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नरेंद्र मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए चिट्ठी अभियान चलाएगा RSS से जुड़ा स्वदेशी जागरण मंच

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा स्वदेशी जागरण मंच (SJM) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाने के लिए चिट्ठी अभियान चलाने की तैयारी में है। यह चिट्ठी अभियान चीनी कंपनियों पर रोक लगाने के लिए चलाया जाएगा। अगर स्वदेशी जागरण मंच को अनुमति मिल जाती है तो पीएम मोदी को देश के हर जिले से चिट्ठी मिलेगी जिसमें चीन को भारत में निवेश करने पर रोक व सीमा से सटे राज्यों में चीनी कंपनियों को टेंडर भरने पर रोक लगाने की मांग की जाएगी।
चीन के खिलाफ अपने नए अभियान के तहत स्वदेशी जागरण मंच ने एक ‘सुरक्षा अभियान मेमोरेंडम’ जारी किया है। मंच चाहता है कि इसे देश का हर जिला मजिस्ट्रेट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे। इस मेमोरेंडम में कहा गया है कि चीनी कंपनियों से देश की छोटे व्यापारों को नुकसान पहुंच रहा है और युवाओं के लिए बड़े स्तर पर बेरोजगारी फैल रही है। इसके अलावा पड़ोसी मुल्क होते हुए चीन लगातार भारत को प्रताड़ित कर रहा है।
पहले से चलाते आ रहे चीनी कंपनियों के खिलाफ अभियान:
स्वदेशी जागरण मंच पहले से ही चीनी कंपनियों के खिलाफ अभियान चलाता आ रहा है। स्वदेशी जागरण मंच ने साल 2017 को “चीन विरोधी वर्ष” घोषित कर रखा है। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉक्टर अश्विनी महाजन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर भारत और चीन के बीच दीवार बन जाए तो उन्हें खुशी होगी। जब डॉक्टर महाजन से पूछा गया कि क्या ग्लोबलाइजेशन से भारत और चीन को फायदा नहीं हुआ है? इस पर वो बोले, “अगर चीन में हर किसी को नौकरी मिल रही है तो इसकी वजह ये है कि वो अपना सामान बेचने में कामयाब हो रहे हैं लेकिन औसत अमेरिकी, ब्रिटिश और यूरोपीय घाटे में हैं।” महाजन ने आगे कहा, “सच ये है कि ग्लोबालइजेशन का फायदा केवल कुछ अमेरिकी कंपनियों को हुआ है।”

आरएसएस नेता कृष्ण गोपाल ने कहा- “असिहष्णु” लोगों को भारतीय संस्कृति के हिसाब से बदलना चाहिए अपना व्यवहार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता कृष्ण गोपाल ने गुरुवार (11 मई) को जयपुर में कहा कि “असहिष्णु” लोगों को भारतीय संस्कृति के अनुसार अपना व्यवहार बदल लेना चाहिए। राजस्थान की राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए आरएसएस के सह सरकार्यवाह गोपाल ने कहा कि चाहे वो कारोबार हो या सेवा क्षेत्र हिंदू समाज “तेजी से विकास” कर रहा है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गोपाल ने कार्यक्रम में कहा, “जहां तक मुसलमानों की बात है तो वो अपनी जड़ों की तरफ देख रहे हैं और वापस लौटना चाहते हैं।”
गोपाल ने कहा कि भारत में जन्मे विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच “कोई मतभेद” नहीं है। कृष्ण गोपाल ने कहा कि उनसे कई ऐसा मुसलमान मिले हैं जो अपनी जड़ों की जानते हैं और हिंदू सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करते हैं। कार्यक्रम में राजस्थान की उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी भी मौजूद थीं।  माहेश्वरी ने भारतीय विश्वविद्यालयों में “भारत-विरोधी” नारे लगाए जाने पर चिंता व्यक्त की। माहेश्वरी ने कहा कि ऐसी मुद्दों से उचित तरीके से निपटना चाहिए। माहेश्वरी ने श्रोताओं से देश के विकास में रचनात्मक योगदान देने और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की।
61 वर्षीय कृष्ण गोपाल को इंडियन एक्सप्रेस पावरलिस्ट 2017 में देश का 22वां सबसे ताकतवर शख्श माना गया था। साल 2016 में इस लिस्ट में उनका स्थान 69वां था। जाहिर है पिछले एक साल में उनकी ताकत बढ़ी है। कृष्ण गोपाल को आरएसएस और भाजपा के बीच समन्वय की कड़ी माना जाता है। उत्तर प्रदेश से आने वाले कृष्ण गोपाल दिल्ली में चलने वाली आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित संकल्प कोचिंग के संरक्षक भी हैं। ये कोचिंग लोक सेवा आयोग  की आईएएस, आईपीएस और आईएफएस जैसी प्रतिष्ठित नौकरियों की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराती है।
हाल ही में उत्तर प्रदेश में आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं के ऊपर हमले को लेकर आरएसएस और भाजपा के नेता यूपी के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ से मिले थे उनमें कृष्ण गोपाल भी शामिल थे। माना जाता है कि यूपी और उत्तराखंड चुनाव की रणनीति बनाने में भी कृष्ण गोपाल की भूमिका रही थी।

अगर अकबर महान हैं तो महाराणा प्रताप क्यों नहीं: राजनाथ सिंह

पाली :केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि इतिहासकारों को अकबर की महानता तो नजर आई, लेकिन राजस्थान के वीर सपूत महाराणा प्रताप की महानता नजर नहीं आई. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि इतिहासकारों से यह भूल हुई है.

