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दलित समाज ने भी मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् को दिया अपना समर्थन ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- धर्म नगरी काशी में चल रहे मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के क्रम में आज 10 मई, बुधवार को शाम पांच बजे दलित बस्ती, ललिता घाट में विश्वनाथ कॉरिडोर बनााये जाने पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। ज्ञात हो कि 'मन्दिर बचाओ आन्दोलनम्' की शुरुवात 4 दिन पहले काशी के अस्सी घाट से पूज्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्त्व में शुरू हुआ जिसे अपार जन समर्थन मिल रहा है। आज के इस महत्त्वपूर्ण सभा में दलित समाज के सदस्यों को काशी के अनेक विशिष्ट जनों सहित स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती भी संबोधन करेंगे । यह बहुत ही गंभीर विषय बनता जा रहा है जिसे राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार को अविलंब मध्यस्ता करते हुए विपरीत रास्ता ढूंढना होगा और काशी वासियों के हित मे बिना विध्वंश के कार्य करना होगा।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम का उत्तराखंड के बुद्धिजीवियों ने दिया समर्थन।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- काशी में बन रहे विश्वनाथ कॉरिडोर के विरोध मे स्वामी अभिमुक्तेशस्वरानंद सरस्वती की अगुवाई मे चलाए जा रहे अन्दोलम का उत्तराखंड के बुद्धिजीवियों ने समर्थन किया है। इसमें मांग की गई है कि आंदोलनकारियों द्वारा सरकार के समक्ष रखी गई सात मांगों पर त्वरित विचार किया जाय। काशी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्व के मंदिर और धरोहरों को तोड़ा जा रहा है। इसके विरोध में कशी में संत आंदोलनरत है। इसी परिपेक्ष मे यहाँ आयोजित बैठक मे लोगो ने कॉरिडोर योजना पर पुनर्विचार करने की मांग उत्तरप्रदेश के संवेदनशील सरकार से की है। भागवत कथा वाचक आचार्य लोकेश ने कहा कि स्वामी अविमुकेश्वरानंद सरस्वती की अगुवाई मे चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन हम करते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों को तोड़ा जाना सनातन धर्म पर हमला है। इस अवसर पर मोहन शास्त्री, गजेंद्र, संजय शास्त्री,उमेश उनियाल अदि उपस्थित थे।

हरियाणा की तरफ से आ रहा तूफान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है दिल्ली की ओर मचा सकता है तबाही, दो दिनों तक अलर्ट जारी

 दिल्ली - उत्तर भारत में कहर बरपाने के बाद फिर से तूफान लौट आया है. हरियाणा की तरफ से आ रहा तूफान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर बढ़ रहा है. अगले दो से तीन घंटे के भीतर तूफान के दिल्ली-एनसीआर में आने की आशंका जताई गई है. हरियाणा के बाद अब मेरठ और गाजियाबाद में भी सभी स्कूल को बंद रखने के आदेश दे दिए गए हैं. दिल्ली में आज सेकेंड शिफ्ट के स्कूल बंद रहेंगे.

इस बीच दिल्ली सचिवालय में मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने मौसम विभाग के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की है. इस बैठक में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, स्वास्थ्य विभाग, दिल्ली पुलिस, अग्निशमन विभाग समेत सभी अहम विभागों के अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में दिल्ली में सेकेंड शिफ्ट में चलने वाले स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया है. साथ ही सभी स्कूलों को आउटडोर इवेंट नहीं करने की हिदायत दी गई है.

उत्तर भारत में कहर बरपाने के बाद फिर से तूफान लौट आया है. हरियाणा की तरफ से आ रहा तूफान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर बढ़ रहा है. अगले दो से तीन घंटे के भीतर तूफान के दिल्ली-एनसीआर में आने की आशंका जताई गई है. हरियाणा के बाद अब मेरठ और गाजियाबाद में भी सभी स्कूल मंगलवार को बंद रखने के आदेश दे दिए गए हैं. दिल्ली में कल सेकेंड शिफ्ट के स्कूल बंद रहेंगे.

इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति के लिए दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की ओर से इमरजेंसी टोल फ्री नंबर (1077) जारी किया गया है. तूफान आने पर क्या करें और क्या न करें, इसकी एडवाइजरी जारी की गई है.

स्थानीय मौसम विभाग और भारत सरकार के भू-विज्ञान मंत्रालय के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली में दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक 50-50 किमी प्रति घंटे की तेजी से धूल भरी हवाएं चलेंगी और शाम 5.30 बजे यह तूफान अपने चरम पर हो सकता है. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि रोजाना सफर करने वाले यात्री घर से निकलने से पहले मौसम का मिजाज जरूर देख लें.

