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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पंचक्रोशी यात्रा प्रारम्भ।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पंचक्रोशी यात्रा प्रारम्भ। खबरीलाल सुदीप्तो चटर्जी - एक्सक्लूसिव लाइव रिपोर्टिंग (काशी) ::- पूज्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने काशी के मणिकार्णिका घाट से संकल्प कर मंदिर बचाओ आन्दोलनम हेतु पंचक्रोशी यात्रा आरम्भ किये। स्वामिश्री के साथ उनके सहायक मयंक शेखर मिश्रा, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, श्रीविद्या मठ के बटुक व अन्य काशी वासी मंदिर बचाओ आन्दोलनम हेतु स्वामिश्री के साथ 26 मई सुबह मणिकार्णिका घाट से कंधवा तक 15 कि.मि. की पदयात्रा किये तथा शाम को कंधवा से भीमचण्डी तक 15 किमी की और पदयात्रा किये जिससे काशी वासी जागृत हो कि काशी के मंदिर जो पुराणों में वर्णित है उन्हें तोड़े जा रहे हैं जिसमे तीन प्राचीन विनायक मंन्दिरों को विकास के नाम पर तोड़ दिए गए हैं। पूज्य स्वामिश्री का जगह जगह लोगों द्वारा माला पहनाकर स्वागत किया गया तथा मंदिर बचाओ आन्दोलनम को समर्थन देने की बात स्वामिश्री से कहा। स्वामिश्री रात्रि विश्राम भीमचण्डी में किये तथा अल सुबह 5 बजे पदयात्रा भीमचण्डी से शुरू होकर रामेश्वरम तक किये। भीमचण्डी से रामेश्वरम के बीच पड़ने वाले गांवों के लोग अपने घरों से निकलकर स्वामिश्री का स्वागत किये और समर्थन कि बात कही। पूज्य स्वामिश्री काशी नगरी के प्राचीन धरोहरों को बचाने हेतु नंगे पांव पदयात्रा कर रहे हैं साथ ही उनके साथ पदयात्रा में शामिल साधु, संत, बटुक व नागरिक भी नंगे पांव तप्ती गर्मी में पदयात्रा कर रहे हैं जिससे पुराणों में वर्णित मन्दिरों को बचाया जा सके तथा विकास के नाम पर विनाश बन्द हो । इसके साथ ही काशी को अपने मूल स्वरूप में ही रहने दिया जाए जिस हेतु देश विदेश के लोग, श्रद्धालु काशी नगरी के प्राचीन मंदिरों के साथ साथ गलियों का भी भ्रमण करते हैं।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है भरपूर जनसमर्थन।

।। "खबरीलाल" सुदीप्तो चटर्जी की विशेष टिप्पणी ।। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि एवं ज्योतिष पीठ के मंत्री पूज्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने काशी में कॉरिडोर बनाने हेतु पुराणों में वर्णित प्राचीन मंदिरों को तोड़े जाने पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इस कार्य का पुरजोर विरोध किया और इसी क्रम में स्वामिश्री ने काशी के धरोहरों को बचाने तथा जिस हेतु काशी विश्वविख्यात है उन सब मंदिरों को बचाने हेतु "मंदिर बचाओ आन्दोलनम" की शुरुवात की। स्वामिश्री के इस धार्मिक कार्य हेतु काशी वासियों का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है लेकिन बड़े दुःख की बात है कि आज तक किसी भी राजनीतिक पार्टी के बड़े नेताओं ने इस आन्दोलनम हेतु स्वामिश्री के साथ खड़े नजर नहीं आये। सभी राजनीतिक दल को समझना होगा कि धर्म नगरी काशी में देवताओं का वास होता है साथ ही साथ यह सिद्ध नगरी है जिसे देखने के लिए विदेशों से लोग आते हैं और बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के साथ साथ काल भैरव, दुर्गा मंदिर, दुर्गा कुंड, हनुमान मंदिर , कामाख्या मंदिर, सिद्ध पीठ महालाक्षी मंदिर आदि का दर्शन कर देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं तथा मणिकर्णिका घाट में पूण्य स्नान भी करते हैं। भारत देश अपने प्राचीन सनातन धर्म और संस्कृति के लिए जाने जाते हैं जिसमे काशी समूचे विश्व में अपना अलग स्थान बनाये हुए हैं। लोगों की आस्था इस धर्म नगरी काशी से जुड़ी हुई है और इसी आस्था को विकास के नाम पर चोट पहुंचाने की कोशिश हो रही है जो ग्राह्य नहीं है। काशी क्षेत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यदि उनके संसदीय क्षेत्र में ऐसा हो तो अन्य राज्यो, जगह में फिर क्या होगा। कौन बचाएंगे भारत के प्राचीन धरोहरों को ?  उत्तरप्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी एक संत हैं तथा उन्हें भली भांति मालूम भी है कि किस तरह लोगों की आस्था काशी नगरी से जुड़ी हुई है। इस आन्दोलनम हेतु काशी वासियों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ स्वयं काशी में चल रहे मंदिर बचाओ आन्दोलनम को अपना समर्थन देंगे तथा वे पूज्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से इस बाबत चर्चा कर बीच का रास्ता निकालेंगे तथा उत्तरप्रदेश के प्राचीन धरोहरों को बचाने हेतु अपनी पूर्ण सहभागिता भी प्रदान करेंगे। कई सामाजिक संस्था जो मंदिर बचाओ आन्दोलनम से जुड़े हैं उनका कहना है चूंकि योगी आदित्यनाथ खुद एक बड़े संत हैं और उनकी भी आस्था है तो यह आशा हम कर ही सकते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस गंभीर विषय का हल स्वामिश्री से वार्ता कर  निकलेंगे ।

