देश

आदित्यनाथ को पंचक्रोशी यात्रा का अधिकार नहीं है : अविमुक्तेश्वरानंद ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि जो व्यक्ति हिन्दू होकर पुराणों में वर्णित काशी के मंदिरों को तोड़वाये उनको पंचक्रोशी यात्रा का अधिकार नहीं है। आगे स्वामिश्री ने कहा कि एक तरफ उनके प्रशासन द्वारा पुराणों में वर्णित मंदिरों को तोड़ा गया और दूसरे ओर योगी आदित्यनाथ पंचक्रोशी यात्रा करना चाहते हैं ? यह पूरा का पूरा ढोंग है जो हिन्दुत्त्व का चोला पहनकर जनता को अपने भरोसे में लेकर, उनका वोट लिए और शासन में काबिज हो गए। आज स्थिति ऐसी हो गई कि हिंदुत्त्व वादी सरकार खुद पुराणों में वर्णित काशी के मन्दिरों को तोड़ दिए वो भी सौन्दर्यकरण हेतु, विकास हेतु। आपको यदि विकास ही करना है तो आप ग्रेटर काशी या ग्रेटर वाराणसी बनाइये। पुराने काशी, गलियों के काशी, मन्दिरों के काशी, घाटों के काशी आदि को देखने हेतु देश और विदेश से श्रद्धालु आते हैं और इसी काशी के मंदिरों को तोड़ रहे हो। यह विकास है कि विनाश है। क्या यही है सबका साथ-सबका विकास। हम और वाराणसी के समस्त सनातन धर्मी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पंचक्रोशी यात्रा का कड़े स्वर में विरोध करते हैं।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है जनता का पूर्ण समर्थन।

जनता हाथ उठाकर ले रही है मंदिर बचाने का संकल्प ।। सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: विगत 2 माह से काशी के प्राचीन व पुराणों में वर्णित मंदिरों को बचाने हेतु प्रयासरत हैं जिसके तहत स्वामिश्री ने नंगे पांव पंचक्रोशी की यात्रा कर देवी-देवताओं से माफी मांगी और उनसे प्रार्थना किये की वे किसी भी तरह के कोप काशी वासियों के ऊपर न दें। इसी क्रम में स्वामिश्री के नेतृत्त्व में मंदिर बचाओ आन्दोलनम के समर्थक "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण देने वाराणसी जिले के 1333 गांवों में जाकर आमंत्रण देने का संकल्प लिया जिस हेतु 5 जून 2018 से ही आमंत्रण यात्रा प्रारंभ हो चुका है। आज 6 जून 2018 को "आमंत्रण यात्रा" के दूसरे दिन स्वामिश्री ग्राम भवानीपुर, गनियालपुर, पिसौर, गणेशपुर तरना, सभाईपुर, वासुदेवपुर एवं चुप्पेपुर गए तथा सभा को संबोधित करते हुए सभी गांव वासियों को 28 जून से केदारघाट, वाराणसी में आयोजित होने वाले "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण किया। स्वामिश्री एवं अन्य वक्ताओं के बातों को सुनकर प्रत्येक उपस्थित गांव वासियों ने संकल्प लिया कि वे काशी के मंदिरों को बचाने हेतु स्वामिश्री को पूरा सहयोग प्रदान करेंगे एवं मंदिर बचाओ महायज्ञ में सम्मिलित होकर आहुति देंगे तथा सभी देवताओं से निवेदन करेंगे कि वे काशी को छोड़कर न जाये और शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि दे ताकि वे काशी के मन्दिरों को न तोड़े अपितु जो मंदिर व देव विग्रह तोड़े गए हैं उन्हें ससम्मान दोबार मंदिरों का निर्माण कर उनका प्राणप्रतिष्ठा कर पूजार्चना की व्यवस्था करें।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है जनता का पूर्ण समर्थन।

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मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है जनता का पूर्ण समर्थन।

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मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है जनता का पूर्ण समर्थन।

