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प्रधानमंत्री आवास योजना उर्मिला और पुनबाई को मिला पक्का आशियाना उर्मिला बाई ने कहा, सरकार ने पूरा किया पक्के मकान का सपना

जांजगीर-चांपा, :- विकासखण्ड बलौदा के ग्राम जर्वें (च) की निवासी 60 वर्षीय श्रीमती उर्मिला विश्वकर्मा का पक्के मकान का सपना पूरा हो गया है। वह अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित पक्के आशियाने में अपने पूरे परिवार के साथ खुशी-खुशी रहती हैं। श्रीमती उर्मिला का कहना है कि सरकार ही है जिसने उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बना दिया, नहीं तो उनके लिए इतने सुंदर पक्के मकान का सपना देखना भी मुमकिन नहीं था। श्रीमती उर्मिला ने बताया कि कभी ऐसा भी समय था, जब भोजन के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। मिट्टी का कच्चा झोपड़ी था। मिट्टी के घर की कितनी भी अच्छी छवाई हो, बारिश में टपकता ही था। वे बड़े मुश्किलों वाले दिन थे, पर प्रधानमंत्री आवास ने इस तरह की सभी दिक्कतों से छुटकारा दिला दिया है। श्रीमती उर्मिला ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलना हमारी खुश किस्मती है। अब पक्के मकान में रहते हैं और बेटे की कमाई से अच्छा भोजन करते हैं। वे अपनी बहू श्रीमती सुनीता विश्वकर्मा, बेटे श्री कृष्णकुमार विश्वकर्मा और अपनी तीन पोतियों के साथ प्रधानमंत्री आवास में रहती हैं। श्री कृष्णकुमार विश्वकर्मा कहते हैं कि पूरी जिन्दगी में ऐसा मकान नहीं बना सकते थे, और तो और वे भी ऐसे मकान का सपना तक नहीं देख सकते थे, लेकिन सरकार ने उनकी इच्छा पूरी कर दी। श्रीमती उर्मिला ने बताया कि वर्ष 2016-17 के अंतर्गत स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना में उन्हें पहली और दूसरी किश्त में 48-48 हजार रूपये तथा तीसरी किश्त 24 हजार रूपये मिल चुके हैं। उनका घर जुलाई 2017 में रहने के लिए तैयार हो गया था। घर में शौचालय भी बना है, उसका प्रोत्साहन राशि भी शासन द्वारा दिया जाएगा। श्रीमती उर्मिला के घर से लगा हुआ ही श्रीमती पुन बाई का प्रधानमंत्री आवास बना हुआ है। पुन बाई के पति का स्वर्गवास हो चुका है, वे अकेले रहती हैं। पुनबाई ने बताया कि वे अकेली हैं इसलिए सरपंच ने योजना के तहत मकान बनाने में उनकी पूरी मदद की है।

राजनादगांव :, मुख्यमंत्री ने आज श्रमिकों के साथ भोजन कर पंडित दीनदयाल अन्न सहायता योजना का किया शुभारंभ केवल 5 रुपए में मजदूरों को मिलेगा भरपूर भोजन

 मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने आज राजनांदगांव नगर के जयस्तम्भ चौक में श्रमिकों को 5 रूपए में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने वाली पंडित दीनदयाल अन्न सहायता योजना का शुभारंभ श्रमिकों के साथ भोजन कर किया और कहा की  , भोजन पौष्टिक और हाईजिनिक, श्रमिकों को बेहद कम मूल्य में अच्छा गुणवत्तापूर्वक भोजन देना योजना का लक्ष्य है  मुख्यमंत्री ने श्रमिकों से भोजन पर चर्चा करते हुए कहा कि दिन में आपको बहुत जल्दी काम पर निकलना पड़ता है और कई बार पति-पत्नी दोनों मजदूरी पर निकल जाते हैं। ऐसे में भोजन के लिए सुबह से ही जुटना पड़ता है। इस समस्या से मजदूर भाइयों को कैसे मुक्ति मिले, इसके समाधान के लिए यह योजना लाई गई। अब सुबह 8 बजे आते ही आपको गर्मागर्म खाना मिल जाएगा और टिफिन के लिए भी आप खाना पैक करा पाएंगे। पांच रूपए में खाने की यह सुविधा गुणवत्तापूर्ण होगी इसका पूरा ध्यान रखा गया है। कन्हारपुरी से आये श्रमिक श्री खगेश्वर साहू ने इस योजना के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जितनी सुबह हम आ जाते हैं। उतने जल्दी हमें काम मिल जाता है और मजदूरी भी घंटे के हिसाब से कुछ बढ़ जाती है। अब यहां खाना मिल जाएगा तो हमें बड़ी राहत मिलेगी।
    इस मौके पर लोकसभा सांसद श अभिषेक सिंह ने स्वयं अपने हाथों से खाना श्रमिकों को परोसा। उन्होंने कहा कि इतना गर्म, पौष्टिक खाना इतने कम मूल्य में उपलब्ध होने से श्रमिक भाइयों के लिए बहुत अच्छा रहेगा। इसके साथ ही वे टिफिन के लिए भी भोजन 5 रूपए में ले सकते हैं। इस योजना के संबंध में जानकारी देते हुए श्रम विभाग की विशेष सचिव  आर. शंगीता ने बताया कि इसके लिए जिम्मेदारी अक्षयपात्र फाउंडेशन के सहयोगी संस्थान टचस्टोन फाउंडेशन को दी गई है। अक्षयपात्र फाउंडेशन सेवा भावना के साथ गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों में उपलब्ध कराता है। संस्थान के प्रमुख  व्योमकाश ने बताया कि गुणवत्तापूर्वक भोजन के लिए हमारे बेस किचन चलाये जाते हैं। यहां हाईजिन के हर मानदंड का पालन किया जाता है। खाना ऐसे स्टेनलेस स्टील पात्रों में रखा जाता है जिनमें 4 घंटे खाना पूरी तरह गर्म रहता है।

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल किया एप्प,लांच 7 दिन में होगा समस्या का निदान

रायपुर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपायी के जन्मदिन के अवसर पर कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अपना मोबाइल एप्प लॉंच किया है. इस एप्प के जरिए सीधे मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से आप जुड़ सकते हैं और अपनी समस्याओं व शिकायतों को भेज कर उनका समाधान प्राप्त कर सकते हैं. एप्प में उनके सभी विभागों को जोड़ा गया है. इसमें कृषि, जल संसाधन. पशुपालन, धर्मस्थ और मतस्य विभागों को शामिल किया गया है.

