विशेष

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- वेदांत श्रवण से अज्ञानता की निवृत्ति होती है : स्वरूपानन्द सरस्वती ।।

वृंदावन के पवित्र धरती पर उड़िया बाबा आश्रम में आयोजित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज के 68 तम चातुर्मास्य के द्वितीय दिवस पर पंचदसि वेदांत का स्वाध्याय हुआ जिसमें प्रमुख रूप से पूज्य महाराजश्री के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी सदानंद जी सरस्वती, दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती, स्वामी अमृतानंद जी सरस्वती, ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी महाराज, विश्व कल्याण आश्रम, झारखंड के ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानंद जी महाराज व शिष्य एवं भक्तगण उपस्थित थे। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने पचंदसि वेदांत स्वाध्याय के प्रारम्भ में कहा की ज्ञान प्रदाता गुरु अपने शिष्य एवं भक्तों के अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी प्रकाश से दूर करते हैं। आगे उन्होंने कहा कि महा मोह माने अनादि अज्ञानता है और इस मोह में मनुष्य डूबा हुआ है। यदि मनुष्य वेदांत का श्रवण करता है तो अपनी अज्ञानता दूर कर सकता है। आगे महाराजश्री ने बताया कि सुख हमारी स्वाभाविक इच्छा होती है तथा उसी तरह प्यार भी स्वाभाविक इच्छा है। मनुष्य को जहां प्यार मिलता है वह वहीं जाता है। मनुष्य की चाहत होती है कि उन्हें दुःख कभी न हो और उन्हें अनंत सुख चाहिए और यह ही परम पुरुषार्थ है। यह तब होगा जब प्रभु से साक्षात्कर होगा। प्रभु से साक्षात्कर के लिए पहले व्यक्ति को धर्म के पथ पर चलना होगा, हृदय के निर्मल होना है, किसी भी प्रकार के संशय में नही पढ़ना है, हमेशा प्रसन्न रहना है, मन मे किसी भी तरह के ईर्ष्या द्वेष नहीं रखना है आदि से जब परम् शांति का अनुभव हो तो ईश्वर की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति अपनी ही प्रसंशा करे , अपनी ही बढ़ाई करे वह जुगनू की तरह होता है। कभी भी दम्भ, घमंड नहीं करना चाहिए। माया से ही झूट और अधर्म की उत्पत्ति होती है। दम्भ बहुत घातक होता है, इससे क्रोध, ईर्ष्या आदि उत्पन्न होते हैं और यह बढ़ता ही चला जाता है।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- यह कितना विचित्र है कि अध्यादेश में "पूजा संपादन स्थल" को भवन माना गया है :- अविमुक्तेश्वरानंद:

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि तथा मंदिर बचाओ आन्दोलनम के नेतृत्त्वकर्ता दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आज खचाखच भरे मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति में कहा कि यह कितना विचित्र है कि अध्यादेश में पूजा संपादन स्थल को भवन माना गया है । इससे यह प्रतीत हो रहा है कि पूजा संपादन स्थल को भवन के रूप में परिभाषित कर मठ और मंदिरों के ध्वस्तीकरण को वैध ठहराने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। ज्ञात हो कि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा गंगा पाथवे और श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर 29 जून 2018 को श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ठ क्षेत्र विकास परिषद, वाराणसी अध्यादेश 2018 पारित किया गया था। लेकिन अध्यादेश को पूर्ण पढ़ने के बाद यह समझ आया कि यह धर्म के विकास और उन्नयन के लिए नहीं अपितु उद्योग और पूंजीवाद के विकास के लिए है। स्वामिश्री: ने आगे कहा कि अध्यादेश में 15 मोहल्लों को समाहित किया गया है परंतु उन 15 मोहल्लों में स्थित मठ-मंदिरों को कहीं भी स्थान नहीं दिया गया है अपितु पूरा का पूरा बॉल उन्होंने अपने ही कोर्ट में रखा है। ये हिंदुत्त्ववादी सरकार , हिन्दू धर्म के पवित्र स्थान - पूजा संपादन स्थल को ही भवन के रूप में परिभाषित कर हिन्दू धर्म पर कुठाराघात किया है। साथ ही उन्होंने अध्यादेश में काशी को तीर्थ की जगह पर्यटन हेतु उन्नयन की बात कही है जब कि अनादि काल से काशी तीर्थ स्थान के रूप में ही समूचे विश्व मे जानी पहचानी जाती है और पर्यटन एक उद्योग है, क्या काशी को तीर्थ के रूप में उन्नयन न कर एक उद्योग के रूप में विकास किया जा रहा है ? स्वामिश्री: ने अध्यादेश पर कई बड़े सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा - परिषद नीलामी, आवंटन, पट्टा, किराया, लाइसेन्स आदि प्रदान करेगी। परिषद विशिष्ट क्षेत्र में कोई भी व्यापार या व्यवसाय कर सकती है। परिषद जिन्हें उचित समझेगी उसे टैक्स में छूट दे सकती है। परिषद जिस भवन को चाहे उसे अध्यादेश से छूट दे सकती है। परिषद के आदेशों का उल्लंघन करने पर दंड की व्यवस्था है किंतु परिषद के अधिकारियों द्वारा उल्लंघन किये जाने पर कोई दंड की व्यवस्था नहीं है। सबसे महात्त्वपूर्ण, परिषद में धर्म अथवा दर्शनशास्त्र के विशेषज्ञों को कोई स्थान नहीं दिया गया है जबकि प्रकरण धर्म स्थान का है। ये किस प्रकार का अध्यादेश है जो एक पक्षीय दंड की व्यवस्था करता है और तीर्थ, मठ, मन्दिर को कोई स्थान नहीं दिया जाता है ?

