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खेल ने बदली एक मोहल्ले के भाई की किस्मत”

अक्सर हम जब भी सुबह उठते है तो हमेशा बुरी बुरी खबर सुनते और पड़ते हैं | की कहीं मडर हो गया,कहीं चोरी हो गया रेप की खबरे सुनते है पर सब से ज्यादा बुरा तब लगता है जब हम देखते है की कम उम्र के बच्चे क्रिमिनल बन जाते है |मुझे नहीं पता की वो क्राइम की दुनिया को अपनी दुनिया क्यूँ बना लेता है निष्चित है की उसकी कोई मज़बूरी ही होती होगी जिसकी वजह से वो इस दुनिया में कदम रखता होगा | आज मैं आप को एक ऐसे ही शख्स की कहानी सुनाने वाली हूँ जिसका बचपन वसूली करना ,डराना धमकाना जैसे कामों में लिप्त था पर अचानक उसकी जिंदगी में एसा मोड़ आया की उसकी पूरी जिन्दगी ही बदल दी |जी हाँ मैं बात कर रही हूँ अखिलेश पौल की जो नागपुर शहर की बस्ती का रहने वाला है इसका पाला रोज गुंडा गर्दी ,शराब, गांजा से बहुत जल्द ही पड गया था |अखिलेश का जुर्म इतना बड गया था की उसके खिलाफ पोलिस थाने में अलग अलग तरह के केस दर्ज हो रहे थे और वहीँ विरोधी गैंग के लोग भी उसकी जान के प्यासे थे |उसकी जिंदगी ऐसे मोड़ पर आगई थी की वो अपनी जान को पोलिस और विरोधी गैग से बचाकर भागते फिर रहां था |उसको समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे |तब अखिलेश अपनी जान बचाने के लिए कब्रिस्तान का सहारा लिया वहां उसने गरीबो के साथ वक्त बिताया गरीबो के खाने के बाद जो भी खाना बचता था वो अखिलेश उस वक्त खाया करता था क्यूँ की उस वक्त उसके पास पैसे ही नहीं थे | अखिलेश ने फिर एक वकील किया और उस वकील ने उसको थाने में सरेंडर करवाया फिर उसको कोर्ट में पेश कर उसको जमानत दिलवाई |अब अखिलेश की लाइफ यहाँ से बदले वाली थी |एक दिन अखिलेश एक कॉलेज के सामने सिगरेट फूकते खड़ा हुआ था वहां से कुछ बच्चे सायकल में फुटबॉल लेकर जा रहे थे उन बचों को देख कर अखिलेश को उसके जीवन की कुछ बातें याद आरही थी जब वो महज 14-15 साल का हुआ करता था तब एक दिन अखिलेश और उसके कुछ साथी एक कॉलेज के सामने खड़े थे तब एक टीचर ने अपने पियून को उन लोगो के पास भेजा और उनको अपने पास बुलाया और वो लोग जब उस टीचर के पास गये तब उस टीचर ने उन लोगों से कहा की क्या वे लोग फुटबॉल खेलेंगें तब अखिलेश ने कहां की हम खेल तो लेंगें पर इसके बदले आप हमे क्या दोगे उस टीचर ने कहा मैं तुमको 5 रूपये दूंगा उन लोगोने हाँ कर दी और ये फुटबॉल खेलने का सिलसिला करीब 15-20 दिनों तक चलता रहा फिर उस टीचर ने उन लोगों को पैसे देना बंद कर दिए | बिना पैसे के अखिलेश लोग भी फूटबल खेलना बंद कर दिए कुछ दिन बाद एक लड़का अखिलेश को बोला भाई मन नहीं कर रहा कुछ खेलने का मन कर रा तो क्या करें वो सब सब के सब फिर उस टीचर के पास गये और बोले की हमे आप पैसे मत दो पर फुटबॉल दे दो हम खेलना चाहते है उस टीचर ने ठीक है पर खेलने के बाद ये फूटबाल यही ला के रख देना ये फिर से फुटबॉल खेलने का सिलसिला कुछ दिन तक चलता रहा फिर उन लडको का क्राइम इतना बड गया था की वो अब उसमे ज्यादा ध्यान देने लगे और फुटबॉल खेलना बंद कर दिए |यही सारी पुरानी बातें अखिलेश को याद आई उसने उन बच्चों का पिछा किया और उनको खेलता देख वहीँ खड़ा हो गया थोड़ी देर बाद वो बच्चे सर आ गये करके कहने लगे अखिलेश ने देखा दूर से कोई व्यक्ति आ रहा था वो व्यक्ति अखिलेश के पास आया और कहने लगा और अखिलेश आज कल क्या हो रहा हैं| वो और कोई नहीं वही सर थे जिसने कभी उनको फुटबॉल खेलने को अपने पास बुलाये थे | अखिलेश ने सर से कहा की सर अभी मेरी पहले से भी ज्यादा बुरी कंडीशन है तो सर ने कहा की एक काम करो तुम रोज कुछ समय यहाँ बच्चों को फुटबॉल सिखाया करों इससे तुम्हारी प्रक्टिस हो जाएगी |सर ने अखिलेश से एक बात पूछी की अखिलेश तुम ये बताओ जब तुम फुटबॉल खेला करते थे तो क्या उस वकत तुमने वो सारे काम किये थे जो तुम रोज किया करते थे अखिलेश ने कहाँ कौन से काम | सर ने कहाँ की जब तुम खेलते थे तो क्या उस वक्त तुमने किसी को डराया धमकाया या ऐसा कोई कम किया जिसकी वजह से तुमको पोलिसे के पकड़ने का डर होता या अपनी जान बचाने की फिकर थी अखिलेश ने कहाँ नहीं सर |सर ने यही बात अखिलेश से कही की मैं यही तुमको समझाना चाह रहा था की खेल एक एसा माध्यम है जब हम खेल खेलते है तब दुनिया कहाँ है कौन क्या कर रहा है उसका ख्याल नहीं रहता हम सिर्फ और सिर्फ अपने खेल पर ध्यान देते है |अखिलेश को ये बात समझ आ गई और वो रोज फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया | सर और उनके साथ के लोग डिस्ट्रिक लेबल का टूरनामेंट करवाते थे |सर की एक टीम थी जो फुटबॉल खेल की डिस्ट्रिक लेबल का टुरनामेंट करवाया करती थी | सर की टीम ने एक ऐसी ही डिस्ट्रिक लेबल का टुरनामेंट करवाया और उसमे अखिलेश ने उसमे भाग लिया इस टुरनामेंट में जो भी अच्छा खेलता था उसके चयन स्टेट लेबल के लिए होता था और जो स्टेट लेबल में अच्छा खेलता था उसको नैशनल खेलने को मिलता था अखिलेश को भी नैशनल खेलने का मौका मिला ये जो टुरनामेंट होता है वो झोपड़ पट्टी के बच्चों के लिए होता है और ये बच्चे ही इसमें हिस्सा लेते हैं और जो बच्चे नैशनल के लिए चुने जाते है उन मेसे जो बच्चे अच्छा खेलते है उनका सलेक्शन भारतीय फुटबॉल टीम के लिए होता है |अखिलेश का भी परफोर्मेंस अच्छा था तो उसका भी चयन भारतीय टीम के लिए हुआ और उसे भारतीय टीम का कॅप्टन बना के ब्राजील भेजा गया ये टीम स्लैम सौकर वर्ड कप खेलने ब्राजील गई थी |अखिलेश ने जब ये मैच खेल के वापस आया तो उसकी जिन्दगी ही बदल गई आज अखिलेश रेड लाइट एरिया के बच्चों को फुटबॉल सिखाने का काम कर रहे है और उनका ये सपना है की जो बच्चे क्राइम की दुनिया में लिपत है या गलत काम कर रहे है उनको खेल के माध्यम से उनका जीवन अच्छा बना सके जैसे उनका जीवन बदल गया |क्या आप लोगों को पता था की एसी भी टीम होती है जिससे झोपड़-पट्टी के बच्चों का भारतीय फूटबल टीम के लिए स्लैकशन होता है | वर्षा बी गल्पान्डे

