विशेष

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- काशी के प्राचीन मंदिर व देव विग्रहों को बचाने हेतु सुंदरकांड का पाठ सम्पन्न हुआ।।

काशी में मंदिर बचाओ आन्दोलनम का नेतृत्त्व कर रहे ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु कांवरिया सेना संगठन के राज्य प्रवक्ता हरिनाथ दुबे के नेतृत्त्व में संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया गया जिसमें प्रमुख रूप से उन्नाव की पूर्व कांग्रेस सांसद अनु टंडन, पूर्व कांग्रेस विधायक अजय राय, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, छावनी से कांग्रेस पार्षद शैलेंद्र सिंह, चुन्नू पंडित व आदि कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल सम्मिलित हुए । कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने पूज्य स्वामिश्री: के स्वास्थ की जानकारी लिए और अपना नैतिक समर्थन दिए। इस संगीतमय सुंदरकांड पाठ हेतु काशी के प्रबुद्ध जनों ने साथ मिलकर सुंदरकांड का पाठ किये तथा भगवान श्रीराम एवं बजरंगबली से स्वामिश्री: के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु प्रार्थना किये गए। इसके पश्चात काशी खंडोक्त देवताओं का पूजन उद्देश्य शास्त्री, आचार्य अमित तिवारी ने किया तथा आरती पश्चात उपस्थित सैंकड़ो भक्तगणों को प्रसाद वितरित किये। इस विशेष उपलक्ष्य पर छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज, आचार्य अखिलेश्वर, शंकराचार्य आश्रम रायपुर के समन्वयक व प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी, काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत बबलू महाराज, विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, रवि त्रिवेदी, पूनम कुंडू, शरद पांडेय, राकेश यादव, गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश संयोजक संजय पांडे, सुनील शुक्ला व आदि भक्तगण उपस्थित हुए। ज्ञात हो कि काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में पुराणों में वर्णित मंदिर व देव विग्रहों को तोड़े / गायब कर दिए जाने को लेकर दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कठोर तपस्या विगत 3 महीनों से कर रहे हैं जिसमे उन्होंने सर्वदेव कोपहार प्रितिकर महायज्ञ करवाये जिससे काशीवासियों को देवताओं के कोप से बचाया जा सके तथा शासन व प्रशासन विकास के नाम पर मंन्दिरों और देव मूर्तियों का ध्वंश न करे। स्वामिश्री: ने पहले ही अपने वक्तव्य में कहा था हम न तो सरकार के विरोधी हैं और न ही विकास के, हम केवल चाहते हैं विकास के नाम पर काशी के प्राचीन मंदिरों व देव मूर्तियों को ध्वस्त न किया जाए।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- काशी के प्राचीन मंदिर व देव विग्रहों को बचाने हेतु सुंदरकांड का पाठ सम्पन्न हुआ।।

काशी में मंदिर बचाओ आन्दोलनम का नेतृत्त्व कर रहे ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु कांवरिया सेना संगठन के राज्य प्रवक्ता हरिनाथ दुबे के नेतृत्त्व में संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया गया जिसमें प्रमुख रूप से उन्नाव की पूर्व कांग्रेस सांसद अनु टंडन, पूर्व कांग्रेस विधायक अजय राय, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, छावनी से कांग्रेस पार्षद शैलेंद्र सिंह, चुन्नू पंडित व आदि कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल सम्मिलित हुए । कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने पूज्य स्वामिश्री: के स्वास्थ की जानकारी लिए और अपना नैतिक समर्थन दिए। इस संगीतमय सुंदरकांड पाठ हेतु काशी के प्रबुद्ध जनों ने साथ मिलकर सुंदरकांड का पाठ किये तथा भगवान श्रीराम एवं बजरंगबली से स्वामिश्री: के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु प्रार्थना किये गए। इसके पश्चात काशी खंडोक्त देवताओं का पूजन उद्देश्य शास्त्री, आचार्य अमित तिवारी ने किया तथा आरती पश्चात उपस्थित सैंकड़ो भक्तगणों को प्रसाद वितरित किये। इस विशेष उपलक्ष्य पर छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज, आचार्य अखिलेश्वर, शंकराचार्य आश्रम रायपुर के समन्वयक व प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी, काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत बबलू महाराज, विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, रवि त्रिवेदी, पूनम कुंडू, शरद पांडेय, राकेश यादव, गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश संयोजक संजय पांडे, सुनील शुक्ला व आदि भक्तगण उपस्थित हुए। ज्ञात हो कि काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में पुराणों में वर्णित मंदिर व देव विग्रहों को तोड़े / गायब कर दिए जाने को लेकर दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कठोर तपस्या विगत 3 महीनों से कर रहे हैं जिसमे उन्होंने सर्वदेव कोपहार प्रितिकर महायज्ञ करवाये जिससे काशीवासियों को देवताओं के कोप से बचाया जा सके तथा शासन व प्रशासन विकास के नाम पर मंन्दिरों और देव मूर्तियों का ध्वंश न करे। स्वामिश्री: ने पहले ही अपने वक्तव्य में कहा था हम न तो सरकार के विरोधी हैं और न ही विकास के, हम केवल चाहते हैं विकास के नाम पर काशी के प्राचीन मंदिरों व देव मूर्तियों को ध्वस्त न किया जाए।

गंगा सेवा अभियानम ने काशी में मंन्दिरों व देव मूर्तियों के तोड़े जाने का किया विरोध ।। खबरीलाल रिपोर्ट ::-