"आत्मा वही काया नई " कैसे रहेगी जब मन्दिरों गलियों के शहर में मन्दिर और गलियाँ ही नहीं रहेंगी ? खबरीलाल रिपोर्ट ::-

@ उपवास का 250वां घंटा 11वां दिन काशीवासी कई दिनों से प्रतीक्षारत थे कि प्रधानमंत्री और काशी के सांसद नरेन्द्र मोदी अपने काशी प्रवास में मन्दिरों को ना तोडने की बात कहेंगे । उन्होंने स्पष्ट तो नहीं पर संकेत में ही यह बात कह दी है । उन्होंने कहा कि काशी की आत्मा नहीं बदली जा सकती, काया नई करना ही हमारा काम है ।इससे आशा जगी है कि प्रधानमंत्री के वक्तव्य के अनुसार यहाँ का स्थानीय प्रशासन काशी की पौराणिक गलियों और मन्दिरों से छेडछाड की अपनी प्रवृत्ति पर विराम लगाएगा और प्रधानमंत्री के वचनों पर अमल कर दिखाएगा । उक्त उद्गार मंदिर बचाओ आन्दोलनम के अन्तर्गत तीसरे चरण में बारह दिनी उपवास @पराक व्रत पर बैठे स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती शंकराचार्य घाट स्थित उपवास स्थल से कही । उन्होंने कहा कि हमें आशा है कि मुद्दे पर शीघ्र ही उत्तरप्रदेश का शासन प्रशासन इस सम्बन्ध में स्पष्ट घोषणा करेगा । स्वामिश्रीः ने आगे कहा कि कल प्रातः नौ बजे उनका उपवास पूरा होगा और पारणा के बाद दिन बारह बजे प्रेस कान्फ्रेंस कर वे आन्दोलनम् का अगला चरण घोषित करेंगे । ज्ञात हो कि स्वामिश्रीः के पराक व्रत का 11वां दिन है । @ नरेंद्र मोदी भगवान नहीं । स्वामिश्रीः ने राजातालाब क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही परम्परा के टूटने पर प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम आयोजकों की कड़ी आलोचना की है । उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान जगन्नाथ जी के रथ को मार्ग से हटाकर अन्यत्र ले जाकर खडा किया गया उससे लगता है कि उत्तरप्रदेश का शासन प्रशासन जगन्नाथ और विश्वनाथ को नहीं अपितु नरेन्द्र मोदी को ही भगवान मानने लग गया है । यह प्रवृति दानवी प्रवृत्ति है भारतीय समाज ने इसका कभी भी स्वागत नहीं किया है । @ गंगा के बारे में बोलने में संकोच क्यों नही हुआ ? स्वामिश्रीः ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस वक्तव्य पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वे पुरानी सरकारों पर गंगा के नाम पर धनको हजम का आरोप लगाते रहे पर अपने सवा चार साल के कार्यकाल में हुई गंगा की अनदेखी पर एक शब्द नहीं कहा । आश्चर्य है कि प्रधानमंत्री जैसे पद पर बैठा व्यक्ति अपनी कमियों पर कोई संकोच नहीं दिखाता । @ रंग बिरंगी बत्ती कब तक रहेगी ? स्वामिश्रीः ने अखबारों में प्रकाशित और पीएम मोदी द्वारा वर्णित वाराणसी के प्रमुख स्थापत्यों पर रंग-बिरंगी बत्तियों पर कटाक्ष किया और कहा कि नरेन्द्र मोदी के विकास का खोखलापन इसी से उजागर होता है कि आज उनके पास अपने द्वारा बनवाया गया एक स्थान नहीं है जिसे वे दिखा सकें । पुराने बने भवनों, घाटों आदि स्थान पर रंग-बिरंगी बत्तियां लगाकर वे अपने को विकास का पुरोधा कह रहे हैं । आखिर ये बत्तियां कबतक रहेंगी ? @ क्या हजार करोड़ की योजना सेकाशी को खरीदा जा सकता है ? स्वामिश्रीः ने कहा है कि यह वह काशी है जिसके डोम ने राजा हरिश्चन्द्र को खरीद लिया था । इसे आर्थिक प्रलोभन से खरीदा नहीं जा सकता है । काशी के लोगों में आज भी वही गौरव विद्यमान है । देने वाला देना चाहे तो दे पर दे देने मात्र से उसे यहाँ की परम्परा और संस्कृति से छेड़छाड़ का अधिकार नहीं मिल जाता ।

आखिर क्या है पराक व्रत ?