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, कर्नाटक और केरल आंधी-तूफान से प्रभावित हो सकते हैं. मौसम विभाग के मुताबिक हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर आंधी की आशंका है.

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार एनसीआर, जींद, रोहतक, भिवानी और नारनौल में अगरे दो घंटों में बारिश हो सकती है. दिल्ली समेत एनसीआर में अगले 3-4 घंटों में 50-70 किमी प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल सकती हैं.

नारों के साथ माताओ व बहनों ने सूपा बजाकर विरोध किया।

सुदीप्तो चटर्जी ::- मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के समर्थन में काशी की माताओं बहनों ने सूपा बजाकर विरोध प्रदर्शन किया । आज सायं 5 बजे से काशी के शंकराचार्य घाट पर काशी विश्वनाथ कोरिडोर के अन्तर्गत पौराणिक मन्दिरों को तोडे जाने का विरोध करते हुए अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान मण्डल एवं अन्य संस्थाओं की माताओं बहनों ने सूपा बजाकर अपना विरोध प्रदर्शन किया।  इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीकाशी विदुषी परिषद् की महामन्त्री सावित्री पाण्डेय ने कहा कि काशी गलियों का शहर है । इसकी पहचान गलियों और मन्दिरो से है । इसको विकृत कर काशी के स्वरूप को न बिगाड़े। रागिनी पाण्डेय ने कहा कि विकास यदि करना है तो सडकों का करें।  बिजली पानी आदि का करें लेकिन मन्दिर को तोडकर कौन सा विकास होता है ? डॉ लता पाण्डेय ने कहा कि आज सूपा बजाकर हम सबने प्रतीकात्मक विरोध किया । सूपा बजाने का तात्पर्य यह है कि जिस प्रकार सूपा तोतली चीजों को बाहर कर सार सार को एक जगह पर इकट्ठा करता है उसी प्रकार काशी से बुराई बाहर जाए और अच्छी चीजें यहाँ सदा रहें।  एक तात्पर्य यह भी है कि जिस प्रकार सूपा बजाकर दरिद्रता को भगाया जाता है उसी प्रकार हम विनाशक विकास को भगा रहे हैं। काशी का विकास पोषक हो । विनायक विकास भगाना है।  पोषक विकास को लाना है।। महिला मण्डल करे मुनादी।  मन्दिर को मत तोडो मोदी।। इस तरह के नारों के साथ काशी की माताओं एवं बहनों ने विरोध प्रदर्शन किया। आज के कार्यक्रम में प्रमुख रूप से साध्वी पूर्णाम्बा , साध्वी शारदाम्बा, उर्मिला शुक्ल , अजेया प्रेमलता पाण्डेय, रूबी दुबे पूनम शुक्ल, पूनम तिवारी, माधुरी पाण्डेय , ममता मिश्र, माला मिश्रा , ब्रह्मबाला शर्मा , नीतू सिंह महालक्ष्मी शुक्ला, रितु पाण्डेय, अलमेलु के एस इन्दिरा मिश्रा, उषा देवी ,अंजू यादव , वन्दना यादव आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत मे मंगलाचरण विजया तिवारी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुनीता जायसवाल ने किया। 

मंदिर बचाओ आन्दोलनम का हुआ शंखनाद ।

सुदीप्तो चटर्जी रिपोर्ट ::- भारत की धर्म नगरी तथा देवताओं के वासस्थान काशी में कॉरिडोर निर्माण हेतु वेद / पुराणों में वर्णित मंदिर तोड़ दिए गए तथा देवताओं का पूजन नहीं हो रहा था। इस विषय को ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गम्भीरता से लेते हुए मंदिर बचाओ आन्दोलनम का आज सायं 5 बजे काशी के अस्सी घाट में शंखनाद किया । इस मौके पर उनके साथ श्रीविद्या मठ के बटुक व काशी वासी अधिक संख्या में उनके साथ उपस्थित हुए और राजघाट तक विशाल पदयात्रा निकले। स्वामीश्री का काशी वासियों ने विभिन्न स्थानों पर माला पहनाकर स्वागत किया और वे भी इस मंदिर बचाओ आन्दोलनम में उनके साथ होने की बात कहकर सहयोग देने तथा देवताओं के वासस्थान को नुकसान नहीं होने देने हेतु संकल्प लिए। सभी का मत एक था कि काशी को हमे बचाना है और यदि इस तरह का विध्वंश होगा तो देवता काशी से चले जायेंगे और काशी खाली हो जाएगी। स्वामिश्री के इस आंदोलन में भारी संख्या में लोग जुड़े तथा व्हाट्सएप्प एवं फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से भारत के विभिन्न कोने से लोगों ने अपना समर्थन स्वामिश्री को दिया और आंदोलन से जुड़ने हेतु अपनी इच्छा प्रकट की।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से हुई संकटमोचन मंदिर के महंत की बातचीत; मुहिम तेज करने पर बनी सहमति