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स्वामिश्री ने मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु गांव वासियों को दिया आमंत्रण।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल"(काशी) ::- काशी में चल रहे मंदिर बचाओ आन्दोलनम के द्वितीय चरण की शुरुवात 3 जून 2018 को नीलकंठ मंदिर परिसर में कार्यालय के शुभारंभ के साथ प्रथम सभा आयोजित किया गया तथा उस दिन ही घोषित हुआ था कि वाराणसी शहर के 90 वार्डों के साथ साथ पूरे 1333 गांवों में मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रण यात्रा की शुरुवात 5 जून 2018 को होगी। इसी तारतम्य में ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: ने आज 5 जून 2018 को "आमंत्रण यात्रा" के तहत वाराणसी से संलग्न गांव - बड़ा लालपुर, दानुपुर, कानुडीह, अहमदपुर एवं लोढ़ान में समस्त गांव वासियों को 28 जून से केदारघाट, वाराणसी में मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रण दिया तथा पुराणों में वर्णित काशी के मंदिरों तथा देवताओं को तोड़े जाने की सूचना दी जिससे गाँव वाले अवाक हो गए। इस विषय को विस्तृत रूप से मंदिर बचाओ आन्दोलनम से जुड़े रमेश उपाध्याय, श्रीप्रकाश पांडेय, सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, रूपेश एवं विमलेंदु ने प्रकाश डाला जिस पर सभी गांव वासियों ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया तथ स्वामिश्री के मंदिर बचाओ महायज्ञ के आमंत्रण को स्वीकार करते हिये स्वामिश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामिश्री: के सामने उपरोक्त गांवों के उपस्थित महिला, पुरुष एवं बच्चों ने काशी के मन्दिरों को बचाने हेतु संकल्प लिया तथा यह भी कहा कि वे इस बाबत गांव के अन्य सदस्यों को भी अवगत करवाएंगे और मंदिर बचाओ महायज्ञ में शामिल भी होंगे जिससे देवतागण काशी से रूठकर चले न जाएं और देवताओं का कोई कोप वाराणसी तथा वाराणसी जिले वासियों के ऊपर न पड़े। आज के इस आमंत्रण यात्रा में मयंक शेखर मिश्रा, दीपेश पांडेय, कृष्णा पराशर, सत्यम शर्मा, प्रशांत त्रिपाठी, शैलेश तिवारी, किशन जायसवाल, रूपेश तिवारी एवं राजेन्द्र दुबे सम्मिलित हुए।

काशी चित्रपट समिति की पहली सभा सम्पन्न हुई।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी)::- काशी के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में "काशी चित्रपट समिति" की विशेष सभा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्त्व में सम्पन्न हुई। आज के इस विशेष सभा में काशी चित्रपट समिति के संयोजक गोरखनाथ तिवारी, प्रो. राणा पी.बी.सिंह, निरजा माधव, डॉ बलराम पांडेय, अरुण सिंह, राजेन्द्र तिवारी, राजनाथ तिवारी, रामानंद तिवारी, जितेन्द्रनाथ मिश्र , साध्वी पूर्णम्बा एवं सह संयोजक अवधेश दीक्षित उपस्थित थे। सर्व प्रथम स्वामिश्री द्वारा काशी चित्रपट की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा उपस्थित विद्ववानों ने भी काशी चित्रपट कैसे बनाया जाए इस पर विस्तृत चर्चा हुई। बीएचयू के सेवानिवृत्त प्रोफेसर राणा पी.बी.सिंह ने बताया कि सन 1524 में गुरुचरित्र का निर्माण हुआ था जिसमे गुरु अपने शिष्यों को काशी खंडों के बारे में बताते हैं जिसका मराठी तथा संस्कृत भाषा मे गुरुचरित्र में वर्णन है। साथ ही उन्होंने बताया कि हमने स्वयं 32 मुख्य यात्राएं किये तथा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के सहायता से जगहों को चिन्हांकित कर उसका मैपिंग किये। सन 1993 से 95 के बीच हमने कंप्यूटर के माध्यम से संस्कृत के वर्णन को डिकोड किया। प्रो राणा पी.बी.सिंह ने समिति में यह सुझाव रखा कि स्वामिश्री जी द्वारा हाल ही में जो पंचक्रोशी यात्रा की गई है उसे एक किताब के रूप में बनाया जाए जिसमे मंदिर, स्थान और छोटा वर्णन शामिल हो तथा इसके पश्चात गहन शोध, विचार कर काशी चित्रपट का निर्माण किया जाए। स्वामिश्री के साथ साथ उपस्थित सभी विद्ववानों ने एक मत होकर इस प्रस्ताव को स्वीकारा तथा आनेवाले 10 दिनों के अंदर किताब प्रकाशित करने की प्रतिश्रुति दिए और आगामी 17 जून को समिति की दूसरी बैठक श्रीविद्या मठ में शाम 5 बजे आहूत की गई है।

