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खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- शंकराचार्य ने दिया संदेश - " ब्राह्मण एक हो जाएं और संगठित हो जाएं "।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के मंच से देश के प्रत्येक ब्राह्मणों के उद्देश्य में कहा - "ब्राह्मण एक हो जाएं "। आज स्थिति ऐसी हो गई है कि ब्राह्मणों को ढकेलते ढकेलते दीवाल तक पहुंचा दिया है। शंकराचार्य महाराज ने जोर आवाज में कहा ब्राह्मण संगठित हो जाएं जिससे एक बुलंद आवाज बनेगी और सत्ता में बैठे लोगों के साथ साथ आम नागरिक भी सुनेगी। उनके इस उद्गार से खचाखच भरे सभागृह में लोगों ने हर हर महादेव के नारे से पूरा वातावरण धर्म और न्याय मय बना दिया। शंकराचार्य महाराज ने आगे कहा की हमारे देश मे समाज का निर्माण धर्म के लिए हुआ था। उस धर्म को पालन करने में राज्य हमारी सहायता करे। भारत की प्राचीन राजनीति उसी के आधार पर चलती थी लेकिन आज का परिदृश्य विपरीत से हो गया है। आज लोग सोचते हैं ब्राह्मण ही क्यों पूजा-पाठ आदि करे, क्यों न ब्राह्मणों की जगह दूसरे को सीखा दिया जाए।  हम जब भी अपने इष्ट देवता की आराधना करते हैं तब हम स्मरण करते हैं - ब्रह्म लोक से लेकर लोकालोक पर्वत तक जहां सृष्टि समाप्त हो जाती है उन सबके बीच जितने भी ब्राह्मण देवता निवास करते हैं उन्हें हम प्रणाम करते हैं। शंकराचार्य महाराज ने कहा कि ब्राह्मणों को समाप्त करने के लिए अंतरजातीय विवाह करवाये जा रहे हैं जिसे सरकार प्रोत्साहित कर रही है। आजकल कुछ व्यापारी लोग तीर्थ स्थानों में बैठ गए हैं और तीर्थ पुरोहितों का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने तीर्थ पुरोहित, पुजारी, ब्राह्मणों को सचेत करते हुए कहा कि आगे संकट और आने वाला है। हमारा भारत देश सनातन धर्म से है और इसे नष्ट करने की साजिश हो रही है। प्रत्येक से पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा - हमे धर्म को आगे रखकर चलना चाहिए और यह कार्य वृंदावन धाम से शुरू हो। हम तो भोजन खिलाकर तब खाने वालों में से हैं इसलिए हमें पूर्ण रूप से संगठित होना पड़ेगा। शंकराचार्य महाराज ने कहा अभी देश मे मंदिर, मूर्तियां तोड़े जा रहे हैं वह इसलिए क्यों कि सरकार अपना आमदानी बढ़ाना चाहती है। यदि हम संगठित नहीं हुए तो आगे धीरे धीरे सब उनके हाथ मे चला जायेगा, ऐसे में हम सनातन धर्म की शिक्षा कैसे देंगे ?  इसका शसक्त विरोध होना चाहिए और यदि विरोध नहीं हुआ तो सरकार अपने खर्चे के लिए भारत के मठ, मंन्दिरों में चढ़ने वाला दान, देवी देवताओं के गहने , बर्तन इत्यादि उनके कब्जे में चले जायेंगे। आप देख ही रहे हो सरकार अपने खर्चे के लिए गोमांस का निर्यात कर रही है जो घोर पाप है साथ ही कुछ राज्यों में सरकार शराब भी बेच रही है। अब उनकी निगाहें सनातन धर्म के मठ, मंन्दिरों पर है। हमारा हिन्दू धर्म  ब्राह्मण धर्म है। इस महासभा में पूज्य शंकराचार्य महाराज के शिष्य प्रतिनिधि क्रांतिकारी दंडी सन्यासी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ने भी अपने ओजस्वी रूप में सभा को संबोधित किया साथ ही अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष व अन्य संत, महात्मा एवं तीर्थ पुरोहित महासभा के सदस्यों ने भी संबोधित किया और पूज्य महाराजश्री का स्वागत के साथ साथ वंदन और अभिनंदन किया।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- डॉ अरोड़ा ने अपनी पुस्तक जल - अमृत या विष पूज्य शंकराचार्य महाराज के चरणों मे अर्पित किया।