देश

योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब की याद ताजा कर दिए : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 28 जून से 7 दीन व्यापी "मंदिर बचाओ महायज्ञ" वाराणसी के केदारघाट में आयोजित किया जा रहा है। इस "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: आज वाराणसी जिले के गाँवों - बेलवरियाँ, नक्षेतपुर, दसनीपुर, आदमपुर, चंदापुर एवं मुर्दहाँ गांवों के गांवसियों को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की विस्तृत जानकारी दिए और उन्हें "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण दिए। स्वामिश्री ने अपने विचार रखते हुए प्रत्येक गाँव के गाँव वासियों से कहा कि जिस तरह पुराणों में वर्णित तीन मन्दिरों के साथ भारत माता मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़ दिए गए उससे यह प्रतीत हो रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म पर कुठाराघात किया जिससे वे औरंगजेब से बहुत बड़ा कुकृत्य किये जो सहसा ही औरंगजेब की याद ताजा कर देते हैं। आगे उन्होंने कहा कि जो उनका विरोध करते हैं उन्हें वे विभिन्न तरीके अपनाकर परेशान करते हैं। स्वामिश्री ने एक बहुत बड़ा प्रश्न किया कि जो मोदी रामलला, हिंदुत्त्व के मुद्दों के बल पर सरकार बनाया वे पूरी दुनिया तो घूम लिए पर आज तक रामलला के दर्शन हेतु अयोध्या नहीं गए और न ही राम मंदिर बनाये। गाँव के लल्लू यादव, डबोरा व आदि गांवसियों ने कहा कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा - सबका साथ, सबका विकास अभी तक समझ नहीं आया साथ ही उन्होंने यह भी संदेश यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को दिया कि सनातन धर्म के मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उन्हें त्वरित निर्माण कर श्रद्धालुओं को पूजा करने का अवसर प्रदान करे। उनका जो पंचक्रोशी यात्रा है वो इस घटना के घटित होने पर पूरा ढोंग लग रहा है। एक महंत मुख्यमंत्री क्यों इस तरह के कृत्य को करवा रहे हैं ? गाँव वासियों ने यह भी कहा कि मंदिर हमारे सनातन धर्म के विकास का केंद्र है तथा मंदिर हमारे एकता का प्रतीक है। महिलाओं ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया और उन्होंने प्रश्न उठाया कि हमारे आस्था के केंद्र पर ऐसा प्रहार क्यों एवं किसलिए।

योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब की याद ताजा कर दिए : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 28 जून से 7 दीन व्यापी "मंदिर बचाओ महायज्ञ" वाराणसी के केदारघाट में आयोजित किया जा रहा है। इस "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: आज वाराणसी जिले के गाँवों - बेलवरियाँ, नक्षेतपुर, दसनीपुर, आदमपुर, चंदापुर एवं मुर्दहाँ गांवों के गांवसियों को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की विस्तृत जानकारी दिए और उन्हें "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण दिए। स्वामिश्री ने अपने विचार रखते हुए प्रत्येक गाँव के गाँव वासियों से कहा कि जिस तरह पुराणों में वर्णित तीन मन्दिरों के साथ भारत माता मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़ दिए गए उससे यह प्रतीत हो रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म पर कुठाराघात किया जिससे वे औरंगजेब से बहुत बड़ा कुकृत्य किये जो सहसा ही औरंगजेब की याद ताजा कर देते हैं। आगे उन्होंने कहा कि जो उनका विरोध करते हैं उन्हें वे विभिन्न तरीके अपनाकर परेशान करते हैं। स्वामिश्री ने एक बहुत बड़ा प्रश्न किया कि जो मोदी रामलला, हिंदुत्त्व के मुद्दों के बल पर सरकार बनाया वे पूरी दुनिया तो घूम लिए पर आज तक रामलला के दर्शन हेतु अयोध्या नहीं गए और न ही राम मंदिर बनाये। गाँव के लल्लू यादव, डबोरा व आदि गांवसियों ने कहा कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा - सबका साथ, सबका विकास अभी तक समझ नहीं आया साथ ही उन्होंने यह भी संदेश यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को दिया कि सनातन धर्म के मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उन्हें त्वरित निर्माण कर श्रद्धालुओं को पूजा करने का अवसर प्रदान करे। उनका जो पंचक्रोशी यात्रा है वो इस घटना के घटित होने पर पूरा ढोंग लग रहा है। एक महंत मुख्यमंत्री क्यों इस तरह के कृत्य को करवा रहे हैं ? गाँव वासियों ने यह भी कहा कि मंदिर हमारे सनातन धर्म के विकास का केंद्र है तथा मंदिर हमारे एकता का प्रतीक है। महिलाओं ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया और उन्होंने प्रश्न उठाया कि हमारे आस्था के केंद्र पर ऐसा प्रहार क्यों एवं किसलिए।

योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब की याद ताजा कर दिए : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 28 जून से 7 दीन व्यापी "मंदिर बचाओ महायज्ञ" वाराणसी के केदारघाट में आयोजित किया जा रहा है। इस "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: आज वाराणसी जिले के गाँवों - बेलवरियाँ, नक्षेतपुर, दसनीपुर, आदमपुर, चंदापुर एवं मुर्दहाँ गांवों के गांवसियों को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की विस्तृत जानकारी दिए और उन्हें "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण दिए। स्वामिश्री ने अपने विचार रखते हुए प्रत्येक गाँव के गाँव वासियों से कहा कि जिस तरह पुराणों में वर्णित तीन मन्दिरों के साथ भारत माता मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़ दिए गए उससे यह प्रतीत हो रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म पर कुठाराघात किया जिससे वे औरंगजेब से बहुत बड़ा कुकृत्य किये जो सहसा ही औरंगजेब की याद ताजा कर देते हैं। आगे उन्होंने कहा कि जो उनका विरोध करते हैं उन्हें वे विभिन्न तरीके अपनाकर परेशान करते हैं। स्वामिश्री ने एक बहुत बड़ा प्रश्न किया कि जो मोदी रामलला, हिंदुत्त्व के मुद्दों के बल पर सरकार बनाया वे पूरी दुनिया तो घूम लिए पर आज तक रामलला के दर्शन हेतु अयोध्या नहीं गए और न ही राम मंदिर बनाये। गाँव के लल्लू यादव, डबोरा व आदि गांवसियों ने कहा कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा - सबका साथ, सबका विकास अभी तक समझ नहीं आया साथ ही उन्होंने यह भी संदेश यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को दिया कि सनातन धर्म के मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उन्हें त्वरित निर्माण कर श्रद्धालुओं को पूजा करने का अवसर प्रदान करे। उनका जो पंचक्रोशी यात्रा है वो इस घटना के घटित होने पर पूरा ढोंग लग रहा है। एक महंत मुख्यमंत्री क्यों इस तरह के कृत्य को करवा रहे हैं ? गाँव वासियों ने यह भी कहा कि मंदिर हमारे सनातन धर्म के विकास का केंद्र है तथा मंदिर हमारे एकता का प्रतीक है। महिलाओं ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया और उन्होंने प्रश्न उठाया कि हमारे आस्था के केंद्र पर ऐसा प्रहार क्यों एवं किसलिए।

योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब की याद ताजा कर दिए : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 28 जून से 7 दीन व्यापी "मंदिर बचाओ महायज्ञ" वाराणसी के केदारघाट में आयोजित किया जा रहा है। इस "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: आज वाराणसी जिले के गाँवों - बेलवरियाँ, नक्षेतपुर, दसनीपुर, आदमपुर, चंदापुर एवं मुर्दहाँ गांवों के गांवसियों को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की विस्तृत जानकारी दिए और उन्हें "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण दिए। स्वामिश्री ने अपने विचार रखते हुए प्रत्येक गाँव के गाँव वासियों से कहा कि जिस तरह पुराणों में वर्णित तीन मन्दिरों के साथ भारत माता मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़ दिए गए उससे यह प्रतीत हो रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म पर कुठाराघात किया जिससे वे औरंगजेब से बहुत बड़ा कुकृत्य किये जो सहसा ही औरंगजेब की याद ताजा कर देते हैं। आगे उन्होंने कहा कि जो उनका विरोध करते हैं उन्हें वे विभिन्न तरीके अपनाकर परेशान करते हैं। स्वामिश्री ने एक बहुत बड़ा प्रश्न किया कि जो मोदी रामलला, हिंदुत्त्व के मुद्दों के बल पर सरकार बनाया वे पूरी दुनिया तो घूम लिए पर आज तक रामलला के दर्शन हेतु अयोध्या नहीं गए और न ही राम मंदिर बनाये। गाँव के लल्लू यादव, डबोरा व आदि गांवसियों ने कहा कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा - सबका साथ, सबका विकास अभी तक समझ नहीं आया साथ ही उन्होंने यह भी संदेश यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को दिया कि सनातन धर्म के मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उन्हें त्वरित निर्माण कर श्रद्धालुओं को पूजा करने का अवसर प्रदान करे। उनका जो पंचक्रोशी यात्रा है वो इस घटना के घटित होने पर पूरा ढोंग लग रहा है। एक महंत मुख्यमंत्री क्यों इस तरह के कृत्य को करवा रहे हैं ? गाँव वासियों ने यह भी कहा कि मंदिर हमारे सनातन धर्म के विकास का केंद्र है तथा मंदिर हमारे एकता का प्रतीक है। महिलाओं ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया और उन्होंने प्रश्न उठाया कि हमारे आस्था के केंद्र पर ऐसा प्रहार क्यों एवं किसलिए।

