विशेष

अब उन्होंने हमसे वार्ता का अधिकार खो दिया :- अविमुक्तेश्वरानन्दः ।।

आज काशी विश्वनाथ मन्दिर के सी.ई.ओ विशाल सिंह लगभग 12.30 बजे मन्दिर बचाओ आंदोलनम् की अगुवाई कर रहे स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज से मिलने उपवास स्थल शंकराचार्य घाट पर आये । अभी वार्ता आरम्भ ही हुई थी कि वे अचानक स्वामिश्रीः की बातों को पूरा सुने बिना ही उठकर चले गये । वार्तालाप के माध्यम बने विशालाक्षी मन्दिर के महन्थ राजनाथ तिवारी ने स्वामिश्रीः का पक्ष उनके सामने रखा तो विशाल सिंह ने कहा कि यह बहुत बड़ी भ्रान्ति है कि मन्दिरों को तोड़ा जा रहा है और जो भी तोड़ा गया है वह मेरे कार्यकाल में नहीं टूटा है । इस पर स्वामिश्रीः ने अपने उत्तर में कहा कि हम 3 अप्रेल 2018 को प्रमोद विनायक के मन्दिर गये थे और वहां मन्दिर टूटा था , भगवान् महीनों मलबे मे पड़े रहे । इतना सुनते ही विशाल सिंह अचानक उठे और तैश में आकर चल दिए। महन्त राजनाथ तिवारी ने उनसे रुकने का बहुत आग्रह किया पर वे उनको भी झटक कर चल दिए । इस घटना पर स्वामिश्रीः ने कहा कि कोई भी अधिकारी आन्दोलन कर रहे लोगों के पास समाधान के लिए वार्ता करने जाता है तो वहाँ पर आन्दोलनरत लोगों की बातों को सुनता है , पर यहाँ पर जिस तरह से विशाल सिंह जी आए और बिना पूरी वार्ता किए उठकर चल दिए इससे हमें यह नहीं लगता कि वे समाधान करने के लिए आए थे । जबकि वे यहाँ पर आए तो हमलोगों ने उनको सम्मानपूर्वक आसन दिया । स्वामिश्रीः ने कहा कि अपने इस कृत्य से विशाल सिंह ने अब हमसे वार्ता का अधिकार खो दिया है । अब इस सम्बन्ध में उनसे कोई वार्ता नहीं होगी। लेकिन यदि कोई और अधिकरी काशी के प्राचीन मन्दिरों को बचाने और विकास के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए वार्ता को आएंगे तो हम उसका स्वागत करेंगे।

32 घंटे से उपवास पर बैठे हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ।।

खबरीलाल विशेष टिप्पणी ::- काशी ही नही बल्कि पूरे विश्व के सनातन धर्मी देखें कि सनातन धर्मियों के मंन्दिरों - मूर्तियों को विनाश के हाथ से बचाने के लिए ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पिछले 32 घंटे से ऊपर काशी के गंगा तट पर शंकराचार्य घाट पर स्थित कुटिया में उपवास कर रहे हैं। यह हमारे सनातन धर्मियों के लिए गर्व की बात है कि एक दंडी सन्यासी हमारे लिए, हमारे आस्था के केंद्रों को बचाने हेतु कठोर तपस्या कर रहे हैं जो साधरणतः ऐसा कहीं भी नहीं देखा जाता है और दूसरी तरफ हम सनातन धर्मी जाग कर सो रहे हैं और केवल जुबानी जमा खर्च कर रहे हैं। क्या काशी के मिट्टी के लोग, बाबा विश्वनाथ के नगरी में रहने वाले, प्राचीन धर्म नगरी में रहने वाले काशी वासी बस यूं ही चुप रहेंगे ? क्या उनका ज़मीर उन्हें चैन से रहने दे रहा है ? क्या जो प्राचीन मंदिर एवं मूर्तियों को ध्वंश किया गया है वह आपका नहीं है ?  यह बहुत ही बड़ा विडंबना है की कुछ काशी वासियों को छोड़ बाकी सब मौन व्रत में लीन है जो कदापि उचित नहीं दिखता है। काशी वासियों और भारत के सनातन धर्मियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है की मानों स्वामिश्री: केवल अपने ही मंदिर और मूर्तियों को बचाने हेतु कठोर तप कर रहे हैं। कुछ सनातन धर्मी जो मोदियाबिंद से पीड़ित हैं वे इसमें राजनीति ढूंढ रहे हैं और लोगों को बहकाने की कोशिश कर रहे है। जबकि सनातन धर्मियों को मालूम होना चाहिए कि कोई भी सन्यासी किसी राजनीत पार्टी का नहीं होता है , वह केवल अपने धर्म के रक्षा के लिए होता है और धर्म ही उनका दल है जिस हेतु वे संकल्पित होते हैं। ।। किसी भी हद तक जाना है । मंदिर - मूर्ति बचना है ।। उपवास में बैठे स्वामिश्री: को देखकर उनके अनुयायी एवं कुछ सनातन धर्मी भी उनके साथ उपवास में बैठे हैं और अनेकों उपवास पर बैठने की जिद कर रहे हैं। स्वामिश्री: जब से उपवास पर बैठे हैं उनसे मिलने अब कुछ काशी वासी आ रहे हैं और घंटो स्वामिश्री: के साथ बैठ रहे हैं। बीते 32 घंटों में बहु संख्या में लोग स्वामिश्री: से मिलने आये और अपनी बातें रखी। अन्य प्रदेशों से गुरु भाइयों के साथ साथ शंकराचार्य आश्रम के ब्रह्मचारी गण, बटुक गण भी उपवास हेतु काशी के लिए चल पड़े हैं और कुछ अपने आश्रमों में ही उपवास कर रहे हैं। यह राष्ट्रीय मुद्दा है जिसे प्रत्येक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल, समाचार पत्रों को प्रमुखता से उठाना चाहिए न कि भक्त बनकर तथाकथित भगवान का ही केवल गुणगान करना चाहिए। आप भी भारतीय हैं, सनातन धर्मी हैं , आपके मंन्दिरों-मूर्तियों को ध्वंश किया जा रहा है फिर भी आप अपने राष्ट्रीय चैनल व समाचार पत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित नहीं कर रहे हो। यह सोचनीय और विचारणीय के साथ साथ आपके आस्था, विश्वास, एकता का भी प्रश्न है। राजनीतिक कुर्सी स्थायी कभी नही होती है लेकिन सच्चाई और धर्म आजीवन स्थायी रहता है और इस पर चलने के लिए दृढ़ निश्चय शक्ति की आवश्यकता है।

काशी में पहले भी विकास हुए हैं, पर मन्दिर कभी नहीं तोड़े गये ::- अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