।। लेखक : रंजन शर्मा, शोध सहायक ,केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान ,सारनाथ, वाराणसी ।। इन दिनों काशी में मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् के अन्तर्गत ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी केदार घाट के बगल में गंगा किनारे बारह दिनों के पराक व्रत पर बैठे हैं । इस व्रत के दौरान वे लगातार बारह दिनों तक केवल जल पर निर्वाह कर रहे हैं । ऐसे में लोगों के मन में इस व्रत के बारे में जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हो गई है । लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि आखिर क्या है यह पराक व्रत? और किसलिए किया जाता है ? इसे जानने के लिए हमें भारत के उस कालखंड में जाना होगा जब लोग शास्त्रों के अनुसार जीवन व्यतीत करते थे । अधिकांश लोग तो अपराध जिसे शास्त्र की भाषा में पाप कहा जाता है , करते ही नहीं थे । यदि किसी से कोई दोष पाप जाने अनजाने हो भी जाता था तो वह स्वयं राजा या धर्माचार्य के पास जाकर अपना पाप बताकर उसका दण्ड स्वीकार करता था । बताये गये दण्ड को भोगकर वह स्वयं को निष्पाप बना लेता था । शास्त्रों की भाषा में इस कृत्य को प्रायश्चित्त कहा गया है । पाप के बारे में इसी तरह की अवधारणा विभिन्न धर्मों, युगों और देशों में विभिन्न प्रकार से  रही है ।  पर आजकल पूर्व और पश्चिम के बहुत से व्यक्ति पाप के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते । सिन एण्ड दि न्यू साइकोलोजी नाम की किताब में बारबोअर ने लिखा है कि आजकल के जीवन में ईसाइयत का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और ईसाई भावना में पाप नाम की कोई वस्तु नहीं है । किसी व्यक्ति का जीवन दुष्कर्म से भरा हो सकता है पर वह मानसिक कारणों से है और इसे सम्भवतः मनोवैज्ञानिक चिकित्सा से दूर किया जा सकता है । भारत में भी नास्तिक चार्वाक इसी तरह का विचार व्यक्त करते रहे हैं । पर भारत में सदा से पाप के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है । यह माना जाता है कि धर्म ईश्वर की आज्ञा है और इसका उल्लंघन पाप । पाप के कई भेद हैं-- अतिपाप वह है जिससे बड़ा कोई और पाप न हो । महापाप किसी के प्राण हरण से जुडा है । पातक वह है जो महापातकों के समान हो और प्रासंगिक पाप संसर्ग से होता है । साधारण पापों को उपपातक की संज्ञा दी गई है । जातिभ्रंशकर, संकरीकरण, अपात्रीकरण, मलावह और प्रकीर्णक आदि पापों की अन्य अनेक श्रेणियाँ भी हैं । इन पापों और इनके फलों को कम करने के लिए भी धर्म शास्त्रों में व्यवस्था दी गई है ।अपने अपराध को स्वयं स्वीकार कर लेना, पश्चात्ताप करना, प्राणायाम, होम, जप, दान, तीर्थ यात्रा और उपवास उनकी श्रेणियाँ हैं । इनमें उपवास भी अनेक तरह के हैं । जिनमें कई तरह के सान्तपन, चान्द्रायण, और कृच्छ्र के अतिरिक्त अघमर्षण, एकव्रत,गोव्रत,कूर्च,प्राजापत्य,याम्य,यावक,वज्र,सोमायन और पराक आते हैं । इनमें पराक व्रत अत्यन्त कठिन माना जाता है । मनुस्मृति 11/215, बोधायन धर्म सूत्र 4/5/16, याज्ञवल्क्य स्मृति 3/320, शंखस्मृति 18/5, अत्रि स्मृति 28, अग्नि पुराण 170/10, विष्णु पुराण 46/18 और स्कन्द पुराण के काशीखण्ड में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है । मनुस्मृति कहती है - इन्द्रिय निग्रह पूर्वक सावधान मन से निरन्तर बारह दिनों तक भोजन का परित्याग कर किये गये इस व्रत से सभी प्रकार के यानी छोटे बड़े सभी पाप नष्ट हो जाते हैं । स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द कहते हैं कि शास्त्र कहता है कि प्रायश्चित्त न करने से पापी को दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं । अतः काशी में पौराणिक मन्दिरों को ढहाये  जाने  और देवमूर्तियों को अपमानित और गायब कर दिये जाने तथा अनेकों मन्दिरों में तालाबन्दी कर देवपूजा के बाधित कर दिये जाने से जो पाप हुआ है उसका प्रायश्चित्त आवश्यक था । यदि हम प्रायश्चित्त न करते तो पूरी काशी पर इसका दोष आता और सबको दैवदण्ड भोगना पड़ता । शंकराचार्य जी के शिष्य और प्रतिनिधि और काशी का जिम्मेदार वासी  होने के नाते हमने सनातनी समाज की रक्षा के लिए यह पराक व्रत अपनाया है । साथ ही मन्दिरों की मर्यादा रक्षा का प्रयत्न भी कर रहे हैं ।

आध्यात्मिक उत्थान मंडल की महिलाओं ने किया कुमकुम से अर्चन। । खबरीलाल रिपोर्ट ::-

अखिल भारतीय महिला आध्यात्मिक उत्थान मंडल द्वारा दिनांक 13 जुलाई को श्रीविद्या मठ में भगवती राजराजेश्वरी का विशेष पूजन किया गया। ज्ञात हो की परम् पूज्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज काशी के मंन्दिरों एवं देव विग्रहों को बचाने हेतु विगत 9 दिनों से लगातार पराक व्रत (उपवास) द्वारा तपस्या कर रहे हैं जिससे काशी के मंन्दिरों व देव विग्रहों को विकास के नाम पर तोड़ा न जाये। आज आध्यात्मिक उत्थान मंडल की सावित्री पांडेय, सुनीता जायसवाल, सीता देवी, ब्रह्मबाला शर्मा, इंद्रावती पांडेय, नीतू सिंह, प्रेमलता मिश्र, विजया तिवारी, के.एस. अलमेलु व आदि महिलाओं ने भगवती राजराजेश्वरी का कुमकुम से अर्चन व आरती किये एवं स्वामिश्री: को अपनी तपस्या सफलतापूर्वक पूर्ण करने हेतु प्रार्थना किये। साथ ही सभी महिलाओं ने भगवती से स्वामिश्री: के स्वास्थ्य को ठीक रखने हेतु तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु भी प्रार्थना किये। इस अवसर पर अनेको संख्या में श्रद्धालुगण , सन्त, महात्मा उपस्थित थे।