सिंह पाली जिले के खारोकडा गांव में महाराणा प्रताप की आदमकद मूर्ति का लोकार्पण करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि इतिहासकारों को अकबर तो महान दिखा लेकिन महाराणा प्रताप की महानता उन्हें दिखाई नहीं दी. इतिहासकारों ने इस मामले में (महाराणा प्रताप का) सही मूल्यांकन नहीं किया है. इतिहासकारों को अपनी इस गलती को सुधारना चाहिए.

राजनाथ ने महाराणा प्रताप के अद्भुत शौर्य और साहस की चर्चा करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप ने संघर्ष किया. उन्हें गद्दी और सत्ता विरासत में मिली लेकिन यह गद्दी फूलों की नहीं, बल्कि कांटों की सेज थी. त्याग और बलिदान का दूसरा नाम महाराणा प्रताप था. महाराणा ने कभी भी स्वाभिमान को नहीं छोड़ा. सारे हिन्दुस्तान ने उन्हें जननायक के रूप में स्वीकार किया है.

पाकिस्तान को मिलेगा जवाब


केंद्रीय गृहमंत्री ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की चर्चा करते हुए कहा कि पाकिस्तान की कायारना हरकतें जारी हैं. वह अपनी कायराना हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. उन्होंने कहा कि भारत में हमले के बाद भारत के सैनिकों ने पाकिस्तान की धरती पर घुसकर आतंकवाद का सफाया किया. इसके माध्यम से भारत ने दुनिया में संदेश दिया है कि जरूरत पड़ने पर सीमा पार जाकर भी मार सकते हैं.

उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले जो घटना हुई है, उसे लेकर देश को सेना के जवानों पर भरोसा होना चाहिए. भारत एक मजबूत देश है. हमें हमारी सेना के वीर जवानों के शौर्य और देशभक्ति पर नाज होना चाहिए. देश की जनता के मान सम्मान पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी. राजनाथ ने कहा कि पहली गोली हम नहीं चलाएंगे. अगर उधर से गोली चली तो उसका माकूल जवाब दिया जायेगा.

पीएम नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम समुदाय से कहा- तीन तलाक को राजनीतिक मुद्दा ना बनने दें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मुस्लिम समाज से कहा कि वे तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होने दें और समुदाय के किसी अग्रणी संगठन को इस दिशा में सुधार के लिए नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। मोदी ने प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेताओं से बातचीत करते समय यह टिप्पणी की। संगठन के नेताओं ने यहां प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत सद्भावना और मेल-जोल में है।
विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार को नागरिकों में भेदभाव का कोई अधिकार नहीं है और भारत की विशेषता विविधता में एकता की है। तीन तलाक के मुद्दे पर मोदी ने अपनी यही बात दोहराई कि मुस्लिम समुदाय को इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होने देना चाहिए। पीएमओ के अनुसार उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से इस दिशा में सुधार शुरू करने की जिम्मेदारी लेने को कहा।
बयान के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल ने तीन तलाक के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के रुख की सराहना की। मोदी का बयान माकपा नेता सीताराम येचुरी के इस बयान की पृष्ठभूमि में आया है कि तीन तलाक के खिलाफ प्रधानमंत्री का अभियान एक सांप्रदायिक मुहिम है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत में नयी पीढ़ी को उग्रवाद की वैश्विक बयार का शिकार नहीं होने देना चाहिए।पीएमओ के वक्तव्य के अनुसार मोदी की सोच की तारीफ करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि जनता में उनके प्रति जो ‘राष्ट्रव्यापी विश्वास’ है वह समाज के सभी तबकों की समृद्धि और कुशलता सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री की आकांक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय ‘न्यू इंडिया’ के निर्माण में बराबर का साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक बड़ी चुनौती है और इसके लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत से लड़ने का संकल्प व्यक्त किया।

 

राजनाथ सिंह ने पूछा- इतिहासकारों को महाराणा प्रताप में क्या कमी दिखी जो वे उनकी जगह अकबर को महान बताते हैं