@ उपवास का आज दूसरा दिन ।।। खबरीलाल रिपोर्ट  (काशी) ::- विकास कोई नयी चीज नहीं अपितु एक सतत प्रक्रिया है जो सृष्टि के आरम्भ से ही चली आई है और आज भी अनवरत है । वर्तमान सन्दर्भों की अगर बात करें तो काशी में कई विकास के कार्य विगत सौ वर्षों में हुए हैं पर उनमें मन्दिर नहीं तोड़े गये । आस्था को चोट नहीं पहुँचाई गयी । फिर क्या कारण है कि आज विकास के नाम पर काशी जैसी धर्मप्राण नगरी में हजारों वर्ष पुराने और आस्था के केन्द्र मन्दिरों को तोड़ा जा रहा है ? क्या यह कोई नये तरह का विकास है ? या फिर इस विकास के करने वाले के मन मे ही मन्दिर द्रोह है ? उक्त प्रश्न विगत दो महीने से चल रहे मन्दिर बचाओ आंदोलनम् को अगुवाई कर रहे ज्योतिष्पीठाधीश्वर और द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दण्डी स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने अपने बारह दिनी उपवास (पराक व्रत) के दूसरे दिन उनके पास आए लोगों को सम्बोधित करते हुए उठाए।  उन्होंने आगे कहा कि काशी में विगत शताब्दी में  हुए विकास पर अगर नजर डाली जाए तो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ, डीजल इंजन कारखाना, कैण्ट रेलवे स्टेशन, छावनी एरिया, ट्रामा सेण्टर आदि की गिनती की जा सकती है पर इनमें से किसी के निर्माण में मन्दिर नही तोड़े गये हैं। वे आज भी इन परिसरों मे यथावत विद्यमान है और उनमें लोग पूजा-अर्चना, उत्सव आदि आयोजन आज भी स्वतन्त्र रूप से कर रहे हैं।  यहाँ तक कि नरिया से महामना पुरी को मुडने वाले चौराहे के बीच केवल एक मन्दिर पड़ने के कारण  हि विश्व विद्यालय के दो परिसर बन गये पर मन्दिर को एक किलोमीटर करीब का रास्ता दिया गया । स्वामिश्रीः ने आगे कहा कि उपर्युक्त स्थानों को ठीक से सर्वे कर हमारे वक्तव्य की पुष्टि की जा सकती है ।  यदि केवल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की ही बात करें तो परिसर के अन्दर स्थित नये एन.सी.सी कार्यालय के पास गुल्ला बाबा मन्दिर, आई.एम.एस के अन्दर बाल हनुमान मन्दिर, आर्ट्स फेकेल्टी एम.पी थियेटर के पास अकेलवा बाबा, छित्तूपुर गेट के आगे ग्राम देवी का मन्दिर, कम्प्यूटर सेण्टर सेन्ट्रल आफिस के पीछे हनुमान जी और शिव जी का मन्दिर सीरग्राम के देवता करमन वीर बाबा का मन्दिर, टीचर्स फ्लैट के पास जंगमपुर गाँव का डीह बाबा मन्दिर, जोधपुर प्रिन्सिपल कालोनी के अन्दर हनुमान मन्दिर, विश्वेश्वरैया हास्पीटल के पास  ग्राम देवता का मन्दिर, एजुकेशन फेकेल्टी कमच्छा में ग्राम देवता का मन्दिर, रणवीर परिसर में सरस्वती जी एवं हनुमान जी के मन्दिर, सी एच एस के अन्दर का हनुमान मन्दिर आदि उदाहरण है। ये सभी मन्दिर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले से ही वहाँ रहे हैं और इन्हें आज भी इनके स्थान पर आदर सहित विराजमान देखा जा सकता है । इसी तरह अन्य स्थानों पर भी देखा जा सकता है । अभी अभी ताजा निर्मित ट्रामा सेण्टर में भी सरस्वती देवी का मन्दिर ज्यो का त्यों रखा गया है । फिर केवल काशी विश्वनाथ कोरिडोर योजना मन्दिरो को तोड़े बिना क्यों नहीं बन सकती है ? ऐसा लगता है कि यह मूल रूप से मन्दिर तोड़ योजना ही है अन्यथा इतना बड़ा अनर्थ विकास के नाम पर नहीं किया जा सकता था । स्वामिश्रीः ने कहा कि शास्त्रों में उल्लेख है कि यदि देवता की पूजा में बाधा उत्त्पन्न कर दी गयी हो तो उपवास किया जाए अन्यथा घोर नरक की प्राप्ति होती है । इसीलिए हमने उपवास आरम्भ किया है । 12 दिन के इस व्रत को पराक व्रत कहा जाता है जो सब दोषों का शमन करता है। हम सनातनधर्मी शास्त्रों के अनुसार अपना जीवन चलाने का प्रयत्न करते हैं , इसलिए 12 दिनों तक चलने वाला पराक व्रत हमने आरम्भ किया है । इस के अनुसार हम बारह दिनों तक केवल जल लेकर निर्वाह करेंगे । आवश्यकता पर औषधि अपवाद होगी । हमें आशा है कि हमारे वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री और कोरीडोर (मूर्ति तोड) योजना के शिल्पकार नरेन्द्र मोदी जी अपने अपने आगामी 14-15 जुलाई के काशी आगमन में काशी की जनता को आश्वस्त करेंगे कि कोई भी मूर्ति और मन्दिर नहीं तोड़ा जाएगा और तोड़े गये मन्दिर पुनः स्वस्थान पर निर्मित किये जाएंगे । यदि ऐसा होता है तो हम काशीवासी उनकी इस घोषणा का स्वागत करेंगे । यदि उन्होंने कुछ नहीं कहा तो 15 जुलाई को मध्याह्न में हम आन्दोलनम् के चौथे चरण  की घोषित करेंगे ।

