ज्योतिष

न्याय के देवता शनिदेव को करें संतुष्ट, फिर देखें करिश्मा किस्मत का

भगवान शनिदेव कलियुग में भी निष्पक्ष न्याय में विश्वास करने वाले माने जाते हैं और संतुष्ट होने पर अच्छी किस्मत और भाग्य के साथ अपने भक्त की हर मनोकामना पूरी करके मनवांछित फल प्रदान करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य देव के पुत्र शनि देव की माता का नाम छाया है। सूर्य देव का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ था। विवाह के पश्चात कुछ समय तक दोनों साथ रहे, जिससे उन्हें तीन संतान की प्राप्ति हुई। भगवान सूर्य देव की तीन संतान मनु, यम तथा यमुना हैं लेकिन सूर्य देव के तेज को संज्ञा ज्यादा दिन सहन न कर सकी। जिस कारण एक दिन संज्ञा अपनी छाया को पति सूर्य देव की सेवा में छोड़कर सूर्यलोक से चली गई। उत्तरार्द्ध में छाया के गर्भ से भगवान शनिदेव का जन्म हुआ।

शनि के कष्ट निवारक उपाय आजमाएं, फिर देखें करिश्मा किस्मत का
नित्य-प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ पर काले तिल व कच्चा दूध चढ़ाना चाहिए।
यदि पीपल वृक्ष के नीचे शिवलिंग हो तो अति उत्तम होता है।
सुंदरकांड का पाठ सर्वश्रेष्ठ फल प्रदान करता है।
संध्या के समय जातक अपने घर में गूगल की धूप दे।
चींटियों को गोरज मुहूर्त में तिल चोली डालना।
सांप को दूध पिलाना।
अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति के लिए मां भगवती काली की आराधना करें।
काल भैरव की साधना, मंत्र जप आदि करें।
भिखारियों को काले उड़द का दान दें।

बुजुर्ग महिला को घसीटते हुए घर से ले गई योगी आद‍ित्‍यनाथ की पुलिस, बेअसर रही मासूम की मनुहार और पर‍िवार की गुहार

उत्तर प्रदेश में बेशक सरकार बदल गई हो लेकिन यूपी पुलिस की कार्यशैली पर अभी भी सवाब खड़े होते हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार में कई ऐसे मामले सामने आए थे जहां पर पुलिस द्वारा लोगों से बदसलूकी की जाती थी। सरकार बदल गई लेकिन पुलिस नहीं बदली। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में भी पुलिसकर्मियों द्वारा लोगों के साथ गंदा बर्ताव करने के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला अमरोहा का है जहां पर पुलिसवालों ने 70 वर्षीय महिला को उसके घर से घसीट कर बाहर निकाला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो को अब तक एक मिलियन लोग देख चुके हैं और 20 हजार से ज्यादा लोग शेयर कर चुके हैं।
इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कैसे कुछ महिला और पुरुष पुलिसकर्मी एक घर में घुसते हैं और बुजुर्ग महिला को घर से बाहर लाने के लिए जमीन पर घसीटते हैं। महिला के परिजन पुलिसवालों से उसे छोड़ने की विन्नती करते हैं लेकिन वे परिजनों की एक नहीं सुनते और महिला का घसीटते रहते है। एक छोटा सा बच्चा भी इस वीडियो में दिखाई दे रहा है जो कि रोते हुए महिला पुलिसकर्मी से उसकी दादी को छोड़ने के लिए कहता है कि तभी एक पुलिसवाला उसे गोद में उठा लेता है। इस बीच बुजुर्ग महिला भी खुद को पुलिसवालों से छुटाने की जी-तोड़ कोशिश करती है लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाती। इसके बाद दो महिला पुलिसकर्मी बुजुर्ग महिला को घसीटकर बाहर ले आती हैं और उसे जीप में बैठाकर अपने साथ ले जाते हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बुजुर्ग महिला का परिवार जिस घर में रह रहा था, उसपर उन्होंने गैर कानूनी कब्जा कर रखा था। 15 साल पहले सुधीर सिंघल नाम के व्यक्ति ने इस मकान को शौकीन अली नाम के आदमी को बेच दिया था। बुजुर्ग महिला का परिवार इस घर में किराए पर रहता था लेकिन वह इसे खाली नहीं कर रहा था। इसके बाद शौकीन अली ने इसकी शिकायत कोर्ट में की और कोर्ट ने पुलिस को इस मकान को खाली कराने का आदेश दिया। वहीं इस वीडियों के सामने आने के बाद पुलिस ने अपनी सफाई में कहा कि हमने केवल कोर्ट के आदेश का पालन किया।

