, बसें बंद थीं, हवाई सेवा बंद थी यहाँ तक की मूलभूत रोजमर्रा की सामग्री को छोड़ सभी दुकाने बंद थी। 

लेकिन आज, बहुत सारी सेवाएं पुनः शुरू कर दी गयी है। सावधानियों के साथ, श्रमिक विशेष ट्रेन, अन्य यात्री स्पेशल ट्रेनें चलनी शुरू हो गई हैं, घरेलू हवाई उड़ानों की सेवाएं बहाल कर दी गयी है, व्यापार, दुकानें, उद्योग-धंधा भी चलना शुरू हुआ है, मतलब अर्थव्यवस्था अब धीरे-धीरे पटरी पर आना शुरू हो गई है। ऐसे में, हमें और ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की जनसंख्या दुनिया के ज्यादातर देशों से कई गुना ज्यादा है, फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेजी से नहीं फैल पाया, जितना दुनिया के अन्य देशों में फैला। ऐसा इसलिए की सबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है। पीएम मोदी ने संकट की इस घड़ी के दौरान इनोवेशन को जरूरी बताया। उन्होंने प्रवासी मजदूर की समस्या, चक्रवाती तूफान अम्फान से लेकर देश में टिड्डी संकट पर अपने विचार व्यक्त किए।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने योग की विशेषता पर बल देते हुए कहा की 'कपालभाती' और 'अनुलोम-विलोम', 'प्राणायाम' से अधिकतर लोग परिचित होंगे। लेकिन 'भस्त्रिका', 'शीतली', 'भ्रामरी' जैसे कई प्राणायाम के प्रकार हैं, जिसके अनेक लाभ भी हैं। उन्होंने बताया कि कैसे अतंरराष्ट्रीय स्तर पर लोग योग को अपना रहे हैं। साथ ही उन्होंने देशवासियों से अनुरोध किया की इस प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में आप हिस्सेदार बनिए। आपके जीवन में योग को बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने इस बार एक अनोखा प्रयोग किया है। हमारे देश में करोडों गरीब दशकों से एक बहुत बड़ी चिंता में रहते आए हैं- अगर बीमार पड़ गए तो क्या होगा? इस तकलीफ को समझते हुए, इस चिंता को दूर करने के लिए ही, करीब डेढ़ साल पहले आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई थी।

इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना से होने वाली मृत्यु दर भी हमारे देश में बनिस्पत बहुत कम है। हमें नुकसान भी हुआ है, जिसका दुःख हम देशवासियों को है, लेकिन जो कुछ भी हम बचा पाएं हैं, वो निश्चित तौर पर देश की सामूहिक संकल्पशक्ति का ही परिणाम है।  

पीएम मोदी ने सेवा भाव को सर्वोपरि बताते हुए देश के सभी इलाकों से 'वुमन सेल्फ हेल्प ग्रुप' के परिश्रम की चर्चा करते हुए कहा की दूसरों की सेवा में लगे व्यक्ति के जीवन में कोई डिप्रेशन या तनाव कभी नहीं दिखता, जीवन को लेकर उसके नजरिए में, भरपूर आत्मविश्वास, सकारात्मकता और जीवंतता हमेशा नजर आती है। उन्होंने एक बार फिर कहा की हमारे डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, सफाईकर्मी, पुलिसकर्मी, मीडिया के साथी, ये सब जो सेवा कर रहे हैं, उसकी चर्चा मैंने कई बार की है। सेवा में अपना सब कुछ समर्पित कर देने वाले लोगों की संख्या हमारे देश में अनगिनत है। 

उन्होंने आयुष्मान भारत योजना की एक बड़ी विशेषता पोर्टेबिलिटी की सुविधा की जानकारी देते हुए कहा की पोर्टेबिलिटी ने देश को एकता के रंग में रंगने में भी मदद की है, यानी बिहार का कोई गरीब अगर चाहे तो, उसे कर्नाटक में भी वही सुविधा मिलेगी, जो उसे अपने राज्य में मिलती है।

लॉकडाउन 5.0 - 30 जून तक बढ़ा देशभर में लॉकडाउन, रेस्टोरेंट, धार्मिक स्थल, सैलून खोलने की इजाजत

A News Edit By : Yash Kumar Lata

कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश में एक बार फिर से लॉकडाउन लागू कर दिया है. लॉकडाउन 5.0 की गाइडलाइंस सरकार ने जारी कर दी है. लॉकडाउन 5.0 1 जून से 30 जून तक रहेगा. कंटेनमेंट जोन के बाहर सरकार की ओर से चरणबद्ध तरीके से छूट दी गई है. गाइडलाइंस के मुताबिक, लॉकडाउन तीन फेज में खुलेगा. सरकार ने पहले फेज के तहत 8 जून से धार्मिक स्थल, होटल, सैलून, रेस्टोरेंट खोलने की इजाजत दे दी है. हालांकि सरकार ने शर्तों के साथ खोलने की अनुमति दी है.