मंदिर बचाओ महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् का दूसरा चरण सम्पन्न ।।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- विगत सात मई से काशी में टूट रहे मन्दिरों और गायब हो रही मूर्तियों को बचाने के लिए चल रहे आन्दोलनम् का द्वितीय चरण पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार सात दिवसीय मन्दिर बचाओ महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ ही सम्पन्न हुआ । यज्ञ में सभी देवताओं की पूजा अर्चना इस उद्देश्य से की गई कि उनका कोप काशीवासियों पर न टूटे और उनकी कृपा काशीवासियों सहित समस्त सनातनधर्मियों पर सदा बनी रहे तथा जो लोग मन्दिरों को तोड़ने का कार्य कर रहे हैं उन्हें सद्बुद्धि प्राप्त हो । चूंकि अभी तक प्रशासन ने यह घोषणा नहीं की कि मन्दिर और मूर्तियों को अब नहीं तोडा जायेगा। अतः मजबूर होकर आन्दोलनम् के तीसरे चरण की घोषणा करनी पड रही है । ।। आन्दोलनम् का तीसरा चरण कल दुर्मुख विनायक की पूजा से होगा शुरू ।। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज सायंकाल पूजा आरती के अनन्तर स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने आन्दोलनम् के तीसरे चरण की घोषणा की । आन्दोलनम् के तीसरे चरण में उपवास आरम्भ किया जायेगा । यह उपवास समस्त काशीवासी सनातन धर्मियों की ओर से होगा अतः क्रमिक होगा । प्रतिदिन सूर्योदय से आरम्भ कर दूसरे सूर्योदय तक एक व्यक्ति उपवास पर रहेगा । यह क्रम तब तक जारी रहेगा जब तक मन्दिरों को न तोड़ने का निश्चय उद्घोषित नहीं हो जाता । स्वामिश्रीः ने आगे बताया कि कल प्रातः आठ बजे से भगवान् दुर्मुख विनायक की गणेश अथर्वशीर्ष के सहस्रावर्तन पूजा से आन्दोलनम् के तीसरे चरण का आरम्भ होगा । आगामी आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तदनुसार पन्द्रह जुलाई तक यह क्रम चलेगा । सुना गया है कि उसी दिन भारत के प्रधानमंत्री एवं हमारे क्षेत्र के सांसद श्री नरेन्द्र मोदी जी काशी आ रहे हैं । हम काशी के सनातनी हिन्दू जन चाहते हैं कि वे इस विषय पर अपनी बात कहें । वे बतायें कि क्या उन्हें हम काशीवासियों ने क्या उन्हें इसीलिए चुना था कि वे हमारे मन्दिरों को ही तोड़ने लग जायें ? ।। आन्दोलनम् के क्रम में प्रतिदिन होगी 29 आरती और प्रकटेंगे 203 दीप ।। कुछ वर्षों पहले विश्वनाथ मंदिर प्रशासन द्वारा जिन 203 मूर्तियों को तोड़ दिया गया था और जिनकी पुनर्स्थापना का लिखित वचन दिया गया था उनके लिये 203 दीप और वर्तमान में जिन 29 मूर्तियों को गायब कर दिया गया है उनके लिये प्रतीक पूजा के रूप में 29 आरती प्रतिदिन की जायेगी । जब तक उन मूर्तियों को प्रत्यक्ष नहीं कर दिया जाता और नियमित रूप से पूजा अर्चना आरम्भ नहीं कर दी जाती । इस तरह कुल 232 मूर्तियों की प्रतीक पूजा की जाती रहेगा । सभा में कवियित्रि ममता वार्ष्णेय जी ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की । प्रसिद्ध शायर श्री अहमद नवाब जी, शायर फक्कड गाजीपुरी (श्याम लाल जी), शायर इमरान जी ने मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के समर्थन में कविता पाठ किया। कु. ममता तिवारी ने भजन प्रस्तुत किया। सभा में प्रमुख रूप से ब्रह्मचारी उद्धव स्वरूप जी, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द जी, ब्रह्मचारी योगेश्वरानन्द जी, अयोध्या से पधारे फलाहारी बाबा जी, काशी विश्वनाथ मन्दिर के पूर्व महन्थ श्री राजेन्द्र तिवारी बबलू जी, आचार्य पं परमेश्वर दत्त शुक्ल जी, श्री राजमणि शास्त्री जी, रायपुर के प्रसिद्ध समाजसेवी श्री साई जलकुमार मसन्द जी, श्री विजयशंकर पाण्डेय जी, श्री प्रकाश पाण्डेय जी, डा गांगेय हंस जी आदि जन उपस्थित रहे।

डीएम से मिले मंदिर बचाओ आन्दोलनम के प्रतिनिधि मंडल।।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- मंदिर बचाओ आन्दोलनम की तरफ से आज 4 जुलाई 2018 को प्रातः 9 बजे वाराणसी के डीएम से मिलने वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय के नेतृत्त्व में 10 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा और उन्हें ज्ञापन सौंपा जिसमे यह लिखा था कि पुराणों में वर्णित 56 विनायकों में से एक दुर्मुख विनायक मंदिर को तोड़ा जा रहा है जिससे हम सभी सनातन धर्मियों को गहरा आघात पहुंचा है तथा रमेश उपाध्याय ने आगे डीएम साहब को यह भी जानकारी प्रदान किये की यदि मंदिर को खरीदा भी गया है तो उसे तोड़ नहीं सकते और न ही देव विग्रहों को स्थानांतरित कर सकते हैं जिसका समूचा विधि विधान अग्नि पुराण में उल्लेखित है। रमेश उपाध्याय ने वाराणसी के डीएम को यह भी जानकारी दिए कि काशी में पंचक्रोशी की यात्रा सुमुख विनायक, प्रमोद विनायक, दुर्मुख विनायक के मंन्दिरों के दर्शन पश्चात ही शुरू होती है तथा यहीं पर समाप्त भी होता है। आगे रमेश उपाध्याय ने कहा कि मंन्दिरों और देव विग्रहों के तोड़ने का पाप काशीवासियों के ऊपर न लगे इस हेतु दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज विगत 7 दिनों से सर्वदेव कोपहार प्रितिकर यज्ञ श्रीविद्या मठ, केदारघाट में कर रहे है तथा इस मंदिर बचाओ महायज्ञ में आज पूर्णाहुति होने के पश्चात महायज्ञ समाप्त होगा। सभी बातों को सुनकर डीएम साहब ने कहा कि हम कार्यपालक अधिकारी काशी विश्वनाथ से बात कर आपको सूचित करेंगे जिससे एक बैठक इस संबंध में हो और बातें स्पष्ट हों तथा डीएम साहब ने यह भी कहा कि जो भी रास्ता निकाला जाए वह सर्वसम्मति से हो और किसी के भी भावनाओ को ठेस न पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल में श्रीप्रकाश श्रीवास्तव, वृंदावन से पधारे राजमणि महाराज, अयोध्या से पधारे फलाहारी जी महाराज, कानपुर से उद्धवस्वरूप जी महाराज, योगेश्वरानंद जी महाराज, राजकुमार शर्मा, राजनाथ तिवारी ,किशन जायसवाल एवं सुदीप्तो चटर्जी सम्मिलित थे।

छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुई गीतांजली पटेल प्रदर्शन खत्म होने के बाद क्या हुआ पढ़े पूरी खबर

हुमेश जायसवाल

जांजगीर चांपा :-मालखरौदा विकासखंड अंतर्गत सारसकेला के छात्र-छात्राओं द्वारा स्कूल के अव्यवस्थाओं को लेकर जनपद परिसर में हंगामे के साथ अपना प्रदर्शन किया दरसल में सारसकेला के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों की कमी ,बैठक व्यवस्था ,भवन की कमी को लेकर छात्र अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों के पास आएं और जमकर नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किए जिसके समर्थन देने के लिए जोगी कांग्रेस के चंद्रपुर विधानसभा प्रत्याशी गीतांजलि पटेल पहुंची उन्होंने अधिकारियों को यह कहा कि छात्रों की मांग जो है वह उनका हक है और उन्हें जल्द से जल्द पूरा कराना यह आपकी जिम्मेदारी है । गीतांजलि पटेल ने कहा कि छात्र आज पढ़ाई छोड़ कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं यह दुर्भाग्य की बात है और वह स्वयं छात्रों के बीच चिलचिलाती धूप में भी बैठ कर उनका समर्थन दिए साथ ही छात्र छात्राओं के लिए बिस्किट पानी पाउच का व्यवस्था किए और जब अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद छात्र माने जिसके बाद परिसर में फैले कचरे को स्वयं गीतांजलि पटेल साफ करना चालू कर दिए जिसे देख कार्यकर्ता एवं छात्र छात्राएं भी सफाई करने में भिड़ गए ।उनका यह संदेश स्वच्छ भारत मिशन के लिए प्रेरणादायक साबित होता हुआ नजर आया।

