देश

अब देवताओं में भी वीआईपी देवता बनाये जाएंगे : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के ३८वें दिन मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रण यात्रा के १०वें दिन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ने गाँव वासियों से कहा कि अब शासन एवं प्रशासन द्वारा वीआईपी देवता बनाये जाएंगे। अब काशी विश्वनाथ बाबा वीआईपी होंगे और अन्य पूज्य देवता आम रह जाएंगे। यह वीआईपी संस्कृति हमारे भगवान तक पहुंच गई है और यह वीआईपी संस्कृति दिमग की तरह भारत के अनमोल संस्कृति को खत्म कर रही है। आगे स्वामिश्री: ने गाँव वासियों से कहा कि सर्व प्रथम 56 विनायक, 24 विष्णु, द्वादश आदित्य काशी में आये और उनके आह्वान पर बाबा विश्वनाथ काशी में पधारे और यहीं रह गए। इन्हीं देवताओं ने मिलकर शिव जी के काशी में आने के मार्ग को प्रशस्त किया। आज वीआईपी संस्कृति को बल देने के लिए शासन और प्रशासन द्वारा बाबा विश्वनाथ परिक्षेत्र में विराजित पुराणों में वर्णित मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़ दिए गए साथ ही अन्य प्राचीन मंदिर भी ढहा दिए गए। ये वही देवता हैं जिन्होंने बाबा विश्वनाथ को काशी में पधारने का रास्ता प्रशस्त किया था। आज समाज मे घोर अन्याय हो रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के भारतनाथ हो सकते हैं मुख्यमंत्री योगी उत्तरप्रदेश के आदित्यनाथ हो सकते हैं लेकिन वो भी केवल 5 वर्षों के लिए लेकिन बाबा विश्वनाथ समूचे विश्व के नाथ हैं और वे वैसे ही रहते हैं जैसे काशी वासी रहते हैं इसलिए बाबा विश्वनाथ सबके प्रिय हैं सबके आराध्य हैं क्यों कि उन्होंने कभी वीआईपी होने का दावा नहीं किया। उन्हें भक्तों ने जिस रूप में पूजा, जिस तरह रखे वे उसी तरह रहे। वे चाहते तो अपने लिए क्या नहीं बना सकते थे लेकिन बाबा विश्वनाथ ने ऐसा नहीं किया, वे खुद को वीआईपी नहीं माने और वे काशी वासियों की तरह काशी में रहने लगे। आज स्थिति ऐसी हो गई है कि बाबा विश्वनाथ के नाम को कलंकित किया जा रहा है। राजा शोभायमान तभी रहता है जब उनके दरबार मंत्री, विद्धवान से भरे हों। ठीक उसी तरह बाबा विश्वनाथ काशी के राजा हैं और उनके दरबार अन्य देवताओं से शोभायमान रहते हैं। आज पीएम मोदी, सीएम योगी की सरकार बाबा विश्वनाथ के दरबार को खाली करने में लगे हैं। कैसा लगेगा जब मोदी केवल अकेले ही चलेंगे ? कैसा लगेगा जब सीएम योगी केवल अकेले ही चलेंगे ? क्यों उनके साथ अन्य मंत्री, अधिकारी आदि साथ चलते हैं ?  आज आमंत्रण यात्रा के 9 वें दिन स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती अपने अनुयायियों के साथ वाराणसी जिले के ग्राम - सीरगोवर्धनपुर, रमना बनपुरखा, नरोत्तमपुर, टेकरी, तारापुर, माधोपुर आदि गाँवों में मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रण देने गाँव वासियों के बीच पहुंचे और आमंत्रण किये। काशी में मंदिर तोड़े जाने का पूरे जोर से गाँव की माताएं, बहने, भाई, बुजुर्ग ने विरोध किया। गाँव वासियों ने कहा कि हम मंदिर तोड़ने नहीं देंगे, हम साथ मिलकर मंन्दिरों को बचाने हेतु आंदोलन करेंगे, मंदिर व देव विग्रहों से चिपक जाएंगे। मंदिर हमारे आस्था, विश्वास, एकता का प्रतीक है , हम यहां पूजा करते हैं, मन्नत मांगते हैं, शुभ कार्य करते हैं । हमारे देवता के मंदिर और देवताओं को कैसे यह शासन और प्रशासन तोड़ सकते हैं।

मंदिर को न तोड़कर भी विकास हो सकता है : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती 'मंदिर बचाओ महायज्ञ आमंत्रण यात्रा" के 9 वें दिन वाराणसी जिले के गाँव - डोमरी, सूजाबाद, रामनगर, भीटी, कोदोपुर में अपने अनुयायिओं के साथ "मंदिर बंचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण देने पहुंचे। उत्सुक गाँव वासियों ने स्वामिश्री: से पूछा कि इस भीषण गर्मी में महाराज आप हमारे घर आये यह हमारे लिए परम् सौभाग्य की बात है। स्वामिश्री: ने कहा जब सनातन धर्म पर शासन एवं प्रशासन की कुदृष्टि पड़े तो हमे इस कुदृष्टि से होने वाले विनाश को रोकने हेतु निकलना पड़ा। स्वामिश्री: ने उपस्थित गाँव वासियों से कहा कि पुराणों में वर्णित काशी के दो विनायक मंन्दिरों के साथ साथ भारत माता मंदिर, व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर व देव विग्रहों को तोड़ दिया गया है वह भी केवल विकास के नाम पर। स्वामिश्री: ने गाँव वासियों से कहा - बिना मंन्दिरों को तोड़े भी विकास हो सकता है । इस हेतु शासन एवं प्रशासन को बुद्धिमत्ता दिखाने और इंजीनियरों से सलाह कर बिना मंदिर तोड़े कैसे विकास हो सकता है इस पर कार्य करना चाहिए । सनातन धर्म के मंन्दिरों को ही क्यों तोड़ना पड़ रहा है जब कि केंद्र और राज्य में हिन्दुत्त्व वादी सरकारों का शासन है।  स्वामिश्री: ने गाँव वासियों को आमंत्रण देते हुए कहा कि हम विकास के बाधक नहीं हैं। शासन एवं प्रशासन जैसा चाहे विकास करे पर बिना हिंदुओं के मंदिर व देव विग्रहों को तोड़कर। हमे किसी भी सूरत में यह विकास मंजूर नहीं जो हमारे धर्म के प्रतीक, एकता के प्रतीक, आस्था के प्रतीक, विश्वास के प्रतीक मंन्दिरों एवं देव विग्रहों को तोड़कर बनाया जाए। सनातन धर्म का पताका मंन्दिरों में ही फहरता है और यदि मंदिर तोड़ दिए जाएंगे तो पताका कहाँ फहरता हुआ दिखेगा ? क्यों एवं किसलिए हिन्दू धर्म, सनातन धर्म के लोगों के हृदय पर आघात कर उसे रक्त रंजित किया जा रहा है ? एक तो  पीएम मोदी के 4 वर्षों के कार्यकाल में राम मंदिर अयोध्या में नहीं बना पाए और ऊपर से देव नगरी काशी के प्राचीन मंदिरों को ध्वंश कर रहे हैं । स्वामिश्री: की बात सुनकर प्रत्येक गाँव वासियों ने एक सुर में कहा कि हमे मंदिर व देव विग्रहों के विनाश पर विकास कतई बर्दाश्त नहीं। सभी गाँव वासियों ने मंन्दिरों को बचाने हेतु संकल्प लिया जिसमे महिला, पुरुष, बुजुर्ग एवं बच्चे उपस्थित थे। साथ ही उन्होंने कहा कि हम बनारस के सांसद, यूपी के मुख्यमंत्री तथा हमारे विधायकों से पूछेंगे की ऐसा कौन सा विकास आप करना चाह रहे हो जिससे हमारे सनातन धर्म के मंदिर व देव विग्रहों की बलि चढ़ा रहे हो। गाँव वासियों ने यह भी कहा कि हमारी काशी बाबा विश्वनाथ की नगरी है, गलियों का शहर है, मंन्दिरों का शहर है, घाटों का शहर है, प्राचीन मंदिरों का शहर है , देवताओं का शहर है जिसे देखने देश एवं विदेश से श्रद्धालु आते हैं और देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शासन एवं प्रशासन को इस ध्वंश का जवाब जनता को देना होगा क्यों कि हम आम जनता ही आपको चुनकर सत्ता पर बैठाए हैं। हम विनाश के बल पर विकास किसी भी तरह से सहन नहीं करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश को दी कई सौगातें - मोदी का पहला भिलाई नगर प्रवास

