विशेष

।। खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ।। जिन्हें हम हार समझे थे, गला अपना सजाने को। वही अब सांप बन बैठे, हमे ही काट खाने को ।।

जिन्हें हम हार समझे थे, गला अपना सजाने को। वही अब सांप बन बैठे, हमे ही काट खाने को ।। उपर्युक्त पंक्तियां आज के परिदृश्य में एक दम सही बैठती हैं। आज जिस दिशा में देश जा रहा है उसे देखते हुए प्रत्येक नागरिक शायद उपर्युक्त पंक्तियों को समझे और खुद को कोसे की जिन्हें हमने अपने लिए , अपने धर्म की रक्षा के लिए, अपने मन्दिर-मठों की रक्षा के लिए, रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने के लिए, मूल्य वृद्धि रोकने के लिए भावुक होकर चुना था वह भाजपा पार्टी सभी क्षेत्रों में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। अभी तक न तो काला धन विदेशों से वापस आया और न ही 15 लाख प्रत्येक के खाते में आये अपितु कुछ नामचीन उद्योगपति अरबों-खरबों की चपत देकर देश छोड़ चले गए और अब शायद ही सरकार की पकड़ में आये। आज स्थिति ऐसी हो गई है कि जो रुपया एक समय डॉलर के बराबर था आज वही रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे निम्नतम स्तर तक पहुंच गया है यानी एक डॉलर बराबर 70-71 रुपया। इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि देश की अर्थ व्यवस्था की स्थिति किस तरह चरमरा रही है। देश मे पढ़े लिखे इंजीनियर, प्रबंधन के विद्यार्थी व अन्य बेरोजगार घूम रहे हैं। जीएसटी ने लाखों लोगों के रोजगार को निगल लिया साथ मे  दो वर्ष गुजर गए अभी तक नोट बन्दी के फायदे सरकार गिना नहीं पाई।  दिनों दिन पेट्रोल और डीजल का रेट बढ़ते ही जा रहा है जो सीधे असर बाजार पर हो रहा है और इसमें पिस रहे हैं माध्यमवर्गी लोग। जो सरकार हिंदुत्त्व को मुद्दा बनाकर राज सिंहासन पर बैठी वही हिंदुओं के साथ छल कर बैठी। काशी में मंदिर तोड़े गए तथा देश के अन्य राज्य में भी मन्दिर तोड़े गए नाम दिया गया "विकास"। विकास के लिए हिंदुओं के पूजा स्थल, एकता का स्थल, पौराणिक मंदिर आदि को विकास नाम की चिड़िया चुग गई और राज सिंहासन पर बैठी हिंदुत्त्ववादी सरकार इस गंभीर विषय पर मौन साधी हुई है और तुष्टिकरण में व्यस्त है। जिस देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एसटी-एससी एक्ट पर फैसला दे दिया उसे सरकार ने केवल तुष्टिकरण और वोट की राजनीति हेतु अध्यादेश लाकर बदल दिया जिससे आज सम्पूर्ण सवर्ण वर्ग नाराज हैं और देश के सभी कोने से आवाज उठा रहे हैं। इससे सरकार क्या साबित करना चाह रही है कि हम न्यायालय से भी बड़े हैं। क्या संदेश अन्य देशों में गया इसका भी चिंतन शायद ही सरकार में बैठे लोगों ने किया। जब आपने एक वर्ग को संतुष्ट करने के लिए एक्ट को अध्यादेश लाकर बदल दिए तो राम मंदिर के मुद्दे के लिये क्यों एवं किसलिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार हो रहा है? जब पूर्ण बहुमत से देश की जनता ने हिंदुत्त्ववादी सरकार को राजसिंहासन सौंपा तो राममंदिर मुद्दे को भी अध्यादेश लाकर रामजन्मभूमि में ही मंदिर बनवा दे ताकि करोड़ों सनातन धर्मी आप को आशीर्वाद दे। लेकिन यह होगा नहीं क्योंकि सरकार को मालूम है कि हिन्दू संगठित नहीं है और इनमें ही डिवाइड एंड रूल पद्धति से राज करना संभव है। जिस साईं के बारे में धर्म सम्राट ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने बयान दिया था और हिंदुओं को उनकी पूजा करने से रोकने की कोशिश की थी कि वे मुस्लिम हैं तो कैसे भाजपा और संघ के नेता साईं मन्दिर में माथा टेक रहे हैं ? क्या इतना भी इल्म हिंदुत्त्ववादी सरकार को नही है की हमे हिन्दू देवी देवताओं की ही आराधना करनी चाहिए ? क्या हिंदुत्त्ववादी सरकार अब सेक्युलर हो गई है या यह भी उनकी वोट के लिए चुनावी रणनीति है। देश के प्रधान सेवक विश्व के अधिकतर देश घूम आये पर आज तक उन्हें अयोध्या जाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ। कम से कम देख कर आते कि किस तरह हम सबके आराध्य रामलला तिरपाल के नीचे दिन व्यतीत कर रहे हैं। माँ गंगा ने बुलाया है पर चार वर्ष से ऊपर हो गए माँ गंगा जैसे थी वैसे ही है, कोई परिवर्तन नहीं हुआ और न ही वाराणसी क्वेटो बना।  