श्रीविद्या मठ में काशी चित्रपटी समिति की पहली बैठक आयोजित।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी)::- काशी के धार्मिक सांस्कृतिक मानचित्र के निर्माण के लिये मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् द्वारा निर्मित काशी चित्रपटी समिति की पहली बैठक 4 जून 2018 को शाम पांच बजे से श्रीविद्यामठ, केदार घाट , वाराणसी में आयोजित है । समिति के सभी माननीय सदस्य इस बैठक में काशी के ऐतिहासिक और पौराणिक स्वरूप को सामने लाने के लिये मन्थन करेंगे और काशी चित्रपटी निर्माण की रूपरेखा तय करेंगे । इस महत्त्वपूर्ण बैठक में समिति के सभी इक्कीस सदस्यों सहित स्वामि अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती भी सम्मिलित होंगे । इस महत्त्वपूर्ण बैठक हेतु पत्रकार बन्धु भी सादर आमांत्रित हैं। इसकी जानकारी श्रीविद्या मठ की साध्वी पूर्णाम्बा ने दी है।

इतना तो तय है कि यह खेल है । पता बस इतना करना है कि यह कौन खेल रहा और किसके साथ ? स्वामिश्रीःअविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और गंगा "पाथवे" नाम की जिन योजनाओं का जिक्र वाराणसी की आकाश में विगत अनेक दिनों से तैर रहा है असल मे इस तरह की कोई योजना है ही नहीं । कम से कम श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के 94 वें बैठक दिनांक 18 मई 2018 का कार्यवृत्त तो यही कह रहा है । इससे तय हो जाता है कि काशी की धरती पर केन्द्र और राज्य की सरकारों के दिए गए करोडों रुपये से एक बहुत बड़ा खेल खेला जा रहा है पर यह खेल किसके साथ खेला जा रहा है और असली खिलाड़ी कौन है यह तय करना बाकी है । काशी का प्रशासन जनता को रख रहा धोखे में। क्या प्रशासन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी धोखे में रख रहा है ? इस बैठक की मिनट बुक के अंश जो कि काशी के लोगों से हम सब को प्राप्त हो रहे हैं उसके पृष्ठ चार और पैरा दो में कहा गया है कि "श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर के निकट एवं आसपास काफी भवन क्रय करके गिराए जा चुके हैं एवं काफी जगह खाली हो गई है" के दृष्टिगत एक विस्तृत कार्य योजना तैयार कर बोर्ड में अनुमोदन हेतु आर्किटेक्ट के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने के संबंध में न्यास परिषद द्वारा सर्वसम्मति से यह तय किया गया। इस वाक्यावली से स्पष्ट दिनांक 18 मई 2018 तक काशी विश्वनाथ काॅरीडार, गंगा पाथवे या किसी और तरह की कोई योजना शासन के पास नहीं है । स्पष्ट है कि शासन-प्रशासन आम जनता को धोखे में रखकर कार्य कर रहा है । और बिना किसी योजना के ही भवनों, मंदिरों और मूर्तियों को तोड़कर फेंक रहा है, जो की अत्यंत आपत्तिजनक है । सोच कर हंसी आती है कि अधिकारियों ने न जाने कितनी बार वक्तव्य दिया है कि "योजना सार्वजनिक की जाएगी" , मुख्यमंत्री को दिखाई जा रही है आदि । जबकि बैठक का कार्यवृत्त स्पष्ट करा देता है कि ऐसी कोई योजना है ही नहीं । तो फिर प्रश्न यह उठता है कि क्या वाराणसी का स्थानीय प्रशासन, जनता के साथ ही साथ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के साथ भी तो कोई खेल नहीं खेल रहे हैं ? "मंदिर बचाओ आन्दोलनम् का कार्यालय सबके लिए खुला" 3 जून 2018 को प्रातः 10 बजे शुभ चौघड़िया में काशी के नीलकंठ में सीके 33/21-22 भवन में "मंदिर बचाओ कार्यालय" का