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आरएसएस के संगठन बीएमएस को नहीं भाया बजट, मजदूर और गरीब विरोधी बताया

वित्त मंत्री अरुण जेटली का बुधवार को संसद में पेश किए गया आम बजट आरएसएस के संगठन भारतीय मजदूर संघ को रास नहीं आया है. उसने इसे मजदूर और गरीब विरोधी बताया है.
मजदूरों के बीच काम करने वाले भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने बजट के विरोध में गुरुवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया. इसमें संघ के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.
भारतीय मजदूर संघ के उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री पवन कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार का बजट मजदूर और गरीब विरोधी है. हमारी मांग है कि मौजूदा बजट को तुरंत वापस लिया जाए और इसमें बदलाव करके पेश किया जाए. यदि ऐसा नहीं होता तो हम पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेंगे.
पवन कुमार ने कहा वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा है कि सरकार को फायदा हुआ है. उस फायदे का हिस्सा मजदूरों को दिया जाए.

 

कश्‍मीर: मां की लाश कंधे पर लाद गांव जाने को मजबूर सैनिक, 4 दिन तक नहीं मिली कोई मदद

कश्‍मीर में हिमस्‍खलन के चलते हालात काफी खराब हैं। गुरुवार को कश्‍मीर के एक युवा सैनिक ने अपनी मां की लाश को कंधे पर लादकर गांव की तरफ बढ़ना शुरू किया है। एनडीटीवी रिपोर्ट के अनुसार, सैनिक के साथ उसके कुछ रिश्‍तेदार हैं जो एलओसी के नजदीक स्थित गांव जा रहे हैं। हालांकि अपने घर पहुंचकर मां को वहां दफनाने के लिए, मोहम्‍मद अब्‍बास नाम के इस सैनिक को उस रास्‍ते से गुजरना होगा जहां पिछले कुछ दिनों से भारी बर्फबारी हो रही है। करीब 50 किलोमीटर की ट्रेकिंग में कम से कम 10 घंटों का समय लगेगा। जिस प्रमुख हाइवे का इस्‍तेमाल वह कर रहे हैं, वह करीब 6 फीट की बर्फ में घिरा हुआ है। इससे थोड़ी ही दूरी पर हिमस्‍खलन के चलते हाल के दिनों में करीब 20 सैनिकों की मौत हो चुकी है। कश्‍मीर घाटी के कुछ हिस्‍सों में बिजली और संचार लाइनें बहाल कर दी गई हैं, मगर ज्‍यादातर एरियाज में अभी भी समस्‍या बनी हुई है।
25 साल के अब्‍बास पठानकोट में तैनात हैं। उनकी मां, सकीना बेगम उनके साथ ही रहती थीं, जिनका पांच दिन पहले इंतकाल हो गया था। जवान का कहना है कि उनकी लाश के साथ कश्‍मीर लौटने पर, उससे वायदा किया गया था कि स्‍थानीय प्रशासन द्वारा हेलिकॉप्‍टर का बंदोबस्‍त किया जाएगा। अब्‍बास ने एनडीटीवी से कहा, ”यह बेहद शर्मिंदगी भरा है। मैं अपनी मां को ढंग से दफन भी नहीं कर पा रहा हूं। प्रशासन हमें लाश के साथ इंतजार कराता रहा लेकिन कभी हेलिकॉप्‍टर नहीं भेजा। यह एक खतरनाक ट्रेक है। हम मेरी मां की लाश के साथ बर्फ से जूझ रहे हैं। हम जिस रास्‍ते से गुजर रहे हैं, वहां हिमस्‍खलन का खतरा ज्‍यादा है।”
कुपवाड़ा जिले के अधिकारियों का कहना है कि उन्‍होंने गुरुवार को हेलिकॉप्‍टर का इंतजाम किया था। एक अधिकारी ने कहा, ”हमने एक चॉपर का इंतजाम किया था, लेकिन परिवार ने सुविधा लेने से इनकार कर दिया कि उन्‍हें मौसम की समझ नहीं है और पता नहीं कि हेलिकॉप्‍टर उड़ान भर पाएगा या नहीं।”
हालांकि जवान ने सरकार के दावों से इनकार कर दिया। अब्‍बास ने कहा, ”हम चार दिन तक सरकार की मदद का इंतजार किया। इस सुबह, कुपवाड़ा में अधिकारियों ने हमारा फोन तक उठाना बंद कर दिया।

 

LIVE: 30000 से ज्यादा कैश ट्रांजैक्शन पर रोक, 2000 से ज्यादा चंदे का हिसाब देना होगा