क्या देश के जनता के साथ धोखा नहीं हुआ ? क्या देश की जनता ने नेताओं को पहचानने में गलती नहीं की ? देश पूछ रहा है - धारा 370 कब हटेगी ? कब मन्दिर-मठों को संरक्षित किया जाएगा ? कब रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा ? कब राम मंदिर का निर्माण होगा ? कब कालेधन को वापस लाया जाएगा ? कब 15 लाख प्रत्येक के खाते में जमा होंगे ? कब तुष्टिकरण की राजनीति बन्द होगी ? कब तक देश को जातीवाद में बांटते रहोगे ? कब महंगाई कम होगी ? कब निजी स्कूल और महाविद्यालयों पर नकेल कसे जाएंगे ? कब सनातन धर्म की सही तरीके से रक्षा होगी ? कब तक महिलाओं के ऊपर जुल्म होता रहेगा ? कब तक छोटी बच्चियों पर कुकृत्य बन्द होगा ? ऐसे बहुत से और सवाल हैं जिसका सदुत्तर सिंहासन पर बैठी हिंदुत्त्ववादी सरकार को देना होगा।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज ने किया विशेष पूजन।।

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्रीधाम वृंदावन में स्थित श्री शंकराचार्य निवास, उड़िया बाबा आश्रम में धर्म सम्राट अनंत श्री विभूषित ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजन एवं आरती किये। तत्पश्चात महाराजश्री ने पुष्पहार पहनाए और पुष्पांजलि अर्पित किए। भगवान श्रीकृष्ण जन्म के ठीक पहले दंडी स्वामी अमृतानन्द सरस्वती महाराज ने पाठ किया और ठीक रात 12 बजे कान्हा के जन्म पश्चात साध्वीद्वय लक्ष्मी मणी एवं नील मणी शास्त्री ने " नन्द के आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की ..." , " ब्रज में हो रही जय जय कार नन्द घर लाला आयो री.." सुमधुर भजन गाकर समूचे वातावरण को और आनंदित व भक्तिमय बना दिया। इस विशेष पूजन के अवसर पर दंडी स्वामी गोविंदानन्द सरस्वती, ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द महाराज, ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द, ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द महाराज, ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द महाराज, डॉ शर्मा, अरविंद मिश्रा, कुलदीप व आदि भक्तजन उपस्थित होकर कान्हा के जन्मोत्सव को बड़े धूम धाम से मनाया। इसके पश्चात प्रत्येक उपस्थितजनों ने चरणामृत व प्रसाद ग्रहण कर अपने व्रत तोड़े तथा पूज्य महाराजश्री के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किये।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- स्वामिश्री: ने जन्माष्टमी में किया अभिषेक एवं पूजन।।

द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज ने जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर वृंदावन स्थित जयपुर मंदिर में विराजमान राधा कृष्ण मंदिर में विशेष पूजा, अभिषेक एवं महाआरती सम्पन्न किये। इस अवसर पर राजस्थान तथा वृंदावन से सैकड़ों भक्त उपस्थित हुए और पूज्य स्वामिश्री: द्वारा मध्यरात्रि को किये गए  विशेष अभिषेक, पूजन एवं महाआरती के गवाही बने और श्रीकृष्ण के जन्म उपरांत भजन व कीर्तन गाकर समूचे वातावरण को कृष्णमय बना दिये। पूजन शुरू होने से पहले कृष्ण जन्म पर केंद्रित नाटक का सुंदर मंचन कलाकारों द्वारा किया गया तथा उपस्थित महिलाओं ने नृत्य कर बड़े हर्षोल्लास के साथ कान्हा के जन्मोत्सव मनाया।