बता दें कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश फिलहाल लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा है. लॉकडाउन 4.0 की अवधि 31 मई को खत्म हो रही है. ऐसे में सरकार ने इसे और बढ़ा दिया है. दूसरे फेज के तहत स्कूल-कॉलेज खोलने का फैसला केंद्र ने राज्यों पर छोड़ दिया है. जुलाई में राज्य इसपर फैसला लेंगे.

लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला साल आज पूरा

लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला साल आज पूरा हो रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नागरिकों को पत्र लिखकर एक संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने सरकार की पिछले साल की उपलब्धियों के बारे में बताया है। पीएम मोदी कहा कि एक साल में लिए गए फैसले बड़े सपनों की उड़ान है। उन्होंने यह भी लिखा की सामान्य दिनों में मैं आपके सामने आकर आपका आर्शिवाद लेता, मगर परिस्थितियां ही कुछ ऐसी हैं कि पत्र के माध्यम से आपसे रूबरू होना पड़ रहा है। आइये जानते हैं कि देश के प्रधानमंत्री ने लेटर का माध्यम से जनता को क्या संदेश दिया हैः-

पीएम मोदी ने लिखा कि 2014 में जनता ने देश में एक बड़े बदलाव के लिए वोट किया था, देश की नीति और रीति बदलने के लिए वोट किया था। उन 5 वर्षों में देश ने व्यवस्थाओं को जड़ता और भ्रष्टाचार के दलदल से बाहर निकलते हुए देखा है।

उन्होंने लिखा कि आज से एक साल पहले भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ा। देश में दशकों बाद पूर्ण बहुमत की किसी सरकार को लगातार दूसरी बार जनता ने जिम्मेदारी सौंपी। इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में आज का यह दिन मेरे लिए, अवसर है आपको नमन करने का।

प्रधानमंत्री ने लिखा, 2019 में आपका आशीर्वाद देश के बड़े सपनों के लिए था, आशाओं-आकंक्षाओं की पूर्ति के लिए था। इस एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, इस मंत्र को लेकर आज देश सामाजिक हो या आर्थिक, वैश्विक हो या आंतरिक, हर दिशा में आगे बढ़ रहा है.

उन्होंने लिखा कि पिछले एक साल में कुछ खास निर्णय ज्यादा चर्चा में रहे और इस वजह से इन उपलब्धियों का स्मृति में रहना भी बहुत स्वाभाविक है। अनुच्छेद 370, राम मंदिर निर्माण, तीन तलाक हो या फिर नागरिकता संशोधन कानून, ये सारी उपलब्धियां सभी को स्मरण हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि एक के बाद एक हुए इन ऐतिहासिक निर्णयों के बीच अनेक फैसले और बदलाव ऐसे भी हैं जिन्होंने भारत की विकास यात्रा को नई गति और नए लक्ष्य प्रदान किए हैं और लोगों की अपेक्षाओं को भी पूरा किया है।

देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसान, खेत मजदूर, छोटे दुकानदार और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक साथियो, सभी के लिए 60 साल की आयु के बाद 3 हजार रुपये की नियमित मासिक पेंशन की सुविधा सरकार ने सुनिश्चित की है।

उन्होंने कहा कि सामान्य जन के हित से जुड़े बेहतर कानून बनें, इसके लिए भी पिछले 1 साल में तेजी से काम हुआ और पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। यही कारण है कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट हो, चिटफंड कानून में संशोधन हो, दिव्यांगों, महिलाओं और बच्चों को अधिक सुरक्षा देने वाले कानून हों, ये सब तेजी से बन पाए हैं।

प्रधानमंत्री ने लिखा कि हम तेज गति से आगे बढ़ रहे थे कि अचानक कोरोना वैश्विक महामारी ने भारत में दस्तक दी। कई लोगों का अनुमान था कि जब कोरोना भारत पर अटैक करेगा तो भारत पूरी दुनिया के लिए खतरा बन जाएगा। लेकिन आज आपकी हिम्मत ने भारत को देखने का नजरिया ही बदलकर रख दिया।