स्वामिश्री: 210 घंटे से कर रहे हैं कठोर तपस्या।। खबरीलाल रिपोर्ट ::-

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज काशी में मंन्दिरों को तोड़ दिए जाने को लेकर तथा देवविग्रहों को ध्वंश/ नष्ट/गायब किये जाने को लेकर विगत 210 घंटे से ऊपर पराक व्रत (उपवास) पर शंकराचार्य घाट, केदारघाट, वाराणसी में अपने कुटिया में तपस्या पर बैठे हैं। 14 जुलाई 2018 को पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर आ रहे हैं जिस हेतु प्रशासन भी चौकस है साथ ही बिना विघ्न बाधा के पीएम साहब का कार्यक्रम निपट जाए इस हेतु प्रयत्नरत हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि पीएम मोदी अपने इस महत्त्वपूर्ण दौरे पर स्वामिश्री: के कठोर तप को देखते हुए यह घोषित कर सकते हैं कि काशी के मंन्दिरों व देव विग्रहों को उनके स्थान पर ही रखकर, बिना तोड़े अपने महत्तकांशी प्रोजेक्ट @गंगा पाथवे/कॉरिडोर को मूर्त रूप देंगे। साथ ही लोगों का यह भी कहना है कि 2019 के आम चुनाव को देखते हुए वे सनातन धर्मियों को नाराज नहीं करेंगे क्यों कि काशी में मंदिर तोड़े जाने को लेकर देश भर से स्वामिश्री: के समर्थन में सनातन हिन्दू धर्म के लोग आवाज उठा रहे हैं । वाराणसी प्रशासन स्वामिश्री: के स्वास्थ पर नजर लगाकर रखे हैं साथ ही उनके सुरक्षा हेतु पुलिस भी तैनात किए हैं लेकिन वाराणसी के डीएम साहब इन 10 दिनों में एक बार भी स्वामिश्री: से मिलने और बात करने नहीं पहुंचे अपितु उन्होंने अपना प्रतिनिधि मंडल स्वामिश्री: से बात करने हेतु जरूर भेजे हैं। स्वामिश्री: के साथ पराक व्रत (उपवास) में बहुत से काशी वासियों के साथ साथ छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज, साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, मयंक मिश्रा, सत्यम, कृष्णा परासर व आदि संत, अनुयायी उपवास पर बैठे हैं और सभी का कहना है की काशी का भरपूर विकास हो पर प्राचीन मंदिरों व देव मूर्तियों को तोड़े/ नष्ट किये बिना हो। यही प्राचीन मंदिर व देवता गण काशी का प्राण हैं जिसे देखने, पूजा करने देश एवं विदेश से श्रद्धालुगण आते हैं।

192 घंटे से पराक व्रत तपस्या कर रहे हैं स्वामिश्री:।। खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::-

देव नगरी काशी में कथित मंदिर व देव मूर्तियों को तोड़े / गायब किये जाने को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विगत 8 दिनों से लगातार पराक व्रत (उपवास) के माध्यम से मंन्दिरों और देव विग्रहों को बचाने हेतु कठोर तपस्या कर रहे हैं। उनके साथ छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, साध्वी शारदाम्बा, साध्वी पूर्णाम्बा, मयंक शेखर मिश्रा, के.एस. अलमेलु, कृष्णा पराशर, राजकुमार शर्मा, ममता देवी, सुशीला बाई चौकसे, रीना सिंह, रिंकी सिंह व आदि काशी वासी भी पराक व्रत के माध्यम से तपस्या कर रहे हैं। इनके इस कठोर तपस्या को परम पिता परमेश्वर देख रहे हैं पर शासन / प्रशासन क्यों नहीं देख पा रहे हैं यह बहुत ही बड़ा सवाल उभर कर आ रहा है। यदि देख भी रहे हैं तो इस हेतु समाधान का रास्ता क्यों नहीं निकाला जा रहा है यह भी बहुत अहम सवाल है। देश के इतने बड़े सन्यासी की बातों को क्यों अनदेखा किया जा रहा है इस पर काशी वासी प्रश्न उठा रहे हैं। साध्वी पूर्णाम्बा ने कहा है कि एक सनातनी हिन्दू होने के नाते हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह अपने आस्था के केन्द्र पर आघात न होने दें, पर सबमें वह सामर्थ्य नहीं होता लेकिन हम सब इतना तो कर ही सकते हैं कि जो इस धर्म कार्य में लगे हुए हैं उनके साथ हो लें, उनको अपना समर्थन दें। अपने सामने मन्दिरों को टूटते देखकर स्वामिश्रीः उसे बचाने हेतु विगत 3 माह से मंदिर बचाओ आन्दोलनम चला रहे हैं। आगे साध्वी जी ने कहा कि स्वामिश्री: और उनके साथ जो व्रत कर रहे हैं वे स्वयं पाप से बच जाएंगे लेकिन उनका क्या जो धर्म की रक्षा हेतु आगे नहीं आ रहे हैं। आगे उन्होंने सभी सनातन धर्मियों के उद्देश्य से कहा कि एकमात्र धर्म ही साथ जाता है, बाकी सब यहीं छूट जाता है।

192 घंटे से पराक व्रत तपस्या कर रहे हैं स्वामिश्री:।। खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::-