काशी के मणिकर्णिका से आरंभ हुई पंचक्रोशी यात्रा।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- भगवान साक्षी विनायक के संरक्षण में व्यास पीठ ज्ञानवापी से संकल्पित होकर मणिकर्णिका से आरम्भ हुई पंचक्रोशी यात्रा । ज्ञात हो कि पूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती काशी के प्राचीन मंदिरों को बचन्द हेतु समूचे काशी के मंदिरों में वे जा रहे है साथ मे काशी के जनता भी मंदिरों को बचाने, काशी के धरोहर जो पुराणों में वर्णित है उसे बचाने हेतु संकल्प लेकर पूज्य स्वामिश्री के साथ पदयात्रा कर रहे है। आज 26 मई 2018 पदयात्रा का 11 वां दिन है। हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ गंगे । काशी के मंदिरों को बचाने स्वामिश्री ने नारा दिया - हर मन्दिर प्रभु का, चले हैं काशी वासी संगे ।। जो विकास मंदिर तोडवाए, वो हमको स्वीकार नही । जनता का दुख-दर्द ना समझे, समझो वो सरकार नही ।। हमको मनकी कहने दो, काशी को काशी रहने दो । खुद को हिन्दू बोल रहे हो, फिर भी मंदिर तोड रहे हो ।यदि अब मंदिर एक भी टूटा, समझो भाग्य तुम्हारा फूटा । हम समझेंगे तोड के मन्दिर, हमसे रिश्ता तोड़ रहे हो ।।