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-भगवान बहुत ही दयालु होते हैं :- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज अपने अमृत प्रवचन का रस पान कराते हुए उपस्थित भक्तगणों से कहा कि - भगवान बहुत ही दयालु होते हैं। राक्षसी पूतना एक ऐसी राक्षस थी जो पवित्र नहीं थी और वह अन्य को भी अपवित्र कर देती थी। उस पूतना ने जब भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन का दूध पिलाकर मारना चाही तब भगवान ने अपनी लीला से उसकी इहलीला समाप्त कर दिए। जब वासुदेव जी की बात मानकर नन्दजी गोकुल पहुंचे तो उन्होंने देखा एक भयानक राक्षसी पड़ी हुई है और उसके स्तन पर नन्हा कृष्ण खेल रहे हैं। लोगों ने उस राक्षसी के पैर, हाथ अलग अलग कुल्हाड़ी सड़ काटकर लकड़ी से जला दिए लेकिन उसके धुंए में कोई अशुद्ध गंध नहीं था। महाराजश्री आगे कहते हैं कि जिसका स्तन भगवान पी ले उसमे अशुद्धि कहाँ रहेगी। उस राक्षसी पूतना के शरीर को भगवान कृष्ण ने शुद्ध कर दिया और उसे वही गति दिए जो उनके माता को मिलता। आगे महाराजश्री कहते हैं कि भगवान कृष्ण को मारने के नियत से पूतना ने अपने स्तन से दूध पिलाई, फिर भी उसे सद्गति मिल गई। इसलिए जो प्रेम से भगवान को खिलायेगा, उनका स्मरण करेगा, उनका नाम लेगा उसे सद्गति अवश्य मिलेगी।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  आइये जानते हैं ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द से की - चातुर्मास्य व्रत क्या होता है ।।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द जी महाराज ने चातुर्मास्य व्रत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि - हम लोग भारतीय संस्कृति के अनुयायी हैं जो कि हिन्दू नाम से भी जाने जाते हैं। भारतीय संस्कृति चार पुरुषार्थों की पूर्णता को मानव जीवन की पूर्णता को बतलाती है। चार पुरुषार्थों में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का ग्रहण होता है। धर्म के अनुपालन से शेष तीनों की प्राप्ति होती है। आगे ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द ने बताया कि धर्म का ज्ञान हमे वेदों से होता है, इसलिए हमारी संस्कृति वेद मूलक है। वेदों में दो तरह के धर्मों का वर्णन है - एक प्रवृत्ति और दूसरा निवृत्ति धर्म। निवृत्ति धर्म मे त्याग पूर्वक सन्यास का ग्रहण है, अपनी सांसारिक इच्छाओं का त्याग करके स्वरूप लाभ प्राप्त करने के लिए व्यक्ति जब कामनाओं का त्याग करता है और सन्यास को ग्रहण करता है तो वह निवृत्तीय मार्ग कहलाता है। निवृत्ति मार्गीय परम्परा ने भारतीय संस्कृति के मूल को सींचा भी है और पुष्पित पल्लवित किया है। इन्ही निवृत्तीय मार्गीय सन्यासियों द्वारा चातुर्मास्य अनुष्ठान किया जाता है, यद्यपि प्रवृत्तीय मार्गीय गृहस्त भी चातुर्मास्य व्रत करते हैं किंतु सर्वदा परिव्रजन करने वाला सन्यासी जब इस व्रत को करते हैं तो इसका वैशिष्ट्य ही अलग है। आज भी चातुर्मास्य काल मे गृहस्तों द्वारा सन्यासियों की सेवा सम्पूर्ण फल को देने वाली होती है । इसमें पक्षो वै मास: के अनुसार पक्ष की मास संज्ञा होती है , अतः चार पखवाड़े का नाम ही चातुर्मास्य होता है।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- सत्संग में शंकराचार्य महाराज जी का वंदन कुचिपुड़ी नृत्य से किया गया।।

द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज के 68 वें चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान में 1 सितंबर 2018 दिन शनिवार को आंध्र प्रदेश के श्री ललिता ऐश्वर्याम्बिका नृत्यालयम के कलाकारों ने महाराजश्री के सम्मान में उनके चरणों मे कुचिपुड़ी नृत्य के माध्यम से वंदन, अभिनंदन अर्पित किया। सत्संग की शुरुवात स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती महाराज ने अपने वक्तव्य से प्रारंभ किया तथा क्रमशः ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द जी