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" रिपोर्ट ::- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और संकटमोचन के महंत विश्वम्भर नाथ मिश्र के बीच रविवार को सायंकाल तुलसीघाट पर महंत जी के आवास पर हुई वार्ता में 7 मई, 2018 को सायंकाल अस्सीघाट से वरुणा संगम तक गंगाघाट के किनारे-किनारे आयोजित पदयात्रा को सफल बनाने, हस्ताक्षर अभियान चलाने तथा काशीवासियों को आन्दोलन से जोड़ने पर आम सहमति रही. कहा हमें नहीं चाहिए जापान का "क्योटो" !! अब पक्कामहाल के किसी घर या मंदिर पर नहीं चलना चाहिए हथौड़ा !! संकट मोचन के महंत प्रोफेसर विश्वम्भर नाथ मिश्र ने कहा कि शासन की योजना सामनेघाट से राजघाट तक काॅरिडोर बनाने की ही. जिसे अभी वो उजागर नहीं कर रहे हैं. काशी की पूरी पहचान, धरोहर व संस्कृति को नष्ट कर "क्योटो" बनाना चाहते हैं, जिसका डटकर विरोध किया जाएगा. कहा काशी टूरिस्ट प्लेस नहीं बल्कि धार्मिक व आध्यात्मिक राजधानी है. और यहां लोग शांति प्राप्त करने की तलाश में आते हैं. बीएचयू चिकित्सा विग्यान संस्थान के डाॅ. बीएन मिश्र ने अपनी यूरोप यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस आदि देशों में लोग अपनी पुरानी बस्तियों, गलियों व भवनों को बचाने व सुरक्षित रखने की योजनाएं बना रहे हैं. वहां पुरानी बस्तियों में अब भी गलियां सुरक्षित हैं और यहां पक्कामहाल को जमींदोज करने की योजना बन रही है. बातचीत लगभग एक घंटे तक चली. वार्ता में वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा, राजेन्द्र तिवारी, राजकुमार सिंह, राजनाथ तिवारी, एके लारी, मुन्ना मारवाड़ी, पदमाकर पांडेय आदि भी मौजूद रहे. पद्मपति शर्मा ने आन्दोलन में राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई. कहा कि कुछ नेता टाइप के लोग आन्दोलन के मंच को हाईजेक करने की कोशिश कर रहे हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आन्दोलन में आने से किसी को रोका नहीं जा सकता है. लेकिन राजनीतिक लोगों को अपनी टोपी उतारकर आना पड़ेगा. उन्होंने काशीवासियों से अपनी संस्कृति व पहचान को बचाने के लिए एकजुट होने तथा सोमवार यानी 7 मई, 2018 को सायंकाल 4 बजे अस्सीघाट से आयोजित पदयात्रा को सफल बनाने की अपील की.

काशी में मुर्तियों का विध्वंस रोके सरकार - अविमुक्तेश्वरानंद

सुदीप्तो चटर्जी " खबरीलाल " रिपोर्ट ::- श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में कारिडोर के नाम पर मंदिरों और उसमें स्थापित वेद पूराणों में वर्णित विग्रहों को बेरहमी के साथ ध्वस्त किया जा रहा है। काशी में देवी देवताओं को बचाने के लिए जन आन्दोलन शुरु किया जायेगा। मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के तहत 7 मई 2018 को सायं 4 बजे अस्सीघाट से राजपाट तक पदयात्रा कर आन्दोलन की शुरुआत की जायेगी। इसके बाद प्रतिदिन काशी 84 घाटों पर अलग-अलग समाज के सभी वर्गो द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जायेगा । ????अस्सीघाट से राजघाट तक पदयात्रा 7 मई को ????श्रीकाशी विश्वनाथ कारिडोर के विरोध का जनता करने लगी रोडमैप तैयार इसी क्रम में 16 मई से काशी में मंदिर तोड़ने के विरोध और देवी देयताओं की सुरक्षा के लिए काशी यात्रा शुरु किया जायेगा, यात्रा का समापन 29 मई को विशाल सभा के साथ किया जायेगा। यह बात शनिवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में आयोजित पत्रकार वार्ता में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, बीएचयू के न्यूरोलाजिस्ट प्रो विजयनाथ मिश्र ने संयुक्त रुप से कही। स्वामीश्री ने कहा कि केन्द्र और प्रदेश में हिन्दूवादी विचार धारा की पोषक सरकारों के इशारे पर काशी में विश्वनाथ कारिडोर के बहाने मंदिर परिसर में विभिन्न भवनों में मंदिर के बावजूद मूहमांगी रकम के बल पर मकानों को खरिदकर उसमे स्थापित पुराणो में वर्णित सैकड़ों वर्ष पुराने मंदिरो को तोडा जा रहा है और सरकार मौन है। उन्होने सरकार को अपनी छ: सूत्री मांग पत्र भी प्रेषित किया। मांग पत्र में कारिडोर प्रोजेक्ट से काशी की जनता को अवगत कराया जाय, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में संपत्तियों की रजिस्ट्री राज्यपाल के नाम क्यो बाबा के नाम पर रजिस्ट्री क्यो नहीं , श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से सरकारी हस्तक्षेप हटाकर मंदिर को काशीवासियों के हवाले किया जाय, तोडे गये मंदिरों का उसी स्थान पर पुनर्निर्माण हो, व्यास परंपरा के पोषक व्यासजी को पुन: उनके स्थान पर स्थापित किया जाय, मंदिर और मुर्तियों के विध्वंस की कार्यवाही पर सरकार रोक लगाये, और काशी के मूल स्वरूप के साथ छेडछाड रुके , इसके लिए सरकार लिखित आश्वासन दे ताकि काशी को बचाया जा सके।