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के 68 वें चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान में पधारे सर गंगाराम हॉस्पिटल , नई दिल्ली के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ परमेश्वर अरोड़ा ने अपनी किताब " जल - अमृत या विष ? पूज्यपाद शंकराचार्य महाराज के चरणों मे अर्पित किया तथा उपस्थित संत, महात्मा एवं भक्तों को बताया कि कौन से समय मे पानी पीना चाहिए और शीतल या गुनगुना पानी में से कौन सा सेहत के लिए फायदेमंद है। डॉ अरोड़ा ने वेद के अध्ययन के बाद रिसर्च कर इस पुस्तक को लिखा और मूर्त रूप दिया। पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने डॉ अरोड़ा के कथन को सुनकर तथा पुस्तक का अवलोकन कर अपनी राय देते हुए भक्तों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि आज के समय मे पूरा पानी अशुद्ध हो गया है। हमारे देश के नदियों , तालाबों में दूषित जलों का प्रवाह हो रहा है जिससे पानी पीने योग्य तक नहीं रहा। आज आरओ का पानी, बोतल बन्द पानी आदि सब शुद्ध नहीं रहे। रासायनिक खाद से अन्न दूषित हो रहा है, शाक-सब्जी में कीटनाशक डाले जा रहे हैं, सब्जियों का रंग रोगन भी हो रहा है तो ऐसे में व्यक्ति कैसे स्वस्थ रह सकता है ? आगे पूज्य महाराजश्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने चिकित्सक के सलाह पर चलना चाहिए साथ ही अपने खान-पान को शुद्ध रखना चाहिए। हमारा आहार ही हमे स्वस्थ रखता है और ताकत के साथ साथ ऊर्जा प्रदान करता है। आज लोग गोबर खाद की जगह रासायनिक खाद का भरपूर उपयोग कर रहे हैं जिससे अशुद्ध अनाज हमे प्राप्त हो रहे हैं। पूज्य महाराजश्री ने प्रत्येक से यह भी कहा कि रोजाना कसरत, चलना, साईकल चलाना आदि करें जिससे शारीरिक परिश्रम हो और आपके शरीर के प्रत्येक अंग प्रत्यंग भी स्वस्थ रहे।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  सब नामों में सर्वश्रेष्ठ "राम" नाम है : स्वरूपानन्द सरस्वती ।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने भक्तों से कहा कि सब नामों में सर्वश्रेष्ठ "राम" नाम है। जन्म जन्मांतर से जो पाप हो रहे हैं उन पापों की गठरी को जीव डोह रहा है। इन पापों का नाश अग्नि करता है, उसे भस्म कर देता है। अज्ञान का कारण परमात्मा के निकट रहते हुए भी हम उन्हें पहचान नहीं पाते हैं। अज्ञान का नाश राम नाम का "अ" कार करता है। जो शीतलता प्रदान करता है, अशांति दूर करता है वह राम नाम का "म" कार है। आगे महाराजश्री ने कहा कि राम नाम और ओंकार में कोई फर्क नहीं है।  गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने कहा था राम से भी बड़ा उनका नाम है। समुद्र में सेतु बनाने के लिए जब वानर सेना ने पत्थरों के ऊपर राम नाम लिखर फेंका तो पत्थर डूबे नहीं अपितु तैरने लगे। यह है उनके नाम का प्रभाव। भगवान श्रीराम सेतु का निरीक्षण करने पहुंचे तो देखा समुद्र में पत्थर तैर रहे हैं। उन्होंने पूछा ये पत्थर कैसे तैर रहे हैं ? तब वानर सेना ने कहा प्रभु आपके नाम के प्रभाव के कारण ही पत्थर तैर रहे हैं। तब भगवान राम ने भी एक पत्थर समुद्र में फेंका तो वह डूब गया। तभी हनुमान जी ने कहा की प्रभु आप खुद ही पत्थर को फेंकोगे तो वह तो डूबेगा । इसलिए कहते हैं कि सब नामों में सर्वश्रेष्ठ "राम" नाम ही है।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- परमात्मा के रहने मात्र से नहीं होगा उन्हें पहचानना होगा : स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ।।