नगाड़ों की थाप के बिना होली का उल्लास अधूरा होली के रंग को गहरा करने शहर में नगाड़ों की बिक्री भी शुरू

भाटापारा एक सप्ताह बाद होली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। नगाड़ों की थाप के बिना होली का उल्लास अधूरा है। होली के रंग को गहरा करने शहर में नगाड़ों की बिक्री भी शुरू हो गई है। नगाड़े की थाप पर बजने वाले पारंपरिक गीत उत्साह को दोगुना करते हैं। होली में नगाड़े मस्ती और उल्लास का रंग घोलेंगे। शहर के सब्जी मार्केट व मुख्य मार्ग पर कारीगर नगाड़े लेकर पहुंचने लगे हैं। इसके साथ ही शहर में रंग-गुलाल व पिचकारी की दुकान सजने लगी है। जैसे-जैसे होली नजदीक आते जाएगी, इसकी खरीदारी जोर पकड़ने लगेगी।

सुनाई देने लगी थाप

इस वर्ष 1 व 2 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा। इसके नजदीक आते ही नगाड़े की थाप धीरे-धीरे सुनाई दे रही है क्योंकि नगाड़े का रिश्ता होली से है और इसके बिना होली के उमंग की उत्साह की कल्पना नहीं की जा सकती। होली में रंग घोलने बाजार में नगाड़े सजने लगे हैं। साथ ही नगाड़ों की थाप फाग का पावन संदेश देने लगी है।

मिट्टी के पात्र से बनाया जाता है नगाड़ा

मिट्टी के पात्र में चमड़ा चढ़ाकर नगाड़ा बनाया जाता है। कर्मकारों ने बताया कि नगाड़ा बनाने के लिए मिट्टी के खोल वे नगर के आसपास के कुंभकारों से लाते हैं। जबकि चमड़ा आसपास के क्षेत्र जैसे तिल्दा-नेवरा, नागाबुडा, कोचबाय, बागबाहरा से लाते हैं। मिट्टी के खोल प्रति जा़ेडी 15 से 200 रुपए तक पड़ जाती है।

बाजार में 150 से 2000 तक कीमत वाले नगाड़े

महंगाई की मार नगाड़ों के दामों पर भी देखने को मिली है। चार साल पहले जो नगाड़े 100 रुपए जोड़ी बिकते थे आज उनकी कीमत 200 से 250 यानी दो दुगनी हो गई है। बाजार में 150 से लेकर 1500 रुपए तक की कीमत वाले नगाड़े बिक रहे हैं। इसकी कीमत आकार के अनुसार होती है। छोटे आकार के नगाड़े 150-200 रुपए तथा मध्यम आकार के 800-900 व बड़े आकार के नगाड़े लगभग दो हजार रुपए तक कीमत पर बाजार में उपलब्ध है।

अलग-अलग तरह की आती है आवाज

कर्मकारों ने बताया कि एक जोड़ी नगाड़ा में दो अलग-अलग तरह की आवाज निकलती है। इसलिए नगाड़ा बड़ी सावधानी से बनाना पड़ता है। टिन नगाड़ा की आवाज पतली होती है, जिसे अपेक्षाकृत पतली चमड़ी से बनाया जाता है। जबकि गद आवाज वाले नगाड़ा के लिए मोटी चमड़ी प्रयुक्त किया जाता है।

चूना से करते है परिष्कृत

कर्मकारों ने बताया कि नगाड़ा बनाने के पहले चमड़े को चूना से परिष्कृत करना पड़ता है, जिससे चमड़ा काफी दिनों तक नरम रहता है। उपरांत विभिन्ना गोलाई के बर्तन को ऊपर रखकर काटा जाता है। मिट्टी के खोल में छाने के बाद नगाड़ा को धूप में रख दिया जाता है, जिससे नगाड़ा शीघ्र ही पककर बजाने लायक हो जाता है।

चाह कर भी इन चार माह के दौरान पुलिस नही मोड़ सकते आस्तीन

जांजगीर-चांपा. भारत देश से अंग्रेजी हुकूमत वर्षों पहले समाप्त हो चुकी है, लेकिन उनके बनाए नियम-कायदे पुलिस व अन्य विभागों में आज भी प्रभावी हैं। कुछ ऐसा ही एक रोचक मामला पुलिस विभाग से संबंधित हैं, जिसके मुताबिक पुलिस के जवान चार माह तक ड्यूटी के दौरान अपने वर्दी के आस्तीन नहीं मोड़ पाते। चाहे मौसम कुछ भी हो। ऐसा नहीं करने पर उच्चाधिकारियों से कार्रवाई का भय बना रहता है। 

पुलिस विभाग की कड़ी ड्यूटी से हर कोई वाकिफ है, लेकिन वर्दी पहनने के अंग्रेज जमाने के कुछ नियमों से साधारण नागरिक वाकिफ  नहीं हैं। 15 नवंबर से 15 मार्च के बीच चार माह तक पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के वर्दी पहनने के अंदाज में भारी परिवर्तन हो जाता है। अधिकांश पुलिस अधिकारी-कर्मचारी खाकी वर्दी के बजाए अंगोला वर्दी में नजर आते हैं। इस वर्दी को पहनने का नियम अनिवार्य है। यदि ड्यूटी के दौरान या अधिकारियों के सामने पुलिस जवान इस वर्दी में नजर नहीं आते तो उन्हें सजा भी भुगतनी पड़ती है। हालांकि पूरे ठंड के मौसम में अंगोला वर्दी पुलिस के अधिकारी और कर्मचारियों को ठंड से बचाती है। कुछ पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों का कहना है कि अंगोला वर्दी लगातार चार माह तक पहनने में उन्हें अटपटा सा लगता है, लेकिन विभाग का नियम पालन करना भी जरूरी है।

