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पंडरिया के तहसीलदार करिश्मा दुबे और बस्तर के सहायक कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा ने अग्नी को साक्षी मानकर गायत्री मंदिर में लिए सात फेरे

रायपुर - बस्तर के सहायक कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा और पंडरिया की तसीलदार करिश्मा दुबे दोनों अधिकारी श​निवार को रायपुर के गायत्री मंदिर में अग्नी को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाकर परिणय सूत्र में बंध गए। शादी पारंपरिक रीति रिवाज के साथ संपन्न हुई। शादी के बंधन में बंधने के बाद रविवार को रायपुर के डीडी नगर में एक भव्य रिस्पेशन का कार्यक्रम है, जिसमें छत्तीसगढ़ के कई प्रशासनिक अधिकारी और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी शामिल होंगे। आईएएस चंद्रकांत और करिश्मा ने साथ में पढ़ाई की है और दोनों काफी अच्छे दोस्त रहे हैं, लेकिन अब वो दोस्ती शादी में बदल गयी है। 

बता दे की चंद्रकांत वर्मा 2017 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के 5 IAS में से इकलौते होम कैडर के IAS हैं। आईएएस वर्मा पहले राज्य प्रशासनिक सेवा में ही थे, लेकिन बाद में उन्होंने संघर्षों की नयी इबारत लिखी और फिर 7 बार नाकाम होने के बाद यूपीएससी में कामयाबी का झंडा बुलंद किया। 2008 बैच के PSC में चंद्रकांत बतौर डिप्टी कलेक्टर थे।

करिश्मा दुबे 2008 बैच में PSC के जरिये तहसीलदार में सेलेक्ट हुई थी। करिश्मा दुबे 2008 बैच की तहसीलदार हैं और मौजूदा वक्त में पंडरिया में पदस्था है। करिश्मा ने भी बड़े संघर्षों के बाद मुकाम हासिल किया है। इससे पहले करिश्मा शिक्षाकर्मी और महिला बाल विकास विभाग के महिला पर्यवेक्षक के तौर पर कार्य कर चुकी है।   

शिव का ही अंग है काशी का हर शिवलिंग - अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

खबरीलाल रिपोर्ट  (काशी) ::- काशी खण्ड मे वर्णन आया है कि जो भी शिवलिंग काशी में स्थापित हैं वे सब भगवान् शिव के अंग हैं।  कोई सिर है तो कोई पैर, कोई हाथ है तो कोई उदर और वहां यह भी कहा गया है कि जिन जिनका वर्णन इस ग्रन्थ में नही है वे सब शिव जी के रोम अर्थात् रोआ है।  जिस प्रकार शरीर से रोआ को खीचने पर असह्य पीडा होती है उसी प्रकार काशी से यदि एक भी शिवलिंग को हटाया गया तो वह शिव को पीड़ा देना होगा। उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने मन्दिर बचाओ महायज्ञ के प्रथम दिन के सायंकालीन सत्संग सभा के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ कहा गया है कि धर्म के लिए माता पिता भाई बन्धु किसी को भी छोड़ना पडे तो छोड़ देना चाहिए। इसलिए जब कांग्रेस के किसी व्यक्ति ने केरल में गौहत्या की थी और उसका वीडियो प्रचारित किया था तो हमने उसी समय यह संकल्प कर लिया था कि कांग्रेस से हमारा तब तक कोई भी सम्बन्ध नहीं होगा जब तक कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गौहत्या के लिए क्षमा याचना न करे । ऐसे ही जो भी पार्टी धर्म को नष्ट करने के लिए कार्य करेगी उससे हमारा कभी सम्बन्ध नही होगा । इसलिए चाहे भाजपा ही क्यों न हो हमें यह कहने में कोई संकोच नही कि धर्म की हानि करने वाली सरकार से हमारा कोई सम्बन्ध नहीं।  सभा में डॉ मिश्र ने कहा कि काशी का व्यक्ति सबसे पहले काशी का हैं बाद में किसी भी पार्टी का । इसलिए हमें सबसे पहले काशी की संस्कृति को बचाना होगा । घाट में घूमते हुए अनेक मन्दिरों को देखा तो देखकर ऐसा लगा जैसे शरीर से हृदय ही निकाल लिया गया है। हृदय में ही प्राण होता है और काशी में प्राण ही निकाल लिया जा रहा है। काशी मृत नहीं जीवन्त है । यहाँ के लोगों के लिए यदि कुछ करना है तो सरकार को यहाँ के लोगों से पूछना चाहिए।   प्रसिद्ध साहित्यकार आचार्य पं शिवजी उपाध्याय ने कहा कि काशी में जो हो रहा है उससे केवल काशी ही नही अपितु सम्पूर्ण सनातनधर्मियों के मन मे बहुत अधिक पीड़ा है । हमें आश्चर्य हो रहा है कि हिन्दुओं के ठेकेदार कहलाने वालो के द्वारा यह हो रहा है साथ ही एक मठ के महंत योगी जी के कार्यकाल में यह हो रहा । सबसे पीड़ादायक है कि गंगा रक्षा के लिए संकल्पित होकर जो आए उनखे द्वारा यह हो रहा है ।  हम केवल वक्तव्य तक ही सीमित न रहें अपितु आन्दोलनम् के लिए चाहे योगी से मिलना हो चाहे मोदी से मिलना हो चाहे हस्ताक्षर अभियान चलाना हो चाहे अनशन भी करना पडे तो करना चाहिए।  न्याय शास्त्र के आचार्य पं श्री वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि काशी विलक्षण नगरी है। भारतीय संस्कृति के आधार पर ही देश में सनातन धर्म आज भी हैं।  मूर्तियाँ को खण्डित करना महान पाप है। यदि सरकार को काशी का उन्नत विकास करना है तो अनेकों विकल्प है । गलियों को न तोडकर ऊपर से भी मार्ग बनाया जा सकता हैं।  भारतीय परम्परा में कष्ट सहकर भी भगवान् का दर्शन करने की परम्परा है। मोटर गाडी से उतरकर दर्शन की परम्परा भारत में नही है। धर्म विरुद्ध करने वाला चाहे योगी हो चाहे मोदी हो वह पार्टी हमें नही चाहिए।  काशी विद्वत् परिषद् न्यास के अध्यक्ष डॉ श्रीप्रकाश मिश्र  ने कहा कि मन्दिरों की रक्षा के लिए सबको आगे आना चाहिए और आज काशी के विद्वानों का मन्दिर आन्दोलन में साथ मिला तो हमें और अधिक बल मिला है क्योंकि समाज को विद्वान् ही दिशा देते हैं।  सभा के अन्त मे कलाकार विजय शंकर वशिष्ठ ने सुमधुर भजन प्रस्तुत किये तथा सर्वप्रथम सभा का आरम्भ सत्यम शुक्ल के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम, सलदाह के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द ने सभा का संचालन किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्रीप्रकाश मिश्र ने किया। 

महायज्ञ में आहुति देने उपस्थित हुए श्रद्धालुगण।।

खबरीलाल रिपोर्ट  (काशी) ::- मंदिर बचाओ महायज्ञ में आहुति देने उपस्थित हुए सैंकड़ों श्रद्धालुगण। विदित हो कि काशी में प्राचीन मंन्दिरों को तोड़े जाने के विरोध में ज्योतिष व द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश जगद्गुरु शंकाराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती के नेतृत्त्व में मंदिर बचाओ आन्दोलनम की शुरुवात हुई तथा इसी क्रम में 27 जून को शाम 5 बजे श्रीविद्या मठ, केदारघाट, वाराणसी से मंदिर बचाओ महायज्ञ अनुज्ञा यात्रा निकाला गया जिसमें सैंकड़ो सनातन धर्मियों ने पदयात्रा में सम्मिलित होकर काशीवासियों को महायज्ञ हेतु आमंत्रण दिए। ज्ञात हो कि स्वामिश्री: एवं उनके अनुयायियों द्वारा पूर्व में ही वाराणसी जिले के प्रत्येक गांव तथा 90 वार्डों में मंदिर बचाओ रथ यात्रा कर प्रत्येक को मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रित किया गया था। 28 जून 2018 को प्रातः 7:30 बजे वेद मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर बचाओ महायज्ञ की शुरुवात हुई जिसमें 21 पंडितों के साथ छत्तीसगढ़ के सपाद लक्षेश्वर धाम, सलदाह के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज ने यज्ञ में मंत्रोच्चारण के बीच एक लाख से ऊपर आहुतियाँ दी। यह यज्ञ प्रातः 7:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक चली तथा इस 7 दिन व्यापी मंदिर बचाओ महायज्ञ में 8 लाख से ज्यादा आहुतियाँ दी जाएगी जिससे देवताओं के कोपों से काशी वासियों को निदान मिल सके तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्राप्त हो और वे काशी के प्राचीन मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उनका उसी स्थान पर पुनः निर्माण करे।

मैं तेरा जीवन मैं तेरी किस्मत के तुझको मुक्ति यहीं मिलेगी। गंगा ये तेरी है, फिर कैसी देरी है आ जा रे, अब आ भी जा ।।

पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी / व्यंग / कटाक्ष ::- वाराणसी की गंगा ने एक महान व्यक्तित्त्व को अपने यहां सन 2014 में बुलाया था जिसके बाद वे देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हुए और करोड़ों/अरबों रुपये माँ गंगा की सफाई में लगा दिए, फिर भी न गंगा साफ हुई न उसके घाट ठीक हुए अपितु गंगा सिंकुड़ती चली गयी और घाटों में गंदगी बढ़ती चली गयी। गंगा माँ के इस दर्द को देखकर सहसा ही एक गाने के बोल मन मे उमड़ आते हैं - मैं तेरा जीवन मैं तेरी किस्मत के तुझको मुक्ति यहीं मिलेगी। गंगा ये तेरी है, फिर कैसी देरी है आ जा रे, अब आ भी जा ।। उक्त गाने की पहली लाइन यह कह रही है कि मैंने तुझे बुलाकर नया जीवन दिया, मेरी किस्मत (आशीर्वाद) से तू देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हुआ और तुझे मोक्ष की प्राप्ति भी यहीं से मिलेगी। दूसरी लाइन में माँ गंगा कह रही है कि गंगा तेरी माँ है फिर भी तू इतनी देरी लगाता है माँ के पास आने में, माँ से मिलने में और माँ किस हालात में है उसे देखने व जानने में। वाकई माँ गंगा ही नहीं अपितु समूचा वाराणसी पूछ रहा है कि बेटा आप तो विगत 4 वर्षों में शायद ही कोई ऐसा देश बचा हो जहां आप नहीं गए लेकिन आपके पास इतना भी समय नहीं कि माँ गंगा को देखने वाराणसी आ जाओ साथ ही लोगों का यह भी प्रश्न है की आपने अभी तक अयोध्या की यात्रा भी नहीं किये और अपने चक्षु से देखे भी नहीं कि राम लाला कैसे अपना दिन बिना घर के तिरपाल के नीचे गुजार रहे हैं। जब वाराणसी में पुल गिरा तब भी आप वाराणसी नहीं आये और न ही इस हादसे के शिकार लोगों से मिलने आये। उस वक़्त आप कर्नाटक चुनाव में अपने स्वार्थ के लिए जमे थे लेकिन उस क्षेत्र में नहीं आये जहां के आप संसद हैं और माँ गंगा के बेटे हैं। जिस स्वार्थ हेतु कर्नाटक में जमे रहे वह स्वार्थसिद्धि भी नहीं हुई तथा उपचुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। वाराणसी जिले के गाँव जयापुर के वासियों का कहना है कि वे आपको गोद लिए हैं जब कि खबर फैली थी कि आपने उस गांव को गोद लिया है। उस गांव में जाने पर पता चला कि गांव वासी कितने खुश हैं। केवल रास्ता और बिजली आदि से विकास नहीं न होते हैं साहब, विकास तभी माना जायेगा जब पड़े लिखे नौजवानों को नौकरी मिलेगा, शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, एक बड़ा हॉस्पिटल होगा, एम्बुलेंस की सेवा होगी , हर हाथ मे काम होगा और आदि। काशी के बाबा विश्वनाथ परिक्षेत्र में तोड़े गए पुराणों में वर्णित मंदिर और देव मूर्तियों हेतु भी जयापुर गांव वासियों में आक्रोश भी है साथ ही विरोध भी। यह किस तरह का अच्छा दिन है जिसे न आपके संसदीय क्षेत्र के लोग और न ही आपके गोद लिए गांव जयापुर के निवासी समझ पा रहे हैं। आज काशी की गंगा सिंकुड़ गई है जो स्पष्ठ दिखाई दे रहा है। एक तरफ कम पानी तो दूसरी तरफ दहकते रेत जिस पर शाम को गांव के बच्चे पतंग उड़ाते और खेलते हुए नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी, देवताओं की नगरी काशी, मोक्ष की नगरी काशी, घाटों की नगरी काशी, प्राचीनतम मंन्दिरों की नगरी काशी, गलियों की काशी आदि से देवता रुष्ठ होकर न चले जाएं और काशी वीरान न हो जाए। यदि धर्म सम्मत विकास नहीं हुए तो आगामी दिनों में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुगण, पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आ सकती है। यदि ऐसा होता है तो काशी के विश्वनाथ गली के व्यापारियों व अन्य क्षेत्र के व्यापारियों को समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है। बाबा के त्रिशूल में बसी काशी को काशी ही रहने दिया जाए और विकास जितना चाहे उतना करो पर काशी की पहचान मिटाकर नहीं अपितु नई वाराणसी या ग्रेटर वाराणसी बनाकर किया जाए । जनता , शासन व प्रशासन के भय से अभी तक चुप है लेकिन सभी के अंदर की ज्वालामुखी फटने के कगार पर है। ज्वालामुखी फटने के पहले शासन व प्रशासन आधिकारिक घोषणा करें कि विकास कद नाम पर कोई मंदिर नहीं तोड़े जाएंगे और जो मंदिर व देव विग्रह तोड़े गए हैं उसे पुनः निर्मित किया जाएगा, तब कहीं जाकर देवताओं के कोप से बचा जा पाएगा।

मोदी का सपना करेगा उनका अपना ।।

खबरीलाल की विशेष टिप्पणी, व्यंग, कटाक्ष ।। संदर्भ ::- काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एवम वीआईपी दर्शन ।। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की सबसे महत्त्वाकांक्षी परियोजना "काशी विश्वनाथ कॉरिडोर" को अमली जामा पहनाने में उत्तरप्रदेश शासन व प्रशासन पूरे जोर शोर से लगी हुई है। पीएम के इस महत्त्वपूर्ण परियोजना हेतु पुराणों में वर्णित सुमुख विनायक, प्रमोद विनायक मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़कर मलबे में परिवर्तित कर दिया गया है तथा दुर्मुख विनायक मंदिर को प्रशासन ने अपने हाथ मे ले लिया है साथ ही प्राचीन व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर एवं भारत माता मंदिर (महा लक्ष्मी मंदिर) को भी इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना हेतु तोड़ दिया गया है। यहां यह समझने वाली बात है कि बाबा विश्वनाथ के पुत्र तथा प्रथम पूज्य देवता गणेश जी (विनायक) एवं बेटी लक्ष्मी माता के मंदिर व देव विग्रहों को तोड़कर बाबा विश्वनाथ से उनके बेटे और बेटी को अलग कर दिया गया है जिससे सनातन धर्मियों में आक्रोश है और वे इस कार्य का विरोध कर रहे हैं। काशीवासी यह प्रश्न उठा रहे हैं कि कैसे गोरखनाथ पीठ के महंत तथा अभी उत्तरप्रदेश के सीएम महंत योगी आदित्यनाथ इस कार्य को कर रहे हैं और वे खुद एक कट्टर हिन्दू होने के नाते जिनका खुद का हिन्दू युवा वाहिनी है वे पीएम मोदी का सपना पूरा करने में लगे हैं और करोड़ों सनातन धर्मियों के आस्था, विश्वास, एकता के प्रतीक मंन्दिरों को प्रशासन के माध्यम से तोड़वा रहे हैं। काशी वासी यह भी प्रश्न कर रहे हैं कि एक कट्टर हिन्दू नेता जो पहले एक महंत हैं वे कैसे यह पाप का कार्य कर रहे हैं। क्या उन्हें अपने देवताओं से ज्यादा पीएम मोदी के सपने ज्यादा प्रिय हैं ? यदि पीएम मोदी के सपने प्रिय हैं तो इसका कारण उन्हें जनता से कहना होगा क्यों कि जनता के वोट से ही भाजपा पूर्ण बहुमत से उत्तरप्रदेश में सरकार बनाई है और एक कट्टर हिंदुत्त्ववादी नेता को सीएम की कुर्सी पर बैठाया है। क्या सीएम की कुर्सी भगवान और प्राचीन मंदिरों से ज्यादा प्रिय है महंत जी को ? यह बहुत बड़ा सवाल है जिसका जवाब खुद महंत योगी आदित्यनाथ ही दे सकते हैं और उन्हें देना भी चाहिए। क्या कुर्सी का मोह भगवान के मोह से ज्यादा है ? क्या वे ज्ञान शून्य हो गए हैं जो सही और गलत का फैसला नहीं कर पा रहे हैं ? क्या उनके ऊपर किसी भी तरह का दवाब कार्य कर रहा है ? काशी वासियों का कहना है कि काशी नगरी बाबा के त्रिशूल पर बसा है और विश्व के प्राचीन शहरों में इसकी गिनती होती है। बाबा के गले मे जैसे सर्प लपेटा हुआ है वैसे ही विश्वनाथ मंदिर के चारों ओर गालियां है जो सर्प नुमा है और यही लोगों का विश्वास है। लोग यह भी कह रहे हैं कि क्या अब बाबा के सर्प (गलियों) को भी क्षति पहुंचाया जाएगा ? काशी वासी तथा वाराणसी के गांव वासी इस परियोजना का जमकर विरोध कर रहे हैं और मोदी-योगी से निवेदन कर रहे हैं कि ऐसा अनर्थ न करो, भगवान के कोप से डरो, क्यों सनातन धर्मियों के दिल पर हथौड़ा चला रहे हो ? पीएम मोदी के इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का मुस्लिम लोगों ने भी जमकर विरोध किया है और कर रहे हैं लेकिन लगता है प्रत्येक अपने कान में रुई ठूस लिए हैं जिस कारण उन्हें जनता की आवाज सुनाई नहीं दे रही है और अगर दे भी रही है तो पीएम मोदी की महत्त्वाकांक्षी परियोजना की गूंज बस ही सुनाई दे रही है। काशी वासी एवं गांव वासी ने यहां तक कहा है कि यदि इसे त्वरित नहीं रोका गया तो भगवान के कोप से कोई नहीं बचा पायेगा। क्या उस समय पीएम मोदी और सीएम योगी बचाने आएंगे ? नहीं आएंगे , क्यों कि वे भगवान नहीं हैं , वे केवल आम जनता के सेवक हैं और आम जनता के सेवक होकर वे कैसे आम जनता की आवाज को अनसुना कर रहे हैं यह समझ से परे है। बहुत लोगों ने नाम न छापने का आग्रह करते हुए इतना तक कह दिए हैं जिस तरह हमारी बातों को नेता लोग अनसुना कर रहे हैं ठीक उसी तरह चुनाव के वक़्त हम सभी उन्हें अनसुना कर देंगे। मंन्दिरों व देव विग्रहों को तोड़े जाने पर द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती बहुत व्यथित हैं और पुराणों में वर्णित तथा प्राचीन मंन्दिरों को बचाने हेतु हद से ज्यादा प्रयास कर रहे हैं। स्वामिश्री: मंन्दिरों को बचाने हेतु मंदिर बचाओ महायज्ञ भी कर रहे हैं जिससे शासन और प्रशासन को भगवान सद्बुद्धि दे और वे इस विनाश कार्य को तुरंत रोके। ऐसा न हो कि धर्म की राजधानी काशी से देवता रुष्ठ होकर चले जाएं और काशी वीरान हो जाये। स्वामिश्री: के अनुयायी तथा सनातन धर्मी गांवों में जाकर महायज्ञ हेतु आमंत्रण दे रहे हैं और उन्हें वास्तविकता से अवगत भी करा रहे हैं। काशी के एक दो समाचार पत्र के अलावा अन्य समाचार पत्र इस महत्त्वपूर्ण विषय को अपने समाचार पत्र में जगह नहीं दे रहे हैं जबकि वे भी बाबा विश्वनाथ के दरबार मे बैठे हैं और अन्याय को अन्याय नहीं बोल पा रहे हैं जो बहुत ही बड़ा विडंबना है।