आदित्यनाथ को पंचक्रोशी यात्रा का अधिकार नहीं है : अविमुक्तेश्वरानंद ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि जो व्यक्ति हिन्दू होकर पुराणों में वर्णित काशी के मंदिरों को तोड़वाये उनको पंचक्रोशी यात्रा का अधिकार नहीं है। आगे स्वामिश्री ने कहा कि एक तरफ उनके प्रशासन द्वारा पुराणों में वर्णित मंदिरों को तोड़ा गया और दूसरे ओर योगी आदित्यनाथ पंचक्रोशी यात्रा करना चाहते हैं ? यह पूरा का पूरा ढोंग है जो हिन्दुत्त्व का चोला पहनकर जनता को अपने भरोसे में लेकर, उनका वोट लिए और शासन में काबिज हो गए। आज स्थिति ऐसी हो गई कि हिंदुत्त्व वादी सरकार खुद पुराणों में वर्णित काशी के मन्दिरों को तोड़ दिए वो भी सौन्दर्यकरण हेतु, विकास हेतु। आपको यदि विकास ही करना है तो आप ग्रेटर काशी या ग्रेटर वाराणसी बनाइये। पुराने काशी, गलियों के काशी, मन्दिरों के काशी, घाटों के काशी आदि को देखने हेतु देश और विदेश से श्रद्धालु आते हैं और इसी काशी के मंदिरों को तोड़ रहे हो। यह विकास है कि विनाश है। क्या यही है सबका साथ-सबका विकास। हम और वाराणसी के समस्त सनातन धर्मी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पंचक्रोशी यात्रा का कड़े स्वर में विरोध करते हैं।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है जनता का पूर्ण समर्थन।

जनता हाथ उठाकर ले रही है मंदिर बचाने का संकल्प ।। सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: विगत 2 माह से काशी के प्राचीन व पुराणों में वर्णित मंदिरों को बचाने हेतु प्रयासरत हैं जिसके तहत स्वामिश्री ने नंगे पांव पंचक्रोशी की यात्रा कर देवी-देवताओं से माफी मांगी और उनसे प्रार्थना किये की वे किसी भी तरह के कोप काशी वासियों के ऊपर न दें। इसी क्रम में स्वामिश्री के नेतृत्त्व में मंदिर बचाओ आन्दोलनम के समर्थक "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण देने वाराणसी जिले के 1333 गांवों में जाकर आमंत्रण देने का संकल्प लिया जिस हेतु 5 जून 2018 से ही आमंत्रण यात्रा प्रारंभ हो चुका है। आज 6 जून 2018 को "आमंत्रण यात्रा" के दूसरे दिन स्वामिश्री ग्राम भवानीपुर, गनियालपुर, पिसौर, गणेशपुर तरना, सभाईपुर, वासुदेवपुर एवं चुप्पेपुर गए तथा सभा को संबोधित करते हुए सभी गांव वासियों को 28 जून से केदारघाट, वाराणसी में आयोजित होने वाले "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण किया। स्वामिश्री एवं अन्य वक्ताओं के बातों को सुनकर प्रत्येक उपस्थित गांव वासियों ने संकल्प लिया कि वे काशी के मंदिरों को बचाने हेतु स्वामिश्री को पूरा सहयोग प्रदान करेंगे एवं मंदिर बचाओ महायज्ञ में सम्मिलित होकर आहुति देंगे तथा सभी देवताओं से निवेदन करेंगे कि वे काशी को छोड़कर न जाये और शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि दे ताकि वे काशी के मन्दिरों को न तोड़े अपितु जो मंदिर व देव विग्रह तोड़े गए हैं उन्हें ससम्मान दोबार मंदिरों का निर्माण कर उनका प्राणप्रतिष्ठा कर पूजार्चना की व्यवस्था करें।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है जनता का पूर्ण समर्थन।