@ छत्तीसगढ़ के ब्रह्मचारी व अनुयायी हुए शामिल छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज एवं गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश संयोजक संजय पांडे के नेतृत्त्व में 10 जुलाई 2018 की सायं 5 बजे लगभग 100 से अधिक सदस्यों ने श्रीमद शंकराचार्य घाट पर गंगा जी मे गले तक पानी मे खड़े होकर काशी में मंन्दिरों व देवमूर्तियों को तोड़े जाने का विरोध किया साथ ही धर्म सभा भी आयोजित किये। धर्म सभा को संबोधित करते हुए संयोजक संजय पांडे ने बताया कि काशी में 29 प्राण प्रतिष्ठित देव मूर्तियों को तोड़ दिया/गायब कर दिया गया जिसके विरोध में 2- महीने से अधिक समय से दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज अत्यंत कठिन तपस्या के माध्यम से मंन्दिरों और देव विग्रहों को बचाने हेतु प्रयास कर रहे हैं। संजय पांडे ने आगे कहा कि तोड़े गए मंन्दिरों एवं देव विग्रहों को वैदिक रीति से पुनः स्थापित प्रशासन करे और आगे और मंन्दिरों को तोड़ने की तैयारी को रद्द करे। छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज भी अपने अनुयायियों के साथ विरोध में सम्मिलित हुए और कहा कि हम पूज्यपाद दंडी स्वामिश्री: के समर्थन में मंन्दिरों को तोड़े जाने का विरोध करते हुए आज गंगा जी मे गले तक पानी मे खड़े रहकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हैं तथा दोषी व्यक्तियों को कठोर दंड देने का आग्रह करते हैं। आज के इस विरोध में छत्तीसगढ़ के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज, शंकराचार्य आश्रम रायपुर के समन्वयक व प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी, बेमेतरा से आचार्य अखिलेश्वर, राजकुमार, गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश संयोजक संजय पांडे, सदस्य- सुनील शुक्ला, हरिनाथ दुबे, सतीश अग्रहरि, सुनील उपाध्याय(पूर्व सभा सद), अनुराग द्विवेदी, कृष्णकांत शर्मा, प्रभात वर्मा, धीरज राय, प्रह्लाद गुप्ता, शरद पांडेय, धर्मेंद्र ठाकुर, रोशन यादव, बाबू यादव, मदन यादव, पप्पू यादव व आदि सम्मिलित हुए।

वाराणसी डीएम के प्रतिनिधि मंडल स्वामिश्री: से मीले।। खबरीलाल रिपोर्ट ::-

9 जुलाई 2018 को 5 दिनों से पारक व्रत (उपवास) पर बैठे स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज से मिलने वाराणसी डीएम के प्रतिनिधि मंडल - अरुण कुमार, एडीएम (प्रोटोकॉल), यश वर्धन (एसीएम प्रथम) व अयोध्या प्रसाद सिंह (सीओ, भेलूपुर) दोपहर 1 बजे करीब शंकराचार्य घाट पर आए और स्वामिश्री: से मिले। उनके आगमन पर स्वामिश्री: ने सभी का स्वागत करते हुए उन्हें सम्मान के साथ आसान पर बैठाया।प्रतिनिधि मंडल के अधिकारियों ने बेहद सौहार्द पूर्ण वातावरण में एक घण्टे से ऊपर स्वामिश्री: के बातों को सुना, उनकी मांगों को सुना और मांगों की एक प्रतिलिपि अपने साथ लेकर भी गए। प्रतिनिधि मंडल के अधिकारियों ने स्वामिश्री: से पारक व्रत तोड़ने हेतु अनुरोध किया जिस पर स्वामिश्री: ने कहा कि शास्त्र अनुसार यदि हमारे देवताओं का पूजन न हो, राग भोग न लगे तब तक उपवास करने का नियम है जिसका हम पालन कर रहे हैं। आपने हमारी बातों को सुना साथ मे यह भी जाना कि विकास और सरकार का हम विरोध नहीं कर रहे हैं। हम विरोध केवल मंदिरों एवं मूर्तियों को तोड़े जाने का कर रहे हैं जो काशी की धरोहर है और कुछ मन्दिरों का वर्णन पुराणों में उल्लेख है।

रोके भी नहीं रुके विशाल सिंह ।। खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- 

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आईएएस विशाल सिंह को वार्ता हेतु रोकने का अथक प्रयास विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी ने किया, पर अहंकार और हठधर्मिता के कारण वे महंत राजनाथ तिवारी का भी सम्मान को धूमिल करते हुए अपने साथ आये अधिकारियों के साथ स्मार्टली निकल गए मानो कुछ नहीं हुआ हो। ज्ञात हो कि आईएएस विशाल सिंह 7 जुलाई 2018 को दोपहर 12:30 बजे के करीब 3 दिन से पराक व्रत (उपवास) में बैठे ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती से बात करने पहुंचे। आईएएस विशाल सिंह के आगमन पर स्वामिश्री: ने उनका कुटिया (यज्ञ स्थल) में स्वागत किया और अपने से ऊंचे आसान पर बैठाया और मान सम्मान दिया। बातचीत शुरू हुए 2 मिनट ही हुए होंगे कि अचानक विशाल सिंह अपने तुनक मिजाज दिखाते हुए उठ खड़े हुुुए और चलने के लिए किए, तब नीचे बैठे महंत राजनाथ तिवारी ने उन्हें रोकने हेतु उनके पैर को पकड़े (फ़ोटो में गोल घेरा बना हुआ है) पर वे सीधे बाहर निकले और जूता पहनने लगे। उस वक़्त ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे 56 इंच का सीना ताने अपना अहम दिखा रहे हों। महंत राजनाथ तिवारी ने उन्हें भरपूर मनाने की कोशिश किये, अनुनय विनय किये पर विशाल सिंह ने जिस तरह स्वामिश्री: का अपमान किये ठीक उसी प्रकार राजनाथ तिवारी को सभी के सामने असम्मानित करते हुए चल दिये। एक पड़े लिखे आईएएस का इस तरह एक दंडी सन्यासी का अपमान करना , एक सम्मानित महंत का असम्मान करना वो भी उपस्थित काशी वासियों के सामने समझ से परे हैं। इस वाक्या से उनके सांस्कारिक होने का पता चलता है। कुर्सी और पद हमेशा नहीं रहता है। एक दिन रिटायर होना होगा , उस समय किस बात का रौब, तैश, घमंड दिखाओगे और किसे दिखाओगे। संबंध जीवनभर साथ रहता है पर पद, पैसा आजीवन साथ नहीं देता है। उस पैसे का क्या काम जिसका व्यक्ति उपभोग ही न कर पाए। उस पद का क्या काम जिससे वे संतों , आम नागरिकों की तकलीफों का समाधान ही न कर पाए । शासन को चाहिए कि आईएएस विशाल सिंह के लिए शिष्टाचार सीखने, संस्कारिक्ता सीखने, व्यवहार कुशलता सीखने हेतु किसी ट्रेनिंग सेन्टर में पहले भेजे और बाद में पद और विभाग दे। जिस व्यक्ति का व्यवहार व आचरण एक संत महात्मा के प्रति सही न हो , वो व्यक्ति आम नागरिकों से कैसा व्यवहार करते होंगे वह तो जनता ही बता सकती है। स्वयं विशाल सिंह ने अपने आप को एक इंटरव्यू में नास्तिक होना  बताया है। जो व्यक्ति नास्तिक हो वह कैसे आस्तिकों की बातों को समझेगा और सरकार के सामने रखेगा। दूसरा जो व्यक्ति नास्तिक हो उन्हें आस्था के केंद्र बिंदु काशी विश्वनाथ मंदिर का मुख्य कार्यपालन अधिकारी किस बिन्हा पर बनाया गया ? ऐसे आईएएस अधिकारियों से सरकार की छवि संवारने से ज्यादा धूमिल होंगी जिसे शासन को संज्ञान में लेते हुए उचित कार्यवाही करना चाहिए।

।। खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ।। :: अहंकार और तैश में आकर आईएएस विशाल सिंह वार्ता शुरू होते ही उठकर चल दिये ।।

काशी ::- हम बात कर रहे हैं काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सम्मानीय आईएएस विशाल सिंह साहब का। अद्भुत दृश्य सम्मानीय विशाल सिंह ने एक कठोर तप कर रहे तपस्वी जो शंकराचार्य घाट पर काशी में मंदिर तोड़े जाने को लेकर उपवास में बैठे हैं उनके सामने दिखाया। घमंड में चूर, मदमस्त चाल और तैश का जो खेल सीईओ विशाल सिंह , आईएएस ने तपस्वी दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को दिखाया वह अद्भुत था। लग ही नही रहा था कि वे इतने पड़े लिखे आईएएस हैं। आज का नजारा भुलाए भी नहीं भुलाया जा सकता है। मानो उस समय ऐसा प्रतीत हुआ कि हम कोई पौराणिक फिल्म देख रहे हैं जिसमे सन्यासी को काबू करने एक उद्दंड अधार्मिक व्यक्ति आया हो। उस समय दंडी स्वामी अकेले नहीं थे , अपितु स्वामिश्री: के साथ बहुसंख्या में उनके अनुयायी, भक्तगण व काशी वासी उपस्थित थे जिनके सामने यह घटित किये आईएएस विशाल सिंह ने। सम्मानीय आईएएस विशाल सिंह के व्यवहार , ईगो और अहंकार को देखकर प्रत्येक जन अचंभित रह गए। प्रत्येक ने प्रश्न उठाया कि ये अधिकारी शासन के प्रतिनिधि हैं या खुद ही शासन के राजा हैं जिन्होंने ऐसा दुःसाहस किया। प्रत्येक ने सम्मानीय विशाल सिंह के द्वारा किये गए व्यवहार की घोर निंदा किये। उपस्थित जनों ने कहा कि शासन को ऐसे अधिकारी को वार्ता के लिए भेजना चाहिए जिनके अंदर संस्कार हो और जो लोगों को उनका उचित सम्मान दे और जो आस्तिक हो । उनके अंदर आईएएस होने और सरकारी तंत्र के उच्च पद पर आसीन होने का घमंड न भरा हो। आज सम्मानीय आईएएस विशाल सिंह को देखकर लगा ही नहीं कि वे संस्कारी पुरुष हैं । उनके व्यवहार का लाइव दर्शन आज काशी वासियों ने शंकराचार्य घाट पर तपस्या में लीन दंडी स्वामिश्री: के कुटिया में किया। यह बात फैलते ही मीडिया जगत शंकराचार्य घाट पर उपस्थित हो गए। सम्मानीय विशाल सिंह के आने के पहले कुछ पत्रकार साथी स्वामिश्री: से मिलने पहुंचे थे तथा लगातार तीसरे दिन के उपवास पर चर्चा करने आये थे। 5 जुलाई 2018 को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की तरफ से एक प्रतिनिधि मंडल सम्मानीय विशाल सिंह से बात करने उनके कार्यालय पहुंचे और उस वक़्त विशाल सिंह ने अपने दो कर्मचारियों को मोबाइल से बातचीत करने का वीडियो रिकॉर्डिंग करने का आदेश दिया साथ ही उनके एक अधिकारी ने भी जिस प्रकार का व्यवहार प्रतिनिधिमंडल से किये वह दुर्भाग्यजनक है। सम्मानीय आईएएस विशाल सिंह की वार्ता जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती से शुरू ही हुई थी कि उन्होंने वार्ता को छोड़कर घमंड और तैश दिखाते हुए स्वामिश्री: की बात न सुनते हुए उठकर चलते दिखाई दिए। जब कि स्वामिश्री: ने बड़े आदर के साथ उनका स्वागत किया और अपने से ऊपर बैठने हेतु स्थान उन्हें प्रदान किया। सम्मानीय विशाल सिंह से महंत राजनाथ तिवारी एवं कुछ लोगों ने अनुनय-विनय भी किया कि वार्ता को पूर्ण करके जाइये , पर सम्मानीय विशाल सिंह का ईगो और घमंड ने उन्हें रोक दिया। वे सीधा जूता पहने और अपने साथ आये अधिकारियों और सिक्योरिटी के साथ चल दिये। यह किस तरह का सौजन्यता, शिष्टाचार, व्यवहार है वह भी एक आईएएस द्वारा। यह पूरा माजरा काशी खंडोक्त देवताओं और जनता के सामने हुआ। क्या देवता उन्हें माफ कर देंगे ? कहावत है कि - अहंकार ही पतन का मुख्य कारण होता है।