महाराज, व्यास जी, साध्वी नील मणी शास्त्री ने अपने प्रवचनों के माध्यम व कीर्तन से प्रभु श्रीराम के विवाह अनुष्ठान पर कथा सुनाते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को अमृत प्रवचनों का रस पान कराया। इसके पश्चात आंध्र प्रदेश के पूर्व गोदावरी जिले से पधारे श्री ललीता ऐश्वर्याम्बिका नृत्यालयम के कलाकारों ने मनमोहक कुचिपुड़ी नृत्य प्रस्तुत किया। प्रत्येक नृत्य के पहले स्वामिश्री: ने अल्प शब्दों में नृत्यों के बारे में उपस्थित सभी को बताया तथा उस नृत्य के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला। सर्व प्रथम नरसिंघा शर्मा द्वारा अपने नृत्य से भगवान गणेश का आह्वान किया जो बहुत ही मनमोहक था तथा इसके पश्चात नृत्यांगना श्रीवत्सला, हेमाद्रि बद्रीनाथ व नरसिंघा शर्मा द्वारा कुचिपुड़ी नृत्य से ब्रह्मांजली, जातीश्वरा, कृष्णशब्दह्म, कोलुवईथीवा रंगा साई, ब्रह्मोत्सवा, रामायाणा शब्दह्म, सरस्वती स्तुति, तरंगम (कस्तूरी तिलका), थिल्लाना व गणेश क्रुति के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया। प्रत्येक कलाकार कुचिपुड़ी नृत्य में इतने पारंगत थे कि उनके नृत्य के प्रत्येक स्टेप देखते ही बनती थी। नृत्य पश्चात सभी कलाकारों ने महाराजश्री का पादुका पूजन व आरती कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- धर्म और अधर्म का निर्णय वेदों से होता है :- स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज ने भक्तों से कहा कि धर्म और अधर्म का निर्णय वेदों से होता है। धर्म के मार्ग का उल्लंघन करने से संसार अव्यवस्थित हो जाता है। जो विधि / कानून है उसका उल्लंघन करने से अव्यवस्थित हो जाता है। आगे पूज्य महाराजश्री ने कहा संसार मे जो कानून मनुष्य द्वारा बनाये गए हैं वह परलोक में नहीं चलता है। वहां झुठी गवाही नहीं चलती है। जैसा कर्म आप किये होंगे उसका निश्चय शास्त्र के अनुसार होगा। इस अवसर पर दंडी स्वामी द्वय स्वामी सदानन्द सरस्वती एवं स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती, दंडी स्वामी अमृतानन्द जी सरस्वती, ब्रह्चारी ब्रह्मविद्यानन्द, ब्रह्मचारी कैवल्यानंन्द, ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द, ब्रह्मचारी धरानन्द , ब्रह्मचारी सुप्रियानन्द, कथा वाचक साध्वी लक्ष्मी व नील मणी शास्त्री, किशोर दवे महाराज, व्यास जी व अन्य सन्त, महात्मा एवं भक्तगण उपस्थित होकर पूज्य महाराजश्री के मुख से प्रवचन का रस पान किये। महाराजश्री ने आगे कहा आज कल लोग मनमाना धर्म बना लेते हैं। धर्म के साथ साथ मंत्र और भगवान भी बना लेते है। कुछ ऐसे हैं जो राम नाम के पहले विशेषण लगा दिए हैं जैसे साईं राम । राम नाम ही सब कुछ है, इसके पहले किसलिए और क्यों विशेषण लगाना। हम हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं परंतु कुछ लोगों ने साईं चालीसा प्रकाशित कर उसका पाठ कर रहे हैं। क्या यही धर्म है ? ऐसा कृत्य लोगों को ठगने, छलने के लिए करते हैं साथ ही इसी का प्रचार भी कर रहे हैं जो सनातन धर्म के विपरीत हैं और वे सब धर्म का गलत वर्णन कर रहे हैं , मनमाना आचरण भी कर रहे हैं। हमारे वेद सही सही ज्ञान देते हैं तभी संसार बचा हुआ है।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  प्राणी यदि भगवान को प्राप्त करना चाहता है तो सदा सत्य बोलना चाहिए : शंकराचार्य