उद्घाटन संपन्न हुआ । इस अवसर पर स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने कहा कि यह कार्यालय उन सभी के लिए प्रातः 9:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक खुला रहेगा जो आन्दोलनम् से किसी भी प्रकार का संबंध स्थापित करना चाहते होंगे । कार्यालय में शीघ्र ही एक टोल फ्री नंबर भी स्थापित करने की योजना है । कार्यालय का अधीक्षक पद्माकर पांडे को बनाया गया है । काशी के धार्मिक सांस्कृतिक नक्शे "काशी- चित्रपटी" के निर्माण के लिए 21 सदस्यीय समिति का गठन संपन्न जैसा कि पूर्व में ही आन्दोलनम् की तरफ से घोषणा की गई थी - काशी के धार्मिक, सांस्कृतिक नक्शे "काशी- चित्रपटी" के निर्माण के लिए 21 सदस्यीय समिति का गठन संपन्न हो गया है । इस समिति की पहली बैठक कल दिनांक 4 जून को सायं 5:00 बजे से श्री विद्या मठ में संपन्न होगी । जनसभाओं का क्रम 5 जून से होगा प्रारंभ आन्दोलनम् के द्वितीय चरण में काशी के सभी गांवों और वार्ड में होने वाली मंदिर बचाओ सभाओं का क्रम 5 जून से आरंभ होगा । उत्तर दिशा से आरंभ होकर क्रमशः पूर्व, दक्षिण और पश्चिम के गांवों में सभाएं होंगी । जो क्रमशः बड़ा लालपुर, दोनूपुर, हरिहरपुर, अहमदपुर, कानुडीह, लोढान, लालपुर, सरसवां, बासुदेवपुर, होलापुर, हटिया, छतरीपुर, गणेशपुर, परमानंदपुर, चप्पेपुर,पिशोर, हटिया, डलियालपुर, भवानीपुर, लमही, रसूलपुर, वनवारीपुर, ऐढें और गढवा आदि १३०० ग्रामों से होते हुए सभाओं का क्रम आगे बढ़ेगा । आगे के गांवों की सूचना बाद मे यथावसर दी जाएगी ।

हर व्यक्ति के अच्छे काम का साथ देना चाहिए :: अविमुक्तेश्वरानंद:।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी ने आज श्रीविद्यामठ, काशी में अपने प्रवचन में उपस्थित भक्तों से कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के अच्छे कार्य की सराहना करनी चाहिए तथा अच्छे कार्य का साथ देना चाहिए। अच्छे कार्यों का साथ देने से , उसके सहभागी बनने से मन प्रसन्नचित रहता है तथा व्यक्ति सुकून से जीता है। आगे उन्होंने कहा कि हम न तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राहुल गांधी, अखिलेश यादव आदि की निंदा कर रहे हैं। हम तो काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर हेतु तोड़े गए पुराणों में वर्णित मंदिरों के लिए वर्तमान केंद्र सरकार व राज्य सरकार का विरोध कर रहे हैं। हम तो सन्यासी हैं। हम किसी राजनीतिक पार्टी के न तो प्रवक्ता हैं और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का प्रचार कर रहे हैं। हम केवल धर्म का प्रचार कर रहे हैं जिससे व्यक्ति अधर्म के पथ पर न चले। यह तो प्राचीन हिन्दू सनातन धर्म की रक्षा हेतु आंदोलन है जिससे हम अपने काशी के मंदिरों को ध्वंश होने से बचा पाए। आगे उन्होंने कहा आजकल लव-जेहाद शब्द बहुत सुनने को मिल रहे हैं। यदि हमारी बहने संस्कारवान होंगी, अपने धर्म के प्रति प्रेम होगा तो इस तरह की घटना घटित नहीं होंगी। मुस्लिम धर्म अलग हैं, उनके संस्कार अलग हैं जो किसी भी एंगल से सनातन धर्म से मेल नहीं खाता है। इस बाबत घर मे ही शुरू से एक शुक्ष्म रेखा पहले ही बना देना चाहिए जिससे बहनों को मालूम हो कि हमारे संस्कार क्या हैं और उनके संस्कार क्या है साथ ही एक दूरी भी होनी चाहिए जिससे कोई ज्यादा नजदीक न आ पाए और कोई व्यवहार बने। 