नहीं मोड़ेंगे 15 मार्च तक

साल के आठ माह खाकी वर्दी में दिखने वाले अधिकांश पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के शर्ट की आस्तिन कोहनी तक मुड़ी नजर आती है, जो पुलिसकर्मियों को अच्छा लगता है, लेकिन अंगोला वर्दी धारण करने के बाद पुलिस विभाग के नियमानुसार कोई भी अधिकारी-कर्मचारी चार माह तक अपने शर्ट का आस्तिन नहीं मोड़ सकते। चाहे इस दौरान उन्हें गर्मी क्यों न लगे। वह आस्तिन किसी भी शर्त पर नहीं मोड़ते।

गांव में बदलाव की एक किरण” कहानी वर्षा की जुबानी

“एक कदम ही काफी है पूरी कायनात को बदलने के लिए, एक सूरज की रोशनी ही काफी है अंधकार को मिटने के लिए |” पहल “खुद से खुद का परिचय” की दूसरी कड़ी है | मैं वर्षा फिर से हाजिर हूँ एक और कहानी के साथ | ये कहानी है सरकारी स्कूल के एक खेल टीचर मोहन की |जिसने पुरे गांव का नक्षा ही बदल दिया | मोहन ने पुरे गांव में एक पहल शुरू की ये पहल थी आत्मरक्षा की शिक्षा की | इस शिक्षा को गांव का हर एक इन्सान सिख रहा है चाहे वो बच्चा हो या बुजुर्ग वो लड़की हो या 80 साल की बुजुर्ग महिला इस क्लास में उम्र का कोई दायरा नहीं है |क्यूँ की अनहोनी किसी के साथ भी हो सकती है | मोहन स्कूल में बच्चों को सिखाता की लोगों के साथ कैसे बात करनी है कैसे लड़किया अपनी रक्षा खुद कर सकती है साथ ही बच्चों के माता पिता को भी कहता जो नियम लड़कियों के लिए है वही नियम आप लडको को भी पालन करने को कहों हर नियम लड़कियों के लिए ही क्यूँ ? मोहन जानता था की लड़कियों को हम खुद ही कमजोर कर देते है और यदि उसके साथ कुछ गलत हो तो हम उसे ही दोष देते है पर क्यूँ लड़कियां खुद तो नहीं चाहेगी की लड़के उसके साथ कुछ गलत करें | मोहन के ये सब करने के पीछे भी उसकी खुद की एक कहानी थी मोहन का छोटा सा परिवार था जिसमे केवल चार सदस्य थे |उसकी पत्नी एक प्यारी सी बेटी कृति जो केवल 8 साल की थी और मोहन की बुजुर्ग माँ |एक दिन कृति स्कूल से वापस घर आरही थी की कुछ बदमाशों ने उसका रास्ता रोका और उसको गाड़ी में बैठा कर ले गये और उसकी इजत लुट ली और फिर उसे मार कर फेक दिया | मोहन को जब ये सब पता चला तो वह पुलिस के पास गया रिपोर्ट लिखवाई | नेताओ के पास गया पर अपराधियों का पता न चल सका |मोहन से जो बन पड़ा अपनी बेटी को इन्साफ दिलाने वो उसने सब किया पर वो अपराधियों को सजा न दिला सका |उसी दिन से उसने ये प्रण लिया की वो हर लड़की को इतन सक्षम बायेगा की वो अपनी खुद की रक्षा कर सके तभी से उसने आत्म रक्षा की शिक्षा लोगों को देने की पहल की और लड़कों को भी ये शिक्षा दी की यदी आप किसी लड़की के साथ गलत करते हो तो कल कोई दूसरा भी आप की बहनों बेटियों के साथ गलत करेगा |यदि हर लड़का ये बात समझ जाये तो शायद ये अपराध हो ही न |मोहन ने इस काम के लिए पुलिस की भी मदत ली |उसने स्कूल में 4 दिन एक पुलिस वाले को स्कूल में बुला कर हो रहे अपराधों की जानकारी देने और उससे जुड़े नियम-कानून और खुद की आत्म रक्षा कैसी करनी है ये भी बताने आग्रह किया |आज मोहन की मेहनत की वजह से इस गाव में 25 सालों से एक भी अपराध नहीं हुआ | आस पास के लोग मोहन को अपने गाव में बुलाकर ये शिक्षा देने और लोगों जागरूक करने के लिए बुलाते हैं | दोस्तों लड़कियों की जब भी इजत लुटी जाती है ,इसिड फेका जाता है तब भी हम केवल लड़कियों को ही ब्लेम करते है अपराधियों को खोजने से पहले हम लड़कियों के चरित्र पर कीचड़ उछालते है ,लड़कियों के पहनावे पे सवाल उठाते है | और ये सवाल उठाने वाले और कोई नहीं हम खुद ही होते हैं |ये भूल जातें है की हम दूसरों की लड़कियों पर उगली उठा रे कल उस की जगह हमारी लड़कियां भी हो सकती है | बीच सड़क पर लड़की के साथ गलत होता है चार बदमाश होते है उसके आस पास दस लोगों की भीड़ फिर भी उस चार लोग लड़की के साथ गलत कर के चले जाते है और आस पास के दस लोग देखते रह जाते हैं पर कुछ करते नहीं क्यूँ उन्हें डर लगता है की कौन इस पछेडे में पड़ेगा इस सोच के पीछे हमारा कमजोर सिस्टम है जो बदमाशों को कुछ रुपयों की लालच में शय देता है और जिसके कारण बेगुनाह लोग भी फस जाते हैं | हम लड़कियों को हर बात में टोकते है रात के लड़कियां बहार नहीं जाती ,छोटे कपडे नहीं पहनना है ,हर जगह घर वालों के साथ भेजना, हम ये सब लड़कों को क्यूँ नहीं कहते क्यूँ आज जो लड़कियों की इजट लुटी जा रही है वो कौन लुटता है लड़के ही न ? तो आप खुद ही सोचें की हमें आने जाने में पाबन्दी लड़कियों में लगनी चाहिए या लड़कों में ? ये प्रशन मैं आप पर छोडती हूँ |और आप से एक जाते जाते यहीं कहना चाहती हूँ की आप के घर में यदि लड़कियां है तो उसे ये आहसास न दिलाएं की वो कमजोर है जबकि उसको मजबूत बनाये ताकि वो हर परिस्थिति का सामना कर सके और हर परिस्थिति में आप उसके साथ खड़े हैं ये विश्वास दिलाएं | ये सब कैसे संभव हो सकता है जब आप लड़कियों को आत्मरक्षा की शिक्षा दिलाएं और इसे गंभीर रूप से ले | ज्यादा तो नहीं पर कुछ हद तो अपराध को हम रोक सकेंगें | ये सब के लिए शारीरिक रूप से मजबूत भी होना जरुरी है |मुझे याद है की जब मैं स्कूल में थी तो खेल क्लास होती थी पर वो खेल क्लास कम टाइम पास की क्लास ज्यादा होती थी ,हफ्ते में एक दिन पिटी क्लास होती थी स्कूल में ये सब करने का एक ही मकसद होता है की बच्चे शारीरिक रूप से मजबूत बन सके पर टीचर इस बात को गंभीरता से नहीं लेते है और नहीं माता पिता | अब इसे गंभीरता से लेना सिख लीजिये | किसी परिस्थिति से लड़ने के लिए शारीरिक रूप से मजबूत होना जरुरी है | महिलाओ पर हो रहे अपराधों को रोकने के लिए हमने भी एक पहल शुरू करने की ठानी है की हम आत्मरक्षा की शिक्षा को हर स्कूल में एक अनिवार्य विषय की तरह लागु करवाना चाहते है | इसके लिए हम शिक्षा विभाग को एक पत्र भेजने का विचार कर रहे है इसमें आप सब की राय चाहिए की ,यदि स्कूल में ये शिक्षा लागु होती है तो क्या अपराध कम होंगें ? हर बार की तरह फिर यहीं कहूँगी की इस प्रोग्राम का मकसद आप के अन्दर की अच्छाइयों को आप खुद ही पहचान सकें | ये कहानीयां जो मैं लिखती हूँ वो सच्ची घटनायें है | जिसे मैं कहानी का रूप देखर लिखती हूँ क्यूँ की इसमें जुडी बातें हमारी निजी जिंदगी को काफी प्रभावित करती है | बस आप सब से लास्ट में यही कहना चाहती हूँ “नदी बहते हुए न जाने कितने ही उचे-नीचे रास्तों से गुजरती है कितनी ही चट्टानों से टकराती है और खुद अपना रास्ता बनती है, वैसे ही हमे भी अपना रास्ता खुद ही बनाना होगा” वर्षा बी गलपांडे