उन्होंने लिखा कि ताली-थाली बजाने और दीया जलाने से लेकर भारत की सेनाओं द्वारा कोरोना वॉरियर्स का सम्मान हो, जनता कफ्र्यू या देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान नियमों का निष्ठा से पालन हो, हर अवसर पर आपने ये दिखाया है कि एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है।

पीएम मोदी ने लिखा कि निश्चित तौर पर इतने बड़े संकट में कोई ये दावा नहीं कर सकता कि किसी को कोई तकलीफ या असुविधा न हुई हो। श्रमिक, प्रवासी मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे उद्योगों में काम करने वाले कारीगर, पटरी पर सामान बेचने वाले आदि लोगों ने असीमित कष्ट सहा है। इनकी परेशानियों को दूर करने की सरकार पूरे मन से कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि अभी पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए अम्फान चक्रवात के दौरान जिस हौसले के साथ वहां के लोगों ने परिस्थितियों का सामना किया, चक्रवात से होने वाले नुकसान को कम किया, वह भी हम सभी के लिए बड़ी प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह चर्चा बहुत व्यापक है कि भारत समेत तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं कैसे उबरेंगी। लेकिन दूसरी ओर ये विश्वास भी है कि जैसे भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी दुनिया को अचंभित किया, वैसे ही आर्थिक क्षेत्र में भी नई मिसाल कायम करेंगे। 130 करोड़ भारतीय अपने सामर्थ्य से आर्थिक क्षेत्र में भी विश्व को चकित ही नहीं बल्कि प्रेरित भी कर सकते हैं।

उन्होंने लिखा कि समय की मांग है कि आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। अपने बलबूते पर चलना ही होगा और इसके लिए एक ही मार्ग है आत्मनिर्भर भारत। हाल में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए दिया गया 20 लाख करोड़ का पैकेज इसी दिशा में उठाया गया कदम है। भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेगा।

आखिर में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 6 सालों की इस यात्रा में आप लोगों का आशीर्वाद हमेशा मिलता रहा है। देश पिछले 1 साल में ऐतिहासिक निर्णयों और विकास की अभूतपूर्व गति के साथ आगे बढ़ा है। लेकिन अब भी बहुत कुछ करना बाकी है। संकल्प शक्ति और आत्मनिर्भरता से ही हम आगे बढ़ सकेंगे।

वेतन वृद्धि पर रोक से तीन लाख से अधिक कर्मचारी प्रभावित, आंदोलन की चेतावनी

दोलन की चेतावनी WRITTEN BY RAKESH RANJAN PUBLISHED: MAY 28, 2020, 7:26 PM CATEGORY: CHHATTISGARH HITS: 104 Print Email CH Secretariat रायपुरः छत्तीसगढ़ सरकार ने कर्मचारियों के इस वर्ष मिलने वाली वेतन वृद्धि (increment) पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य में चल रही कई पुरानी और कम महत्वपूर्ण योजनाओं को भी फिलहाल स्थगित करने का आदेश जारी किया है। इसके अलावा सरकार ने सभी विभागों में वित्त विभाग की अनुमति के बगैर रिक्त पदों पर नई भर्ती करना और नये पदों का सृजन करने पर भी रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने कम से कम आवश्यक मीटिंग/वर्कशॉप/सेमिनार के निर्देश दिये हैं। इन आवश्यक मीटिंग/वर्कशॉप/सेमिनार का आयोजन बड़े होटल में कराने पर भी रोक लगा दी गयी है। दूसरी तरफ अधिक से अधिक मीटिंग को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये करने के निर्देश दिया गया हैं। हालांकि सरकार के इस इंक्रीमेंट के आदेश का असर प्रदेश में पदस्थ आईएएस, आईपीएस और आईएफएस पर नहीं पड़ेगा। जिससे कर्मचारियों में काफी नाराजगी भी है। लिहाजा प्रभावित कर्मचारी सरकार के इस फैसले को वापस लेने को कह रहे हैं। साथ में चेतावनी भी दे रहे हैं अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो ये कर्मचारी राज्यव्यापी आंदोलन शुरू कर देंगे। सरकार के इस कदम को कोरोना के कारण जारी लॉकडाउन से प्रभावित अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। जिससे प्रदेश में कार्यरत तीन लाख से अधिक कर्मचारी सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