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग जिन्हें इन विभागों से जुड़ी हुई समस्या हैं वे अपनी समस्या को इस एप्प में भेज सकते हैं. एप्प में भेजी गई समस्याओं का निदान 15 दिन के भीतर किया जाएगा. उनकी समस्याओं के समाधान के लिए बकायदा एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है. इसके अलावा रायपुर दक्षिण विधानसभा में रहने वाले लोग भी अपनी सभी समस्याओं को भेज सकेंगे. निगम से जुड़ी हुई समस्याओं का निदान 7 दिन के भीतर किए जाने की बात कही जा रही है.

जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने की राष्ट्रगान के साथ कामकाज की शुरूआत, शुरू की गई नेकी की दीवार

प्रकाश शर्मा

जांजगीर-चांपा :-जिला अस्पताल में अब कामकाज की शुरूआत राष्ट्रगान के साथ होती है। सुबह 9.30 बजे अस्पताल के सभी डॉक्टर, नर्स, वार्ड ब्वॉय सहित अधिकारी-कर्मचारी ओपीडी में उपस्थित होते है। अच्छी बात ये है कि कर्मचारी देश भक्ति के साथ अस्पताल की छवि सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। अपनी इस अच्छी पहल को और अगे बढ़ाते हुए हॉस्पिटल स्टाफ ने ओपीडी में नेकी की दीवार बनाई गई है। जहां से बेसहारों को मदद मिलेगी। नेकी की दीवार मे घर में पुराने पहनने, ओढ़ने, बिछाने के कपड़े हैं जिसका आप प्रयोग नहीं कर रहे हैं और वह जरूरतमंदों के काम आ जाए उसे नेकी की दीवार में टांग सकते हैं। इससे जरूरतमंद लोग जरूरत के कपड़े ले जा सकेंगे। सीएस डॉ. जैन ने बताया कि कुछ दिन पहले इंटरनेट देख रहे थे। उन्होंने देखा कि मप्र के बैतुल में नेकी की दीवार का उल्लेख था। इसे देखने के बाद उन्होंने जिला अस्पताल में भी मुहिम शुरू करने की सोची। स्टॉफ से चर्चा के बाद बुधवार को इस नेकी की दीवार की शुरुआत की गई। कपड़े टांगने के लिए यहां खूंटियां लगाई गई हैं। डॉ. जैन ने कहा कि नेकी की यह दीवार उन लोगों के लिए जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं। बहरहाल अव्यवास्थाओं के लिए चर्चा मे रहने वाले जिला हॉस्पिटल मे अब नेकी के जरिये ही सही पर स्टाफ अब छवी सुधारने मे जुटा है।

शिक्षाकर्मियो के हड़ताल से शिक्षा जगत में हड़कंप

भूपेंद्र गवेल

जांजगीर चाम्पा /मालखरौदा:-शिक्षाकर्मी पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के शिक्षाकर्मीयों के हड़ताल के चलते क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है । संविलयन के मांग को लेकर पिछले 6 दिनों तक चल रहे अनिश्चित कालीन हड़ताल के चलते बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ सा हो गया है । अभी स्कूलों में छमाही परीक्षा और आगामी दो महीने बाद बोर्ड परीक्षाएं प्रारम्भ होगी । इस बीच शिक्षाकर्मियों की हड़ताल से बच्चो के साथ सौतेला सा व्यवहार करते नजर आ रहा है । BBN24 की टीम ने मालखरौदा क्षेत्र के कुछ स्कूलों में जाकर शिक्षकों की अनुपस्थिति में बच्चों से पूछा गया की इन 6 दिनों में शिक्षकों के स्कूलों में उपस्थित नही होने से कई तरह की परेशानी हो रही है । जहाँ पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित है वही कई स्कूलों में मध्यान्ह भोजन भी नहीं बन रहा । जिससे बच्चे भूखे घर जाने में मजबूर हैं । शिक्षाकर्मियों की हड़ताल मालखरौदा ब्लॉक के जनपद पंचायत कार्यालय के सामने जारी है वही छ ग सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है । शिक्षाकर्मियों के बच्चे ज्यादातर निजी स्कूलों में पढ़ाई करते हैं और जो शिक्षक शासकीय स्कूलों में पढ़ाते हैं वो गरीब मजदूर किसान भविष्य के साथ खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं । शिक्षाकर्मियों की हड़ताल से मालखरौदा सहित प्रदेश भर के शासकीय स्कूलों के बच्चों का पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित है । वही शिक्षक अपने शिक्षक दिवस पर कहते नजर आते हैं कि शिक्षक दिए के समान होता है जो खुद जलकर दूसरों को रौशनी देता है । अब शिक्षाकर्मियों के हड़ताल से और उनके बोल चाल से पता चल रहा है कि अब यह कहावत सिर्फ किताबों में सिमट गई है । वहीं इधर शिक्षाकर्मियों पर सरकार के 3 दिन के भीतर शाला वापसी के आदेश का कोई असर नही हो रहा है । ब्लॉक मुख्यालय मालखरौदा में हड़ताल में बैठे शिक्षाकर्मी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चो को अधर में छोड़ अपनी मांग पूरी करवाने में मस्त हैं । भाजपा के वर्ष 2003 और 2008 क संकल्प पत्र और मंत्री अजय चंद्राकर द्वारा लिखे गए अनुशंसा पत्र का आम जनता के बीच दिखाकर समर्थन मांग रहे हैं । बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए ब्लॉक के कई गांवों के स्कूलों में गांव के ही पढ़े लिखे युवक युवतियां व जनप्रतिनिधि भी बच्चों की क्लास लेते नजर आ रहे हैं । वही पढ़ा रहे बेरोजगार शिक्षित युवाओं का कहना है अगर सरकार हमे कुछ राशि ही ऐसे पढ़ाने में ही प्रदान करती है तो प्रतिदिन पढ़ाने को भी तैयार हैं ।