एक तरफ मुझ पर आस्था रखकर मेरी पूजा करते ही और दूसरी तरफ मुझे और मेरे मंदिर को तोड़ते हो :: देवतागण

" खबरीलाल सुदीप्तो चटर्जी " द्वारा - लेख, कटाक्ष, व्यंग हे मनुष्य ! हे सनातन धर्मी ! मुझे विगत कुछ दिनों से इतनी पीड़ा हो रही है जिसे मैं सशरीर आपके पास आकर वर्णन नहीं कर सकता। अरबों की संख्या में हिन्दू सनातन धर्म मे आस्था, विश्वास रखने वाले आज इस कलयुग में , हे मनुष्य ! आप सभी को क्या हो गया है ? हम सभी देवताओं की नगरी, हमारे निवस्थान काशी में हमारे बाबा विश्वनाथ व माता पार्वती के सबसे प्रिय पुत्र गणेश जी की मूर्ति एवं मंदिर तोड़ दी गई और आप सब इस अमानवीय घटना को केवल देखकर अपने अंदर छुपा लिए । ये कैसा मनुष्यतत्व है ? क्या आप सभी के मन से हमारे प्रति आस्था, विश्वास, प्यार सब उठ गया है ? मैं सभी देवतागणों की तरफ से एक दूत बनकर आपसे प्रश्न कर रहा हूँ जिसका आप मुझे उत्तर दीजिये जिसे मैं अन्य देवताओं के पास आपकी वाणी को रख सकूँ। मुझे बड़ी पीड़ा हुई कि एक सन्यासी जिन्हें आप दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नाम से जानते हो वे नंगे पांव चलकर , पदयात्रा कर हम सभी देवताओं से माफी मांगे की हम सन्यासी आपके लिए कुछ न कर सके लेकिन आप अपना कोप निरीह मनुष्य के ऊपर मत डालियेगा। उन्हें पाप मुक्त रखियेगा। हम सभी देवताओं को उस वक्त और पीड़ा हुई जब इस भीषण गर्मी के दिनों में एक दंडी स्वामी तथा उनके अनुयायी नंगे पैर तप्ती धरती पर 90 किमी की पदयात्रा किये जो केवल हमारे मंदिरों और हमारे विग्रह को बचाने के लिए। भगवान ब्रह्मा-विष्णु-महेश्वर ने मुझे कहा देखो देवता, दंडी स्वामी के पैर में छाले पड़ गए हैं, खून बह रहा है और इसके पश्चात भी वे पदयात्रा कर मंदिरों को बचाने हेतु आन्दोलनम कर सोये हुए लोगों को जगा रहे हैं। आप मर्त लोक में संदेश भेजिए की दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। वे तो काशी के धरोहरों को बचाने, लोगों को जगाने और विकास के नाम पर विनाश को रोकने हेतु प्रयत्न कर रहे हैं। उन्हें किसी भी राजनेता से कोई दुश्मनी नहीं है उनका केवल इतना कहना है कि - खुद को हिन्दू बोल रहे हो फिर भी मंदिर तोड़ रहे हो। इस वाक्य को हे मनुष्य आप सभी को समझना होगा। हम सभी देवता बहुत खुश हुए थे कि केंद्र तथा राज्य शासन में कुछ साधु, संत, साध्वी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं , हिन्दुतत्व की सरकार आई है, लेकिन वे भी राजनीति के रंग में रंगे हुए मिले। दूसरी बार खुशी हम देवताओं को तब हुई जब एक महंत सांसद से मुख्यमंत्री बना। उस वक़्त हम देवताओं की आस और बढ़ गई कि अब हमारे रामलला का भव्य मंदिर अयोध्या में निर्मित होंगे, लेकिन इस मामले में भी हम देवताओं को निराशा ही हाथ लगी साथ मे विकास के नाम पर हमारे पुराणों में वर्णित हमारे देवताओं के मंदिर ही तोड़ दिए गए और महंत जी कुछ बोल भी नहीं रहे हैं और जिन्होंने मंदिर तोड़ा उनके ऊपर भी कार्यवाही नहीं किये। हे पृथ्वी वासियों, हम सब देवतागण को इतनी पीड़ा हुई कि हम आपस मे रोकर एक दूसरे देवता को सांत्वना दे रहे हैं। आप जब अपने तकलीफों के समय, खुशियों के समय, चुनाव के समय हमारे पास आशीर्वाद लेने आते हो तो क्या हम आप सभी को आशीर्वाद नहीं देते हैं। हम देवतागण कोई भेदभाव नहीं करते। जो जैसा कर्म करता है वो वैसा ही भोगता है। जो अच्छा कार्य जनता के हित में, देश हित मे करते हैं उसे ही जनता जिताती है और उसे ही लोग सर आंखों पर बैठते हैं। ये तो आपका भाग्य और कर्म है कि आप कैसी छवि जनता, लोगों के बीच मे बनाते हो। इसमें हम देवताओं का क्या कसूर जो हमे ही पीड़ा पहुंचाया जा रहा है। हम सभी देवताओं का विश्वास है कि देवताओं का देश, वेद पुराण पढ़ने वालों का देश, विविध संस्कारों का देश, विविध मान्यताओं वाला देश, धार्मिक लोगों का देश एक दिन जरूर जागेगा और हम देवताओं को अपमानित होने से बचायेगा। यही आशीर्वाद हम देवता आप सभी मर्त वासियों को करते हैं।