पिता के त्याग की कहानी

 पिता के त्याग की कहानी  वर्षा की जुबानी 

अपने परिवार की खुशियों के लिए अपने जीवन को भी कुर्बान करने वाले को ही, पिता कहते है

आमतौर पर हम सभी को  बचपन में अपनी अनुशासनप्रियता व सख्ती के चलते हमारे पिता हमें क्रूर नजर आते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है और हम जीवन की कठिन डगर पर चलने की तैयारी  करने लगते हैं, हमें अनुभव होता है कि पिता की वो डाँट और सख्ती हमारे भले के लिए ही थी। उनकी हर एक सिखावन जब हमें अपनी मंजिल की ओर बढ़ने में मदद करती है, तब हमें मालूम पड़ता है कि पिता हमारे लिए कितने खास थे और हैं।

आज भी दुनियाभर में बच्चे सर्वप्रथम आदर्श के रूप में अपने पिता को ही देखते हैं। मां उनकी पहली पाठशाला, पहला विश्वविद्यालय है तो पिता पहला आदर्श। वे अपने पिता से ही सीखते हैं और उनके जैसा ही बनना चाहते हैं

ये कहानी है प्रीतम सिंग की जो पेशे से एक सोसाइटी में वाच मैंन का कम करता है | उसका परिवार गाँव में रहता है  | इसके दो बेटे हैं  बड़े बेटे का नाम सोहन और छोटे का नाम मन्नू हैं | बडे बेटे को डांस करने का शोक है  वो रोज स्कूल जाने के लिए निकलता और स्कूल न जाकर वो पूरा समय खेतो में डांस करता | एक दिन जब प्रीतम अपने गाँव आया तो स्कूल के मास्टर ने सोहन की शिकायत की वो स्कूल नहीं आता सारा सारा दिन खेतो में डांस ही करता रहता है पड़ने में उसका मन नहीं लगता | ये बात सुनकर प्रीतम घर आया और उसने सोहन से बोला बेटा आज हमें तुम्हारी एक खूबी मास्टर जी ने बताई है सोहन डर के कपना शुर कर दिया की आज उसको उसके पिता खूब डाट लगाने वाले है पर हुआ उल्टा प्रीतम ने सोहन को डाटा नहीं बलकी उसको बोला आज से तुम मेरे साथ शहर में रहोगें |

प्रीतम की कमाई इतनी नहीं थी की वो अपने बच्चों को अच्छी  शिक्छा दे सके फिर भी उसने अपने बच्चे को डांस की तालीम दिलाने के लिए शहर ले आया और उसका एक डांस स्कूल में एडमिशन करवाया | अब वो अपने बच्चे की खुशियों को पूरा करने के लिए दो जगह कम करना शुरू कर दिया | ये सिल्सिता रोज एसा ही चलता रहा एक दीन  सोहन ने पिता से कहाँ पिताजी मेरा एक इंडिया लेबल के सबसे बड़े डांस कॉम्पिटिशन में सलेक्शन हो गया है और मुझे वहां जाने के लिए बहुत से पैसे की जरुरत होगी उसने बेटे को हस्ते हुआ कहा तुम जाओ और खूब नाम कमाओ मैय तुम्हारे हर सपने को पूरा करूँगा और कुछ पैसे सोहन को देकर कहा तुम पैसे की चिंता मत करना बस अपने डांस पर ध्यान देना और ये कहकर वो हर रोज की तरह काम पर चला गया | अब प्रीतम अपने बच्चे के सपने को पूरा करने के लिए और ज्यादा मेहनत करने लगा | जब वो थक कर घर आता सोहन पूछता पिता जी  आप थक गये होगे तो प्रीतम कहता नहीं मैं नहीं तुम  थक गये  होगे  दिन भर डांस करते करते और जब सोहन सो जाता तो प्रीतम उसका पैर दबाता | खुद की शर्ट फट जाती पर वो उसे सिल कर पहन लेता पर सोहन को हमेशा अच्छे ही कपडे पहनाता | खुद एक टाइम खाना खाता पर सोहन को दोनों समय खाना खिलाता रोज कड़ी धुप में पसीना बहता, लोगों की बाते सुनता फिर भी घर में आते ही वो अपना दुख भूल सोहन से उसके दिन भर का हल पूछता |