नया रायपुर में एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केन्द्र का लोकार्पण

छत्तीसगढ़ को मिली पहली घरेलू यात्री विमान सेवा की सौगात 

भिलाई इस्पात संयंत्र में 18 हजार 500 करोड़ की आधुनिकीकरण परियोजना का लोकार्पण: आईआईटी भिलाई के लिए 445 एकड़ में बनने वाले परिसर का शिलान्यास 

भारत नेट परियोजना के दूसरे चरण का भी शुभारंभ: राज्य की 
5987 ग्राम पंचायतों को मिलेगी टेलीफोन इंटरनेट कनेक्टिीविटी 


 रायपुर / भिलाई   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ के संक्षिप्त प्रवास के दौरान राज्य की जनता को अनेक महत्वपूर्ण सौगातें दी। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान द्वारा सवेरे नईदिल्ली से रायपुर पहुंचने के बाद  मोदी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ नया रायपुर पहुंचे, जहां उन्होंने नया रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) के मुख्यालय भवन में एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केन्द्र का लोकार्पण किया। इस केन्द्र में स्मार्ट सिटी के रूप में तेज गति से विकसित हो रहे नया रायपुर शहर में बिजली, पानी, सड़क, संचार और स्वच्छता जैसी नागरिक सुविधाओं की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी, वहीं स्थानीय नागरिक इन सेवाओं से जुड़ी अपनी समस्याओं के बारे में एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केन्द्र को हेल्पलाइनों पर सीधा सूचित कर सकेंगे। 
     प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री के साथ हेलीकॉप्टर से देश के प्रमुख औद्योगिक तीर्थ भिलाईनगर पहुंचे, जहां उन्होंने विशाल आमसभा में भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण से संबंधित कार्यों का लोकार्पण किया। भिलाई इस्पात संयंत्र के इन नये निर्माण कार्यों पर 18 हजार 500 करोड़ रूपए की लागत आयी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1955 में सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत स्थापित यह छत्तीसगढ़ का पहला इस्पात संयंत्र है। वर्ष 1962 में इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता एक मिलियन टन थी, जो वर्तमान में 4 मिलियन टन से ज्यादा हो गई है और आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण के बाद संयंत्र ने अब 7 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता हासिल कर ली है। प्रधानमंत्री  मोदी ने भिलाई इस्पात संयंत्र का भी दौरा किया।

    प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की विगत तीन वर्ष में आज यह पांचवी और दो माह में दूसरी तथा भिलाईनगर की पहली यात्रा थी।   मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार 09 मई 2015 को छत्तीसगढ़ प्रवास पर दंतेवाड़ा आए थे। उन्होंने इसके बाद 21 फरवरी 2016 को नया रायपुर और राजनांदगांव जिले के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वे तीसरी बार एक नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में नया रायपुर आए थे। छत्तीसगढ़ के चौथे प्रवास पर उन्होंने दो माह पहले अम्बेडकर जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल को राज्य के बस्तर संभाग के ग्राम जावंगा (जिला-बीजापुर) आकर राष्ट्रव्यापी ग्राम स्वराज अभियान का शुभारंभ करने के साथ ही आयुष्मान भारत योजना के प्रथम चरण में देश के पहले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का लोकार्पण किया था। 

रायपुर-जगदलपुर-विशाखापट्नम यात्री विमान सेवा का शुभारंभ 
छत्तीसगढ़ को मिली घरेलू विमान सेवा की सौगात

  मोदी ने आज के अपने प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ की जनता को राज्य की प्रथम घरेलू विमान सेवा की भी सौगात दी। उन्होंने केन्द्र सरकार की ‘उड़ान’ परियोजना के तहत आम जनता को कम कीमत पर हवाई यातायात की सुविधा देने के लिए जगदलपुर-रायपुर-विशाखापट्नम के बीच यात्री विमान सेवा का शुभारंभ करते हुए जगदलपुर विमानतल का भी लोकार्पण किया। इस सेवा के अंतर्गत एक निजी कंपनी के 19 सीटों वाले विमान से यात्री सिर्फ 1670 रूपए के टिकट पर रायपुर से जगदलपुर केवल 40 मिनट में पहुंच सकेंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य निर्माण के बाद पहली बार मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की विशेष पहल और बस्तर अंचल को विकास की दृष्टि से सर्वोच्च प्राथमिकता देने की राज्य और केन्द्र की नीति के तहत यह यात्री विमान सेवा शुरू हुई है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है।

 प्रधानमंत्री के हाथों भिलाई आईआईटी का शिलान्यास 
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आज जयंती स्टेडियम में आयोजित आमसभा में भिलाईनगर के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के विशाल भवन परिसर का शिलान्यास भी किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार के अनुरोध पर केन्द्र से भिलाई नगर के लिए आईआईटी की मंजूर मिली और वर्ष 2016 में इसकी स्थापना हुई। यह भारत का 23वां आईआईटी है। प्रधानमंत्री के हाथों भिलाईनगर में हुए शिलान्यास के बाद तीन चरणों में विकसित होने वाले इस संस्थान में सात हजार 500 विद्यार्थी उच्च तकनीकी शिक्षा हासिल कर सकेंगे। केन्द्र सरकार ने भिलाई आईआईटी के लिए प्रथम चरण में एक हजार 082 करोड़ रूपए का बजट आवंटित किया है। वर्तमान में यह संस्थान राजधानी रायपुर के सेजबहार स्थित शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में संचालित हो रहा है। भिलाईनगर में इसका भवन बन जाने के बाद संस्थान वर्ष 2020 में स्थायी रूप से दुर्ग जिले में भिलाई के पास कुठेलभांठा और सिरसाखुर्द में स्थित 445 एकड़ के अपने विशाल परिसर में संचालित होने लगेगा। कैम्पस का निर्माण सितंबर 2018 में शुरू हो जाएगा। यह भवन पर्यावरण हितैषी और बिजली की बचत की दृष्टि से काफी सक्षम होगा। आईआईटी (भिलाईनगर) में वर्तमान में कम्प्यूटर विज्ञान, इलेक्ट्रिकल और मेकेनिकल विषयों में बीटेक तथा एमटेक और छह विषयों-गणित, रसायन, कम्प्यूटर विज्ञान, भौतिकी, इलेक्ट्रिकल और मेकेनिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की भी सुविधा है। देश-विदेश के 25 वरिष्ठ और अनुभवी प्राध्यापक यहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 