हिंदू धर्म में स्वयंभू बाबाओं की कोई जगह नहीं है : स्वामी स्वरूपानंद

खबरीलाल रिपोर्ट ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर बड़ा हमला बोला है। स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं दोनों की वजह से पहुंचा है। शंकराचार्य ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत पर भी तीखा हमला बोला है। शंकराचार्य के मुताबिक, यह हैरान करने वाली बात है कि आरएसएस चीफ मोहन भागवत हिंदुत्व के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। एक राष्ट्रीय पत्रिका से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा, कि भागवत कहते हैं कि हिंदुओं में शादी एक समझौता है, जबकि यह पूरी जिंदगी का साथ है। भागवत कहते हैं कि जो भारत में पैदा हुआ है वो हिंदू है। ऐसे में इंग्लैंड और अमेरिका में हिंदू माता-पिता से पैदा हुए बच्चे को क्या कहेंगे? आगे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि बीजेपी के नेता बीफ के सबसे ज्यादा निर्यातक हैं। उन्होंने इसे बीजेपी का दोहरा चरित्र बताया, जिसके तहत पार्टी गोहत्या की विरोधी है और बीफ के निर्यात को भारत की छवि पर धब्बा बताती है। शंकराचार्य ने यह भी सवाल उठाए कि क्या बीजेपी ने देश से किए अपने द्वारा किये गए वादों को पूरा किया है ? क्या कश्मीर से धारा 370 समाप्त कर दिया गया है ? क्या भारत के युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिला जब कि उन्होंने प्रत्येक वर्ष 2 करोड़ नौकरी देने की बात कही थी ? क्या पीएम मोदी के वादे के मुताबिक भारत के गरीबों को 15-15 लाख रुपये मिल गए ? क्या अयोध्या में राम मंदिर बन गया ? शंकराचार्य के मुताबिक, इन सभी सवालों का जवाब देने में पीएम मोदी समेत बीजेपी नेता नाकाम रहे हैं, जो 2014 के चुनाव प्रचार में इन्होंने किए थे। रेप केस में दोषी ठहराए गए कथा वाचक आसाराम के मामले पर भी शंकराचार्य ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आसाराम को कानून के मुताबिक सजा मिली है, लेकिन उन्हें धर्म के मुताबिक सजा मिलनी बाकी है। न सिर्फ आसाराम बल्कि उनके बेटे नारायण स्वामी को भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हिंदू धर्म में इन स्वयंभू बाबाओं की कोई जगह नहीं है। जब तक जनता मूर्ख बनती रहेगी, ऐसे लोग फायदा उठाते रहेंगे। धार्मिक संगठनों पर टैक्स लगाने के उपर शंकराचार्य ने कहा कि सरकार को पहले अपने खर्चों पर लगाम कसनी चाहिए। उनके मुताबिक, सांसदों और विधायकों को अपने वेतन में कटौती करनी चाहिए।

मंदिरों की शहादत की शर्तों पर विकास मंजूर नहीं -स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