देव नगरी काशी में कथित मंदिर व देव मूर्तियों को तोड़े / गायब किये जाने को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विगत 8 दिनों से लगातार पराक व्रत (उपवास) के माध्यम से मंन्दिरों और देव विग्रहों को बचाने हेतु कठोर तपस्या कर रहे हैं। उनके साथ छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, साध्वी शारदाम्बा, साध्वी पूर्णाम्बा, मयंक शेखर मिश्रा, के.एस. अलमेलु, कृष्णा पराशर, राजकुमार शर्मा, ममता देवी, सुशीला बाई चौकसे, रीना सिंह, रिंकी सिंह व आदि काशी वासी भी पराक व्रत के माध्यम से तपस्या कर रहे हैं। इनके इस कठोर तपस्या को परम पिता परमेश्वर देख रहे हैं पर शासन / प्रशासन क्यों नहीं देख पा रहे हैं यह बहुत ही बड़ा सवाल उभर कर आ रहा है। यदि देख भी रहे हैं तो इस हेतु समाधान का रास्ता क्यों नहीं निकाला जा रहा है यह भी बहुत अहम सवाल है। देश के इतने बड़े सन्यासी की बातों को क्यों अनदेखा किया जा रहा है इस पर काशी वासी प्रश्न उठा रहे हैं। साध्वी पूर्णाम्बा ने कहा है कि एक सनातनी हिन्दू होने के नाते हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह अपने आस्था के केन्द्र पर आघात न होने दें, पर सबमें वह सामर्थ्य नहीं होता लेकिन हम सब इतना तो कर ही सकते हैं कि जो इस धर्म कार्य में लगे हुए हैं उनके साथ हो लें, उनको अपना समर्थन दें। अपने सामने मन्दिरों को टूटते देखकर स्वामिश्रीः उसे बचाने हेतु विगत 3 माह से मंदिर बचाओ आन्दोलनम चला रहे हैं। आगे साध्वी जी ने कहा कि स्वामिश्री: और उनके साथ जो व्रत कर रहे हैं वे स्वयं पाप से बच जाएंगे लेकिन उनका क्या जो धर्म की रक्षा हेतु आगे नहीं आ रहे हैं। आगे उन्होंने सभी सनातन धर्मियों के उद्देश्य से कहा कि एकमात्र धर्म ही साथ जाता है, बाकी सब यहीं छूट जाता है।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- काशी के प्राचीन मंदिर व देव विग्रहों को बचाने हेतु सुंदरकांड का पाठ सम्पन्न हुआ।।

काशी में मंदिर बचाओ आन्दोलनम का नेतृत्त्व कर रहे ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु कांवरिया सेना संगठन के राज्य प्रवक्ता हरिनाथ दुबे के नेतृत्त्व में संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया गया जिसमें प्रमुख रूप से उन्नाव की पूर्व कांग्रेस सांसद अनु टंडन, पूर्व कांग्रेस विधायक अजय राय, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, छावनी से कांग्रेस पार्षद शैलेंद्र सिंह, चुन्नू पंडित व आदि कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल सम्मिलित हुए । कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने पूज्य स्वामिश्री: के स्वास्थ की जानकारी लिए और अपना नैतिक समर्थन दिए। इस संगीतमय सुंदरकांड पाठ हेतु काशी के प्रबुद्ध जनों ने साथ मिलकर सुंदरकांड का पाठ किये तथा भगवान श्रीराम एवं बजरंगबली से स्वामिश्री: के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु प्रार्थना किये गए। इसके पश्चात काशी खंडोक्त देवताओं का पूजन उद्देश्य शास्त्री, आचार्य अमित तिवारी ने किया तथा आरती पश्चात उपस्थित सैंकड़ो भक्तगणों को प्रसाद वितरित किये। इस विशेष उपलक्ष्य पर छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज, आचार्य अखिलेश्वर, शंकराचार्य आश्रम रायपुर के समन्वयक व प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी, काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत बबलू महाराज, विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, रवि त्रिवेदी, पूनम कुंडू, शरद पांडेय, राकेश यादव, गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश संयोजक संजय पांडे, सुनील शुक्ला व आदि भक्तगण उपस्थित हुए। ज्ञात हो कि काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में पुराणों में वर्णित मंदिर व देव विग्रहों को तोड़े / गायब कर दिए जाने को लेकर दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कठोर तपस्या विगत 3 महीनों से कर रहे हैं जिसमे उन्होंने सर्वदेव कोपहार प्रितिकर महायज्ञ करवाये जिससे काशीवासियों को देवताओं के कोप से बचाया जा सके तथा शासन व प्रशासन विकास के नाम पर मंन्दिरों और देव मूर्तियों का ध्वंश न करे। स्वामिश्री: ने पहले ही अपने वक्तव्य में कहा था हम न तो सरकार के विरोधी हैं और न ही विकास के, हम केवल चाहते हैं विकास के नाम पर काशी के प्राचीन मंदिरों व देव मूर्तियों को ध्वस्त न किया जाए।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- काशी के प्राचीन मंदिर व देव विग्रहों को बचाने हेतु सुंदरकांड का पाठ सम्पन्न हुआ।।