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती से मिलने देश के कोने कोने से उनके भक्त, शिष्य वृंदावन स्थित श्रीउड़िया बाबा आश्रम पहुंच रहे हैं। ज्ञात हो कि पूज्य शंकराचार्य महाराज जी का 68 वां चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान वृंदावन में चल रहा है। पूज्य महाराजश्री ने भक्तों से कहा कि प्राणी यदि भगवान को प्राप्त करना चाहता है तो उसे सदा सर्वदा सत्य बोलना होगा। आपको सत्य होना पड़ेगा। आगे उन्होंने कहा कि ये जो संसार आपको सत्यमय दिखाई पड़ रहा है यह आपके सत्यता के कारण ही दिखाई पड़ रहा है। इसलिए आप स्वयं सत्य हैं। कोमल वाणी और सत्य ही हमारे नेत्र हैं। आगे महाराजश्री ने कहा कि धर्म का मार्ग उल्लंघन करने से संसार अव्यवस्थित हो जाता है। संसार का कानून मनुष्य के द्वारा बनाया गया है  जो परलोक में काम नहीं आएगा। वहां आप जीव के रूप में जाओगे और जो कर्म आप किये हो उसका निश्चय शास्त्र अनुसार ही होगा।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- जगत के हित के लिए भगवान का अवतार होता है : स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने अपने प्रवचन में भक्तों से कहा कि - भगवान का अवतार विश्व के कल्याण के लिए होता है, समूचे जगत के हितों के लिए होता है। आगे महाराजश्री ने कहा कि भगवान के संकल्प तथा सोचने मात्र से ही पृथ्वी की उत्पत्ति हो जाती है। भगवान देवकी के गर्भ में आये। देवतागण उनसे प्रार्थना करते हुए कहे कि आपका जो संकल्प है वह सत्य है। जैसे कुम्हार मिट्टी को लेकर घड़ा बनाता है वैसे भगवान को संसार की उत्पत्ति के लिए किसी साधन की आवश्यकता नहीं होती है, संकल्प ही काफी होता है। भगवान सोए सोए योग निद्रा से ही पंच महाभूत (आकाश, जल, अग्नि, पृथ्वी और वायु) को उत्पन्न कर दिए। इतना करके वे फिर सो गए। पूज्य महाराजश्री ने कहा - " भगवान का सो जाना ही पृथ्वी का प्रलय है " ।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- शंकराचार्य आश्रम हुआ जलमग्न, भगवान शिव पानी मे डुबे।

रायपुर के बोरियाकला में स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम एवं भगवती राजराजेश्वरी मंदिर प्रांगण समूचा जल मग्न हो गया है साथ ही शंकराचार्य आश्रम परिसर में स्थित भगवान भोलेनाथ के मंदिर में भी पानी घुस गया है जिससे भोलेनाथ पानी मे डुब गए हैं। साथ ही यज्ञ शाला, गुरु मंडप आदि में भी पानी घुस गया है। मानो ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आश्रम परिसर में नदी बह रही हो। लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण यह स्थिति निर्मित हुई जिससे आश्रम में रहने वाले संत, महात्माओं एवं विद्यार्थियों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही आश्रम परिसर में स्थित कमरों में भी पानी घुस गया है जिससे सामानों को बहुत क्षति पहुंची है। नगर निगम रायपुर के अधिकारियों को चाहिए कि वे बोरियाकला में स्थित शंकराचार्य आश्रम में जमे हुए पानी के निकासी की तुरन्त व्यवस्था करे जिससे वहां के देवताओं को पानी से बचाया जा सके साथ ही उन विद्यार्थियों के सामानों को भी बचाया जाए। निगम के अधिकारी आश्रम के संतों को सहयोग करें साथ ही विद्यार्थीगण जो शंकराचार्य आश्रम में रहकर वेद वेदांग की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं उन्हें उचित स्थान प्रदान करे। 

बंधन

बंधन शब्द बहुत प्यार शब्द है जब भी हम ये शब्द सुनते है तो दिमाग में बहुत से रिश्ते सामने आजाते है।बंधन में बहुत से वादे होते है।बहुत सारा प्यार होता है बहुत नाजुक रिश्ता होता है बंधन का। कोई भी व्यक्ति जन्म से ही इस बंधन शब्द से जुड़ता चला जाता है जब वो पैदा होता है तो हमारे माता पिता से एक बंधन जुड़ जाता है।जब बड़े होते है तो भी बहन से बंधन जुड़ता है जब स्कूल जाते है तो दोस्तों से बंधन होता है बड़े होने पर शादी हुई तो पत्नी के साथ बंधन में बंध जातें है।फिर बच्चे होने पर उसके जिमेदारी का बंधन ।इन सब बंधन में तीन बंधन होते है जो बहुत महत्व पूर्ण होते है।