अब उन्होंने हमसे वार्ता का अधिकार खो दिया :- अविमुक्तेश्वरानन्दः ।।

आज काशी विश्वनाथ मन्दिर के सी.ई.ओ विशाल सिंह लगभग 12.30 बजे मन्दिर बचाओ आंदोलनम् की अगुवाई कर रहे स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज से मिलने उपवास स्थल शंकराचार्य घाट पर आये । अभी वार्ता आरम्भ ही हुई थी कि वे अचानक स्वामिश्रीः की बातों को पूरा सुने बिना ही उठकर चले गये । वार्तालाप के माध्यम बने विशालाक्षी मन्दिर के महन्थ राजनाथ तिवारी ने स्वामिश्रीः का पक्ष उनके सामने रखा तो विशाल सिंह ने कहा कि यह बहुत बड़ी भ्रान्ति है कि मन्दिरों को तोड़ा जा रहा है और जो भी तोड़ा गया है वह मेरे कार्यकाल में नहीं टूटा है । इस पर स्वामिश्रीः ने अपने उत्तर में कहा कि हम 3 अप्रेल 2018 को प्रमोद विनायक के मन्दिर गये थे और वहां मन्दिर टूटा था , भगवान् महीनों मलबे मे पड़े रहे । इतना सुनते ही विशाल सिंह अचानक उठे और तैश में आकर चल दिए। महन्त राजनाथ तिवारी ने उनसे रुकने का बहुत आग्रह किया पर वे उनको भी झटक कर चल दिए । इस घटना पर स्वामिश्रीः ने कहा कि कोई भी अधिकारी आन्दोलन कर रहे लोगों के पास समाधान के लिए वार्ता करने जाता है तो वहाँ पर आन्दोलनरत लोगों की बातों को सुनता है , पर यहाँ पर जिस तरह से विशाल सिंह जी आए और बिना पूरी वार्ता किए उठकर चल दिए इससे हमें यह नहीं लगता कि वे समाधान करने के लिए आए थे । जबकि वे यहाँ पर आए तो हमलोगों ने उनको सम्मानपूर्वक आसन दिया । स्वामिश्रीः ने कहा कि अपने इस कृत्य से विशाल सिंह ने अब हमसे वार्ता का अधिकार खो दिया है । अब इस सम्बन्ध में उनसे कोई वार्ता नहीं होगी। लेकिन यदि कोई और अधिकरी काशी के प्राचीन मन्दिरों को बचाने और विकास के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए वार्ता को आएंगे तो हम उसका स्वागत करेंगे।

32 घंटे से उपवास पर बैठे हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ।।

खबरीलाल विशेष टिप्पणी ::- काशी ही नही बल्कि पूरे विश्व के सनातन धर्मी देखें कि सनातन धर्मियों के मंन्दिरों - मूर्तियों को विनाश के हाथ से बचाने के लिए ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पिछले 32 घंटे से ऊपर काशी के गंगा तट पर शंकराचार्य घाट पर स्थित कुटिया में उपवास कर रहे हैं। यह हमारे सनातन धर्मियों के लिए गर्व की बात है कि एक दंडी सन्यासी हमारे लिए, हमारे आस्था के केंद्रों को बचाने हेतु कठोर तपस्या कर रहे हैं जो साधरणतः ऐसा कहीं भी नहीं देखा जाता है और दूसरी तरफ हम सनातन धर्मी जाग कर सो रहे हैं और केवल जुबानी जमा खर्च कर रहे हैं। क्या काशी के मिट्टी के लोग, बाबा विश्वनाथ के नगरी में रहने वाले, प्राचीन धर्म नगरी में रहने वाले काशी वासी बस यूं ही चुप रहेंगे ? क्या उनका ज़मीर उन्हें चैन से रहने दे रहा है ? क्या जो प्राचीन मंदिर एवं मूर्तियों को ध्वंश किया गया है वह आपका नहीं है ?  यह बहुत ही बड़ा विडंबना है की कुछ काशी वासियों को छोड़ बाकी सब मौन व्रत में लीन है जो कदापि उचित नहीं दिखता है। काशी वासियों और भारत के सनातन धर्मियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है की मानों स्वामिश्री: केवल अपने ही मंदिर और मूर्तियों को बचाने हेतु कठोर तप कर रहे हैं। कुछ सनातन धर्मी जो मोदियाबिंद से पीड़ित हैं वे इसमें राजनीति ढूंढ रहे हैं और लोगों को बहकाने की कोशिश कर रहे है। जबकि सनातन धर्मियों को मालूम होना चाहिए कि कोई भी सन्यासी किसी राजनीत पार्टी का नहीं होता है , वह केवल अपने धर्म के रक्षा के लिए होता है और धर्म ही उनका दल है जिस हेतु वे संकल्पित होते हैं। ।। किसी भी हद तक जाना है । मंदिर - मूर्ति बचना है ।। उपवास में बैठे स्वामिश्री: को देखकर उनके अनुयायी एवं कुछ सनातन धर्मी भी उनके साथ उपवास में बैठे हैं और अनेकों उपवास पर बैठने की जिद कर रहे हैं। स्वामिश्री: जब से उपवास पर बैठे हैं उनसे मिलने अब कुछ काशी वासी आ रहे हैं और घंटो स्वामिश्री: के साथ बैठ रहे हैं। बीते 32 घंटों में बहु संख्या में लोग स्वामिश्री: से मिलने आये और अपनी बातें रखी। अन्य प्रदेशों से गुरु भाइयों के साथ साथ शंकराचार्य आश्रम के ब्रह्मचारी गण, बटुक गण भी उपवास हेतु काशी के लिए चल पड़े हैं और कुछ अपने आश्रमों में ही उपवास कर रहे हैं। यह राष्ट्रीय मुद्दा है जिसे प्रत्येक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल, समाचार पत्रों को प्रमुखता से उठाना चाहिए न कि भक्त बनकर तथाकथित भगवान का ही केवल गुणगान करना चाहिए। आप भी भारतीय हैं, सनातन धर्मी हैं , आपके मंन्दिरों-मूर्तियों को ध्वंश किया जा रहा है फिर भी आप अपने राष्ट्रीय चैनल व समाचार पत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित नहीं कर रहे हो। यह सोचनीय और विचारणीय के साथ साथ आपके आस्था, विश्वास, एकता का भी प्रश्न है। राजनीतिक कुर्सी स्थायी कभी नही होती है लेकिन सच्चाई और धर्म आजीवन स्थायी रहता है और इस पर चलने के लिए दृढ़ निश्चय शक्ति की आवश्यकता है।