जनता अपने हितों की रक्षा के लिए खुद खडी हो - अविमुक्तेश्वरानन्दः

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- भारत के लोगों ने परम्परा से प्राप्त राजतंत्र को नकार कर लोकतन्त्र की स्थापना इसीलिए की थी कि तत्कालीन राजागण जनता के दुख दर्द को नहीं सुन रहे थे ।सोचा यही गया था कि जनता के बीच का कोई व्यक्ति यदि शासन संभालेगा तो जनता के दु:ख दर्द के समझ सकेगा, पर दुर्भाग्य से ऐसा हो न सका । पार्टियां सत्ता पाने और बनाये रखने में इतनी तल्लीन हो गई हैं कि उनके पास जनता का दु:ख दर्द सुनने व समझने का समय ही नही रह गया है । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने आज सायं धर्मसम्राट् स्वामी श्री करपात्री जी महाराज द्वारा स्थापित काशी विश्वनाथ मन्दिर परिसर में व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि जनता नेता को अपना कीमती नोट-वोट और सपोर्ट देती है इसलिए कि वह किसी विपत्ति के समय उनके साथ खड़े होंगे , पर काशी में हमारे हजारों वर्षों से पूजित मन्दिर टूट रहे थे तब किसी भी पार्टी का कोई भी नेता आकर खड़ा नहीं हुआ । स्वामिश्री ने आगे कहा कि आज जनता को अपने सरोकारों की रक्षा के लिये स्वयं खड़े होने का समय आ गया है । ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द ने अपने उद्बोधन में कहा कि काशी धर्म नगरी है । यहाँ से ही सब सन्देश विश्व में जाता है । यदि यहाँ ही गलत होने लगेगा तो यहाँ से गलत सन्देश ही बाहर जाने लगेगा। इसलिए यहाँ कुछ गलत न हो इसके लिए स्वामिश्रीः मन्दिर बचाओ आंदोलनम् चला रहे हैं। पद्माकर पाण्डेय ने कहा कि मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के कारण आज मन्दिरों पर हथौड़ा चलना बन्द हो गया है । यह स्वामिश्रीः की आध्यात्मिक शक्ति का परिणाम है । डा लता पाण्डेय ने कहा कि लोग आज घर से नहीं निकल रहे पर बके मन में मन्दिरो के लिए पीड़ा है । एक चिंगारी के रूप में स्वामिश्रीः निकले हैं, अब लोगों को निकलने में देर न लगेगी । आर्य शेखर ने कहा कि विक्स हमेशा ही विनाश पर ही खड़ा होता है । मैं इस आन्दोलनम् के लिए पूरी तरह से समर्पित होने आया हूँ । अमित पाण्डेय ने कहा कि हम सब आन्दोलनम् के साथ तन मन से जुड़े हैं । स्वामी जी पर लोग आरोप लगा रहे हैं कि वे राजनीति कर रहे हैं पर यह सबको जानना चाहिए कि कोई भी सरकार हो जब वह सनातन धर्म के विरुद्ध कुछ करती है तो सरकार के खिलाफ निडर होकर खड़े होते हैं । चेतन शर्मा वैदिक ने कहा कि सन्तो के पास राजनीति नहीं आध्यात्म नीति होती है । मोदी जी विकास करना चाहते हैं पर यह विनाश है । सच्चा विकास केवल आध्यात्मिक उन्नति ही है । डॉ विजय नाथ मिश्र ने कहा कि आज करपात्री जी के स्थान पर आकर सभी पुरानी बातें स्मरण में आ रही हैं । मन्दिरों की मर्यादा को सुरक्षित रखने का जो कार्य करपात्री महाराज ने आरम्भ किया था वह स्वामिश्रीः के नेतृत्व में अवश्य पूरा होगा । आज प्रमुख रूप से राजेन्द्र तिवारी बबलू , काशी के डोम राजा चौधरी , सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, कृष्ण कुमार शर्मा, डॉ लता पाण्डेय , रविकान्त यादव , आर्य शेखर, गौरीनाथ, हरि प्रकाश पाण्डेय , पद्माकर पाण्डेय , सुनीता जायसवाल, सावित्री पाण्डेय , ब्रह्मबाला शर्मा , कुशला दुबे आदि विशिष्ट जन उपस्थित रहे । कार्यक्रम का शुभारम्भ गौर भारती वैदिक मंगलाचरण से हुआ । पौराणिक मंगलाचरण प्रशान्त त्रिपाठी ने किया । संचालन रूपेश तिवारी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ श्रीप्रकाश मिश्र ने किया । राजनेताओं से हम निराश है राज बब्बर और प्रमोद तिवारी आज पूज्य स्वामिश्रीः से मिलने आए । स्वामिश्रीः ने उन लोगों से कहा कि हम लोगों ने वेद मन्त्रो से अभिषिक्त राजा को छोड़कर लोकतन्त्र को चुना पर आप सब अपनी कुर्सी को बचाने मे लगे हैं तो आप सब अपने मे ही रहो । हम सबको अपने हाल पर छोड़ दो । आप सबने जनता के हृदय से जुड़े मुद्दों को छोड़ दिया है इसलिए हम आप सबसे निराश हैं । जब अपने को हिन्दू कहकर आए नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ मन्दिरों पर हथौड़ा चला रहे हैं तो आप से क्या उम्मीद की जाए ? पर यह साफ समझ लीजिये कि सौ करोड़ हिन्दुओं के देश में मुस्लिम तुस्टीकरण से आप देश को नही चला सकेंगे । आज यात्रा का दसवाँ दिन आज मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के अन्तर्गत चल रही यात्रा का दसवाँ दिन है और आज काशी खण्डोक्त लगभग 900 मन्दिरों का दर्शन पूजन सम्पन्न हुआ । कल से यह यात्रा पंचक्रोशी के लिए प्रस्थान करेगी । सुबह 5 बजे ज्ञानवापी में यात्रा का संकल्प लेकर सभी भक्त स्वामिश्रीः के नेतृत्व में तीन दिन की पैदल यात्रा करेंगे ।

धर्म द्रोहियों से हमारा सम्बन्ध समाप्त - अविमुक्तेश्वरानन्दः

धर्म द्रोहियों से हमारा सम्बन्ध समाप्त - अविमुक्तेश्वरानन्दः हमारे शास्त्रों में कहा गया है मौनं स्वीकृति लक्षणम् माने जो लोग अपने सामने कुछ भी होता हुआ देखें और कोई प्रतिदिन करें, चुप रहें तो उनके मौन को स्वीकृति मान लिया जाता है। वर्तमान में काशी में अनेक मन्दिरों और मूर्तियों को तोडकर प्रशासन ने मलबे में मिला दिया है और सन्त और विशिष्ट जन इस पर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं इसलिए हम समझते हैं कि ऐसे धर्मद्रोहियों से अपना सम्बन्ध ही समाप्त कर लें । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने आज की सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी ने भी कहा था - तजिये ताहि कोटि वैरी सम ,यद्यपि परम सनेही । जाके प्रिय न राम वैदेही । उन्होंने आगे कहा कि हम संता के विरोधी नहीं हैं और न ही ये चाहते हैं कि कोई भी सन्त प्रशासन से अपना व्यवहार बिगाड़े परन्तु कम से कम जब हमारे सनातन प्रतीकों पर देवालयों पर हथौड़ी चल रही हो तो चुप रहना उचित नहीं। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि यह भी आवश्यक नहीं कि सब हमारे पीछे ही चल पड़े पर जहाँ हैं वहाँ रहकर भी अपने स्तर से अपना विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। सभा में ब्रह्मचारी उद्धव स्वरूप , ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द , ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानन्द , अधिवक्ता रमेश उपाध्याय एवं आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण से हुआ। संचालन मयंकशेखर मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन ब्रह्मचारी मुरारी स्वरूप ने किया।