जहा जैसा माहौल वैसे रूप में ढल जाते है गीतांजलि

आपको बता दे कि गीतांजलि पटेल क्षेत्र के ऐसे नेत्री है जो किसानों की आंदोलन, उद्योगो के आंदोलन में धूप छाव पानी बरसात की परवाह किये बगैर क्षेत्रवासियों के हक के लिए लड़ाई लड़ती है यही कारण है कि क्षेत्र के जनता की चहेती है।

पत्रकार ख़बरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- पाप का साथ न देकर पुण्य के भागीदार बनें ।।

हिंदुओं आपको काशी के मंन्दिरों को बचाने हेतु आगे आना होगा नहीं तो भगवान के पास जवाब नहीं दे पाओगे जब भगवान आपसे पूछेंगे की हमारे मंदिर और देवमूर्तियों पर आघात जब हो रहे थे तब आपने हमे मर्त लोक में बचाने हेतु क्या प्रयास किये ? अपने अंतरात्मा में झांकिए और पूछिये की जो काशी में हो रहा है क्या वह सही हो रहा है ? ये भी पूछिये अपने मन से की यदि कोई भी मस्जिद/ गुरुद्वारा/ आदि तोड़े गए होते तो वह कौम क्या उसकी रक्षा नहीं करता। अभी भी समय है , हिंदुओं जागो..जागो..जागो और अपने धर्म की रक्षा करो। जो अपने धर्म की रक्षा के लिए आवाज नहीं उठाता है वो भी एक तरह का पाप करता है। रिश्वत लेने वाले से ज्यादा पापी रिश्वत देने वाला होता है। जब आपके देवस्थान ही नहीं रहेंगे तो आप किस की उपासना करोगे। खुद के दुःख के समय भगवान के सामने झोली फैलाते हो , मन्नत मांगते हो पर जब आपके भगवान पर विपत्ति आती है तब आवाज उठाने से डरते हो। मत बन के रहिए मूक बधिर, जागिये- जगाइए और अपने धर्म , मंदिर, देवताओं को ध्वंश होने से बचाइए। जो विकास मंदिर तोड़वाये वो विकास क्या आपको मंजूर है ? देवताओं के कोप से सभी को बचाने हेतु स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती महाराज अपने श्रीविद्या मठ, केदारघाट, वाराणसी में सर्वदेव कोपहार यज्ञ कर रहे हैं लेकिन आप हो कि आप स्वामिश्री: का खुलकर साथ देने से परहेज कर रहे हो और मंदिरों को बचाने हेतु यज्ञ में आहुति भी नहीं देने आ रहे हो। आपका यह आचरण कितना सही है इसका आंकलन आप स्वयं करके देखोगे तो समझ आएगा कि आप कहाँ खड़े हो।भविष्य आप से जरूर एकदिन जवाब मांगेगा, तब उत्तर ढूंढ नहीं पाओगे। निरुत्तर रहने से अच्छा है उत्तर देने हेतु कार्य करें और परम पिता परमेश्वर का सेवा कर आशीर्वाद प्राप्त करें।

हम सरकार के नहीं अधर्म के विरोधी हैं :- अविमुक्तेश्वरानन्दः ।।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- जब कोई संन्यास लेकर सबको अभय प्रदान कर देता है तो वह किसी का विरोधी नही होता । सब उसके लिए अपना स्वरूप ही होते हैं। इसलिये यह स्पष्ट है कि हम भी सरकार के विरोधी नही है । यदि विरोधी होते तो सबके कल्याण के लिए यज्ञ क्यों करते ? हम तो देवताओं के कोप से सबको बचाने के लिए सर्वदेव कोपहर प्रीतिकर यज कर रहे हैं। जो अधर्म हो रहा है उसका विरोध करना आवश्यक है क्योंकि मन्दिर तोड़ना बहुत बडा पाप है । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने सन्त सम्मेलन मे व्यक्त किए। यह आन्दोलन किसी भी सत्ता को पाने के लिए नही है। हमें सरकार का विरोध करके कोई सत्ता नहीं पाना है। हम तो परम सत्ता में लीन होने के लिए आगे बढ रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि जब भी राजसत्ता गलत काम करती है तो धर्म के जानने वालों को आगे आकर कहना ही पड़ता है । लोग महात्मा को महाराज इसीलिए कहते है क्योंकि सबको यह विश्वास होता है कि संन्यासी महात्मा धर्म को जानने वाले लोग सदा सत्य का साथ देंगे और राजनेता भी जब गलती करेंगे तो ये लोग सच बोलेंगे। राम सिंहासन से पधारे सुखदेव दास जी महाराज ने कहा कि मन्दिर तोड़ना औरंगजेब का काम है। आज जो भी लोग मन्दिर तोड रहे हैं वे सब असुर हैं। हम सभी सन्तो को मिलकर ऐसा काम करना है कि हमारे सब मन्दिर सुरक्षित रहें। राम जन्म भूमि और कृष्ण जन्म भूमि सुरक्षित रहे । वैष्णव सन्त मोहन दास जी महाराज ने कहा कि हमे मन्दिरों को तोड़ने का बहुत दुख है। ऐसा कृत्य काशी में हो रहा है जिसकी कल्पना कभी नहीं की गयी थी । अखिल भारतीय दण्डी संन्यासी महासभा के महामन्त्री ईश्वर मठ से पधारे स्वामी ईश्वराननाद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि हम साधु महात्मा विकास के विरोधी नहीं हैं। बस यह चाहते है कि जो भी हो वह शास्त्र के अनुसार हो । अधिकारियों को धर्म के जानने वालों से पूछ कर विकास कार्य करना चाहिए। आज जो भी कुठाराघात हो रहे हैं वे सब हिन्दुओं पर ही हो रहे हैं जो दुर्भाग्य का विषय है। अयोध्या के राजमणि शरण जी महाराज ने कहा कि जिन गणेश जी की पूजा सम्पूर्ण विघ्नों के नाश के लिए की जाती है उन भगवान् के मन्दिरों को काशी मे तोड़ा गया है। अधर्म का साथ देने पर बहुत बड़ा पाप भोगना पड़ेगा। सुन्दरवन भदोही से पधारे फलाहारी जी महाराज ने कहा कि काशी मे मन्दिर तोड़ा गया है। साधु का देवताओं का अपमान हो रहा है तो रावण की तरह ही नाश हो जाएगा। चेतावनी है कि जो जहाँ से ऊपर गया है वही पर वह उतर जाएगा । कार्यक्रम का शुभारम्भ मुदित शुक्ल के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। संचालन मयंकशेखर मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द जी महाराज ने किया।