 आज तक सोहन ने न जाने कितने ही कॉम्पिटिशन जीते और आज सोहन इंडिया के टॉप डांसर मेसे एक है |आज प्रीतम को दो जगहों पर काम करने की जरुरत नहीं |प्रीतम का छोटा बेटा भी एक सरकारी स्कूल में टीचर है और पूरा परिवार अब साथ है आज यदि प्रीतम के दोनों बेटे इस मुकाम पर  है तो वो प्रीतम के बलिदान और त्याग के कारण हैं  |अब आप सोच रहे होगें की कौनसा त्याग ? प्रीतम ने अपनी खुशियों को त्याग दिया,अपने बेटों की इक्छओं  को पूरा करने केलिए खुद की भूक प्यास भूल गया,अपने दर्द की भी परवा  नहीं की ,अपने बचों की ख़ुशी में खुद की ख़ुशी  रहा ढूडता रहा  ,पूरी उम्र उसने सिर्फ अपने बच्चों के खुशहाल  भविष्य के सपने देखता रहां | ये काम सिर्फ एक पिता ही कर सकता है |

“अपने परिवार की खुशियों के लिए अपने जीवन को भी कुर्बान करने वाले को ही, पिता कहते है” वे अपने जीवन में अपने सुखो का त्याग कर के अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करते है।

 

सीख-

हमेशा आप  अपने माता-पिता से प्यार कीजिये, क्यों की हमारी ख़ुशी के लिए वे कई चीजों का त्याग करते है। जिसका हमें पता भी नहीं होता है, बहुत से समय हम जीवन में अपने आप को बड़ा बनाने में व्यस्त होते है और जिन्होंने हमें बड़ा किया उन्हें ही भूल जाते है, चाहे हम कितने की व्यस्त क्यू ना हो, अपना थोडा समय भी उनके साथ बिताये और उन्हें ये बताये के आप भी उनसे उतना ही प्यार करते है जितना वे आपसे करते थे। उन्हें आपके जीवन में उनका महत्व बताइए, उनकी सेवा कीजिये और उन्हें कभी दुःख मत दीजिये।

एक बात और की हम अपने बड़ो के साथ जैसा करेंगे , हमारे छोटे भी वैसा ही हमारे साथ करेंगे | हम यदि उनकी सेवा कर रहे है उनको समझ रहे है उनकी ख़ुशी में यदि हमें ख़ुशी मिल रही है तो यकीं करें दोस्तों आप अपने ही भविष्य को अच्छा  बना रहे हो | क्यूँ की हम यदि अपने माता पिता के साथ गलत करेंगें तो हमारे बच्चे भी वैसा ही सीखेंगें | इस लिए हमे हमेशा कोशिश करनी चाहिए की हम अपनी इक्छाओ को उनपर थोपे ना बल्कि ज्यादा अच्छा  हो की हम खुद को उनके अनुसार बदल ले |

दोस्तों मेरे इस प्रोग्राम का मकसद आप में छुपी अच्छाइयों को बहार लाना है जो हम रोज की व्यस्त ज़िन्दगी में कही भूल जातें है हर इन्सान में कुछ न कुछ अच्छाइयान जरुर होती है | बस उसी अच्छाइयों को खुद आप पहचान सको यहीं इस प्रोग्राम का मकसद है | आप को यदि मेरी कहानियां अच्छी लगती है तो आप इसे शेयर करें |यदि आप के पास भी कोई आप की लिखी कहानियां है जो आप चाहते हो की हम उन कहानियों को भी इसमें शामिल करें तो आप मुझे bbn24newsupdate@gmail.com या हमारी वेब साइड www.bbn24news.com पर  पोस्ट कर सकते है आप के नाम के साथ उन कहानीयों को हम जरुर शेयर करेंगें |

वर्षा बी गलपांडे

एक भारत श्रेष्ठ भारत का संदेश देते महाराष्ट्र के डॉ रामाचंद्र

रायपुर रामाचंद्र रमेश पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं और उन्होंने महाराष्ट्र के सिन्धदुर्गा जिले से साईकल में सवार होकर पश्चिम से पूर्व तक " स्वच्छ भारत सुंदर भारत - एक भारत श्रेष्ठ भारत " का संदेश देने विगत 5 जनवरी 2018 से निकले हैं जो ओडिशा के कोनार्क हेतु जा रहे हैं। डॉ रामाचंद्र ने बताया कि मैं गोवा बॉर्डर के पास स्थित महाराष्ट्र के सिन्धदुर्गा से साईकल से निकला हुँ यह संदेश देने के लिए की हमारा भारत श्रेष्ठ भारत है तथा इसे स्वच्छ और सुंदर बनाएं। इन्होंने जितने भी शहर, जिला, गाँव, कसबे से होकर गुजरे वहाँ उन्होंने स्कूली विद्यार्थियों, कॉलेज के विद्यार्थियों एवं जनमानस से मिलकर यह संदेश दिया और वे ओडिशा के कोनार्क में अपना यात्रा समाप्त करेंगे।

प्रधानमंत्री आवास योजना उर्मिला और पुनबाई को मिला पक्का आशियाना उर्मिला बाई ने कहा, सरकार ने पूरा किया पक्के मकान का सपना

जांजगीर-चांपा, :- विकासखण्ड बलौदा के ग्राम जर्वें (च) की निवासी 60 वर्षीय श्रीमती उर्मिला विश्वकर्मा का पक्के मकान का सपना पूरा हो गया है। वह अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित पक्के आशियाने में अपने पूरे परिवार के साथ खुशी-खुशी रहती हैं। श्रीमती उर्मिला का कहना है कि सरकार ही है जिसने उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बना दिया, नहीं तो उनके लिए इतने सुंदर पक्के मकान का सपना देखना भी मुमकिन नहीं था। श्रीमती उर्मिला ने बताया कि कभी ऐसा भी समय था, जब भोजन के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। मिट्टी का कच्चा झोपड़ी था। मिट्टी के घर की कितनी भी अच्छी छवाई हो, बारिश में टपकता ही था। वे बड़े मुश्किलों वाले दिन थे, पर प्रधानमंत्री आवास ने इस तरह की सभी दिक्कतों से छुटकारा दिला दिया है। श्रीमती उर्मिला ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलना हमारी खुश किस्मती है। अब पक्के मकान में रहते हैं और बेटे की कमाई से अच्छा भोजन करते हैं। वे अपनी बहू श्रीमती सुनीता विश्वकर्मा, बेटे श्री कृष्णकुमार विश्वकर्मा और अपनी तीन पोतियों के साथ प्रधानमंत्री आवास में रहती हैं। श्री कृष्णकुमार विश्वकर्मा कहते हैं कि पूरी जिन्दगी में ऐसा मकान नहीं बना सकते थे, और तो और वे भी ऐसे मकान का सपना तक नहीं देख सकते थे, लेकिन सरकार ने उनकी इच्छा पूरी कर दी। श्रीमती उर्मिला ने बताया कि वर्ष 2016-17 के अंतर्गत स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना में उन्हें पहली और दूसरी किश्त में 48-48 हजार रूपये तथा तीसरी किश्त 24 हजार रूपये मिल चुके हैं। उनका घर जुलाई 2017 में रहने के लिए तैयार हो गया था। घर में शौचालय भी बना है, उसका प्रोत्साहन राशि भी शासन द्वारा दिया जाएगा। श्रीमती उर्मिला के घर से लगा हुआ ही श्रीमती पुन बाई का प्रधानमंत्री आवास बना हुआ है। पुन बाई के पति का स्वर्गवास हो चुका है, वे अकेले रहती हैं। पुनबाई ने बताया कि वे अकेली हैं इसलिए सरपंच ने योजना के तहत मकान बनाने में उनकी पूरी मदद की है।

