बड़ी खबर

अपने ही दोस्त के जेल जाने के बाद उसकी पत्नी से बनाया शारीरिक संबंध…फिर हुआ ये…

BBN24-NEWS पेंड्रा।  दोस्त के जेल जाने के बाद दोस्त की पत्नी को शादी का झांसा देकर अवैध संबंध बनाने वाले आरोपी को गौरेला थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पिछले नौ माह से फरार था।

वही सूत्रों से जानकारी मिली है कि आरोपी युवक दोस्ती पत्नी को शादी का झांसा देकर संबंध बनाया करता था। पीड़िता का पति किसी मामले में जेल में बंद था, जिस दौरान यह घटना हुई थी। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद आरोपी युवक फरार हो गया था। वह पिछले नौ माह से फरार था। आज गौरेला पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है।

राहुल गांधी से मिलने के बाद पायलट ने मीडिया से की बात..कहा....

मिडिया रिपोर्ट से मिली जनकारी के अनुसार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने सीएम गहलोत से विवाद के बीच पहली बार मीडिया से बात कि सचिन पायलट ने कहा कि जिन लोगों ने मेहनत की है, उनकी सरकार में भागदारी हो. लड़ाई पद के लिए नहीं, आत्मसम्मान के लिए थी. पार्टी पद देती है, तो पार्टी पद ले भी सकती है. उन्होंने कहा कि जो वादे सत्ता में करके आए थे, वो पूरा करेंगे.

राहुल गांधी और प्रियंका से मुलाकात पर सचिन पायलट ने कहा कि मैंने अपनी बात बेबाकी के साथ रखी. मुझे खुशी है की कांग्रेस अध्यक्षा और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने विस्तार से चर्चा की. साथी विधायकों की बातों को हमने सामने रखा. मुझे आश्वासित किया गया है कि तीन सदस्यीय कमेटी जल्द इन तमाम मुद्दों का समाधान करेगी. ये सैद्धांतिक मुद्दे थे.

पायलट ने कहा कि मुझे पद की बहुत लालसा नहीं है, लेकिन मैं चाहता था कि जो मान-सम्मान-स्वाभिमान की बात हम करते थे वो बनी रहे. हमने हमेशा कोशिश की है कि जिनकी मेहनत से सरकार निर्माण हुआ है उन लोगों की हिस्सेदारी, भागेदारी सुनिश्चित की जाए. मेरी शिकायत का समाधान होगा.

BBN24NEWS EXCLUSIVE : 161 साल पहले बीजापुर में आदिवासियों ने जंगल बचाने फूंका था बिगुल। एक साल वृक्ष के पीछे एक व्यक्ति का सिर के नारे से हुई थी कोई विद्रोह की मुनादी।

बीजापुर :- 9 अगस्त को 'विश्व आदिवासी दिवस' के रूप में पहचाना जाता है. इस दिन संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने आदिवासियों के भले के लिए एक कार्यदल गठित किया था जिसकी बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई थी. उसी के बाद से (UNO) ने अपने सदस्य देशों को प्रतिवर्ष 9 अगस्त को 'विश्व आदिवासी दिवस' मनाने की घोषणा की। ब्रिटिसकालीन रियासत के दौरान आज से 161 साल पहले 1859 को बीजापुर जिले में अंग्रेजो की सरपरस्ती में सागौन के जंगलों को काटकर हैदरबाद के निजाम द्वारा तस्करी को रोकने आदिवासियों ने आंदोलन छेड़ा था जिसको "कोई विद्रोह" के नाम से जाना जाता है। फोतकेल के जमींदार नागुल दोरला ने इस आंदोलन का बिगुल फूंका था। यह विद्रोह बीजापुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ का एक अलग आंदोलन था जिसमे साल वृक्ष के जंगलों को तस्करों से बचाने के लिए लड़ा गया था। आंदोलन का मूल नारा " एक साल वृक्ष के पीछे एक व्यक्ति का सिर" दिया गया था।