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप को इतिहास में वो जगह नहीं मिली जो उन्हें मिलनी चाहिए थी। महाराणा प्रताप में ऐसी कौन-सी कमी थी। यह बात उन्होंने राजपूत योद्धा के योगदान पर प्रकाश डालटे हुए उनके स्टैच्यू का अनावरण करते हुई कही। साथ ही उन्होंने कहा कि राजपूत योद्धा के योगदान का पुनः मूल्यांकन करने के लिए इतिहासकारों से आग्रह किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि इतिहासकारों को अकबर की महानता तो नजर आई, लेकिन राजस्थान के वीर सपूत महाराणा प्रताप की महानता नजर नहीं आयी। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि इतिहासकारों से यह भूल हुई है।
राजनाथ सिंह पाली जिले के खारोकडा गांव में महाराणा प्रताप की मूर्ति का लोकार्पण करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि इतिहासकारों को अकबर तो महान दिखा लेकिन महाराणा प्रताप की महानता उन्हें दिखायी नहीं दी। इतिहासकारों ने इस मामले में (महाराणा प्रताप का) सही मूल्यांकन नहीं किया है। इतिहासकारों को अपनी इस गलती को सुधारना चाहिए।
राजनाथ ने महाराणा प्रताप के अद्भुत शौर्य और साहस की चर्चा करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप ने संघर्ष किया। उन्हेें गद्दी और सत्ता विरासत में मिली लेकिन यह गद्दी फूलों की नहीं, बल्कि कांटों की सेज थी। महाराणा प्रताप अदभ्य साहस के प्रतीक थे। त्याग और बलिदान का दूसरा नाम महाराणा प्रताप था। महाराणा ने कभी भी स्वाभिमान को नहीं छोड़ा। सारे हिन्दुस्तान ने उन्हें जननायक के रूप में स्वीकार किया है।
गृहमंत्री ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की चर्चा करते हुए कहा कि पाकिस्तान की कायरना हरकतें जारी हैं। वह अपनी कायरना हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में हमले के बाद भारत के सैनिकों ने पाकिस्तान की धरती पर घुसकर आतंकवाद का सफाया किया। इसके माध्यम से भारत ने दुनिया में संदेश दिया है कि जरूरत पड़ने पर सीमा पार जाकर भी मार सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले जो घटना हुई है, उसे लेकर देश को सेना के जवानों पर भरोसा होना चाहिए। भारत एक मजबूत देश है। हमें हमारी सेना के वीर जवानों के शौर्य और देशभक्ति पर नाज होना चाहिए। देश की जनता के मान सम्मान पर कोई आंच नहीं आने दी जायेगी। राजनाथ ने कहा कि पहली गोली हम (भारत) नहीं चलायेंगे। यदि उधर से गोली चली तो उसका माकूल जवाब दिया जाएगा।

 

थूक लगाकर नोट गिनने वाले अपने नेता को नीतीश कुमार ने समझाया सफाई का महत्व, खुद साथ लेकर चलते हैं कई हैंड सैनिटाइजर्स

पूरे देश में स्वच्छता अभियान की शुरुआत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाना जाता है। पीएम मोदी के इस अभियान का मोदी सरकार के मंत्रियों के साथ आम जन द्वारा भी स्वागत किया गया है और लोगों ने इसमें हिस्सा भी लिया। हालाकि, स्वच्छता को लेकर जागरुक रहने वाले मोदी अकेले नहीं है। पीएम मोदी के विरोधी माने जाने और 2019 में पीएम कैंडिडेट में रूप में प्रोजेक्ट किए जाने को लेकर चर्चा में रहने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी स्वच्छता के पक्षधर है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार यात्रा के दौरान अपने साथ कई हैंड सैनिटाइजर्स लेकर चलते हैं। साथ ही पार्टी (जेडीयू) नेताओं से भी उन्होंने इस तरह की अच्छी स्वास्थ्य प्रथाओं को अपनाने के लिए कहा है।
हालांकि दिल्ली कॉन्फिडेंशियल के मुताबिक जेडीयू नेता नीतीश कुमार के इस अपील से जुड़ना नहीं चाहते थे, क्योंकि स्वच्छ भारत अभियान पीएम मोदी से जुड़ा है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार लंबे समय से इन हाइजेनिक प्रैक्टिस को अपनाते आ रहे हैं। यहां तक कि पीएम मोदी द्वारा साल 2014 में शुरू किए गए स्वच्छता अभियान से पहले से। हाल ही में दिल्ली में जेडीयू के नेता, जिन्हें थूक लगाकर अंगुलियों से नोट गिनने की आदत है, उनकी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश द्वारा निंदा की गई थी। यहां तक कि नीतीश कुमार ने अपने इस नेता को एक किताब भी सुझाई थी, जिसमें गंदे करेंसी नोटों द्वारा फैलने वाले संक्रमण की जानकारी दी गई।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में स्वच्छता के लिए अभियान छेड़ रखा है। प्रधानमंत्री ने हमेशा देश के लोगों से अपील की है कि सब लोग इस स्वच्छता अभियान से जुड़ें और अपने देश को साफ सुथरा बनाएं। पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत 2 अक्टबूर को गांधी जयंती के दिन की थी।

 