राजनादगांव :, मुख्यमंत्री ने आज श्रमिकों के साथ भोजन कर पंडित दीनदयाल अन्न सहायता योजना का किया शुभारंभ केवल 5 रुपए में मजदूरों को मिलेगा भरपूर भोजन

 मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने आज राजनांदगांव नगर के जयस्तम्भ चौक में श्रमिकों को 5 रूपए में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने वाली पंडित दीनदयाल अन्न सहायता योजना का शुभारंभ श्रमिकों के साथ भोजन कर किया और कहा की  , भोजन पौष्टिक और हाईजिनिक, श्रमिकों को बेहद कम मूल्य में अच्छा गुणवत्तापूर्वक भोजन देना योजना का लक्ष्य है  मुख्यमंत्री ने श्रमिकों से भोजन पर चर्चा करते हुए कहा कि दिन में आपको बहुत जल्दी काम पर निकलना पड़ता है और कई बार पति-पत्नी दोनों मजदूरी पर निकल जाते हैं। ऐसे में भोजन के लिए सुबह से ही जुटना पड़ता है। इस समस्या से मजदूर भाइयों को कैसे मुक्ति मिले, इसके समाधान के लिए यह योजना लाई गई। अब सुबह 8 बजे आते ही आपको गर्मागर्म खाना मिल जाएगा और टिफिन के लिए भी आप खाना पैक करा पाएंगे। पांच रूपए में खाने की यह सुविधा गुणवत्तापूर्ण होगी इसका पूरा ध्यान रखा गया है। कन्हारपुरी से आये श्रमिक श्री खगेश्वर साहू ने इस योजना के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जितनी सुबह हम आ जाते हैं। उतने जल्दी हमें काम मिल जाता है और मजदूरी भी घंटे के हिसाब से कुछ बढ़ जाती है। अब यहां खाना मिल जाएगा तो हमें बड़ी राहत मिलेगी।
    इस मौके पर लोकसभा सांसद श अभिषेक सिंह ने स्वयं अपने हाथों से खाना श्रमिकों को परोसा। उन्होंने कहा कि इतना गर्म, पौष्टिक खाना इतने कम मूल्य में उपलब्ध होने से श्रमिक भाइयों के लिए बहुत अच्छा रहेगा। इसके साथ ही वे टिफिन के लिए भी भोजन 5 रूपए में ले सकते हैं। इस योजना के संबंध में जानकारी देते हुए श्रम विभाग की विशेष सचिव  आर. शंगीता ने बताया कि इसके लिए जिम्मेदारी अक्षयपात्र फाउंडेशन के सहयोगी संस्थान टचस्टोन फाउंडेशन को दी गई है। अक्षयपात्र फाउंडेशन सेवा भावना के साथ गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों में उपलब्ध कराता है। संस्थान के प्रमुख  व्योमकाश ने बताया कि गुणवत्तापूर्वक भोजन के लिए हमारे बेस किचन चलाये जाते हैं। यहां हाईजिन के हर मानदंड का पालन किया जाता है। खाना ऐसे स्टेनलेस स्टील पात्रों में रखा जाता है जिनमें 4 घंटे खाना पूरी तरह गर्म रहता है।

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल किया एप्प,लांच 7 दिन में होगा समस्या का निदान

रायपुर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपायी के जन्मदिन के अवसर पर कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अपना मोबाइल एप्प लॉंच किया है. इस एप्प के जरिए सीधे मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से आप जुड़ सकते हैं और अपनी समस्याओं व शिकायतों को भेज कर उनका समाधान प्राप्त कर सकते हैं. एप्प में उनके सभी विभागों को जोड़ा गया है. इसमें कृषि, जल संसाधन. पशुपालन, धर्मस्थ और मतस्य विभागों को शामिल किया गया है.

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग जिन्हें इन विभागों से जुड़ी हुई समस्या हैं वे अपनी समस्या को इस एप्प में भेज सकते हैं. एप्प में भेजी गई समस्याओं का निदान 15 दिन के भीतर किया जाएगा. उनकी समस्याओं के समाधान के लिए बकायदा एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है. इसके अलावा रायपुर दक्षिण विधानसभा में रहने वाले लोग भी अपनी सभी समस्याओं को भेज सकेंगे. निगम से जुड़ी हुई समस्याओं का निदान 7 दिन के भीतर किए जाने की बात कही जा रही है.

जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने की राष्ट्रगान के साथ कामकाज की शुरूआत, शुरू की गई नेकी की दीवार

प्रकाश शर्मा

जांजगीर-चांपा :-जिला अस्पताल में अब कामकाज की शुरूआत राष्ट्रगान के साथ होती है। सुबह 9.30 बजे अस्पताल के सभी डॉक्टर, नर्स, वार्ड ब्वॉय सहित अधिकारी-कर्मचारी ओपीडी में उपस्थित होते है। अच्छी बात ये है कि कर्मचारी देश भक्ति के साथ अस्पताल की छवि सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। अपनी इस अच्छी पहल को और अगे बढ़ाते हुए हॉस्पिटल स्टाफ ने ओपीडी में नेकी की दीवार बनाई गई है। जहां से बेसहारों को मदद मिलेगी। नेकी की दीवार मे घर में पुराने पहनने, ओढ़ने, बिछाने के कपड़े हैं जिसका आप प्रयोग नहीं कर रहे हैं और वह जरूरतमंदों के काम आ जाए उसे नेकी की दीवार में टांग सकते हैं। इससे जरूरतमंद लोग जरूरत के कपड़े ले जा सकेंगे। सीएस डॉ. जैन ने बताया कि कुछ दिन पहले इंटरनेट देख रहे थे। उन्होंने देखा कि मप्र के बैतुल में नेकी की दीवार का उल्लेख था। इसे देखने के बाद उन्होंने जिला अस्पताल में भी मुहिम शुरू करने की सोची। स्टॉफ से चर्चा के बाद बुधवार को इस नेकी की दीवार की शुरुआत की गई। कपड़े टांगने के लिए यहां खूंटियां लगाई गई हैं। डॉ. जैन ने कहा कि नेकी की यह दीवार उन लोगों के लिए जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं। बहरहाल अव्यवास्थाओं के लिए चर्चा मे रहने वाले जिला हॉस्पिटल मे अब नेकी के जरिये ही सही पर स्टाफ अब छवी सुधारने मे जुटा है।