भारत नेट परियोजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ
प्रधानमंत्री   मोदी ने भिलाई नगर की आमसभा में केन्द्र सरकार की भारत नेट परियोजना के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ की 10 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में से  5987 ग्राम पंचायतों को भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) द्वारा इंटरनेट सुविधा दी जाएगी। इसके लिए ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। प्रत्येक ग्राम पंचायत पर औसतन 5.66 किलोमीटर के मान से कुल 32 हजार 466 किलोमीटर आप्टिकल फाइबर केबल बिछाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि भारत नेट परियोजना के प्रथम चरण में प्रदेश की चार हजार 104 ग्राम पंचायतों में बीएसएनएल द्वारा इंटरनेट कनेक्टिविटी दी जा चुकी है। दूसरे चरण के कार्य पूर्ण होने पर राज्य के शत-प्रतिशत गांवों को यह सुविधा मिलने लगेगी। इस परियोजना के लिए भारत सरकार द्वारा एक हजार 674 करोड़ रूपए और ओपेक्स के रूप में तीन साल के लिए 392 करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं। भारतनेट परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार के नेतृत्व में एक मॉडल के रूप में किया जा रहा है। इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने मेसर्स टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड का चयन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचार क्रांति योजना के तहत 50 लाख परिवारों को निःशुल्क स्मार्टफोन दिए जाएंगे, जिन्हें भारतनेट परियोजना के तहत अपने फोन पर बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। राज्य सरकार संचार क्रांति योजना में इन परिवारों को 1200 करोड़ रूपए का स्मार्टफोन निःशुल्क देगी। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत नेट परियोजना से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीफोन और इंटरनेट का सम्पर्क तंत्र मजबूत होगा। ग्राम पंचायतों के स्तर पर लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा संजीवनी 108 और महतारी एक्सप्रेस 102 की टोल फ्री सेवाएं आसानी से मिलेंगी। शासन की अनेक ई-सेवाएं ग्राम पंचायतों के स्तर पर सर्वसुलभ होंगी। लाखों लोगों को सूचना, शिक्षा और बाजार की ऑनलाइन सुविधाएं मिलेंगी। डिजीटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ के सभी लगभग 20 हजार गांव टेलीफोन और इंटरनेट से जुड़ जाएंगे। 

हितग्राहियों को सामग्री-चेक वितरित 
प्रधानमंत्री   मोदी ने भिलाईनगर के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में 12 मई से प्रारंभ प्रदेशव्यापी विकास यात्रा 2018 के प्रथम चरण का औपचारिक समापन भी किया। दूसरा चरण 16 अगस्त से शुरू होकर 30 सितम्बर तक चलेगा।  मोदी ने भिलाईनगर के जयंती स्टेडियम की आमसभा में छत्तीसगढ़ सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत कई हितग्राहियों को सामग्री आदि का वितरण किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ युवा सूचना क्रांति योजना के तहत कॉलेज स्तर के विद्यार्थियों को लैपटाप, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत महिलाओं को रसोईगैस कनेक्शन, और प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के तहत हितग्राही महिलाओं को चेक वितरित किए। श्री मोदी ने राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री आबादी पटट्ा योजना के तहत हितग्राहियों को पट्टे भी दिए। उन्होंने ई-रिक्शों का भी वितरण किया। श्री मोदी ने इसके अलावा केन्द्र सरकार की स्टैंड अप और मुद्रा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत हितग्राहियों को चेक वितरित किए। 

प्रधानमंत्री ने नया रायपुर में की नन्हें स्कूली बच्चों से की मुलाकात मोदी ने बच्चों से कहा: खूब पढ़ो, खेलो और बड़े होकर करो बड़ा काम

रायपुर - प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आज यहां नया रायपुर में एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केन्द्र का लोकार्पण करने के बाद वहां क्रिस्टल हाउस स्कूल के नन्हें बच्चों से मुलाकात की। मोदी ने बच्चों को आशीर्वाद दिया और कहा - खूब पढ़ो, खेलो और बड़े होकर बड़े काम करो। उल्लेखनीय है कि नया रायपुर विकास परियोजना के प्रभावित 42 गांवों के बच्चों के लिए सेक्टर 25 में यह स्कूल पांच एकड़ के रकबे में नया रायपुर विकास प्राधिकरण (एन.आर.डी.ए.) द्वारा लगभग पांच करोड़ 57 लाख रूपए की लागत से बनवाया गया है। एन.आर.डी.ए. के एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केन्द्र में  प्रधानमंत्री से इन स्कूली बच्चों की मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी उनके साथ थे। 
    प्रधानमंत्री को बच्चों ने बाल सुलभ अंदाज में अपनी दिनचर्या और स्वच्छता की बातें बतलायी। उन्होंने कहा कि वो स्वयं कचरा नहीं फैलाते है और दूसरों को कचरा फैलाने से रोकते भी है। प्रधानमंत्री   मोदी ने बच्चों से बड़े प्यार से उनके घर, परिवार, उनकी पढ़ाई, खेल आदि के बारे मंे पूछा।  बच्चों ने बड़े ही आदर से उनका जवाब भी दिया। प्रधानमंत्री   मोदी ने बच्चों से कहा  कि वो इसी तरह मेहनत करें, पढ़े, खूब खेले और बड़ा होकर बड़े काम करें। उन्होंने बच्चों से आज से शुरू हो रहे फूटबाल वर्ल्ड कप को भी देखने को कहा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के आवास एवं पर्यावरण मंत्री  राजेश मूणत भी उपस्थित थे। स्कूल की शिक्षिका मनीषा अग्रवाल भी वहां मौजूद थीं।
गौरतलब है कि नया रायपुर क्षेत्र के प्रभावित 42 गांव के ग्रामीण बच्चों को निःशुल्क आधुनिक शिक्षा मुहैया कराने के लिए क्रिस्टल हाउस स्कूल प्रारंभ किया गया है। नया रायपुर के सेक्टर 25 में नया रायपुर विकास प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड के सहयोग से लगभग पांच करोड़ 57 लाख रूपए की लागत से 5 एकड़ क्षेत्र में यह स्कूल बनाया गया है। वर्तमान में यहां 380 बच्चें अध्ययनरत है