???? जनता हाथ उठाकर ले रही है मंदिर बचाने का संकल्प सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: विगत 2 माह से काशी के प्राचीन व पुराणों में वर्णित मंदिरों को बचाने हेतु प्रयासरत हैं जिसके तहत स्वामिश्री ने नंगे पांव पंचक्रोशी की यात्रा कर देवी-देवताओं से माफी मांगी और उनसे प्रार्थना किये की वे किसी भी तरह के कोप काशी वासियों के ऊपर न दें। इसी क्रम में स्वामिश्री के नेतृत्त्व में मंदिर बचाओ आन्दोलनम के समर्थक "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण देने वाराणसी जिले के 1333 गांवों में जाकर आमंत्रण देने का संकल्प लिया जिस हेतु 5 जून 2018 से ही आमंत्रण यात्रा प्रारंभ हो चुका है। आज 6 जून 2018 को "आमंत्रण यात्रा" के दूसरे दिन स्वामिश्री ग्राम भवानीपुर, गनियालपुर, पिसौर, गणेशपुर तरना, सभाईपुर, वासुदेवपुर एवं चुप्पेपुर गए तथा सभा को संबोधित करते हुए सभी गांव वासियों को 28 जून से केदारघाट, वाराणसी में आयोजित होने वाले "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण किया। स्वामिश्री एवं अन्य वक्ताओं के बातों को सुनकर प्रत्येक उपस्थित गांव वासियों ने संकल्प लिया कि वे काशी के मंदिरों को बचाने हेतु स्वामिश्री को पूरा सहयोग प्रदान करेंगे एवं मंदिर बचाओ महायज्ञ में सम्मिलित होकर आहुति देंगे तथा सभी देवताओं से निवेदन करेंगे कि वे काशी को छोड़कर न जाये और शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि दे ताकि वे काशी के मन्दिरों को न तोड़े अपितु जो मंदिर व देव विग्रह तोड़े गए हैं उन्हें ससम्मान दोबार मंदिरों का निर्माण कर उनका प्राणप्रतिष्ठा कर पूजार्चना की व्यवस्था करें।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है जनता का पूर्ण समर्थन।

???? जनता हाथ उठाकर ले रही है मंदिर बचाने का संकल्प सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: विगत 2 माह से काशी के प्राचीन व पुराणों में वर्णित मंदिरों को बचाने हेतु प्रयासरत हैं जिसके तहत स्वामिश्री ने नंगे पांव पंचक्रोशी की यात्रा कर देवी-देवताओं से माफी मांगी और उनसे प्रार्थना किये की वे किसी भी तरह के कोप काशी वासियों के ऊपर न दें। इसी क्रम में स्वामिश्री के नेतृत्त्व में मंदिर बचाओ आन्दोलनम के समर्थक "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण देने वाराणसी जिले के 1333 गांवों में जाकर आमंत्रण देने का संकल्प लिया जिस हेतु 5 जून 2018 से ही आमंत्रण यात्रा प्रारंभ हो चुका है। आज 6 जून 2018 को "आमंत्रण यात्रा" के दूसरे दिन स्वामिश्री ग्राम भवानीपुर, गनियालपुर, पिसौर, गणेशपुर तरना, सभाईपुर, वासुदेवपुर एवं चुप्पेपुर गए तथा सभा को संबोधित करते हुए सभी गांव वासियों को 28 जून से केदारघाट, वाराणसी में आयोजित होने वाले "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण किया। स्वामिश्री एवं अन्य वक्ताओं के बातों को सुनकर प्रत्येक उपस्थित गांव वासियों ने संकल्प लिया कि वे काशी के मंदिरों को बचाने हेतु स्वामिश्री को पूरा सहयोग प्रदान करेंगे एवं मंदिर बचाओ महायज्ञ में सम्मिलित होकर आहुति देंगे तथा सभी देवताओं से निवेदन करेंगे कि वे काशी को छोड़कर न जाये और शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि दे ताकि वे काशी के मन्दिरों को न तोड़े अपितु जो मंदिर व देव विग्रह तोड़े गए हैं उन्हें ससम्मान दोबार मंदिरों का निर्माण कर उनका प्राणप्रतिष्ठा कर पूजार्चना की व्यवस्था करें।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम को मिल रहा है जनता का पूर्ण समर्थन।