सोनारी का काम लोहारों के हाथ में-अविमुक्तेश्वरानन्दः

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" :- सोनारी अर्थात् सोने का कार्य । जिसे सोनार भाई करते हैं । सोनारी काम की विशेषता यह है कि इस काम को बड़े धैर्य से धीरे धीरे करना होता है । सोने का एक कण भी व्यर्थ किये बिना सोने में नक्काशी करना । यह सोनारी काम की विशेषता है । इसलिए सोनार छोटी छोटी हथौड़ी आदि औजारों के साथ काम करते हैं । वहीं लोहे का काम करने वाले लोहार अपने हाथ में वज़नदार हथौड़ा या घन रखते हैं । और बेपरवाही से चोट करते हैं ।यह अन्तर इसीलिए आता है क्योंकि सोना और लोहा इन दोनों धातुओं के मूल्य में बड़ा अन्तर होता है । काशी और अन्य कोई नगर एक से नहीं हैं । काशी सोना है । पर आज काशी में जो हो रहा है वह लोहारी जैसा है ।इसका परिणाम यह है कि काशी की मूल्यवान धरोहरें, जीवन्त स्थापत्य और काशी की पहचान आदि सब के सब खतरे में पड़ गये हैं ।उक्त उद्गार मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् के अन्तर्गत अपने सहयोगियों सहित काशी की नंगे पाँव पदयात्रा कर रहे स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने यात्रा के पांचवे दिन के पड़ाव जैतपुरा के नागकूप पर आयोजित सभा में कहीं । उन्होंने आगे कहा कि हाँ, काशी पुरानी है । पर पुरानी चीजों का अपना महत्व होता है । आजकल उस महत्व को एन्टीक वेल्यू के रूप में कहा जाता है । विचार करिये कि कहीं नये के व्यामोह में हम अपने इस एन्टीक वेल्यू वाले नगर को खो तो नहीं रहे हैं ? यदि किसी के मन में नयेपन की अभिलाषा है तो वह भी गलत नहीं है । पर बहुत से लोग पुराने को भी पसन्द करते हैं । तो पुराने को बनाये रखते हुये नये का निर्माण स्वागत योग्य हो सकता है । ऐसे लोगों को नई काशी का निर्माण करना चाहिए । वे नई काशी को जितना चाहें सुन्दर बना सकते हैं ।

मुख्यमंत्री में नहीं रह गया जनता से सामना करने का साहस - स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती  

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- आज जिस तरह से पहले उत्तर प्रदेश के माननीय संवेदनशील मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी द्वारा काशी में मंदिरों, मूर्तियों को तोड़े जाने और पेंड़ को काटे  जाने के विरुद्ध चलाए जा रहे "मंदिर बचाओ आंदोलन" के लोगों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया और फिर जिस तरह उनको बीच रास्ते रोक कर वापस लौटाया गया , उससे यह पता चलता है कि मुख्यमंत्री के अंदर जनता को सामना करने का साहस समाप्त हो गया है । यह विचार स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती  ने लोहटिया चौराहे से लक्ष्मी कुंड लौटने के उपरांत लोगों से कही ।  ज्ञात हो की स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के अंतर्गत विगत 16 मई से काशी में  पुराणोक्त मंदिरों के दर्शन, पूजन की यात्रा पर हैं जिससे काशी के प्राचीन मंदिरों को बचाया जा सके ।   स्वामी जी जब  लगभग 2 किलोमीटर वापस आ गए तब पुलिस के कुछ अधिकारी आये और कहा स्वामी जी वापस चलिए। स्वामी जी ने बताया कि हम मर्यादा मानसम्मान सबकी परवाह किये बगैर इसीलिए मुख्यमंत्री जी के पास जा रहे थे क्योंकि हमको आशा थी शायद मुख्यमंत्री जी को काशी में जो कुछ हो रहा वो ठीक से नहीं पता नहीं होगा । जब उनको हम सब बताएंगे , उनको ध्यान में आएगा और कार्यों को जो कि काशी में अनर्थ के रूप में हो रहे हैं उसे वे रोक देंगे। लेकिन जिस तरह से हम सभी को लौटाया गया उससे  पता चल गया की जनता से सामना करने की हिम्मत माननीय मुख्यमंत्री में नही  है । जरुर उनको कहीं ना कहीं अंतर्मन में अपराध बोध होगा । आगे स्वामी जी ने बताया कि मंदिरों और मूर्तियों के तोड़ने से रोकें जाने तक आंदोलन चलता रहेगा और किसी भी प्रकार से रुकेगा नहीं। हम आशा करेंगे कि सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों को सद्बुद्धि आएगी और वह परिस्थिति की गंभीरता को समझेंगे और निर्णय लेंगे । 