बहुत से लोग नहीं जानते पेट्रोल पंप पर मिलने वाले फ्री सुविधा के बारे में

BBN24 विशेष अगर आप पेट्रोल पंप से पेट्रोल भरवाते है।तो इन सुबिधाओं के बारे में जान लीजिये क्यों बहुत सी येसी सुबिधा होती है। जो पेट्रोल पंप वाले फ्री में देते है।जैसे सभी पेट्रोल पंप पर गाड़ियों में हवा भरने की सुविधा देना अनिवार्य है।इसके लिए पेट्रोल पंप डीलर को अपने पंप पर हवा भरने वाली इलेक्ट्रोनिक मशीन और गाड़ियों में हवा भरने वाले वाले व्यक्ति को नियुक्त करना भी जरूरी है। एक बात और कि इस सर्विस के लिए पेट्रोल पंप मालिक या फिर नियुक्त व्यक्ति आपसे पैसा नहीं मांग सकते हैं। यह सुविधा निशुल्क लोगों को दी जाएगी। अगर कोई पंप इसके लिए पैसे मांगता है तो फिर उसके खिलाफ संबंधित तेल कंपनी को शिकायत की जा सकती है।होनी चाहिए फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा हर पेट्रोल पंप पर एक फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा होनी चाहिए, ताकि आम जनता जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल कर सके। इस बॉक्स में जीवनक्षक दवाएं और मरहम-पट्टी होनी चाहिए। इसके साथ ही सभी दवाइयों पर एक्सपायरी डेट भी लिखी होनी चाहिए। इस बॉक्स में दवाएं पुरानी नहीं होनी चाहिए। अगर पेट्रोल पंप आपकी मांग पर फर्स्ट एड बॉक्स देना मना कर दे तो इसकी लिखित शिकायत कर सकते हैं। पीने के लिए हो शुद्ध पानी

पेट्रोल पंप डीलर को अपने पंप पर आम लोगों की सुविधा के लिए निशुल्क पीने के पानी की सुविधा देनी होगी। इसके लिए पंप डीलर को आरओ मशीन,वॉटर कूलर और पानी का कनेक्शन खुद से लगवाना होगा। अगर किसी पंप पर पीने के पानी अगर आप रास्ते में किसी परेशानी में फंस जाएं और मोबाइल फोन की सुविधा न हो, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप किसी भी पेट्रोल पंप पर जाकर के किसी एक नंबर पर कॉल कर सकते हैं। इसके लिए पेट्रोल पंप पर तैनात कर्मचारी या फिर मैनेजर आपसे मना नहीं कर सकता है। यह सुविधा भी पेट्रोल पंप पर फ्री में मिलती है।

जाने क्यों होते है मुंह मे छाले बार बार

BBN हेल्थ टिप्स :- मुंह में छाले होना आम समस्या है। बहुत-से लोग इस वजह से परेशान रहते हैं। मुंह में छाले होने पर खाना भी मुश्किल हो जाता है और काफी दर्द महसूस होती है। अधिक मसालेदार भोजन करने या पेट खराब होने की वजह से मुंह में छाले हो जाते हैं जो कुछ दिनों में अपने-आप ही ठीक भी हो जाते हैं लेकिन कुछ लोगों के मुंह में बार-बार छाले हो जाते हैं। ऐसे में इनकी वजह जानकर छाले होने से रोका जा सकता है। आइए जानिए किस वजह से बार-बार मुंह में छाले होते हैं।

खट्टी चीजों जैसे नींबू, टमाटर, संतरा और स्ट्रॉबेरी जैसे फलों का अधिक सेवन करने से मुंह में छाले हो जाते है। इसके अलावा छाले होने पर चॉकलेट, बादाम, मूंगफली आदि खाने पर यह समस्या ओर बढ़ जाती है।

ज्यादा टूथब्रश करना और जोर लगाकर करने से भी मुंह में छाले हो जाते हैं। इसके अलावा कई लोगों को सोडियम सल्फेट टूथपेस्ट का इस्तेमाल करने से भी यह समस्या हो जाती है।

अधिक तनाव लेने से शरीर को तो नुकसान होता ही है साथ में यह मुंह के छालों का भी कारण बनता है। ऐसे में जो लोग हमेशा तनाव और चिंता में रहते हैं उनके मुंह में बार-बार छाले होते रहते हैं।

शरीर में जब विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्वों की कमी हो जाए तो भी मुंह में छाले होने लगते हैं। ऐसे में अपने आहार में इन पोषक तत्वों को शामिल करें और बार-बार होने वाले छालों से छुटकारा पाएं।

अधिक धूम्रपान करने की वजह से भी मुंह में छाले हो जाते हैं लेकिन जो लोग सिगरेट पीना छोड़ देते हैं उन्हें भी शुरूआत में इस समस्या को झेलना पड़ता है।

शरीर में हार्मोन्स बदलने पर भी यह समस्या हो जाती है। इसके अलावा महिलाओं को पीरियड्स के दौरान भी मुंह में छाले हो जाते हैं।

दिलेरी के साथ डभरा का कमान सम्हाले संकट मोचक बजरंग

हुमेश जायसवाल BBN24 विशेष

जांजगीर चाम्पा /डभरा :- यू तो डभरा में पदस्थ SDM बजरंग दुबे इन दिनों संकट मोचक रहे तो सर्वथा सत्य ही होगा क्योंकि जैसे ही पदभार ग्रहण किये उसके बाद से क्षेत्र की समस्या को दूर करने के लिए वो स्वयं जनता के पास जाकर स्वमं उनकी हालातो से रूबरू हो रहे साथ ही उस विभाग के विभागीय अमलो को तत्काल निर्देशित कर समस्य का निराकरण कर रहे है ।

बजरंग दुबे डभरा में कदम रखते ही पहली सराहनीय पहल 7 से 8 ऐसे गाँव मे नहर का पानी पहुँचाया, जहाँ पिछले 5 से 6 सालो में पानी नहीं पहुंचा था।