मोदी के गोद लिए गांव "जयापुर" के वासियों ने मंदिर तोड़े जाने का किया विरोध।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण यात्रा के ८वें दिन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती 13 जून को पीएम मोदी द्वारा गोद लिए गए गांव "जयापुर" में मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रण देने  रामलीला मैदान पहुंचे जहां स्वामिश्री: ने पुराणों में वर्णित काशी के सुमुख विनायक, प्रमोद विनायक मंदिर एवं देव विग्रह को प्रशासन द्वारा तोड़ दिए जाने की जानकारी प्रदान किए साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दुर्मुख विनायक को ताला लगा दिया गया था किंतु विरोध के पश्चात दुर्मुख विनायक की पूजा अर्चना करने दी जा रही है। इसके साथ ही काशी नगरी के प्राचीन भारत माता मंदिर, व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर को भी प्रशासन ने विकास के नाम पर तोड़ दिए। इस जानकारी के पश्चात जयापुर गांव वासियों ने हिन्दू धर्म के प्राचीन मंदिरों को तोड़ दिए जाने पर अपना विरोध जताया साथ ही यह भी कहा कि विकास के नाम पर मंदिरों को तोड़ना गलत है। आगे गांव वासियों ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी को चाहिए कि बिना मंदिरों को तोड़े उन्हें अन्य उपाय विकास हेतु निकालना चाहिए। मंदिर और देवता सनातन धर्म के आस्था, विश्वास और एकता का प्रतीक है जिसे हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले बनाया था। विश्व की सबसे प्रसिद्ध धर्म नगरी काशी में इस तरह विकास के नाम पर विनाश करने से प्रशासन को बाज़ आना चाहिए और यदि प्रशासन नहीं सुनते हैं तो हम जयापुर वासी इसका कड़ा विरोध करेंगे। स्वामिश्री: ने समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों को गाँव वासियों को दिखाया और बताया कि इस तरह हमारे सनातन धर्मियों के आत्मा पर हतौड़ा चलाया जा रहा है। जयापुर गांव वासियों ने स्वामिश्री: के सामने मंदिर बचाने हेतु संकल्प लिया तथा स्वामिश्री: का निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि हम सभी मंदिर बचाओ महायज्ञ में सम्मिलित होंगे और देवताओं से आह्वान करेंगे कि शासन और प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करे। इस सभा के पश्चात स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती भदोही जिले के बरजी गांव में भागवत कथा के अंतिम दिन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए और अपने श्रीमुख से गाँव वासियों को भागवत, वेद, पुराण के महत्त्व के बारे में बताया। इस उपलक्ष्य पर रमेश उपाध्याय, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश पांडेय, किशन जायसवाल, डॉ विजय शर्मा, उद्देश्य शास्त्री, कृष्णा परासर व आदि भक्तगण उपस्थित थे।

लोग राजनीति की जगह अनीति कर रहे हैं : अविमुक्तेश्वरानंद ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ महायज्ञ हेतु इस भीषण गर्मी के दोपहरी में वाराणसी के गाँव वासियों को आमंत्रण देने गाँव गाँव निकले जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी ने गाँव गड़ेखूं में एक गाँव वासी के सवाल पर कहा कि आज कल लोग राजनीति नहीं कर रहे हैं अपितु अनीति कर रहे हैं। यदि लोग राजनीति करते तो न तो पुराणों में वर्णित काशी के मंदिर एवं देव विग्रह टूटते और न ही सनातन धर्मियों के हृदय पर आघात करते साथ ही साथ अभी तक अयोध्या में राम लला का मंदिर भी बनकर तैयार हो जाता। स्वामिश्री: ने पेपर में प्रकाशित समाचार जिसका शीर्षक था - अब केवल 54 विनायक ही हैं " , इससे स्पष्ट है कि शासन-प्रशासन द्वारा पुराणों में वर्णित दो विनायक मन्दिरों को ध्वंश कर दिए और एक विनायक के मंदिर में प्रशासन ने ताला लगाकर रख दिये हैं जिससे देवताओं की न तो पूजा हो रही है और न ही भोग लग रहा है। इसके अलावा भारत माता मंदिर, व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर आदि को तोड़ दिए गए और आगे भी 250 मंदिर तोड़ने की योजना है। क्या यह अनीति नहीं है ? ग्राम घाटमपुर में एक वृद्ध व्यक्ति ने स्वामिश्री: से पूछा - देवताओं के ऊपर जब हथौड़ा शासन-प्रशासन चला रहे हैं तो देवता स्वयं की रक्षा क्यों नहीं कर लेते ? उनके इस प्रश्न के जवाब में स्वामिश्री: ने कहा कि आपने जो घर मे मंदिर बनाकर देवता का प्राण प्रतिष्ठा कर दोनों समय स्नान, पूजन, आरती और भोग लगाते हैं वे आप खुद करते हैं क्यों कि आपने देवता को अतिथि के रूप में अपने घर बुलाया और उनकी सारी जिम्मेदारी स्नान से लेकर रक्षा तक करने की आपने ली है और यह आपका परम् कर्तव्य भी है। इसी तरह पुराणों में वर्णित मंदिर और देवताओं को हमारे पूर्वजों ने कई हजार वर्ष पूर्व उन्हें अतिथि के रूप में अपने घर बुलाकर उनके लिए मंदिर स्थापित कर उनका प्राण प्रतिष्ठा किये तथा आज समूचे विश्व के श्रद्धालुगण इन प्राचीन मंदिरों, देवताओं, धरोहरों को देखने के साथ साथ देवताओं का आशीर्वाद लेने काशी पहुंचते हैं। काशी देवों की नगरी है जहां मोक्ष की प्राप्ति होती है। काशी गलियों की नगरी है, काशी घाटों की नगरी है जहाँ से गंगा जी का निर्मल प्रवाह अविरल बहता रहता है। स्वामिश्री ने सभी गांवासियों से कहा कि हम आपके पास न तो वोट के लिए आये हैं और न ही नोट के लिए। हम काशी के पुराणों में वर्णित मंदिरों और अन्य प्राचीन मंदिरों और देवताओं को बचाने हेतु सपोर्ट के लिए आये हैं। अभी तक पुराणों में वर्णित सुमुख विनायक, प्रमोद विनायक के साथ साथ प्राचीन भारत माता मंदिर और काशी के व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर को प्रशासन द्वारा तोड़ा गया है जिसमे से दुर्मुख विनायक मंदिर में प्रशासन ने ताला लगा दिया था जिसका विरोध करने पर दुर्मुख विनायक मंदिर को खोल दिया गया है जहाँ हमारे आचार्य दोनो समय भगवान की पूजा, आरती के साथ साथ भोग लगाते हैं। हम शासन और प्रशासन से यह मांग करते हैं कि वे जैसा चाहे विकास करे पर बिना मन्दिरों को तोड़कर करे क्यों कि मंदिर और देवता सनातन धर्मियों के दिल मे बसते हैं और इस तरह सनातन धर्मियों के दिल पर , आस्था पर हतौड़ा न चलाया जाए।

Ancient temples of Kashi should not be destroyed in the name of development : Avimukteshwaranandah .