भगवान् को भजना और भंजाना दोनों अलग चीजे - अविमुक्तेश्वरानन्दः ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी)::- भगवान् को भजना और भंजाना दोनों अलग चीजे - अविमुक्तेश्वरानन्दः हम लोग भगवान् का भजन करने में विश्वास करते हैं इसीलिए जो भी भजन करने वाले लोग हैं उन सभी को मन्दिरों के टूटने पर हृदय से पीडा हो रही है पर जो लोग भगवान् के नाम को भंजाकर सत्ता में आए उनको इस पीडा का अनुभव ही नहीं बल्कि वे तो स्वयं ही मन्दिरों को तोड रहे हैं । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने आज अभय संन्यास आश्रम में सायं 5 बजे आयोजित समारोह में व्यक्त किए ।उन्होंने कहा कि लोगों को इस सरकार से बहुत उम्मीद थी कि वे अयोध्या में राम मन्दिर बनाएँगे पर आज लोग अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि मरणं मंगलं यत्र यह श्लोक पूरी काशी के लिए नहीं अपितु विशेष रूप से मणिकर्णिका क्षेत्र के लिए कहा गया है । काशी खण्ड में इसके माहात्म्य का वर्णन है । आज हम इसी पवित्र क्षेत्र में है तो हमें बहुत आनन्द आ रहा है । जो लोग यात्रा मे साथ चल रहे है सब के सब चलते चलते थक जाते हैं पर पूछने पर कहते हैं कि बहुत आनन्द आ रहा है और यह थोडे समय का कष्ट जीवन भर आनन्द प्रदान करेगा । यही धर्म है कि हम कम से कम में कष्ट सहकर भी आनन्दित हो जाते हैं । उन्होंने आगे कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए अपने आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर ही पृथ्वी के कुछ क्षेत्रों को ऊर्जा स्थल के रूप में चिह्नित किया है जिससे कि वह ऊर्जा का लाभ हमारी भावी पीढी को भी मिले पर आज आधुनिकता की ओर सबका ध्यान जा रहा है जिससे हमारे बच्चे उस लाभ से वंचित हो रहे हैं । उन्होंने अपने पर साई की मूर्ति तोडने को फर्जी तौर पर हुए मुकदमे के सम्बन्ध में कहा कि हमें डराने के लिए हमारी आवाज को दबाने के लिए मुकदमा किया जा रहा है पर जब संन्यास दीक्षा होती है उसी समय यह संकल्प लिया जाता है कि "अभयं सर्वभूतेभ्यो" माने हमसे कोई न डरे और जब हम सबको अभय देते हैं तो सब भी हमें अभय देते हैं । क्योंकि हिंसा की भावना से ही हिंसा आती है । जब हमारे मन मे किसी के प्रति द्वेष न होगा तो दूसरे के मन से भी द्वेष समाप्त हो जाएगा । क्षेत्रीय प्रतिनिधि पप्पू यादव जी ने कहा कि मन्दिर को बचाने निकले स्वामिश्रीः पर मुकदमा कर दिया गया है । उन तक पहुँचने के पहले हम सब पर से गुजरना पडेगा । किरन खन्ना ने कहा कि हमारे भी घर को तोडने की योजना है। हमसे यही छीन लिया जाएगा तो हम कहाँ जाएँगे । सरकारी योजनाएं लोक हित में होनी चाहिए पर इस सरकार की योजना हम सबको कष्ट ही पहुँचा रही है। काशी विदुषी परिषद् की महामन्त्री श्रीमती सावित्री पाण्डेय जी ने कहा कि केदारनाथ में 2013 में घटना हुई उससे ही हम अब तक न उबर सके हैं और आज काशी जैसे पवित्र क्षेत्र में मन्दिरो को तोड़ा जा रहा है । दैवी आपदा न आए यहाँ इसका प्रयास करना चाहिए। धरोहर बचाओ समिति के राजेन्द्र जी ने कहा कि स्वामिश्रीः के आन्दोलन को दबाने के लिए वैसा ही प्रयास किया जा रहा है जैसे किसी राजनीतिक आन्दोलन को दबाया जाता है। वरुण जी ने कहा कि मन्दिरों का ध्वस्तीकरण अनुचित है । हमारा निवेदन है कि इस गम्भीर मसले पर चारों पीठों के शंकराचार्य और दशनामी अखाडो के लोगों को भी प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजना चाहिए। सतीश अग्रहरि ने कहा कि पिछले दिनों गणेश प्रतिमा का विसर्जन रोक दिया गया और इतने मन्दिर तोड दिए गए किसी पर भी एफ आई आर नहीं हुई और आज साई की उंगली टूट गई तो एफ आई आर हो गया । कौन बताएगा कि यह देश में क्या हो रहा है ? अशोक अग्रहरि ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो रास्ता बनाया है आगे की पीढ़ियों के लिए उसे हम नहीं छोडेंगे । गुलाब के फूल को लेने पर कांटे लगते ही हैं इसलिए हम सबको एफ आई आर से नहीं डरना है । आगे बढ़ना है और मन्दिरों को बचाना है । सत्य प्रकाश ने कहा कि सत्ता पाने से पहले मोदी जी ने कहा था कि सबसे पहला काम अयोध्या में राम मन्दिर बनाएँगे पर ये तो काशी में 56 विनायको के मन्दिरों को ही तुड़वा रहे हैं । महज सौ साल पुरानी सभ्यता है साई की पर हमारे देवता तो आदि काल के हैं। उनके टूटने पर एफ आई आर हुआ और हमारे देवताओं पर प्रहार हुआ तो हमें कैसी चोट लगी हे यह सोचना पडेगा। खुद को हिन्दू कहकर सत्ता में आए पर हम समझते हैं कि नरेन्द्र मोदी और औरंगजेब में कोई अन्तर नहीं है । काशी विश्वनाथ मन्दिर के पूर्व महन्थ राजेन्द्र तिवारी बबलू ने कहा कि काशी के विकास का खाका उन लोगों ने खीचा है जिनका काशी से कोई नाता नहीं है। आज यह सवाल है कि काशीवासी धर्म को नष्ट करने वालों के साथ है या धर्म को बचाने वालों के साथ ? राम को भजने वालों के साथ या राम को भजाने वालों के साथ ? छत्तीसगढ़ से पधारी उमा ठाकुर ने कहा कि हमें बडा दुख हुआ कि मोक्ष नगरी काशी में ऐसी हालत है । जिस सरकार को प्रमुख रूप से सन्तो ने चुना था कि वे अयोध्या में राम लला को छत देंगे पर यह तो काशी के देवताओं और भक्तों का ही छत छीन रहे हैं पर विश्वनाथ के धाम में कौन अनाथ हो सकता है । इलाहाबाद अधिवक्ता सभा के अध्यक्ष प्रदीप यादव ने कहा कि कही पर भी काशी के लिए कुछ करना हो तो काशी और प्रयाग को एक कर देंगे । आज हमने काशी की हालत देखी तो विश्वास ही नही हुआ कि मन्दिर बनाने का वादा करने वाले लोग कहाँ गए ? मन्दिर बचाओ आंदोलनम् से हम सब जुडेंगे और जहाँ भी आवश्यकता पड़े खड़े होंगे । पन्द्रह सदस्यों के प्रतिनिधिमण्डलने आन्दोलनम् को समर्थन दिया । डा विनय मिश्र ने कहा कि आज स्वामिश्रीः काशी खण्डोक्त सभी मन्दिरों का दर्शन कर रहे हैं यह केवल अपने लिए नहीं पूरे देश के लिए कर रहे हैं। काशी में चल रहा यह आन्दोलन छोटा नहीं है । इसका कोई न कोई निर्णय अवश्य आएगा । आन्दोलन में उन लोगों को भी आना पडेगा जिस मुहल्ले में मन्दिर मकान टूट रहे हैं । प्रमुख रूप से अभय संन्यास आश्रम के महेश चैतन्य ब्रह्मचारी , काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत राजेन्द्र तिवारी बबलू , योगेश्वरानन्द जी, मुरारी स्वरूप जी, कृष्ण प्रियानन्द जी, महेश नवलगडिया जी, अभय शंकर तिवारी, नारायण माहेश्वरी, महेश कक्कड, प्रेम नारायण मलहोत्रा, रवि कक्कड, पीयूष नवलगडिया आदि जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण से हुआ । संचालन मयंकशेखर मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन सलदाह धाम, कवर्धा, छत्तीसगढ़ के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द महाराज ने किया।

इंसान परफैक्ट कब होता है ?

आज मैंने खुद से एक प्रश्न की की क्या कभी कोई व्यक्ति किसी भी काम में परफैक्ट होता है मन ने जवाब दिया की नहीं ?हमसे जिंदगी भर हर काम में गलतियां होती ही रहती है तो फिर इन्सान कैसे कह सकता है की वो इस काम में परफैक्ट है | मरते दम तक इंसान से गलतियाँ होती है फिर भी इंसान दुसरे इंसान से उम्मीद जरुर रखता है की वो उस काम में परफैक्ट हो जाए |मैं ये समझने की कोशिश कर रही हूँ की हम ही कहते है की किसी भी चीज को सिखने के लिए उम्र कम पड़ जाती है फिर भी सिखने को बहुत कुछ बच जाता है |

जब से हम पैदा होते है तब से लोगों की उम्मीदें भी हमसे बंधना शुरू हो जाती है | पैदा होने को कुछ ही मिनट होते है की माता –पिता हमसे ये उम्मीद लगा बैठते है की कब हमारा बच्चा हमे मम्मी पापा कहेगा कब वो चलना सीखेगा |जब हम स्कूल जाना शुरू करते है तब घर वाले हमसे उम्मीद करते है की हर बार हमारा बच्चा ही पूरी क्लास में अवल आये |जैसे तैसा करके हम स्कूल से निकल कर कॉलेज आते है तब वहां घर वालों से ज्यादा फिकर बहार वालों को होनी शुरू हो जाती है की फलाने का बेटा या बेटी किस कॉलेज में एडमिशन ले रहें है किसका बच्चा डॉक्टर बन रहा और किसकी बेटी इंजीनियर |

जब वो कॉलेज की डिग्री लेकर नौकरी करने निकलता है तो अब वो खुद से ही उम्मीद करता है की वो अब अच्छी नौकरी कर अच्छे पैसे कमा लेगा |थोडा इधर उधर भटकने के बाद अच्छी नौकरी भी मिल जाती है अब यहां भी उम्मीद हमारा पीछा नहीं छोडती| अब यहाँ बॉस हमसे उम्मीद करता है की हम अपने काम में परफैक्ट बने चलो थोडा बहुत काम करके हम बॉस को खुश भी कर देते है और उनको अहसास दिलाते है की हम आपकी उम्मीद पर खरा उतरेंगें |

अब हम उम्र के एक एसे मुकाम में आते है जहां हमें एक जीवनसाथी की जरुरत होती है | घर वालों की मर्जी से एक जीवन साथी भी मिल जाता है |जिंदगी में नया रिश्ता जुड़ते ही और उम्मीद की लिस्ट बड जाती है एक अच्छे पति और बीवी बन्ने की उम्मीद |कुछ दिन बीतने के बाद हम एक से दो हो जाते है अब जिन्दगी नया मोड़ लेती है नन्हे नन्हे छोटे से कदम हमारी जिन्दगीं में आते है यहां फिर उम्मीद हमारा दरवाजा खटखटाती है अपने बच्चे की अच्छी परवरिश करने की उम्मीद |अब जिंदगी हमे उस मुकाम में ले आती है जब हमारा जीवन अपने बच्चों पर आश्रित होता है अब हम यहाँ अपने बच्चों से उम्मीद करते है की वो हमारा ख़याल रखे |

सार ये है की जन्म से लेकर मरन तक हम खुद से, दूसरों से सिर्फ और सिर्फ उम्मीद ही करते रहते है वो हमरी उम्मीदों में खरा उतरे कोई गलती ना हो यही सोचते सोचते सारी उम्र निकल जाती है | एक वक्त एसा अता है की हम खुद से ये सवाल पूछते है की  क्या हम एक परफैक्ट इंसान बन पाए है ? जवाब है हाँ भी और नहीं भी क्यूँ की हम जिसकी उम्मीदों में खरा उतरे उसके लिए एक परफैक्ट इंसान है और जिसकी उम्मीद में खरा नहीं उतरे उसके लिए परफैक्ट इंसान नहीं बन पाए |सब से बड़ा सवाल ये है की क्या हम खुद की नज़रों में एक परफैक्ट इंसान बन पायें है ये हमारे लिए सबसे बड़ा सवाल है ? जिन्दगी हमें हर पल कुछ नया सिखाती रहती है और हम हर पल कुछ नया सीखते रहते है जब हर पल सिखाने और सिखाने का काम जारी रहता है तो इंसान परफैक्ट कैसे हो सकता है ?  