ग्राम पंचायत जवाली में 6 माह से पेंशन नहीं बटी थी,सीईओ जनपद पंचायत के साथ जाकर पेंशन बंटवाई, नहर के पानी को रोककर मछली मारने वाले शिक्षकों को नहीं बख्शा।क्योंकि बड़ी मेहनत की थी इरीगेशन के दो दो अधिकारियों के साथ तीन दिन लगातार भ्रमण किया। एक आश्रम के शिक्षक को जो बच्चीयों से अश्लीलता कर रहा था,उसे शिकायत मिलते ही निलंबित किया,विभागीय जाँच संस्थित की,तीन वर्ष में सुकमा में ऐसी जगह पदस्थ रहे,जहाँ समान रैंक का कोई अधिकारी पदस्थ नहीं हुआ था,और सीईओ जनपद पंचायत रहते कोंटा (सुकमा)को भारत मे मनरेगा के सर्वश्रेष्ठ क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

दरसल में बजरंग दुबे युवा SDM होने के साथ साथ दिलेर भी है जिसके कारण वो बिना भय के साथ अपना काम करते है ।

क्षेत्र में फैली असुविधाओं को व्यवस्थित करने के लिए तत्पर

डभरा SDM बजरंग दुबे को पदस्थ हुए महज दो माह ही हुए हैं लेकिन आते ही उन्होंने लगातार एक के बाद एक असुविधाओं को व्यवस्थित करने का बीड़ा उठा लिया चाहे नहरों में पानी ले जाने की बात हो या पेंशनरों की पेंशन बटवाने की या क्षेत्र में फैले घोटालों की जांच कराने क्षेत्र के ऐसे कई और अव्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने में जुटे हैं डभरा SDM

युवाओं के आइकॉन बने बजरंग

वही क्षेत्र के युवा उनकी कार्यशैली से खुश होकर उनके जैसा बनने का प्रेरणा ले रहे हैं दरसल में बजरंग दुबे बहुत ही कम उम्र में डिप्टी कलेक्टर बने हैं जिसको देख युवा में एक नया जोश आया।

चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है ....

राकेश साहू की रिपोर्ट जांजगीर-चाम्पा /मालखरौदा - गत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी मालखरौदा मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम कलमी में समलाई दाई सेवा समिति द्वारा क्वांर नवरात्रि में माँ दुर्गा की पूजा अर्चना का कार्यक्रम रखा गया । जिसमें कार्यक्रम के आठवें दिन समिति के सदस्यों एवं माँ के भक्तों ने समलाई दाई मंदिर ग्राम कलमी से अष्टभुजी माता मंदिर अड़भार तक 11 किलोमीटर की पदयात्रा कर अपने जीवन को सफल एवं धन्य बनाया । पदयात्रा प्रातः 7 बजे समलाई दाई मंदिर परिसर से गाजे बाजे एवं माता के जय जयकारे के साथ यात्रा का शुभारम्भ किया किया । इस पदयात्रा में ग्राम सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक जनप्रतिनिधि अधिकारी कर्मचारी एवं व्यापारीगण तथा महिलाएं एवं बालभक्त बड़ी संख्या में शामिल हुए । सैकड़ो की संख्या में शामिल पदयात्रियों से सड़क का माहौल भक्तिमय होता गया । सभी श्रद्धालुओं ने अड़भार पहुँचकर माँ अष्टभाजी के दर्शन कर परिवार एवं क्षेत्र की सुख शांति समृद्धि के लिए प्रार्थना किये । विदित हो कि छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल अड़भार माँ अष्टभुजी अति प्रचीन धार्मिक स्थान है। यह तीर्थस्थल आठ हाथों वाली देवी को समर्पित है। पूरे भारत में कलकत्ता की दक्षिणमुखी काली माता और अड़भार की दक्षिणमुखी अष्टभुजी देवी के अलावा और कहीं भी देवी दक्षिणमुखी नहीं है। जगत जननी माता अष्टभुजी का मंदिर दो विशाल इमली पेड़ के नीचे बना हुआ है। मंदिर में मां अष्टभुजी की ग्रेनाइट पत्थर की आदमकद मूर्ति है। लगभग 2300 ज्योति कलश से प्रज्वलित मां के दरबार जगमगा रहा है । यहाँ आस पास की जिलों सहित दूर दूर से श्रद्धालुगण दर्शन करने पहुँच रहें हैं ।

सन्1920 से प्रारंभ रामलीला रचेगी इतिहास 10 दिनों की रामलीला पुर्ण करेगी अपना 98वें साल

 आज के इस भाग दौड भरी जिन्दागी में जहां रामलीला का मंचन विलुप्ति के कगार पर है वही भाटापारा की श्री आदर्ष रामलीला नाटक मंडली इतिहास रचने की ओर है सन् 1920 से चली आ रही यह रामलीला पुरे छत्तीसगढ़ राज्य की एैसी रामलीला संस्था है जो इतिहास सुनहरे अक्षरो में दर्ज करते हुए अपने 98 वर्ष को पुरा करेगी, इस संस्था के कलाकार नगर के नन्हे मुन्हे बच्चे रहते है।सन्1920 से प्रारंभ रामलीला संस्था रचेगी इतिहास* *22सितंबर से प्रारंभ 10 दिनों की रामलीला पुर्ण करेगी अपना 98वें साल* भाटापारा-भाटापारा की श्री आदर्श रामलीला नाटक मंडली इतिहास रचने की ओर है सन्1920 से प्रारंभ यह रामलीला पुरे छत्तीसगढ़ राज्य की ऐसी रामलीला संस्था है जो इतिहास के सुनहरे अक्षरो में दर्ज करते हुए अपने 98वें वर्ष को पुरा करेगी, इस संस्था के कलाकार नगर के नन्हे मुन्हे बच्चे रहते है। नवरात में नौ दिन लगातार लीलाओ का मंचन किया जाता है।इस रामलीला में अद्भत तरिके से राम चरित मानस, बाल्मिकी रामायण,रामचरित्र दर्पण,राधेश्याम रामायण,वसुनायक रामायण,आर्य संगीत रामायण,हिन्दी अनुवाद रामायण एवं अनेक साहित्यो का समावेष किया है।नवमी के दिन भव्य अहिरावणवध , देवी लीला दिखाई जाती है जिसे अवलोकन करने लगभग 10हजार की भीड़ रामलीला में उमड़ती है,एवं भाटापारा के रावणभाटा में दशहरा के दिन रावण वध की लीला खेली जाती है। दशहरा मेला मे हजारो की संख्या मे लोग रावण मारने की लीला एवं दशहरा उत्सव मनाने पहुंचते है। बेहतरिन साजसज्जा,अस्त्र,षस्त्र एवं वस्त्र तथा लगभग साढ़े तीन-तीन किलो के चांदी के मुकूट राम,लक्ष्मण,भरत,शत्रुहन,सीता,हनुमान बनने वाले पात्रो के लिए मंडली में दान स्वरूप मौजुद है।तथा बरसात के रूकावट से बचने के लिए लगभग हजारो के वाटरप्रुफ पंडाल रामलीला मैदान में लगाया गया है।। 