सर्तकता और सावधानी के साथ प्रदेश में अब सप्ताह में 6 दिन खुलेंगी दुकानें : भूपेश बघेल :माल, सिनेमा घर, राजनैतिक सभाएं, सामाजिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध पूर्व की तरह ही जारी रहेगा

रायपुर, 27 मई 2020 मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल की अध्यक्षता में प्रदेश में कोविड-19 के नियंत्रण और लॉक-डाउन के बाद ठप्प पड़ी आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने आज उच्च स्तरीय बैठक में विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सभी मंत्रीगण और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बैठक में विभिन्न राज्यों से लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने और समाज के सभी वर्गों को राहत देने के उपायों पर चर्चा की गई। लोगों की दिक्कतों का देखते हुए अब वैवाहिक कार्यक्रम की अनुमति तहसीलदार देंगे। अनुमति देने की प्रक्रिया को सरल और आसान बनाया जा रहा है। रेड जोन और कंटेंनमेंट एरिया में कोई छूट नहीं मिलेगी। भारत सरकार द्वारा जारी गाईड लाईन के अनुसार माल, सिनेमा घर, राजनैतिक सभाएं, सामाजिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध पूर्व की तरह ही जारी रहेगा।
बैठक में दुकानों को अब सप्ताह में छह दिन खोलने का निर्णय लिया गया। सभी दुकानों और बाजारों में शारीरिक दूरी की बंदिशें पूर्व की तरह लागू रहेंगी। सप्ताह में छह दिन दुकान खुलने से वहां एक साथ होने वाली भीड़ से राहत मिलेगी। व्यवसायिक-व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने से रोजगार के साथ अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। बैठक में ज्यादा से ज्यादा उद्योगों को भी शुरू करने के उपायों पर विचार किया गया। लॉक-डाउन के बाद प्रदेश के 1371 कारखानों में दोबारा काम शुरू हो गए हैं। इन कारखानों में एक लाख तीन हजार श्रमिक काम पर लौट चुके हैं।
 मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे प्रवासी मजदूरों के मनोरंजन के लिए टेलीविजन, रेडियो आदि की व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने श्रमिकों को मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराने के लिए मनोवैज्ञानिकों की सेवाएं भी लेने को कहा है। मुख्यमंत्री ने गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से क्वारेंटाइन सेंटर्स में योग या अन्य प्रेरक गतिविधियां संचालित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने तनाव कम करने पूरे दिन की व्यवस्थित दिनचर्या तैयार कर इसका पालन सुनिश्चित करने का भी सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि प्रदेश वापस आने वाले श्रमिकों को राशन और रोजगार की चिंता से मुक्त करने की जरूरत है। इसके लिए तत्काल उनके राशन कॉर्ड और मनरेगा जॉब-कार्ड बनवाए जाएं। कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों की सूची तैयार कर स्थानीय उद्योगों को उपलब्ध कराया जाए। इससे उद्योगों को जरूरत का मानव संसाधन मिलने के साथ ही श्रमिकों को नियमित रोजगार मिलेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के नियंत्रण और लॉक-डाउन की परिस्थितियों में जन-जीवन को राहत पहुंचाने छत्तीसगढ़ में अच्छा काम हुआ है। सभी विभागों ने बेहतर समन्वय के साथ काम करते हुए जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाई है। शहरी क्षेत्रों में कोविड-19 के बेहतर प्रबंधन के साथ गांव-गांव में लोगों को जागरूक करने के लिए शासन-प्रशासन ने मुस्तैदी से काम किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की जांच, इलाज और रोकथाम के लिए जितनी भी राशि की जरूरत होगी, स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिकता से उपलब्ध करायी जाएगी।
 बैठक में कृषि मंत्री  रविन्द्र चौबे, गृह मंत्री   ताम्रध्वज साहू, स्वास्थ्य मंत्री   टी.एस. सिंहदेव, वन मंत्री  मोहम्मद अकबर, सहकारिता मंत्री  प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य मंत्री अमरजीत सिंह भगत, महिला एवं बाल विकास मंत्री   अनिला भेंड़िया, श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, उद्योग मंत्री   कवासी लखमा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, मुख्य सचिव  आर.पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री   सुब्रत साहू, स्वास्थ्य सचिव   निहारिका बारिक सिंह, खाद्य सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, समाज कल्याण विभाग के सचिव   प्रसन्ना आर., मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव सुश्री सौम्या चौरसिया सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बिलासपुर के रेड जोन में आते ही पुलिस आयी अलर्ट मोड पर, शहर में किया फ्लैग मार्च