पहला भाई-बहन का बंधन जब बहन भाई को राखी बांधती है तो वो बंधन में बहुत से वादे होते है जिन वादों को निभाने का वचन भी देता है। वैसा ही पति-पत्नी का बंधन होता है जिसमे एक पति शादी के वक्त अपनी पत्नी को सात वचन देता है उसी प्रकार एक पिता भी अपनी बेटी को कई वादा करता है। हर बंधन में एक वादा जरूर होता है सुरक्षा का और अपनों को खुशी देने का ,हर परिस्थिति में उनकी जरूरत को पूरा करने का।बस विश्वास पर टिका होता है बंधन का संसार।मनुष्य के जीवन में जन्म से मरने तक ये बंधन का चक्र चलता ही रहता है । जो भी हो ये रिश्तों के बंधन से हमें बहुत सारा प्यार,सम्मान और इज्जत मिलती है और इन्ही रिश्तों के बंधन के इर्द गिर्द हमारी दुनिया बस्ती है । वर्षा गलपाण्डे

जन्मदिन विशेष :: स्वामिश्री: द्वारा रचित कविता ।।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य प्रतिनिधि व क्रांतिकारी सन्त दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा अपने गुरु भाई तथा महाराजश्री के शिष्य प्रतिनिधि व द्वारका पीठ के मंत्री दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर खुद के द्वारा रचित कविता से उन्हें बधाई प्रेषित किये।  विद्याधर से तात मात श्री मानकुंवर सी। एक एक से भ्रात भगिनियां भांति भ्रमर सी  गुरु पायो जगत्रात इष्ट ललिता नवचण्डी । सदानन्द छितरात जात जहं आज ये दण्डी । श्रीगुरुवर के काज आज यह करत निरन्तर । छवि ललाम लखि राखि सदा हृदय के अन्तर । जात जहाँ पठवात भिलाई या भीवण्डी । गनत न दिन अरु रात न गर्मी अथवा ठण्डी ।। सहत सदा बिधि बाण जो अपने अपर चलावत । सबही की सुधि लेत न हिंसा उर में लावत । अर्थी जन के हेतु हरी फहरावें झण्डी । हर चाहत मिलि जात यहाँ  यह ऐसी मण्डी । कहता है अविमुक्त न करता फल की आशा। जो निकली है आज वो है हिरदै की भाषा । सत्य सनातनधर्म बढे घट जायं पाखण्डी । करेंगे ऐसा काज  सदानन्द स्वामी दण्डी । साठ वर्ष हो गये आज जिनमें से चालीस । श्रीगुरुवर के पास करी सेवा है खालिस । चालीस सेवा और निरन्तर करें अमन्दी । श्रीगुरुवर शिव रहें सदानन्द होवें नन्दी । अविमुक्तेश्वरानन्दः

जन्मदिवस विशेष ::- पूज्यपाद महाराज श्री के दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं स्वामी जी ।।

।।स्वामी  सदानंद सरस्वती जी महाराज के वर्धापन पर विशेष।। रविकांत तिवारी की कलम से ::- धूमा(सिवनी)हमारी भारतीय परंपरा में कहा गया कि आज भी पृथ्वी में कहीं न कहीं कोई न कोई ईश्वरीय अवतार किसी भी रूप में अवतरित होता है जैसे सनातन धर्म की रक्षार्थ भगवान शिव ने आद्य शंकराचार्य जी के रूप में अवतार लेकर पृथ्वी पर सनातन धर्म की रक्षा की । उसी परंपरा का निर्वहन करने म. प्र. के सिवनी जिले में पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवम द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज का अवतार हुआ । ठीक उसी परंपरा में अपनी उपस्थिति प्रस्तुत करने एवम पूज्यपाद महाराज श्री द्वारा बताये गए दिशा निर्देशों एवम मार्गदर्शन में कार्य करने हेतु नरसिंहपुर जिले के ग्राम बरगी (करकबेल) में भाद्रपद कृष्णपक्ष द्वितीया सं. २०१४ तदनुसार ३१ अगस्त सन १९५७ ई. को माता सौ. मानकुंवर देवी एवम आयुर्वेद रत्न पं. विद्याधर अवस्थी जी के यहाँ एक बालक का जन्म हुआ माता पिता ने नामकरण किया रमेश कुमार अवस्थी । बालक रमेश की प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही तथा नरसिंहपुर में सम्पन्न हुई, वहीँ संस्कृत की शिक्षा का आरम्भ ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय झोतेश्वर तथा पूज्यपाद महाराज श्री के सान्निध्य में, एवम वाराणसी में संस्कृत विद्या एवम व्याकरण -वेदान्तादि शास्त्रों का अध्ययन किया । आपकी ब्रम्हचर्य दीक्षा प्रयाग महाकुम्भ सन १९७७ ई. के अवसर पर सम्पन्न हुई !