राष्‍ट्रपति चुनाव: ‘मोदी-शाह’ की जोड़ी से मुकाबले के लिए विपक्षी बना रहे प्‍लान

रायसीना हिल पर कब्जे केलिए संग्राम की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ ‘धर्मनिरपेक्ष’ दलों के नेताओं ने 10, जनपथ के साथ मोदी-शाह की रणनीति का मुकाबला करने के लिए इस पर चर्चा शुरू कर दी है। भारत के शीर्ष संवैधानिक पद के उम्मीदवार पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल जुलाई में खत्म होने जा रहा है। राष्ट्रपति चुनाव पर बातचीत अभी प्रारंभिक चरण में है और अभी किसी का नाम उम्मीदवार के रूप में बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन सूत्रों के अनुसार, क्षेत्रीय पार्टियों की दिलचस्पी कांग्रेस की बजाय अपने बीच में से उम्मीदवार उतारने की है। हाल ही में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकापा) प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक संयुक्त उम्मीदवार उतारने पर चर्चा की। बिहार के मुख्यमंत्री व जनता दल युनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार, जदयू नेता शरद यादव, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सीताराम येचुरी व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) नेता डी.राजा सभी ने सोनिया गांधी से मुलाकात की। वास्तव में यह सब बीते सप्ताह नीतीश कुमार की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद शुरू हुआ। नीतीश कुमार ने सोनिया से राष्ट्रपति चुनाव के लिए सर्वसम्मति से उम्मीदवार चुनने की बात कही। राष्ट्रपति चुनाव 25 जुलाई से पहले होने हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का 25 जुलाई को कार्यकाल खत्म हो रहा है।
जदयू के प्रवक्ता के.सी. त्यागी ने कहा, “आम उम्मीदवार उतारने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। भारत का संविधान खतरे में है, इसके प्रस्तावना के आदर्शो पर हमला किया जा रहा है। यदि एक संघ परिवार का कोई सदस्य भारत का संवैधानिक प्रमुख हो जाता है तो संविधान की समीक्षा की जाएगी, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं होगा।” उन्होंने कहा कि पार्टियां मई के अंत तक सर्वसम्मति पर पहुंच सकती हैं। निस्संदेह पार्टियां इस समय अपने पत्ते नहीं खोलेंगी। हालांकि शरद पवार और शरद यादव इस चर्चा के दायरे में हैं। राजा ने कहा, “सोनिया जी ने मुझे फोन किया था और मैं उनसे मिलने गया था। हमने उनसे राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक साझा उम्मीदवार रखने पर चर्चा की। लेकिन किसी नाम पर चर्चा नहीं हुई।” उन्होंने कहा, “उम्मीदवार पर आम सहमति होनी चाहिए।”
हालांकि, राष्ट्रपति चुनाव की तत्कालिक चुनौती और 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए एक बड़ा गठबंधन बनाना कुछ क्षेत्रीय दलों के कांग्रेस से मोहभंग हो जाने की वजह से यह आसान नहीं होगा। कांग्रेस के बड़े भाई की भूमिका वाली आदत इसमें बड़ी बाधा है। एक बड़ी क्षेत्रीय पार्टी के वरिष्ठ नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, “समस्या यह है कि जहां भी कांग्रेस बड़ी स्थिति में है, वह छोटी पार्टियों को साथ नहीं लेती और जिन स्थानों पर यह छोटी है, वहां दूसरे दलों से यह बड़ा हिस्सा चाहती है।”
एक हालिया उदाहरण देते हुए नेता ने कहा कि हाल में कर्नाटक में हुए उपचुनावों में जनता दल सेक्युलर (जद-एस) ने अपना उम्मीदवार न उतारकर कांग्रेस की मदद की और कांग्रेस का उम्मीदवार जीत गया। उन्होंने कहा, “लेकिन कांग्रेस ने कहा कि वह खुद से जीती है। उसने जद-एस की सहायता की बात को खारिज कर दिया।”
त्यागी ने कहा, “यह एक दिलचस्प चुनाव होगा। सभी गैर-राजग दलों को लेकर हमारे पास राजग की तुलना में 35,000 ज्यादा वोट हैं। लेकिन इनमें तोड़-फोड़ होगी। अमित शाह और मोदी तोड़-फोड़ में बड़े माहिर हैं।”

IPL 2017: सीजन में 400 रन बनाने वाले पहले बल्‍लेबाज बने डेविड वॉर्नर, KKR के खिलाफ जड़ा तूफानी शतक

इंडियन प्रीमियर लीग के 37वें मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद के कप्‍तान डेविड वॉर्नर ने तूफानी बल्‍लेबाजी का प्रदर्शन किया। कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मैच में वॉर्नर ने महज 43 गेंदों पर शतक जड़ दिया। इस मैच में शतक के साथ ही वॉर्नर टूर्नामेंट के इस सीजन में 400 रनों का आंकड़ा पार करने वाले पहले बल्‍लेबाज बन गए हैं। उनके पास ऑरेंज कैप भी है। कोलकाता ने टॉस जीतकर हैदराबाद को बल्‍लेबाजी के लिए आमंत्रित किया था, मगर वॉर्नर ने फैसले को पूरी तरह गलत साबित कर दिया। वॉर्नर के इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत हैदराबाद ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। खबर लिखे जाने तक टीम ने सिर्फ 11.3 ओवरों में ही 129 रन बना लिए थे।
कोलकाता इस सीजन में अब तक खेले गए नौ में से सात मैच जीतकर आठ टीमों की तालिका में शीर्ष पर है, वहीं हैदराबाद कुल नौ मैचों में से पांच में फतह के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है।

JEE Mains में पूरे नंबर हासिल कर कल्पित ने रचा इतिहास, अब करना चाहता है ये बड़ा काम