खबरीलाल रिपोर्ट ::- ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती काशी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में कारिडोर के बहाने परिसर के पौराणिक महत्व की मंदिरों को ध्वस्त किये जाने से व्यथित हैं। अब वह सनातन संस्कृति की सल्तनत को बचाने के लिए कमर कस चुके है। केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में पहुंचे बीएचयू के न्यूरोलाजिस्ट से तोडकर फेकी गई। मुर्तियों को दिखाते हुये फफक पडे। फिलहाल मठ के बीटुकों द्वारा विश्वनाथ परिसर में ध्वस्त किये गये मंदिरों के विग्रहो का विधि विधान से पूजा किया जा रहा है। इस बाबत स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि हम विकास के विरोधी नहीं है लेकिन पौराणिक मंदिरो को विध्वंस करके और काशी की पहचान को मिटाकर क्षद्म विकास से हिंदू समाज मर्माहत है । उन्होने काशी की मंदिरों को बचाने के लिए लोगो का आह्वान करते हुये यह भी कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ कारिडोर के बहाने नियम विरुद्ध मकानों को खरीदकर सरकार क्रय किये गये भवनों में सैकड़ों वर्ष पुरानी और जिन विग्रहो का प्रमाण शास्त्रो में है उन मंदिरों में स्थापित देव विग्रहो को तोडकर फेंक दिया गया है। वैसे सरकार और सलाहकारों को यह भी पता होना चाहिए कि किसी भी मंदिर को बेचना और खरीदना कानूनन अवैध है।शास्त्ररो के अनुसार यदि विग्रह खंडित हो जाते है तो उस स्थान की पूजा का विधान है। ( Harendra Shukla जी की वॉल पोस्ट साभार )

अयोध्या में मंदिर बनाने वाली पार्टी काशी में पौराणिक मंदिरों को क्यों तोड़ रही है : अविमुक्तेश्वरानंद

खबरीलाल रिपोर्ट ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि तथा ज्योतिष पीठ के प्रभारी दंडी स्वामी अविकुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने धर्म प्रदेश के संत मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर यह पूछा कि अयोध्या में मंदिर बनाने वाली पार्टी काशी में पौराणिक मन्दिरों को क्यों तोड़ रही है ? इन पौराणिक मंदिरों में देवी देवताओं के वास हैं और समूचे सनातन धर्मी तथा काशी वासी इन मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं। यदि शासन एवं प्रशासन ने इसे बंद नहीं किया तो देवी देवताओं के वास काशी में कहां होगा। ऐसे में काशी नगरी देवी देवता विहीन हो जाएंगे। श्रद्धालुओं और भक्तों के आस्था से ऐसा खिलवाड़ क्यों और किसलिए ? विकास इन पौराणिक मंदिरों को बिना तोड़े भी अलग रास्ता अपनाकर किया जा सकता है। स्वामी अविकुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी एवं मोदी जी से अपील किये हैं - योगी मोदी जी जिद्द छोड़ो, मोद प्रमोद विनायक जोड़ो। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर मूर्ति तोड़ने वाला भी हिन्दू है और मूर्तियों से अपने आपको जोड़ने वाला भी हिन्दू हैं तो मुझे हिन्दूओं को दो भेद मानने ही होंगे - एक मूतो (मूर्ति तोड़ने वाला) हिन्दू और दूसरा मूजो (मूर्ति से स्वयं को जोड़ने वाला) हिन्दू, तब कहना होगा कि यह संघर्ष मूतो हिन्दू बनाम मूजो हिन्दू के बीच है। इस संघर्ष को आप ही रोक सकते हैं।

काशी में देव प्रतिमाओं के ध्वस्त करने के मुद्दे पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने शासन और प्रशासन को दिया अल्टीमेटम।