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2017 पेश करते हुए कैश ट्रांजैक्शन पर अंकुश लगाने की दिशा में अहम कदम उठाया. तीन लाख से ज्यादा के कैश लेनदेन पर सरकार ने रोक लगा दिया है. इसके अलावा सरकार ने राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाते हुए 2000 से ज्यादा के चंदे का हिसाब देना अनिवार्य कर दिया है. एक व्यक्ति अधिकतम 2000 रुपये ही कैश में बतौर राजनीतिक चंदा दे सकता है.
वित्त मंत्री अरुण जेटली आज लोकसभा में ऐतिहासिक बजट पेश कर रहे हैं. उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा कि उनके द्वारा तैयार बजट का मकसद ग्रामीण इलाकों, इंफ्रास्ट्रक्चर और गरीबी उन्मूलन की दिशा में ज्यादा पैसे का प्रावधान करना है.
वित्त मंत्री ने कहा, नोटबंदी को आर्थिक सुधार की दिशा में बड़ा और साहसिक कदम बताया और कहा कि हम अब अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से औपचारिक अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ रहे हैं. उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य पांच साल में किसानों की आय दोगुना करने का है. किसानों के कर्ज के लिये दस लाख करोड़ का लक्ष्य रखा गया है.
जेटली ने कहा, इस बजट में बेघरों के लिये साल 2019 तक एक करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा सरकार रोज़ 133 किमी सड़क बना रही है. बजट में प्रधानमंत्री ग्रामीण योजना के लिये 23 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. उन्होंने जानकारी दी कि गांवों में स्वच्छता 42 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हुई.

 

ATM से तीन बार से ज्यादा पैसे निकलने पर देना पड़ सकता है चार्ज

डिजीटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार जनता को एक और झटका दे सकती है। एटीएम (ATM) से फ्री ट्रांजेक्शन की सुविधा में सरकार कटौती करने के मूड में है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार एटीएम से मुफ्त निकासी की संख्या को घटाकार महज 3 करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। फिलहाल बैंक कस्टमर्स को 8 से 10 करीब ट्रांजेक्शन फ्री देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ बजट से पूर्व विचार-विमर्श के दौरान बैंकर्स की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया था। इसमें कहा गया कि डिजीटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए यह एक तरीका साबित हो सकता है।
एक सीनियर बैंकर ने ईटी को बताया कि एटीएम के फ्री ट्रांजेक्शन को घटाकर 3 किए जाने के प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय से चर्चा हुई थी और इसे कैश का इस्तेमाल घटाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। एक अन्य बैंकर ने बताया कि फ्री ट्रांजेक्शन का फैसला एक अलग दौर में लिया गया था, लेकिन अब चीजें बदल चुकी है और इसमें बदलाव करने की जरुरत है। अगर लोगों को सिर्फ तीन फ्री ट्रांजेक्शन की इजाजत दी जाएगी तो लोग डिजीटल लेनदेन की ओर शिफ्ट होंगे।
वर्तमान में ज्यादातर बैंक अपने कस्टमर्स को महीने में पांच ट्रांजेक्शन तक फ्री देते हैं। पांच ट्रांजेक्शन की लिमिट पूरी के होने के बाद प्रति लेनदेन 20 रुपए चार्ज किए जाते हैं। 6 मेट्रो शहरों मुंबई, नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में बैंक, दूसरे बैंकों के ग्राहकों को तीन फ्री ट्रांजेक्शन का ऑफर देते हैं। बाकी शहरों में कस्टमर्स को पांच फ्री ट्रांजेक्शन मिलते हैं। यह नियम साल 2014 से लागू है।
गौरतलब है कि डिजीटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही मोदी सरकार ने नोटबंदी के फैसले के कारण लोगों को होनी वाली दिक्कतों को देखते हुए 30 दिसंबर 2016 तक एटीएम ट्रांजेक्शन पर सरचार्ज को खत्म कर दिया था। जिसके कारण आप एटीएम से कितने भी ट्रांजेक्शन करें या कैश निकाले आपको इसके लिए किसी भी तरह के चार्ज देने की आवश्यकता नहीं थी। हालांकि नोटबंदी के दौरान एटीएम से पैसे के निकासी की लिमिट सरकार की ओर से पहले ही तय कर दी गई थी।

 

भारत के 1% अमीरों के पास है देश की 58% संपत्ति, 57 अमीरों के पास 70% आबादी के बराबर दौलत