आईआईटी और एमएनआईटी में दाखिले के लिए आयोजित की जाने वाली जेईई मेंस परीक्षा के नतीजे कल (27 अप्रैल) घोषित कर दिए गए, जिसमें राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले कल्पिल ने पहला स्थान हासिल किया है। खास बात ये है कि कल्पित ने न सिर्फ पहला स्थान हासिल किया है, जबकि उन्होंने 360 में से 360 अंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। कल्पित के पिता कंपाउंडर हैं और उनकी मां उदयपुर की एक स्कूल में टीचर हैं। उन्होंने जनसत्ता डॉट कॉम से खास बातचीत में कहा कि वो इसका श्रेय अपने माता-पिता के साथ गुरुजनों और अपने भाई को देना चाहता हैं। रेजोनेंस उदयपुर से कोचिंग कर रहे कल्पित इसके बाद जेईई एडवांस की पढ़ाई करने में ध्यान लगा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अगर वो जेईई मेंस में अच्छे अंक और रैंक हासिल करते हैं तो वो आईआईटी मुंबई से अपनी इंजीयरिंग पूरी करना चाहते हैं और कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियनिंग पूरी करेंगे। वहीं उनका कहना है कि वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद विदेश नहीं जाना चाहते और वो देश में रहकर ही अपना करियर बनाएंगे। बता दें कि वो एक कंपाउंडर के बेटे हैं और एक साधारण परिवार से आते हैं। उन्हें सीबीएसई अध्यक्ष आरके चतुर्वेदी ने खुद फोन कर यह खुशखबरी सुनाई और उन्होंने एससी वर्ग में भी प्रथम स्थान हासिल किया है। वहीं राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी अपने ट्विटर के जरिए कहा कि “JEE Main परीक्षा में 100 फीसदी अंक हासिल करने वाले कल्पित पहला छात्र बन गया है। राजस्थान को तुम पर गर्व है।”
बता दें कि जेईई मेंस के बाद उम्मीदवारों को जेईई एडवांस में भाग लेना होगा, जिसकी रैंक के आधार पर उम्मीदवारों का कॉलेज में दाखिला होगा। उसकी रैंक के आधार पर विद्यार्थियों को कॉलेज का आवंटन किया जाएगा। वहीं जेईई एडवांस के लिए आवेदन प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू कर दी जाएगी और उसके बाद उम्मीदवारों को इसमें भाग लेना होगा। बता दें कि यह परीक्षा अगले महीने में आयोजित होनी है।

संभावनाओं के बाद उपेक्षित है ऐतिहासिक मंढीप खोल गुफा

पैलीमेटा क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक और पुरात्वाविक महत्व वाली मंढीप खोल गुफा और उसके आसपास क्षेत्र में पर्यटन विकास की काफी संभावना है , किन्तु प्रशासनिक उदासीनता के चलते सुविधाओ और समस्याओ से जूझ रहा है ।
उल्लेखनीय है कि प्रसिद्ध मंढीप खोल गुफा  साल में सिर्फ एक बार अक्षय तृतीय के बाद आने वाले पहले सोमवार को 
खुलती है । 
इस साल यह  आगामी  1  मई   को खुलेगी ।
इस मौके पर यहां मेला का आयोजन भी होगा ।
गुफा के अंदर विहंगम दृश्य को देखने और वहां स्थित शिव लिंग की पूजा करने  छत्तीसगढ के अलावा  पडोसी राज्य मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र अन्य प्रान्त के लोग भी बडी संख्या में 
पहुंचते है ।
ठाकुरटोला जमीदारी के अधीन आने वाली गुफा तक पहुंचने के लिए एक ही नदी को अलग  अलग स्थानो पर  16 बार पार करना पडता है ।
गुफा के खुलने  के पहले  पूजा कर फायरिंग की जाती है ।
ताकि अंदर छुपे जंगली जानवर भाग जाएं ।
गुफा के अंदर नीव अंधेरा 
रहता है । 
जिससे लोगों को टार्च या मशाल लेकर जाना पडता है ।

कोई नही जान पाया गुफा की लम्बाई ,गहराई 

यह गुफा कहा से शुरू होकर कहा खत्म हुई है इसे जानने 
का अब तक काफी प्रयास किया जा चुका है , किन्तु  कोई भी इसकी किसी भी छोर को पकड नही पाया है  ।
यहां एक गुप्त गंगा भी है ।
जिसका पानी अविरल बहते रहता है ।
लोगो का ऐसा मानना है कि  इस पानी में स्नान करने से चर्म रोग तो दूर होते है  और खेत में छिडकाव कर दिया जाएगा तो वहा से भी कीटाणु और रोग दूर चले जाते है ।

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर  विकास के लिए तरस रहा है 

गुफा के चारो तरफ घने वृक्षो वाले जंगल है 
जो लोगो को बरबस ही अपनी ही ओर आकर्षित करते है ।
यहां भी अन्य क्षेत्रों की तरह सुविधाओ का विकास कर दिया जाये तो यह क्षेत्र भी पर्यटन का केन्द्र  बन सकता है ।
ठाकुरटोला के राधामोहन वैष्णो और संजय मसीह  ने बताया कि सुविधाओ के नहीं होने से यह क्षेत्र काफी पिछड गया है ।
यहां तक पहुचने के लिए अच्छी सडक तक नही है ।
उनका कहना है कि जिस प्रकार प्रशासन द्वारा डोगरगढ में मां बम्लेश्वरी  , नवरात्र मेले के समय  प्रबंध किया जाता है ।
उसी प्रकार से रहा भी हो जिससे  यहा विकाश हो । 
यहा पेय जल की व्यवस्था किया जाये गर्मियों के दिनो नदी नाले सूख गये है ।