देखा, सिसक रही थी काशी। नंगे पाँव चला सन्यासी :: अविमुक्तेश्वरानंद

:: सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" रिपोर्ट :: देखा, सिसक रही थी काशी। नंगे पाँव चला सन्यासी ।। काल अनादि रही संरक्षित, शिव का मयआनंद अलौकिक, घर-घर कंकर-शंकर पूजित, अब क्यूँ सिसकी भरती काशी, नंगे पाँव चला सन्यासी।। “मैंने तो गंगा से मिलकर, अविमुक्त ये क्षेत्र बनाया। अपने अंचल में ले, जलकर, तेरे पुरखे मुक्त कराया। मैंने बाबा शिव को, हठ कर, कैलाश से यहाँ बुलवाया। तेरे मन को शांति मिले, सारे देवों को यहाँ बसाया। मेरे अंग भंग कर अब क्या, मुझे बनायेगा क्योटो-सी” देखा, सिसक रही थी काशी। नंगे पाँव चला सन्यासी ।। ...स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

भारत में मन्दिरों को तोडने वाली पार्टी के रूप में जानी जाएगा भारतीय जनता पार्टी - स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" रिपोर्ट ::- काशी में हो रहे देव मंदिरों के विध्वंस देव मूर्तियों के अपमान और दिव्य विग्रहों की पूजा से सनातन धर्मियों को वंचित कर रहे किए जाने के विरुद्ध "मंदिर बचाओ आंदोलनम्" के अंतर्गत आज प्रातः काल 7:00 बजे से असि संगमेश्वर महादेव की पूजा कर "काशी बचाओ मंदिर बचाओ यात्रा" आरंभ हो गई । यात्रा के क्रम में असि संगमेश्वर, भद्र विनायक,अर्क विनायक, चंद्रकूप, पराशरेश्वर महादेव , अमरनाथ, महिषासुर मर्दिनी, जगन्नाथ जी , साक्षी गोपाल जी, पुष्कर तालाब, ब्रह्मा वेद विद्यालय, सिद्धेश्वर महादेव, पंचरत्न मंदिर, कुरुक्षेत्र, स्वर्ण लिंगेश्वर, दुर्गा कुंडेश्वर, दर्प विनायक, ज्वरहरेश्वर, ज्वरहरेश्वरी देवी, तिलपर्णेश्वर, शुष्केश्वर महादेव, नागेश्वर महादेव, राधा कृष्ण मंदिर, सीता राम मंदिर, संकुधारा,द्वारकाधीश मंदिर, बैजनाथ महादेव, कामाख्या देवी, प्रत्यंगिरा देवी, बटुक भैरव, उन्मत्त भैरव,देवरिया वीर, कूटदन्त विनायक, क्रीं कुंड और हयग्रीव केशव इन मंदिरों का दर्शन किया गया । यात्रा मध्यान्ह लगभग 12:30 बजे भदैनी पहुंची और वहां हयग्रीव केशव देव का दर्शन कर यात्रा ने विराम लिया । सायंकाल माता आनंदमई आश्रम परिसर में क्षेत्रीय लोगों की एक सभा का आयोजन किया गया । जिसमें अनेक वक्ताओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किए सभी ने एक स्वर से इस योजना का विरोध किया । अध्यक्षता करते हुए स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने कहा की हमारे हिंदू सनातन धर्म प्रतीकों को हानि पहुंचाने और नष्ट करने का प्रयास आज से नहीं विगत अनेक वर्षों से चल रहा है । उन्होंने कहा कि सनातन धर्म आस्था का केंद्र गोलू को नष्ट करने का प्रयास भारत में अपना साम्राज्य जमा चुके मुगलों ने किया जब अंग्रेज यहां के शासक बने तो उन्होंने यहां के गुरुकुलों को समाप्त करने का काम किया और अब जब भारतीय जनता पार्टी शासन में आई है तो लगता है कि आने वाला इतिहास भारतीय जनता पार्टी को देश से हिंदू मंदिरों को समाप्त करने वाली पार्टी के रूप में निरूपित करेंगे । जिस तरह से धर्म प्राण नगरी काशी, मंदिरों का शहर काशी, गलियों का शहर काशी, आधुनिक योजनाओं के नाम पर उजाड़ा जा रहा है और जिस तरह विकास के नाम पर सहस्राब्दियों से स्थापित धरोहर को नष्ट किया जा रहा है उसको देखकर तो यही लगता है कि हम किसी भी धर्म के शासनकाल में रह रहे हैं । यात्रा कल प्रातः 6:00 बजे से आरंभ होकर तिलभांडेश्वर महादेव, चिंतामणि गणेश, केदारेश्वर महादेव, हरिश्चंद्र ईश्वर महादेव सब के दर्शन करते हुए क्षेमेश्वर घाट विश्राम करेंगे । "काशी बचाओ मंदिर बचाओ" सभी काशी खंडोंक्त मंदिरों का दर्शन करते हुए दिनांक 29 मई को पूरी होगी और उसी दिन एक बड़ी सभा के माध्यम से मंदिर बचाओ आंदोलन का दूसरा चरण घोषित किया जाएगा । कार्यक्रम में सम्मिलित रहे ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द, स्वामी उद्धव स्वरूप, ब्रह्मचारी कृष्णप्रिया आनंद, ब्रह्मचारी योगेश्वरान्नद, डाक्टर श्रीप्रकाश मिश्र, गिरीश चंद्र तिवारी, शिवप्रसाद पांडे, कवि बृजेंद्र मिश्र दमदार बनारसी जी आदित्य जन उपस्थित रहे ।