श्रीउड़िया बाबा आश्रम स्थित श्री शंकराचार्य निवास में आयोजित सत्संग में द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के प्रवचन व आशीर्वचन हेतु वृंदावन के निवासियों के साथ साथ देश के कोने कोने से आये भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। शंकराचार्य जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज मंच संचालन करते हुए प्रथमः प्रत्येक विद्वत जन एवं भक्तों का स्वागत किया तथा मंगलाचरण हेतु बाल व्यास प्रशांत त्रिपाठी, योगेशनाथ त्रिपाठी, नमन तिवारी एवं सबसे छोटे उम्र के बटुक दुष्यंत पारासर को मंच में स्वागत किया। इन वेद के विद्यार्थियों के मंगलाचरण और कथा पश्चात स्वमश्री: ने ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द जी महाराज, ज्योतिष पीठ के व्यास जी एवं साध्वी लक्ष्मी मणी शास्त्री व नील मणी शास्त्री को कथा का रस पान कराने हेतु आग्रह किया। इनके कथा के पश्चात पूज्य शंकराचार्य जी महाराज का पादुका पूजन ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द जी महाराज ने सम्पन्न करवाया तथा मंत्रोच्चारण ब्रह्मचारी ब्रह्म विद्यानंद जी महाराज ने किया। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने उपस्थित भक्तों एवं श्रद्धालुओं से कहा कि परमात्मा के रहने मात्र से नहीं होगा उन्हें पहचानना होगा जिस हेतु राम नाम का जाप और ध्यान करना होगा। आगे उन्होंने कहा कि एक अखंड सच्चिदानन्द समस्त विश्व मे व्याप्त है तथा प्राणियों में उनका निवास है लेकिन उनको जानना कठिन है। पूज्य शंकराचार्य महाराज ने कहा कि परमात्मा की चार रूपों में अभिव्यक्ति होती है - नाम, रूप, लीला और धाम। यह माना जाता है कि यह चार होते हुए भी अभिन्न हैं। इनमें से किसी एक को कोई पकड़ ले तो परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। लोग नाम का ही स्मरण करते हैं क्यों कि वह प्रधान है। " वंदो नाम राम रघुवर को, हेतु कृसाणु भानु हिमकरको "। राम नाम कृसाणु , भानु, हिमकर का हेतु है। कृसाणु का अर्थ है अग्नि, भानु का अर्थ है सूर्य और हिमकर का अर्थ है चंद्रमा। इन्हें बीजाक्षर कहा जाता है। इन्ही बीज अक्षर में बिंदु लग जाने से यह बीजाक्षर हो जाते हैं।  आज के सत्संग में स्वामी सदाशिवेंद्र सरस्वती, स्वामी गोविंदानन्द सरस्वती, ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी धरानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी सुप्रियानन्द जी महाराज, कथा वाचक किशोर व्यास जी महाराज, ब्रह्मचारी रामानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी शारदानन्द जी महाराज एवं अन्य संत, महात्मा व भक्तगण उपस्थित थे।