वर्षा गलपांडे                  

योग हमारी प्राचीन संस्कृति है जिससे तन और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।

सदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- छत्तीसगढ़ राज्य योग आयोग द्वारा आयोजित तीन दिन व्यापी राष्ट्रीय योग महोत्सव का आज पं दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में रायपुर सांसद रमेश बैस के मुख्य आतिथ्य तथा विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रमेश मोदी के अध्यक्षता में विधिवत शुभारंभ हुआ विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के लोकायुक्त एस. एन. श्रीवास्तव, पं रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ केसरीलाल वर्मा, समाजसेवी डॉ अश्मिता सिंह, छत्तीसगढ़ युवा आयोग के अध्यक्ष कमलचंद भंजदेव, ब्रह्माकुमारी आश्रम की कमला दीदी, युधिष्ठिर महाराज, बीज निगम के अध्यक्ष श्याम बैस, पाठ्य पुस्तक निगम की अध्यक्षा लता उसेंडी तथा वन विकास निगम के अध्यक्ष उपस्थित हुए। सर्व प्रथम राष्ट्रीय गान गया गया तथा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित उपस्थित अतिथियों द्वारा किया गया। योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सचिव एम.एल. पांडेय, सदस्य डॉ रवि श्रीवास ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि हमारे संवेदनशील मुख्यमंत्री चाहते थे छत्तीसगढ़ में लोग योग कर स्वस्थ-व्यस्त-मस्त रहे जिस हेतु हिंदुस्तान का पहला राज्य छत्तीसगढ़ है जहां उन्होंने योग आयोग की स्थापना की और उनकी मंशा है कि भारत की प्राचीन संस्कृति का अभ्यास कर छत्तीसगढ़ वासी स्वस्थ जीवन व्यतीत करें। लोकायुक्त एस. एन. श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि नियत कर्म को करना ही योग है और जो फल की प्राप्ति होती है वह अमृत है।आज के समय का नियत कर्म यही है कि योग के माध्यम से निरोगी रहना। पं रवि शंकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ केसरी लाल वर्मा ने कहा कि तन मन की सुचिता के लिए योग बहुत महत्त्वपूर्ण है। इससे हम एक आदर्श समाज का निर्माण कर सकते हैं। प्राचीन ऋषि मुनियों द्वारा जो शिक्षा दी गई है यदि वह शिक्ष सभी ग्रहण करे तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। डॉ भगवंत सिंह ने कहा कि योग वह विधा है जो तरह तरह के ऊर्जा से हटकर एक अलग ही उर्जा है। योग विधा संजीवनी है तथा योग एक समग्र साधना पद्धति है। साथ ही उन्होंने कहा कि धन का प्रभाव, धन के अभाव से कहीं ज्यादा घातक होता है। उन्होंने साधना मूलक समाज बनाने पर जोर दिया। ब्रह्माकुमारी आश्रम की कमला दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमे वह योग साधना करनी चाहिए जो समाज मे स्वच्छ चरित्र का निर्माण करे। आगे उन्होंने कहा कि आज के समय मे चरित्र गया तो कुछ नहीं गया पर धन गया तो सब गया। अध्यक्षता की आसंदी से बोलते हुए रमेश मोदी ने कहा योग माने जोड़ना। सबसे पहले हमें अपने आपको जोड़ना होगा, यदि ऐसा नहीं करेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि योग एक ऐसा माध्यम है जिससे हम अपने मन पर नियंत्रण पा सकते हैं। मुख्य अतिथि की आसंदी से बोलते हुए सांसद रमेश बैस ने कहा कि योग के लिए मन की एकाग्रता जरूरी है। पहले तंत्र का युग था, मंत्र का युग था पर अब यंत्र का जमाना है। इसी यंत्र रूपी मनुष्य को यदि चलायमान रहना है तो उन्हें प्रतिदिन योग अभ्यास करना होगा। शुभारंभ सत्र के अंत मे योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने सभी विशिष्ठ जनों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया तथा उपस्थित सभी के साथ साथ रायपुर वासियों से आग्रह किया कि वे इस तीन दिन व्यापी राष्ट्रीय योग महोत्सव में जरूर पधारें तथा यहां उपस्थित होने वाले नाड़ी वैध, आयुर्वेदाचार्य, नेचुरोपैथी आदि का निःशुल्क लाभ उठाएं। उक्त जानकारी इस महोत्सव के मीडिया प्रभारी सुदीप्तो चटर्जी ने विज्ञप्ति जारी कर के दिया तथा सभी से इस महोत्सव का लाभ उठाने हेतु आग्रह किया।

छत्तीसगढ सर्विस सेक्टर हेतु आकर्षक राज्य के रूप में उभरा- छगन मूंधड़ा

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- निवेशको को आकर्षित करने हेतु छत्तीसगढ़ राज्य का विशेष आयोजन बॉम्बे एक्सिबिशन सेंटर, मुंबई में १६ मई 2018 को सम्पन्न किया गया। छगनलाल मूंधड़ा की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य के शीर्ष अधिकारियों का दल सुनील मिश्रा मैनिजिंग डायरेक्टर सीएसआईडीसी, डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे , मिशन डायरेक्टर नेशनल हैल्थ मिशन, विवेक आचार्या, डायरेक्टर टेक्निकल एजुकेशन संजय सिंह, जनरल मैनेजर छत्तीसगढ़ टुरिज़्म बोर्ड, कीर्ति लाल काला, प्रिन्सिपल इनवेस्टमेंट ऑफिसर, तथा जीवन पंडित, एनआरडीए ने आयोजन को संबोधित किया। पंकज सारडा, अध्यक्ष सीआईआई छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजन का उद्बोधन करते हुए राज्य मे सर्विस सेक्टर में किए जाने वाले कार्यों के बारें मे बताया। सुनील मिश्रा, एमडी सीएसआईडीसी ने राज्य की आर्थिक प्रगति, उपलब्धि तथा राष्ट्रीय स्तर से अधिक जीडीपी विकास एवं सर्विस सेक्टर का बढ़ता हुआ योगदान एवं इस क्षेत्र में भविष्य की संभानाओं के बारे में बताया। श्री आचार्या द्वारा उद्योग तथा एजुकेशन में संबंधो में प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजना की जानकारी प्रस्तुत की गयी। संजय सिंह ने छत्तीसगढ़ राज्य मे पर्यटन एवं इससे संबन्धित संभावनाओं के बारे में बताया, विशेष रूप से बॅक-वॉटर स्पोर्ट्स तथा गंगरेल डैम, हसदेव बांगों डैम तथा अन्य स्थलों पर एडवेंचर टुरिज़्म का प्रस्तुतीकरण किया गया। अन्य क्षेत्रों में सर्विस सेेक्टर के महतवपूर्ण योगदान एवं निवेश की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए एनआरडीए, ओ.पी. जिंदल स्कूल द्वारा प्रस्तुति दिया गया। निवेशकों को संबोधित करते हुए छगन मूूंधड़ा ने बताया की छत्तीसगढ़ राज्य सभी क्षेत्रों के समान औद्योगिकीकरण एवं इससे स्थानीय जनता के लिये रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ नये क्षेत्रों में निवेश के लिये लगातार किये जा रहे प्रयासों से राज्य द्रुतगति से विकास की ओर अग्रसर है । आज हम राज्य में सर्विस सेक्टर पर आधारित उद्योगों की संभावनाओं पर विचार-विमर्श के लिये आयोजित इस वर्कशाप में उपस्थित हैं। मैं यहां उपस्थित सभी उद्यमियों की ओर से इस महत्पवूर्ण वर्कशाॅप के आयोजकों को धन्यवाद ज्ञापित करता Pहूँ। यह वर्कशाॅप सर्विस एवं इससे संबन्धित उद्योगों के राज्य में विकास हेतु उपयोगी सिद्ध होगा । इस वर्कशाॅप का हिस्सा बनना मेरे लिये सम्मान का विषय रहा एवं सभी के समक्ष अपनी बात रखते हुए बहुत ही प्रसन्नता महससू हुई । तेजी से बढत़े सविर्स सेक्टर, तथा इन उत्पादों के बाजार एवं रिटेल सेक्टर की प्रगति को देखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं, बाजार के अध्ययन, एवं निवेश को प्रोत्साहन देने के लिये यह आयोजन महत्वपूर्ण है । छत्तीसगढ़ देश का 10 वां बड़ा राज्य है । भारत सरकार की ‘‘मेक इन इंडिया‘‘ अभियान को सफल बनाने में छत्तीसगढ़ राज्य अग्रणी रहा है । ‘ईज आॅफ डूईंग बिजनेस‘ के क्षेत्र में देश में छत्तीसगढ़ राज्य को 32 राज्यों में चौथा स्थान प्राप्त हुआ है । छत्तीसगढ़ 7 राज्यों से अपनी सीमा साझा करता है अतः यह मध्य भारत के बाजार हेतु एक गेटवे के रुप में स्थापित हो चकुा है। क्षमताओं के अधिकाधिक उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों की प्राचुरता एवं कुशल प्रशासन के कारण छत्तीसगढ़ निवेश के लिये पसंदीदा स्थल के रुप में उभरा है। भूमि, जल, विद्युत, बाजार, शासकीय नीतियां तथा व्यापार हेतु अच्छे वातावरण के कारण छत्तीसगढ़ निवेशकों के लिये पूर्ण गंतव्य है। यह वर्कशाॅप राज्य में नये क्षेत्रों में मील का पत्थर साबित होगा एवं माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में राज्य उत्तरोत्तर प्रगति करेगा । समापन समारोह में छगन मूूंधड़ा ने देश -विदेश के सर्विस सेक्टर के निवेशकों से मुलाकात कर राज्य द्वारा किए गए प्रमुख कार्यों की चर्चा की तथा प्रमुख रूप से जाम्बिया, कोंगों, घाना आदि देशो से आयें निवेशको से मुलाकात कर उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य में निवेश हेतु आमंत्रित किया ।

