बड़ी खबर

पाकिस्तानी सेना की फायरिंग का भारत ने दिया कड़ा जवाब, ढेर किए तीन पाक रेंजर, पांच घायल

बीएसएफ और पाक रेंजर की इस फायरिंग में बीएसएफ का एक जवान भी घायल हो गया है।

भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना की सीमा पर फायरिंग का कड़ा जवाब दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय सेना ने पाकिस्तानी रेंजर के तीन जवानों को ढेर कर दिया। इसके साथ ही पांच पाकिस्तानी रेंजर घायल भी हो गए। वहीं बीएसएफ का एक जवान भी घायल हो गया। पाकिस्तानी सेना ने सांबा, हीरानगर और अखनूर में सीजफायर का उल्लंघन किया है। पहले बीएसएफ ने हीरानगर में पाकिस्तानी रेंजर के एक जवान को ढेर किया था।  बता दें, गुरुवार को भी पाकिस्तानी सेना ने इसी सेक्टर में बीएसएफ चौकी पर हमला किया था। इसके साथ ही भारतीय सेना ने भारत की सीमा के अंदर घुस रहे छह आतंकियों को वापस पाकिस्तान भाग जाने लिए मजबूर कर दिया था। इन छह आतंकियों ने बीएसएफ की एक चौकी पर हमला किया था। इसके जवाब में बीएसएफ ने कड़ा जवाब दिया था। जिसमें एक आतंकी जख्मी हो गया था। इसके बाद सभी आतंकी वापस पाकिस्तान भाग गए थे।

बता दें, भारतीय सेना के एलओसी पारकर पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद पाकिस्तानी सेना द्वारा सीजफायर के उल्लंघन की घटनाओं में इजाफा हुआ है। इसके बाद से पाकिस्तानी सेना ने दर्जनों बार सीजफायर का उल्लंघन किया है। भारतीय सेना ने 29 सितंबर को पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक किया था। भारतीय सेना के डीजीएमओ ले. जनरल रणबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी जानकारी दी थी। सिंह ने बताया था कि सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय सेना ने पीओके स्थित कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के इस दावे का खंडन किया है। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि भारत ने पीओके में कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं किया। सीमा पर दोनों पक्षों में फायरिंग हुई थी। इसमें पाकिस्तानी सेना के दो जवान मारे गए थे।

गुजरात: दलित शख्स ने आत्महत्या की, 1991 में गांव से निकाल दिया गया था

गुजरात में प्रभात परमार नाम के एक दलित शख्स ने आत्महत्या कर ली। परमार ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या की थी।

गुजरात में प्रभात परमार नाम के एक दलित शख्स ने सोमवार (17 अक्टूबर) को आत्महत्या कर ली। परमार ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या की थी। वह प्रदर्शन गुजरात के जूनागढ़ जिले के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के दफ्तर के बाहर हो रहा था। प्रदर्शन के वक्त परमार, जिगनेश राठौड और चांदू परमार नाम के शख्स ने जहर खा लिया था। उसके बाद हॉस्पिटल में परमार की मौत हो गई। हालांकि, बाकी दोनों बच गए। यह प्रदर्शन 12 अक्टूबर से जारी था। प्रदर्शन संधा नाम के गांव की खेती वाली जमीन को लेकर था। इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी मिली है कि विरोध प्रदर्शन तो कुछ दिन पहले ही शुरू हुआ था लेकिन परमार पर अत्याचार 1991 से जारी था। परमार, उसके कई रिश्तेदारों और बाकी कई दलित परिवारों को 25 साल पहले गांव से निकाल दिया गया था। लड़ाई उस वक्त शुरू हुई थी जब दलित लोगों ने खेती के लिए कुछ जमीन की मांग की। आरोप है कि उस वक्त परमार को 7-8 लोगों ने मिलकर मारा था। इसके बाद परमार अपने परिवार के साथ राजकोट जिले में रहने लगा था। परमार ने 2000 में लोकल कोर्ट में भी इसके लिए अर्जी डाली थी। लेकिन कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि दलित लोग गौचर जमीन पर खेती करना चाहते हैं लेकन उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।