  भाटापारा की यह रामलीला संस्था जो अंग्रेजो के समय के लोगो में धर्म का प्रचार कर रही है इसमें छत्तीसगढ के सुपर स्टार अनुज शर्मा,भाटापारा के वर्तमान भाजपा के विधायक षिवरतन शर्मा एवं जिला पंचायत सभापति अष्वनि शर्मा अपने कलाकारी के जौहर दिखा चुके है। वर्तमान में रामलीला में छठवी पीढी के कलाकारो के द्वारा मंचन किया जा रहा है।पेंट साजा सज्जा मे शिव गुप्ता एवं राजकुमार गुप्ता रहेंगे। इस संस्था से जुड़े कलाकार राजिम कुंभ महोत्सव में भी अपनी कला का लोहा मनवा चुके है।इसके पूर्व मंगल प्रसाद एवं मुरारीलाल शर्मा ने अपने जीवन का आधे से ज्यादा समय भाटापारा की रामलीला को दिया है,रामलीला में जो विधा और संगीत में स्वरों का उपयोग किया जाता है ये मुरारीलाल शर्मा जी की देन है जिससे छोटे छोटे कलाकार स्वरों का ज्ञान पाते है। 22सितंबर से आरंभ होगी लीला नवरात्रि प्रारंभ के दुसरे दिन 22सिंतबर 2017 को गणेष पुजन एवं मुकूट पुजन के साथ रामलीला प्रारम्भ हुई।एवं 23 सितंबर को नारद मोह और मुनि आगमन की मार्मिक लीला का मंचन हुआ एवं 24 सितम्बर को धनुष यज्ञ एवं रामसीता की जयमाला की लीला दिखाई गई वही आज 25 सितम्बर को परसुराम-लक्ष्मण संवाद,केवट प्रसंग,सीताहरण जटायु मरण की लीला दिखाई जाएगी। व्यासगद्दी में संस्था के अध्यक्ष प्रकाश शर्मा,धन्जी जोशी,हेमंतमल,रामजी जोशी आदि रहेंगे। रामलीला की सभी गतिविधियो की व्यवस्था एवं अर्थव्यवस्था संभालने वाले मोनु मल,सुर्यकांत शुक्ला एवं मंच व्यवस्था पुर्णेंदु त्रिवेदी,नासिर बांठिया और लाला शर्मा। वर्तमान कलाकारो में बलराम जोषी,कोमल शर्मा,जगदीश वैष्णव,आयुष तिवारी,मिलिंद जोशी,अक्षत जोशी ,दिब्यांश जोशी,मनोज(पिंटी)गुप्ता,यश अग्रवाल,गुणवंत अवस्थी,प्रांजल शर्मा,हर्ष गुप्ता,अभि शर्मा,आदित्य जोशी कृष्णा अग्रवाल,हर्ष दधिच,छोटा दधिच,आयअंकित अग्रवाल,तुषार जायसवाल,कृष्णा मल,श्याम मल,मिलिंद जोशी,श्रेयांश शर्मा,हरिराम मिस्त्री,एवं नगर कई वरिष्ठ कलाकार एवं बालक कलाकारो द्वारा मंचन कर धार्मिक शिक्षाओ का प्रचार करेगें।

इस संस्था में जुड़े लोग निःशुल्क एवं निस्वार्थ भावना से भगवान की सेवा करते है। इस साल का मुख्य आकर्षण एक छोटे से बालक द्वारा तबलावादन और एक 4थी कक्षा के 9 साल के बच्चे के द्वारा लक्ष्मण जैसा महत्वपुर्ण किरदार को निभाना रहेगा। *मंडली के 98वें वर्ष तक पहुंचाने में जो नींव के पत्थर साबित हुए भाटापारा-इस रामलीला का संगीत सबसे मजबुत पक्ष है।बच्चो की तैयार रामलीला खत्म होने के बाद से फिर से शुरू हो जाती है साथ ही तैयार करने वाले अपने दैनिक कामो से अपना समय निकाल कर राम लीला को देते है साथ ही बच्चे अपनी पढ़ाई साथ साथ रामलीला मंचन में ध्यान देते है। वर्जन-जगदीश वैष्णव,अभिनय टिचर-यहां की रामलीला का इतिहास अंग्रेजो के समय का है यह रामलीला एक पाठषाला है यहां भगवान के द्वारा दिये गए शिक्षाओ को बच्चे पढ़ते,सीखते,एवं अपने चरित्र में उतारते है।बच्चे अपने धर्म के बारे में अच्छे से जानते है। इस रामलीला में हिन्दु मुस्लिम सिख इसाई सभी धर्म के लोग सहयोग करते है।