उपराष्ट्रपति के हाथों आज उपाधि लेंगे BBN24 के संपादक कैलाश जायसवाल

हुमेश जायसवाल सह संपादक

रायपुर :-कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के तृतीय दीक्षांत समारोह-16 मई 2018 के लिए उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया0 नायडू और मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की गौरवमयी उपस्थिति में सम्पन्न होने जा रहे दीक्षांत समारोह में एम एस सी ( इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की उपाधि हेतु दीनदयाल ऑडिटोरियम में पूर्वाभ्यास करते हुए BBN 24 के संपादक कैलाश जायसवाल ...वैसे तो हुनर को कोई पहचान की मोहताज नहीं होता लेकिन फिर भी हम आपको बता देते हैं कैलाश जायसवाल वह शख्सियत हैं कि जिन्होंने पत्रकारिता में एक अपनी अलग ही महारत हासिल की है आपको बता दें कि कैलाश जायसवाल जी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ ,आईबीसी 24 ,स्वराज एक्सप्रेस जैसे प्रतिष्ठित निजी न्यूज चैनलों में काम करने के बाद छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ता हुआ चैनल bbn24news.com में अपनी सेवाएं दे रहे जहां वे संपादक के पद पर है। आज कैलाश जायसवाल उपराष्ट्रपति के हाथों दीक्षांत समारोह में अपनी उपाधि लेंगे जिससे BBN24 की टीम में काफी उत्साह का माहौल है ।वहीं भी BBN24 परिवार ने उनको उज्ज्वल भविष्य शुभकामनाएं भी दी।

महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नही ...ईश्वरी भोय का चयन विश्व की सबसे बड़ी फिजिक्स लैब में रचा कीर्तिमान

सत्यजीत घोष

रायगढ़ :-आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है. हर क्षेत्र में महिलाएं रोज नया कीर्तीमान रच रही हैं. इसी क्रम में प्रदेश की ईश्वरी भोय का चयन विश्व की सबसे बड़ी फिजिक्स लैब में हुआ है. ईश्वरी देश की की अकेली महिला हैं जिनका चयन इस संस्था में हुआ है. आपको बता दें विश्व की सबसे बड़ी यह संस्था स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित है,जिसका नाम यूरोपीय नाभिकीय अनुसन्धान संगठन (CERN)  है. इस संस्था 20 यूरोपीय देश सदस्य हैं l

ईश्वरी भोय रायगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक की सरिया की ही रहने वाली हैं और पेशे से शिक्षिका हैं. और गाड़ापारा मिडिल स्कूल में पढ़ाती हैं. ईश्वरी ने चर्चा करते हुए बताया कि विश्व के 34 लोगों का चयन इस प्रयोगशाला के लिए हुआ है जिसमें वे भी शामिल हैं. ईश्वरी ने बताया कि स्कूल के दिनों में ही भौतिक विषय में रूचि थी. हालांकि उन्होंने हिंदी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएट किया है, लेकिन फिजिक्स में उनकी रूचि हमेशा ज्यादा रही है. इस संस्था में जाने के लिए उन्होंने ऑनलाइन फार्म भरा था. जिसमें कठिन सवाल किए गए थे. इसमें पास होने के बाद संस्था ने उन्हें एक मिनट का प्रेजेंटशन मंगवाया गया.संस्था को उनका प्रेजेटेंशन पंसद आया और उनका चयन हो गया. जिले की कलेक्टर सम्मी आबिदी ने उनके चयन के लिए बधाई भी दिया है.

छत्तीसगढ़ के शक्तिपीठ मे से एक माँ चंद्रहासिनी का दरबार

जांजगीर चाम्पा: - चंद्रहासिनी देवी मंदिर चंद्रपुर में महानदी के तट पर स्थित है। चंद्रपुर जांजगीर-चांपा जिले में डभरा तहसील में बसा हुआ एक नगर है यहाँ प्रसिद्ध चंद्रहसिनी देवी की एक प्राचीन मंदिर है। चंद्रपुर छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर से 221 किलोमीटर , जिला मुख्यालय जांजगीर से 120 किलोमीटर तथा रायगढ़ से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां माता चंद्रहासिनी का वास है जहां महानदी अपने स्वच्छ जल से माता चंद्रसेनी के पांव पखारती है। यहां छत्तीसगढ़ के साथ-साथ उड़ीसा के भी श्रद्धालु भारी संख्या में माता के दरबार पहुंचते हैं कहा जाता है कि मां चंद्रहासिनी संतान दायनी है इसीलिए लोग संतान प्राप्ति के लिए माता से मन्नत मांगते हैं।

सती के अंग जहां-जहां धरती पर गिरे थे, वहां मां दुर्गा के शक्तिपीठ माने जाते हैं। महानदी व माण्ड नदी के बीच बसे चंद्रपुर में मां दुर्गा के 52 शक्तिपीठों में से एक स्वरूप मां चंद्रहासिनी के रूप में विराजित है। चंद्रमा की आकृति जैसा मुख होने के कारण इसकी प्रसिद्धि चंद्रहासिनी और चंद्रसेनी मां के नाम जगत में फैल रही है, लेकिन इसका स्वरूप चंद्रमा से भी सुंदर है।

माँ नाथलदाई का मंदिर कभी बाढ़ में नही डूबता

चंद्रहासिनी मंदिर के कुछ दूर आगे महानदी के बीच मां नाथलदाई का मंदिर स्थित है कहा जाता है कि मां चंद्रहासिनी के दर्शन के बाद माता नाथलदाई के दर्शन भी जरूरी है अन्यथा माता नाराज हो जाती है और यह भी कहा जाता है कि महानदी में बरसात के दौरान लबालब पानी भरे होने के बाद भी मां नाथलदाई का मंदिर नहीं डूबता।

माँ चंद्रहासिनी की कहानी

पूर्व में चंद्रपुर का नाम डोंगरी गांव था क्योंकि मां चंद्रहासिनी का मंदिर पहाड़ के ऊपर स्थित है ।एक किंवदंति के अनुसार हजारों वर्षो पूर्व सरगुजा की भूमि को छोड़कर माता चंद्रसेनी देवी उदयपुर और रायगढ़ होते हुए चंद्रपुर में महानदी के तट पर आती हैं। महानदी की पवित्र शीतल धारा से प्रभावित होकर यहां पर वह विश्राम करने लगती हैं। वर्षों व्यतीत हो जाने पर भी उनकी नींद नहीं खुलती। एक बार संबलपुर के राजा की सवारी यहां से गुजरती है, तभी अनजाने में चंद्रसेनी देवी को उनका पैर लग जाता है और माता की नींद खुल जाती है। फिर स्वप्न में देवी उन्हें यहां मंदिर निर्माण और मूर्ति स्थापना का निर्देश देती हैं। संबलपुर के राजा चंद्रहास द्वारा मंदिर निर्माण और देवी स्थापना का उल्लेख मिलता है। देवी की आकृति चंद्रहास जैसे होने के कारण उन्हें चंद्रहासिनी देवी भी कहा जाता है। बाद में राजपरिवार ने मंदिर की व्यवस्था का भार यहां के जमींदार को सौंप दिया यहां के जमींदार ने उन्हें अपनी कुलदेवी स्वीकार करके पूजा अर्चना की। इसके बाद से माता चंद्रहासिनी की आराधना जारी है यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नवरात्रि उत्सव के दौरान दूर-दूर से भक्त चंद्रहसिनी देवी मंदिर मे पूजा अर्चना के लिए आते हैं ।

माँ चंद्रहासिनी के पैर के निशान

वही कहा जाता है कि मां चंद्रहासिनी जहां प्रकट हुई थी उनके पांव के निशान आज भी वहां पर मौजूद है लोग मां चंद्रहासिनी के दर्शन के बाद उनके चरण कमल के चिन्ह को देखने भी पहुंचते हैं । वही जिन श्रद्धालुओं की मन्नत पूरी हुई रहती है वह वही बकरे की बलि भी देते हैं।