???? जनता हाथ उठाकर ले रही है मंदिर बचाने का संकल्प सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: विगत 2 माह से काशी के प्राचीन व पुराणों में वर्णित मंदिरों को बचाने हेतु प्रयासरत हैं जिसके तहत स्वामिश्री ने नंगे पांव पंचक्रोशी की यात्रा कर देवी-देवताओं से माफी मांगी और उनसे प्रार्थना किये की वे किसी भी तरह के कोप काशी वासियों के ऊपर न दें। इसी क्रम में स्वामिश्री के नेतृत्त्व में मंदिर बचाओ आन्दोलनम के समर्थक "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण देने वाराणसी जिले के 1333 गांवों में जाकर आमंत्रण देने का संकल्प लिया जिस हेतु 5 जून 2018 से ही आमंत्रण यात्रा प्रारंभ हो चुका है। आज 6 जून 2018 को "आमंत्रण यात्रा" के दूसरे दिन स्वामिश्री ग्राम भवानीपुर, गनियालपुर, पिसौर, गणेशपुर तरना, सभाईपुर, वासुदेवपुर एवं चुप्पेपुर गए तथा सभा को संबोधित करते हुए सभी गांव वासियों को 28 जून से केदारघाट, वाराणसी में आयोजित होने वाले "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण किया। स्वामिश्री एवं अन्य वक्ताओं के बातों को सुनकर प्रत्येक उपस्थित गांव वासियों ने संकल्प लिया कि वे काशी के मंदिरों को बचाने हेतु स्वामिश्री को पूरा सहयोग प्रदान करेंगे एवं मंदिर बचाओ महायज्ञ में सम्मिलित होकर आहुति देंगे तथा सभी देवताओं से निवेदन करेंगे कि वे काशी को छोड़कर न जाये और शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि दे ताकि वे काशी के मन्दिरों को न तोड़े अपितु जो मंदिर व देव विग्रह तोड़े गए हैं उन्हें ससम्मान दोबार मंदिरों का निर्माण कर उनका प्राणप्रतिष्ठा कर पूजार्चना की व्यवस्था करें।

स्वामिश्री ने मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु गांव वासियों को दिया आमंत्रण।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल"(काशी) ::- काशी में चल रहे मंदिर बचाओ आन्दोलनम के द्वितीय चरण की शुरुवात 3 जून 2018 को नीलकंठ मंदिर परिसर में कार्यालय के शुभारंभ के साथ प्रथम सभा आयोजित किया गया तथा उस दिन ही घोषित हुआ था कि वाराणसी शहर के 90 वार्डों के साथ साथ पूरे 1333 गांवों में मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रण यात्रा की शुरुवात 5 जून 2018 को होगी। इसी तारतम्य में ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: ने आज 5 जून 2018 को "आमंत्रण यात्रा" के तहत वाराणसी से संलग्न गांव - बड़ा लालपुर, दानुपुर, कानुडीह, अहमदपुर एवं लोढ़ान में समस्त गांव वासियों को 28 जून से केदारघाट, वाराणसी में मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रण दिया तथा पुराणों में वर्णित काशी के मंदिरों तथा देवताओं को तोड़े जाने की सूचना दी जिससे गाँव वाले अवाक हो गए। इस विषय को विस्तृत रूप से मंदिर बचाओ आन्दोलनम से जुड़े रमेश उपाध्याय, श्रीप्रकाश पांडेय, सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, रूपेश एवं विमलेंदु ने प्रकाश डाला जिस पर सभी गांव वासियों ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया तथ स्वामिश्री के मंदिर बचाओ महायज्ञ के आमंत्रण को स्वीकार करते हिये स्वामिश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामिश्री: के सामने उपरोक्त गांवों के उपस्थित महिला, पुरुष एवं बच्चों ने काशी के मन्दिरों को बचाने हेतु संकल्प लिया तथा यह भी कहा कि वे इस बाबत गांव के अन्य सदस्यों को भी अवगत करवाएंगे और मंदिर बचाओ महायज्ञ में शामिल भी होंगे जिससे देवतागण काशी से रूठकर चले न जाएं और देवताओं का कोई कोप वाराणसी तथा वाराणसी जिले वासियों के ऊपर न पड़े। आज के इस आमंत्रण यात्रा में मयंक शेखर मिश्रा, दीपेश पांडेय, कृष्णा पराशर, सत्यम शर्मा, प्रशांत त्रिपाठी, शैलेश तिवारी, किशन जायसवाल, रूपेश तिवारी एवं राजेन्द्र दुबे सम्मिलित हुए।