घंटा घड़ियाल प्रतिदिन बजाकर जगाएंगे जन-जन को - रविशंकर द्विवेदी ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- काशी के तीर्थ पुरोहितों ने "मंदिर बचाओ आन्दोलनम्" को समर्थन प्रदान करते हुए काशी वासियों से प्रतिदिन सायंकाल अपने छत पर 8:00 से 8:15 तक घंटा, घड़ियाल और शंख बजाने और "हर हर महादेव" का नारा लगाने का आह्वान किया है । "मंदिर बचाओ आंदोलनम्" के समर्थन के लिए आयोजित आज की इस बैठक में मणिकर्णिका घाट के तीर्थ पुरोहित श्री रविशंकर जी ने कहा कि मंदिरों को तोड़ना और मूर्तियों को अपमानित करना, पूजा को रोक देना आदि कार्य की निंदा की जानी चाहिए । औरंगजेब के समय में भी जजिया कर ले कर हिंदुओं को अपने धर्म के पालन की अनुमति दी जाती थी दुःख की बात है कि आज हिंदू-हिंदू कहने वाली और अपने आपको हिंदुओं की रक्षा करने वाली पार्टी सिद्ध करने की कोशिश करने वाली पार्टी का शासन है । काशी जैसी पवित्र नगरी में मंदिरों को तोड़ा जा रहा है हमारा हृदय अत्यंत आहत है इसलिए और कुछ ना करके हम अपने घर की छत पर प्रतिदिन रात को 8:00 से 8:15 तक घंटा, घड़ियाल बजाकर और "हर हर महादेव" का नारा लगाकर जनता को जगायेंगे और इस तरह से अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कराएंगे । हमने शांति का परिचय दिया है , शांति से हमारी बातों की सुनवाई सरकार नहीं कर रही है । कार्यक्रम में समिति के श्री प्रेम शंकर दुबे, नारायण माहेश्वरी, रवि कुमार, कैलाश नाथ, अंकित द्विवेदी, त्रिलोचन शास्त्री, महालक्ष्मी शुक्ल, पद्माकर पांडे, भावना जी, रवि शंकर गिरी, विजय कपूरिया, राजकुमार, मोहन मिश्रा, अंजू चौबे, आदि लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए । कार्यक्रम का संचालन पप्पू यादव ने किया । कार्यक्रम में उपस्थित स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा आंदोलन राजनीतिक आंदोलन नहीं है । आस्था से जुड़ा हुआ और गरिमा से बना हुआ काशी की जनता का आंदोलन है। हम बड़ी शांति और दृढ़ता से अपनी बात को कह रहे हैं । 16 तारीख को जो हमारी काशी यात्रा आरंभ हो रही है उस में भाग लेने के लिए बहुत सारे लोगों ने संपर्क किया था लेकिन बड़ी भीड़ लेकर के चलने पर नगर का यातायात प्रभावित होता है, आम जनता को असुविधा होती है और असामाजिक तत्वों द्वारा गड़बड़ी करने की आशंका बनी रहती है । इन सब बातों को मद्देनजर रखते हुए हमने निर्णय लिया है कि इस काशी यात्रा में कम से कम लोग सम्मिलित रहें, लोग घरों के सामने ही खड़े होकर यात्रा में शामिल लोगों के साथ कनेक्ट करे। काशी की रक्षा के लिए कटिबद्ध स्वामी जी ने यह भी कहा कि आज हमको मणिकर्णिका आकर बड़ी प्रसन्नता हुई है। यह काशी का सबसे बड़ा तीर्थ है । घाट पर रहने वाले लोगों की जो समस्याएं हैं, उसे सही और एक सुंदर वातावरण बनाने का प्रयास किया जाएगा ।