इस घटना के बाद माँ की ख्याति और दूर दूर तक फैली

एक बार एक निर्दयी पुलिसवाला अपने बेटे को उसकी सौतेली मां के कहने पर महानदी के पुल के ऊपर से पानी पर फेंक देता है। जिसे मां चंद्रहासिनी मां नाथल दाई अपने आँचल में ले लेते हैं रात में मां चंद्रहासिनी और माँ नाथलदाई बच्चे को अपने साथ रखते हैं सुबह एक मछुआरा नदी के बीच में टीले के पास उसका नाव अपने आप चला जाता है वहां पर जब वह जा कर देखता है तो वहां पर बच्चा खेलते हुए नजर आ रहा था जिसके बाद मां की महिमा सभी जान गए तब से मां चंद्रहासिनी मां नाथलदाई की ख्याति फैल गई।

कुछ वर्ष पूर्व चंद्रपुर मंदिर पुराने स्वरूप में था, लेकिन जब से ट्रस्ट का गठन हुआ, इसके बाद से मंदिर व परिसर का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। मंदिर का मुख्यद्वार इतना आकर्षक और भव्य है कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु उसकी तारीफ किए बगैर नहीं रूकते। इसके बाद मंदिर परिसर में अर्द्धनारीश्वर, महाबलशाली पवन पुत्र, कृष्ण लीला, चीरहरण, महिषासुर वध, चारों धाम, नवग्रह की मूर्तियां, सर्वधर्म सभा, शेष शै्यया तथा अन्य देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियां जीवन्त लगती हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर में ही स्थित चलित झांकी महाभारत काल का सजीव चित्रण है, जिसे देखकर महाभारत के चरित्र और कथा की विस्तार से जानकारी भी मिलती है। दूसरी ओर भूमि के अंदर बनी सुरंग रहस्यमयी लगती है और इसका भ्रमण करने पर रोमांच महसूस होता है।भूलभैया मिर्रर हाउस ,हॉरर हाउस जो दर्शर्णार्थियो को उत्साहित कर देता तो वहीं माता चंद्रसेनी की चंद्रमा आकार प्रतिमा के एक दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। चंद्रहासिनी माता का मुख मंडल चांदी से चमकता है।

“जुगाड़ की दुनिया”

  

 

क्या आप को पता है की आज जो हम शम्पू उपयोग करते है वो सबसे पहले कहाँ बना? क्या आप को ये पता है की हम जो शर्ट में बटन लगते है वो कहाँ बना ? अच्छा ये तो पता ही होगा की हम जो सुबह सुबह फ्लश युस करते है वो सबसे पहले कहाँ बना ? क्या नहीं पता चलो ये सब जान्ने के पहले हम सब एक कहानी पड़ते है |

एक गाव में एक सोहन नाम का कुम्हार अपने पुरे परिवार के साथ रहता था |कुछ दिन बाद उसकी पत्नी का देहांत हो गया | पत्नी के चले जाने के बाद वो अकेला हो गया था पर परिवार में बेटा और बहूँ साथ होने से  उसे थोड़ी संतुष्टि थी की उसका परिवार उसके साथ है |एक दिन सोहन को मुंग का हलवा खाने का मन किया उसने बहु को कहा की आज मुंग दाल का हलवा बना लो उसकी बहूँ ने कहा  की वो नहीं बना सकती अभी जो बना है वही खा लें |ये बात सोहन को खूब खल गई |

उसने पास के गाँव की एक हम उम्र विधवा महिला से शादी कर ली |एक दिन सोहन अपने बेटे के साथ चांदनी रात को हुक्का पिते बात चित करते बैठे थे रात काफी हो चुकी थी सोहन ने आपनी बीवी को आवाज लगाईं और कहाँ की अजी सुनती हो आज ज़रा तुम मुंग की दाल का हलवा और पूरी बना लो |बीवी ने आवाज लगाई अभी लाइ तब तक आप लोग हाथ मुह धो लो |सोहन को पता था की घर में मुंग की दाल ख़त्म हो गई है |सोहन की बीवी ने हलवा और पूरी खाने में परोस दी ये देख सोहन ने अपनी बीवी से पूछा की दाल तो थी नहीं फिर तो बीवी ने कहाँ की दाल थी नहीं पर मुंग दाल की बड़ी रखी थी उसे मैंने थोड़ी देर पानी में भीगा के रखी और फिर घी से छोक लगा कर हलवा बना दी |

वास्तव में यहीं सहीं बात है की भारत की औरते अपने परिवार को छोटे छोटे जुगाड़ करके अपने परिवार की खुशियों का ख्याल रखती है | हम और आप भी तो ऐसा ही करके अपना काम निकाल ही लेते है | जिसे हम हमारी भाषा में “जुगाड़” कहते है | “जुगाड़” शब्द की उत्पत्ति के पीछे संस्कृत शब्द है “युक्ति”,जिसका प्रचलित रूप है “जुगत” और “जुगत” का क्षेत्रीय रूप है “जुगाड़” विशेषकर हरियाणा और पंजाब में ज्यादा ये शब्द बोला जाता है | हम सब अक्सर लोगों से पूछते है की ये काम तो नामुमकिन था फिर  कैसे हो गया तो हमे यहीं सुनने को मिलता है की ये सब जुगाड़ करके कर लिया | ये शब्द हमारी आम जिन्दगी में हर रोज प्रयोग होने वाला आम शब्द है |

आज हम इसी जुगाड़ से जुडी हुई कई रोचक बाते जानेंगें |जुगाड़ का मतलब है किसी प्रॉब्लम का आसान से आसान तरीके का पता लगाना जो बहुत ही कम खर्च में हो जाये | भारत में ऐसी बहुत सी चीजें है जो हमारे यहाँ पहली बार बनी और पूरी दुनिया में मशहूर हो गई | जीहाँ चाहे वो शतरंज हो या अलग अलग तरह का संगीत या रेशमी साड़ियाँ ये सब भारत की ही देंन है | शम्पू भी पहली बार भारत में ही बना | शम्पू शब्द से पहले चम्पी आया फिर चम्पू बना और बाद में शम्पू शब्द बना | हमारी शर्ट में लगने वाले बटन भी यही पहली बार बने है |ये सब कैसे हुआ, जुगाड़ से |हम भारतीय लोग जुगाड़ करने में माहिर होते है कोई भी काम हमारे लिए मुश्किल नहीं क्यूँ की हमारे पास हर चीज के लिए जुगाड़ मौजूद होता है |   

जुगाड़ करते-करते हमने कई ऐसी कई चीजों का निर्माण कर लिया है जो आज कई लोगों का महत्व पूर्ण रोजगार बन गया है | आज हम जो पानी पूरी इतने चाव से खाते है वो भी जुगाड़ का ही नतीजा है |ये समझने के लिए हमे इतिहास में जाना होगा |एक दिन कुंती ने द्रोपती को थोडा सा आटा और कुछ आलू दिए और कहा  की इससे कुछ भी बना लो और साथ ही ये भी कहाँ की बनाना ऐसा की पाँचों पाडवों का पेट भर जाये | तो द्रोपती ने आलू उबाले और छोटी छोटी पुरियां बनाई और अलग –अलग तरह का पानी बनाया और उन छोटी छोटी पुरियों में आलू को डाल कर और उसमे अलग अलग तरह का पानी डाल पांडवों को खाने के लिए दे दिया तो यहाँ से जन्म हुआ पानी पूरी का | ऐसे ही रसगुल्ला ,जलेबी और भी बहुत सी ऐसी ही मिठाईयों का जन्म जुगाड़ के कारण हुआ है |

 आजकल पढाई का तरीका बदल रहा है |नई पीढ़ी की रूचि विज्ञान और कला में कम है | ज्यादातर छात्र इस तरह के विषय चुन रहे हैं जो व्यापार से और पैसा कमाने से सम्बंधित है |इस लिए जुगाड़ करने वाली प्रतिभा कम हो रही है |असल में जुगाड़ करने के लिए खाली वक्त भी चाहिए जो आज कल किसी के पास भी नहीं है |

ऐसा ही एक किस्सा जुडा है महात्मा गाँधी की जिंदगी से |जी हाँ एक बार महात्मा गाँधी को उपहार में फोर्ड कार मिली| गाँधी जी ने उस कार के आगे दो बैल लगा दिए और उसके बाद उस कार का नाम रख दिया ऑक्स-फोर्ड |

इसे ही गुजरात के शहर राजकोट के रहने वाले मंसुक भाई प्रजापति के द्वारा बनाया गया मिटटी का फ्रिज भारत में ही नहीं पुरे विशव में प्रसिद्ध है | ये फ्रिज भी मंसुक भाई ने जुगाड़ करके ही बनाया है | ऐसे ही कई चीजे जैसे मिटटी का फ़िल्टर ,मिटटी का तवा ,मिटटी का प्रशेर कुकर आदि बहुत सी चीजों का निर्माण किया जिसकी डिमांड भारत में ही नहीं दुसरे देश में भी है |

जुगाड़ शब्द केवल भारत में ही बोला जाता है| हाल ही में आई फिल्म “फुकरे” से प्रचलित शब्द “जुगाड़” को ऑक्सफोर्ड ने आधिकारिक तौर पर अपने नवीनतम अपडेट में शामिल कर लिया है,जिसका अर्थ है “सिमित संसाधनों को अभिनव तरीके से उपयोग कर समस्या को सुलझाना |”

देखा आपने जुगाड़ से कितनी अच्छी –अच्छी चीजों का निर्माण हो जाता है | जुगाड़ के कारण ही कई लोगों को शोहरत हासिल हुई |जुगाड़ शब्द बहुत ही दिलचस्प शब्द है | जुगाड़ का काम प्रशंसनीय काम है इसे हमे ख़ुशी ख़ुशी अपनाना चाहिए | इसलिए यह साबित हो गया है, की दुनिया उमीद पर नहीं, जुगाड़ पे दुनिया कायम है |