गौरतलब है कि ऊना कांड के बाद से ये लोग प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन कुछ दिन पहले इन्होंने दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ जारी प्रदर्शन में जमीन की मांग को भी जोड़ लिया। इसके लिए लगभग 86 दलित परिवारों ने संधा में जमीन के लिए अर्जी दे दी थी। हालांकि, 17 परिवार ही वहां रह रहे हैं। यह मामला संधा की 750 बीघा जमीन का है। जिसे दलित लोग खेती करना चाहते हैं। दलित लोगों का आरोप है कि उस जमीन में से 250 बीघे जमीन गैर-दलित लोगों के कब्जे में भी है। परमार के सुसाइड से उसका परिवार भी सदमे में है। परमार के बेटे का कहना है कि उसे भी नहीं पता था कि उसके पिता ऐसा कोई कदम उठा लेंगे।

“हनीट्रैप” के आरोप को वरुण गांधी ने नकारा, कहा- अगर 1 फीसदी भी सच्चाई निकली तो छोड़ दूंगा राजनीति

अमेरिकी आर्म्स डीलर ने वरुण गांधी पर डिफेंस सिक्रेट लीक करने के आरोप लगाए हैं, कहा है कि ब्लैकमेल के जरिए दस्तावेज लीक कराए गए थे

एक अमेरिकी वकील और हथियारों के सौदागर ने भाजपा सांसद वरुण गांधी पर डिफेंस सिक्रेट लीक करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी वकील सी एडमंड्स एलेन ने बताया कि उनके बिजनेस पार्टनर और विवादित हथियार डीलर अभिषेक वर्मा ने वरुण गांधी को ब्लैकमेल किया था और डिफेंस सिक्रेट हासिल कर लिए थे। एडमंड्स एलेन ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर यह आरोप लगाए हैं। खत में कहा गया है कि विदेशी एस्कॉर्ट महिलाओं तथा वेश्याओं के साथ खिंचीं वरुण की तस्वीरों के ज़रिये उन्हें ब्लैकमेल किया गया। हालांकि वरुण गांधी ने साफतौर पर इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि अगर इसमें 1 फीसदी भी सच्चाई निकली तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
दरअसल, वर्ष 2012 में एक दूसरे से अलग होने से पहले अभिषेक वर्मा और सी. एडमंड्स एलेन व्यापारिक साझीदार थे। सी. एडमंड्स एलेन और अभिषेक वर्मा के बीच व्यापारिक साझेदारी जनवरी, 2012 में खत्म हुई थी और उस वक्त दोनों ने ही एक दूसरे पर मनी-लॉन्ड्रिंग, गबन और धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। इसके बाद सी. एडमंड्स एलेन भारतीय जांचकर्ताओं को अभिषेक वर्मा के खिलाफ कागज़ात देते रहे हैं। एलेन ने प्रधानमंत्री कार्यालय को 25 अगस्त और 16 सितंबर को दो पत्र लिखकर वरुण गांधी पर आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं, बताया जा रहा है कि 16 सितंबर को भेजे गए लेटर में कुछ तस्वीरें और एक सीडी भी भेजी गई हैं, जिसमें वरुण गांधी की विदेशी वेश्याओं के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक स्थिति में बताया गया है।

इन गंभीर आरोपों पर बोलते हुए वरुण गांधी ने इन्हें साफतौर पर नकार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बिलकुल बकवास है और अगर इन आरोपों में एक फीसदी भी सच्चाई हुई तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। उन्होंने आगे कहा, “जितने भी सबूत पेश किए गए हैं उनमें किसी से भी साबित नहीं होता कि मैंने किसी भी दस्तावेज को अभिषेक वर्मा को भेजा है।” वरुण के मुताबिक वह पिछले 15 साल से भी ज़्यादा वक्त से अभिषेक वर्मा से नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय रक्षा समिति की जिन बैठकों का जिक्र सी. एडमंड्स एलेन ने किया है उनमें उन्होंने शिरकत ही नहीं की थी, और महिलाओं के साथ दिखाई गई तस्वीरें भी असली नहीं हैं।

गाजियाबाद : मोबाइल चोरी के शक में दो नाबालिगों समेत चार के गुप्तांग में भर दिया पेट्रोल

गाज़ियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में कथित रूप से मोबाइल फोन चुराने के आरोप में दो नाबालिगों समेत चार लोगों को पीटा गया, और उनके गुप्तांग में पेट्रोल इंजेक्ट किया गया. पुलिस के मुताबिक, मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है, और एक अन्य को आरोपी बनाया गया है.