नामकरण किया गया ब्रम्हचारी सदानंद आपके दीक्षा गुरु पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवम द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज हुए । वैयक्तिक आध्यात्मिक साधना एवम चिंतन के अतिरिक्त ज्योतिष्पीठ एवम द्वारकाशारदापीठ द्वारा संचालित जनकल्याण की अनेक प्रवृत्तियों में समर्पण भाव से निरंतर सेवा सदानंद जी में स्वाभाविक प्रवृत्ति मानी गयी । आपकी पूज्यपाद महाराज श्री के चरणो में अपार श्रद्धा ही इस बात का प्रतीक है की पूज्यपाद श्री चरणो की कृपा रज से बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में वैशाख शुक्लपक्ष पूर्णिमा संवत २०६० तदनुसार १५ अप्रैल २००३ को दण्ड संन्यास की दीक्षा से आपको अलंकृत किया गया और नामकरण किया गया स्वामी सदानंद सरस्वती ! पूज्य सदानंद जी ने अपने इस स्वाभाविक गुण के ही प्रभाव एवम पूज्यपाद महाराज श्री के दिशानिर्देशानुसार एवम पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुंदरी की कृपा से पूज्य महाराज श्री के कार्यों को पूर्ण करते आ रहे हैं उदाहरणार्थ परमहंसी गंगा आश्रम का सौंदर्यीकरण,सुचारू एवम व्यवस्थित सञ्चालन,गौशाला का निर्माण संचालन, माता गिरिजा देवी एवम पिता श्री धनपति उपाध्याय समिति का गठन कर निशक्त एवम असहाय निर्धन बालकों की शिक्षा के लिए अंग्रेजी एवम हिंदी माध्यम के विद्यालय का निर्माण एवम सुचारू सञ्चालन जिसमे दूर दराज के  बालकों/बालिकाओं के लिए बस सञ्चालन की व्यवस्था की गयी ! पूज्यपाद महाराज श्री के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रदेश का एकमात्र निःशुल्क नेत्र चिकित्सालय का शुभारम्भ पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के मुख्य आतिथ्य में कराकर जिले ही नहीं अपितु समस्त प्रदेश के हर वर्ग को लाभान्वित कर पूज्यपाद महाराज श्री के चरणो के प्रति अपनी अपार अगाध श्रद्धा प्रस्तुत की है !!  स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज अपने नाम के अनुसार ही अत्यंत सरल एवम सहज हैं । आप पराम्बा भगवती की साधना एवम पूज्यपाद महाराज श्री के चरणों की सेवा में निरंतर लगे हुए हैं स्वामी जी के साहित्य कृतित्व में भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी नित्याराधना स्त्रोत्राणि,जीवन सन्देश गुजराती में आद्य शंकराचार्य जी जीवन परिचय, दिव्य द्वारका भव्य शारदापीठ,सौंदर्य लहरी,मणिद्वीप सन्देश,क्या हिंदुत्व खतरे में है, श्रीविद्या समाराधना, भागवत प्रवचन(संकलन),गीता प्रवचन(संकलन), भज गोविन्द (व्याख्या), परमार्थ पथ(संकलन), मठाम्नाय महानुशासनम् (गुजराती व्याख्या),गुरुदीक्षा क्रम, शंकराचार्य स्त्रोत्रावली,प्रस्थानत्रयी(हिंदी अनुवाद), गुजराती मासिक पत्रिका नवभारती के स्वत्वाधिकारी,शारदापीठ विद्यासभा की शोध पत्रिका शारदापीठ का प्रकाशन, द्वारकाशारदापीठ आर्ट्स कॉमर्स एवम एजुकेशन कॉलेज की वार्षिक पत्रिका नवभारती का प्रकाशन निरंतर करा रहे हैं । आज स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज का 60 वा जन्मोत्सव है हम स्वामी से प्रेरणा लेकर उन्हें अपना आदर्श मानकर उनकी वंदना करें । संकलन - रविकांत तिवारी धूमा सिवनी 

खबरीलाल रिपोर्ट ::- शंकराचार्य आश्रम में श्रावणी उपक्रम मनाया गया।

रायपुर के बोरियाकला स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम व भगवती राजराजेश्वरी मंदिर में श्रावणी उपक्रम के साथ साथ संस्कृत दिवस भी मनाया गया। आश्रम प्रमुख ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द जी महाराज ने बताया कि शुक्ल यजुर्वेद के अध्येता, पाठक, अध्यापक व आदि ब्राह्मणों ने मिलकर श्रावणी मनाया जिसमे हेमाद्रि संकल्प कर के दस प्रकार के विधि से स्नान किया जाता है। इस स्नान को प्रायश्चित स्नान भी कहा जाता है। आगे ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द जी महाराज ने बताया कि वर्ष भर में जो ज्ञात, अज्ञात रूप से पाप हो जाता है उसका प्रायश्चित किया जाता है। इसके साथ ही पितरों का तर्पण भी किया जाता है तथा यह ब्राह्मणों का प्रमुख उपक्रम है। इस उपलक्ष्य पर आचार्य धर्मेंद महाराज, भूपेंद्र पांडेय, श्रीकृष्ण तिवारी, डीपी तिवारी, एमएल पांडेय, रत्नेश शुक्ला, विद्यार्थीगण व आदि ब्राह्मण समुदाय के लोग उपस्थित थे।