किस योजना के तहत काशी में मूर्तियों को तोड़ा गया बताएं मुख्यमंत्री :: अविमुक्तेश्वरानंद

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- काशी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने आज प्रैस वार्ता के दौरान यह प्रश्न उठाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि जिन मूर्तियों को तोड़ा गया है उनका विसर्जन गंगा जी में किया जाएगा। जबकि योगी जी ने इस बात पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया कि आखिर जिन खण्डित मूर्तियों का जिक्र वह स्वयं कर रहे हैं वह आखिर कैसे टूटी? किस के आदेश पर तोड़ी गई? किनके द्वारा तोड़ी गई? किस योजना के तहत इन्हे तोडा गया? यह कौन सी योजना है? तथा ऐसी किसी योजना में आगे और क्या क्या है? क्यूंकि बिना किसी योजना को उद्घाटित किए बगैर ही मन्दिर व देवविग्रह तोड़ दिए गए। इससे यह आशंका प्रबल होती है कि अभी न जाने कौन-कौन से मन्दिर देवविग्रह इस छिपी हुई योजना के तहत जमींदोज कर दिए जाएंगे। ऐसे में ऐसी अस्पष्टता की स्थिति में " मन्दिर बचाओ अभियानम्" जारी रखना होगा। जब तक मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री जी की ओर से कोई स्पष्ट योजना की जानकारी नहीं दी जाती तब तक चुप नहीं बैठा जा सकता। अभी तो अनेक प्रश्न हैं जो अनुत्तरित हैं।

वल्र्ड हेल्थ असेंबली में छत्तीसगढ़ प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे हुए सम्मिलित