आज का पंचांग: 10 मई 2017, बुधवार वैशाख शुक्ल तिथि पूर्णिमा

10 मई 2017, बुधवार वैशाख शुक्ल तिथि पूर्णिमा (10-11 मध्य रात 3.13 तक)
विक्रमी सम्वत् : 2074, वैशाख प्रविष्ट: 28, राष्ट्रीय शक सम्वत: 1939, दिनांक: 20 (वैशाख), हिजरी साल: 1438, महीना: शब्बान, तारीख: 13, सूर्योदय: 5.40 बजे, सूर्यास्त: 7.09 बजे (जालंधर समय), नक्षत्र: स्वाति (बाद दोपहर 2.34 तक), योग: व्यतिपात (सायं 4.10 तक), चंद्रमा तुला राशि पर, भद्रा रहेगी (दोपहर 2.10 तक)।
पर्व, दिवस तथा त्यौहार: वैशाख पूर्णिमा, श्री सत्य नारायण व्रत, श्री बुद्ध जयंती, श्री बुद्ध पूर्णिमा, श्री छिन्न मस्तिका जयंती, श्री कूर्म जयंती, वैशाख स्नान समाप्त।  दिशा शूल: उत्तर एवं वायव्य दिशा के लिए, राहू काल:  दोपहर 12.00 से 01.30 बजे तक। सूर्योदय समय ग्रहों की स्थिति :-
सूर्य मेष में
चंद्रमा तुला में
मंगल वृष में
बुध मेष में
गुरु कन्या में
शुक्र मीन में
शनि धनु में
राहू सिंह में
केतु कुम्भ में

 

17 साल बाद अमृत सिद्घि योग बना रहे हैं अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।[3] नवीन वस्त्र, आभूषण आदि धारण करने और नई संस्था, समाज आदि की स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान अथवा किसी और प्रकार का दान, अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गंगा स्नान करने से तथा भगवत पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यहाँ तक कि इस दिन किया गया जप, तप, हवन, स्वाध्याय और दान भी अक्षय हो जाता है। यह तिथि यदि सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए दान, जप-तप का फल बहुत अधिक बढ़ जाता हैं। इसके अतिरिक्त यदि यह तृतीया मध्याह्न से पहले शुरू होकर प्रदोष काल तक रहे तो बहुत ही श्रेष्ठ मानी जाती है। यह भी माना जाता है कि आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा किए गए जाने-अनजाने अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करे तो भगवान उसके अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उसे सदगुण प्रदान करते हैं, अतः आज के दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में सदा के लिए अर्पित कर उनसे सदगुणों का वरदान माँगने की परंपरा भी है। 

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्घि और गजकेसरी दोनों योग मिलकर 17 साल बाद अमृत सिद्घि योग बना रहे हैं। इसी के चलते शहर के पंडित ने इस पर्व को मनाने के लिए 28 अप्रैल की तिथि को उचित माना क्योंकि इस वर्ष शुभ मुहूर्त के चलते अक्षय तृतीया 28 और 29 को दो दिन मनाने को लेकर लोगों में संशय की स्थिति देखी जा रही है। इस दिन सभी कार्य करना शुभ तथा फलदायक होगा वहीं 15 संस्कारों का मुहूर्त रहेगा। इस तिथि को विवाह करने वाले लोगों का दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।

पंडित किशोर तिवारी  के  अनुसार इस वर्ष साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त हैं जिसमें प्रमुख स्थान अक्षय तृृतीया का ही है। अक्षय तृतीया के दिन जो शुभ कार्य होंगे उनका क्षय नहीं होता। इस तिथि को प्रमुख रूप से शादी, सोने की खरीदारी, नया सामान, गृह प्रवेश, वाहन खरीदारी, व्यापार प्रारंभ और भूमिपूजन आदि कार्य किए जा सकते हैं जो फलदाय सिद्घ होंगे।