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- हिन्दू कोई जीवन पद्धति नहीं है अपितु हिन्दू एक धर्म है ::- स्वामिश्री: ।।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य प्रतिनिधि क्रांतिकारी सन्यासी दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने अपने चिरपरिचित अंदाज में ऐसा निशाना साधा की समूचा सभागृह जय कारे से गूंज उठा। स्वामिश्री: ने कहा समाज का निर्माण जैसे चेहरा करता है ठीक उसी प्रकार ब्राह्मण भी समाज का निर्माण करता है। उन्होंने कहा सदा से यह प्रयास चलता रहा कि सनातन धर्म को नष्ट कर दिया जाए। वर्णाश्रम ही सनातन धर्म है। सनातन धर्म के रक्षा का कार्य ब्राह्मणों का है।  स्वामिश्री: ने कहा कि हमारे देश के संवेदनशील पीएम विश्व का ऐसा कोई देश शायद बचा हो जहां वे नहीं गए होंगे। कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि शायद पीएमओ के अधिकारी मैप लेकर ढूंढ रहे होंगे कि कौन सा देश और बचा है जहां हमारे पीएम नहीं गए होंगे। स्वामिश्री: ने पीएम को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे जिस भी देश मे गए हैं वहां वे कहते हैं कि हम बुद्ध और गांधी के देश से आये हैं। उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि हम माँ गंगा, माँ यमुना के देश से आये है , उन्होंने कभी नहीं कहा कि हम भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के देश से आये हैं। जब कि उन्होंने भारत मे अपने संसदीय क्षेत्र में कहा कि मुझे माँ गंगा ने बुलाया है। आज घोर अनीति हो रही है। स्वामिश्री: ने कहा कि आप अगर धर्म निरपेक्ष हो तो धर्म स्थानों को क्यों अधिकृत कर रहे हो और अधिकृत करने के लिए क्या केवल हिन्दू धर्म है ? इतना शनते ही समूचा सभा गृह हर हर महादेव के नारे से गूंज उठा और उपस्थित सभी ने करतल ध्वनि से उनके बात का जोरदार समर्थन किया।  स्वामिश्री: ने आगे कहा कि हमारे देश मे एक ऐसी संस्था है जो स्वयं सेवकों की भर्ती करती है। अब इन पूर्ण कालिक स्वयं सेवकों को काम मिले इस हेतु वे हमारे तीर्थ स्थानों, मंन्दिरों को अधिग्रहण कर रहे हैं, देव मंन्दिरों को तोड़ रहे हैं। वे उन देव मंन्दिरों को भी नहीं छोड़ रहे हैं जिनका वर्णन पुराणों में है। आगे उन्होंने कहा काशी में 8 मंदिर तोड़े जा चुके हैं और जब से हमने मंदिर बचाओ आन्दोलनम शुरू किए हैं उसके बाद 9 वां मंदिर वे तोड़े नहीं हैं लेकिन यह भी स्पष्ट नहीं किये है कि आगे तोड़ेंगे या नहीं तोड़ेंगे। देश मे नदियों की हत्या हो रही है, साबरमती नदी जैसे मॉडल बनाने की चेष्टा हो रही है फिर भी हम चुप हैं। स्वामिश्री: ने मंच से सभी के उद्देश्य से कहा - आपने लिए भले मत लड़ो लेकिन अपने सनातन धर्म, तीर्थ स्थानों और मंन्दिरों के लिए लड़ो। स्वामिश्री: ने बहुत बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पर्यटन और तीर्थस्थान एक है ? यदि सभी का अधिग्रहण कर गाइड पद्धति ला दोगे तो तीर्थ पुरोहित क्या करेंगे ? कहाँ से वे अपने और अपने परिवार का पेट पालेंगे ?  जो तीर्थ करने आते हैं वे कर्मकांड के लिए ब्राह्मण ढूंढते है और उन ब्राह्मणों के मुख से मंत्र और श्लोक सुनकर वे तृप्त होते हैं और मन को संतुष्ट कर तीर्थ कर घर लौटते हैं । क्या यह कार्य कोई गाइड कर सकता है ? कभी नहीं कर सकता है। हम प्रत्येक को संगठित होकर रहने की आवश्यकता है नहीं तो एक समय आएगा जब ब्राह्मणों के लिए कुछ नहीं बचेगा।