पुलिस ने लोगों से की अपील, घर में रहें और अपनी जिम्मेदारी को समझे

लॉकडाउन का पालन कराने पुलिस बरतेगी कड़ाई, नियम तोड़ने वालों पर होगी एफआईआर

अजीत मिश्रा : बिलासपुर (छतीसगढ़)

कोरोना के बढ़ते मरीजों की संख्या को देख बिलासपुर शहर व कुछ अन्य ग्रामीण क्षेत्र को रेड जोन में रखे जाने के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है. लॉक डाउन के चलते आईजी दीपांशु काबरा व एसपी प्रशांत अग्रवाल के निर्देश पर पुलिस अधिकारी, थानों की पेट्रोलिंग पार्टी, थाना प्रभारियों ने नगर की विभिन्न सड़कों पर फ्लैग मार्च निकाल लोगों से लॉक डाउन का पालन करने की अपील की. इसके अलावा संवेदनशील जगहों में ड्रोन कैमरे से नजर रखी जा रही है.  बिलासपुर को रेड जोन में रखे जाने के बाद मंगलवार को एएसपी ओपी शर्मा पुराना बस स्टैंड पहुंचे और यहां से उनके नेतृत्व में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पैदल ही फ्लैग मार्च निकाला गया. यहां से फ्लैग मार्च बड़े-बड़े बाजारों की छोटी-छोटी गलियों से होते हुए मोहल्लों और संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंचा. इस दौरान पुलिस लोगों से घरों में रहने की अपील करती रही. फ्लैग मार्च में एएसपी ओपी शर्मा, एएसपी रोहित बघेल, सीएसपी निमेष बरैया, आरएन यादव, टीआई कलीम खान, परिवेश तिवारी, जेपी गुप्ता, शानिप रात्रे, यूएन शांत कुमार सहित शहर के सभी थानों के एपीओ मौजूद रहे. इस दौरान पुलिस ने लोगों से घरों में रहने, मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज अदा करने को कहा, साथ ही कहा कि कोरोना के संक्रमण को रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है.

बाइक से फ्लैग मार्च और लोगों को दी गई चेतावनी-
जिला रेड जोन में आते ही पुलिस प्रशासन बहुत सख्त हो गया है. अब फालतू घूमने वाले लोगों पर भी धारा 188 के तहत मुकदमा लिखा जा रहा है. ऐसे लोगों को अलर्ट करने के लिए आईजी दीपांशु काबरा व एसपी प्रशांत अग्रवाल के निर्देश पर पुलिस ने पूरे शहर में मोटरसाइकिल से फ्लैग मार्च निकाला. जिसमें लोगों को घर में रहने के निर्देश दिए गए. एएसपी ओपी शर्मा ने बताया कि बिलासपुर जिले के शहरी क्षेत्र व कुछ अन्य जगह को रेड जोन घोषित कर दिया गया है. इसके बाद से हम लोग रेड जोन में होने वाले नियमों का पालन करा रहे हैं. लोगों की सड़क पर भीड़ न हो उसके लिए हम लोगों ने फ्लैग मार्च भी निकाला है.


526 का कटा चालान, अब बरती जाएगी और कड़ाई-
पिछले दो दिन के भीतर पुलिस ने बिना मास्क पहने बाहर निकलने वाले और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को तोड़ने वालों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 526 लोगों का चालान काटा. सोमवार को 163 पर कार्रवाई की गई, जबकि मंगलवार को अलग-अलग थाने व निगम की उड़नदस्ता टीम के साथ मिलकर पुलिस ने 363 लोगों का चालान काटा.

पढ़े कोरोना बुलेटिन : प्रदेश में एक ही दिन में मिले 68 नए मामले, संक्रमित मरीजों की संख्या 360, 7 मरीज एम्स से हुए डिस्चार्ज

छत्तीसगढ़ में कोरोना पॉजिटिव की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है. मंगलवार को एक ही दिन में 68  नए मरीजों की पहचान की गई. इसके साथ ही प्रदेश में एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर 281 हो गई है. वहीं प्रदेश में अब तक कुल 360 लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं. जिसमे से 79 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो कर घर जा चुके हैं.