इस वर्ष अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में श्रद्घालु आज 28 और 29 दोनों दिन पर्व मनाने की सोच रहे हैं। पंडित पुनेश्वर तिवारी ने बताया कि पंचाग के अनुसार 28 अप्रैल को सुबह 10ः28 बजे से अक्षय तृतीया तिथि की शुरूआत हो रही है जो अगले दिन 29 अप्रैल को सुबह 6ः45 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाएगा चूंकि तृतीया पर्व पर भगवान विष्णु व देवी लक्ष्मी की पूजा दोपहर को की जाती है इसलिए आज 28 अप्रैल का मुहूर्त ठीक रहेगा। इस पर्व को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि वे इस तिथि को गुड्डे-गुड़ियों की धूमधाम से शादी रचाते हैं जिसकी तैयारी वे पहले से कर चुके हैं। इसके साथ ही शहर में अक्षय तृतीया पर सोने व चांदी के आभूषणों की जमकर खरीदारी भी होगी। शादियों के लिए मुहूर्त होने से सराफा कारोबारी उत्साहित नजर आ रहे हैं। शादियों के सीजन के चलते और अक्षय तृतीया पर बाजारों में ग्राहकी में तेजी आ गई है।

17 साल बाद बना पुनः सर्वार्थ सिद्घि व गजकेसरी योग

पंडित की माने तो इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्घि व गजकेसरी योग भी बन रहा है। इसके साथ ही अमृत सिद्घि योग भी है। जो श्रद्घालुओं के लिए विशेष फलदायी सिद्घ होगा। ऐसा दुलर्भ योग पिछली बार सन 2000 में बना था। जो इस वर्ष 2017 में 17 साल बाद फिर बन रहा है। इसके बाद ऐसा योग 2037 में बनेगा। इस मुहूर्त पर बड़ी संख्या में विवाह होते हैं।

मेष: 21 मार्च से 20 अप्रैल : किसी के प्रति सहानुभूति रखें लेकिन समय पर। अपनी योजना को कार्यान्वित करने का मौका मिलने की संभावना है। प्रेमी के साथ खास समय व्यतीत कर सकते हैं। पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। शुभ अंक-8, शुभ रंग-गहरा फिरोजा।

वृष: 21 अपै्रल से 20 मई : शैक्षणिक मोर्चे पर जी-तोड़ मेहनत कर सकते हैं। कार्यस्थल पर पुरानी समस्या को हल करने का नया तरीका अपनाएंगे। किसी खास समारोह में बुलाए जा सकते हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। शुभ अंक-11, शुभ रंग- पीच।

मिथुन: 21 मई से 21 जून : पेशवर मोर्चे पर अपनी छवि बदलने का प्रयास करेंगे। शैक्षणिक मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। सामाजिक जीवन का आनंद लेंगे। अपने प्रदर्शन से आलोचकों को करारा जवाब देंगे। शुभ अंक- 3, शुभ रंग- बैंगनी।

कर्क: 22 जून से 23 जुलाई : काम में मददगार हाथ मिलने से भार कम होगा। निवेश में पैसा लगाना फायदेमंद साबित हो सकता है। स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहेंगे। दिल के मोर्चे पर भाग्यशाली साबित होंगे। शैक्षणिक मोर्चे पर सबकुछ अच्छा रहेगा। शुभ अंक-4, शुभ रंग-आसमानी।

सिंह: 24 जुलाई से 22 अगस्त : कार्य संबंधी बातों को सबके सामने जाहिर करने से बचें। किसी प्रतियोगिता में बैठने का विचार कर सकते हैं। प्यार के मामले में अपनी सीमा का ख्याल रखें। जरूरमंद की मदद करेंगे। शैक्षणिक मोर्चे पर सबकुछ बढिय़ा रहेगा। शुभ अंक-2, शुभ रंग- लेमन।

कन्या: 23 अगस्त से 22 सितंबर : दिल की आवाज सुनने की कोशिश करें। वित्तीय मोर्चे पर खर्च को लेकर सतर्क रहें। शैक्षणिक मोर्चे पर नेटवर्किंग का फायदा मिलेगा। पेशेवर मोर्चे पर काम को लेकर अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता जाहिर करें। शुभ अंक- 6, शुभ रंग- क्रीम।