मन्दिर तोड़ने वालों को चिता के लिये आग नहीं ::- विश्वनाथ चौधरी

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् को हमारा पूरा समर्थन है क्योंकि मन्दिर आस्था के केन्द्र हैं । मन्दिरों को तोड़ने और उसका स्थान बदलने की कोशिश करने वालों को काशी के मणिकर्णिका घाट पर चिता के लिये अग्नि देना संभव नहीं है । यह कथन है वाराणसी के डोमराजा के पुत्र डोमराजा का। बरिया चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् से संवाद स्थापित करने के लिये आयोजित संगोष्ठी में पूरे समाज की ओर से बोलते हुये डोमराजा के सुपुत्र विश्वनाथ चौधरी ने व्यक्त किये । सभा में उपस्थित मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने कहा कि जहां मंदिरों में पूजा-अर्चना नही होती है वहां रोजी रोटी का संकट, आधि-व्याधि का संकट और मृत्यु भय संकट मंडराने लगता है, इसलिए काशी के इन मंदिरों को तोड़े जाने को और मंदिर में पूजा बंद कराया जाने का खतरा मंडराने लगा है । सभा में उपस्थित रहे बरिया चौधरी, विश्वनाथ चौधरी, राजेंद्र चौधरी, सत्यम चौधरी, रोशन यादव, मनाऊँ यादव, सोनू चौधरी, नीरज चौधरी के साथ सैकड़ो लोग उपस्थित रहे ।

दलित समाज ने भी मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् को दिया अपना समर्थन ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- धर्म नगरी काशी में चल रहे मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के क्रम में आज 10 मई, बुधवार को शाम पांच बजे दलित बस्ती, ललिता घाट में विश्वनाथ कॉरिडोर बनााये जाने पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। ज्ञात हो कि 'मन्दिर बचाओ आन्दोलनम्' की शुरुवात 4 दिन पहले काशी के अस्सी घाट से पूज्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्त्व में शुरू हुआ जिसे अपार जन समर्थन मिल रहा है। आज के इस महत्त्वपूर्ण सभा में दलित समाज के सदस्यों को काशी के अनेक विशिष्ट जनों सहित स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती भी संबोधन करेंगे । यह बहुत ही गंभीर विषय बनता जा रहा है जिसे राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार को अविलंब मध्यस्ता करते हुए विपरीत रास्ता ढूंढना होगा और काशी वासियों के हित मे बिना विध्वंश के कार्य करना होगा।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम का उत्तराखंड के बुद्धिजीवियों ने दिया समर्थन।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- काशी में बन रहे विश्वनाथ कॉरिडोर के विरोध मे स्वामी अभिमुक्तेशस्वरानंद सरस्वती की अगुवाई मे चलाए जा रहे अन्दोलम का उत्तराखंड के बुद्धिजीवियों ने समर्थन किया है। इसमें मांग की गई है कि आंदोलनकारियों द्वारा सरकार के समक्ष रखी गई सात मांगों पर त्वरित विचार किया जाय। काशी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्व के मंदिर और धरोहरों को तोड़ा जा रहा है। इसके विरोध में कशी में संत आंदोलनरत है। इसी परिपेक्ष मे यहाँ आयोजित बैठक मे लोगो ने कॉरिडोर योजना पर पुनर्विचार करने की मांग उत्तरप्रदेश के संवेदनशील सरकार से की है। भागवत कथा वाचक आचार्य लोकेश ने कहा कि स्वामी अविमुकेश्वरानंद सरस्वती की अगुवाई मे चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन हम करते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों को तोड़ा जाना सनातन धर्म पर हमला है। इस अवसर पर मोहन शास्त्री, गजेंद्र, संजय शास्त्री,उमेश उनियाल अदि उपस्थित थे।

हरियाणा की तरफ से आ रहा तूफान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है दिल्ली की ओर मचा सकता है तबाही, दो दिनों तक अलर्ट जारी

 दिल्ली - उत्तर भारत में कहर बरपाने के बाद फिर से तूफान लौट आया है. हरियाणा की तरफ से आ रहा तूफान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर बढ़ रहा है. अगले दो से तीन घंटे के भीतर तूफान के दिल्ली-एनसीआर में आने की आशंका जताई गई है. हरियाणा के बाद अब मेरठ और गाजियाबाद में भी सभी स्कूल को बंद रखने के आदेश दे दिए गए हैं. दिल्ली में आज सेकेंड शिफ्ट के स्कूल बंद रहेंगे.