आरोपियों में से एक रिज़्ज़ू राज्य में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता का भाई है, और गाज़ियाबाद के लोनी इलाके में दूध की डेरी चलाता है.

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राकेश पांडे ने बताया, घटना 14 अक्टूबर की है, जब रिज़्ज़ू को शक हुआ कि 17-वर्षीय ज़हीर बेग, 16-वर्षीय गुलज़ार तथा फिमो और फिरोज़ (दोनों 25-वर्षीय) ने उसका मोबाइल फोन चुराया है, और उसने चारों को डेरी पर बुला लिया. इसके बाद रिज़्ज़ू ने अपने दो साथियों अकील और नदीम के साथ मिलकर चारों को पीटा, और फिर उनके गुप्तांग में पेट्रोल इंजेक्ट कर दिया.

चारों पीड़ितों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल में भेज दिया गया. बाद में ज़हीर और गुलज़ार को दिल्ली के गुरुतेग बहादुर अस्पताल में भेजा गया, जहां डॉक्टरों को उनकी आंतों का ऑपरेशन कर उनकी मलनिकास नली को बाईपास करना पड़ा.

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के अनुसार, लोनी कोतवाली पुलिस थाने में धारा 323 (चोट पहुंचाने), 504 (भड़काने के इरादे से अपमानित करने), 506 (आपराधिक रूप से डराने), 377 (अप्राकृतिक अपराध) तथा पॉस्को एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है. रिज़्ज़ू और अकील को गिरफ्तार कर लिया गया है, और नदीम फिलहाल फरार है.

पाकिस्‍तानी में भारतीय टीवी चैनलों पर बैन को सरकार ने बताया दुर्भाग्‍यूपर्ण, भारत में पाक कलाकारों पर बैन नहीं

केन्‍द्र सरकार ने भारत में पाकिस्‍तानी कलाकारों पर प्रतिबंध के मुद्दे पर स्थिति स्‍पष्‍ट की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता विकास स्‍वरूप ने गुरुवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि ‘वर्तमान हालातों को ध्‍यान में रखते हुए पाकिस्‍तानी कलाकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं है।’ स्‍वरूप ने पाकिस्‍तान द्वारा भारतीय टीवी चैनलों पर बैन लगाए जाने को दुर्भाग्‍यपूर्ण बताया। उन्‍होंने कहा, ”यह दुर्भाग्‍यूपर्ण है और मुझे लगता है कि यह आत्‍मविश्‍वास की कमी को प्रदर्शित करता है।” विकास स्‍वरूप ने गोवा में बीते दिनों हुई ब्रिक्‍स देशों की बैठक को पूरी तरह सफल बताया। उन्‍होंने कहा कि ”गाेवा घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ सबसे कड़ी भाषा का प्रयोग किया गया है। हम सभी जानते हैं कि आतंकवाद का केन्‍द्र कौन सा देश है। इसी समय पर हम आतंकवाद को लेकर चीन से बातचीत कर रहे हैं।” स्‍वरूप ने सार्क देशों की बैठक पर भी टिप्‍पणी की। उन्‍होंने कहा, ”सार्क में हमारा हित बरकरार है मगर हमारी चिंता ये है कि कनेक्टिविटी, व्‍यापारिक सहयोग और आतंक-मुक्‍त माहौल होना चाहिए, जो कि नहीं है।” सार्क से पाकिस्‍तान को बाहर करने के सवाल पर उन्‍होंने कहा- ”हमारा इरादा नहाने के पानी के साथ बच्‍चे को फेंकने का नहीं है, हम उसे साफ करना चाहते हैं।

 

पीएम नरेंद्र मोदी के स्वागत में वडोदरा नगर निगम ने लगाए ’56 इंच सीने’ वाले होर्डिंग्स, विवाद हुआ तो कहा-हटा लेंगे