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ऑक्सफैम की सोमवार (16 जनवरी) को जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत की 58 प्रतिशत संपत्ति देश के 1 प्रतिशत अमीरों के पास है यानी भारत में अमीरों और गरीबों के बीच असंतुलन दुनिया के औसत से ज्यादा है। दुनिया में शीर्ष एक प्रतिशत अमीरों के पास औसतन 50 प्रतिशत संपत्ति है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के 57 अरबपतियों के पास 216 अरब डॉलर (करीब 14.72 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति है जो देश के आर्थिक पायदान पर नीचे की 70 प्रतिशत आबादी की कुल संपत्ति के बराबर है।
वर्ल्ड इकोनॉमी फ़ोरम (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक से पहले जारी की गयी इस रिपोर्ट के अनुसार कुल आठ लोगों को पास दुनिया की आधी आबादी के बराबर दौलत है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के 84 शीर्ष अमीरों के पास 248 अरब डॉलर (16.90 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी 19.3 अरब डॉलर के साथ भारत के सबसे अमीर आदमी हैं। दिलीप संघवी (16.7 अरब डॉलर) और अजीम प्रेमजी (15 अरब डॉलर) दौलत के मामले में दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे। रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल दौलत 31 खरब डॉलर है।
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की कुल दौलत 2557 खरब डॉलर है। इसमें से 65 खरब डॉलर संपत्ति केवल तीन अमीरों बिल गेट्स (75 अरब डॉलर), अमेंसियो ओट्रेगा (67 अरब डॉलर) और वारेन बफेट (60.8 अरब डॉलर) के पास है। “एन इकोनॉमी फॉर द 99 पर्सेंट” नामक रिपोर्ट में ऑक्सफेम ने कहा है कि अब वक्त आ गया है कि कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने वाली अर्थव्यवस्था की बजाय एक मानवीय अर्थव्यवस्था बनायी जाए।
रिपोर्ट के अनुसार साल 2015 से ही दुनिया के शीर्ष एक प्रतिशत अमीरों लोगों को पास बाकी दुनिया से ज्यादा दौलत है। रिपोर्ट में कहा गया है, “अगले 20 सालों में 500 अमीर लोग अपने वारिसों को 21 खरब रुपये देंगे। ये राशि 130 करोड़ आबादी वाले देश भारत की कुल जीडीपी से अधिक है।” रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में चीन, इंडोनेशिया, लाओस, भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश के शीर्ष 10 प्रतिशत अमीर लोगों की आय में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं इस दौरान इन देशों की सबसे गरीब 10 प्रतिशत आबादी की संपत्ति में 15 प्रतिशत की कमी आयी है।

 

अखबार का दावा, कांग्रेस का एजेंडा लागू नहीं करवाने पर मनमोहन से नाखुश थीं सोनिया

मनमोहन के कांग्रेस का एजेंडा लागू नहीं करने से नाखुश थीं।
नई दिल्ली। यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भरोसा नहीं करती थीं। वह मनमोहन के कांग्रेस का एजेंडा लागू नहीं करने से नाखुश थीं। सोनिया मनमोहन से वोट बैंक की नीतियों को लागू करवाना चाहती थीं। ऐसे कई हैरान करने वाले दावे एक अंग्रेजी अखबार ने राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) की फाइलों के हवाले किए हैं।अखबार द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उस वक्त राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी से ही पूछकर ही मनमोहन सिंह हर काम करते थे। मनमोहन के आर्थिक सुधारों पर सोनिया को भरोसा नहीं था और एनएसी मनमोहन की नीतियों की समीक्षा करती थीं। हर फाइल पर सोनिया की नजर रहती थी और आगे की नीतियां तय करती थीं।
अंग्रेजी अखबार ने दावा किया है कि यूपीए शासन में एनएससी नीतियां बनाती थी और प्रभावित करती थी। मनमोहन के कई नीतियों को लागू करने के तरीके से भी एनएसी नाखुश थी। दरअसल, एनएसी वोट बैंक वाली नीतियों को लागू करवाना चाहती थी। एनएसी यूपीए सरकार में पीएमओ से ज्यादा ताकतवर थीं। सोनिया सूचना के अधिकार में सभी सूचना देने के पक्ष में नहीं थीं।

 

पिता ने नहीं दिया साथ तो दो बहनों ने छात्रवृति के पैसे से खुद बना लिया शौचालय, न मिस्त्री रखा, न मजदूर