बालश्रम में खोता बचपन

अभी तो आंखें खोली ही थी मैने अभी तो लोगों ने मेरे आने की खुशियां ही मानीई थी पर ये खुशी ज्यादा देर की नही थी ।देखते ही देखते दिन बीतते गए कब मैं हुन हां करते करते शब्दो को जोड़ना सिख गया पता ही नही चला उम्र की बाली सी उम्र में कदम रखा ही था कि गाड़ियों की शोर चारों ओर सुनाई देने लगी थी मैं मां की आँचल में महफूज़ तो था पर मां मुझे लोगों को दिखा दिखा कर सड़क पर लोगों से पैसे मांग रही थी कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा अब मैं 8 साल का हो चुका था अब मां की जगह मैं लोगों से पैसे मांग रहा था। एक दिन रोज की तरह मैं सड़क पर सिंग्नल होने पर लोगों की गाड़ियों में बैठे लोगों से पैसे मांग रहा था तभी एक गाड़ी का मिरर थोड़ा नीचे हुआ और वहां से एक मैडम ने आवाज लगाई और कहां क्या तुम रोज यही काम करते हो मैं डर के भाग आया। दूसरे दिन वो मैडम फिर वहां आई पर आज वो अकेली नही थी उनके साथ कुछ और लोग भी थे वो सब बच्चों को यहीं पूछ रहे थे कि क्या वो रोज यही काम करते है कुछ बच्चों ने जवाब दिया हां कुछ डर के मारे कुछ बोल ही नही रहे थे उनमें से एक मैं भी था। तीसरे दिन वापस वही लोग आये और कहां की अब से आप लोग स्कूल जायेंगें हम ये शब्द पहली बार सुन रहे थे हम इसका अर्थ भी नही पता था क्यों जब से आंख खुली थी तब से मैंने ये सड़क और यहां का शोर शराबा ही सुना था यहीं हमारी दुनिया थी पर अब.... हम स्कूल जाने लगे थे अब हाथ गाड़ियों के दरवाजे की तरफ नही बढ़ते थे बल्कि अब हाथों में किताबे थी अक्षरों का ज्ञान हो रहा था।जीवन बदल रहा था किस्मत का सूरज अब उदय हो रहा था जिसकी चमक से आज मैं अच्छे अस्पताल का डॉक्टर बन गया था । आज मेरे साथ साथ उन सभी बच्चों की जिंदगी बदल गई जो वहां मेरे साथ सिग्नल पर गाड़ियां साफ कर लोगों से पैसे मांगा करते थे।आज वो दिन हम कभी नही भूल सकते जब वो खिड़की के शीशा खुला और वहां से आई आवाज और वो मैडम हमारे लिए एक फरिश्ते से कम न थी। आज हम उन्ही के रास्तों पर चलकर हम जैसे गरीब बच्चों की मदत कर रहे है ताकि उनके जीवन मे भी उज्जवल भविष्य का सूरज चमके और वो भी अच्छी जिंदगी जी सके। बहुत से बच्चे हैं जो इस गरीबी के कारण गलत दुनिया मे चले जाते है जिन्हें अच्छा बुरा पता ही नही होता ।बस पेट की भूख का पता होता है जिसे भुझाने के लिए वो कुछ भी करने को तैयार होता है।कहते है बच्चे देश का भविष्य होते हैं। तो उसकी अच्छी परवरिश करना भी हमारी ही जिम्मेदारी है चाहे वो हमारे बच्चे हो या किसी और के बस हमे उन्हें हमारा बच्चा ही समझे हम और उसकी मदत करें। तभी कुछ हद तक बाल मजदूरी कम हो सकेगी।ऐसे बच्चों के उज्वल भविष्य की कामना करती मैं...... वर्षा गलपाण्डे

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- शंकराचार्य कोई लाभ का पद नहीं है, वे आज भी भिक्षा करके भोजन करते हैं ::- शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती ।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने उपस्थित संत, महात्मा एवं श्रद्धालुओं से कहा कि जब जब धर्म की ग्लानि होती है तब तब भगवान अवतरित होते हैं। यह याद रखिये की पाखण्ड मन मनुष्य को धर्म के मार्ग से विमुख कर देता है। आज कल एक से एक लोग खड़े हो रहे हैं, कोई महिला है जो अपने आप को नेपाल का शंकराचार्य घोषित कर दिया है साथ ही एक संस्था ऐसी है जो नए नए शंकराचार्य बनाती है और उनके अनुसार वे शंकराचार्य बोले। सोच यह है कि क्यों महिलाओं को वंचित किया जाए, उन्हें भी शंकराचार्य बना दिया जाए जैसे विधायक, सांसद बनाये जाते हैं। यह स्पष्ट हो सभी को की शंकराचार्य का पद कोई लाभ का पद नही है। प्रत्येक को यह जानना जरूरी है कि शंकराचार्य का कोई वेतन नहीं होता है। वह भिक्षा मांग कर ही भोजन करता है, तपस्या करता है, साधना करता है, सन्यास धर्म का पालन करता है, धर्म के प्रचार के लिए भ्रमण करता है, धर्म की रक्षा हेतु आवाज उठाता है और लोगों को धर्म मार्ग पर चलने के लिए कहता है और प्रेरित करता है।  उस महिला को इसलिए शंकराचार्य बनाया जा रहा है क्यों कि उसे राधास्वामी और ब्रह्मकुमारी का समर्थन प्राप्त है। एक अखिल भारतीय विद्वत परिषद है जिसे आरएसएस और भाजपा के लोगों ने बना के रखा है जो शंकराचार्य बनाते हैं। ये ब्रह्मकुमारी और राधास्वामी सनातन धर्म का नाश करने के लिए बने हैं। आगे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि शंकराचार्य वो होता है जिसमे धर्म के विपरीत कार्य करने वालों के खिलाफ बोलने और आवाज उठाने की ताकत हो और जो धर्म की रक्षा करने में सक्षम हो।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  जो धर्म करेगा उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी :- शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ।।