पीएम मोदी 22 अक्टूबर को वडोदरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्धघाटन करने जाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से पहले शहर की महानगर पालिका ने उनके स्वागत में ’56 इंच सीने’ वाले होर्डिंग्स लगाए हैं। इस होर्डिंग्स पर इसके साथ ही स्मार्टसिटी और स्वच्छ भारत के लोगो भी लगाए गए हैं। पीएम मोदी 22 अक्टूबर को वडोदरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्धघाटन करने जाएंगे। इसके साथ ही वे विकलांगों के एक समारोह में भी हिस्सा लेंगे। इन होर्डिंग्स पर पीएम मोदी, गुजरात के सीएम विजय रुपाणी, डिप्टी सीएम नितिन पटेल की तस्वीरें प्रकाशित की गई हैं। इसके साथ ही होर्डिंग्स में पीएम मोदी को पर्यवेक्षक, कुशल, सक्षम नेतृत्व, महत्वाकांक्षी, बौद्धिक, टेक्नोक्रेट और विजन रखने वाला बताया गया है। होर्डिंग्स के नीचे वाले हिस्से में स्वागत करने वालों में महानगरपालिका आयुक्त विनोद राव, स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन जिगिषा सेठ, डिप्टी मेयर योगेश पटेल और मेयर भरत डांगर का नाम लिखा गया है। होर्डिंग्स करेलीबाग, अल्कापुरी और गेंडा सर्किल सहित पूरे शहर में लगाए गए हैं।

वडोदरा महानगरपालिका कमिश्नर राव ने बताया, ‘मैंने खुद होर्डिंग्स देखे हैं और मैंने मेरी टीम को निर्देश दिए हैं कि हम लोग राजनीतिक कनेक्शन वाली हर चीज को नजरअंदाज करेंगे। हम लोग अब इन होर्डिंग्स को बदल देंगे।’ लैंड एंड एस्टेट(कमर्शियल) डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने होर्डिग्स लगाने के लिए महानगरपालिका को जगह अलॉट की है। उन्होंने कहा, ‘वीएमसी को शहर के कई इलाकों में होर्डिंग्स लगाने के लिए जगह दी गई थी। लेकिन हमने होर्डिंग्स का कंटेंट चेक नहीं किया था।’ एक अधिकारी ने बताया कि होर्डिंग्स विभाग की पब्लिसिटी टीम ने ही डिजाइन किए हैं, ऐसे में हम लोगों ने कंटेंट क्रॉस चेक नहीं किया।
जब स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन डॉ. जिगिशा सेठ से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि पीएम मोदी के स्वागत में शहर में होर्डिंग्स लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे होर्डिंग्स और उन पर लिखे गए कंटेंट के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, हम लोग इस बारे में चर्चा करेंगे और मामले को देखेंगे।’

Ae Dil Hai Mushkil के खिलाफ तोड़-फोड़ कर रहे 12 MNS कार्यकर्ता अरैस्ट, फिल्म का शो नहीं चलने की दी थी धमकी

करण जौहर की फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की स्क्रीनिंग का विरोध कर रहे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के 12 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने आज गिरफ्तार कर लिया।

करण जौहर की फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की स्क्रीनिंग का विरोध कर रहे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना  के 12 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दूसरी तरफ, पार्टी ने फिल्म निर्माता करण जौहर के इस बयान को खारिज किया कि वह भविष्य में पाकिस्तान की प्रतिभाओं के साथ काम’ नहीं करेंगे। MNS की फिल्म इकाई महाराष्ट्र नवनिर्माण चित्रपट कर्मचारी सेना के कार्यकर्ताओं ने दक्षिणी मुंबई के मेट्रो सिनेमा के बाहर प्रदर्शन किया और कहा कि ‘ऐ दिल है मुश्किल’ फिल्म दिखाने नहीं देंगे। राज ठाकरे की पार्टी ने सिनेमाघर प्रबंधन से पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान अभिनीत ऐ दिल है मुश्किल फिल्म का कोई भी शो नहीं चलाने को कहा। आजाद मैदान थाने के प्रभारी विजय कदम ने बताया, हमने MNS के 12 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और दंड प्रक्रिया संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। जौहर ने कल उनकी फिल्म की रिलीज रोकने की मांग करने वालों से अपील की थी और कहा था कि वह अब पाकिस्तान की प्रतिभाओं के साथ काम नहीं करेंगे।