झारखंड की राजधानी रांची से सटे जिले खूंटी के गनालोया गांव की दो बहनों ने देशभर के लिए मिसाल पेश की है। दोनों बहनों ने छात्रवृति से मिले पैसे से घर में शौचालय बना लिया। इस नेक काम में सरकारी मदद तो दूर अपने पिता ने भी साथ नहीं दिया। दरअसल, पुनिया नाम की लड़की की सहेलियों ने उससे पूछा था कि क्या तुम्हारे घर में शौचालय है, इससे उस वक्त तो पुनिया शर्मिन्दा हो गई थी लेकिन उसी वक्त उसने हालात बदलने की ठान ली थी। घर आकर उसने छोटी बहन सुमी से अपने इरादे का इजहार किया। इसके बाद दोनों बहनों ने शौचालय बनाने की ठान ली।
पुनिया कॉलेज में बीए की छात्रा है जबकि उसकी छोटी बहन अभी स्कूल जाती है। पुनिया को छात्रवृति में पांच हजार रुपये मिले थे जबकि छोटी बहन को चार हजार रुपये मिले थे। इस पैसे से पुनिया ने शौचालय निर्माण का काम तो शुरु कर दिया लेकिन पैसे कम पड़ रहे थे। इसलिए दोनों बहनों ने खुद ही राजमिस्त्री और मजदूर का भी काम किया।
प्रदेश 18 के मुताबिक पड़ोस में एक शौचालय बन रहा था जिसे देखकर दोनों बहनों ने अपना शौचालय बनाना शुरू कर दिया। अब भी कुछ पैसों की कमी पड़ रही थी जिसे उनकी मां ने पूरा कर दिया। घर खर्च के लिए बचाकर रखे तीन हजार रुपये उन्हों ने बोटियों को इस नेक काम के लिए सौंप दिया। लेकिन ताज्जुब की बात ये रही कि पिता ने न तो श्रमदान किया और न ही आर्थिक रूप से बेटियों को मदद की, बावजूद इसके दोनों बहनों ने मिसाल पेश करते हुए शौचालय बना डाला। अब पुनिया, उसकी बहन और मां को राहत है कि शौच जाने के लिए शाम ढलने का इंतजार नहीं करना पड़ता।
खुद राजमिस्त्री और मजदूर बनकर घर में शौचालय बनाने वाली पुनिया ढोढराय गांव की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन गई है। पुनिया की उसकी उपलब्धि के लिए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने बेहद गर्मजोशी के साथ फूल माला एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। अब पुनिया को शौचालय निर्माण अभियान का ब्रांड एंबेस्डर बनाने की तैयारी चल रही है।

 

यूपी की सभी 403 सीटों पर RSS ने भेजे अपने लोग, घर-घर जाकर बीजेपी के लिए मांग रहे वोट

उत्तर प्रदेश में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) ने भारतीय जनता पार्टी की मदद के लिए काम करना शुरू कर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी मिली है कि RSS ने बीजेपी के लिए एक कैंपेन शुरू किया है। इसमें उसने सभी 403 सीटों पर अपने लोग भेजने शुरू कर दिए हैं। वे लोग घर-घर जाकर बीजेपी के लिए वोट मांग रहे हैं। संघ के लोगों द्वारा पर्चे भी बांटे जा रहे हैं। उनपर लिखा है, ‘राष्ट्रहित में काम करने वाले जो लोग हैं उनके पक्ष में ही मतदाता अपना मतदान करें।’ गौरतलब है कि संघ ने 2014 में लोकसभा चुनाव के वक्त भी ऐसा ही कैंपेन चलाया था।
यूपी में संघ की 35 शाखाएं हैं। वे सभी इसी काम में लगी हुई हैं। संघ की तरफ से सभी 403 सीटों पर अपने स्वंयसेवकों को उतार दिया गया है। हर विधानसभा में एक संयोजक और दो सह संयोजक भी बनाए गए हैं। संघ के जो 35 विभिन्न संस्करण हैं उनमें ABVP, भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय किसान संघ, पूर्व सैनिक सेवा परिषद और स्वदेशी जागरण मंच शामिल हैं। कार्यक्रम को करवा रहे कुछ लोगों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अवध प्रांत की सभी 82 विधानसभा सीटों पर मीटिंग हो चुकी है। उन्होंने बताया कि आने वाले वक्त में बाकी जगहों पर मीटिंग की जाएगी।
प्रचार में बीजेपी का नाम नहीं लेगा संघ: स्वंयसेवकों को सख्त हिदायत है कि प्रचार के दौरान बीजेपी का नाम नहीं लेना है। प्लान यह है कि बाद में बीजेपी कार्यकर्ता खुद आकर लोगों को समझाएंगे कि वह ही ‘असली राष्ट्रवादी पार्टी’ है।
अगले महीने उत्तरप्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसमें यूपी के अलावा पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर का नाम शामिल है। यूपी में सात चरणों में मतदान होंगे। 

 

योगेन्द्र यादव बोले- दिल्ली को ‘स्टेपनी’ की तरह यूज कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल, सीएम पद छोड़ें