वर्षा भिवगड़े गलपांडे

भारत में मुद्रा के प्रचलन की कहानी

भारत में मुद्रा का प्रचलन 18 व़ी सदी से प्रारंभ हुआ था उस समय नोटों को प्राइवेट बैंक छापा करती थी जैसे बैंक ऑफ़ बंगाल, बैंक ऑफ़ मुंबई, बैंक ऑफ़ मद्रास | सन 1861 के ब्रिटिश इण्डिया करेंसी एक्ट के मुताबिक सिर्फ ब्रिटिश इंडिया सरकार ही नोट छाप सकती थी और भारत के स्वतंत्र होने तक ब्रिटिश राज के नाम पर नोटों का चलन चलता रहा जिन पर ब्रिटिश राजा के चित्र बना करते थे | 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद भारत सरकार के सामने कई चुनौतियां थी सबसे बड़ी चुनौती थी मुद्रा की | उस समय रिसर्व बैंक ने 1947 से 1950 तक अंतरिम काल के लिए ब्रिटिश काल के 5 रूपये, 2 रूपये और 1 रूपये के नोटों का चलन बनाए रखा | इन नोटों में ब्रिटिश राजा जोर्ज शिष्ठ्म का चित्र बना होता था | 1950 में जब भारत गणतंत्र बना तो तब नए नोटों का चलन आरंभ हुआ इन नोटों पर अशोक स्तंभ का चित्र था मूल्य को हिंदी और अंग्रजी में लिखा जाता था | 1953 में रूपये के बहुवचन को लेकर कई सवाल उठाये गये अब रुपया के बदले रुपये लिखा जाने लगा |भारतीय रुपये अब मुंबई और कोलकत्ता के टकसालों पर छापे जाने लगा | आगे चलकर दो और नई टकसालो का निर्माण हुआ जो हैदराबाद और नॉएडा में स्थित थी | इन नोटों को बनाने के लिए बाल्सम की लकड़ी के गुदे का प्रोयोग किया जाता है साथ ही कॉटन के रेशों को भी गुदे में मिलाया जाता है एस मिश्रण की आयु एक आम कागज़ के टुकड़े से काफी ज्यादा होती है | मजबूती के इसे जलेटीन में डुबोया जाता है ये पद्धति सालों साल ऐसे ही बनी रही जब तक टकसालों में आधुनिक मशीनों को नहीं लगाया गया | समय के साथ और भी नई टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाने लगा ताकि नोटों को और भी सुरक्छित रखा जा सके | 1954 में 1000 ,5000 और 10000 के उच्च नोटों को प्रचलन में लाया गया तीनो नोटों पर अलग चित्रों का प्रयोग किया गया 1000 के नोट पर तंजौर के मंदिर का चित्र था , 5000 के नोट पर गेट ऑफ़ इंडिया का चित्र बनाया था और 10000 के नोट पर अशोक स्तम्भ का चित्र था | मूल्य को अंग्रजी और हिंदी में लिखा जाता था इस प्रकार के नोट ब्रिटिश राज के समय प्रचलन में लाये गये थे परन्तु दुर्बल अर्थ व्यवस्था के कारण इन नोटों को बंद करना पड़ा | उस समय 2, 5, 10 और 100 के नोटों को भी चलाया गया और हर नोटों के अग्र भाग में अशोक स्तम्भ का चित्र बना हुआ था और दुसरे पृष्ट में अलग अलग चित्रों का प्रयोग किया गया था | 2 रूपये में शेर का चित्र, 5 रूपये में हिरन पर चित्र, 10 रूपये के नोट पर पानी के जहाज का और 100 के नोटों पर दो हाथी का चित्र बना हुआ था जो भारत की जैविक स्थिति को दर्शाता था साथ ही एक जलांक भी बनाया गया जिसमे अशोक स्तंभ का बनाया गया | इस प्रकार के जलांक बनाना नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए बहुत ही महत्व पूर्ण था | 1960 से 1969 के दशक के अंत तक भारत की अर्थ व्यवस्था चरमरा रही थी | भारतीय रिजर्व बैंक ने बदले के नोट 1000,500,10000 के नोटों का चलन बंद कर दिया और 70 के दशक में नये छोटे नोटों का प्रचालन शुरू किया | इनमे 20 और 50 रूपये के नए नोट थे | ये नोट दिखने में साफ और आधुनिक दीखते थे | 20 रूपये के पृष्ट भाग में कोणार्क चक्र का चिन्ह और 50 रूपये के नोट पर संसद का चित्र बना होता था | कोणार्क चक्र का चिन्ह भारत की वास्तु कला को प्रदर्शित करता है और संसद का चित्र भारत के गणतंत्र होने का प्रतिक है | दोनों नोटों के अग्र भाग में अशोक स्तम्भ बना हुआ होता और इसी का जलांक भी बना होता था | 1980 में नऐ शैली के नोटों को प्रदर्शित किया गया इस समय बने नोटों पर चिन्ह और चित्रों पर ज्यादा ध्यान दिया गया | हर चिन्ह और चित्र का अपना एक महत्त्व था जो देश की प्रगति को दर्शाता था | 2 रूपये के नोट पर आर्यभट उपग्रह का चित्र बना था जो भारत की साइंस और टेक्नोलोजी को दर्शता था | 1 रूपये और 5 रूपये के नोट पर आयल रिंग और खेती बड़ी की मशिनों का चित्रित किया गया था जो भारत के आधुनिक कारण को दर्शाता था | साथ ही 10 रूपये के नोट पर मोर के चित्र का उपयोग किया गया था इन नोटों के साथ साथ कई सिक्कों का भी प्रयोग किया गया था जैसे 5 पैसा, 10 पैसा , 25 पैसा , 50 पैसा और 1 रूपये के सिक्को को चलाया गया | 1980-1989 के अंत तक भारत की अर्थ व्यवस्था तेजी से बड रही थी भारतीय रिजर्व बैंक ने 500 के नये नोट बनाये इस नोट में कई नाइ बातें थी | नोट पर महात्मा गाँधी का चित्र बनाया गया था और अशोक स्तम्भा को जलांक के रूप में चित्रित किया गया था | 1990 के आरंभ में टेक्नोलौजी बड रही थी सुरक्षा के बदले नोटों में बदलाव जरुरी था | 1996 में महात्मा गाँधी के नोटों की श्रृखला को बनाया गया इन नोटों में नया जलांक यानि की वौटर मार्क नए चित्र और भी सुरक्षा के लिए नये बदलाव किये गये | नोटों को ऐसा बनाया गया था की एक अंधा वैक्ति भी इसे पड़ सके | इन नोटों को आधुनिक मशीन से बनाया जाता है जिससे उसकी आयु लम्बी बनी रहे | इन नोटों में 5,10,50 और 100 रूपये के नोट बनाये गये इन नोटों में अग्र भाग में महात्मा गांधी का चित्र बनाया गया हिंदी में मूल्य लिखा है और साथ ही इंग्लिश और हिंदी में रिजर्व बैंक लिखा जाता है | इन नोटों में मूल्य के साथ साथ माप पर भी काफी ध्यान दिया गया अलग नोटों की लम्बाई और चौड़ाई अलग अलग होती है | एक उत्कृष्ट जलांक तकनीक से महात्मा गाँधी का चित्र बनाया जाता है और कागज के सूखने से पहले एक चांदी की रेखा बने जाती है यही जलांक और चांदी की रेखा नोटों को सुरक्षा प्रदान करती है और इसकी वजह से इन नोटों की नक़ल बनाना आसान नहीं है | 2000 तक नोटों में कोई बदलाव नहीं आये | भारतीय मुद्रा का उपयोग 60 सालों से भी ज्यादा से चल रहा है परन्तु भारतीय मुद्रा का कोई चिन्ह नहीं है जैसे डॉलर का | 60 सालों में चिन्ह के बदले रुपीस को छोटा कर Rs ही लिखा जाता है | 2009 में भारती सरकार ने ग्राफिक डीजाईनरों के लिए एक प्रतियोगिता रखी जिसमें भारतीय डीजाईनरों को भारतीय मुद्रा को दर्शाने के लिए एक चिन्ह बनाना था | इस प्रतियोगिता में उदय कुमार धर्म लिंगम द्वारा बनाया गया चिन्ह (₹) चुना गया | भारतीय मुद्रा को अपना एक चिन्ह मिला |ये ₹ चिन्ह देवनागरी र और इंग्लिश के R के जैसा दीखता है | जल्द ही चिन्ह प्रख्यात हो गया ₹ इस चिन्ह का प्रयोग वस्तु की MRP के साथ होने लगा | 2012 में भारतीय सरकार ने इस चिन्ह हो सिक्कों और नोट पर भी बनाना शुरू कर दिया | 2016 में भारत सरकार ने फिर नोटों की सुरक्षा को देखते हुए कुछ बदलाव किये | इसमें 500 और हजार रूपये के नोटों का प्रचलन बंद करके 2000 के नए नोटों का प्रचलन शुरू हुआ | इन नोटों का कलर गुलाबी रखा गया और जितने भी पुराने 1000 और 500 के पुराने नोट थे उनको बैंक में जमा करवाया गया ताकि नकली नोटों के बाजार को रोका जा सके और भारत सरकार ने नेट बैंकिंग पर ज्यादा जोर दिया आज 50,200,500 के भी नए नोट उपलब्ध है इनकी बनावट और रंग पहले के नोटों की तुलना में बिलकुल अलग हैं | वर्षा बी गलपांडे