अगर मंढीप खोल गुफा बस्तर क्षेत्र में होता तो कब का पर्यटन केन्द्र बन गया  होता ।
किन्तु दुर्भाग्य यह है कि राजनांदगांव जिले के अंतिम छोर में 95 कि.मी.दूरी पर आदिवासी बाहुल्य  क्षेत्र  ठाकुरटोला  जमीदारी के बीहड जंगल में मंढीप खोल गुफा  स्थित है ।

प्रदेश के मुख्यमंत्री डां रमन सिह का विधान सभा जिला राजनांदगांव है यह सांसद का सत्ता  होने के बाद भी  मंढीप खोल गुफा का अस्तिव बीहड जंगल में लुप्त हो रहा है ।

यहा बारिश के चार महीने  नदी नाले उफान पर रहता है  यहा समीप आने वाले  आधा दर्जन  गांव का ब्लाक मुख्यालय से संम्पर्क टुट जाता है आज भी यह क्षेत्र काफी पिछडा हुआ है ।
 अभी यह विकाश होने में  काफी पिछडे हुये है ।

यह ग्राम डंडूटोला और आसपास गांव के लोग  8 से 10कि.मी. नदी पार कर विधान सभा चुनाव की  वोट  डालने जाते है ।

अगर आप सरायपाली से सम्बलपुर राजमार्ग क्रमांक 53 में सफर कर रहे है तो सिंघोडा के पहाडों और चट्टानो के बिच मां रूद्रेष्वरी का कर सकते है दर्षन

सरायपाली से सम्बलपुर जाने वाले रसिया  राजमार्ग क्रमांक 53 में  सरायपाली से 20 किलोमीटर दूर ओडिसा सीमा से लगे ग्राम सिंघोडा में स्थित है माता रूदे्रष्वरी का मंदिर। पहाडों और चट्टानो को काटकर बनाया है माता रूदे्रष्वरी देवी का भव्य मंदिर स्वर्गीय स्वामी षिवानंद जी महाराज के द्वारा....... स्वामी षिवानंद जी महाराज तीन दषक पहले सन 1977 में आसाम से द्वारीकापुर की तीर्थ यात्रा पैदल जा रहे थे और यात्रा के दौरान इसी पहाडी और यहां के षांत वातावरण ने उन्हे कुक्ष देर रूकने पर विवष कर दिया, हां उन्हे विश्राम के दौरान माता की भव्य मंदिन बनाने की अत्म प्रेरणा मिली। उस समय यहां मा भगवती घंटेष्वरी देवी का एक छोटा सा जीर्ण-षीर्ण स्थान था। राश्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वाले अधिकांष ट्रक और कई वाहन मंदिर के सामने रूकते और मां के दर्षन कर विश्राम कुछ देर विश्राम करते और फिर अपनी मंजिल की ओर निकल पड़ते। मानो लंबी यात्रा के लिए यह कोई पडाव हो। यहां की प्राक्रितिक सौंदर्य और चारो ओर घनी पहाडियां लोगों को अपनी ओर आकर्शिक करते हैं, सड़क के दूसरे किनारे सरकार द्वारा बनाया गया बांध और एक छोटा नाला जिसके निकट वन विभाग की नर्सरी स्थित है, मंदिर के समीप एक खतरनाक मोड भी है। स्वामी षिवानंद जी महाराज कुछ वर्शों बाद द्वारिका धान से वापस आकर यहीं रूक गए और भव्य मंदिर निर्माण का विचार देखते ही देखते माता की कृपा और आषिर्वाद से बिना किसी से चंदा लिए धर्मप्रेमी जन स्वतः ही मंदिर निर्माण में अपना सहयोग देने आगे आते गए और मंदिर बनना षुरू हो गया। जानकार बताते है कि मंदिर को पूरा बनने में लगभग 18 वर्श लग गए, राश्ट्रीय राजमार्ग से लगकर पहाडी पर 81 फुट उंचे भव्य मंदिर का निर्माण सम्पन्न हुआ।