डब्ल्युएचओ के डायरेक्टर जनरल ने   स्वास्थ्य  पर सक्रिय होने का किया आह्वान
 
रायपुर  दुनिया के सभी देशों के स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य के प्रतिनिधि मंडल का सबसे बड़ा सम्मेलन वल्र्ड हेल्थ असेंबली में छत्तीसगढ़ प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे सम्मिलित हुए। 
प्रतिनिधि मंडल में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे0पी0 नड्डा, भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव के प्रतिनिधि व तेलंगाना राज्य के स्वास्थ्य सचिव के साथ उन्होंने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ में संभवतः पहली बार ही होगा जो भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग से मिशन संचालक श्री भुरे को चुना गया। 
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 6 दिवसीय असंेबली जिनेवा, स्वीट्जरलेंड में आयोजित हुआ। अतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में डाॅ. भुरे ने भारत के  6 चरणों की पोषण नीति कार्यक्रमों का क्रियान्वयन के लिए निर्णय लिया जाने के बारे में सुझाव के साथ साथ स्वास्थ्य की रोकथाम और प्रबंधन पाॅलिसी की बात कही। 
वहीं भारत डिजिटल हेल्थ के संबंध में भी उन्होने जानकारी से अवगत कराया। भारत ने डिजिटल हेल्थ पर प्रस्ताव मरीजों का डिजिटल हेल्थ डाटा तैयार करना है। 
उन्होंने बताया कि डिजिटल डाटा तैयार करने में और भी देश शामिल हुए हैं। इसके अलावा भारत की ओर से पहले लाए गए सस्ती दवाईयों की उपलब्धता पर भी चर्चा की गई। यह सम्मेलन 21 मई से 26 मई 2018 तक आयोजित किया गया था। उल्लेख है कि इस सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से स्वास्थ्य सेवाओं बेहतर होगी की जानकारी दिये हैं। दुनिया भर के देशों के स्वास्थ्य मंत्री ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिये । 
विश्व स्वास्थ्य विषय पर डब्ल्यूएचओ निर्णय लेने वाला एक निकाय है। इसमें सभी डब्ल्यूएचओ सदस्य देशो के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया और कार्यकारी बोर्ड द्वारा तैयार एक विशिष्ट स्वास्थ्य एजेंडा पर केंद्रित जानकारी दी गयी। स्वास्थ्य के अलावा विश्व स्वास्थ्य असेंबली का मुख्य कार्य संगठन की नीतियों को निर्धारित करना, महानिदेशक नियुक्त करना, वित्तीय नीतियों की निगरानी करना और प्रस्तावित कार्यक्रम बजट की समीक्षा करना भी था। सम्मेलन में डब्ल्युएचओ के डायरेक्टर जनरल श्री टंेड्रोस एढेनाॅम ग्रिबेएसेस ने सर्वप्रथम संबोधित किया। श्री टंेड्रोस ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस साल की विश्व स्वास्थ्य सभा के सामान्य विषय ’’सभी के लिए स्वास्थ्य’’ सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय होने का आह्वान किये है। 

नवदिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ आयोजित।

"खबरीलाल" सुदीप्तो चटर्जी ::- सनातन धर्मानुरागी परिवार, वडोदरा, गुजरात द्वारा 1 जून 2018 से नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन सर सयाजीराव गायकवाड़ नगर में आयोजित किया जा रहा है। इस नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ में मुख्य वक्ता व कथावाचक के रूप में द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि तथा द्वारका शारदा पीठ के मंत्री दंडी स्वामी सदानंद जी सरस्वती अपने श्रीमुख से कथा का रसपान उपस्थित भक्तों एवं श्रद्धालुओं को करवाएंगे। उक्त जानकारी स्वामीजी के निज सचिव अंकित महाराज ने विज्ञप्ति जारी कर दिए तथा नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ में भक्तों एवं श्रद्धालुओं को उपस्थित रहने हेतु आग्रह किया। कथा रोजाना शाम 4:30 बजे से 7:30 बजे रात्रि तक होगा।