द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने श्री शंकराचार्य निवास, वृंदावन में चल रहे उनके 68 तम चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान के सायंकालीन सत्संग में कहा कि मनुष्य के जीवन मे 4-पुरुषार्थ होते हैं - अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष। इस पर यदि विचार करें तो धर्म ही श्रेष्ठ पुरुषार्थ है।  धर्म से ही अर्थ और काम प्राप्त होते हैं। जो धर्म न करे और अधर्मी हो वह भोग नहीं कर सकता भले उसके पास कितना भी अर्थ क्यों न हो। जो व्यक्ति धर्म की रक्षा करता है, धर्म के लिए आवाज उठाता है, गौ माता की सेवा करता है, अहंकार नहीं करता है , लोगों की मदद करता है इत्यादि उसे अर्थ के साथ साथ मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। रोगी आदमी क्या भोग करेगा ? आज के समय मे 100 में से 75 प्रतिशत लोग शुगर की बीमारी से ग्रसित हैं। उनके पास अर्थ है पर वे भोग नहीं कर पा रहे हैं, जो भोजन उन्हें पसंद होगा उससे उन्हें परहेज करना होगा नहीं तो शुगर बढ़ जाएगा। कहते हैं कि पूर्व जन्म में यदि पुण्य किये होंगे तो भोजन मिलेगा और उसे पाचन की शक्ति मिलेगी। जो पुण्य नहीं किये होंगे उनके पास अर्थ जरूर होंगे पर भोजन करने और पचाने की शक्ति नहीं होगी। इसलिए व्यक्ति को धर्म के कार्य मे लीन होना चाहिए और अधर्म के कार्यों से बचना चाहिए। जो व्यक्ति धर्म करेगा उसे परलोक में भी सहायता मिलेगी।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  स्वामिश्री: ने स्वयं रुद्राभिषेक सम्पन्न किये।।

सावन माह के चौथे सोमवार को ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने श्री शंकराचार्य निवास, उड़िया बाबा आश्रम, वृंदावन में स्थापित भगवान चंद्रमौलेश्वर महादेव जी का आज पूरे विधि विधान के साथ रुद्राभिषेक सम्पन्न किये तथा महारती पश्चात पुष्पांजलि अर्पित किए। स्वामिश्री: ने अभिषेक पश्चात खुद भगवान चंद्रमौलेश्वर महादेव जी का श्रृंगार कर आरती किये और पुष्पांजलि प्रभु के चरणों मे अर्पित किये। इस विशेष दिन में अनेक श्रद्धालुगण उपस्थित थे और प्रत्येक को स्वामिश्री: ने खुद अपने हातों से चरणामृत दिए और प्रसाद वितरित किये।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- विचार, भोजन और मित्र सात्विक होना चाहिए :: शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती।।

अष्टमी तिथि होने के कारण अनाध्याय था जिस हेतु पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज से मिलने श्री शंकराचार्य निवास, वृंदावन में भक्तों का तांता लगा हुआ था। महाराजश्री से मिलने आये भक्तों से उन्होंने कहा कि किसी भूखे को खाना खिलाना, किसी प्यासे को पानी पिलाना यह ऐसे कर्म हैं जिससे मन खुद ब खुद प्रसन्न हो जाता है। मन खुद ही कहता है कि आज हमने एक अच्छा कार्य किया। इसी चंचल रूपी मन को ही वश में करना है क्यों कि वह इधर उधर खूब भागता है।  महाराजश्री ने आगे अपने प्रवचन में उपस्थित भक्तों के उद्देश्य में कहा कि सात्विक सुख प्राप्त करना बहुत जरूरी है, तभी पाप कार्य बन्ध होंगे, क्यों कि जब तक व्यक्ति का मन सात्विक रहेगा उसका मन कहीं और नही भटकेगा। मन, शरीर तभी सात्विक होंगे जब व्यक्ति सात्विक भोजन ग्रहण करेगा, उनके मित्र भी सात्विक होंगे और साथ ही सत्संग भी करेगा। गलत लोग गलत रास्ते पर ले जाते हैं इसलिए जो मित्र व्यक्ति को गलत रास्ते पर चलने के लिए कहे यह प्रोत्साहित करे वह मित्र नहीं अपितु आपका परम् शत्रु है। मित्र वही होता है जो सच्चाई के मार्ग पर चलने की सलाह दे , इसलिए कहते हैं कि सच्चा साथी चुनने के लिए विवेक होना जरूरी है।

खबरीलाल रिपोर्ट (वाराणसी) ::-  एक ओर मन है तो दूसरी ओर भगवान :: शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ।।