काशी में पहले भी विकास हुए हैं, पर मन्दिर कभी नहीं तोड़े गये ::- अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

@ उपवास का आज दूसरा दिन ।।। खबरीलाल रिपोर्ट  (काशी) ::- विकास कोई नयी चीज नहीं अपितु एक सतत प्रक्रिया है जो सृष्टि के आरम्भ से ही चली आई है और आज भी अनवरत है । वर्तमान सन्दर्भों की अगर बात करें तो काशी में कई विकास के कार्य विगत सौ वर्षों में हुए हैं पर उनमें मन्दिर नहीं तोड़े गये । आस्था को चोट नहीं पहुँचाई गयी । फिर क्या कारण है कि आज विकास के नाम पर काशी जैसी धर्मप्राण नगरी में हजारों वर्ष पुराने और आस्था के केन्द्र मन्दिरों को तोड़ा जा रहा है ? क्या यह कोई नये तरह का विकास है ? या फिर इस विकास के करने वाले के मन मे ही मन्दिर द्रोह है ? उक्त प्रश्न विगत दो महीने से चल रहे मन्दिर बचाओ आंदोलनम् को अगुवाई कर रहे ज्योतिष्पीठाधीश्वर और द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दण्डी स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने अपने बारह दिनी उपवास (पराक व्रत) के दूसरे दिन उनके पास आए लोगों को सम्बोधित करते हुए उठाए।  उन्होंने आगे कहा कि काशी में विगत शताब्दी में  हुए विकास पर अगर नजर डाली जाए तो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ, डीजल इंजन कारखाना, कैण्ट रेलवे स्टेशन, छावनी एरिया, ट्रामा सेण्टर आदि की गिनती की जा सकती है पर इनमें से किसी के निर्माण में मन्दिर नही तोड़े गये हैं। वे आज भी इन परिसरों मे यथावत विद्यमान है और उनमें लोग पूजा-अर्चना, उत्सव आदि आयोजन आज भी स्वतन्त्र रूप से कर रहे हैं।  यहाँ तक कि नरिया से महामना पुरी को मुडने वाले चौराहे के बीच केवल एक मन्दिर पड़ने के कारण  हि विश्व विद्यालय के दो परिसर बन गये पर मन्दिर को एक किलोमीटर करीब का रास्ता दिया गया । स्वामिश्रीः ने आगे कहा कि उपर्युक्त स्थानों को ठीक से सर्वे कर हमारे वक्तव्य की पुष्टि की जा सकती है ।  यदि केवल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की ही बात करें तो परिसर के अन्दर स्थित नये एन.सी.सी कार्यालय के पास गुल्ला बाबा मन्दिर, आई.एम.एस के अन्दर बाल हनुमान मन्दिर, आर्ट्स फेकेल्टी एम.पी थियेटर के पास अकेलवा बाबा, छित्तूपुर गेट के आगे ग्राम देवी का मन्दिर, कम्प्यूटर सेण्टर सेन्ट्रल आफिस के पीछे हनुमान जी और शिव जी का मन्दिर सीरग्राम के देवता करमन वीर बाबा का मन्दिर, टीचर्स फ्लैट के पास जंगमपुर गाँव का डीह बाबा मन्दिर, जोधपुर प्रिन्सिपल कालोनी के अन्दर हनुमान मन्दिर, विश्वेश्वरैया हास्पीटल के पास  ग्राम देवता का मन्दिर, एजुकेशन फेकेल्टी कमच्छा में ग्राम देवता का मन्दिर, रणवीर परिसर में सरस्वती जी एवं हनुमान जी के मन्दिर, सी एच एस के अन्दर का हनुमान मन्दिर आदि उदाहरण है। ये सभी मन्दिर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले से ही वहाँ रहे हैं और इन्हें आज भी इनके स्थान पर आदर सहित विराजमान देखा जा सकता है । इसी तरह अन्य स्थानों पर भी देखा जा सकता है । अभी अभी ताजा निर्मित ट्रामा सेण्टर में भी सरस्वती देवी का मन्दिर ज्यो का त्यों रखा गया है । फिर केवल काशी विश्वनाथ कोरिडोर योजना मन्दिरो को तोड़े बिना क्यों नहीं बन सकती है ? ऐसा लगता है कि यह मूल रूप से मन्दिर तोड़ योजना ही है अन्यथा इतना बड़ा अनर्थ विकास के नाम पर नहीं किया जा सकता था । स्वामिश्रीः ने कहा कि शास्त्रों में उल्लेख है कि यदि देवता की पूजा में बाधा उत्त्पन्न कर दी गयी हो तो उपवास किया जाए अन्यथा घोर नरक की प्राप्ति होती है । इसीलिए हमने उपवास आरम्भ किया है । 12 दिन के इस व्रत को पराक व्रत कहा जाता है जो सब दोषों का शमन करता है। हम सनातनधर्मी शास्त्रों के अनुसार अपना जीवन चलाने का प्रयत्न करते हैं , इसलिए 12 दिनों तक चलने वाला पराक व्रत हमने आरम्भ किया है । इस के अनुसार हम बारह दिनों तक केवल जल लेकर निर्वाह करेंगे । आवश्यकता पर औषधि अपवाद होगी । हमें आशा है कि हमारे वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री और कोरीडोर (मूर्ति तोड) योजना के शिल्पकार नरेन्द्र मोदी जी अपने अपने आगामी 14-15 जुलाई के काशी आगमन में काशी की जनता को आश्वस्त करेंगे कि कोई भी मूर्ति और मन्दिर नहीं तोड़ा जाएगा और तोड़े गये मन्दिर पुनः स्वस्थान पर निर्मित किये जाएंगे । यदि ऐसा होता है तो हम काशीवासी उनकी इस घोषणा का स्वागत करेंगे । यदि उन्होंने कुछ नहीं कहा तो 15 जुलाई को मध्याह्न में हम आन्दोलनम् के चौथे चरण  की घोषित करेंगे ।