आज भी जागृत हैं काशी खण्डोक्त देव विग्रह ::- अविमुक्तेश्वरानन्दः

"खबरीलाल" सुदीप्तो चटर्जी (काशी) ::- मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के तहत ही सही काशी की पंचक्रोशी यात्रा करते समय देवताओं के जागृत होने का अनुभव हुआ । उनकी शक्ति और सामर्थ्य अतुल्य हैं। पंचक्रोशी यात्रा करते समय हम लोगों ने यह पाया कि अनेक देव विग्रह विलुप्त हो चुके हैं । यह तो शोध का विषय है कि वे कैसे और कब विलुप्त हुए ? आज हमलोग यहाँ श्रीविद्या मठ में उन सभी विलुप्त विग्रहों की सचल प्रतिष्ठा कर पूजन कर रहे हैं । आगे चलकर यह भी पता किया जाएगा कि ये विग्रह किन किन स्थानों पर थे तथा उन्हीं स्थानों पर जमीन खरीदकर मन्दिर बनाकर पुनः उन देवताओ की स्थापना की जाएगी। तब तक उन विग्रहों का श्रीविद्यामठ की ओर से पूजन किया जाता रहेगा । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने 30 मई 2018 को सायं 5 बजे श्रीविद्यामठ में आयोजित पंचक्रोशी के विलुप्त देवताओं के पूजन के अवसर पर कही । उन्होंने कहा कि हमें प्रशासन से कोई आशा नहीं है कि वह इन विग्रहों की स्थापना के लिए कोई सहयोग करेंगे । हम स्वयं ही देवताओं के नाम से जमीन खरीदेंगे या यदि कोई भक्त उस स्थान पर जमीन दे दे तो उस पर हम इन देवताओं के मन्दिर बनवाकर उनकी अचल स्थापना करेंगे ताकि यथा परम्परा पंचक्रोशी यात्रा के समय उसी उसी स्थान पर लोग इनका दर्शन कर आशीर्वाद लाभ प्राप्त कर सकें । आगे स्वामिश्री ने बताया कि पंचक्रोशी यात्रा के समय कुल 108 लोग साथ में थे, पर चलते चलते कुछ लोगों के शरीर ने साथ नहीं दिया । उसके बावजूद भी छप्पन लोग अन्त तक साथ में रहे । हम सभी ने कुल 832 देवताओं के दर्शन किये और 2,73,040 कदम चलकर 238.42 किमी की दूरी तय की गई । आज के इस शुभ अवसर पर आचार्य पं धनंजय दातार के आचार्यत्व में स्वामिश्रीः ने सभी शिवलिंगो की सचल प्राण प्रतिष्ठा कर अभिषेक और पूजन किया । पूजन समारोह में राजेन्द्र तिवारी (बबलू ), गिरीश तिवारी, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी मुरारी स्वरूप जी महाराज, ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानन्द जी महाराज, सावित्री पाण्डेय , रागिनी पाण्डेय, सुनीता जायसवाल, ब्रह्मबाला शर्मा, रूपेश तिवारी, नरसिंह मूर्ति , राजनाथ तिवारी, अभयशंकर तिवारी , उद्देश्य तिवारी व आदि भक्त उपस्थित थे । इस शुभ अवसर पर डॉ परमेश्वर दत्त शुक्ल ने कहा कि लोक कल्याण के लिए जिस प्रकार स्वामिश्रीः ने पदयात्रा की और काशी खण्ड के देवालयों का दर्शन कर विलुप्त देवी देवताओं की स्थापना कर रहे हैं वह इतिहास बन रहा है । अपने विचार व्यक्त करते हुए राजेन्द्र तिवारी (बबलू) ने कहा कि यात्रा के समय स्कन्दपुराण के वर्णित विषय से आज की काशी किस तरह अलग हो रही है, इसे संरक्षित करने की बहुत आवश्यकता है। उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि आज तक हमने अनेकों लोगों को दर्शन कराया पर ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ । किसी ने भी इतनी गहराई से पंचक्रोशी यात्रा नहीं की और विलुप्त देव विग्रहो के बारे में विचार नहीं किया । यह इतिहास में सम्भवतः पहली बार हुआ है। डॉ विजयनाथ मिश्र ने कहा कि स्वामिश्रीः ने पंचक्रोशी यात्रा कर इतिहास रच दिया है । आज धर्म कार्य के लिए युवाओं की आवश्यकता है । जब हम सब घाट पर से गुजरते हैं तो हमारा शीश करपात्री जी गुरुजी और स्वामिश्रीः के प्रति झुक जाता है । बिना गुरु और भगवान् के हमें निरोगी काया का आशीर्वाद नहीं मिल सकता । आज लोग काला धन खोजने में लगे हैं पर स्वामिश्रीः भगवान् और उनके मन्दिरो को खोजने में लगे हैं । आपकी यात्रा का जो सोशल मीडिया पर लाइव किया गया उससे अनेक लोगों को घर बैठे ही दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ । डॉ हरेन्द्र शुक्ल ने कहा कि यह धर्म की लडाई है और इसमें विजय धर्म की हो होनी है । जिस प्रकार फ़िल्म में अन्तिम समय तक खलनायक लडता है और अन्त में वह परास्त होता है उसी प्रकार धर्म के द्रोही लोग अन्त में समाप्त होंगे और विजय स्वामिश्रीः की ही होगी । राजनाथ तिवारी ने कहा कि आज काशी के लोग आन्दोलन के साथ नहीं आ रहे हैं , वे अपने पैर पर खुद ही कुल्हाडी मार रहे हैं । उनको अपना भविष्य नहीं दिख रहा है पर एक दिन उनको अवश्य समझ आएगा । स्वामी जी की तपस्या काशी को बचाने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी । अवधेश दीक्षित ने कहा कि आज का युवा हर चीज गूगल पर खोजता है । अतः हम सबको मिलकर एक सांस्कृतिक मैपिंग करानी चाहिए जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से मन्दिर , तालाबों तक पहुँच जाए । गिरीश तिवारी ने कहा कि काशी की धरती के लिए स्वामिश्रीः का योगदान अविस्मरणीय है । यात्रा पर जब निकले तो लोगों ने अपना कष्ट बताया । देवालय ही नहीं तालाब आदि भी कब्जा किए जा रहे हैं । यात्रा के बाद दृष्टि ही बदल जाती है । जब हम सब लौटे तो हर घाट में देव विग्रह के दर्शन होने लगे । यह यात्रा का आध्यात्मिक लाभ है ।