Sudipto Chatterjee " Khabrilal" (Kashi) ::- Chief of Shree Vidhya Math, Kashi , Dandi Swami Avimukteshwaranandah Saraswati told that we are not opposing development by the Government in Kashi. We are asking Government that temples of Kashi should not be destroyed in the name of development.The temples which has been destroyed in Kashi in the name of development by PM Modi and Yogi Adityanath Government  is not tolerable. The adminstration of Kashi has taken a very wrong step and decision in destroying the ancient temples of Kashi. Huge tourists and devotees of India and abroad used to visit Kashi to do puja archana of God and Goddesses. It is to be noted that Kashi is the capital of Dharm (Dharm Nagri) and Devstas used to stay in kashi, people receive Moksha here. If this demolishing of temples in the area of Baba Vishwanath Temples continues then Devatas of Kashi will leave the city and it will be a great massacre of the century and for Kashi Vasi too. Swami Avimukteshwaranandah saraswati is visiting each and every villages of Varanasi to aware people about demolishing of the temples of Kashi in Baba Vishwanath parikshetra. People of the villages are taking pledge to save the temples and are giving messages to PM Modi & CM Yogi through social media and other medium not to destroy the ancient temples which has been built in ancient times and is been described in Puran. Swamishree told to all the villagers that I came here to invite you all for the Mandir Bachao Mahayagya. I am not asking you all to vote for me. He added that not a single political party stood behind us to save the ancient temples of Kashi. Now the question arises who will save Sanatan Hindu Dharma, their temples and their devatas. Swamishree added the present Government came into power in the name of Hinduttva, Ram Mandir Nirman and we were all happy that now something great will happen in their regime for the Hindus. Another important thing Swami shree mentioned that not a single newspaper is covering this burning issue, it seems that they are either in pressure or are not willing to save the ancient temples of Kashi whereas Media is known as the fourth pillar of Indian Democracy.

काशी का एक कलाकार मंन्दिरों को बचाने कर रहे हैं कड़ी मेहनत ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- उत्तरांचल क्षेत्र का प्रमुख लोक गीत "बिरहा" है जिसे संगीतबद्ध कर अपने स्वर और अंदाज से केवल उत्तरप्रदेश ही नहीं अपितु गुजरात, महाराष्ट्र व अन्य प्रदेशों में मशहूर करने का श्रेय सुप्रसिद्ध बिरहा गायक भैयालाल पाल को जाता है। सबसे खास बात है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भैयालाल पाल एवं साथियों ने मिलकर नरेंद्र मोदी और बीजेपी का अपने लोकगीत के जरिये जबरदस्त प्रचार किये थे और 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके सहभागिता से भाजपा सत्ता पर पूर्ण बहुमत से काबिज हुई। भैयालाल पाल का गाने का अंदाज, संगीत रचना आदि सबसे जुदा थी जो जनता के मन मस्तिष्क पर बस गया था। आज पुराणों में वर्णित काशी के मंन्दिरों एवं देवमूर्तियों को तोड़े जाने से वे इतना व्यथित हो उठे की उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती से आग्रह किया कि आपके मंदिर बचाओ आंदोलन से खुद को जोड़ना चाहता हूँ और मंन्दिरों को बचाने हेतु मैं अपने साथियों के साथ वाराणसी जिले के प्रत्येक गांवों में जाकर जन जागृति करूँगा। भैयालाल पाल जब कक्षा दूसरी में थे तब से वे अपने पिता स्वर्गीय मन्नी पाल के साथ कार्यक्रमों में जाया करते थे और लोक गीत बिरहा गाते थे। बचपन मे उनके परिवार को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा पर वे हार नहीं माने और इस लोक गीत को अपने जीवन के साथ जोड़कर उस मुकाम तक ले गए जहाँ से उन्हें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत महसूस नहीं हुई। भैयालाल पाल का समर्पण, साधना और अनोखा अंदाज उन्हें प्रसिद्धि के शिखर तक ले गया। भैयालाल पाल से जब पूछा गया कि आप इस आंदोलन से कैसे जुड़े तब उन्होंने कहा कि मंन्दिरों, देवताओं में हम प्रत्येक सनातन हिन्दू धर्म के लोगों का आस्था, विश्वास और भावनाएं जुड़ी हुई है। लेकिन जब नरेंद्र मोदी, महंत योगी आदित्यनाथ के सरकार में होते हुए प्रशासन द्वारा पुराणों में वर्णित काशी के सुमुख विनायक, दुर्मुख विनायक, प्रमोद विनायक, व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर, भारत माता मंदिर केवल विकास के नाम पर तोड़ा गया तब मन से आवाज निकली की अब मंन्दिरों को बचाने हेतु प्रयास करना होगा और काशी के मंन्दिरों को बचाना होगा तथा काशी को देवता विहीन होने से रोकना होगा। इसी सोच ने मुझे स्वामिश्री: तक खींच लाया और मैं सेवा की भावना से बिना पारिश्रमिक के जन जागृति हेतु इस महत कार्य से खुद को जोड़ लिया।  भैयालाल पाल ने आगे कहा की मैं अपने साथियों - कवि जगदीश पाल, रामप्रसाद यादव, शालिक सेठ, विजय पाल, विनोद गौर, मुन्नालाल, प्रमोद राठौड़ के साथ इस भीषण गर्मी में वाराणसी के गाँवों में जाकर काशी के मंन्दिरों को बचाने हेतु स्वामिश्री: के साथ जन जागृति का कार्य कर रहा हूँ और इस कार्य से दिल को सुकून मिल रहा है। हमारे आराध्य देवों, मंन्दिरों को क्यों और किसलिए प्रशासन तोड़ रही है इसका जवाब तो उन्हें एक न एक दिन जनता को देना ही होगा। भगवान के घर मे देर जरूर है लेकिन अंधेर नहीं।