तुला: 23 सितंबर से 23 अक्तूबर : फिजूलकार्य में व्यस्त रह कर शैक्षणिक मोर्चे पर नुकसान उठा सकते हैं। जगह परिवर्तन से ताजगी और ऊर्जा का अनुभव करेंगे। पुराने मित्रों से मिलने के कारण अतीत की यादों में खो जाने की संभावना है। शुभ अंक-5, शुभ रंग-गहरा हरा।

वृश्चिक: 24 अक्तूबर से 21 नवंबर : अतिरिक्त नौकरी और जिम्मेदारी आपको थका सकती है। शैक्षणिक मोर्चे पर भेड़ चालना सही नहीं है। निजी मामले में खुद को मजबूर महसूस कर सकते हैं। ड्राइविंग को लेकर सावधान रहें। शुभ अंक- 1, शुभ रंग- हल्का लाल।

धनु: 22 नवंबर से 21 दिसंबर : किसी के द्वारा दिया गया प्रस्ताव आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर हौसला कायम रखेंगे। दो मालिकों के बीच पिस सकते हैं। बिगड़ चुके रिश्ते को लेकर पार्टनर से बात करना बेहतर होगा। शुभ अंक-15, शुभ रंग-हरा।

मकर: 21 दिसंबर से 19 जनवरी : अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का मौका मिल सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर स्वयं का मूल्यांकन करना फायदेमंद होगा। फिटनेस को लेकर आपका जुनून बरकरार रहेगा। पेशेवर मोर्चे पर महत्वपूर्ण कार्य को टाल सकते हैं। शुभ अंक-22, शुभ रंग-परपल।

कुम्भ: 20 जनवरी से 18 फरवरी : निजी जिंदगी को प्रभावित करने के लिए गहनता से छानबीन करेंगे। शैक्षणिक मोर्चे पर अधूरा ज्ञान आपके लिए घातक साबित हो सकता है। जीवनशैली में परेशान करनी वाली समस्या को दूर सकते हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। शुभ अंक-9, शुभ रंग-लाल।

मीन: 19 फरवरी से 20 मार्च : किसी मुद्दे के संदर्भ में कोई आपको भड़का सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर सबकुछ अच्छा चलता रहेगा। फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की जरूरत है। पेशेवर मोर्चे पर खुद को साबित करने का प्रयास करना पड़ सकता है। शुभ अंक-7, शुभ रंग-क्रीम।
 

हनुमान जयंती आज, सैकड़ों साल बाद बन रहे हैं ये विशेष योग, जानिए क्या हैं मान्यताएं

आज हनुमान जयंती है. बजरंग बली धीर-वीर परम रामभक्त हनुमान जी के भक्तों के लिए भगवान हनुमान का जन्मदिन यानी उनकी जयंती विशेष महत्त्व रखती है. पंडितों और ज्योतिषियों की मानें तो इस साल की हनुमान जयंती विशेष महत्त्वपूर्ण है. बताया जा रहा है कि 120 सालों के बाद बाद इस साल की हनुमान जयंती पर बड़े ही खास संयोग बन रहे हैं. इसलिए इस दिन हनुमानजी की पूजा-अर्चना से भक्तों पर ख़ास अनुकम्पा होगी.
 
ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल हनुमान जयंती पर कुछ वैसा ही योग बन रहा है, जैसा कि शास्त्रों में हनुमानजी के जन्म के समय बताए गए हैं. इस दिन मंगलवार, पूर्ण‍िमा तिथि, चित्रा नक्षत्र रहेगा. पोथियों और शास्त्रों में अंजनीपुत्र हनुमान के जन्म के समय भी यही योग बताए गए हैं.
 
साथ ही इस दिन एक विशेष योग गजकेसरी भी बन रह है और दिन का योग अमृत रहेगा, जो शुभदायी माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार, जिन व्यक्तियों पर कर्माधीश शनि महाराज की साढ़ेसाती या उनकी ढैया चल रही होगी तो यह दिन उनके लिए बहुत शुभ रहेगा. इस दिन हनुमानजी की पूजा व आराधना से ये दोष मलिन होने लगेंगे.
 