काशी में देव प्रतिमाओं के ध्वस्त करने के मुद्दे पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने शासन और प्रशासन को दिया अल्टीमेटम। खबरीलाल रिपोर्ट ::- काशी की धरोहर को बचाने के लिए चल रहे आंदोलन के क्रम में अब एक नया मोड़ आ गया है । ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सरकार और प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर सरकार और प्रशासन बाज नहीं आते हैं तो वह काशीवासियों को बड़े आंदोलन के लिए प्रेरित करेंगे। ज्ञात हो कि केंद्र व राज्य सरकार की गंगा पाथ वे और विश्वनाथ कॉरीडोर योजना के तहत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के सैकड़ों मंदिरों और वर्षों से पूजित देव प्रतिमाओं को ध्वस्त किया जा रहा है। इस योजना के तहत कई प्राचीन भवन भी ध्वस्त कर दिए गए हैं। ऐसे में पहले क्षेत्रीय नागरिकों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी । बाद में उसमें राजनीतिक दलों का जुड़ाव हो गया। यहां तक कि जगद्गुरु  शंकाराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य व काशी स्थित श्रीविद्या मठ के प्रभारी दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी इस आंदोलन से जुड़े। उन्होंने बटुकों संग परिक्षेत्र का भ्रमण किया, फिर साधु-संतों संग बैठक कर आंदोलन की रणनीति तैयार की। लेकिन इस आंदोलन को बुधवरा को उस वक्त बड़ा धक्का लगा जब विश्व धरोहर दिवस पर पराड़कर स्मृति भवन में आयोजित विद्वत् गोष्ठी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उखड़ गए। उनका विरोध इस बात पर था कि वह विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में तोड़े जा रहे प्राचीन मंदिरों व वर्षों से पूजित देव विग्रहों के मुद्दे पर विचार विमर्श के लिए आए हैं। उनका धरोहर से कोई सरोकार नहीं। अगर यह संगोष्ठी विश्व धरोहर दिवस के बाबत है तो वह जा रहे हैं। उन्होंने संगोष्ठी में आए सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश के इस व्यक्तव्य का भी कड़ा विरोध किया जिसमें सपा नेता ने कहा कि छोटे-छोटे मुद्दों को छोड़ पहले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को धरोहर घोषित करने के लिए सामूहिक संघर्ष किया जाए। सपा नेता का कहना था कि अगर मंदिर धरोहर घोषित हो जाएगा तो परिक्षेत्र खुद ही उसमें समाहित हो कर संरक्षित हो जाएगा। लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि विश्वनाथ मंदिर धरोहर नहीं, वह जीवंत मंदिर है। इसके धरोहर घोषित कर मंदिर के अस्तित्व को नष्ट करने की साजिश नहीं होनी चाहिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जब तेज आवाज में अपना प्रतिरोध जताना शुरू किया तो सपा नेता संग उनके समर्थकों ने भी इस पर विरोध जताया। सपा नेता ने बताया कि विचार गोष्ठी में उन्हें जो कहना था अपनी बारी आने पर वह सयंमित भाषा में अपना तर्क रखते। तेज आवाज में किसी को अपमानित करने जैसा कृत्य उचित नहीं था। इस विवाद के बाद सारा माहौल ही बिगड़ गया। शतरुद्र प्रकाश और उनके समर्थकों के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी अपने अनुयायियों संग निकल गए। बुधवार की घटना के अगले ही दिन, धरोहर बचाओ समिति के अध्यक्ष विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी ने  शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का संदेश भेजा। इस संदेश में शंकराचार्य ने कहा है कि अविमुक्तेश्वरानंद से यह समाचार मिला है कि काशी में मणिकर्णिका खंड के अंतर्गत काशी विश्वनाथ मंदिर के आस पास पुराण-प्रोक्त अत्यंत प्राचीन देवालयों को तोड़ा जा रहा है। यह बहुत ही अनुचित है। सर्वदेवमय काशी का यह वैशिष्ट्य है कि यहां शास्त्रोक्त सभी देवताओं का स्थान कहीं न कहीं अवस्थित है। उनका संरक्षण तथा पूजा-अर्चना होना चाहिए न कि विध्वंस। यह काशी के इतिहास में संभवतः अपूर्व घटना है। इस तरह देव प्रतिमाओं का विध्वंस किया जा रहा है जो मुगलों और अंग्रेजों के शासनकाल में भी नहीं हुआ।  प्राचीन काल से काशी मंदिरों का नगर कहा जाता है। काशी के इस स्वरूप का संरक्षण धर्मनिर्पेक्ष सरकार का दायित्व है। मंदिरों का सरकारीकरण कर उससे धन उगाहने वाली सरकार उस धन का विनियोग इन मंदिरों के संरक्षण में लगाए न कि उनका विध्वंस कर वहां से धन उगाहने का प्रकल्प चलाए। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि पुराणवर्णित एवं प्राण प्रतिष्ठित इन देव विग्रहों के अपमान से देवताओं के काशी छोड़ने का खतरा है। इससे काशी की समृद्धि, श्री, यश आदि समाप्त हो जाएगा। अतः हमरा मानना है कि तोड़े गए मंदिरं का पुनर्निर्माण हो एवं देवताओं के स्थानों को ना छेड़ा जाए वरना हम काशीवासियों को आंदोलन के लिए प्रेरित करेंगे।

दलालों पर शिकंजा कसने रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग में किया ये बड़ा बदलाव