नवरात्र विशेष माँ का दरबार अष्टभुजी अड़भार

राकेश साहू की रिपोर्ट जांजगीर चाम्पा/मालखरौदा:अड़भार की मां अष्टभुजी आठ भुजाओं वाली है, ये बात तो अधिकांश लोग जानते हैं लेकिन देवी के दक्षिणमुखी होने की जानकारी कम लोगों को ही है। जांजगीर चांपा जिले में मुंबई हावड़ा रेल मार्ग पर सक्ती स्टेशन से दक्षिण पूर्व की ओर 11 किमी की दूरी पर स्थित अड़भार अष्टभुजी माता के मंदिर के नाम पर प्रसिद्ध है। लगभग 10 साल पहले यह गांव नगर पंचायत का दर्जा पाकर अब विकास की ओर अग्रसर है। यहां नवरात्र पर मां अष्टभुजी के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगता है। इस बार भी नवरात्रि में जिले के अलावा रायगढ़, बिलासपुर और कोरबा जिले के भक्त पहुंच रहे हैं। मंदिर में मां अष्टभुजी की ग्रेनाइट पत्थर की आदमकद मूर्ति है। आठ भुजाओं वाली मां दक्षिणमुखी भी है। पूरे भारत में कलकत्ता की दक्षिणमुखी काली माता और अड़भार की दक्षिणमुखी अष्टभुजी देवी के अलावा और कहीं की भी देवी दक्षिणमुखी नहीं है। जगत जननी माता अष्टभुजी का मंदिर दो विशाल इमली पेड़ के नीचे बना हुआ है। आदमकद वाले काले ग्रेनाइड की दक्षिणमुखी मूर्ति के ठीक दाहिनी ओर डेढ़ फीट की दूरी में देगुन गुरू की प्रतिमा योग मुद्रा में बैठी हुई प्रतीत होती है। मंदिर परिसर में पड़े बेतरतीब पत्थर की बारिक नक्काशी देखकर हर आदमी सोचने पर मजबूर हो जाता है। प्राचीन इतिहास में अड़भार का उल्लेख अष्ट द्वार के नाम से मिलता है। अष्टभुजी माता का मंदिर और इस नगर के चारों ओर बने आठ विशाल दरवाजों की वजह से शायद इसका प्राचीन नाम अष्टद्वार रहा और धीरे धीरे अपभ्रंश होकर इसका नाम अड़भार हो गया। लगभग 5 किमी. की परिधि में बसा यह नगर कुछ मायने में अपने आप में अजीब है। यहां हर 100 से 200 मीटर में किसी न किसी देवी देवता की मूर्तियां सही सलामत न सही लेकिन खंडित स्थिति में जरूर मिल जाएंगी। आज भी यहां के लोगों को घरो की नींव खोदते समय प्राचीन टूटी फूटी मूर्तिया या पुराने समय के सोने चांदी के सिक्के प्राचीन धातु के कुछ न कुछ सामान अवश्य प्राप्त होते हैं। छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल अड़भार अष्टभुजी एक अति प्रचीन धार्मिक स्थान है। यह तीर्थस्थल आठ हाथों वाली एक देवी को समर्पित है। मंदिर का ज्योति कलश नवरात्रि के दौरान जला रहता है, जिससे इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। वही लगभग 2300 ज्योति कलश प्रज्वलित होने पर मां का दरबार जगमगा रहा है जहां नवरात्र में हजारों श्रद्धालुओं की संख्या में श्रद्धालु मां का दरबार पहुंच रहे हैं।

एक नजरिया में खोज से बदलती दुनिया

खोज की मायावी दुनिया  में जब हमें आज कुछ भी सामान खरीदना है, बच्चो के एग्जाम का परिणाम देखना है की वो पास हुए या फेल तो हम क्या करते है ? अच्छा ये बताओ की हमे कुछ नेट पर कुछ फिल्म देखनी है या फिर यूट्यूब पर गाना सुनना है तो हम क्या करते है ? अच्छा अभी भी समझ ना आ रहा हो की मै क्या कहना चाह रही हूँ और क्या बताना चाह रही हूँ तो बता ही देती हूँ मै खोज यानि सर्च के बारे में बात कर रही हूँ |

आज हमारी ज़िन्दगी पहले से कितनी अलग है पहले कुछ खरीदना है या कहीं जाना है तो उसका दायरा सिमित हुआ करता था और आज हमारा दायरा कितना बड़ा हो गया है | आज हम चाँद पर पहुच गये, कितनी मिसाइलें हमने बना ली कई जान लेवा बिमारियों पर हमने काबू पा लिया है | कभी सोचा है ये सब कैसे संभव हुआ होगा ये सब हुआ है खोज यानि सर्च करने से |

आज हम हर चीज के लिए सर्च करते है हमारी जिन्दगी मानो इसी के आगे पीछे घुमती रहती है | हमे 
कहीं घुमने जाना है तो भी गूगल में जाके सर्च करेंगें जिस जगह भी जाना है उसके बारे में खोजना की जगह कैसी है, कितने दिन लगेंगें, कैसे जायें आदि | गूगल में भी कुछ खोजना हो तो उसमे भी सर्च औपशन होता है |

आदि काल से अब तक जो भी हुआ और जो हो रहा है वो एक खोज का ही परिणाम है | आज हमें कपडे लेने है या कुछ खाने का सामान मंगवाना हो या कुछ भी खरीदना हो बस मोबाइल में सर्च किया और मंगवा लिया | आज जिंदगी कितनी आसन हो गई है | पहले घर में किसी की शादी करनी हो तो रिश्देदारों और जान पहचान के लोगों का सहारा लिया जाता था की वो रिश्तें लायें अब इसका बिलकुल उल्टा हो गया है अब तो लैबटॉप खोला ऐप ओपन किया और लड़का और लड़की की प्रोफाइल ओपन की जो भी प्रोफाइल पसंद आई तो नम्बर सर्च किया मिलने का टाइम सेट किया मिले सब ठीक रहा तो हो गई शादी |

आज यदि मुझे भी कुछ लिखना है तो मै भी पहले उस टॉपिक के बारे में थोडा सर्च करती हूँ फिर कुछ लिखती हूँ | आज हम जो मोबाइल इस्तेमाल करते हैं वो भी किसी ने खोज की तभी तो हम साधारण फ़ोन से बात करते करते आज स्मार्ट फ़ोन उपयोग कर रहे है | आज हर क्षेत्र में सर्च की जरुरत पड़ती है चाहे वो अध्यन का क्षेत्र हो या चिकित्सा का या फिर पत्रकारिता का क्षेत्र हो या शोध का  क्षेत्र हम हर जगह सर्च ही करते है |

आज हर जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध है जहाँ पर कुछ भी जानकारी आसानी से मिल जाती है | पर पुराने ज़माने में नेट नहीं था फिर भी खोज करने का काम होता था | तरीका अलग था पहले विदेशो में नई- नई जगह ढूढने के लिए खोजी नियुक्त किये जाते थे जो समुद्री जहाज की सहायता से नई-नई जगह की खोज किया करते थे |