जानिए कोई विद्रोह को विस्तार से...कोई विद्रोह (1859 ई.) वन रक्षा हेतु आन्दोलन, 

बस्तर की दोरली की उपभाषा (बोली) में कोई का अर्थ होता है वनों और पहाड़ों में रहने वाली आदिवासी प्रजा। प्राचीन समय में वन बस्तर रियासत का महत्वपूर्ण संसाधन रहा है। दक्षिण बस्तर अंग्रेजों की शोषण व गलत वन नीति से आदिवासी काफी असन्तुष्ट थे। फोतकेल के जमींदार नागुल दोरला ने भोपालपट्टनम् के जमींदार राम भोई और भेजी के जमींदार जुग्गाराजू को अपने पक्ष में कर अंग्रेजों द्वारा साल वृक्षों के काटे जाने के खिलाफ 1859 ई. में विद्रोह कर दिया। विद्रोही जमींदारों और आदिवासी जनता ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि अब बस्तर के एक भी साल वृक्ष को काटने नहीं दिया जाएगा। अपने इस निर्णय की सूचना उन्होंने अंग्रेजों एवं हैदराबाद के ब्रिटिश ठेकेदारों को दी। ब्रिटिश सरकार ने नागुल दोरला और उनके समर्थकों के निर्णय को अपनी प्रभुसत्ता को चुनौती मानकर वृक्षों की कटाई करने वाले मजदूरों की रक्षा करने के लिए बन्दूकधारी सिपाही भेजे। दक्षिण बस्तर के आदिवासियों को जब यह खबर लगी, तो उन्होंने जलती हुई मशालों को लेकर अंग्रेजों के लकड़ी के टालों को जला दिया और आरा चलाने वालों का सिर काट डाला। आन्दोलनकारियों ने एक साल वृक्ष के पीछे एक व्यक्ति का सिर' का नारा दिया। इस जनआन्दोलन से हैदराबाद का निजाम और अंग्रेज घबरा उठे। बाध्य होकर निजाम और अंग्रेजों ने नागुल दोरला और उसके साथियों के साथ समझौता किया। कैप्टन सी. ग्लासफोर्ड जबकि सिरोंचा का डिप्टी कमिश्नर था, ने विद्रोहियों की भयानकरता को देखते हुए अपनी हार मान ली और बस्तर में उसने लकड़ी ठेकेदारों की प्रथा को समाप्त कर दिया।

बस्तर के वनों को समय से पूर्व कटने से बचाने का यह विद्रोह बस्तर का ही नहीं वरन छत्तीसगढ़ का अपने किस्म का अनोखा विद्रोह था। इस विद्रोह के पीछे आदिवासियों की आटविक मानसिकता का परिचय मिलता है। सालद्वीप के मूल प्रजाति साल की रक्षा के लिए सभ्य समाज से दूर कहे जाने वाले आदिवासियों ने जो अनोखा संघर्ष किया है, वह उनके पर्यावरण जागृति को दर्शाता है। इस तरह की जागृति और चौकन्नापन आज की पीढ़ी में दिखाई नहीं देता। यह विद्रोह आज के शिक्षित समाज के लिए एक प्रेरणा है। इस विद्रोह में जनजातियों की वैचारिक दृढ़ता के दर्शन होते हैं। कोई विद्रोह बस्तर का पहला विद्रोह था, जिसमें अंग्रेजों ने अपनी हार मानी और विद्रोहियों के साथ समझौता किया था।

बाल-बाल बचे, रांची एयरपोर्ट पर उड़ान भरते समय विमान से टकराया......

रायपुर : हाल ही में कोझिकोड एयरपोर्ट पर एक बड़ा हादसा हुआ, जिसमें कई लोग मारे गये और कई घायल हैं। जानकारी के मुताबिक अभी एक और विमान हादसा होते-होते टल गया। रांची से मुंबई जा रहे एयर एशिया विमान (i5-632) से उड़ान भरते समय एक पक्षी टकरा गया। विमान को कोई क्षति नहीं पहुंची है और सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं। एयरपोर्ट के अधिकारी ने बताया कि मुंबई जा रही एयर एशिया फ्लाइट ( i5-632) रांची एयरपोर्ट पर टेक ऑफ के वक्त एक पक्षी से टकरा गई। 

इस घटना से ठीक एक दिन पहले ही केरल के कोझिकोड में एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान हादसे का शिकार हो गया, जिसमें पायलट सहित कम से कम 18 यात्रियों की मौत हो गई। दुबई से वंदे भारत मिशन के तहत वहां से प्रवासी भारतीयों को लेकर यह विमान रनवे को पार करता हुआ 35 फुट गहरी खाई में जा गिरा और दो टुकड़े हो गए।

फिलहाल विमान का निरीक्षण किया जा रहा है। परिचालन के लिए विमान को मंजूरी मिलने के बाद उड़ान को रवाना होना है। एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा कि एयर एशिया इंडिया हमारे मेहमानों और चालक दल की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और इस देरी के कारण होने वाली असुविधा पर खेद व्यक्त करता है।

 

राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर निशाना, कहा- जब-जब देश भावुक हुआ, फाइलें हुईं गायब

bbn24news :: शराब कारोबारी विजय माल्या केस की फाइलें गायब होने पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान सांसद राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. राहुल गांधी ने ट्वीट कर मोदी सरकार को इस सबके लिए जिम्मेदार ठहराया है. राहुल ने आरोप लगाया है जब-जब देश में भावुकता वाले हालात पैदा हुए हैं, फाइलें गायब हुईं हैं.