मंदिर व मूर्तियों को तो तोड़ा ही, अब पूजन को भिक  करने से रोक रहा है प्रशासन।।

।। मंदिर बचाओ आन्दोलनम के प्रतिनिधिमंडल मील एडीएम से।। खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- 29 जून 2018 को श्रीविद्या मठ के आचार्यों के बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में तोड़े गए देव विग्रहों के पूजन हेतु पहुंचने पर प्रशासन द्वारा पूजन करने से रोका गया जो न्याय सम्मत नहीं है। आचार्यों द्वारा पूजन करने के बात पर अडिग रहने पर किसी तरह  पूजन करने दिया गया। इसकी जानकारी होने पर जनता ने विरोध किया तथा इस विषय पर मंदिर बचाओ आन्दोलनम की तरफ से वाराणसी के जिला दंडाधिकारी को देर शाम फोन पर सूचित किया गया जिस पर उन्होंने 30 जून को सुबह 9 बजे अपने कार्यालय आने हेतु कहा। स्वामिश्री: को इस बाबत जानकारी मिलने पर उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा - भारतीय संविधान व कानून के मुताबिक कोई भी सनातन धर्मियों को अपने देवताओं के पूजन करने से नहीं रोक सकता। प्रशासन को पूजन से रोकने का अधिकार नहीं है जबकि प्रशासन को वहां नियुक्त इसलिए किया गया कि वे दर्शनार्थियों व श्रद्धालुओं को सहायता प्रदान करे न कि पूजन करने से रोके। यह प्रशासन द्वारा गलत चेष्टा किया गया तथा हम सभी रोजाना अपने देवताओं का पूजन करेंगे और यह पूजन चलता रहेगा। 30 जून को सुबह 9 बजे मंदिर बचाओ आन्दोलनम की तरफ से अधिवक्ता रमेश उपाध्याय के नेतृत्त्व में रामसजीवन शुक्ला, राजकुमार शर्मा, राजमणि महाराज, त्रिभुवन दास महाराज, योगेश्वरानंद महाराज एवं सुदीप्तो चटर्जी ने पूजन न करने देने की बात पर वाराणसी के डीएम से अपनी बात कहने तथा ज्ञापन देने पहुंचे पर उनके अनुपस्थिति में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी ने ज्ञापन को स्वीकार करते हुए एसपी ज्ञानवापी से दूरभाष पर चर्चा कर कार्यपालक अधिकारी, काशी विश्वनाथ को नियमानुसार कार्यवाही कर सुनिश्चित करने हेतु लिखा और ज्ञापन की प्रतिलिपि मंदिर बचाओ आन्दोलनम के प्रतिनिधयों को दिया। इससे यह सुनिश्चित हो गया कि प्रशासन किसी भी सनातन धर्मियों को सुमुख विनायक, प्रमोद विनायक, दुर्मुख विनायक, भारत माता मंदिर एवं सरस्वती फाटक के पास स्थित महादेव आदि की पूजा से वंचित करना अनुचित है। आन्दोलनम यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हम अपने देवताओं की पूजा अर्चना करते रहेंगे । 

पंडरिया के तहसीलदार करिश्मा दुबे और बस्तर के सहायक कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा ने अग्नी को साक्षी मानकर गायत्री मंदिर में लिए सात फेरे

रायपुर - बस्तर के सहायक कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा और पंडरिया की तसीलदार करिश्मा दुबे दोनों अधिकारी श​निवार को रायपुर के गायत्री मंदिर में अग्नी को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाकर परिणय सूत्र में बंध गए। शादी पारंपरिक रीति रिवाज के साथ संपन्न हुई। शादी के बंधन में बंधने के बाद रविवार को रायपुर के डीडी नगर में एक भव्य रिस्पेशन का कार्यक्रम है, जिसमें छत्तीसगढ़ के कई प्रशासनिक अधिकारी और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी शामिल होंगे। आईएएस चंद्रकांत और करिश्मा ने साथ में पढ़ाई की है और दोनों काफी अच्छे दोस्त रहे हैं, लेकिन अब वो दोस्ती शादी में बदल गयी है। 

बता दे की चंद्रकांत वर्मा 2017 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के 5 IAS में से इकलौते होम कैडर के IAS हैं। आईएएस वर्मा पहले राज्य प्रशासनिक सेवा में ही थे, लेकिन बाद में उन्होंने संघर्षों की नयी इबारत लिखी और फिर 7 बार नाकाम होने के बाद यूपीएससी में कामयाबी का झंडा बुलंद किया। 2008 बैच के PSC में चंद्रकांत बतौर डिप्टी कलेक्टर थे।

करिश्मा दुबे 2008 बैच में PSC के जरिये तहसीलदार में सेलेक्ट हुई थी। करिश्मा दुबे 2008 बैच की तहसीलदार हैं और मौजूदा वक्त में पंडरिया में पदस्था है। करिश्मा ने भी बड़े संघर्षों के बाद मुकाम हासिल किया है। इससे पहले करिश्मा शिक्षाकर्मी और महिला बाल विकास विभाग के महिला पर्यवेक्षक के तौर पर कार्य कर चुकी है।   

शिव का ही अंग है काशी का हर शिवलिंग - अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

खबरीलाल रिपोर्ट  (काशी) ::- काशी खण्ड मे वर्णन आया है कि जो भी शिवलिंग काशी में स्थापित हैं वे सब भगवान् शिव के अंग हैं।  कोई सिर है तो कोई पैर, कोई हाथ है तो कोई उदर और वहां यह भी कहा गया है कि जिन जिनका वर्णन इस ग्रन्थ में नही है वे सब शिव जी के रोम अर्थात् रोआ है।  जिस प्रकार शरीर से रोआ को खीचने पर असह्य पीडा होती है उसी प्रकार काशी से यदि एक भी शिवलिंग को हटाया गया तो वह शिव को पीड़ा देना होगा। उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने मन्दिर बचाओ महायज्ञ के प्रथम दिन के सायंकालीन सत्संग सभा के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारे यहाँ कहा गया है कि धर्म के लिए माता पिता भाई बन्धु किसी को भी छोड़ना पडे तो छोड़ देना चाहिए। इसलिए जब कांग्रेस के किसी व्यक्ति ने केरल में गौहत्या की थी और उसका वीडियो प्रचारित किया था तो हमने उसी समय यह संकल्प कर लिया था कि कांग्रेस से हमारा तब तक कोई भी सम्बन्ध नहीं होगा जब तक कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गौहत्या के लिए क्षमा याचना न करे । ऐसे ही जो भी पार्टी धर्म को नष्ट करने के लिए कार्य करेगी उससे हमारा कभी सम्बन्ध नही होगा । इसलिए चाहे भाजपा ही क्यों न हो हमें यह कहने में कोई संकोच नही कि धर्म की हानि करने वाली सरकार से हमारा कोई सम्बन्ध नहीं।  सभा में डॉ मिश्र ने कहा कि काशी का व्यक्ति सबसे पहले काशी का हैं बाद में किसी भी पार्टी का । इसलिए हमें सबसे पहले काशी की संस्कृति को बचाना होगा । घाट में घूमते हुए अनेक मन्दिरों को देखा तो देखकर ऐसा लगा जैसे शरीर से हृदय ही निकाल लिया गया है। हृदय में ही प्राण होता है और काशी में प्राण ही निकाल लिया जा रहा है। काशी मृत नहीं जीवन्त है । यहाँ के लोगों के लिए यदि कुछ करना है तो सरकार को यहाँ के लोगों से पूछना चाहिए।   प्रसिद्ध साहित्यकार आचार्य पं शिवजी उपाध्याय ने कहा कि काशी में जो हो रहा है उससे केवल काशी ही नही अपितु सम्पूर्ण सनातनधर्मियों के मन मे बहुत अधिक पीड़ा है । हमें आश्चर्य हो रहा है कि हिन्दुओं के ठेकेदार कहलाने वालो के द्वारा यह हो रहा है साथ ही एक मठ के महंत योगी जी के कार्यकाल में यह हो रहा । सबसे पीड़ादायक है कि गंगा रक्षा के लिए संकल्पित होकर जो आए उनखे द्वारा यह हो रहा है ।  हम केवल वक्तव्य तक ही सीमित न रहें अपितु आन्दोलनम् के लिए चाहे योगी से मिलना हो चाहे मोदी से मिलना हो चाहे हस्ताक्षर अभियान चलाना हो चाहे अनशन भी करना पडे तो करना चाहिए।  न्याय शास्त्र के आचार्य पं श्री वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि काशी विलक्षण नगरी है। भारतीय संस्कृति के आधार पर ही देश में सनातन धर्म आज भी हैं।  मूर्तियाँ को खण्डित करना महान पाप है। यदि सरकार को काशी का उन्नत विकास करना है तो अनेकों विकल्प है । गलियों को न तोडकर ऊपर से भी मार्ग बनाया जा सकता हैं।  भारतीय परम्परा में कष्ट सहकर भी भगवान् का दर्शन करने की परम्परा है। मोटर गाडी से उतरकर दर्शन की परम्परा भारत में नही है। धर्म विरुद्ध करने वाला चाहे योगी हो चाहे मोदी हो वह पार्टी हमें नही चाहिए।  काशी विद्वत् परिषद् न्यास के अध्यक्ष डॉ श्रीप्रकाश मिश्र  ने कहा कि मन्दिरों की रक्षा के लिए सबको आगे आना चाहिए और आज काशी के विद्वानों का मन्दिर आन्दोलन में साथ मिला तो हमें और अधिक बल मिला है क्योंकि समाज को विद्वान् ही दिशा देते हैं।  सभा के अन्त मे कलाकार विजय शंकर वशिष्ठ ने सुमधुर भजन प्रस्तुत किये तथा सर्वप्रथम सभा का आरम्भ सत्यम शुक्ल के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम, सलदाह के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द ने सभा का संचालन किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्रीप्रकाश मिश्र ने किया। 