शिक्षाकर्मियो के हड़ताल से शिक्षा जगत में हड़कंप

भूपेंद्र गवेल

जांजगीर चाम्पा /मालखरौदा:-शिक्षाकर्मी पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के शिक्षाकर्मीयों के हड़ताल के चलते क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है । संविलयन के मांग को लेकर पिछले 6 दिनों तक चल रहे अनिश्चित कालीन हड़ताल के चलते बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ सा हो गया है । अभी स्कूलों में छमाही परीक्षा और आगामी दो महीने बाद बोर्ड परीक्षाएं प्रारम्भ होगी । इस बीच शिक्षाकर्मियों की हड़ताल से बच्चो के साथ सौतेला सा व्यवहार करते नजर आ रहा है । BBN24 की टीम ने मालखरौदा क्षेत्र के कुछ स्कूलों में जाकर शिक्षकों की अनुपस्थिति में बच्चों से पूछा गया की इन 6 दिनों में शिक्षकों के स्कूलों में उपस्थित नही होने से कई तरह की परेशानी हो रही है । जहाँ पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित है वही कई स्कूलों में मध्यान्ह भोजन भी नहीं बन रहा । जिससे बच्चे भूखे घर जाने में मजबूर हैं । शिक्षाकर्मियों की हड़ताल मालखरौदा ब्लॉक के जनपद पंचायत कार्यालय के सामने जारी है वही छ ग सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है । शिक्षाकर्मियों के बच्चे ज्यादातर निजी स्कूलों में पढ़ाई करते हैं और जो शिक्षक शासकीय स्कूलों में पढ़ाते हैं वो गरीब मजदूर किसान भविष्य के साथ खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं । शिक्षाकर्मियों की हड़ताल से मालखरौदा सहित प्रदेश भर के शासकीय स्कूलों के बच्चों का पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित है । वही शिक्षक अपने शिक्षक दिवस पर कहते नजर आते हैं कि शिक्षक दिए के समान होता है जो खुद जलकर दूसरों को रौशनी देता है । अब शिक्षाकर्मियों के हड़ताल से और उनके बोल चाल से पता चल रहा है कि अब यह कहावत सिर्फ किताबों में सिमट गई है । वहीं इधर शिक्षाकर्मियों पर सरकार के 3 दिन के भीतर शाला वापसी के आदेश का कोई असर नही हो रहा है । ब्लॉक मुख्यालय मालखरौदा में हड़ताल में बैठे शिक्षाकर्मी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चो को अधर में छोड़ अपनी मांग पूरी करवाने में मस्त हैं । भाजपा के वर्ष 2003 और 2008 क संकल्प पत्र और मंत्री अजय चंद्राकर द्वारा लिखे गए अनुशंसा पत्र का आम जनता के बीच दिखाकर समर्थन मांग रहे हैं । बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए ब्लॉक के कई गांवों के स्कूलों में गांव के ही पढ़े लिखे युवक युवतियां व जनप्रतिनिधि भी बच्चों की क्लास लेते नजर आ रहे हैं । वही पढ़ा रहे बेरोजगार शिक्षित युवाओं का कहना है अगर सरकार हमे कुछ राशि ही ऐसे पढ़ाने में ही प्रदान करती है तो प्रतिदिन पढ़ाने को भी तैयार हैं ।

बहुत से लोग नहीं जानते पेट्रोल पंप पर मिलने वाले फ्री सुविधा के बारे में

BBN24 विशेष अगर आप पेट्रोल पंप से पेट्रोल भरवाते है।तो इन सुबिधाओं के बारे में जान लीजिये क्यों बहुत सी येसी सुबिधा होती है। जो पेट्रोल पंप वाले फ्री में देते है।जैसे सभी पेट्रोल पंप पर गाड़ियों में हवा भरने की सुविधा देना अनिवार्य है।इसके लिए पेट्रोल पंप डीलर को अपने पंप पर हवा भरने वाली इलेक्ट्रोनिक मशीन और गाड़ियों में हवा भरने वाले वाले व्यक्ति को नियुक्त करना भी जरूरी है। एक बात और कि इस सर्विस के लिए पेट्रोल पंप मालिक या फिर नियुक्त व्यक्ति आपसे पैसा नहीं मांग सकते हैं। यह सुविधा निशुल्क लोगों को दी जाएगी। अगर कोई पंप इसके लिए पैसे मांगता है तो फिर उसके खिलाफ संबंधित तेल कंपनी को शिकायत की जा सकती है।होनी चाहिए फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा हर पेट्रोल पंप पर एक फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा होनी चाहिए, ताकि आम जनता जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल कर सके। इस बॉक्स में जीवनक्षक दवाएं और मरहम-पट्टी होनी चाहिए। इसके साथ ही सभी दवाइयों पर एक्सपायरी डेट भी लिखी होनी चाहिए। इस बॉक्स में दवाएं पुरानी नहीं होनी चाहिए। अगर पेट्रोल पंप आपकी मांग पर फर्स्ट एड बॉक्स देना मना कर दे तो इसकी लिखित शिकायत कर सकते हैं। पीने के लिए हो शुद्ध पानी

पेट्रोल पंप डीलर को अपने पंप पर आम लोगों की सुविधा के लिए निशुल्क पीने के पानी की सुविधा देनी होगी। इसके लिए पंप डीलर को आरओ मशीन,वॉटर कूलर और पानी का कनेक्शन खुद से लगवाना होगा। अगर किसी पंप पर पीने के पानी अगर आप रास्ते में किसी परेशानी में फंस जाएं और मोबाइल फोन की सुविधा न हो, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप किसी भी पेट्रोल पंप पर जाकर के किसी एक नंबर पर कॉल कर सकते हैं। इसके लिए पेट्रोल पंप पर तैनात कर्मचारी या फिर मैनेजर आपसे मना नहीं कर सकता है। यह सुविधा भी पेट्रोल पंप पर फ्री में मिलती है।

जाने क्यों होते है मुंह मे छाले बार बार

BBN हेल्थ टिप्स :- मुंह में छाले होना आम समस्या है। बहुत-से लोग इस वजह से परेशान रहते हैं। मुंह में छाले होने पर खाना भी मुश्किल हो जाता है और काफी दर्द महसूस होती है। अधिक मसालेदार भोजन करने या पेट खराब होने की वजह से मुंह में छाले हो जाते हैं जो कुछ दिनों में अपने-आप ही ठीक भी हो जाते हैं लेकिन कुछ लोगों के मुंह में बार-बार छाले हो जाते हैं। ऐसे में इनकी वजह जानकर छाले होने से रोका जा सकता है। आइए जानिए किस वजह से बार-बार मुंह में छाले होते हैं।