आज भारत विदेशों से संपर्क कर पा रहा है वो भी इसी खोज का ही परिणाम है क्यूँ की भारत की खोज पहली बार वास्को द गामा ने की थी | वास्को एक समुद्री खोजी थे जिसने यूरोप से समुद्री मार्ग की सहायता से सीधी यात्रा कर के भारत की खोज की थी | वास्को 3 बार भारत आया था उसने अपनी पहली यात्रा 1497  से 1499 तक पूरी की थी | वैसे ही गूगल की शुरुवात 1996 में लैरी पेज तथा सेर्गे ब्रिन ने की थी जो स्टाफोर्ड युनिवर्सिटी,कैलोफोर्निया में पीएचडी के विद्यार्थी थे | फेसबुक सामाजिक नेटवर्किंग वेबसाइड है इसका आरंभ 2004  में हार्वर्ड के एक छात्र मार्क जुकेरबर्ग ने किया था | डीयने की खोज तुबिंगें विश्वविद्यालय में 1869 में फ्रेडरिक मिएस्चेर ने की थी | पेनिसिलिन की खोज एलेग्जेंडर फ्लेमिंग ने की | अमेरिका की खोज क्रिस्टोफर कोलंबस ने की थी | कहा जाता है शुन्य की खोज भारत में ही हुई थी पर इसकी खोज किसने की इसके बारे में सब के अलग अलग मत है | अब बात करते है व्हाट्स एप की खोज 2009 में ब्रेन ऐक्टन और जैन कौम ने बनया था |

देखा आप ने खोज की दुनिया कितनी रोचक है | आज हम जो भी है जो भी नई-नई चीजों का अविष्कार हो रहा है वो खोज के कारण ही हो रहा है और जब तक ये जीवन है तब तक ये खोज का काम जारी रहेगा इसका अंत है और ना इसका कोई अंत कर सकता है |        

वर्षा बी गलपांडे

एक सोच से बदलती है दुनिया

एक “सोच” ही काफी है आग लगाने और बुझाने के लिए | हमारी सोच ही जो किसी को ख़ुशी दे सकती है या तो किसी को दुखी कर सकती है |आज जो भी बड़े बड़े युद्ध हो रहे है वो एक सोच का नतीजा है | सोच किसी की लाइफ बनाती   है तो किसी की लाइफ बिगाड़ भी सकती है | एक सोच के कारण ही हम किसी के बारे में अपनी राय बना लेते है की सामने वाला कैसा है | मैने जब काफी सोची तो लगा की हमारी सोच ही है जो हमसे अच्छे और बुरे काम करवाती है | सोच शब्द के  वैसे तो पहुत से पहलु है | सोच शब्द पर बहुत से लोगों ने बहुत कुछ लिखा है किसी ने सकारात्मक सोच के बारे में लिखा है या किसी ने नकरातम सोच के बारे ,पर मै एक  ऐसी सोच के बारे में आप को बताने चाहती हूँ जिसकी वजह से हमारी और आपकी जिंदगी बदल गई | “सोच” शब्द को हम कई उदहारनों से समझ सकते है जिसकी वजह से लोगों ने अपनी और दूसरों की लाइफ ही बदल दी और अपना अलग मुकाम बनाया |  

भारतीय सिनेमा जगत में पहले मूक फिल्मे बना करती थी जिसमे लोग फ़िल्मी कलाकारों के हाव-भाव को देख करके ही पूरी फिल्म समझा करते थे | पर 1931 में आई फिल्म आलमआरा के आने से पूरी फिल्म की रूप रेखा ही बदल दी | आलमआरा 1931 में बनी हिंदी भाषा और भारत की पहली बोलती फिल्म है | इस फिल्म के निर्देशक अर्देशिर ईरानी है | ईरानी ने सिनेमा में ध्वनि के महत्व को समझते हुए , आलमआरा को कई समकालीन सवाक फिल्मों से पहले पूरा किया इस फिल्म का पहला प्रदर्शन मुंबई के मैजेसटिक सिनेमा में 14 मार्च 1931 को हुआ |यह पहली भारतीय सवाक फिल्म थी जिसे देखने आए भीड़ को काबू करने के लिए भीड़ को बुलाना पड़ा था | फिल्म निर्देशक आर्देशिर ईरानी की ही सोच  थी जिसने गूंगी फिल्मों में आवाज भरी थी |

स्वामी विवेकानंद जी को कौन नहीं जानता है | स्वामी जी की एक सोच ने एक विदेश महिला का पूरा जीवन ही बदल दिया | एक बार एक विदेश महिला स्वामी जी के समीप आकर बोली स्वामी जी मैं आप से शादी करना चाहती हूँ | स्वामी जी  ने उस महिला से कहा की क्या तुम नहीं जानती हो की मै सन्यासी हूँ और शादी नहीं कर सकता पर उस महिला ने उतर दिया की मै आप के जैसा पुत्र चाहती हूँ जो आप के जैसा बुद्धिमान हो और ये तभी संभव है जब आप मुझसे विवाह करोगे | उसकी बात सुन स्वामी ने कहाँ ऐसी बात है तो आज से आप मेरी माता बन जाओ और मै तुम्हारा पुत्र, स्वामी की बाते सुन कर विदेशी महिला कहने लगी आप तो भगवान हो | स्वामी जी के जीवन के ऐसे कई उदाहरण है जिसके कारण कई लोगों के जीवन बदल गये उनकी यही सोच के कारण ही उनकी  पुरे विश्व में अपनी अलग पहचान है |

विज्ञापन भी हमारी सोच बदलने में काफी कारगर साबित होते है आप सोच रहे होगे कैसे एक विज्ञापन हमारी सोच को बदल सकता है तो चलिये जानते है | आज जब कोई त्यौहार आते हैं तो हम मिठाई की जगह चौकलेट लेते है |
 राखी हो तो भाई अपनी बहन को चकलेट  डिब्बा गिफ्ट में देता है |  चाय  जागो इंडिया जागो” का विज्ञापन आता है जो लोगों को जागरूक करने का मैसेज देते है | हम कपडे का विज्ञापन को देखने के बाद ही हम ये सोचते हैं की हमें कैसे कपडे लेने या हम पे कौन सा कपड़ा सूट होगा | मोबाईल  कंपनी का ऐड हो या कोई और विज्ञापन हर विज्ञापन से हमारी सोच प्रभावित होती है | विज्ञापन ही है जो हमें ये  बताता  है की हमे कौन सा तेल लेना है ,किस कंपनी का लेना है ,कहाँ अपने पैसे इन्वेस्ट करने है | इस प्रकार एक विज्ञापन हमारी सोच को बदलता है |