पैरों में छालों के बावजूद इस भीषण गर्मी में मंदिरों को बचाने स्वामिश्री कर रहे हैं कठिन तपस्या।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल"(काशी) ::- मई माह के भीषण गर्मी तथा तप्ती धरती में काशी के प्राचीन मंदिरों को बचाने हेतु दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कर रहे हैं कठिन तपस्या। स्वामिश्री 13 दिनों से नंगे पांव निरंतर पदयात्रा कर रहे हैं जिसमे आज 28 मई पंचक्रोशी यात्रा का तीसरा दीन है। उनके पदयात्रा में छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित सलदाह धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज, जशपुर आश्रम के ब्रह्मचारी, साध्वी, अनुयायी, बटुक एवं आम जनता उनके साथ नंगे पांव पदयात्रा कर रहे हैं जिससे स्वामिश्री के मंदिर बचाओ तपस्या पूर्ण हो सके। ज्ञात हो विगत दिनों में पुराणों में वर्णित 3 विनायक मंदिरों को तोड़ दिए गए जिससे स्वामिश्री व्यथित हैं और आम जनता में रोष व्याप्त है। इस आन्दोलनम के क्रम में उत्तरप्रदेश प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व सांसद राज बब्बर, जदयूएस के युवा विंग तथा विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने मंदिर बचाओ आन्दोलनम को अपना पूर्ण सहयोग दे रहे हैं।  स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है - पैरों में छाले हों, फर्जी मुकदमें हों या कोई और व्यवधान हो हमें रोक नही सकती, हम ये नही कहते की हम सबकुछ ठीक कर लेंगे लेकिन जबतक शरीर है, धर्म के प्रति प्रतिबद्धता है, हम हर कोशिश करके अपने मूल्यों को अपनी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का हमारा परम दायित्व है । पदयात्रा में चल रहे संत महात्मा, बटुक व नागरिक लगातार इन नारों से लोगों को जागृत कर रहे हैं - हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ गंगे । बचाने हर मन्दिर प्रभु का, चले हैं काशी वासी संगे ।। जो विकास मंदिर तोडवाए, वो हमको स्वीकार नही । जनता का दुख-दर्द ना समझे, समझो वो सरकार नही ।। हमको मनकी कहने दो, काशी को काशी रहने दो । खुद को हिन्दू बोल रहे हो, फिर भी मंदिर तोड रहे हो ।। यदि अब मंदिर एक भी टूटा, समझो भाग्य तुम्हारा फूटा । हम समझेंगे तोड के मन्दिर, हमसे रिश्ता तोड रहे हो ।। आज 28 मई पंचक्रोशी यात्रा का तीसरा दीन है। 27 मई की रात स्वामिश्री लंगोटी हनुमान से चलकर रामेश्वर में विश्राम हेतु रुके तथा आज सुबह 5 बजे रामेश्वर से पदयात्रा शुरू हुई जो हरहुआ में कुछ पल विश्राम हेतु कमलेश यादव के निवास में रुका। यह पद यात्रा कल समाप्त होगा तथा स्वामिश्री आम जनों को संबोधित करेंगे।