इस बीच दिल्ली सचिवालय में मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने मौसम विभाग के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की है. इस बैठक में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, स्वास्थ्य विभाग, दिल्ली पुलिस, अग्निशमन विभाग समेत सभी अहम विभागों के अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में दिल्ली में सेकेंड शिफ्ट में चलने वाले स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया है. साथ ही सभी स्कूलों को आउटडोर इवेंट नहीं करने की हिदायत दी गई है.

उत्तर भारत में कहर बरपाने के बाद फिर से तूफान लौट आया है. हरियाणा की तरफ से आ रहा तूफान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर बढ़ रहा है. अगले दो से तीन घंटे के भीतर तूफान के दिल्ली-एनसीआर में आने की आशंका जताई गई है. हरियाणा के बाद अब मेरठ और गाजियाबाद में भी सभी स्कूल मंगलवार को बंद रखने के आदेश दे दिए गए हैं. दिल्ली में कल सेकेंड शिफ्ट के स्कूल बंद रहेंगे.

इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति के लिए दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की ओर से इमरजेंसी टोल फ्री नंबर (1077) जारी किया गया है. तूफान आने पर क्या करें और क्या न करें, इसकी एडवाइजरी जारी की गई है.

स्थानीय मौसम विभाग और भारत सरकार के भू-विज्ञान मंत्रालय के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली में दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक 50-50 किमी प्रति घंटे की तेजी से धूल भरी हवाएं चलेंगी और शाम 5.30 बजे यह तूफान अपने चरम पर हो सकता है. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि रोजाना सफर करने वाले यात्री घर से निकलने से पहले मौसम का मिजाज जरूर देख लें.

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, कर्नाटक और केरल आंधी-तूफान से प्रभावित हो सकते हैं. मौसम विभाग के मुताबिक हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर आंधी की आशंका है.

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार एनसीआर, जींद, रोहतक, भिवानी और नारनौल में अगरे दो घंटों में बारिश हो सकती है. दिल्ली समेत एनसीआर में अगले 3-4 घंटों में 50-70 किमी प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल सकती हैं.

नारों के साथ माताओ व बहनों ने सूपा बजाकर विरोध किया।

सुदीप्तो चटर्जी ::- मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के समर्थन में काशी की माताओं बहनों ने सूपा बजाकर विरोध प्रदर्शन किया । आज सायं 5 बजे से काशी के शंकराचार्य घाट पर काशी विश्वनाथ कोरिडोर के अन्तर्गत पौराणिक मन्दिरों को तोडे जाने का विरोध करते हुए अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान मण्डल एवं अन्य संस्थाओं की माताओं बहनों ने सूपा बजाकर अपना विरोध प्रदर्शन किया।  इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीकाशी विदुषी परिषद् की महामन्त्री सावित्री पाण्डेय ने कहा कि काशी गलियों का शहर है । इसकी पहचान गलियों और मन्दिरो से है । इसको विकृत कर काशी के स्वरूप को न बिगाड़े। रागिनी पाण्डेय ने कहा कि विकास यदि करना है तो सडकों का करें।  बिजली पानी आदि का करें लेकिन मन्दिर को तोडकर कौन सा विकास होता है ? डॉ लता पाण्डेय ने कहा कि आज सूपा बजाकर हम सबने प्रतीकात्मक विरोध किया । सूपा बजाने का तात्पर्य यह है कि जिस प्रकार सूपा तोतली चीजों को बाहर कर सार सार को एक जगह पर इकट्ठा करता है उसी प्रकार काशी से बुराई बाहर जाए और अच्छी चीजें यहाँ सदा रहें।  एक तात्पर्य यह भी है कि जिस प्रकार सूपा बजाकर दरिद्रता को भगाया जाता है उसी प्रकार हम विनाशक विकास को भगा रहे हैं। काशी का विकास पोषक हो । विनायक विकास भगाना है।  पोषक विकास को लाना है।। महिला मण्डल करे मुनादी।  मन्दिर को मत तोडो मोदी।। इस तरह के नारों के साथ काशी की माताओं एवं बहनों ने विरोध प्रदर्शन किया। आज के कार्यक्रम में प्रमुख रूप से साध्वी पूर्णाम्बा , साध्वी शारदाम्बा, उर्मिला शुक्ल , अजेया प्रेमलता पाण्डेय, रूबी दुबे पूनम शुक्ल, पूनम तिवारी, माधुरी पाण्डेय , ममता मिश्र, माला मिश्रा , ब्रह्मबाला शर्मा , नीतू सिंह महालक्ष्मी शुक्ला, रितु पाण्डेय, अलमेलु के एस इन्दिरा मिश्रा, उषा देवी ,अंजू यादव , वन्दना यादव आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत मे मंगलाचरण विजया तिवारी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुनीता जायसवाल ने किया।