दलालों के हस्तक्षेप को रोकने और आम लोगों की परेशानी को बचाने की दिशा में रेलवे ने काफी अहम कदम उठाया है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग में दलालों पर नकेल के इरादे से रेलवे ने कई बदलाव किए हैं। तत्काल श्रेणी में एक आइडी से लॉगिन करने पर सिर्फ एक ही टिकट की बुकिंग होगी। दूसरे टिकट के लिए से फिर से लॉगिन करनी होगी। वहीं, एक लॉगिन से एक दिन में दो टिकट और एक महीने में छह टिकट से अधिक की बुकिंग नहीं होगी। इसके अलावा, एडवांस रिजर्वेंशन का ओपनिंग टिकट भी अब दो से अधिक बुक नहीं कर सकते हैं। एक यूजर एक बार में दो विंडो से अपनी आइडी को ऑपरेट नहीं कर सकेगा। 

खबरों के मुताबिक,एक बार में दो से अधिक तत्काल टिकट की बुकिंग नहीं होगी। एक आइडी पर महीने में छह से अधिक टिकट बुक नहीं किए जा सकते हैं। हालांकि आधार लिंक आइडी से महीने में 12 टिकट तक बुक करने की छूट दी गई है। लेकिन इसमें कम से कम एक यात्री का आधार वेरीफाइड होना आवश्यक है। 

इसके साथ ही, अब ऑनलाइन आरक्षण पर्ची भरने के लिए प्रति यात्री 25 सेकंड का समय तय किया गया है, जबकि भुगतान के लिए अधिकतम 10 सेकंड का समय निर्धारित किया गया है। कैप्चा के लिए 5 सेकंड का समय निर्धारित है। अब लॉगिन करते समय, यात्रियों का विवरण देते समय एवं भुगतान के समय अलग-अलग कैप्चा देना होगा।

पेपर लीकः क्राइम ब्रांच ने गूगल से मांगी चेयरपर्सन की जानकारी

नई दिल्ली । सीबीएसई पेपर लीक मामले में स्टूडेंट्स के भारी विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच विसलब्लोअर की तलाश में जुटी है। इसके लिए गूगल से भी सहयोग मांगा गया है। दरअसल, इसी विसलब्लोअर ने ही सीबीएसई चेयरपर्सन को परीक्षा से कई घंटे पहले ही एक वॉर्निंग ईमेल भेजा था। क्राइम ब्रांच ने इस ईमेल के बारे में गूगल से जवाब मांगा है। यह मेल जीमेल आईडी से भेजा गया था और इसमें हाथ से लिखे प्रश्नपत्रों की तस्वीरें भी अटैच थीं।

वॉट्सऐप पर पेपर शेयर होने की खबरों के बीच क्राइम ब्रांच ने 10 से ज्यादा वॉट्सऐप ग्रुप्स की पहचान की है, जिसमें प्रत्येक में 50-60 सदस्य थे। जांच और पूछताछ का सिलसिला लगातार जारी है। इस बीच, पेपर लीक को लेकर 5 छात्रों के समूह ने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात की है। चेयरमैन के इस्तीफे की मांग के साथ छात्रों ने कहा है कि सीबीएसई की गलती की सजा सभी छात्रों को नहीं मिलनी चाहिए। उधर, दिल्ली में प्रकाश जावड़ेकर के घर के पास धारा 144 लागू कर दी गई है। 
आपको बता दें कि दिल्ली में सीबीएसई दफ्तर के बाहर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। सुबह कांग्रेस पार्टी का स्टूडेंट्स यूनियन एनएसयूआई भी छात्रों के साथ मार्च में शामिल हुआ। कांग्रेस पार्टी सरकार पर और ज्यादा हमलावर हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा, पीएम ने एग्जाम वॉरियर्स किताब लिखी, जो परीक्षा के दौरान स्टूडेंट्स का तनाव दूर करने के लिए है। अब उन्हें एग्जाम वॉरियर्स 2 लिखनी चाहिए, जिसे पेपर्स लीक होने के कारण तबाह हुई स्टूडेंट्स और पैरंट्स की जिंदगियों के बाद उनके तनाव को दूर करने के लिए पढ़ाया जाए।

इसरो की जीसैट 6-ए लॉन्च, बढ़ेगी सेना की ताकत, मोबाइल संचार होगा और भी बेहतर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने संचार उपग्रह जी सैट 6-ए को अंतरिक्ष में लॉन्च कर दिया है। इसरो के जीएसएलवी-एफ08 मिशन के जरिए इस सैटेलाइट को श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया. इसरो का यह लॉन्च पूरी तरह से सफल रहा. यह उपग्रह मल्टी-बीम कवरेज सुविधा के जरिए भारत को मोबाइल संचार उपलब्ध कराएगा. लॉन्च के लिए उल्टी गिनती बुधवार को ही शुरू हो चुकी थी और गुरुवार शाम 4.56 बजे इसे लॉन्च कर दिया गया. 2000 किलो वजनी इस सैटेलाइट को बनाने में करीब 270 करोड़ रुपयों की लागत आई है.