शनिवार को राहुल गांधी ने ट्वीट किया, 'जब-जब देश भावुक हुआ, फ़ाइलें ग़ायब हुईं. माल्या हो या राफ़ेल, मोदी या चोक्सी... गुमशुदा लिस्ट में लेटेस्ट हैं चीनी अतिक्रमण वाले दस्तावेज़. ये संयोग नहीं, मोदी सरकार का लोकतंत्र-विरोधी प्रयोग है.' बता दें कि सुप्रीम कोर्ट  में भगौड़े विजय माल्याकी फाइल से जरूरी दस्तावेज गायब होने के कारण अवमानना मामले में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई 20 अगस्त तक के लिए टाल दी गई है.

बड़ी खबर : केरल में विमान हादसा, 189 यात्री थे सवार

मीडिया रिपोर्ट से मिली जनकारी के अनुसार  केरल में कोझिकोड एयरपोर्ट पर एअर इंडिया का विमान रनवे पर फिसल गया. जिसके कारण एक बड़ी दुर्घटना देखने को मिली है. रनवे पर विमान के फिसलने के बाद विमान क्रैश हो गया और दो हिस्सों में टूट गया. विमान दुबई से आ रहा था, जिसमें 189 यात्री सवार थे. इस हादसे में कई लोग घायल हो गए हैं. वहीं सूत्रों के मुताबिक हादसे में दोनों पाटलट की मौत हो गई है.

अकलतरा : पोड़ी दल्हा गांव में मिले दो कोरोना मरीज

अकलतरा । जांजगीर चम्पा  जिले में लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है।इसके बावजूद लोग बिना काम के गांव शहर में बिना मास्क लगाये घूम रहे है बीते बुधवार को 9 मरीज मिले हैं  जिसमें से 2 मरीज़ अकलतरा तहसील के पोड़ी दल्हा गांव के मरीज़ है। ये दोनों भाई है बिलासपुर जिले के ग्राम पंधी सीपत के पास बोरी फैक्टरी में काम करने गए हुए थे। वहां संक्रमण फैलने के बाद ये दोनों घर वापस आ गए थे। जहां से डॉक्टरों ने सैंपल लेकर होम क़्वोरेन्टीन किया गया था। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद दोनों को कोवीड हॉस्पिटल में आज शिफ्ट किया गया। आपको बता दे की कुछ दिनों पूर्व बलौदा के गांव में भी एक मरीज़ मिला था। रफ्तार में बढ़ रही है कोरोना के पेसेंट उसके बाद भी लोग इस बीमारी को हल्के में ले रहे है ।प्रशासन द्वारा लॉक डाउन करने आखिर आम नागरिकों को समस्या होती है यदि सभी लोग जरूरत हो ही घर  से निकले।

रायपुर : सुगंधित फूलों और मीठे फलों से भरा होगा छत्तीसगढ़ का राम-मार्ग : डेढ़ लाख से ज्यादा पौधे रोप रही है सरकार


राम के वनवास काल से संबंधित 75 स्थानों को चिन्हित कर उन्हें नये पर्यटन सर्किट के रुप में आपस में जोडा़ जा रहा है। पहले चरण में उत्तर छत्तीसगढ़ में स्थित कोरिया जिले से लेकर दक्षिण के सुकमा जिले तक 9 स्थानों का सौंदर्यीकरण तथा विकास किया जा रहा है। इस पर 137 करोड़ 75 लाख रुपये खर्च होंगे। ये सभी स्थान पहले ही प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर हैं। अब इन्हें और भी हराभरा किया जाएगा। सभी चयनित पर्यटन-तीर्थों पर सुगंधित फूलों वाली सुंदर वाटिकाएं तैयार की जाएंगी। राम वन गमन के 528 किलोमीटर मार्ग के दोनों किनारों पर डेढ़ लाख से अधिक पौधे रोपित करने की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई है। मूल परियोजना पर काम शुरु होने से पहले ही विभाग ने अपना 90 प्रतिशत काम पूरा भी कर लिया है। पूरे मार्ग पर पीपल, बरगद, आम, हर्रा, बेहड़ा, जामुन, अर्जुन, खम्हार, आंवला, शिशु, करंज, नीम आदि के पौधों का रोपण किया जा रहा है। इन पौधों की सुरक्षा के लिए बांस से बने विशेष तरह के ट्री-गार्डों का उपयोग किया जा रहा है, जो पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैं। इनका निर्माण महिला स्व सहायता समूहों द्वारा किया गया है।

रायपुर : राम वन गमन पथ के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए इसी महीने होगा काम शुरु.....पथ पर पग-पग पर होंगे श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के दर्शन ...