काशी का एक कलाकार मंन्दिरों को बचाने कर रहे हैं कड़ी मेहनत ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- उत्तरांचल क्षेत्र का प्रमुख लोक गीत "बिरहा" है जिसे संगीतबद्ध कर अपने स्वर और अंदाज से केवल उत्तरप्रदेश ही नहीं अपितु गुजरात, महाराष्ट्र व अन्य प्रदेशों में मशहूर करने का श्रेय सुप्रसिद्ध बिरहा गायक भैयालाल पाल को जाता है। सबसे खास बात है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भैयालाल पाल एवं साथियों ने मिलकर नरेंद्र मोदी और बीजेपी का अपने लोकगीत के जरिये जबरदस्त प्रचार किये थे और 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके सहभागिता से भाजपा सत्ता पर पूर्ण बहुमत से काबिज हुई। भैयालाल पाल का गाने का अंदाज, संगीत रचना आदि सबसे जुदा थी जो जनता के मन मस्तिष्क पर बस गया था। आज पुराणों में वर्णित काशी के मंन्दिरों एवं देवमूर्तियों को तोड़े जाने से वे इतना व्यथित हो उठे की उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती से आग्रह किया कि आपके मंदिर बचाओ आंदोलन से खुद को जोड़ना चाहता हूँ और मंन्दिरों को बचाने हेतु मैं अपने साथियों के साथ वाराणसी जिले के प्रत्येक गांवों में जाकर जन जागृति करूँगा। भैयालाल पाल जब कक्षा दूसरी में थे तब से वे अपने पिता स्वर्गीय मन्नी पाल के साथ कार्यक्रमों में जाया करते थे और लोक गीत बिरहा गाते थे। बचपन मे उनके परिवार को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा पर वे हार नहीं माने और इस लोक गीत को अपने जीवन के साथ जोड़कर उस मुकाम तक ले गए जहाँ से उन्हें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत महसूस नहीं हुई। भैयालाल पाल का समर्पण, साधना और अनोखा अंदाज उन्हें प्रसिद्धि के शिखर तक ले गया। भैयालाल पाल से जब पूछा गया कि आप इस आंदोलन से कैसे जुड़े तब उन्होंने कहा कि मंन्दिरों, देवताओं में हम प्रत्येक सनातन हिन्दू धर्म के लोगों का आस्था, विश्वास और भावनाएं जुड़ी हुई है। लेकिन जब नरेंद्र मोदी, महंत योगी आदित्यनाथ के सरकार में होते हुए प्रशासन द्वारा पुराणों में वर्णित काशी के सुमुख विनायक, दुर्मुख विनायक, प्रमोद विनायक, व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर, भारत माता मंदिर केवल विकास के नाम पर तोड़ा गया तब मन से आवाज निकली की अब मंन्दिरों को बचाने हेतु प्रयास करना होगा और काशी के मंन्दिरों को बचाना होगा तथा काशी को देवता विहीन होने से रोकना होगा। इसी सोच ने मुझे स्वामिश्री: तक खींच लाया और मैं सेवा की भावना से बिना पारिश्रमिक के जन जागृति हेतु इस महत कार्य से खुद को जोड़ लिया।  भैयालाल पाल ने आगे कहा की मैं अपने साथियों - कवि जगदीश पाल, रामप्रसाद यादव, शालिक सेठ, विजय पाल, विनोद गौर, मुन्नालाल, प्रमोद राठौड़ के साथ इस भीषण गर्मी में वाराणसी के गाँवों में जाकर काशी के मंन्दिरों को बचाने हेतु स्वामिश्री: के साथ जन जागृति का कार्य कर रहा हूँ और इस कार्य से दिल को सुकून मिल रहा है। हमारे आराध्य देवों, मंन्दिरों को क्यों और किसलिए प्रशासन तोड़ रही है इसका जवाब तो उन्हें एक न एक दिन जनता को देना ही होगा। भगवान के घर मे देर जरूर है लेकिन अंधेर नहीं।

हम कोरिडोर योजना का नही, मन्दिरों और मूर्तियों के तोडने का विरोध कर रहे :- अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल"(काशी) ::- स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती ने कहा कि आज वाराणसी के लगभग सभी अखबारों में "काशी विश्वनाथ कोरिडोर योजना किसी भी हालत में बनकर रहेगी" शीर्षक के साथ समाचार प्रकाशित हुआ है। जिससे प्रतीत होता है कि प्रशासन यह कहना चाह रहा है कि जनता कितना भी विरोध करे हम तानाशाही रवैया अपनाएंगे और योजना पूरी करेंगे । यद्यपि यह बात लोकतांत्रिक नहीं है पर वर्तमान सरकार का रवैया ही ऐसा है कि सुन लेना पड़ता है । ।। इस सन्दर्भ में कुछ बातें स्पष्ट करना जरूरी है । । इस सम्बन्ध में हमारा यह स्पष्ट कहना है कि हम काशी विश्वनाथ परिसर के सुन्दरीकरण और विस्तारीकरण या सरकार की किसी और योजना के न तो विरोधी हैं और न ही विरोध कर रहे हैं । इसी तरह हम कोरिडोर योजना के भी विरोधी नहीं हैं ।। ।। हमारा विरोध मात्र इस बात पर है कि योजना को पूरा करने के लिये मन्दिरों को क्यों तोड़ा फोड़ा जा रहा है । हमारा कहना है कि मन्दिरों और देवमूर्तियों को मत तोडिये।। हमने आरम्भ से ही अपने वक्तव्यों मे यह स्पष्ट रूप से कहा है कि हम काशी के प्राचीन , परंपरा से पूजित और पौराणिक मन्दिरों तोडे जाने के विरोधी हैं।। जिन मन्दिरों और मूर्तियों को हमारे पूर्वजों ने स्थापित किया और जिनकी पूजा अर्चना न केवल हम मनुष्य परम्परा से करते आये अपितु यक्षों, गन्धर्वों द्वारा भी जिनकी पूजा की जाती रही उन मन्दिरों और मूर्तियों को तोडना किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा। । विश्वनाथ कॉरिडोर से विरोध नहीं, पर एक भी मन्दिर नहीं तोड़े जाने चाहिये । ।। मन्दिर बचाओ महायज्ञ का सबको आमन्त्रण ।। आगामी 28 जून से 4 जुलाई तक हम इन्हीं मन्दिरों को बचाने के उद्देश्य से सर्वदेव कोपहर प्रीतिकर मन्दिर बचाओ महायज्ञ का आयोजन श्रीविद्यामठ में करने जा रहे हैं। इसमें सभी सनातनधर्मियों को आने की स्वतन्त्रता है । कोई भी राजनेता, अधिकारीगण भी यदि इस महायज्ञ में सम्मिलित होना चाहें तो वे आ सकते हैं लेकिन बस शर्त यही रहेगी कि वे नेता या अधिकारी बनकर नहीं अपितु सच्चे सनातनधर्मी के रूप में मन्दिर बचाने के स्वस्थ उद्देश्य के लिए आएं । जब तक केन्द्र और प्रदेश की सरकारें यह साफ नहीं कर देतीं कि काशी में कोई मन्दिर नहीं तोड़ा जायेगा तब तक मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् चलता रहेगा । सरकार आज इस आशय की घोषणा करे तो आज आन्दोलनम् समाप्त हो जायेगा । ।। हमें मिल रहा है व्यापक जन समर्थन।। जनता अभी तक इस विषय पर इसीलिए मौन दिखाई दे रही है क्योंकि उसे इस बात की जानकारी ही नहीं है कि काशी में मन्दिर तोड़े जा रहे हैं । यहां के अखबार तो दबाव में हैं इसलिए उन्होंने इस आशय के समाचार छापे ही नहीं हैं पर इण्डिया टुडे के ताजा अंक में समाचार छपने के बाद लोगों को जैसे जैसे पता चल रहा है लोग आक्रोशित हो रहे हैं । शीघ्र ही जनता का प्रबल विरोध दिखाई देने लगेगा । ।।अखबारों के लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की छवि अब समाप्त हो रही है जो चिन्ता का विषय है।। काशी में मन्दिरों के तोड़े जाने का इतना बडा समाचार मीडिया द्वारा छिपा लिये जाने से आम जनता के मन में अब यह छवि जा रही है कि अब मीडिया सरकार का हथियार अधिक बन गया है जनता की आवाज़ कम , जो कि लोकतंत्र के लिये ठीक स्थिति नहीं है । हम वस्तु स्थिति को सबके सामने लाने के लिये इण्डिया टुडे का आभार व्यक्त करते हैं ।