काशी चित्रपट समिति की पहली सभा सम्पन्न हुई।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी)::- काशी के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में "काशी चित्रपट समिति" की विशेष सभा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्त्व में सम्पन्न हुई। आज के इस विशेष सभा में काशी चित्रपट समिति के संयोजक गोरखनाथ तिवारी, प्रो. राणा पी.बी.सिंह, निरजा माधव, डॉ बलराम पांडेय, अरुण सिंह, राजेन्द्र तिवारी, राजनाथ तिवारी, रामानंद तिवारी, जितेन्द्रनाथ मिश्र , साध्वी पूर्णम्बा एवं सह संयोजक अवधेश दीक्षित उपस्थित थे। सर्व प्रथम स्वामिश्री द्वारा काशी चित्रपट की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा उपस्थित विद्ववानों ने भी काशी चित्रपट कैसे बनाया जाए इस पर विस्तृत चर्चा हुई। बीएचयू के सेवानिवृत्त प्रोफेसर राणा पी.बी.सिंह ने बताया कि सन 1524 में गुरुचरित्र का निर्माण हुआ था जिसमे गुरु अपने शिष्यों को काशी खंडों के बारे में बताते हैं जिसका मराठी तथा संस्कृत भाषा मे गुरुचरित्र में वर्णन है। साथ ही उन्होंने बताया कि हमने स्वयं 32 मुख्य यात्राएं किये तथा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के सहायता से जगहों को चिन्हांकित कर उसका मैपिंग किये। सन 1993 से 95 के बीच हमने कंप्यूटर के माध्यम से संस्कृत के वर्णन को डिकोड किया। प्रो राणा पी.बी.सिंह ने समिति में यह सुझाव रखा कि स्वामिश्री जी द्वारा हाल ही में जो पंचक्रोशी यात्रा की गई है उसे एक किताब के रूप में बनाया जाए जिसमे मंदिर, स्थान और छोटा वर्णन शामिल हो तथा इसके पश्चात गहन शोध, विचार कर काशी चित्रपट का निर्माण किया जाए। स्वामिश्री के साथ साथ उपस्थित सभी विद्ववानों ने एक मत होकर इस प्रस्ताव को स्वीकारा तथा आनेवाले 10 दिनों के अंदर किताब प्रकाशित करने की प्रतिश्रुति दिए और आगामी 17 जून को समिति की दूसरी बैठक श्रीविद्या मठ में शाम 5 बजे आहूत की गई है।

श्रीविद्या मठ में काशी चित्रपटी समिति की पहली बैठक आयोजित।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी)::- काशी के धार्मिक सांस्कृतिक मानचित्र के निर्माण के लिये मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् द्वारा निर्मित काशी चित्रपटी समिति की पहली बैठक 4 जून 2018 को शाम पांच बजे से श्रीविद्यामठ, केदार घाट , वाराणसी में आयोजित है । समिति के सभी माननीय सदस्य इस बैठक में काशी के ऐतिहासिक और पौराणिक स्वरूप को सामने लाने के लिये मन्थन करेंगे और काशी चित्रपटी निर्माण की रूपरेखा तय करेंगे । इस महत्त्वपूर्ण बैठक में समिति के सभी इक्कीस सदस्यों सहित स्वामि अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती भी सम्मिलित होंगे । इस महत्त्वपूर्ण बैठक हेतु पत्रकार बन्धु भी सादर आमांत्रित हैं। इसकी जानकारी श्रीविद्या मठ की साध्वी पूर्णाम्बा ने दी है।