मंदिर बचाओ महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् का दूसरा चरण सम्पन्न ।।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- विगत सात मई से काशी में टूट रहे मन्दिरों और गायब हो रही मूर्तियों को बचाने के लिए चल रहे आन्दोलनम् का द्वितीय चरण पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार सात दिवसीय मन्दिर बचाओ महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ ही सम्पन्न हुआ । यज्ञ में सभी देवताओं की पूजा अर्चना इस उद्देश्य से की गई कि उनका कोप काशीवासियों पर न टूटे और उनकी कृपा काशीवासियों सहित समस्त सनातनधर्मियों पर सदा बनी रहे तथा जो लोग मन्दिरों को तोड़ने का कार्य कर रहे हैं उन्हें सद्बुद्धि प्राप्त हो । चूंकि अभी तक प्रशासन ने यह घोषणा नहीं की कि मन्दिर और मूर्तियों को अब नहीं तोडा जायेगा। अतः मजबूर होकर आन्दोलनम् के तीसरे चरण की घोषणा करनी पड रही है । ।। आन्दोलनम् का तीसरा चरण कल दुर्मुख विनायक की पूजा से होगा शुरू ।। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज सायंकाल पूजा आरती के अनन्तर स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने आन्दोलनम् के तीसरे चरण की घोषणा की । आन्दोलनम् के तीसरे चरण में उपवास आरम्भ किया जायेगा । यह उपवास समस्त काशीवासी सनातन धर्मियों की ओर से होगा अतः क्रमिक होगा । प्रतिदिन सूर्योदय से आरम्भ कर दूसरे सूर्योदय तक एक व्यक्ति उपवास पर रहेगा । यह क्रम तब तक जारी रहेगा जब तक मन्दिरों को न तोड़ने का निश्चय उद्घोषित नहीं हो जाता । स्वामिश्रीः ने आगे बताया कि कल प्रातः आठ बजे से भगवान् दुर्मुख विनायक की गणेश अथर्वशीर्ष के सहस्रावर्तन पूजा से आन्दोलनम् के तीसरे चरण का आरम्भ होगा । आगामी आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तदनुसार पन्द्रह जुलाई तक यह क्रम चलेगा । सुना गया है कि उसी दिन भारत के प्रधानमंत्री एवं हमारे क्षेत्र के सांसद श्री नरेन्द्र मोदी जी काशी आ रहे हैं । हम काशी के सनातनी हिन्दू जन चाहते हैं कि वे इस विषय पर अपनी बात कहें । वे बतायें कि क्या उन्हें हम काशीवासियों ने क्या उन्हें इसीलिए चुना था कि वे हमारे मन्दिरों को ही तोड़ने लग जायें ? ।। आन्दोलनम् के क्रम में प्रतिदिन होगी 29 आरती और प्रकटेंगे 203 दीप ।। कुछ वर्षों पहले विश्वनाथ मंदिर प्रशासन द्वारा जिन 203 मूर्तियों को तोड़ दिया गया था और जिनकी पुनर्स्थापना का लिखित वचन दिया गया था उनके लिये 203 दीप और वर्तमान में जिन 29 मूर्तियों को गायब कर दिया गया है उनके लिये प्रतीक पूजा के रूप में 29 आरती प्रतिदिन की जायेगी । जब तक उन मूर्तियों को प्रत्यक्ष नहीं कर दिया जाता और नियमित रूप से पूजा अर्चना आरम्भ नहीं कर दी जाती । इस तरह कुल 232 मूर्तियों की प्रतीक पूजा की जाती रहेगा । सभा में कवियित्रि ममता वार्ष्णेय जी ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की । प्रसिद्ध शायर श्री अहमद नवाब जी, शायर फक्कड गाजीपुरी (श्याम लाल जी), शायर इमरान जी ने मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के समर्थन में कविता पाठ किया। कु. ममता तिवारी ने भजन प्रस्तुत किया। सभा में प्रमुख रूप से ब्रह्मचारी उद्धव स्वरूप जी, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द जी, ब्रह्मचारी योगेश्वरानन्द जी, अयोध्या से पधारे फलाहारी बाबा जी, काशी विश्वनाथ मन्दिर के पूर्व महन्थ श्री राजेन्द्र तिवारी बबलू जी, आचार्य पं परमेश्वर दत्त शुक्ल जी, श्री राजमणि शास्त्री जी, रायपुर के प्रसिद्ध समाजसेवी श्री साई जलकुमार मसन्द जी, श्री विजयशंकर पाण्डेय जी, श्री प्रकाश पाण्डेय जी, डा गांगेय हंस जी आदि जन उपस्थित रहे।

डीएम से मिले मंदिर बचाओ आन्दोलनम के प्रतिनिधि मंडल।।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- मंदिर बचाओ आन्दोलनम की तरफ से आज 4 जुलाई 2018 को प्रातः 9 बजे वाराणसी के डीएम से मिलने वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय के नेतृत्त्व में 10 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा और उन्हें ज्ञापन सौंपा जिसमे यह लिखा था कि पुराणों में वर्णित 56 विनायकों में से एक दुर्मुख विनायक मंदिर को तोड़ा जा रहा है जिससे हम सभी सनातन धर्मियों को गहरा आघात पहुंचा है तथा रमेश उपाध्याय ने आगे डीएम साहब को यह भी जानकारी प्रदान किये की यदि मंदिर को खरीदा भी गया है तो उसे तोड़ नहीं सकते और न ही देव विग्रहों को स्थानांतरित कर सकते हैं जिसका समूचा विधि विधान अग्नि पुराण में उल्लेखित है। रमेश उपाध्याय ने वाराणसी के डीएम को यह भी जानकारी दिए कि काशी में पंचक्रोशी की यात्रा सुमुख विनायक, प्रमोद विनायक, दुर्मुख विनायक के मंन्दिरों के दर्शन पश्चात ही शुरू होती है तथा यहीं पर समाप्त भी होता है। आगे रमेश उपाध्याय ने कहा कि मंन्दिरों और देव विग्रहों के तोड़ने का पाप काशीवासियों के ऊपर न लगे इस हेतु दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज विगत 7 दिनों से सर्वदेव कोपहार प्रितिकर यज्ञ श्रीविद्या मठ, केदारघाट में कर रहे है तथा इस मंदिर बचाओ महायज्ञ में आज पूर्णाहुति होने के पश्चात महायज्ञ समाप्त होगा। सभी बातों को सुनकर डीएम साहब ने कहा कि हम कार्यपालक अधिकारी काशी विश्वनाथ से बात कर आपको सूचित करेंगे जिससे एक बैठक इस संबंध में हो और बातें स्पष्ट हों तथा डीएम साहब ने यह भी कहा कि जो भी रास्ता निकाला जाए वह सर्वसम्मति से हो और किसी के भी भावनाओ को ठेस न पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल में श्रीप्रकाश श्रीवास्तव, वृंदावन से पधारे राजमणि महाराज, अयोध्या से पधारे फलाहारी जी महाराज, कानपुर से उद्धवस्वरूप जी महाराज, योगेश्वरानंद जी महाराज, राजकुमार शर्मा, राजनाथ तिवारी ,किशन जायसवाल एवं सुदीप्तो चटर्जी सम्मिलित थे।

छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुई गीतांजली पटेल प्रदर्शन खत्म होने के बाद क्या हुआ पढ़े पूरी खबर

हुमेश जायसवाल

जांजगीर चांपा :-मालखरौदा विकासखंड अंतर्गत सारसकेला के छात्र-छात्राओं द्वारा स्कूल के अव्यवस्थाओं को लेकर जनपद परिसर में हंगामे के साथ अपना प्रदर्शन किया दरसल में सारसकेला के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों की कमी ,बैठक व्यवस्था ,भवन की कमी को लेकर छात्र अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों के पास आएं और जमकर नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किए जिसके समर्थन देने के लिए जोगी कांग्रेस के चंद्रपुर विधानसभा प्रत्याशी गीतांजलि पटेल पहुंची उन्होंने अधिकारियों को यह कहा कि छात्रों की मांग जो है वह उनका हक है और उन्हें जल्द से जल्द पूरा कराना यह आपकी जिम्मेदारी है । गीतांजलि पटेल ने कहा कि छात्र आज पढ़ाई छोड़ कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं यह दुर्भाग्य की बात है और वह स्वयं छात्रों के बीच चिलचिलाती धूप में भी बैठ कर उनका समर्थन दिए साथ ही छात्र छात्राओं के लिए बिस्किट पानी पाउच का व्यवस्था किए और जब अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद छात्र माने जिसके बाद परिसर में फैले कचरे को स्वयं गीतांजलि पटेल साफ करना चालू कर दिए जिसे देख कार्यकर्ता एवं छात्र छात्राएं भी सफाई करने में भिड़ गए ।उनका यह संदेश स्वच्छ भारत मिशन के लिए प्रेरणादायक साबित होता हुआ नजर आया।

जहा जैसा माहौल वैसे रूप में ढल जाते है गीतांजलि

आपको बता दे कि गीतांजलि पटेल क्षेत्र के ऐसे नेत्री है जो किसानों की आंदोलन, उद्योगो के आंदोलन में धूप छाव पानी बरसात की परवाह किये बगैर क्षेत्रवासियों के हक के लिए लड़ाई लड़ती है यही कारण है कि क्षेत्र के जनता की चहेती है।

पत्रकार ख़बरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- पाप का साथ न देकर पुण्य के भागीदार बनें ।।

हिंदुओं आपको काशी के मंन्दिरों को बचाने हेतु आगे आना होगा नहीं तो भगवान के पास जवाब नहीं दे पाओगे जब भगवान आपसे पूछेंगे की हमारे मंदिर और देवमूर्तियों पर आघात जब हो रहे थे तब आपने हमे मर्त लोक में बचाने हेतु क्या प्रयास किये ? अपने अंतरात्मा में झांकिए और पूछिये की जो काशी में हो रहा है क्या वह सही हो रहा है ? ये भी पूछिये अपने मन से की यदि कोई भी मस्जिद/ गुरुद्वारा/ आदि तोड़े गए होते तो वह कौम क्या उसकी रक्षा नहीं करता। अभी भी समय है , हिंदुओं जागो..जागो..जागो और अपने धर्म की रक्षा करो। जो अपने धर्म की रक्षा के लिए आवाज नहीं उठाता है वो भी एक तरह का पाप करता है। रिश्वत लेने वाले से ज्यादा पापी रिश्वत देने वाला होता है। जब आपके देवस्थान ही नहीं रहेंगे तो आप किस की उपासना करोगे। खुद के दुःख के समय भगवान के सामने झोली फैलाते हो , मन्नत मांगते हो पर जब आपके भगवान पर विपत्ति आती है तब आवाज उठाने से डरते हो। मत बन के रहिए मूक बधिर, जागिये- जगाइए और अपने धर्म , मंदिर, देवताओं को ध्वंश होने से बचाइए। जो विकास मंदिर तोड़वाये वो विकास क्या आपको मंजूर है ? देवताओं के कोप से सभी को बचाने हेतु स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती महाराज अपने श्रीविद्या मठ, केदारघाट, वाराणसी में सर्वदेव कोपहार यज्ञ कर रहे हैं लेकिन आप हो कि आप स्वामिश्री: का खुलकर साथ देने से परहेज कर रहे हो और मंदिरों को बचाने हेतु यज्ञ में आहुति भी नहीं देने आ रहे हो। आपका यह आचरण कितना सही है इसका आंकलन आप स्वयं करके देखोगे तो समझ आएगा कि आप कहाँ खड़े हो।भविष्य आप से जरूर एकदिन जवाब मांगेगा, तब उत्तर ढूंढ नहीं पाओगे। निरुत्तर रहने से अच्छा है उत्तर देने हेतु कार्य करें और परम पिता परमेश्वर का सेवा कर आशीर्वाद प्राप्त करें।