हालांकि राज ठाकरे नीत मनसे ने आज कहा कि जौहर को वास्तविकता देर से समझ आई। मनसे की सिनेमा शाखा के प्रमुख अमेय खोपकर ने राज ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मिलने के बाद कहा कि वे रिलीज के विरोध को लेकर दृढ हैं। खोपकर ने कहा, हम सिंगल स्क्रीन्स और मल्टीप्लेक्स में फिल्म दिखाने नहीं देंगे। वहीं करण की ओर से वीडियो जारी कर सफाई देने के बावजूद राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस फिल्म की रिलीज का लगातार विरोध कर रही है। इसे लेकर बुधवार को एमएनएस कार्यकर्ताओं ने मुंबई के मेट्रो सिनेमा हॉल में जमकर हंगामा किया।निर्माता को वास्तविकता देर से समझ आई है।’ यह फिल्म दिवाली से पहले 28 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है।

JNU के छात्रों का हंगामा, VC, रजिस्ट्रार सहित 10 अधिकारियों को बनाया बंधक

जेएनयू में एक लापता छात्र को लेकर चल रहा प्रदर्शन आज उस वक्त गंभीर हो गया जब आंदोलनकारी छात्रों ने कुलपति और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशासनिक भवन में बंद कर दिया।

नई दिल्ली : जेएनयू में एक लापता छात्र को लेकर चल रहा प्रदर्शन बीती रात उस वक्त गंभीर हो गया जब आंदोलनकारी छात्रों ने कुलपति और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशासनिक भवन में बंद कर दिया। कैंपस के बाहर करीब 300 छात्रों नें प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय के कुलपति एम जगदीश कुमार ने कहा, हम इमारत के भीतर दिन में 2.30 बजे से बंद हैं। हमारे साथ एक महिला सहकर्मी भी हैं जो अस्वस्थ हो गईं हैं क्योंकि उनको मधुमेह का रोग है। दूसरी ओर, जेएनयू के छात्रों ने अपने रूख का बचाव करते हुए दावा किया कि ‘किसी को अवैध रूप से बंधक नहीं बनाया गया। जूएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष मोहित पांडेय ने कहा, ‘‘हमने जेएनयू के प्रशासनिक भवन में किसी को अवैध रूप से बंधक नहीं बनाया। बिजली और दूसरी सभी तरह की आपूर्ति है। हमने भीतर खाना भेजा है।

दूसरी तरफ, पुलिस विश्वविद्यालय परिसर के बाद बाहर मौजूद है और अंदर दाखिल होने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति का इंतजार कर रही है। इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक छात्र के लापता होने से संबंधित मामले में 12 छात्रों को प्रॉक्टर..स्तरीय जांच समिति के समक्ष उपस्थित होने को कहा।स्कूल आॅफ बायोटेक्नोलॉजी का छात्र नजीब अहमद शनिवार से कथित तौर पर लापता है। उसका लापता होने से एक रात पहले कैंपस में उसका झगड़ा हुआ था। छात्र के अभिभावकों से मिली शिकायत के बाद वसंत कुंज उत्तर थाना में कल एक व्यक्ति के अपहरण और गलत तरीके से कैद कर रखने को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई।

करण जौहर के नाम खुला पत्र- दुख है कि आपने अपनी अभिव्यक्ति की आजादी को गिरवी रख दिया


प्रिय करण जौहर,
आप मुझे नहीं जानते। फौरी परिचय के तौर पर आपको बताना चाहूंगा कि मैं वही व्यक्ति हूं जिसने कई महीने पहले लिखा था, “आमिर खान पर राजद्रोह का मामला दर्ज करने से पहले उज्जल दोसांज को राष्ट्रद्रोह के लिए फांसी दो।”  मैंने वो लेख आमिर खान पर किए जा रहे हमलों के जवाब में लिखा था। आमिर की केवल इतनी गलती थी कि उन्होंने उस समय देश में पनप रहे धार्मिक उन्माद के प्रति अपनी पत्नी की चिंता को सार्वजनिक रूप से जाहिर कर दिया था। आज वो धार्मिक उन्माद एक चक्रवात सरीखा बन चुका है।
मैं 1964 से ही देश से बाहर हूं। जब मैंने देश छोड़ा तब मैं कमोबेश वंचित परिवेश में पला बढ़ा एक 18 साल का नौजवान था। मैंने भारत छोड़ दिया और बाद के सालों में कनाडा का नागरिक बन गया। मैंने अपना “घर चलाने के लिए” कानून का पेशा चुना। उम्मीद है आप इस बात को समझेंगे कि मेरी बात में कोई धार्मिक अंतर्ध्वनि नहीं है। इसका केवल इतना मतलब है कि हर माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वो अपने बच्चो के पेट भरने के लिए आहार (शाकाहारी या मांसाहारी) की व्यवस्था करें।