इतना तो तय है कि यह खेल है । पता बस इतना करना है कि यह कौन खेल रहा और किसके साथ ? स्वामिश्रीःअविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और गंगा "पाथवे" नाम की जिन योजनाओं का जिक्र वाराणसी की आकाश में विगत अनेक दिनों से तैर रहा है असल मे इस तरह की कोई योजना है ही नहीं । कम से कम श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के 94 वें बैठक दिनांक 18 मई 2018 का कार्यवृत्त तो यही कह रहा है । इससे तय हो जाता है कि काशी की धरती पर केन्द्र और राज्य की सरकारों के दिए गए करोडों रुपये से एक बहुत बड़ा खेल खेला जा रहा है पर यह खेल किसके साथ खेला जा रहा है और असली खिलाड़ी कौन है यह तय करना बाकी है । काशी का प्रशासन जनता को रख रहा धोखे में। क्या प्रशासन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी धोखे में रख रहा है ? इस बैठक की मिनट बुक के अंश जो कि काशी के लोगों से हम सब को प्राप्त हो रहे हैं उसके पृष्ठ चार और पैरा दो में कहा गया है कि "श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर के निकट एवं आसपास काफी भवन क्रय करके गिराए जा चुके हैं एवं काफी जगह खाली हो गई है" के दृष्टिगत एक विस्तृत कार्य योजना तैयार कर बोर्ड में अनुमोदन हेतु आर्किटेक्ट के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने के संबंध में न्यास परिषद द्वारा सर्वसम्मति से यह तय किया गया। इस वाक्यावली से स्पष्ट दिनांक 18 मई 2018 तक काशी विश्वनाथ काॅरीडार, गंगा पाथवे या किसी और तरह की कोई योजना शासन के पास नहीं है । स्पष्ट है कि शासन-प्रशासन आम जनता को धोखे में रखकर कार्य कर रहा है । और बिना किसी योजना के ही भवनों, मंदिरों और मूर्तियों को तोड़कर फेंक रहा है, जो की अत्यंत आपत्तिजनक है । सोच कर हंसी आती है कि अधिकारियों ने न जाने कितनी बार वक्तव्य दिया है कि "योजना सार्वजनिक की जाएगी" , मुख्यमंत्री को दिखाई जा रही है आदि । जबकि बैठक का कार्यवृत्त स्पष्ट करा देता है कि ऐसी कोई योजना है ही नहीं । तो फिर प्रश्न यह उठता है कि क्या वाराणसी का स्थानीय प्रशासन, जनता के साथ ही साथ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के साथ भी तो कोई खेल नहीं खेल रहे हैं ? "मंदिर बचाओ आन्दोलनम् का कार्यालय सबके लिए खुला" 3 जून 2018 को प्रातः 10 बजे शुभ चौघड़िया में काशी के नीलकंठ में सीके 33/21-22 भवन में "मंदिर बचाओ कार्यालय" का उद्घाटन संपन्न हुआ । इस अवसर पर स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने कहा कि यह कार्यालय उन सभी के लिए प्रातः 9:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक खुला रहेगा जो आन्दोलनम् से किसी भी प्रकार का संबंध स्थापित करना चाहते होंगे । कार्यालय में शीघ्र ही एक टोल फ्री नंबर भी स्थापित करने की योजना है । कार्यालय का अधीक्षक पद्माकर पांडे को बनाया गया है । काशी के धार्मिक सांस्कृतिक नक्शे "काशी- चित्रपटी" के निर्माण के लिए 21 सदस्यीय समिति का गठन संपन्न जैसा कि पूर्व में ही आन्दोलनम् की तरफ से घोषणा की गई थी - काशी के धार्मिक, सांस्कृतिक नक्शे "काशी- चित्रपटी" के निर्माण के लिए 21 सदस्यीय समिति का गठन संपन्न हो गया है । इस समिति की पहली बैठक कल दिनांक 4 जून को सायं 5:00 बजे से श्री विद्या मठ में संपन्न होगी । जनसभाओं का क्रम 5 जून से होगा प्रारंभ आन्दोलनम् के द्वितीय चरण में काशी के सभी गांवों और वार्ड में होने वाली मंदिर बचाओ सभाओं का क्रम 5 जून से आरंभ होगा । उत्तर दिशा से आरंभ होकर क्रमशः पूर्व, दक्षिण और पश्चिम के गांवों में सभाएं होंगी । जो क्रमशः बड़ा लालपुर, दोनूपुर, हरिहरपुर, अहमदपुर, कानुडीह, लोढान, लालपुर, सरसवां, बासुदेवपुर, होलापुर, हटिया, छतरीपुर, गणेशपुर, परमानंदपुर, चप्पेपुर,पिशोर, हटिया, डलियालपुर, भवानीपुर, लमही, रसूलपुर, वनवारीपुर, ऐढें और गढवा आदि १३०० ग्रामों से होते हुए सभाओं का क्रम आगे बढ़ेगा । आगे के गांवों की सूचना बाद मे यथावसर दी जाएगी ।