खट्टी चीजों जैसे नींबू, टमाटर, संतरा और स्ट्रॉबेरी जैसे फलों का अधिक सेवन करने से मुंह में छाले हो जाते है। इसके अलावा छाले होने पर चॉकलेट, बादाम, मूंगफली आदि खाने पर यह समस्या ओर बढ़ जाती है।

ज्यादा टूथब्रश करना और जोर लगाकर करने से भी मुंह में छाले हो जाते हैं। इसके अलावा कई लोगों को सोडियम सल्फेट टूथपेस्ट का इस्तेमाल करने से भी यह समस्या हो जाती है।

अधिक तनाव लेने से शरीर को तो नुकसान होता ही है साथ में यह मुंह के छालों का भी कारण बनता है। ऐसे में जो लोग हमेशा तनाव और चिंता में रहते हैं उनके मुंह में बार-बार छाले होते रहते हैं।

शरीर में जब विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्वों की कमी हो जाए तो भी मुंह में छाले होने लगते हैं। ऐसे में अपने आहार में इन पोषक तत्वों को शामिल करें और बार-बार होने वाले छालों से छुटकारा पाएं।

अधिक धूम्रपान करने की वजह से भी मुंह में छाले हो जाते हैं लेकिन जो लोग सिगरेट पीना छोड़ देते हैं उन्हें भी शुरूआत में इस समस्या को झेलना पड़ता है।

शरीर में हार्मोन्स बदलने पर भी यह समस्या हो जाती है। इसके अलावा महिलाओं को पीरियड्स के दौरान भी मुंह में छाले हो जाते हैं।

दिलेरी के साथ डभरा का कमान सम्हाले संकट मोचक बजरंग

हुमेश जायसवाल BBN24 विशेष

जांजगीर चाम्पा /डभरा :- यू तो डभरा में पदस्थ SDM बजरंग दुबे इन दिनों संकट मोचक रहे तो सर्वथा सत्य ही होगा क्योंकि जैसे ही पदभार ग्रहण किये उसके बाद से क्षेत्र की समस्या को दूर करने के लिए वो स्वयं जनता के पास जाकर स्वमं उनकी हालातो से रूबरू हो रहे साथ ही उस विभाग के विभागीय अमलो को तत्काल निर्देशित कर समस्य का निराकरण कर रहे है ।

बजरंग दुबे डभरा में कदम रखते ही पहली सराहनीय पहल 7 से 8 ऐसे गाँव मे नहर का पानी पहुँचाया, जहाँ पिछले 5 से 6 सालो में पानी नहीं पहुंचा था।

ग्राम पंचायत जवाली में 6 माह से पेंशन नहीं बटी थी,सीईओ जनपद पंचायत के साथ जाकर पेंशन बंटवाई, नहर के पानी को रोककर मछली मारने वाले शिक्षकों को नहीं बख्शा।क्योंकि बड़ी मेहनत की थी इरीगेशन के दो दो अधिकारियों के साथ तीन दिन लगातार भ्रमण किया। एक आश्रम के शिक्षक को जो बच्चीयों से अश्लीलता कर रहा था,उसे शिकायत मिलते ही निलंबित किया,विभागीय जाँच संस्थित की,तीन वर्ष में सुकमा में ऐसी जगह पदस्थ रहे,जहाँ समान रैंक का कोई अधिकारी पदस्थ नहीं हुआ था,और सीईओ जनपद पंचायत रहते कोंटा (सुकमा)को भारत मे मनरेगा के सर्वश्रेष्ठ क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

दरसल में बजरंग दुबे युवा SDM होने के साथ साथ दिलेर भी है जिसके कारण वो बिना भय के साथ अपना काम करते है ।

क्षेत्र में फैली असुविधाओं को व्यवस्थित करने के लिए तत्पर

डभरा SDM बजरंग दुबे को पदस्थ हुए महज दो माह ही हुए हैं लेकिन आते ही उन्होंने लगातार एक के बाद एक असुविधाओं को व्यवस्थित करने का बीड़ा उठा लिया चाहे नहरों में पानी ले जाने की बात हो या पेंशनरों की पेंशन बटवाने की या क्षेत्र में फैले घोटालों की जांच कराने क्षेत्र के ऐसे कई और अव्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने में जुटे हैं डभरा SDM

युवाओं के आइकॉन बने बजरंग

वही क्षेत्र के युवा उनकी कार्यशैली से खुश होकर उनके जैसा बनने का प्रेरणा ले रहे हैं दरसल में बजरंग दुबे बहुत ही कम उम्र में डिप्टी कलेक्टर बने हैं जिसको देख युवा में एक नया जोश आया।

चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है ....

राकेश साहू की रिपोर्ट जांजगीर-चाम्पा /मालखरौदा - गत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी मालखरौदा मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम कलमी में समलाई दाई सेवा समिति द्वारा क्वांर नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा अर्चना का कार्यक्रम रखा गया । जिसमें कार्यक्रम के आठवें दिन समिति के सदस्यों एवं माँ के भक्तों ने समलाई दाई मंदिर ग्राम कलमी से अष्टभुजी माता मंदिर अड़भार तक 11 किलोमीटर की पदयात्रा कर अपने जीवन को सफल एवं धन्य बनाया । पदयात्रा प्रातः 7 बजे समलाई दाई मंदिर परिसर से गाजे बाजे एवं माता के जय जयकारे के साथ यात्रा का शुभारम्भ किया किया । इस पदयात्रा में ग्राम सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक जनप्रतिनिधि अधिकारी कर्मचारी एवं व्यापारीगण तथा महिलाएं एवं बालभक्त बड़ी संख्या में शामिल हुए । सैकड़ो की संख्या में शामिल पदयात्रियों से सड़क का माहौल भक्तिमय होता गया । सभी श्रद्धालुओं ने अड़भार पहुँचकर माँ अष्टभाजी के दर्शन कर परिवार एवं क्षेत्र की सुख शांति समृद्धि के लिए प्रार्थना किये । विदित हो कि छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल अड़भार माँ अष्टभुजी अति प्रचीन धार्मिक स्थान है। यह तीर्थस्थल आठ हाथों वाली देवी को समर्पित है। पूरे भारत में कलकत्ता की दक्षिणमुखी काली माता और अड़भार की दक्षिणमुखी अष्टभुजी देवी के अलावा और कहीं भी देवी दक्षिणमुखी नहीं है। जगत जननी माता अष्टभुजी का मंदिर दो विशाल इमली पेड़ के नीचे बना हुआ है। मंदिर में मां अष्टभुजी की ग्रेनाइट पत्थर की आदमकद मूर्ति है। लगभग 2300 ज्योति कलश से प्रज्वलित मां के दरबार जगमगा रहा है । यहाँ आस पास की जिलों सहित दूर दूर से श्रद्धालुगण दर्शन करने पहुँच रहें हैं ।