इसलिए मैं समझ सकता हूं कि आपने अपनी फिल्म को बगैर किसी हिंसा के रिलीज कराने के लिए शैतानी धार्मिक उन्माद के साथ समझौता क्यों कर लिया। मैं समझ सकता हूं कि आपको उन्मादी ठगों द्वारा सिनेमाहाल जलाए जाने और पाकिस्तानी आतंकवादियों के प्रति उपजे गुस्से का शिकार भारती दर्शकों के बनने की चिंता रही होगी। पाकिस्तानी आतंकवाद को वहां की आतंकी सेना की सरपरस्ती हासिल है। पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे एक अवैध शरीफ सरकार चला रही है।
हम और आप दोनों जानते हैं कि पाकिस्तानी मदरसे और पाकिस्तानी सेना हजारों धार्मिक उन्मादी पैदा करने का कारोबार चला रहे हैं जिनका मकसद सऊदी के पैसे पर पल रहे वहाबी इस्लाम आतंक के नाम पर ‘काफिर’ भारत पर हमला करना है। भारत अभी तक वहाबी आतंक के जहर से काफी हद्द तक बचा रहा है। इससे अप्रत्याशित सैन्य या सांस्कृतिक झटकों को बरदाश्त करने की भारत की अतुलनीय क्षमता का पता चलता है। हमारा इतिहास हमें यही सीख देता है।
एक अप्रवासी भारतीय होने के नाते मैंने उरी हमले के बाद की गई भारत की सर्जिकल स्ट्राइक का समर्थन किया था। लेकिन मुझे उम्मीद है कि आप भी मेरी तरह जानते होंगे कि भारतीयों की तरह बहुत से पाकिस्तानी भी दोनों देशों की सीमाओं पर शांति चाहते हैं। अगर “ऐ दिल है मुश्किल” में काम करने वाले पाकिस्तानी कलाकार भारत के खिलाफ नफरत फैलाने वाले धार्मिक उन्मादी होते या भारत से नफरत करने वाली सेना और उनके द्वारा प्रशिक्षित आतंकवादियों का उन्हें डर होता तो आपको फिल्म में काम करने का साहस नहीं करते। आपको उनकी हिम्मत की तारीफ करनी चाहिए।
मैं आपको अपने निजी अनुभव से बता सकता हूं कि धार्मिक उन्माद के चक्रवात का सामना करना आसान नहीं है। बहुत साल पहले कनाडा में खालिस्तानियों का विरोध करने के कारण मुझे असीमित गाली-गलौज और सिर पर लोहे की रॉड से हमला झेलना पड़ा था। मेरे सिर पर पड़ने वाली रॉड की हर चोट से उनसे लड़ने का मेरा इरादा और मजबूत होता गया था। मेरे अंदर का भारतीय और ‘अभिव्यक्ति की आजादी का प्रेमी’ यही सोचता रहा कि “उनकी हिम्मत कैसी हुई?”
मैं आपसे बताना चाहूंगा कि मैं आपकी उन तमाम आर्थिक मजबूरियों को समझता हूं जिनकी वजह से आपको कहना पड़ा कि आप भविष्य में कभी पाकिस्तानी कलाकारों को अपनी फिल्मों में नहीं लेंगे। अपनी फिल्मों को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज करवाने के लिए आपने अपनी और मेरी आजादी को भारतीय राष्ट्रवाद के स्वघोषित झंडाबरदार एनएनएस के कुछ गुंडो और उन्मादियों के आगे गिरवी रख दिया। और आप तो जानते ही हैं कि राष्ट्रवाद अक्सर दुष्टों का आखिरी ढाल होता है।
मुझे इस बात का दुख है कि आपने अपनी अभिव्यक्ति की आजादी को गिरवी रख दिया। मुझे यकीन है कि आपको प्रसिद्ध प्रोटेस्टैंट पैस्टोर और एडोल्फ हिटलर के विरोधी मार्टिन निमोलर के शब्द याद होंगे। यहां मैं उन्हें आपको और हम सबको याद दिलाने के लिए दे रहा हूं-
पहले वो साम्यवादियों के लिए आए, लेकिन मैं चुप रहा
क्योंकि मैं साम्यवादी नहीं था
फिर वो ट्रेड यूनियनवालों के लिए आए, लेकिन मैं चुप रहा
क्योंकि मैं ट्रेड यूनियनवाला नहीं था
फिर वो यहूदियों के लिए आए, लेकिन मैं चुप रहा
क्योंकि मैं यहूदी नहीं था
फिर वो मेरे लिए आए- और तब तक कोई नहीं बचा था
जो मेरे लिए आवाज उठा सके
मैं दुखी हूं कि आपने अंधकार और निरकुंशता की ताकत के आगे हथियार डाल दिए लेकिन इससे भी ज्यादा दुख की बात ये है कि गांधी, नेहरू, लोहिया और जेपी की इस धरती पर बहुत कम लोग बोलने की हिम्मत दिखा पा रहे हैं।
(ये लेखक के निजी विचार हैं। संस्थान की इनसे सहमति आवश्यक नहीं है।)