हर व्यक्ति के अच्छे काम का साथ देना चाहिए :: अविमुक्तेश्वरानंद:।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी ने आज श्रीविद्यामठ, काशी में अपने प्रवचन में उपस्थित भक्तों से कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के अच्छे कार्य की सराहना करनी चाहिए तथा अच्छे कार्य का साथ देना चाहिए। अच्छे कार्यों का साथ देने से , उसके सहभागी बनने से मन प्रसन्नचित रहता है तथा व्यक्ति सुकून से जीता है। आगे उन्होंने कहा कि हम न तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राहुल गांधी, अखिलेश यादव आदि की निंदा कर रहे हैं। हम तो काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर हेतु तोड़े गए पुराणों में वर्णित मंदिरों के लिए वर्तमान केंद्र सरकार व राज्य सरकार का विरोध कर रहे हैं। हम तो सन्यासी हैं। हम किसी राजनीतिक पार्टी के न तो प्रवक्ता हैं और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का प्रचार कर रहे हैं। हम केवल धर्म का प्रचार कर रहे हैं जिससे व्यक्ति अधर्म के पथ पर न चले। यह तो प्राचीन हिन्दू सनातन धर्म की रक्षा हेतु आंदोलन है जिससे हम अपने काशी के मंदिरों को ध्वंश होने से बचा पाए। आगे उन्होंने कहा आजकल लव-जेहाद शब्द बहुत सुनने को मिल रहे हैं। यदि हमारी बहने संस्कारवान होंगी, अपने धर्म के प्रति प्रेम होगा तो इस तरह की घटना घटित नहीं होंगी। मुस्लिम धर्म अलग हैं, उनके संस्कार अलग हैं जो किसी भी एंगल से सनातन धर्म से मेल नहीं खाता है। इस बाबत घर मे ही शुरू से एक शुक्ष्म रेखा पहले ही बना देना चाहिए जिससे बहनों को मालूम हो कि हमारे संस्कार क्या हैं और उनके संस्कार क्या है साथ ही एक दूरी भी होनी चाहिए जिससे कोई ज्यादा नजदीक न आ पाए और कोई व्यवहार बने। 

किस योजना के तहत काशी में मूर्तियों को तोड़ा गया बताएं मुख्यमंत्री :: अविमुक्तेश्वरानंद

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- काशी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने आज प्रैस वार्ता के दौरान यह प्रश्न उठाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि जिन मूर्तियों को तोड़ा गया है उनका विसर्जन गंगा जी में किया जाएगा। जबकि योगी जी ने इस बात पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया कि आखिर जिन खण्डित मूर्तियों का जिक्र वह स्वयं कर रहे हैं वह आखिर कैसे टूटी? किस के आदेश पर तोड़ी गई? किनके द्वारा तोड़ी गई? किस योजना के तहत इन्हे तोडा गया? यह कौन सी योजना है? तथा ऐसी किसी योजना में आगे और क्या क्या है? क्यूंकि बिना किसी योजना को उद्घाटित किए बगैर ही मन्दिर व देवविग्रह तोड़ दिए गए। इससे यह आशंका प्रबल होती है कि अभी न जाने कौन-कौन से मन्दिर देवविग्रह इस छिपी हुई योजना के तहत जमींदोज कर दिए जाएंगे। ऐसे में ऐसी अस्पष्टता की स्थिति में " मन्दिर बचाओ अभियानम्" जारी रखना होगा। जब तक मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री जी की ओर से कोई स्पष्ट योजना की जानकारी नहीं दी जाती तब तक चुप नहीं बैठा जा सकता। अभी तो अनेक प्रश्न हैं जो अनुत्तरित हैं।