हम सरकार के नहीं अधर्म के विरोधी हैं :- अविमुक्तेश्वरानन्दः ।।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- जब कोई संन्यास लेकर सबको अभय प्रदान कर देता है तो वह किसी का विरोधी नही होता । सब उसके लिए अपना स्वरूप ही होते हैं। इसलिये यह स्पष्ट है कि हम भी सरकार के विरोधी नही है । यदि विरोधी होते तो सबके कल्याण के लिए यज्ञ क्यों करते ? हम तो देवताओं के कोप से सबको बचाने के लिए सर्वदेव कोपहर प्रीतिकर यज कर रहे हैं। जो अधर्म हो रहा है उसका विरोध करना आवश्यक है क्योंकि मन्दिर तोड़ना बहुत बडा पाप है । उक्त बातें स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने सन्त सम्मेलन मे व्यक्त किए। यह आन्दोलन किसी भी सत्ता को पाने के लिए नही है। हमें सरकार का विरोध करके कोई सत्ता नहीं पाना है। हम तो परम सत्ता में लीन होने के लिए आगे बढ रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि जब भी राजसत्ता गलत काम करती है तो धर्म के जानने वालों को आगे आकर कहना ही पड़ता है । लोग महात्मा को महाराज इसीलिए कहते है क्योंकि सबको यह विश्वास होता है कि संन्यासी महात्मा धर्म को जानने वाले लोग सदा सत्य का साथ देंगे और राजनेता भी जब गलती करेंगे तो ये लोग सच बोलेंगे। राम सिंहासन से पधारे सुखदेव दास जी महाराज ने कहा कि मन्दिर तोड़ना औरंगजेब का काम है। आज जो भी लोग मन्दिर तोड रहे हैं वे सब असुर हैं। हम सभी सन्तो को मिलकर ऐसा काम करना है कि हमारे सब मन्दिर सुरक्षित रहें। राम जन्म भूमि और कृष्ण जन्म भूमि सुरक्षित रहे । वैष्णव सन्त मोहन दास जी महाराज ने कहा कि हमे मन्दिरों को तोड़ने का बहुत दुख है। ऐसा कृत्य काशी में हो रहा है जिसकी कल्पना कभी नहीं की गयी थी । अखिल भारतीय दण्डी संन्यासी महासभा के महामन्त्री ईश्वर मठ से पधारे स्वामी ईश्वराननाद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि हम साधु महात्मा विकास के विरोधी नहीं हैं। बस यह चाहते है कि जो भी हो वह शास्त्र के अनुसार हो । अधिकारियों को धर्म के जानने वालों से पूछ कर विकास कार्य करना चाहिए। आज जो भी कुठाराघात हो रहे हैं वे सब हिन्दुओं पर ही हो रहे हैं जो दुर्भाग्य का विषय है। अयोध्या के राजमणि शरण जी महाराज ने कहा कि जिन गणेश जी की पूजा सम्पूर्ण विघ्नों के नाश के लिए की जाती है उन भगवान् के मन्दिरों को काशी मे तोड़ा गया है। अधर्म का साथ देने पर बहुत बड़ा पाप भोगना पड़ेगा। सुन्दरवन भदोही से पधारे फलाहारी जी महाराज ने कहा कि काशी मे मन्दिर तोड़ा गया है। साधु का देवताओं का अपमान हो रहा है तो रावण की तरह ही नाश हो जाएगा। चेतावनी है कि जो जहाँ से ऊपर गया है वही पर वह उतर जाएगा । कार्यक्रम का शुभारम्भ मुदित शुक्ल के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। संचालन मयंकशेखर मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द जी महाराज ने किया।

मंदिर व मूर्तियों को तो तोड़ा ही, अब पूजन को भिक  करने से रोक रहा है प्रशासन।।

।। मंदिर बचाओ आन्दोलनम के प्रतिनिधिमंडल मील एडीएम से।। खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- 29 जून 2018 को श्रीविद्या मठ के आचार्यों के बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में तोड़े गए देव विग्रहों के पूजन हेतु पहुंचने पर प्रशासन द्वारा पूजन करने से रोका गया जो न्याय सम्मत नहीं है। आचार्यों द्वारा पूजन करने के बात पर अडिग रहने पर किसी तरह  पूजन करने दिया गया। इसकी जानकारी होने पर जनता ने विरोध किया तथा इस विषय पर मंदिर बचाओ आन्दोलनम की तरफ से वाराणसी के जिला दंडाधिकारी को देर शाम फोन पर सूचित किया गया जिस पर उन्होंने 30 जून को सुबह 9 बजे अपने कार्यालय आने हेतु कहा। स्वामिश्री: को इस बाबत जानकारी मिलने पर उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा - भारतीय संविधान व कानून के मुताबिक कोई भी सनातन धर्मियों को अपने देवताओं के पूजन करने से नहीं रोक सकता। प्रशासन को पूजन से रोकने का अधिकार नहीं है जबकि प्रशासन को वहां नियुक्त इसलिए किया गया कि वे दर्शनार्थियों व श्रद्धालुओं को सहायता प्रदान करे न कि पूजन करने से रोके। यह प्रशासन द्वारा गलत चेष्टा किया गया तथा हम सभी रोजाना अपने देवताओं का पूजन करेंगे और यह पूजन चलता रहेगा। 30 जून को सुबह 9 बजे मंदिर बचाओ आन्दोलनम की तरफ से अधिवक्ता रमेश उपाध्याय के नेतृत्त्व में रामसजीवन शुक्ला, राजकुमार शर्मा, राजमणि महाराज, त्रिभुवन दास महाराज, योगेश्वरानंद महाराज एवं सुदीप्तो चटर्जी ने पूजन न करने देने की बात पर वाराणसी के डीएम से अपनी बात कहने तथा ज्ञापन देने पहुंचे पर उनके अनुपस्थिति में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी ने ज्ञापन को स्वीकार करते हुए एसपी ज्ञानवापी से दूरभाष पर चर्चा कर कार्यपालक अधिकारी, काशी विश्वनाथ को नियमानुसार कार्यवाही कर सुनिश्चित करने हेतु लिखा और ज्ञापन की प्रतिलिपि मंदिर बचाओ आन्दोलनम के प्रतिनिधयों को दिया। इससे यह सुनिश्चित हो गया कि प्रशासन किसी भी सनातन धर्मियों को सुमुख विनायक, प्रमोद विनायक, दुर्मुख विनायक, भारत माता मंदिर एवं सरस्वती फाटक के पास स्थित महादेव आदि की पूजा से वंचित करना अनुचित है। आन्दोलनम यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हम अपने देवताओं की पूजा अर्चना करते रहेंगे ।