 

 कोरिया से सुकमा तक निर्मित होने वाला राम वन गमन पथ कदम-कदम पर राम-मय होगा। छत्तीसगढ़ शासन ने जो कार्ययोजना तैयार की है, उसमें तीर्थ एवं पर्यटनों स्थलों के द्वार से लेकर लैंप-पोस्ट और बैंच तक के सौंदर्यीकरण का विशेष ध्यान रखा गया है। श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को राम वन गमन पथ की यात्रा के दौरान पग-पग पर भगवान श्रीराम के दर्शन होंगे। राम वन गमन पथ के मुख्य मार्ग सहित उप मार्गाें की कुल लम्बाई लगभग 2260 किलोमीटर है। इस मार्ग के किनारे जगह-जगह संकेतक तीर्थ स्थलों एवं पर्यटनों की जानकारी सहित भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी कथाएं देखने और सुनने को मिलेंगी। वन गमन पथ के दोनों ओर विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण भी किया जा रहा है, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के दिलों दिमाग में प्रभु श्रीराम के वनवास का अहसास बना रहे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की प्राथमिकता वाली राम वन गमन परियोजना का कान्सेप्ट प्लान तैयार हो चुका है।

    मुख्यमंत्री श्री बघेल की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पर्यटन सचिव श्री पी.अनबलगन ने इस संबंध में योजना की विस्तृत जानकारी पावरप्वांईट प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी। 137 करोड़ 75 लाख रुपये की कुल लागत वाली इस परियोजना पर इसी अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह से काम शुरु हो जाएगा। इसकी शुरुआत रायपुर के निकट स्थित चंदखुरी से होगी। चंदखुरी भगवान राम का ननिहाल है। यहां माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर है, जो सातवीं शताब्दी का है। माता कौशल्या मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण तथा विकास के लिए 15 करोड़ 45 लाख रुपये की योजना तैयार की गई है। 

    श्री अंबलगन ने बताया कि इस परियजोना के तहत लगभग 2260 किलोमीटर सड़कों का विकास किया जाएगा। लगभग 1400 किलोमीटर सड़कों के दोनों ओर वृक्षारोपण कार्य किया जाएगा। राम वन गमन पथ पर पहले चरण में जिन 9 स्थानों का चयन किया गया हैं, उन सभी में आकर्षक लैंडस्केप तैयार किया जाएगा। इन सभी स्थानों पर पर्यटकों के लिए नागरिक सुविधाओं का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। विश्वस्तरीय अधोसंरचनाओं के निर्माण के दौरान उच्च कोटि का प्री-कास्ट और फेब्रीकेशन वर्क सुनिश्चित किया जाएगा। सभी स्थानों पर भव्य द्वार बनाए जाएंगे, जिनके शीर्ष पर भगवान राम का धनुष और उसकी प्रत्यंचा पर रखा हुआ तीर होगा। द्वार पर जय श्रीराम के घोष के साथ राम-पताका लहरा रही होगी। तीर्थ-पर्यटनों पर स्थापित किये जाने वाले लैंपोस्ट भी प्राचीन काल की याद दिलाएंगे। इनके शीर्ष पर भी भगवान श्रीराम की आकृति होगी। एक अन्य डिजाइन में लैंपपोस्ट के शीर्ष पर भी तीर-धनुष स्थापित किया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि राम वन गमन परिपथ में कोरिया से लेकर सुकमा तक सूचनात्मक स्वागत द्वार स्थापित किये जाएंगे। यात्रियों को इससे पता चल सकेगा कि वे परिपथ पर सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। किसी पडाव में पहुंचने पर एक खास डिजाइन का साइन बोर्ड उनका स्वागत करेगा। परिपथ में सड़क के किनारे विभिन्न स्थानों की दूरी और दिशा बताने वाले डायरेक्शन-पोस्ट भी स्थापित किए जाएंगे।

    इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि पर्यटन-तीर्थों में धार्मिक-स्थलों के आसपास सजने वाले पूजन-सामग्रियों के परंपरागत बाजार को भी व्यवस्थित कर नये तरह से डिजाइन किया जाए। इन बाजारों में आधुनिक तरीके से निर्मित, किंतु प्राचीनता की याद दिलाते स्टाल स्थापित किये जाएंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग स्थलों को भी अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित किया जाएगा।

    सभी पर्यटन-तीर्थों में विशेष साज सज्जा वाले पर्यटक सूचना केंद्र स्थापित किये जाएंगे। राम वन गमन पथ का रूट मैप तैयार कर संबंधित विभागों को भेज दिया गया है। चंदखुरी, शिवरीनारायण, तुरतुरिया और राजिम के लिए परियोजना-रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। शिविरीनरायण ब्रिज के ऊपर लेजर लाइट शो का इंतजाम भी होगा। धमतरी जिले में सप्तऋषि आश्रम का सौंदर्यीकरण तथा विकास किया जाना है। नगरी को पर्यटन हब के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। विभिन्न स्थानों पर बायोडायवर्सिटी पार्क का भी निर्माण किया जाएगा।