द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने आज 18 अगस्त 2018 को श्री शंकराचार्य निवास, वृंदावन में उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए कहा कि एक ओर मन है तो दूसरी ओर भगवान। ज्ञात हो कि महाराजश्री जी का 68 वां चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान वृंदावन धाम में आयोजित है जिसमे उनके शिष्य प्रतिनिधि द्वय दंडी स्वामी सदानन्द सरस्वती जी महाराज व स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती जी महाराज के साथ साथ दंडी स्वामी अमृतानन्द सरस्वती जी महाराज, दंडी स्वामी सदाशिवेंद्र सरस्वती, ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी ब्रह्म विद्यानंद जी महाराज, ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द जी महाराज , ब्रह्मचारी धरानन्द जी महाराज एवं आदि संत ,महात्मा सम्मिलित हुए हैं और चातुर्मास्य व्रत के पालन के साथ साथ स्वाध्याय हो रहे हैं एवं रोजाना सायंकालीन प्रवचन भी हो रही है। आज के प्रवचन में सर्वप्रथम ज्योतिष पीठ के व्यास जी ने कीर्तन के साथ साथ राम कथा सुनाई तत्पश्चात स्वामिश्री: के सचिव मयंक शेखर मिश्रा, प्रवक्ता प्रशांत त्रिपाठी ने अपनी अपनी बातें रखी जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि से उनके कहे बातों को स्वीकारा। पूज्य शंकराचार्य महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि मन ही मनुष्य के मोक्ष का कारण है। जब मन विषयों में, रोगों में आसक्त हो जाता है तो वह बन्ध जाता है। जब सभी से छुटकारा मिल जाये तो मोक्ष की प्राप्ति होगी, इसलिए मन को अच्छा भी और बुरा भी माना गया है। महात्मा के मन को जो वस्तु अच्छा लगता है वह भटकाता है और उसे वह महात्मा शीघ्र त्याग कर देता है। महात्मा अपने मन को समझाते हैं कि रहने के लिए यदि मकान न मिले तो पेड़ की छांव में रह लो, खाने के लिए भिक्षा कर लो, प्यास लगे तो नदी का पानी पी लो और शीत से बचने के लिए कुछ नहीं हो तो जो लोग कपड़े फेंक देते हैं उसे उपयोग कर शीत से अपने को बचा लो। श्रीराधा और मुरलीधर का भजन कर अनेकों प्रकार के कष्ट भोगकर महात्मा लोग वृंदावन में रहते हैं। एक दूसरे कवि ने कहा कि मन को वश में करके रखिये। वही मन यदि वश में हो जाये तो स्वाभाविक है कि परम् ब्रह्म की प्राप्ति हो जाएगी। मन को वश में करने के लिए साधना कि जरूरत है। मन रूपी मुलजिम के लिए अभ्यास और वैराग्य नामक दो पुलिस लगाए जाते हैं। इसलिए एक ओर मन है तो दूसरी ओर भगवान।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- बिना गुरु के भगवान का दर्शन नहीं हो सकता है :: स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ।।

गोस्वामी तुलसीदास जी के जयंती के उपलक्ष्य पर श्री शंकराचार्य निवास, वृंदावन में आयोजित सत्संग सभा मे धर्म सम्राट अनंत श्री विभूषित ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती ने कहा कि बिना गुरु के भगवान का दर्शन कभी नहीं हो सकता है। शंकराचार्य जी महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन और कथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तुलसीदास जी कहते थे कि गुरु परंपरा से जो ज्ञान आता है उससे ही आदर मिलता है तथा यह भी कहा कि जो पंथ आते हैं उनके पीछे मत पड़ो क्यों कि वे पगदंडी हैं। जो हमारी गुरु परम्परा है उसी में हमे चलना चाहिए। आज के इस विशेष दिन में पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती, ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द जी महाराज, ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द जी महाराज, साध्वी लक्ष्मी मणी शास्त्री, नील मणी शास्त्री, स्वामी त्रिभुवन दास एवं अन्य संत, महात्मा व श्रद्धालुगण उपस्थित होकर पूज्य शंकराचार्य महाराज के श्रीमुख से गोस्वामी तुलसीदास जी के बारे में कथा का रस पान किये। इस शुभ अवसर पर पूज्य महाराजश्री का पादुका पूजन बनारस और इटली से पधारे उनके भक्त ने किया तथा मंत्रोच्चारण ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द जी महाराज ने किया। आगे पूज्य महाराजश्री ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी के गुरु नरहरिदास थे और तुलसीदास जी कहते थे की गुरु के चरण के हम धुली हैं। भगवान शंकर चिता की भस्म को अपने शरीर मे लपेटते थे जिससे वह भस्म पवित्र हो जाता था। उसी तरह गुरु के चरण की रज को जो धारण करता है उसे सब चीज की प्राप्ति होती है। इसलिए बिना गुरु के भगवान का दर्शन नहीं हो सकता है।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) :- धर्म भी एक पुरुषार्थ है जो परलोक में भी सुख प्रदान करता है :: शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वति ।।