महायज्ञ में आहुति देने उपस्थित हुए श्रद्धालुगण।।

खबरीलाल रिपोर्ट  (काशी) ::- मंदिर बचाओ महायज्ञ में आहुति देने उपस्थित हुए सैंकड़ों श्रद्धालुगण। विदित हो कि काशी में प्राचीन मंन्दिरों को तोड़े जाने के विरोध में ज्योतिष व द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश जगद्गुरु शंकाराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती के नेतृत्त्व में मंदिर बचाओ आन्दोलनम की शुरुवात हुई तथा इसी क्रम में 27 जून को शाम 5 बजे श्रीविद्या मठ, केदारघाट, वाराणसी से मंदिर बचाओ महायज्ञ अनुज्ञा यात्रा निकाला गया जिसमें सैंकड़ो सनातन धर्मियों ने पदयात्रा में सम्मिलित होकर काशीवासियों को महायज्ञ हेतु आमंत्रण दिए। ज्ञात हो कि स्वामिश्री: एवं उनके अनुयायियों द्वारा पूर्व में ही वाराणसी जिले के प्रत्येक गांव तथा 90 वार्डों में मंदिर बचाओ रथ यात्रा कर प्रत्येक को मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रित किया गया था। 28 जून 2018 को प्रातः 7:30 बजे वेद मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर बचाओ महायज्ञ की शुरुवात हुई जिसमें 21 पंडितों के साथ छत्तीसगढ़ के सपाद लक्षेश्वर धाम, सलदाह के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज ने यज्ञ में मंत्रोच्चारण के बीच एक लाख से ऊपर आहुतियाँ दी। यह यज्ञ प्रातः 7:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक चली तथा इस 7 दिन व्यापी मंदिर बचाओ महायज्ञ में 8 लाख से ज्यादा आहुतियाँ दी जाएगी जिससे देवताओं के कोपों से काशी वासियों को निदान मिल सके तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्राप्त हो और वे काशी के प्राचीन मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उनका उसी स्थान पर पुनः निर्माण करे।

मैं तेरा जीवन मैं तेरी किस्मत के तुझको मुक्ति यहीं मिलेगी। गंगा ये तेरी है, फिर कैसी देरी है आ जा रे, अब आ भी जा ।।

पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी / व्यंग / कटाक्ष ::- वाराणसी की गंगा ने एक महान व्यक्तित्त्व को अपने यहां सन 2014 में बुलाया था जिसके बाद वे देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हुए और करोड़ों/अरबों रुपये माँ गंगा की सफाई में लगा दिए, फिर भी न गंगा साफ हुई न उसके घाट ठीक हुए अपितु गंगा सिंकुड़ती चली गयी और घाटों में गंदगी बढ़ती चली गयी। गंगा माँ के इस दर्द को देखकर सहसा ही एक गाने के बोल मन मे उमड़ आते हैं - मैं तेरा जीवन मैं तेरी किस्मत के तुझको मुक्ति यहीं मिलेगी। गंगा ये तेरी है, फिर कैसी देरी है आ जा रे, अब आ भी जा ।। उक्त गाने की पहली लाइन यह कह रही है कि मैंने तुझे बुलाकर नया जीवन दिया, मेरी किस्मत (आशीर्वाद) से तू देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हुआ और तुझे मोक्ष की प्राप्ति भी यहीं से मिलेगी। दूसरी लाइन में माँ गंगा कह रही है कि गंगा तेरी माँ है फिर भी तू इतनी देरी लगाता है माँ के पास आने में, माँ से मिलने में और माँ किस हालात में है उसे देखने व जानने में। वाकई माँ गंगा ही नहीं अपितु समूचा वाराणसी पूछ रहा है कि बेटा आप तो विगत 4 वर्षों में शायद ही कोई ऐसा देश बचा हो जहां आप नहीं गए लेकिन आपके पास इतना भी समय नहीं कि माँ गंगा को देखने वाराणसी आ जाओ साथ ही लोगों का यह भी प्रश्न है की आपने अभी तक अयोध्या की यात्रा भी नहीं किये और अपने चक्षु से देखे भी नहीं कि राम लाला कैसे अपना दिन बिना घर के तिरपाल के नीचे गुजार रहे हैं। जब वाराणसी में पुल गिरा तब भी आप वाराणसी नहीं आये और न ही इस हादसे के शिकार लोगों से मिलने आये। उस वक़्त आप कर्नाटक चुनाव में अपने स्वार्थ के लिए जमे थे लेकिन उस क्षेत्र में नहीं आये जहां के आप संसद हैं और माँ गंगा के बेटे हैं। जिस स्वार्थ हेतु कर्नाटक में जमे रहे वह स्वार्थसिद्धि भी नहीं हुई तथा उपचुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। वाराणसी जिले के गाँव जयापुर के वासियों का कहना है कि वे आपको गोद लिए हैं जब कि खबर फैली थी कि आपने उस गांव को गोद लिया है। उस गांव में जाने पर पता चला कि गांव वासी कितने खुश हैं। केवल रास्ता और बिजली आदि से विकास नहीं न होते हैं साहब, विकास तभी माना जायेगा जब पड़े लिखे नौजवानों को नौकरी मिलेगा, शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, एक बड़ा हॉस्पिटल होगा, एम्बुलेंस की सेवा होगी , हर हाथ मे काम होगा और आदि। काशी के बाबा विश्वनाथ परिक्षेत्र में तोड़े गए पुराणों में वर्णित मंदिर और देव मूर्तियों हेतु भी जयापुर गांव वासियों में आक्रोश भी है साथ ही विरोध भी। यह किस तरह का अच्छा दिन है जिसे न आपके संसदीय क्षेत्र के लोग और न ही आपके गोद लिए गांव जयापुर के निवासी समझ पा रहे हैं। आज काशी की गंगा सिंकुड़ गई है जो स्पष्ठ दिखाई दे रहा है। एक तरफ कम पानी तो दूसरी तरफ दहकते रेत जिस पर शाम को गांव के बच्चे पतंग उड़ाते और खेलते हुए नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी, देवताओं की नगरी काशी, मोक्ष की नगरी काशी, घाटों की नगरी काशी, प्राचीनतम मंन्दिरों की नगरी काशी, गलियों की काशी आदि से देवता रुष्ठ होकर न चले जाएं और काशी वीरान न हो जाए। यदि धर्म सम्मत विकास नहीं हुए तो आगामी दिनों में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुगण, पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आ सकती है। यदि ऐसा होता है तो काशी के विश्वनाथ गली के व्यापारियों व अन्य क्षेत्र के व्यापारियों को समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है। बाबा के त्रिशूल में बसी काशी को काशी ही रहने दिया जाए और विकास जितना चाहे उतना करो पर काशी की पहचान मिटाकर नहीं अपितु नई वाराणसी या ग्रेटर वाराणसी बनाकर किया जाए । जनता , शासन व प्रशासन के भय से अभी तक चुप है लेकिन सभी के अंदर की ज्वालामुखी फटने के कगार पर है। ज्वालामुखी फटने के पहले शासन व प्रशासन आधिकारिक घोषणा करें कि विकास कद नाम पर कोई मंदिर नहीं तोड़े जाएंगे और जो मंदिर व देव विग्रह तोड़े गए हैं उसे पुनः निर्मित किया जाएगा, तब कहीं जाकर देवताओं के कोप से बचा जा पाएगा।