    पर्यटन विभाग द्वारा इतिहासकारों से चर्चा कर विभिन्न शोध पत्रों और प्राचीन मान्यताओं के आधार पर छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ के 75 स्थलों को चिन्हित किया गया है। प्रथम चरण में जिन 9 स्थलों का विकास किया जा रहा है, उनमें सीतामढ़ी हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) शामिल हैं। फिलहाल प्रथम चरण में 5 स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना तैयार कर निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी जा चुकी है। एक वर्ष की अवधि में निर्माण एजेंसियों द्वारा कार्ययोजना के अनुसार कार्यों को पूरा कराया जाएगा। कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने राम वन गमन पथ के प्रमुख स्थलों के बारे में जनसामान्य को जानकारी देने के लिए सड़क के किनारे उपयुक्त स्थलों पर साइनबोर्ड लगाए जाने का सुझाव दिया। चंदखुरी स्थिति माता कौशल्या मंदिर परिसर सहित अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, श्री टी.एस. सिंहदेव, श्री ताम्रध्वज साहू, डॉ. शिव कुमार  डहरिया, श्री अमरजीत भगत ने कई उपयोगी सुझाव भी दिए। इस दौरान मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, श्री कवासी लखमा, गुरु रुद्रकुमार, मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी, श्री चंद्रदेव राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री विनोद वर्मा, श्री प्रदीप शर्मा, श्री रूचिर गर्ग, मुख्य सचिव श्री आर.पी. मंडल, अपर मुख्यसचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश चतुर्वेदी, प्रमुख सचिव वन श्री मनोज कुमार पिंगुआ , कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ.एम.गीता, मुख्यमंत्री के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

श्रीराम जन्मस्थल पर भव्य राम मंदिर की रखी गई नींव मंदिर निर्माण की नींव में धातू का नाग और कछुआ, आईये जानते हैं क्यों.....

आज अयोध्या नगरी में भगवान श्रीराम जन्मस्थल पर भव्य राम मंदिर की नींव रखी गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहले उस जगह से पूजा अर्चना शुरू की, जहां शिला कुंड था। उन्होंने शिला कुंड की परिक्रमा पूर्ण कर अपना शीश नवाया। फिर नींव कुंड स्थान पर विधि-विधान के साथ कलश, कछुआ, नाग अर्थात सर्प की प्रतिमा स्थापित की। इसके बाद ही मंदिर निर्माण का काम शुरू होगा।
नींव में कछुआ और सर्प क्यों है जरूरी
भारत में किसी भी मकान की नींव रखते समय भूमि पूजन होता है, फिर नींव की खुदाई होती है। इस नींव में धातु की कछुए और नाग की प्रतिमा डाली जाती है। इसके पीछे यह मान्यता है कि धरती के नीचे पाताललोक है। इसलिए जब हम जमीन की खुदाई करते हैं तो एक तरह से हम पाताललोक में प्रवेश करते हैं। शास्त्रों में पाताललोक का स्वामी शेषनाग को माना गया है। ऐसे में पाताललोक में प्रवेश से पहले हमें वहां के राजा से आज्ञा लेना आवश्यक हो जाता है।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि पुराणों के अनुसार पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी है। मकान की नींव में सर्प की पूजा और स्थापना का सांकेतिक अर्थ यह माना जाता है कि जिस तरह शेषनाग ने पूरी पृथ्वी को अपने फन पर पूरी मजबूती से संभाला हुआ है, उसी प्रकार वे मकान की भी उसी तरह से रक्षा करेंगे।

शेषनाग भगवान विष्णु की शैया माने जाते हैं। कहा जाता है कि क्षीर सागर में भगवान विष्णु शेषनाग के ऊपर विश्राम करते हैं और देवी लक्ष्मी उनके चरणों में होती हैं। इसीलिए भी हम लोग नाग की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा करते हैं।


 दूसरी तरफ, नींव में नाग की प्रतिमा के साथ-साथ कछुए की प्रतिमा भी स्थापित कर पूजा करते हैं। भारतीय धार्मिक परम्पराओं में तो हर ऐसे जीव का संबंध हमारे देवी-देवताओं से जुड़ा हुआ है, परंतु वास्तुशास्त्र में इसका एक अलग महत्त्व है। वास्तु की दृष्टि से यह और लाभदायक हो जाता है। हिंदू धर्म में घर पर कछुआ रखना बहुत शुभ माना जाता है। वह इसलिए की भगवान नारायण अर्थात विष्णु जी के 10 अवतारों में से एक कच्छप यानि कछुआ भी है। कहा जाता है कि जहां कछुआ होता है, वहां लक्ष्मी का आगमन जरूर होता है। शास्त्रों में भी कछुआ रखना बेहद शुभ माना गया है। इससे घर और ऑफिस में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