वृंदावन में स्थित श्री शंकराचार्य निवास, उड़िया बाबा आश्रम में आज सत्संग में धर्म सम्राट अनंत श्री विभूषित ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि अपने शास्त्रों में 4 पुरुषार्थ बताए गए हैं - अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष। देखा गया कि धन (अर्थ) के लिए लोग काम करते हैं और उसे पुरुषार्थ मानते हैं और वही धन के लिए देश भी छोड़ देते हैं और दूसरे का दास बनकर धन उपार्जन करते हैं। धन यानी रुपया पैसा, सोना, चांदी, हीरा व आदि। क्या इनसे मनुष्य का पेट भरता है ? लेकिन लोग सोचते हैं कि धन रहेगा तो सुख के सारे उपकरण हमारे पास होंगे, नई सवारी खरीदेंगे, घर बनाएंगे व इत्यादि। आगे पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने बताया मान लीजिए आप कहीं गए हैं और उस जगह आपका धन चोरी हो जाये। आप तब घर मे या रिश्तेदारों को फ़ोन कर पैसे मंगवाओगे लेकिन परलोक में कहाँ से लाओगे ? जो धर्म आपने किया है वही परलोक में आपके साथ जाएंगे। धन, सोना, चांदी, हीरा मोती इत्यादि सब धरती पर रह जाएंगे, स्त्री भी घर के चौखट तक साथ देगी, सब लौट कर आ जाएंगे , जो आपके साथ जाएगा वह आपका धर्म जाएगा। मनुष्य का सच्चा मित्र धर्म है जो मरने के बाद भी साथ जाता है। सब मित्र छूट जाएंगे लेकिन धर्म रूपी मित्र केवल आपके साथ जाएगा। इसलिए धर्म भी एक पुरुषार्थ है जो परलोक में भी हमे सुख प्रदान करता है। सत कर्म से सुख की प्राप्ति होगी और दुष्कर्म से दुःख की प्राप्ति होगी। भगवान की प्राप्ति ही मोक्ष है। इसलिए मोक्ष को चुने और धर्म करें पर कामना का त्याग कर करें।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) :- शास्त्र अनुमोदित कार्य सभी को करना चाहिए :: शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ।।

धर्म सम्राट अनंत श्री विभूषित ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यदि व्यक्ति शास्त्र अनुमोदित कार्य करे तो ही भारत की अस्मिता सुरक्षित रह पाएगी। शंकराचार्य जी महाराज ने आगे कहा कि भारत को यदि सच्चे अर्थ में भारत बनाना है तो आज के नौजवानों को अपनी संस्कृति, सभ्यता और शास्त्र को समझने की जरूरत है और उन्हें सही दिशा में चलने हेतु भारत के शास्त्र, संस्कृति का अध्यन करने की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाकर ही भारत की रक्षा की जा सकती है। काशी में मन्दिर तोड़े जाने को लेकर शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि काशी में मन्दिर तोड़े और वहां ऐसी घटना घटी जिससे कई लोगों की मौत हो गई। शासन को चाहिए कि वे धर्म की रक्षा करे क्यों कि धर्म की रक्षा के लिए ही शासन होता है। जहाँ लोग अनर्थ करते हैं वह जगह डूब जाता है। इसलिए अनर्थ करने से बचें और धर्म की रक्षा के साथ साथ मठ, मंदिरों और देव विग्रहों को अनार्थियों के हाथ से बचाये।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने स्वातंत्र्य बलिवेदी में अपना बलिदान देने वाले सेनानियों की दी श्रद्धांजलि।।