मोदी का सपना करेगा उनका अपना ।।

खबरीलाल की विशेष टिप्पणी, व्यंग, कटाक्ष ।। संदर्भ ::- काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एवम वीआईपी दर्शन ।। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की सबसे महत्त्वाकांक्षी परियोजना "काशी विश्वनाथ कॉरिडोर" को अमली जामा पहनाने में उत्तरप्रदेश शासन व प्रशासन पूरे जोर शोर से लगी हुई है। पीएम के इस महत्त्वपूर्ण परियोजना हेतु पुराणों में वर्णित सुमुख विनायक, प्रमोद विनायक मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़कर मलबे में परिवर्तित कर दिया गया है तथा दुर्मुख विनायक मंदिर को प्रशासन ने अपने हाथ मे ले लिया है साथ ही प्राचीन व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर एवं भारत माता मंदिर (महा लक्ष्मी मंदिर) को भी इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना हेतु तोड़ दिया गया है। यहां यह समझने वाली बात है कि बाबा विश्वनाथ के पुत्र तथा प्रथम पूज्य देवता गणेश जी (विनायक) एवं बेटी लक्ष्मी माता के मंदिर व देव विग्रहों को तोड़कर बाबा विश्वनाथ से उनके बेटे और बेटी को अलग कर दिया गया है जिससे सनातन धर्मियों में आक्रोश है और वे इस कार्य का विरोध कर रहे हैं। काशीवासी यह प्रश्न उठा रहे हैं कि कैसे गोरखनाथ पीठ के महंत तथा अभी उत्तरप्रदेश के सीएम महंत योगी आदित्यनाथ इस कार्य को कर रहे हैं और वे खुद एक कट्टर हिन्दू होने के नाते जिनका खुद का हिन्दू युवा वाहिनी है वे पीएम मोदी का सपना पूरा करने में लगे हैं और करोड़ों सनातन धर्मियों के आस्था, विश्वास, एकता के प्रतीक मंन्दिरों को प्रशासन के माध्यम से तोड़वा रहे हैं। काशी वासी यह भी प्रश्न कर रहे हैं कि एक कट्टर हिन्दू नेता जो पहले एक महंत हैं वे कैसे यह पाप का कार्य कर रहे हैं। क्या उन्हें अपने देवताओं से ज्यादा पीएम मोदी के सपने ज्यादा प्रिय हैं ? यदि पीएम मोदी के सपने प्रिय हैं तो इसका कारण उन्हें जनता से कहना होगा क्यों कि जनता के वोट से ही भाजपा पूर्ण बहुमत से उत्तरप्रदेश में सरकार बनाई है और एक कट्टर हिंदुत्त्ववादी नेता को सीएम की कुर्सी पर बैठाया है। क्या सीएम की कुर्सी भगवान और प्राचीन मंदिरों से ज्यादा प्रिय है महंत जी को ? यह बहुत बड़ा सवाल है जिसका जवाब खुद महंत योगी आदित्यनाथ ही दे सकते हैं और उन्हें देना भी चाहिए। क्या कुर्सी का मोह भगवान के मोह से ज्यादा है ? क्या वे ज्ञान शून्य हो गए हैं जो सही और गलत का फैसला नहीं कर पा रहे हैं ? क्या उनके ऊपर किसी भी तरह का दवाब कार्य कर रहा है ? काशी वासियों का कहना है कि काशी नगरी बाबा के त्रिशूल पर बसा है और विश्व के प्राचीन शहरों में इसकी गिनती होती है। बाबा के गले मे जैसे सर्प लपेटा हुआ है वैसे ही विश्वनाथ मंदिर के चारों ओर गालियां है जो सर्प नुमा है और यही लोगों का विश्वास है। लोग यह भी कह रहे हैं कि क्या अब बाबा के सर्प (गलियों) को भी क्षति पहुंचाया जाएगा ? काशी वासी तथा वाराणसी के गांव वासी इस परियोजना का जमकर विरोध कर रहे हैं और मोदी-योगी से निवेदन कर रहे हैं कि ऐसा अनर्थ न करो, भगवान के कोप से डरो, क्यों सनातन धर्मियों के दिल पर हथौड़ा चला रहे हो ? पीएम मोदी के इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का मुस्लिम लोगों ने भी जमकर विरोध किया है और कर रहे हैं लेकिन लगता है प्रत्येक अपने कान में रुई ठूस लिए हैं जिस कारण उन्हें जनता की आवाज सुनाई नहीं दे रही है और अगर दे भी रही है तो पीएम मोदी की महत्त्वाकांक्षी परियोजना की गूंज बस ही सुनाई दे रही है। काशी वासी एवं गांव वासी ने यहां तक कहा है कि यदि इसे त्वरित नहीं रोका गया तो भगवान के कोप से कोई नहीं बचा पायेगा। क्या उस समय पीएम मोदी और सीएम योगी बचाने आएंगे ? नहीं आएंगे , क्यों कि वे भगवान नहीं हैं , वे केवल आम जनता के सेवक हैं और आम जनता के सेवक होकर वे कैसे आम जनता की आवाज को अनसुना कर रहे हैं यह समझ से परे है। बहुत लोगों ने नाम न छापने का आग्रह करते हुए इतना तक कह दिए हैं जिस तरह हमारी बातों को नेता लोग अनसुना कर रहे हैं ठीक उसी तरह चुनाव के वक़्त हम सभी उन्हें अनसुना कर देंगे। मंन्दिरों व देव विग्रहों को तोड़े जाने पर द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती बहुत व्यथित हैं और पुराणों में वर्णित तथा प्राचीन मंन्दिरों को बचाने हेतु हद से ज्यादा प्रयास कर रहे हैं। स्वामिश्री: मंन्दिरों को बचाने हेतु मंदिर बचाओ महायज्ञ भी कर रहे हैं जिससे शासन और प्रशासन को भगवान सद्बुद्धि दे और वे इस विनाश कार्य को तुरंत रोके। ऐसा न हो कि धर्म की राजधानी काशी से देवता रुष्ठ होकर चले जाएं और काशी वीरान हो जाये। स्वामिश्री: के अनुयायी तथा सनातन धर्मी गांवों में जाकर महायज्ञ हेतु आमंत्रण दे रहे हैं और उन्हें वास्तविकता से अवगत भी करा रहे हैं। काशी के एक दो समाचार पत्र के अलावा अन्य समाचार पत्र इस महत्त्वपूर्ण विषय को अपने समाचार पत्र में जगह नहीं दे रहे हैं जबकि वे भी बाबा विश्वनाथ के दरबार मे बैठे हैं और अन्याय को अन्याय नहीं बोल पा रहे हैं जो बहुत ही बड़ा विडंबना है।