भारतीय ज्योतिष व्यवस्था में वेद

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- आदि काल से ज्योतिष का विशेष महत्त्व रहा है। पहले जब राजा-महाराजाओं के घर बच्चा जन्म लेता था तब उसी क्षण ज्योतिषों द्वारा उस बच्चे का गणना कर राजा-महाराजाओं को बताया जाता है तथा ताड़ पत्र में जन्मांक चक्र बनाकर भविष्य के साथ साथ राशि, नक्षत्र, गण आदि की जानकारियों का उल्लेख रहता था। ज्योतिष शास्त्र एक विज्ञान है जिसे आज के समय के लोग भी गहन रुचि रखते हैं तथा दोषों के निवारण हेतु वैदिक पूजा पाठ के माध्यम से निवारण किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के बारे में विस्तृत रूप से खबरीलाल की चर्चा काशी के प्रख्यात ज्योतिष शास्त्राचार्य डॉ हरकेश तिवारी से एक मुलाकत में हुई। ज्योतिष शास्त्राचार्य डॉ हरकेश तिवारी के अनुसार - ज्योतिष सूर्यादि ग्रह नक्षत्र, ताराओं के समूह का मनुष्य आदि पर पढ़ने वाले प्रभाव के ज्ञान को ज्योतिष कहते हैं। आगे उन्होंने ज्योतिष एवं विज्ञान के मेल के बारे में बताया। डॉ हरकेश तिवारी ने बताया कि भारतीय सनातन व्यवस्था में वेद भगवान हैं, 6 अंग हैं जिसमे ज्योतिष को नेत्र कहा गया है। वेद में " ज्योतिषां पतये नमो नमः " कहा गया है। आधुनिक वैज्ञानिक युग में ज्योतिष का विशेष महत्त्व है। आर्यभट्ट, वराह मिहीर आचार्य आदियों ने ज्योतिष को वैज्ञानिक ढंग से विश्व पटल पे परिदर्शित किया है जिसमे काल यानी समय गणना मुख्य रूप से परिदर्शित हैं। समय की छोटी इकाई (कमल पत्र भेदन काल) त्रुटि से लेकर घटयदि का व्याख्या वैज्ञानिक युग के लिए आज भी सहयोगात्मक भूमिका में कार्य कर रही है। ज्योतिष शास्त्राचार्य डॉ हरकेश तिवारी ने आगे बताया कि काशी नगरी में मानघाट है जहाँ पर वेदशाला है। इस वेदशाला का जो निर्माण हुआ है वहाँ पर आज भी बिना घड़ी देखे सही समय को बताया जा सकता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि आज के वैज्ञानिक युग मे वर्षा से संबंधित समय का निर्धारण ज्योतिष विज्ञान से 90 प्रतिशत सही बताया जाता है तथा वैज्ञानिक आज भी 60 से 70 प्रतिशत पर ही अटके हुए हैं। आगे डॉ हरकेश तिवारी ने बताया कि व्यक्ति के जीवन में जो असाध्य रोग हैं उसकी जानकारी ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से ही ज्ञात किया जा सकता है तथा उसका निवारण वैदिक पूजा पाठ के माध्यम से होता है जो आज के 21 वीं सदी में भी प्रचलित है।

काशी को देव विहीन होने से बचाइए : अविमुक्तेश्वरानंद:

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बंचाओ महायज्ञ हेतु आमंत्रण यात्रा के 5वें दिन आज 9 जून 2018 को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: ने वराणशी जिले के गाँव - घामापुर, सभईपुर, सिकंदरपुर, मधाईपुर, इन्द्रवार, बिरापति, बेदी एवं आयर के गांवासियों को 28 जून से 4 जुलाई तक आयोजित होने वाले महायज्ञ हेतु आमंत्रण किया तथा प्रत्येक गांव वासियों को क्यों एवं किसलिए यह आंदोलन और महायज्ञ करने की जरूरत हुई यह विस्तार पूर्वक बताया। स्वामिश्री ने गाँव वासियों को बताया कि अभी की केंद्र और राज्य की सरकार हिन्दुत्त्व का चोला पहनकर हिन्दू हितों के पैरोकार बनकर, अयोध्या में रामलला का मंदिर स्थापित करने की बात कहकर सत्ता में आई और सत्ता में आने के पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व का शायद ऐसा कोई देश बचा नहीं होगा जहां का भ्रमण वे न किये हों पर 48 महीने के उनके कार्यकाल में वे आज तक आयोध्या नहीं गए अपितु देव नगरी काशी में विकास के नाम पर पुराणों में वर्णित मंन्दिरों को तोड़वा दिए। गोरखपीठ के महंत एवं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवाधारी होकर भी इस कृत्य को नहीं रोक रहे हैं जबकि पहले वे हिंदुओं की आवाज हुआ करते थे और हिंदुओं के रक्षा हेतु उनकी हिन्दू युवा वाहिनी लड़ती थी। आज कहाँ गए उनकी हिन्दू युवा वाहिनी जब काशी में पुराणों में वर्णित मंदिरों एवं देव विग्रहों को तोड़ दिया गया। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पंचक्रोशी की यात्रा कर रहे हैं जो केवल एक ढोंग है और सदी का सबसे बड़ा ढोंग है। इस आंदोलन से जुड़े रमेश उपाध्याय, श्रीप्रकाश पांडेय व आदि ने गांव वासियों को अवगत कराते हुए कहा कि काशी में विनाश ने दस्तक दे दिया है। एक समय औरंगजेब ने कहर बरपाया था अब मोदी-योगी बरपा रहे हैं पुराणों में वर्णित मंन्दिरों एवं देव विग्रहों को तोड़कर। यह किस तरह का विकास काशी में हो रहा है। चुनाव के पहले मोदी जी कहते थे मुझे माँ गंगा ने बुलाया है । यदि माँ गंगा ने बुलाया है तो आप और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्यों प्रशासन के द्वारा प्रथम पूज्य देव - गणेश जी, भारत माता मंदिर, व्यास परिवार के राधा कृष्ण मंदिर एवं देव विग्रहों आदि को तोड़ दिए ? कुछ ग्रामों के ग्राम प्रधान और गांव वासियों ने कहा कि यह मोदी-योगी की जोड़ी सदी की सबसे बड़ी भूल किये काशी के पुराणों में वर्णित मंन्दिरों को विकास के नाम पर तोड़कर। स्वामिश्री के साथ साथ इस आंदोलन से जुड़े प्रबुद्ध जनों ने गांव वासियों से कहा कि हम किसी भी पार्टी के विरोधी नहीं हैं। हम अभी के केंद्र तथा राज्य सरकार के आचरण के विरोधी हैं जिनके शय से प्रशासन ने काशी के बाबा विश्वनाथ मंदिर के पास कॉरिडोर, शौचालय, वीआईपी गेस्ट हाउस आदि के निर्माण व विकास के लिए हिंदुओं के दिल और आत्मा पर वार किया है। देश के 100 करोड़ सनातन धर्मी इसके साक्ष्य बने और वे जब एक साथ आवाज उठाएंगे तब मोदी-योगी को जवाब देना भारी पड़ जायेगा।

योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब की याद ताजा कर दिए : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 28 जून से 7 दीन व्यापी "मंदिर बचाओ महायज्ञ" वाराणसी के केदारघाट में आयोजित किया जा रहा है। इस "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: आज वाराणसी जिले के गाँवों - बेलवरियाँ, नक्षेतपुर, दसनीपुर, आदमपुर, चंदापुर एवं मुर्दहाँ गांवों के गांवसियों को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की विस्तृत जानकारी दिए और उन्हें "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण दिए। स्वामिश्री ने अपने विचार रखते हुए प्रत्येक गाँव के गाँव वासियों से कहा कि जिस तरह पुराणों में वर्णित तीन मन्दिरों के साथ भारत माता मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़ दिए गए उससे यह प्रतीत हो रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म पर कुठाराघात किया जिससे वे औरंगजेब से बहुत बड़ा कुकृत्य किये जो सहसा ही औरंगजेब की याद ताजा कर देते हैं। आगे उन्होंने कहा कि जो उनका विरोध करते हैं उन्हें वे विभिन्न तरीके अपनाकर परेशान करते हैं। स्वामिश्री ने एक बहुत बड़ा प्रश्न किया कि जो मोदी रामलला, हिंदुत्त्व के मुद्दों के बल पर सरकार बनाया वे पूरी दुनिया तो घूम लिए पर आज तक रामलला के दर्शन हेतु अयोध्या नहीं गए और न ही राम मंदिर बनाये। गाँव के लल्लू यादव, डबोरा व आदि गांवसियों ने कहा कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा - सबका साथ, सबका विकास अभी तक समझ नहीं आया साथ ही उन्होंने यह भी संदेश यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को दिया कि सनातन धर्म के मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उन्हें त्वरित निर्माण कर श्रद्धालुओं को पूजा करने का अवसर प्रदान करे। उनका जो पंचक्रोशी यात्रा है वो इस घटना के घटित होने पर पूरा ढोंग लग रहा है। एक महंत मुख्यमंत्री क्यों इस तरह के कृत्य को करवा रहे हैं ? गाँव वासियों ने यह भी कहा कि मंदिर हमारे सनातन धर्म के विकास का केंद्र है तथा मंदिर हमारे एकता का प्रतीक है। महिलाओं ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया और उन्होंने प्रश्न उठाया कि हमारे आस्था के केंद्र पर ऐसा प्रहार क्यों एवं किसलिए।

योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब की याद ताजा कर दिए : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 28 जून से 7 दीन व्यापी "मंदिर बचाओ महायज्ञ" वाराणसी के केदारघाट में आयोजित किया जा रहा है। इस "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: आज वाराणसी जिले के गाँवों - बेलवरियाँ, नक्षेतपुर, दसनीपुर, आदमपुर, चंदापुर एवं मुर्दहाँ गांवों के गांवसियों को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की विस्तृत जानकारी दिए और उन्हें "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण दिए। स्वामिश्री ने अपने विचार रखते हुए प्रत्येक गाँव के गाँव वासियों से कहा कि जिस तरह पुराणों में वर्णित तीन मन्दिरों के साथ भारत माता मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़ दिए गए उससे यह प्रतीत हो रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म पर कुठाराघात किया जिससे वे औरंगजेब से बहुत बड़ा कुकृत्य किये जो सहसा ही औरंगजेब की याद ताजा कर देते हैं। आगे उन्होंने कहा कि जो उनका विरोध करते हैं उन्हें वे विभिन्न तरीके अपनाकर परेशान करते हैं। स्वामिश्री ने एक बहुत बड़ा प्रश्न किया कि जो मोदी रामलला, हिंदुत्त्व के मुद्दों के बल पर सरकार बनाया वे पूरी दुनिया तो घूम लिए पर आज तक रामलला के दर्शन हेतु अयोध्या नहीं गए और न ही राम मंदिर बनाये। गाँव के लल्लू यादव, डबोरा व आदि गांवसियों ने कहा कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा - सबका साथ, सबका विकास अभी तक समझ नहीं आया साथ ही उन्होंने यह भी संदेश यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को दिया कि सनातन धर्म के मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उन्हें त्वरित निर्माण कर श्रद्धालुओं को पूजा करने का अवसर प्रदान करे। उनका जो पंचक्रोशी यात्रा है वो इस घटना के घटित होने पर पूरा ढोंग लग रहा है। एक महंत मुख्यमंत्री क्यों इस तरह के कृत्य को करवा रहे हैं ? गाँव वासियों ने यह भी कहा कि मंदिर हमारे सनातन धर्म के विकास का केंद्र है तथा मंदिर हमारे एकता का प्रतीक है। महिलाओं ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया और उन्होंने प्रश्न उठाया कि हमारे आस्था के केंद्र पर ऐसा प्रहार क्यों एवं किसलिए।

योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब की याद ताजा कर दिए : अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" (काशी) ::- मंदिर बचाओ आंदोलन के तहत आगामी 28 जून से 7 दीन व्यापी "मंदिर बचाओ महायज्ञ" वाराणसी के केदारघाट में आयोजित किया जा रहा है। इस "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती: आज वाराणसी जिले के गाँवों - बेलवरियाँ, नक्षेतपुर, दसनीपुर, आदमपुर, चंदापुर एवं मुर्दहाँ गांवों के गांवसियों को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की विस्तृत जानकारी दिए और उन्हें "मंदिर बचाओ महायज्ञ" हेतु आमंत्रण दिए। स्वामिश्री ने अपने विचार रखते हुए प्रत्येक गाँव के गाँव वासियों से कहा कि जिस तरह पुराणों में वर्णित तीन मन्दिरों के साथ भारत माता मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़ दिए गए उससे यह प्रतीत हो रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म पर कुठाराघात किया जिससे वे औरंगजेब से बहुत बड़ा कुकृत्य किये जो सहसा ही औरंगजेब की याद ताजा कर देते हैं। आगे उन्होंने कहा कि जो उनका विरोध करते हैं उन्हें वे विभिन्न तरीके अपनाकर परेशान करते हैं। स्वामिश्री ने एक बहुत बड़ा प्रश्न किया कि जो मोदी रामलला, हिंदुत्त्व के मुद्दों के बल पर सरकार बनाया वे पूरी दुनिया तो घूम लिए पर आज तक रामलला के दर्शन हेतु अयोध्या नहीं गए और न ही राम मंदिर बनाये। गाँव के लल्लू यादव, डबोरा व आदि गांवसियों ने कहा कि हमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा - सबका साथ, सबका विकास अभी तक समझ नहीं आया साथ ही उन्होंने यह भी संदेश यशस्वी मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को दिया कि सनातन धर्म के मंदिरों को न तोड़े और जो मंदिर तोड़े गए हैं उन्हें त्वरित निर्माण कर श्रद्धालुओं को पूजा करने का अवसर प्रदान करे। उनका जो पंचक्रोशी यात्रा है वो इस घटना के घटित होने पर पूरा ढोंग लग रहा है। एक महंत मुख्यमंत्री क्यों इस तरह के कृत्य को करवा रहे हैं ? गाँव वासियों ने यह भी कहा कि मंदिर हमारे सनातन धर्म के विकास का केंद्र है तथा मंदिर हमारे एकता का प्रतीक है। महिलाओं ने कड़े स्वर में मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया और उन्होंने प्रश्न उठाया कि हमारे आस्था के केंद्र पर ऐसा प्रहार क्यों एवं किसलिए।