धर्मसम्राट पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज देश के 72 वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर कहा कि अंग्रेजी तारीख 15 अगस्त के अनुसार भारत का स्वतंत्रता दिवस है। यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान के पुण्यस्मरण का दिन है। 1857 से प्रारम्भ स्वतंत्रता संग्राम 1947 तक चला। इन 90 वर्षों में हजारों देशभक्तों ने अपना बलिदान किया इस इतिहास का पूरा ज्ञान किसी भी व्यक्ति के लिए असंभव है। हजारों लाखों युवाओं ने अपने जीवन, घर परिवार के प्रेम को भुलाकर देश के लिए निःस्वार्थ भाव से सर्वस्व बलिदान किया, वे हमारे लिए ऋषि, मुनि से कम नहीं। सन 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो का अभियान बहुत विचार विमर्श के बाद चरणबद्ध तरीके से प्रारंभ किया गया था जो कि साफल अभियान था, इसी आंदोलन की पूर्णता के फलस्वरूप स्वतंत्रता प्राप्त हुई। इस आंदोलन में हमने भी भाग लिया और दो बार प्रथम वाराणसी में एवं बाद में मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में हमे दो मास का सश्रम कारावास दिया गया था। भारत किसी समय मे पूरे विश्व का शासक था किंतु कालक्रम से राजनैतिक परतंत्रता धीरे धीरे बढ़ती गई और पूरा भारत इसकी चपेट में आ गया। पूरे विश्व को स्वतंत्रता की शिक्षा देने वाला भारत परतंत्र था किंतु जिस तरह अमानुषिक अत्याचारों को सहकर भी हमने पुनः स्वतंत्रता प्राप्त की तो विश्व ने भी हमारी स्वतंत्रता के महत्त्व को समझा। आज के नेताओं में देश प्रेम की वह बात नहीं दिखती यह चिंता का विषय है। साम्प्रदायिक रूप से, जातिगत रूप से अगड़ा, पिछड़ा, दलित; स्त्री-पुरुष सभी तरह से वर्गवाद बनाकर वोटों के लिए देश की एकता तोड़ने का जो कार्य हो रहा है वह अत्यंत ही घातक है। आज स्वतंत्रता दिवस के दिन बलिदान देने वाले सेनानियों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्र को नमन करते हैं।

खबरीलाल रिपोर्ट ::-  बिना मदद के आगे बढ़ना है :: स्वामीश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: ।।

गुरुकुल की परंपरा यदि देखना है तो श्रीविद्या मठ, केदारघाट , वाराणसी आकर देखना होगा क्यों कि यहां जो गुरुकुल " जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी न्याय वेदांत महाविद्यालय " संचालित हो रहे हैं वो जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामीश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज द्वारा संचालित किया जा रहा है जिसमे 4 वेदों के 11 शाखाओं में वैदिक छात्र अध्यनरत हैं। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन नए विद्यार्थियों की प्रवेशिका हुई जिसमें 100 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया और उन्हें शिक्षकों के अलावा स्वामिश्री: खुद बच्चों को पढ़ाते हैं और संस्कार सिखाते हैं। इसी कड़ी में स्वामिश्री: ने नए प्रवेश लिए विद्यार्थियों से कहा की - विद्यार्थियों को कक्षा में अन्य विद्यार्थियों के मदद के बिना ही आगे बढ़ना है। कक्षा में कोई सहयोग और मदद पढ़ाई लिखाई के मामले में नहीं लेनी चाहिए। हमारा जो मस्तिष्क है वह प्रत्येक बातों को रिकॉर्ड कर लेता है लेकिन उसके लिए ध्यान / मनोयोग की जरूरत होती है। स्मृति में सब रहता है बस उसे ढूंढना है और यह तभी संभव होगा जब विद्यार्थी पूरा ध्यान लगाकर अपने गुरु की बातों को सुनेगा और पढ़ाई करेगा। आगे स्वामिश्री: ने विद्यार्थियों से कहा कि आप सभी के मन मे जिज्ञासा होनी चाहिए। उदाहरण स्वरूप उन्होंने बताया कि जब भूख लगती है और खाना माँ से मांगते हो ठीक उसी प्रकार जिज्ञासा की भूख आपके अंतर्मन से उठकर आना चाहिए तब आपको आपके जिज्ञासा का सदुत्तर आपके गुरु से मिलेगा और आप तृप्त महसूस करोगे। स्वामिश्री: ने कहा सवाल पूछते रहो, यह मत सोचो कि सवाल कितने गहरे हैं । इससे आपकी खुद की प्रतिभा में निखार आएगा और आप सफल होंगे। गुरु से जितना चाहो सवाल पूछो और ज्ञान अर्जित करो। यह मत सोचो कि - "मैं यह सेवाल करूँ की नहीं " ।