आज यदि हम आजाद है तो वो भी किसी की सोच का ही परिणाम है | यही एक सोच ने पुरे भारत को एक जुट कर दिया आजादी पाने के लिए | एक सोच ने ही लोगो को इतना पागल कर दिया की लोगों ने देश के लिए अपनी जान देकर इस भारत हो अंग्रेंजों की गुलामी से आजाद करवाया |

  आज जो नए नए मोबाइल फ़ोन आ रहें है, आज जो हम  इतने  आगे बड रहें  है, रोज नए नए नियम बन रहे है, जो नए- नए अविष्कार हो रहे है, कभी सोचा ये सब कैसे हुआ होगा या हो रहा है ? हमने आग जलाना कहाँ से सिखा होगा, चाँद पर पहुचना कैसे संभव हुआ होगा ? ये सब संभव हो पाया है हमारी सोच की वजह से, यदि हम सोचते नहीं तो क्या ये सब संभव हो पता ,नहीं ना | यदि हम सोचना ही बंद कर दें तो हमारी दुनिया ही रुक जाएगी | हम अपनी सोच से अपने जीवन को सफल बना सकते है और औरों से अलग अपनी पहचान भी बना सकते हैं | अब ये हमारे ऊपर है की हम अपने जीवन को किस ओर ले जायें |

वर्षा गलपांडे

टीवी डिबेट में लेफ्ट नेता ने संबित पात्रा से पूछा-क्या आप बीफ खाते हैं? तमतमाये बीजेपी प्रवक्ता ने दिया ये जवाब

केरल के कन्नूर में खुले आम एक गाय को काटे जाने के बाद देश भर में फिर से बीफ बैन और खाने की स्वतंत्रता पर बहस शुरू हो गई है। हिन्दी टीवी चैनल आज तक में ऐसे ही एक बहस के दौरान बीजेपी नेता संबित पात्रा और सीपीआई एम नेता फुआद अली के बीच तीखी बहस हो गई। दरअसल टीवी में बहस के दौरान लेफ़्ट नेता फुआद अली ने संबित पात्रा से पूछा कि क्या आप बीफ खाते हैं? इस सवाल से संबित पात्रा बेहद नाराज हो गये। संबित पात्रा ने कहा कि वे फुआद अली की इस टिप्पणी पर घोर आपत्ति दर्ज कराते हैं। संबित पात्रा ने फुआद अली को जवाब दिया और कहा कि, अगर वे पूछें कि वे क्या वे सुअर का मांस खाते हैं तो मुस्लिम समुदाय की ओर से संबित पात्रा पर फतवा जारी कर दिया जाएगा।’ तमतमाये संबित पात्रा ने सीपीएम नेता को कहा कि वे ऐसे सवाल दोबारा ना पूछें। इस दौरान स्टूडियो में जमकर हंगामा हुआ।
बता दें कि केरल के कन्नूर में कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने सरेआम एक बछड़े का काटा था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद काफी बवाल हुआ था। कांग्रेस ने कार्रवाई करते हुए दो सदस्यों को पार्टी से निकाल दिया है। लेकिन लेफ़्ट समेत कई पार्टियां आरोप लगा रही है कि सरकार देश की जनता पर अपना पसंद थोप रही है। कुछ दिन पहले ही केन्द्र सरकार ने वध के लिए बाजार से गोवंश खरीदने पर रोक लगा दिया है।
आजतक के इस कार्यक्रम में AIUC के अध्यक्ष मौलाना नदीमुद्दीन ने कहा कि गाय शांति का प्रतीक है और हिन्दुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए पूरे देश में गोहत्या पर रोक लगा देनी चाहिए। मौलाना नदीमुद्दीन ने ये भी कहा कि आजकल रमजान का महीना चल रहा है और मुस्लिम समुदाय के लोग भी गाय का दूध पीकर ही रोजे की शुरुआत करते हैं। ऐसे में गाय को काटना कहां तक जायज है? उन्होंने सरकार से तत्काल सभी राज्यों में गोवध पर रोक लगाने की मांग की है।

अमित शाह की दावत में पहुंचे वेंकैया नायडू, वेज खाना देख बोले- मेरे घर तो संडे मतलब बिरयानी डे

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को मीडियाकर्मियों के लिए लंच का आयोजन किया था। इस मौके पर कई वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद थे।
वेजिटेरियन खाना देखकर दावत पर पहुंचे केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू यह कहते सुने गए कि उनके घर तो संडे मतलब बिरयानी डे होता है। रविवार को ही केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मेट्रो भवन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कश्मीरी गेट से आईटीओ की नई लाइन को हरी झंडी दिखाई थी। इसके साथ ही मेट्रो ने पुरानी दिल्ली में भी अपनी पहुंच और भी गहरी कर ली है। इस लाइन पर तीन स्टेशन- दिल्ली गेट, जामा मस्जिद और लाल किला हैं। यह नई लाइन वायलेट लाइन का विस्तार है जो फिलहाल फरीदाबाद और आईटीओ के बीच चलती है। यह येलो लाइन के चांदनी चौक और चावड़ी बाजार स्टेशन का बोझ कम करेगी।
इससे पहले 27 मई को दंगा प्रभावित सहारनपुर में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के जाने पर केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू ने उन पर निशाना साधा था। शनिवार को नायडू ने कांग्रेस उपाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि राहुल गांधी ‘तस्वीर अवसरवादी’ हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था, ‘राहुल गांधी तस्वीर खिचवाने के खिंचवाने के तैयार रहते हैं। जहां भी तस्वीर खिंचवाने का मौका होता है वो वहां पहुंच जाते हैं।’ शनिवार को राहुल गांधी को संबंधित अधिकारियों द्वारा सहारनपुर आने के लिए इजाजत नहीं दी गई थी।
बीते शुक्रवार (26 मई, 2017) को उत्तर प्रदेश के एडीजी (कानून-व्यवस्था) आदित्य मिश्रा ने सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से अपील करते हुए कहा था कि दंगा प्रभावित क्षेत्र में कानून व्यवस्था वापस बहाल होने के लिए यहां से दूर रहें। एडीजी मिश्रा ने एएनआई से बात करते हुए कहा था, ‘हमने सभी राजनीतिक पार्टियों से गुजारिश की है कि वे क्षेत्र में शांति बहाल होने तक ना आएं।’