काशी में मंदिर बचाओ आन्दोलनम का नेतृत्त्व कर रहे ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु कांवरिया सेना संगठन के राज्य प्रवक्ता हरिनाथ दुबे के नेतृत्त्व में संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया गया जिसमें प्रमुख रूप से उन्नाव की पूर्व कांग्रेस सांसद अनु टंडन, पूर्व कांग्रेस विधायक अजय राय, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, छावनी से कांग्रेस पार्षद शैलेंद्र सिंह, चुन्नू पंडित व आदि कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल सम्मिलित हुए । कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने पूज्य स्वामिश्री: के स्वास्थ की जानकारी लिए और अपना नैतिक समर्थन दिए। इस संगीतमय सुंदरकांड पाठ हेतु काशी के प्रबुद्ध जनों ने साथ मिलकर सुंदरकांड का पाठ किये तथा भगवान श्रीराम एवं बजरंगबली से स्वामिश्री: के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु प्रार्थना किये गए। इसके पश्चात काशी खंडोक्त देवताओं का पूजन उद्देश्य शास्त्री, आचार्य अमित तिवारी ने किया तथा आरती पश्चात उपस्थित सैंकड़ो भक्तगणों को प्रसाद वितरित किये। इस विशेष उपलक्ष्य पर छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज, आचार्य अखिलेश्वर, शंकराचार्य आश्रम रायपुर के समन्वयक व प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी, काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत बबलू महाराज, विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, रवि त्रिवेदी, पूनम कुंडू, शरद पांडेय, राकेश यादव, गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश संयोजक संजय पांडे, सुनील शुक्ला व आदि भक्तगण उपस्थित हुए। ज्ञात हो कि काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में पुराणों में वर्णित मंदिर व देव विग्रहों को तोड़े / गायब कर दिए जाने को लेकर दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कठोर तपस्या विगत 3 महीनों से कर रहे हैं जिसमे उन्होंने सर्वदेव कोपहार प्रितिकर महायज्ञ करवाये जिससे काशीवासियों को देवताओं के कोप से बचाया जा सके तथा शासन व प्रशासन विकास के नाम पर मंन्दिरों और देव मूर्तियों का ध्वंश न करे। स्वामिश्री: ने पहले ही अपने वक्तव्य में कहा था हम न तो सरकार के विरोधी हैं और न ही विकास के, हम केवल चाहते हैं विकास के नाम पर काशी के प्राचीन मंदिरों व देव मूर्तियों को ध्वस्त न किया जाए।

खबरीलाल रिपोर्ट (काशी) ::- काशी के प्राचीन मंदिर व देव विग्रहों को बचाने हेतु सुंदरकांड का पाठ सम्पन्न हुआ।।

काशी में मंदिर बचाओ आन्दोलनम का नेतृत्त्व कर रहे ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु कांवरिया सेना संगठन के राज्य प्रवक्ता हरिनाथ दुबे के नेतृत्त्व में संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया गया जिसमें प्रमुख रूप से उन्नाव की पूर्व कांग्रेस सांसद अनु टंडन, पूर्व कांग्रेस विधायक अजय राय, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, छावनी से कांग्रेस पार्षद शैलेंद्र सिंह, चुन्नू पंडित व आदि कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल सम्मिलित हुए । कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने पूज्य स्वामिश्री: के स्वास्थ की जानकारी लिए और अपना नैतिक समर्थन दिए। इस संगीतमय सुंदरकांड पाठ हेतु काशी के प्रबुद्ध जनों ने साथ मिलकर सुंदरकांड का पाठ किये तथा भगवान श्रीराम एवं बजरंगबली से स्वामिश्री: के स्वास्थ को ठीक रखने तथा शासन व प्रशासन को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु प्रार्थना किये गए। इसके पश्चात काशी खंडोक्त देवताओं का पूजन उद्देश्य शास्त्री, आचार्य अमित तिवारी ने किया तथा आरती पश्चात उपस्थित सैंकड़ो भक्तगणों को प्रसाद वितरित किये। इस विशेष उपलक्ष्य पर छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज, आचार्य अखिलेश्वर, शंकराचार्य आश्रम रायपुर के समन्वयक व प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी, काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत बबलू महाराज, विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, रवि त्रिवेदी, पूनम कुंडू, शरद पांडेय, राकेश यादव, गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश संयोजक संजय पांडे, सुनील शुक्ला व आदि भक्तगण उपस्थित हुए। ज्ञात हो कि काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में पुराणों में वर्णित मंदिर व देव विग्रहों को तोड़े / गायब कर दिए जाने को लेकर दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कठोर तपस्या विगत 3 महीनों से कर रहे हैं जिसमे उन्होंने सर्वदेव कोपहार प्रितिकर महायज्ञ करवाये जिससे काशीवासियों को देवताओं के कोप से बचाया जा सके तथा शासन व प्रशासन विकास के नाम पर मंन्दिरों और देव मूर्तियों का ध्वंश न करे। स्वामिश्री: ने पहले ही अपने वक्तव्य में कहा था हम न तो सरकार के विरोधी हैं और न ही विकास के, हम केवल चाहते हैं विकास के नाम पर काशी के प्राचीन मंदिरों व देव मूर्तियों को ध्वस्त न किया जाए।

गंगा सेवा अभियानम ने काशी में मंन्दिरों व देव मूर्तियों के तोड़े जाने का किया विरोध ।। खबरीलाल रिपोर्ट ::-

@ छत्तीसगढ़ के ब्रह्मचारी व अनुयायी हुए शामिल छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज एवं गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश संयोजक संजय पांडे के नेतृत्त्व में 10 जुलाई 2018 की सायं 5 बजे लगभग 100 से अधिक सदस्यों ने श्रीमद शंकराचार्य घाट पर गंगा जी मे गले तक पानी मे खड़े होकर काशी में मंन्दिरों व देवमूर्तियों को तोड़े जाने का विरोध किया साथ ही धर्म सभा भी आयोजित किये। धर्म सभा को संबोधित करते हुए संयोजक संजय पांडे ने बताया कि काशी में 29 प्राण प्रतिष्ठित देव मूर्तियों को तोड़ दिया/गायब कर दिया गया जिसके विरोध में 2- महीने से अधिक समय से दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज अत्यंत कठिन तपस्या के माध्यम से मंन्दिरों और देव विग्रहों को बचाने हेतु प्रयास कर रहे हैं। संजय पांडे ने आगे कहा कि तोड़े गए मंन्दिरों एवं देव विग्रहों को वैदिक रीति से पुनः स्थापित प्रशासन करे और आगे और मंन्दिरों को तोड़ने की तैयारी को रद्द करे। छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज भी अपने अनुयायियों के साथ विरोध में सम्मिलित हुए और कहा कि हम पूज्यपाद दंडी स्वामिश्री: के समर्थन में मंन्दिरों को तोड़े जाने का विरोध करते हुए आज गंगा जी मे गले तक पानी मे खड़े रहकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हैं तथा दोषी व्यक्तियों को कठोर दंड देने का आग्रह करते हैं। आज के इस विरोध में छत्तीसगढ़ के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज, शंकराचार्य आश्रम रायपुर के समन्वयक व प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी, बेमेतरा से आचार्य अखिलेश्वर, राजकुमार, गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश संयोजक संजय पांडे, सदस्य- सुनील शुक्ला, हरिनाथ दुबे, सतीश अग्रहरि, सुनील उपाध्याय(पूर्व सभा सद), अनुराग द्विवेदी, कृष्णकांत शर्मा, प्रभात वर्मा, धीरज राय, प्रह्लाद गुप्ता, शरद पांडेय, धर्मेंद्र ठाकुर, रोशन यादव, बाबू यादव, मदन यादव, पप्पू यादव व आदि सम्मिलित हुए।