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने शनिवार को आरोप लगाया कि केजरीवाल राष्ट्रीय राजधानी का इस्तेमाल ‘स्टेपनी’ की तरह कर रहे हैं और उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री पद छोड़कर पंजाब पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली के मुख्यमंत्री को दिल्ली का इस्तेमाल स्टेपनी के तौर पर करना बंद करना चाहिए। उन्हें यह पद छोड़कर पंजाब पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अगर उनकी पार्टी पंजाब में सत्ता में आती है तो उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री का कार्यभार ग्रहण करना चाहिए। यदि उनकी पार्टी हारती है, तब भी उन्हें उस राज्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’
केजरीवाल को आप नेता मनीष सिसोदिया द्वारा एक तरह से पंजाब में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। सिसोदिया ने सोमवार को एक रैली में लोगों से कहा था कि ‘ यह सोचकर वोट डालें कि आप अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री (पंजाब का) बनाने के लिए वोट डाल रहे हैं।’
बाद में केजरीवाल ने यह स्पष्ट किया कि पंजाब का अगला मुख्यमंत्री उसी राज्य से होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आंदोलन के बल पर 2013 में दिल्ली में सत्ता हासिल करने वाली आप सतत रूप से पंजाब में अपनी जमीन तैयार कर रही है। 2014 में इसने चार लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। यादव ने कहा कि आप का ध्यान दिल्ली के बजाय पंजाब, गोवा और गुजरात पर अधिक है।

 

नीतीश कुमार की दही-चूड़ा पार्टी के लिए तीन साल बाद भाजपा नेताओं को गया न्‍योता, भड़की कांग्रेस

मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा पार्टी ने हलचल मचा रखी है। जदयू की ओर से 15 जनवरी को दी जाने वाली पार्टी में भाजपा को न्‍योता दिए जाने से कांग्रेस नाराज हो गई है। कांग्रेस और जदयू महागठबंधन में शामिल हैं और बिहार की सत्‍ता में साझेदार हैं। जदयू अध्‍यक्ष नीतीश कुमार की ओर से दी जाने वाली दही-चूड़ा पार्टी के लिए भाजपा नेताओं को तीन साल बाद बुलावा दिया गया है। यह कदम बिहार कांग्रेस अध्‍यक्ष अशोक चौधरी को रास नहीं आया है। चौधरी का कहना है कि भाजपा नेताओं को इस साल क्‍यों बुलाया गया इस बारे में जदयू के प्रदेशाध्‍यक्ष वशिष्‍ठ नारायण सिंह ही बता सकते हैं। लेकिन कांग्रेस इस फैसले से खुश नहीं है। वहीं जदयू नेताओं का इस बारे में कहना है कि बुलावे को लेकर ज्‍यादा राजनीतिक मतलब नहीं निकालना चाहिए। लालू यादव ने भी भाजपा को बुलाया है। हालांकि भाजपा नेता लालू की दही-चूड़ा पार्टी में नहीं आए।
नीतीश कुमार की ओर से भेजे गए न्‍योते पर बिहार भाजपा नेता और पूर्व उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि उनके पुराने संबंध रहे हैं। उन्‍होंने कहा, ”इसका राजनीतिक मतलब नहीं निकालना चाहिए। जदयू के प्रदेशाध्‍यक्ष ने मुझे बुलाया और मैं जाऊंगा।” रोचक बात है कि इस बार लालू ने भी भाजपा को बुलाया था। लालू ने पहली बार भाजपा नेताओं को न्योता दिया था लेकिन वे नहीं आए। भाजपा की ओर से कहा गया कि उन्‍हें सम्‍मानपूर्वक न्‍योता नहीं दिया गया। लालू की पार्टी में सीएम नीतीश कुमार और अन्‍य राजनेता शामिल हुए। राजद की ओर से बताया गया कि लालू की पार्टी के लिए भाजपा के साथ ही एनडीए के अन्‍य नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया था।
नीतीश कुमार की ओर से भाजपा नेताओं को बुलाए जाने को लेकर कई तरह की संभावनाएं जताई जा रही हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनावों से पहले दोनों पार्टियों के बीच जो दूरी आई थी वह अब कम हो रही है। दोनों दल लगभग दो दशक तक साथ रहे लेकिन 2013 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाने पर दूर हो गए थे। हाल के कुछ महीनों में जदयू और भाजपा नेताओं में गर्मजोशी बढ़ी है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पिछले दिनों मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया था। साथ ही प्रकाश पर्व के मौके पर कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने भी बिहार सरकार के शराबबंदी के कदम की प्रशंसा की थी।

 

आर्मी जवान की पत्नी का आरोप- कपड़े, जूते, बर्तन के साथ टॉयलेट तक साफ कराते हैं सीनियर अफसर

सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए घटिया खाने की शिकायत बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप तो लगे ही, साथ ही देश भर में यह मुद्दा गर्मा गया है। इस मामले के बाद कई और जवान भी वीडियो के जरिए शिकायत कर रहे हैं। हाल ही में थल सेना में लांस नायक यज्ञप्रताप सिंह ने भी सैन्य अफसरों पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। जवान ने वीडियो में आरोप लगाया था कि सेना के अधिकारी जवानों का शोषण करते हैं, जब इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं तो कोर्ट मार्शल करने और नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं। वहीं यज्ञप्रताप की पत्नी ने भी सैन्य अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सैनिक की पत्नी ऋचा सिंह कहा कि जब उसके पति देहरादून में पदस्थ थे तब वह उनके साथ ही रहती थी। वहां उन्होंने देखा कि अफसर सैनिकों से नौकरों की तरह काम कराते हैं। घर में कपड़े, जूते, बर्तन यहां तक कि टायलेट तक साफ कराते हैं। इतना ही नहीं, अफसरों के घर की शॉपिंग, बच्चों को स्कूल छोड़ना और कुत्ते को नहलाने जैसे काम भी करने पड़ते हैं। ऋचा ने कहा कि उनके पति ने इसी से आहत होकर आवाज उठाई और फेसबुक पर वीडियो डालकर पीएम मोदी से गुहार लगाई है। सैनिक की पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति का मोबाइल छीन लिया गया है और उन्हें परेशान किया जा रहा है।
मैं यज्ञ प्रताप सिंह इस समय 42 ब्रिगेड देहरादून में तैनात हूं। मैं सेना में 15 साल 6 महीने से सर्विस कर रहा हूं। मैंने यह देखा कि भारतीय सेना में अधिकारी जवानों का कैसे शोषण करते हैं। 15 जून 2016 को मैने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, गृहमंत्री और सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा। इसके बाद पीएमओ से हमारे दफ्तर एक लेटर आया और बिग्रेडियर से जवाब मांगा गया। जब यह पत्र हमारी ब्रिगेड में पहुंचा तोअधिकारियों ने मेरे ऊपर अभद्र टिप्पणियां करनी शुरू कर दी। वह मुझे टॉर्चर और परेशान करने लगे। मुझे इतना परेशान किया गया कि एक आम सैनिक होता तो या तो सुसाइड कर लेता या फिर अधिकारियों से बदला लेने के लिए कोई कदम उठाता। अगर मैं दुश्मन से लड़ सकता हूं तो मैं कोई ऐसा कदम नहीं उठाउंगा जिससे मेरी वर्दी पर लांछन लगे। आज मुझे चार बजे चार्जशीट या कोर्टमार्शल के लिए बुलाया गया है। हो सकता है मेरा कोर्टमार्शल हो जाए।’

 

जवानों के वीडियोज पर पत्रकारों से बोले रक्षा राज्य मंत्री- ये इक्के-दुक्के मामले हैं, आप भी तो करते हैं

भारतीय सेना के जवानों द्वारा वीडियो बनाकर अपनी समस्याएं लोगों के सामने लाने पर रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने पत्रकारों से कहा कि ये इक्के-दुक्के मामले हैं। मीडिया से बात करते हुए भामरे ने कहा, ‘इक्के-दुक्के मामलों के आधार पर पूरी सेना को कठघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता। पूरी सेना के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता। आप लोग भी तो ऐसा करते हैं।’ इसके बाद उन्होंने पत्रकारों के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। बता दें, इन दिनों सेना और अद्धसैनिक बलों के जवान समस्याओं के बारे में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। ऐसे करीब तीन-चार वीडियो सामने आए हैं। इसके बाद पूरे देश में यह बहस का विषय बन गया।
सबसे पहले बीएसएफ के जवान तेज बहादुर ने वीडियो बनाकर कहा था कि उन्हें अच्छी क्वालिटी का खाना नहीं मिलता। उन्होंने नाश्ते, लंच और डीनर का वीडियो बनाया था। इसके बाद ही तेज बहादुर ने अपने सीनियर अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि सरकार से पैसा जरूर मिलता है, लेकिन सीनियर अधिकारी घपला करते हैं। जिसकी वजह से उन्हें अच्छी क्वालिटी का खाना नहीं मिलता। इसके बाद सीआरपीएफ के एक जवान का वीडियो आया था। सीआरपीएफ जवान ने कहा था कि हम सेना के जवानों जैसा ही काम कर रहे हैं, लेकिन हमें उनकी जैसी सुविधाएं और सैलरी नहीं दी जाती है।
इनके बाद थलसेना के एक जवान यज्ञ प्रतात सिंह का वीडियो सामने आया था। सिंह ने अपने सीनियर अधिकारियों पर शोषण आरोप लगाय था। सिंह ने वीडियो में कहा था कि सेना के सीनियर अधिकारी जवानों से गाड़ी साफ करवाने, जूते पॉलिश करवाने, बच्चे खिलवाने, खाना बनवाना जैसे काम करवाते हैं। जब इसके खिलाफ आवाज उठाई जाए तो वे हमारें खिलाफ कार्रवाई करने की धमकी देते हैं।
सेना के जवान का वीडियो सामने आने के बाद थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा था कि ऐसी शिकायतों को सार्वजनिक ना करके, मुझसे डायरेक्ट करें। साथ ही कहा था कि इन शिकायतों के लिए शिकायत पेटियां भी रखी जाएंगी।

 