जयललिता की फोटो रखकर हुई तमिलनाडु कैबिनेट की बैठक, सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठे पन्‍नीरसेल्‍वम

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को 22 सितंबर को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

तमिलनाडु कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में जे. जयललिता मौजूद नहीं थी। तीन सप्‍ताह पहले मुख्‍यमंत्री के अस्‍पताल में भर्ती होने के बाद यह पहली कैबिनेट बैठक थी, मगर जयललिता की तस्‍वीर गर्व से मेज पर रखी गई थी। जयललिता का कार्यभार देख रहे ओ. पन्‍नीरसेल्‍वम ने बैठक की अध्‍यक्षता की, वे अपने सामने जयललिता की तस्‍वीर रखकर बैठे। पन्‍नीरसेल्‍वम ने मुख्‍यमंत्री की कुर्सी भी नहीं ली, वह पूरी बैठक के दौरान खाली पड़ी रही। इससे पहले, 65 साल के पन्‍नीरसेल्‍वम, भ्रष्‍टाचार के मामले में जयललिता के जेल जाने के बाद सत्‍ता संभाल चुके हैं। तब उन्‍होंने अपनी वफादारी दिखाते हुए अाठ महीने तक जयललिता के कार्यालय और विधानसभा में मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर बैठने से मना कर दिया था। पिछले सप्‍ताह तब डॉक्‍टरों ने जयललिता को कहा कि उन्‍हें अस्‍पताल में लंबे समय तक रहना होगा, तो उन्‍होंने आठ मंत्रियों में से मुलाकात की और राज्‍य के वित्‍त मंत्री पन्‍नीरसेल्‍वम को कार्यभार सौंपा। राज्‍यपाल सी. विद्यासागर राव ने कहा कि वह (पन्‍नीरसेल्‍वम) मुख्‍यमंत्री की सलाह पर कैबिनेट मीटिंग भी कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार की बैठक में कैबिनेट के पड़ोसी राज्‍य कर्नाटक से कावेरी जल विवाद पर चर्चा की। इसके अलावा कई प्रोजेक्‍ट्स पर तय समयसीमा के भीतर पूरा करने की प्रतिबद्धता के साथ हस्‍ताक्षर किए गए। आखिरी बार कैबिनेट की बैठक इस साल जुलाई में बजट पर चर्चा के लिए हुई थी।

68 वर्षीय तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को 22 सितंबर को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बुखार और निर्जलीकरण की शिकायत की थी। बाद में अपोलो अस्पताल ने बताया कि उनकी फेफड़ों की जकड़न को कम करने समेत अन्य उपचार किए जा रहे हैं और वह सतत निगरानी में हैं। अस्पताल ने बताया कि चिकित्सकों का एक पैनल मुख्यमंत्री पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
जयललिता के इलाज के लिए लंदन से भी डॉक्टर को बुलाया गया था। हाल ही में एम्स अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम भी अपोलो अस्पताल गई थी। अपोलो प्रशासन की ओर से कहा गया था कि जयललिता के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है।