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राश्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 53 से इसकी उंचाई 131 फुट है, सवा 5 फुट उंची संगमरमर से बनी मां रूदे्रष्वरी देवी की प्रतिमा स्थापित की गई, मंदिर दक्षिणमुखी है और सड़क से करीब 65 सीढीयां जो 60 फुट चैंडी है को चढ़कर माता के दर्षन को जाया जाता है, विषाल 20 खंभों पर बना माता के इस मंदिर के चारो ओर मां दुर्गा के 9 अवतारों के भित्ती चित्र बने हुए है। मंदिर के मुख्य द्वारा चैखट दरवाजे व अन्य दरवाजों पर काश्ट षिल्प का बेहतरीन उपयोग किया गया है, मां रूदे्रष्वरी की स्थिापित प्रतिमा पर 10 फुट गोलाई का ऐ गुंबद है, मंदिर के उपरी हिस्से में भी एक गुंबद बना है जिसका व्यास 140 फुट तथा उंचाई करीब 65 फुट के भीतरी भाग में चारों संगमरमर लगा हुआ है। मंदिर के कुछ ही दूरी पर दोनो तरफ ज्योति प्रज्जवलित कक्ष, हवनकुंड आकर्शक बनाया गया है। मां रूद्रेष्वरी देवी मंदिर में 12 माह 24 घंटे श्रधालुओं की चहल-पहल रहती है, दोनो नवरात्र पर्व में अन्य तीज त्यौहारों की अपेक्षा ज्यादा रहती है। मां रूदे्रष्वरी देवी ट्रस्ट के द्वारा प्रतिवर्श नेत्र षिविर व अन्य सामाजिक धार्मिक जनहित के कार्य लगातार किए जाते है, 12 बजे अन्न प्रसाद लगता है, मां घंटेष्वरी देवी की प्राचिन प्रतिमा वर्तमान मंदिर के सामने बने बांध के पास कुंभी वृक्ष के नीचे स्थापित है उस स्थान पर अनेकों पर मंदिर बनाने एवं माता जी की प्रतिमा को कहीं और स्थापित करने की अनेको बार कोषिष की गई परन्तु माता ने स्वप्न में आकर मना कर दिया कि मुझे कहीं और नही जाना और इसी स्थान पर मंदिर बनाना है। बाबा स्वर्गीय षिवानंद जी महाराज को माता का आर्षिवाद प्राप्त था और उन्ही के अथक परिश्रम से माता का मंदिर बनकर तैयार हुआ जहां दूर दराज से भक्त अपनी मन्नतों को लेकर यहां पहुंच रहे है।

मोदी और रमन को पहचानती है 16 माह की आद्या

रायपुर । महज 16 माह की आद्या बालपन में ही काफी कुछ जानने समझने लगी है, यह न सिर्फ अपना नाम बताती बल्कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को भी अच्छे से पहचानने लगी है, किसी भी अख़बार या पत्रिकाओं को दिखाकर प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री कौन है यह पूछा जाए तो झट से ढूंढकर नरेंद्र मोदी, रमन सिंह की त स्वीर पर ऊँगली रखकर बता देती है.इसके अलावा अंग्रेजी के आधे से ज्यादा अक्षरों को सिम्बोलिक रूप से जानती है. कई हिंदी और अंग्रेजी के शब्दों को न सिर्फ समझती है बल्कि टूटी फूटी भाषा में बोलकर ऊँगली दिखाते हुए सही सही बताती है,नाचना,मुस्कराना,दौड़ना उसकी नटखट मस्तियों से आसपास के बच्चे भी बेहद प्रभावित है अधिमान्य पत्रकार अजीत शर्मा की पुत्री आद्या का असली नाम अरुणिमा है, धनतेरस के दिन ही जन्मी अरुणिमा को शर्मा परिवार साक्षात् लक्ष्मी का स्वरूप मान घर में आद्या के नाम से पुकारते है. मम्मी श्रीमती रूखमणी शर्मा हायर सेकेंडरी स्कूल में जीवविज्ञान की व्याख्याता है. मूलतः बेमेतरा निवासी शर्मा परिवार इन दिनों सिमगा में अस्थायी रूप से निवासरत है.आद्या के दादा व्यास नारायण शर्मा खुद सेवानिवृत शिक्षक है. बिटिया की मम्मी के मुताबिक छः माह के बाद से ही आद्या चुलबुली और परिवार के सदस्यों को पहचानने लगी, तकरीबन आठ माह के बाद से लगातार वह मेरे साथ स्कूल भी जा रही है, वहा भी स्कूल स्टॉफ और बच्चों से घुलमिल गयी है. स्कूल में भी कुछ महापुरुषों की तस्वीरों को ऊँगली से इशारे के साथ बताती है, फूलों,पक्षियों और जानवरों को भी अच्छे से पहचानती है और पक्षियों तथा जानवरों के बकायदा आवाज़ निकालकर बताती है. आद्या के पापा अजीत बताते है कि महज 16 माह में ही उनकी बिटिया के कई कारनामे उन्हें बड़े बच्चों की तरह लगते है.उनके पापा के मुताबिक मंदिर, हॉस्पिटल, बैंक, बाइक,कार इत्यादि को वह पहले पहचानती या इशारे से बताती थी अब तो तुतलाकर अपनी भाषा में बोलकर भी दिखाने लगी है. घर के दिवालो पर लगे फ्रूट,एनिमल चार्ट से उसने ज्यादा तर जानवरो फलों को पहचानना सीखा। अंग्रेजी अक्षरों को सिम्बोलिक रूप से जानती पहचानती है. सबसे बड़ी खासियत इस आधुनिक युग में भी अब तक वह टीवी से दूर है अलबत्ता मोबाईल पर कभी कभार अपना वीडियो या बच्चों से जुड़े गाने देखती है और गुनगुनाती है. शर्मा दंपत्ति के मुताबिक आद्या को फलों में अंगूर सर्वाधिक पसन्द है,उसे देर तक नहाना और पैदल चलना ज्यादा भाता है,

उपहार हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की मां बोली – न्याय चाहिए तो कभी कोर्ट में मत आना