वाराणसी डीएम के प्रतिनिधि मंडल स्वामिश्री: से मीले।। खबरीलाल रिपोर्ट ::-

9 जुलाई 2018 को 5 दिनों से पारक व्रत (उपवास) पर बैठे स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज से मिलने वाराणसी डीएम के प्रतिनिधि मंडल - अरुण कुमार, एडीएम (प्रोटोकॉल), यश वर्धन (एसीएम प्रथम) व अयोध्या प्रसाद सिंह (सीओ, भेलूपुर) दोपहर 1 बजे करीब शंकराचार्य घाट पर आए और स्वामिश्री: से मिले। उनके आगमन पर स्वामिश्री: ने सभी का स्वागत करते हुए उन्हें सम्मान के साथ आसान पर बैठाया।प्रतिनिधि मंडल के अधिकारियों ने बेहद सौहार्द पूर्ण वातावरण में एक घण्टे से ऊपर स्वामिश्री: के बातों को सुना, उनकी मांगों को सुना और मांगों की एक प्रतिलिपि अपने साथ लेकर भी गए। प्रतिनिधि मंडल के अधिकारियों ने स्वामिश्री: से पारक व्रत तोड़ने हेतु अनुरोध किया जिस पर स्वामिश्री: ने कहा कि शास्त्र अनुसार यदि हमारे देवताओं का पूजन न हो, राग भोग न लगे तब तक उपवास करने का नियम है जिसका हम पालन कर रहे हैं। आपने हमारी बातों को सुना साथ मे यह भी जाना कि विकास और सरकार का हम विरोध नहीं कर रहे हैं। हम विरोध केवल मंदिरों एवं मूर्तियों को तोड़े जाने का कर रहे हैं जो काशी की धरोहर है और कुछ मन्दिरों का वर्णन पुराणों में उल्लेख है।

रोके भी नहीं रुके विशाल सिंह ।। खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- 

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आईएएस विशाल सिंह को वार्ता हेतु रोकने का अथक प्रयास विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी ने किया, पर अहंकार और हठधर्मिता के कारण वे महंत राजनाथ तिवारी का भी सम्मान को धूमिल करते हुए अपने साथ आये अधिकारियों के साथ स्मार्टली निकल गए मानो कुछ नहीं हुआ हो। ज्ञात हो कि आईएएस विशाल सिंह 7 जुलाई 2018 को दोपहर 12:30 बजे के करीब 3 दिन से पराक व्रत (उपवास) में बैठे ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती से बात करने पहुंचे। आईएएस विशाल सिंह के आगमन पर स्वामिश्री: ने उनका कुटिया (यज्ञ स्थल) में स्वागत किया और अपने से ऊंचे आसान पर बैठाया और मान सम्मान दिया। बातचीत शुरू हुए 2 मिनट ही हुए होंगे कि अचानक विशाल सिंह अपने तुनक मिजाज दिखाते हुए उठ खड़े हुुुए और चलने के लिए किए, तब नीचे बैठे महंत राजनाथ तिवारी ने उन्हें रोकने हेतु उनके पैर को पकड़े (फ़ोटो में गोल घेरा बना हुआ है) पर वे सीधे बाहर निकले और जूता पहनने लगे। उस वक़्त ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे 56 इंच का सीना ताने अपना अहम दिखा रहे हों। महंत राजनाथ तिवारी ने उन्हें भरपूर मनाने की कोशिश किये, अनुनय विनय किये पर विशाल सिंह ने जिस तरह स्वामिश्री: का अपमान किये ठीक उसी प्रकार राजनाथ तिवारी को सभी के सामने असम्मानित करते हुए चल दिये। एक पड़े लिखे आईएएस का इस तरह एक दंडी सन्यासी का अपमान करना , एक सम्मानित महंत का असम्मान करना वो भी उपस्थित काशी वासियों के सामने समझ से परे हैं। इस वाक्या से उनके सांस्कारिक होने का पता चलता है। कुर्सी और पद हमेशा नहीं रहता है। एक दिन रिटायर होना होगा , उस समय किस बात का रौब, तैश, घमंड दिखाओगे और किसे दिखाओगे। संबंध जीवनभर साथ रहता है पर पद, पैसा आजीवन साथ नहीं देता है। उस पैसे का क्या काम जिसका व्यक्ति उपभोग ही न कर पाए। उस पद का क्या काम जिससे वे संतों , आम नागरिकों की तकलीफों का समाधान ही न कर पाए । शासन को चाहिए कि आईएएस विशाल सिंह के लिए शिष्टाचार सीखने, संस्कारिक्ता सीखने, व्यवहार कुशलता सीखने हेतु किसी ट्रेनिंग सेन्टर में पहले भेजे और बाद में पद और विभाग दे। जिस व्यक्ति का व्यवहार व आचरण एक संत महात्मा के प्रति सही न हो , वो व्यक्ति आम नागरिकों से कैसा व्यवहार करते होंगे वह तो जनता ही बता सकती है। स्वयं विशाल सिंह ने अपने आप को एक इंटरव्यू में नास्तिक होना  बताया है। जो व्यक्ति नास्तिक हो वह कैसे आस्तिकों की बातों को समझेगा और सरकार के सामने रखेगा। दूसरा जो व्यक्ति नास्तिक हो उन्हें आस्था के केंद्र बिंदु काशी विश्वनाथ मंदिर का मुख्य कार्यपालन अधिकारी किस बिन्हा पर बनाया गया ? ऐसे आईएएस अधिकारियों से सरकार की छवि संवारने से ज्यादा धूमिल होंगी जिसे शासन को संज्ञान में लेते हुए उचित कार्यवाही करना चाहिए।

।। खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ।। :: अहंकार और तैश में आकर आईएएस विशाल सिंह वार्ता शुरू होते ही उठकर चल दिये ।।

काशी ::- हम बात कर रहे हैं काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सम्मानीय आईएएस विशाल सिंह साहब का। अद्भुत दृश्य सम्मानीय विशाल सिंह ने एक कठोर तप कर रहे तपस्वी जो शंकराचार्य घाट पर काशी में मंदिर तोड़े जाने को लेकर उपवास में बैठे हैं उनके सामने दिखाया। घमंड में चूर, मदमस्त चाल और तैश का जो खेल सीईओ विशाल सिंह , आईएएस ने तपस्वी दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को दिखाया वह अद्भुत था। लग ही नही रहा था कि वे इतने पड़े लिखे आईएएस हैं। आज का नजारा भुलाए भी नहीं भुलाया जा सकता है। मानो उस समय ऐसा प्रतीत हुआ कि हम कोई पौराणिक फिल्म देख रहे हैं जिसमे सन्यासी को काबू करने एक उद्दंड अधार्मिक व्यक्ति आया हो। उस समय दंडी स्वामी अकेले नहीं थे , अपितु स्वामिश्री: के साथ बहुसंख्या में उनके अनुयायी, भक्तगण व काशी वासी उपस्थित थे जिनके सामने यह घटित किये आईएएस विशाल सिंह ने। सम्मानीय आईएएस विशाल सिंह के व्यवहार , ईगो और अहंकार को देखकर प्रत्येक जन अचंभित रह गए। प्रत्येक ने प्रश्न उठाया कि ये अधिकारी शासन के प्रतिनिधि हैं या खुद ही शासन के राजा हैं जिन्होंने ऐसा दुःसाहस किया। प्रत्येक ने सम्मानीय विशाल सिंह के द्वारा किये गए व्यवहार की घोर निंदा किये। उपस्थित जनों ने कहा कि शासन को ऐसे अधिकारी को वार्ता के लिए भेजना चाहिए जिनके अंदर संस्कार हो और जो लोगों को उनका उचित सम्मान दे और जो आस्तिक हो । उनके अंदर आईएएस होने और सरकारी तंत्र के उच्च पद पर आसीन होने का घमंड न भरा हो। आज सम्मानीय आईएएस विशाल सिंह को देखकर लगा ही नहीं कि वे संस्कारी पुरुष हैं । उनके व्यवहार का लाइव दर्शन आज काशी वासियों ने शंकराचार्य घाट पर तपस्या में लीन दंडी स्वामिश्री: के कुटिया में किया। यह बात फैलते ही मीडिया जगत शंकराचार्य घाट पर उपस्थित हो गए। सम्मानीय विशाल सिंह के आने के पहले कुछ पत्रकार साथी स्वामिश्री: से मिलने पहुंचे थे तथा लगातार तीसरे दिन के उपवास पर चर्चा करने आये थे। 5 जुलाई 2018 को मंदिर बचाओ आन्दोलनम की तरफ से एक प्रतिनिधि मंडल सम्मानीय विशाल सिंह से बात करने उनके कार्यालय पहुंचे और उस वक़्त विशाल सिंह ने अपने दो कर्मचारियों को मोबाइल से बातचीत करने का वीडियो रिकॉर्डिंग करने का आदेश दिया साथ ही उनके एक अधिकारी ने भी जिस प्रकार का व्यवहार प्रतिनिधिमंडल से किये वह दुर्भाग्यजनक है। सम्मानीय आईएएस विशाल सिंह की वार्ता जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती से शुरू ही हुई थी कि उन्होंने वार्ता को छोड़कर घमंड और तैश दिखाते हुए स्वामिश्री: की बात न सुनते हुए उठकर चलते दिखाई दिए। जब कि स्वामिश्री: ने बड़े आदर के साथ उनका स्वागत किया और अपने से ऊपर बैठने हेतु स्थान उन्हें प्रदान किया। सम्मानीय विशाल सिंह से महंत राजनाथ तिवारी एवं कुछ लोगों ने अनुनय-विनय भी किया कि वार्ता को पूर्ण करके जाइये , पर सम्मानीय विशाल सिंह का ईगो और घमंड ने उन्हें रोक दिया। वे सीधा जूता पहने और अपने साथ आये अधिकारियों और सिक्योरिटी के साथ चल दिये। यह किस तरह का सौजन्यता, शिष्टाचार, व्यवहार है वह भी एक आईएएस द्वारा। यह पूरा माजरा काशी खंडोक्त देवताओं और जनता के सामने हुआ। क्या देवता उन्हें माफ कर देंगे ? कहावत है कि - अहंकार ही पतन का मुख्य कारण होता है।