यह होगा फायदा
इसरो द्वारा लॉन्च किया गया यह सैटेलाइट एक हाई पावर एस-बैंड संचार उपग्रह है, जो अपनी कैटेगरी में दूसरा है. भारत इससे पहले जीसैट-6 लॉन्च कर चुका है. गुरुवार को लॉन्च हुआ यह नया उपग्रह, अगस्त 2015 से धरती की कक्षा में चक्कर लगा रहे जीसैट-6 को सपोर्ट देने के लिए भेजा गया है. इस नए सैटेलाइट में ज्यादा ताकतवर कम्यूनीकेशन पैनल्स और डिवाससेस लगाई गई हैं. इस सैटेलाइट में लगा 6 मीटर का कॉम्पैक्ट एंटीना धरती पर कहीं से भी सैटेलाइट कॉलिंग को आसान बना देगा. इस सैटेलाइट को लॉन्च कर सरकार चाहती है कि देश में छोटे ग्राउंड स्टेशन और हाथ में पकड़े जाने वाले उपकरणों से कॉलिंग करने की सुविधा का विकास किया जा सके. जीसैट-6ए सैटेलाइट किसी सामान्य संचार उपग्रह से बहुत खास है. आसान शब्दों में कहें तो जीसैट-6ए भारत में सैटेलाइट आधारित मोबाइल कॉलिंग और कम्यूनीकेशन को बहुत आसान बनाने में दमदार रोल प्ले करेगा.

भारतीय सेनाओं को मिलेगा संचार का नया हथियार
बता दें कि जीसैट-6ए खासतौर पर सेनाओं के बीच दूरस्थ स्थानों से होने वाली कॉलिंग को आसान बनाएगा. इसरो के मुताबिक यह सैटेलाइट जनरल संचार सेवाओं के लिए किसी ट्रांसपॉन्डर क्षमता को नहीं बढ़ाएगा, बल्कि यह उपग्रह खास तौर पर रिमोट एरिया में मौजूद सेनाओं की टुकडि़यों के बीच बेहतर संचार प्रणाली विकसित करने में मददगार होगा. इस काम के लिए जीसैट-6ए में लगा 6 मीटर चौड़ा छाते जैसा एंटीना ही रामबाण साबित होगा.

 

अन्ना की भूख हड़ताल का 7वां दिन, अब तक 5 किलो घट चुका है वजन

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का अनशन गुरुवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गया और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने वाले बुजुर्ग कार्यकर्ता का वजन पांच किलोग्राम से ज्यादा घट गया है. यह दावा उनके सहयोगी ने किया है. हजारे के सहयोगी दत्ता अवारी ने कहा कि अनशन की वजह से उनका रक्तचाप भी गिरा है. बीजेपी के पूर्व सांसद और पार्टी छोड़कर कांग्रेस में जाने वाले नाना पटोले ने भी रामलीला मैदान में हजारे से मुलाकात की. हजारे 23 मार्च से अनशन पर है.

अन्ना की मांगों पर सरकार ने साधी चुप्पी
अन्ना की मांगों पर केंद्र सरकार ने अब तक कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की है. उनके चिकित्सक धनंजय पोटे ने बताया कि हजारे का रक्तचाप बढ़ा हुआ है जबकि शरीर में शुगर (शर्करा) का स्तर घट गया था, जिससे उनको थकान महसूस हो रही है. अन्ना हजारे के स्वास्थ्य की देखभाल करने महाराष्ट्र के रालेगांव सिद्धि से आए पोटे ने कहा, बुधवार को दोपहर तीन बजे जब अन्नाजी के स्वास्थ्य की जांच की गई तो उनका रक्तचाप 186-100 था. लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक, उनके शरीर में रक्त शर्करा का स्तर घट गया है. पोटे ने बताया कि बोलने में उनको तकलीफ हो रही है, इसलिए शाम पांच बजे की उनकी प्रेसवार्ता रद्द कर दी गई. अन्ना टीम के कोर कमेटी सदस्य सुशील भट ने कहा कि हजारे ने मंगलवार को कहा कि केंद्र उनकी मांगों को लेकर बुधवार को एक कार्ययोजना लाएगी. हालांकि अधिकारियों ने पूरे दिन कोई औपचारिक संवाद स्थापित नहीं किया.

बता दें कि हजारे केंद्र व राज्यों में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए लोकायुक्त का गठन करने का दबाव डाल रहे हैं. इसके अलावा वह चुनाव सुधार लाने और देश में कृषि क्षेत्र के संकट को दूर करने के लिए एम. एस. स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश लागू करने की मांग कर रहे हैं.