उल्लेखनीय है कि मारुतिनंदन हनुमानजी देवाधिदेव भगवान शिव के 11वें अवतार माने जाते हैं. वे वानरराज केसरी और देवी अंजना के यहां इस धरती पर अवतरित हुए. उनकी रामभक्ति और राम कार्य को सेवा की पराकाष्ठा माना जाता है

रामनवमी पर बना ले दोस्‍तों के दिल में खास जगह

 रामनवमी पर चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को हर साल नये विक्रम संवत्सर का प्रारंभ होता है और उसके आठ दिन बाद ही चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को एक पर्व राम जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे रामनवमी के नाम से जानते हैं. इस पर्व को पूरे देश में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. रामनवमी, भगवान राम की यादों को समर्पित है. राम को ‘मर्यादा पुरुषोतम’ कहा जाता है. राम को भगवान विष्णु का अवतार भी कहा गया है. यही कारण है कि इस दिन लोग अपने दोस्‍तों को इस पर्व की शुभकामना देना नहीं भूलते. सुबह से ही हमारे वॉट्सएप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के माध्‍यम इन एसएमएस से भर जाते हैं. 
आज प्रभु राम ने लिया अवतार,
जैसे संत सौम्‍य है रामजी,
वैसे ही आपका जीवन भी मंगलमय हो.
राम नवमी मुबारक हो.
 
राम नवमी के अवसर पर,
आप और आपके परिवार पर,
राम जी का आशीर्वाद, हमेशा बना रहे,
हमारी तरफ से आपको रामनवमी की शुभकामनाएं.
 
मन में जिनके श्री राम हैं,
उसके ही बैकुंठ-धाम हैं,
उनपर जिसने जीवन वार दिया,
उसका सदा होता कल्याण है,
आपको रामनवमी की बधाई.

नवरात्र के आठवें दिन मां के आठवें स्‍वरूप महागौरी की पूजा की जाती है. शंख और चन्द्र के समान अत्यंत श्वेत वर्ण धारी महागौरी मां दुर्गा का आठवां स्वरुप हैं. यह भगवान शिवजी की अर्धांगिनी हैं. कठोर तपस्या के बाद देवी ने शिवजी को अपने पति के रुप में प्राप्त किया था.

महागौरी की अराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है. नवरात्रि के नौ दिनों तक कुंवारी कन्याओं को भोजन करवाने का विधान है लेकिन अष्टमी के दिन का विशेष महत्व है. इस दिन मां को चुनरी भेट करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

मां दुर्गा का आठवां रुप महागौरी व्यक्ति के भीतर पल रहे कुत्सित और मलिन विचारों को समाप्त कर प्रज्ञा और ज्ञान की ज्योति जलाता है. मां का ध्यान करने से व्यक्ति को आत्मिक ज्ञान की अनुभूति होती है उसके भीतर श्रद्धा विश्वास व निष्ठ की भावना बढ़ाता है. मां दुर्गा की अष्टम शक्ति है महागौरी जिसकी आराधना से उसके भक्तों को जीवन के सही राह का ज्ञान होता है जिस पर चलकर वह अपने जीवन का सार्थक बना सकता है.

भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इन्होंने कठोर पूजा की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था. देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने इन्हें स्वीकार किया और गंगा जल की धार जैसे ही देवी पर पड़ी देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो गईं और उन्हें मां गौरी नाम मिला.

माना जाता है कि माता सीता ने श्रीराम की प्राप्ति के लिए महागौरी की पूजा की थी और इनकी पूजा करने से शादी-विवाह के कार्यों में आ रही बाधा खत्‍म हो जाती है. कहा जाता है कि विवाह संबंधी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक होती है.

मां महागौरी का मंत्र
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा।।

एक दिन है अष्‍टमी और नवमी तिथि
चैत्र नवरात्र की अष्‍टमी और नवमी तिथि एक दिन यानि 4 अप्रैल को है. सुबह 10:10 बजे अष्‍टमी तिथि के खत्‍म होने के बाद नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी. दोनों तिथियां एक साथ होने से मां के आठवें और नौवें स्‍वरूप की पूजा भी एक साथ ही किया जाना चाहिए. इसके साथ ही भगवना श्रीराम की जन्‍मतिथि भी इसी दिन है, तो इसके साथ राम नवमी भी मनाई जाएगी.

नवरात्र के सातवें दिन की जाती है मां कालरात्रि की पूजा, जानें किस मंत्र से करें मां का खुश

नवरात्र के सातवें दिन महाशक्ति मां दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से काल का नाश होता है. इसी वजह से मां के इस रूप को कालरात्रि कहा जाता है. असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था. इनकी पूजा शुभ फलदायी होने के कारण इन्हें 'शुभंकारी' भी कहते हैं.

इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित रहता है. इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं. इसी कारण इनका एक नाम शुभंकारी भी है.

मां कालरात्रि का मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

मां कालरात्रि का रूप
देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है इनके बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में विधुत की माला है. इनके चार हाथ है जिसमें इन्होंने एक हाथ में कटार तथा एक हाथ में लोहे कांटा धारण किया हुआ है. इसके अलावा इनके दो हाथ वरमुद्रा और अभय मुद्रा में है. इनके तीन नेत्र है और इनके श्वास से अग्नि निकलती है. कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) है.

चैत्र नवरात्र: जानें कलश स्थापना की संपूर्ण विधि, मंत्र और महूर्त

 

28 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्र में कलश स्थापना या घटस्थापना का बड़ा महत्व है। कोई भी पूजा तभी सफल होती है जब पूजा विधि-विधान से हो। इसके लिए पूजा विधि का ज्ञान होना आवश्यक है। इस कलश स्थापना विधि से आप पंडित के बिना भी स्वयं ही पूजा कर सकते हैं।

​कलश स्थापना के लिए पूजन सामग्री 
मिट्टी का पात्र (जौ बोने के लिए), जौ बोने के लिए शुद्ध मिट्टी, बोने के लिए जौ, दो कलश (1 शांति कलश और दूसरा पूजा कलश), कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, मौली, इत्र, साबुत सुपारी, दूर्वा, कलश में डालने के लिए सिक्के, पंचरत्न, सप्तधान्य (सात प्रकार का अनाज), सप्तमृत्तिका, सर्वऔषधी, पंचपल्लव, अशोक या आम के 5 पत्ते, कलश ढकने के लिए मिट्टी का दीया, ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल, धूप, दीप, नैवेद्य (मिठाई), फल, लाल रंग का अक्षत (चावल), दूध, दही, घी, शहद, फूल, अगरबत्ती, देवी के लिए वस्त्र पानी वाला नारियल और नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपड़ा।
 
कलश स्थापना विधि
सुबह स्नान करके पूजन सामग्री के साथ पूजा स्थल पर पूर्वाभिमुख (पूर्व दिशा की ओर मुंह करके) आसन लगाकर बैठें। उसके बाद नीचे दी गई विधि अनुसार पूजा प्रारंभ करें-
घट स्थापना मुहूर्त- सुबह 08:26 से 10:23
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- सुबह 08:26, 28 मार्च 2017
प्रतिपदा तिथि समाप्त- सुबह- 05:44, 29 मार्च 2017
 
1. नीचे लिखे मंत्र का उच्चारण कर पूजन सामग्री और अपने शरीर पर जल छिड़कें
    ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपी वा
     य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाहान्तर: शुचि:
2. हाथ में अक्षत, फूल, और जल लेकर पूजा का संकल्प करें।

3. माता शैलपुत्री की मूर्ती के सामने दोनों कलश मिट्टी के ऊपर रखकर हाथ में अक्षत, फूल, और गंगाजल लेकर वरूण देव का आवाहन करें। बाएं भाग वाला कलश शांति कलश होगा। इसी कलश में सर्वऔषधी, पंचरत्न डालें। दोनों कलश के नीचे रखी मिट्टी में सप्तधान्य और सप्तमृतिका मिलाएं। आम के पत्ते को दूसरे कलश में डालें। इसी कलश के ऊपर एक पात्र में अनाज भरकर उसके ऊपर एक दीया जलाएं। शांति कलश में पंचपल्लव डालकर उसके ऊपर पानी वाला नारियल रखकर लाल वस्त्र से लपेट दें। दोनों कलश के बीच में जौ बो दें।

4. अब नीचे लिखे मंत्र से देवी का ध्यान करें।
  खडगं चक्र गदेषु चाप परिघांछूलं भुशुण्डीं शिर:।
  शंखं सन्दधतीं करैस्त्रि नयनां सर्वांग भूषावृताम।।
  नीलाश्म द्युतिमास्य पाद दशकां सेवे महाकालिकाम।
  यामस्तीत स्वपिते हरो कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम॥

4. इसके बाद बारी-बारी से पूजन सामग्री, अक्षत धूप, दीप नैवेध और वस्त्र के साथ विधिवत पूजा करें।
5. अंत में आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।