एक तरफ मुझ पर आस्था रखकर मेरी पूजा करते ही और दूसरी तरफ मुझे और मेरे मंदिर को तोड़ते हो :: देवतागण

" खबरीलाल सुदीप्तो चटर्जी " द्वारा - लेख, कटाक्ष, व्यंग हे मनुष्य ! हे सनातन धर्मी ! मुझे विगत कुछ दिनों से इतनी पीड़ा हो रही है जिसे मैं सशरीर आपके पास आकर वर्णन नहीं कर सकता। अरबों की संख्या में हिन्दू सनातन धर्म मे आस्था, विश्वास रखने वाले आज इस कलयुग में , हे मनुष्य ! आप सभी को क्या हो गया है ? हम सभी देवताओं की नगरी, हमारे निवस्थान काशी में हमारे बाबा विश्वनाथ व माता पार्वती के सबसे प्रिय पुत्र गणेश जी की मूर्ति एवं मंदिर तोड़ दी गई और आप सब इस अमानवीय घटना को केवल देखकर अपने अंदर छुपा लिए । ये कैसा मनुष्यतत्व है ? क्या आप सभी के मन से हमारे प्रति आस्था, विश्वास, प्यार सब उठ गया है ? मैं सभी देवतागणों की तरफ से एक दूत बनकर आपसे प्रश्न कर रहा हूँ जिसका आप मुझे उत्तर दीजिये जिसे मैं अन्य देवताओं के पास आपकी वाणी को रख सकूँ। मुझे बड़ी पीड़ा हुई कि एक सन्यासी जिन्हें आप दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नाम से जानते हो वे नंगे पांव चलकर , पदयात्रा कर हम सभी देवताओं से माफी मांगे की हम सन्यासी आपके लिए कुछ न कर सके लेकिन आप अपना कोप निरीह मनुष्य के ऊपर मत डालियेगा। उन्हें पाप मुक्त रखियेगा। हम सभी देवताओं को उस वक्त और पीड़ा हुई जब इस भीषण गर्मी के दिनों में एक दंडी स्वामी तथा उनके अनुयायी नंगे पैर तप्ती धरती पर 90 किमी की पदयात्रा किये जो केवल हमारे मंदिरों और हमारे विग्रह को बचाने के लिए। भगवान ब्रह्मा-विष्णु-महेश्वर ने मुझे कहा देखो देवता, दंडी स्वामी के पैर में छाले पड़ गए हैं, खून बह रहा है और इसके पश्चात भी वे पदयात्रा कर मंदिरों को बचाने हेतु आन्दोलनम कर सोये हुए लोगों को जगा रहे हैं। आप मर्त लोक में संदेश भेजिए की दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। वे तो काशी के धरोहरों को बचाने, लोगों को जगाने और विकास के नाम पर विनाश को रोकने हेतु प्रयत्न कर रहे हैं। उन्हें किसी भी राजनेता से कोई दुश्मनी नहीं है उनका केवल इतना कहना है कि - खुद को हिन्दू बोल रहे हो फिर भी मंदिर तोड़ रहे हो। इस वाक्य को हे मनुष्य आप सभी को समझना होगा। हम सभी देवता बहुत खुश हुए थे कि केंद्र तथा राज्य शासन में कुछ साधु, संत, साध्वी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं , हिन्दुतत्व की सरकार आई है, लेकिन वे भी राजनीति के रंग में रंगे हुए मिले। दूसरी बार खुशी हम देवताओं को तब हुई जब एक महंत सांसद से मुख्यमंत्री बना। उस वक़्त हम देवताओं की आस और बढ़ गई कि अब हमारे रामलला का भव्य मंदिर अयोध्या में निर्मित होंगे, लेकिन इस मामले में भी हम देवताओं को निराशा ही हाथ लगी साथ मे विकास के नाम पर हमारे पुराणों में वर्णित हमारे देवताओं के मंदिर ही तोड़ दिए गए और महंत जी कुछ बोल भी नहीं रहे हैं और जिन्होंने मंदिर तोड़ा उनके ऊपर भी कार्यवाही नहीं किये। हे पृथ्वी वासियों, हम सब देवतागण को इतनी पीड़ा हुई कि हम आपस मे रोकर एक दूसरे देवता को सांत्वना दे रहे हैं। आप जब अपने तकलीफों के समय, खुशियों के समय, चुनाव के समय हमारे पास आशीर्वाद लेने आते हो तो क्या हम आप सभी को आशीर्वाद नहीं देते हैं। हम देवतागण कोई भेदभाव नहीं करते। जो जैसा कर्म करता है वो वैसा ही भोगता है। जो अच्छा कार्य जनता के हित में, देश हित मे करते हैं उसे ही जनता जिताती है और उसे ही लोग सर आंखों पर बैठते हैं। ये तो आपका भाग्य और कर्म है कि आप कैसी छवि जनता, लोगों के बीच मे बनाते हो। इसमें हम देवताओं का क्या कसूर जो हमे ही पीड़ा पहुंचाया जा रहा है। हम सभी देवताओं का विश्वास है कि देवताओं का देश, वेद पुराण पढ़ने वालों का देश, विविध संस्कारों का देश, विविध मान्यताओं वाला देश, धार्मिक लोगों का देश एक दिन जरूर जागेगा और हम देवताओं को अपमानित होने से बचायेगा। यही आशीर्वाद हम देवता आप सभी मर्त वासियों को करते हैं।