एक मान्यता ये भी है कि कछुआ स्थिरता का प्रतीक है। हिन्दू वास्तु के अनुसार भुकम्प, बाढ़ और दूसरी आपदाओं के समय भी मकान अपनी जगह स्थिर बना रहे, इसीलिए हम नींव में इनकी स्थापना करते हैं और पूजा करते हैं।

एक और महत्त्वपूण मान्यता ये है कि समुंद्र मंथन में कछुए की पीठ पर मंदरांचल पर्वत को रखकर रस्सीनुमा नाग से समुंद्र को मथा गया, जिससे अमृत निकला। इसीलिए भी हम नींव में कछुए को स्थापित करते हैं।

इस तरह की पूजा से यह मनोवैज्ञानिक विश्वास उपजता है कि मकान बनाने वाले व्यक्ति ने पाताल लोक के राजा शेषनाग, सृष्टि के कर्ता-धर्ता भगवान विष्णु और पूरे ब्रह्मांड की संपन्नता की स्वामिनी देवी लक्ष्मी को प्रसन्न कर लिया है, इसलिए उसका मकान बिना किसी विघ्न के पूर्ण हो जाएगा। इसी विश्वास के आधार पर यह परंपरा कई स्थानों पर सदियों से चली आ रही है।

देश के पहले प्रधानमंत्री हैं नरेंद्र मोदी जिन्होंने किया रामलला के दर्शन

मिडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री के तौर पर आजादी के बाद पहली बार कोई नेता रामलला का दर्शन किया है. हालांकि, नरेंद्र मोदी से पहले इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए अयोध्या का दौरा किया था, लेकिन उन्होंने रामजन्मभूमि से दूरी बनाए रखी थी. भगवान श्री रामलला का दर्शन करने से महज इसीलिए महरूम रह गए थे, क्योंकि उस समय मामला अदालत में चल रहा था.

छतीसगढ़ में भगवान राम के ननिहाल को संवारेगी बघेल सरकार, 16 करोड़ से होगा कौशल्या मंदिर का विकास

रायपुर. भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी का सौंदर्य अब पौराणिक कथाओं के नगरों जैसा ही आकर्षक होगा. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निकट स्थित इस गांव के प्राचीन कौशल्या मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए, पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है. मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना में शामिल चंदखुरी में यह पूरा कार्य 15 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा.

योजना के मुताबिक, चंदखुरी में मंदिर के सौंदर्यीकरण तथा परिसर विकास का कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में 6 करोड़ 70 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में 9 करोड़ 8 लाख रुपए खर्च होंगे. योजना के मुताबिक चंदखुरी को पर्यटन-तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाना है. इसलिए वहां स्थित प्राचीन कौशल्या माता मंदिर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा.

तालाब का सौंदर्यीकरण करते हुए मध्य में स्थित मंदिर के टापू को और भी आकर्षक तथा सुव्यवस्थित किया जाएगा. पौराणिक कथाओं से चंदखुरी के संबंध के अनुरूप पूरे परिसर के वास्तु को डिजाइन किया गया है. तालाब मंदिर तक पहुंचने के लिए तालाब में नए डिजाइन का पुल तैयार किया जाएगा. तालाब में घाटों और चारों और परिक्रमा-पथ का निर्माण किया जाएगा. दर्शनार्थियों के वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा भी विकसित की जा रही है. इस पूरे परिसर में आकर्षक विद्युत साज-सज्जा की जाएगी.

मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ हज हाउस का किया शिलान्यास नवा रायपुर में लगभग 26 करोड़ की लागत से बनेगा हज हाउस: समाज की बहुप्रतिक्षित मांग हुई पूरी