2002 तक गणतंत्र दिवस नहीं मनाने वाले आरएसएस का फरमान- 26 जनवरी को दिल्ली के हर मोहल्ले में फहराओ तिरंगा

 

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) ने ऐलान किया है कि इस बार उनकी तरफ से दिल्ली के हर मोहल्ले में तिंरगा फहराया जाएगा। इसके लिए संघ के हर स्वंयसेवी से कहा गया है कि दिल्ली के हर मोहल्ले में तिंरगा फहराना उनकी जिम्मेदारी है। माना जा रहा है कि ऐसा लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार करने के लिए किया जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले 2002 तक संघ तिरंगा नहीं फहराता था। इसकी वजह यह थी कि संघ ने अखंड भारत के निर्माण की कसम खा रखी थी। इसलिए आजादी के 51 साल बाद भी यानी 2002 तक RSS ने तिरंगे से दूरी बनाई रखी।

क्या है अखंड भारत : अखण्ड भारत भारत के प्राचीन समय के अविभाजित स्वरूप को कहा जाता है। प्राचीन काल में भारत बहुत विस्तृत था जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, बर्मा, थाइलैंड आदि शामिल थे। कुछ देश जहां बहुत पहले के समय में अलग हो चुके थे वहीं पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि अंग्रेजों से स्वतन्त्रता के काल में अलग हुए।

इससे पिछले साल भी संघ और तिंरगे को लेकर विवाद हुआ था। तब संघ से जुड़े संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने 26 जनवरी को सभी मदरसों को तिरंगा फहराने की नसीहतच लिए कहा था। हालांकि, दारुल उलूम ने उसपर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी।

वहीं मदरसों पर तिरंगा फहराने की बात के समर्थन में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने कहा था कि उनका संगठन पिछले पांच बरसों से 26 जनवरी और 15 अगस्त को मदरसों पर तिरंगा फहराने की अपील करता रहा है। उन्होंने कहा था कि उस साल केंद्र में अपनी (बीजेपी) सरकार होने की वजह से उस कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर आयोजित किया जा रहा था।

सैनिकों के खाने पर सालाना 1600 करोड़ खर्च, अर्धसैनिक जवान को रोज 95 रुपये राशन भत्‍ता

देश में अर्धसैनिक बलों में काम करने वाले एक जवान को प्रतिदिन खाने के लिए केवल 95 रुपये का भत्‍ता मिलता है। यह हाल तो तब है जब नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एनडीए सरकार ने मई 2014 में डेली राशन अलाउंस को बढ़ाया था। उस समय सरकार ने अर्धसैनिक बलों के जवानों के प्रतिदिन के राशन भत्‍ते में 12 प्रतिशत की वृद्धि की थी। इससे राशन भत्‍ता 85.96 रुपये से बढ़कर 95.52 रुपये हो गया था। द क्विंट ने गृह मंत्रालय से मिले दस्‍तावेजों के आधार पर यह रिपोर्ट दी है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआरपीएफ, दिल्‍ली पुलिस आती है।
सातवें वेतन आयोग के बाद भी राशन भत्‍ते में बदलाव नहीं किया गया। आयोग की रिपोर्ट में इस बारे में कहा गया कि इस भत्‍ते को लेकर यथास्थिति बनाए रखी जाए। यह भत्‍ता रक्षा और गृह मंत्रालय की ओर से बढ़ाया जाएगा। वेतन आयोग ने राशन भत्‍ते को टैक्‍स के दायरे से बाहर करने की मांग भी ठुकरा दी थी। रिपोर्ट के अनुसार साल 2011 में रक्षा मंत्रालय ने चिकन और मटन के राशन की मात्रा 110 ग्राम से 180 ग्राम प्रति व्‍यक्ति कर दी थी। वहीं 12 हजार फीट से ऊपर जैसे कि सियाचीन और का‍रगिल जैसी जगहों पर तैनात जवानों के लिए स्‍पेशल राशन होता है। इसमें ब्रांडेड गेंहू का आटा, रेडी टू ईट सब्जियां और ब्रांडेड नमक शामिल होता है। रक्षा मंत्रालय सैनिेकों के लिए ताजा खाने पर सालाना 1600 करोड़ रुपये खर्च करता है।
अगर अमेरिकी सैनिकों को मिलने वाले राशन भत्‍ते से तुलना की जाए तो भारतीय सेना के जवान काफी पीछे हैं। अमेरिकी जवानों को राशन भत्‍ते के रूप में हर महीने 200 डॉलर से ज्‍यादा मिलते हैं। साथ ही आर्मी पोस्‍ट पर रहने वाले जवानों को सैन्‍य क्‍वार्टर और फ्री खाना मिलता है।

 

आरबीआई ने संसदीय समिति को बताया, मोदी सरकार ने दी थी नोटबंदी लागू करने की ‘सलाह’

रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की अगले दिन ही इस सलाह पर विचार करने के लिए बैठक हुई। ‘विचार विमर्श’ के बाद केंद्र सरकार से यह सिफारिश करने का फैसला किया गया कि 500 और 1,000 के नोटों को चलन से बाहर कर दिया जाए। इस सिफारिश के कुछ घंटे बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में नोटबंदी का फैसला किया गया। कुछ मंत्री अभी तक यह कहते रहे हैं कि सरकार ने नोटबंदी का फैसला रिजर्व बैंक की सिफारिश पर किया था। समिति को भेजे नोट में रिजर्व बैंक ने कहा कि पिछले कुछ साल से वह नई श्रृंखला के बैंक नोटों में सुधरे हुए सुरक्षा फीचर्स जोड़ने पर काम कर रहा है, जिससे इनकी नकल न की जा सके। वहीं दूसरी ओर सरकार कालेधन तथा आतंकवाद से निपटने के लिए कदम उठा रही है।
रिजर्व बैंक ने कहा कि खुफिया और प्रवर्तन एजेंसियों के पास इस तरह की रिपोर्ट थी कि ऊंचे मूल्य के नोटों की उपलब्धता की वजह से कालाधन धारकों तथा जाली नोटों का धंधा करने वालों काम आसान हो रहा है। ऊंचे मूल्य के नोटों का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए भी किया जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि भारत सरकार और रिजर्व बैंक को लगा कि नई श्रृंखला के नोटों को पेश करने से इन तीनों समस्याओं से निपटने का अवसर मिलेगा। नोट में कहा गया है कि हालांकि शुरुआत में इस पर कोई पुख्ता फैसला नहीं लिया गया कि नोटबंदी की जाए या नहीं, लेकिन नई श्रृंखला के नोट पेश करने की तैयारियां चलती रहीं।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि 7 अक्टूबर, 2014 को उसने सरकार को सुझाव दिया था कि मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए तथा भुगतान करने और करेंसी लॉजिस्टिक्स के प्रबंधन के लिए 5,000 और 10,000 का नोट शुरू करने की जरूरत है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सरकार 18 मई, 2016 को 2,000 का नोट पेश करने पर सहमत हुई थी। रिजर्व बैंक ने कहा कि उसने सरकार से 27 मई, 2016 को नई श्रृंखला के बैंक नोट नए डिजाइन, आकार, रंग व थीम के साथ पेश करने की सिफारिश की। इसमें 2,000 का नया नोट भी शामिल है।
सरकार ने इस पर 7 जून, 2016 को अंतिम मंजूरी दे दी। इसी के अनुरूप नोट छापने वाली प्रेस को नई श्रृंखला के नोटों का शुरुआती उत्पादन करने को कहा गया। नोट में कहा गया है कि चूंकि नए डिजाइन और नए मूल्य के नोटों के प्रति लोगों का आकषर्ण होता, ऐसे में यह फैसला किया गया कि 2,000 के नोट पर्याप्त संख्या में छापे जाएं जिससे इन्हें देशभर में एक साथ उपलब्ध कराया जा सके। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सरकार ने अपनी 7 नवंबर की सलाह में इस बात का उल्लेख किया कि नकदी से कालेधन में मदद मिलती है क्योंकि नकद लेनदेन का ऑडिट नहीं हो पाता।
संसदीय समिति से नोट में कहा गया है कि कालेधन की समाप्ति से छद्म अर्थव्यवस्था समाप्त होगी जो भारत के वृद्धि परिदृश्य की दृष्टि से सकारात्मक होगी। इसमें यह भी कहा गया है कि पिछले पांच साल के दौरान 500 और 1,000 के नोटों का चलन इन नोटों की नकल के साथ बढ़ा है। आतंकवाद तथा ड्रग्स के लिए जाली भारतीय करेंसी नोट (एफआईसीएन) के इस्तेमाल की व्यापक खबरें हैं। ये नोट पड़ोसी देश में बन रहे हैं जो कि देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए गंभीर खतरा हैं।
ऐसे में सरकार ने 500 और 1,000 के नोटों को चलन से हटाने की सिफारिश की। नोटबंदी की सिफारिश के लिए रिजर्व बैंक के बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि यह प्रस्ताव इससे अच्छे समय नहीं आ सकता था, जबकि साथ ही नई श्रृंखला के नोट आ रहे हैं। इससे मौजूदा नोटों को हटाया जा सकता है और नए डिजाइन के अधिक सुरक्षा खूबियों वाले नोटों को पेश किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि रिजर्व बैंक के कार्यालयों में 2,000 का नोट आ रहे हैं और इन्हें देशभर में करेंसी चेस्ट में भेजा जा रहा हैं। मूल्य के हिसाब से इनके जरिये मांग के एक महत्वपूर्ण हिस्से को पूरा किया जा सकता है।