उपहार सिनेमा हादसे के मामले में गुरुवार (9 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। लेकिन फैसले से उस हादसे को झेलने वाले लोग खुश नहीं हैं। हादसे में अपने दो बच्चों को खो देने वाली एक्टिविस्ट नीलम कृष्णामूर्ति ने कहा कि वह फैसले से काफी दुखी हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘आज जो संदेश हमें मिला उसका मतलब यह है कि अगर न्याय चाहिए तो कभी भी कोर्ट मत आओ। आपको न्याय तब ही मिलेगा जब मीडिया या फिर लोग उसकी डिमांड करेंगे। मुझे खुद ही उन लोगों (अंसल ब्रदर्स) को गोली मार देनी चाहिए थी और आजीवन कारावास की सजा ले लेनी चाहिए थी। मैं बहुत दुखी हूं। उस हादसे में 23 बच्चों की मौत हो गई थी। उसके बदले में हमें यह न्याय मिला है।’
नीलम ने आगे कहा, ‘नीतीश कटारा की हत्या करने वालों को 25 साल की सजा मिली थी। क्या इन्हीं अच्छे दिनों की बात सरकार करती है? मुझे माफ करना लेकिन मुझे ऐसे अच्छे दिन नहीं चाहिए।’
नीलम ने न्याय मिलने में हुई देरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘इस देरी के लिए कौन जिम्मेदार है? पीड़ित तो दोषी हो नहीं सकते। सुशील अंसल उस वक्त बूढ़े नहीं थे जब यह घटना घटी। गलती कोर्ट की ही है जिसे फैसला सुनाने में 20 साल लग गए और तबतक वह (सुशील) 70 साल का हो गया। इस देश में कहीं न्याय नहीं है।’
क्या था मामला: 13 जून 1997 को दिल्ली के उपहार सिनेमा में आग लग गई थी। उस हादसे में 59 लोगों की मौत हो गई थी।  तब साउथ दिल्ली के उपहार सिनेमा में आग लग गई थी। जबकि भगदड़ में 103 लोग गंभीर रूप से घायल थे। हादसा शाम चार बजकर 55 मिनट पर हुआ था। तब बालकनी वाले हिस्से में घना धुंआ भर गया था। तब इस सिनेमा में ‘बॉर्डर’ फिल्म लगी हुई थी।

 

हाफिज सईद के FIF पर यूएन बैन के बाद पाकिस्तान को जब्त करनी थी संपत्ति, पर चल रहा बैंक खाता

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा समाजसेवी संगठन फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) पाकिस्तान में छद्म नाम से बैंक खाते खुलवाकर चंदा जुटा रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की खोज में पता चला है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा एफआईएफ को प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद संगठन पाकिस्तान में सक्रिय है। यूएनएससी के नियमों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को प्रतिबंधित संगठनों की संपत्ति को जब्त कर लेना होता है।
एफआईएफ के फेसबुक पेज से पता चलता है कि इसकी कराची स्थित इकाई से चंदा देने वालों ने सीरिया में की जा रही समाजसेवा की सूचना मांगी है। संस्था को चंदा देने वालों से मैसेज करके बलूचिस्तान वाटर प्रोजेक्ट के लिए भी नकद चंदा मांगा गया है। एफआईएफ ने दुबई के एक बैंक की कराची स्थिति शाखा के खाते में पैसे डालने के लिए कहा।
साल 2015 में ही एफआईएफ के बैंक खातों को बंद करने के आदेश और दुनिया के कई देशों की खुफिया एजेंसियों की निगरानी में होने के बावजूद ये आतंकी संगठन इन बैंक खातों के जरिए पैसे इकट्ठा करके आंतकी संगठनों को मिल रही आर्थिक मदद रुकवाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को धता बता रहा है।
इंडियन एक्सप्रेस ने जब ईमेल से बैंक से इन खातों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा तो बैंक ने कोई जवाब नहीं दिया। इंडियन एक्सप्रेस ने बैंक से पूछा था कि क्या उसे पता है कि ये खाते एफआईएफ के हैं? और क्या बैंक के पास ऐसी कोई व्यवस्था है जिससे आतंकवादियों द्वारा बैंकिंग सुविधा के दुरुपयोग को रोका जा सके?
पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा, एफआईएफ और संगठन के राजनीतिक समूह जमात-उद-दावा के प्रमुख आतंकवादी हाफिज सईद को हिरासत में लिया था। पाकिस्तान सरकार ने घोषणा की थी कि एफआईएफ और जमात-उद-दावा की निगरानी की जा रही है। साल 2015 के “यूएनएससी के प्रस्ताव 1267” के तहत पाकिस्तान को आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता सुनिश्चित करनी थी। पाकिस्तान सरकार को इस बाबत संयुक्त राष्ट्र में एक रिपोर्ट जमा करने थी जिसके पहले उसने हाफिज सईद को हिरासत में लिया।
एक वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार ने बताया, “जमात-उद-दावा अपने समाजसेवी कार्यों से लोगों में सम्मान हासिल करता है। एफआईएफ अब नए लोगों को भर्ती करने का उसके प्रमुख माध्यम है।” हाफिज सईद और उसके आतंकी संगठन कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम करते रहे हैं। हाफिज सईद को साल 2008 में हुए मुंबई हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है।