रायपुर, 01 अगस्त 2020

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईद-उल-अजहा के मौके पर आज यहां अपने निवास कार्यालय से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए छत्तीसगढ़ हज हाऊस का शिलान्यास किया। हज हाऊस का निर्माण लगभग 26 करोड़ रूपए की लागत से तीन एकड़ भूमि में किया जाएगा। पांच मंजिला इस भवन में हज यात्रियों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। भवन का निर्माण मंदिर हसौद रोड एयरपोर्ट के पास नवा रायपुर अटल नगर में किया जाएगा।          मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुस्लिम समाज के लोगों को ईद-उल-अजहा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए दोहरी खुशी का मौका है। पूरी दुनिया के साथ छत्तीसगढ़ में भी ईद का पर्व मनाया जा रहा है और आज छत्तीसगढ़ हज हाउस का शिलान्यास हुआ है। हाजियों की परेशानी कम करने के लिए समाज के लोगों की मेहनत रंग लाई और हज हाउस के निर्माण की लंबे अरसे से की जा रही मांग पूरी हुई है।        मुख्यमंत्री ने कहा कि हर मुस्लिम के लिए हज यात्रा जीवन का अभूतपूर्व पल होता है। कोरोना के कारण इस वर्ष हज यात्रा भी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि वे केन्द्र सरकार से मांग करेंगे कि वर्ष 2021 की हज यात्रा में पहले से चयनित छत्तीसगढ़ के हज यात्रियों को मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि वे हज कमेटी आफ इंडिया से छत्तीसगढ़ को मिलने वाली 5 करोड़ रूपए की शेष राशि प्राप्त करने के लिए भी पहल करेंगे।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में उपस्थित स्कूल शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डाॅ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने मुस्लिम समाज के लोगों को ईद की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के हज यात्रियों को पहले नागपुर जाना पड़ता था। हज हाउस के निर्माण के बाद यहीं उनके लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाएंगी। इस मौके पर शिलान्यास स्थल नवा रायपुर में उपस्थित वन, परिवहन एवं आवास मंत्री मोहम्मद अकबर ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि हज यात्रियों की सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ से ही उड़ान शुरू करने के लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने मुस्लिम समाज को हज हाउस की सौगात देने के लिए समाज की ओर से मुख्यमंत्री का शुक्रिया अदा किया।          हज कमेटी के चेयरमेन मोहम्मद असलम खान ने आभार व्यक्त किया। इस मौके पर नवा रायपुर कार्यक्रम स्थल में राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलाम रिजवी, छत्तीसगढ़ राज्य पाठ्य-पुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष महेन्द्र छाबड़ा, छत्तीगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र तिवारी, नगर निगम रायपुर के महापौर एजाज ढेबर सहित मुस्लिम समाज के गणमान्य नागरिक व उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ केन्द्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी की बैठक में कोयला उत्पादन एवं खनन से जुड़े मुद्दों पर हुई सकारात्मक चर्चा

रायपुर, 31 जुलाई 2020 मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ केन्द्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी की आज यहां मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ में कोयला उत्पादन एवं खान के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने बैठक में एलीफेंट कॉरीडोर तथा सघन वन क्षेत्रों में स्थित कोयला खदानों को कोल ब्लॉक्स की आगामी नीलामी से अलग रखने का प्रस्ताव रखते हुए इन खदानों के स्थान पर राज्य में स्थित अन्य कोयला क्षेत्रों को चिन्हित करने का सुझाव रखा, जिस पर केन्द्रीय कोयला मंत्री जोशी ने सहमति व्यक्त की।

मुख्यमंत्री  बघेल ने वर्ष 2014 के पूर्व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार उद्योगपतियों द्वारा एडीशनल लेवी के रूप में जमा की गई 4140 करोड़ रूपए की राशि, जो केन्द्र सरकार के पास जमा है। उसे राज्य को देने की मांग की। जिस पर केन्द्रीय कोयला मंत्री ने सहमति व्यक्त करते हुए यह बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में उक्त राशि के डिस्पोजल हेतु आवेदन लगाया गया है, उसके आधार पर जल्द ही निर्णय लिया जायेगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के कॉमन कॉस प्रकरण में दिए गए निर्णय अनुसार जुर्माने की राशि 10 हजार 129 करोड़ रूपए राज्य को देने की मांग रखी। श्री बघेल ने गारे पेल्मा खदानों में एसईसीएल को तत्काल उत्पादन बढ़ाने हेतु निर्देशित करने, साथ ही कोयला खदानों में जमा पानी का उपयोग जनहित में पेयजल एवं सिंचाई प्रयोजन के लिए करने, खनन प्रक्रिया समाप्ति पश्चात् अनुपयोगी जमीन राज्य को वापस करने तथा फ्लाई-ऐश के डिस्पोजल हेतु एसईसीएल की बंद पड़ी खदानों के संबंध में त्वरित कार्यवाही की मांग रखी। जिस पर केन्द्रीय मंत्री द्वारा सीएमपीडीआईएल, एसईसीएल और राज्य के अधिकारियों का संयुक्त दल गठन कर तत्काल निर्णय लेने पर सहमति व्यक्त की गई।
मुख्यमंत्री द्वारा बैठक में रखे गए छत्तीसगढ़ के स्थानीय लघु उद्योगों को कोयला उपलब्ध कराने हेतु एक निश्चित मात्रा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर चेयरमेन कोल इण्डिया द्वारा सहमति व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को एजेंसी नियुक्त करने हेतु आग्रह किया गया। जिसके माध्यम से कोयला राज्य के लघु उद्योगों को उपलब्ध कराया जा सकेगा।
केन्द्र सरकार के खान मंत्रालय से संबंधित विषयों पर चर्चा करते हुए राज्य सरकार द्वारा लौह अयस्क की रॉयल्टी दरों में संशोधन करने के संबंध में भी आग्रह किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल एक्सप्लोरेशन मिनरल ट्रस्ट (एनएमईटी) मद में छत्तीसगढ़ राज्य ने लगभग 300 करोड़ रूपये केन्द्र सरकार के पास जमा किए हैं। श्री बघेल ने इस राशि के उपयोग हेतु राज्य सरकारों को खनिज अन्वेषण हेतु खनिजों का चयन करने की अधिकारिता देने तथा इस राशि के उपयोग हेतु नियमों के सरलीकरण करने की ओर केन्द्रीय मंत्री का ध्यान आकृष्ट किया, जिस पर केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी द्वारा सहमति दी गई।
भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के सचिव द्वारा दिए गए प्रस्तुतिकरण में जानकारी दी गई कि भारत में लगभग 150 बिलियन टन कोयला के भंडार होने के बावजूद देश में कोयले का आयात आस्ट्रेलिया, इण्डोनेशिया एवं अन्य देशों से किया जा रहा है।  
    बैठक में कोयला मंत्रालय के सचिव   अनिल कुमार जैन, कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमेन  प्रमोद अग्रवाल, एसईसीएल के सीएमडी श्री ए. पी. पण्डा, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव  सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव वन  मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के सचिव  सिद्धार्थ कोमल परदेशी, खनिज विभाग के सचिव  अन्बलगन पी., पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी और संचालक खनिज  समीर विश्नोई सहित केन्द्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के अंतिम वर्ष तथा अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं होंगी ऑनलाइन : राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश

रायपुर, 31 जुलाई 2020 प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षा सत्र 2019-20 के अंतिम वर्ष एवं अंतिम सेमेस्टर की सभी विषयों की परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। इस संबंध में आज यहां राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। इसके तहत यू.जी.सी. द्वारा जारी निर्देश के पालन में विद्यार्थियों को प्रश्न प्रत्र ऑनलाइन (ई-मेल आदि) पर भेजने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय कोविड-19 की महामारी के संक्रमण को देखते हुए राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लिया गया है।

    निर्णय लिया गया है कि प्रश्नों के उत्तर घर पर ही लिखने की समय-सीमा के साथ उत्तर भेजने की अंतिम तिथि निर्धारित की जाए। निर्धारित अंतिम तिथि तक विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिका ऑनलाइन (निर्धारित ई-मेल आदि) अथवा परीक्षा केन्द्र पर स्पीड पोस्ट से पोस्ट करने का विकल्प दिया जाए। प्रेषित उत्तर पुस्तिका की पावती विद्यार्थी अपने पास सुरक्षित रखेंगे। किसी भी कारण से परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित अथवा जारी परीक्षाफल से असंतुष्ट विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने का एक अतिरिक्त अवसर दिया जाए। (इसके लिए स्थितियां सामान्य होने पर विश्वविद्यालयों द्वारा विशेष परीक्षा के आयोजन की व्यवस्था की जाए।)

    इसके तहत स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए प्रथम, द्वितीय एवं अंतिम तीनों वर्ष की परीक्षाएं उपरोक्त पद्धति से आयोजित की जाएं। परीक्षा आयोजन के पूर्व सभी विद्यार्थियों के ई-मेल आदि की अधिकृत जानकारी संकलित कर ली जाए। परीक्षा आयोजन तिथि की सूचना पर्याप्त समय पूर्व दी जाए। व्यक्तिगत ई-मेल आदि के अतिरिक्त विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों की वेबसाइट एवं स्थानीय समाचार पत्रों में सूचना जारी की जाए। प्रथमतः स्वशासी महाविद्यालयों में परीक्षा आयोजित की जाए तथा परीक्षा के आयोजन में कठिनाई हो तो उनका निराकरण करते हुए शेष महाविद्यालयों के लिए परीक्षा आयोजित की जाए। यथा संभव उपरोक्त परीक्षाओं का आयोजन माह सितम्बर 2020 तक पूर्ण किया जाए।

    कोविड-19 के कारण विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया एवं क्लास रूम टीचिंग के बारे भी आवश्यक निर्णय लिया गया है। इसके तहत कक्षा 12वीं का स्टेट बोर्ड तथा सीबीएसई का परीक्षा परिणाम घोषित हो चुका है। अतएव यू.जी. प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया एक अगस्त 2020 से प्रारंभ की जाए तथा अन्य कक्षाओं में प्रवेश पूर्ववर्ती कक्षाओं के परीक्षा परिणाम घोषित होने के पश्चात् 15 दिवस में पूर्ण किए जाएं। माह सितम्बर से चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन शिक्षण प्रारंभ करते हुए कोविड-19 के संक्रमण की स्थितियां सामान्य होने की स्थिति में क्लासरूम शिक्षण प्रारंभ करने पर विचार किया जाए।