विशेष

खबरीलाल रिपोर्ट ::- स्थित श्रीविद्यामठ जहाँ साधिकाएॅ करती हैं नवरात्रि अनुष्ठान ।।

यह अद्वैत सिद्धान्त के प्रतिपादकाचार्य भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य जी की परम्परा का वह महान् स्थल है जहाँ प्रति प्रकट नवरात्रि में श्रीविद्या साधिकाएं अनुष्ठान कर भगवती राजराजेश्वरी देवी की कृपा प्राप्त करती हैं । प्रतिदिन पूर्वाह्न 9 से 11 बजे तक आद्य शंकराचार्य जी द्वारा रचित सौन्दर्य लहरी स्तोत्र के प्रथम श्लोक का 108 बार जप एवं सम्पूर्ण सौन्दर्य लहरी का सामूहिक रूप से सस्वर पारायण पूज्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज के दिशानिर्देश में हो रहा है । यह उन बुद्धिजीवियों के लिए उत्तर है जो सनातन धर्मोद्धारक हमारे आदि आचार्य पर स्त्रियों से भेद-भाव करने और उन्हें धार्मिक क्रियाकलापों में पीछे रखे जाने का झूठा आक्षेप कर उन्हें मातृशक्ति के विरोधी के रूप में प्रचारित करते हैं । सनातन धर्म में शास्त्र-मर्यादानुसार सभी के लिए सम्मानजनक स्थान सुरक्षित है । तभी तो हमें सनातनी होने पर गर्व है ।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- स्थित श्रीविद्यामठ जहाँ साधिकाएॅ करती हैं नवरात्रि अनुष्ठान ।।

यह अद्वैत सिद्धान्त के प्रतिपादकाचार्य भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य जी की परम्परा का वह महान् स्थल है जहाँ प्रति प्रकट नवरात्रि में श्रीविद्या साधिकाएं अनुष्ठान कर भगवती राजराजेश्वरी देवी की कृपा प्राप्त करती हैं । प्रतिदिन पूर्वाह्न 9 से 11 बजे तक आद्य शंकराचार्य जी द्वारा रचित सौन्दर्य लहरी स्तोत्र के प्रथम श्लोक का 108 बार जप एवं सम्पूर्ण सौन्दर्य लहरी का सामूहिक रूप से सस्वर पारायण पूज्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज के दिशानिर्देश में हो रहा है । यह उन बुद्धिजीवियों के लिए उत्तर है जो सनातन धर्मोद्धारक हमारे आदि आचार्य पर स्त्रियों से भेद-भाव करने और उन्हें धार्मिक क्रियाकलापों में पीछे रखे जाने का झूठा आक्षेप कर उन्हें मातृशक्ति के विरोधी के रूप में प्रचारित करते हैं । सनातन धर्म में शास्त्र-मर्यादानुसार सभी के लिए सम्मानजनक स्थान सुरक्षित है । तभी तो हमें सनातनी होने पर गर्व है ।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- शंकराचार्य घाट पर भव्य धर्मोत्सव का आयोजन किया गया।।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज को ज्योतिष पीठ एवं द्वारका शारदा पीठ का संयुक्त शंकराचार्य घोषित करने पर हर्षित सनातन धर्मियों द्वारा आज केदारघाट के समीप शंकराचार्य घाट पर धर्मोत्सव का आयोजन किया । शंकराचार्य घाट पर पूज्यपाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने गंगा जी का षोडशोपचार पूर्वक पूजन किया तत्पश्चात मां गंगा की १०८ दीए से आरती की । उसके बाद ५१ शंखों के द्वारा शंखनाद कर सनातन धर्म के उत्थान की मंगल कामना की और आतिशबाजी कर हर्षोल्लास किया । कार्यक्रम स्थल पर धर्म सभा का आयोजन जिसको सम्बोधित करते हुए पूज्यपाद स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि बहुत दिनों बाद सनातन धर्मियों को एक सुखद समाचार प्राप्त हुआ है जो आने वाले दिनों में सनातन धर्म को पुष्ट करेगा सम्पूर्ण विश्व सनातन वैदिक हिन्दू परम्पराओं और ज्ञान को अपना रहा है हमको भी अपने परम्पराओं से जुड़ना चाहिए तभी हमारा सर्वांगीण विकास होगा । कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित थे सर्वश्री राजेन्द्र तिवारी जी, श्रीमहन्त महाराजमणि शरण सनातन जी महाराज, ज्योतिशंकर जी, रमेश उपाध्याय, संजय पांडेय प्रदेश समन्वय गंगा सेवा अभियान, अनुराग द्विवेदी, प्रभात वर्मा, सुनील शुक्ल, हरिनाथ दुबे, सुनील उपाध्याय, यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी, सत्येंद्र मिश्र, आलोक भारद्वाज, पद्माकर पांडेय, शरद शुक्ल, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, किसन जायसवाल, सतीश अग्रहरि जी आदि सैकड़ों उपस्थित थे ।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- ममता चंद्राकर ने शंकराचार्य से लिया आशीर्वाद।

छत्तीसगढ़ की मशहूर कलाकार एवं पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त डॉ ममता प्रेम चंद्राकर ने ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के 68 वें चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान में "चिन्हारी" लोक गीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित भक्तों को भावविभोर कर दिया। छत्तीसगढ़ी फिल्मों के मशहूर निर्माता व निर्देशक प्रेम चंद्राकर द्वारा कृत "चिन्हारी" में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जातियों के लोक गीतों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया जिसमें गणेश वंदना, नाचा, मल्हारी व आदि प्रस्तुतियां ममता चंद्राकर एवं उनके साथियों द्वारा मंचन किया गया। नाचा छत्तीसगढ़ का बहुत प्रसिद्द नृत्य शैली है जिसमे पुरुष महिला बनकर नृत्य करते हैं तथा अन्य जातियों द्वारा नाव रात्रि, दीपावली में जिस तरह का लोक गीत व नृत्य करते हैं उसका प्रस्तुतिकरण उनके द्वारा किया गया। ममता चंद्राकर का कहना है कि हम देश के अलग अलग जगह पर जाकर छत्तीसगढ़ के संस्कृति से लोगों को "चिन्हारी" के मध्यम से अवगत करवाते हैं जिससे दूसरे प्रदेश के लोग हमारे छत्तीसगढ़ की संस्कृति , भाषा, शैली आदि को जान सके। इस कार्यक्रम के आयोजन में शंकराचार्य आश्रम रायपुर के नरसिंह चंद्राकर का विशेष योग दान रहा और इस विशेष कार्यक्रम में देश के अलग अलग प्रान्तों से आये सन्यासी, साधु, सन्त, महात्मा एवं वृंदावन वासी विशेष रूप से उपस्थित थे।

खबरीलाल रिपोर्ट :: पढ़िए शंकराचार्य महाराज ने स्वामी हरिदास जयंती पर क्या कहा ।।

मनुष्य यदि दूसरे में अपने ईष्ट देवता को देखे और उनके सुख में सुखी हो जाए तो आज जो भीषम परिस्थिति है वह सदा के लिए समाप्त हो जाएगा ::- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती । 17 सितंबर को राधाष्टमी के विशेष दिन पर वृंदावन में स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया जिसमे प्रमुख रूप से धर्म सम्राट अनंत श्री विभूषित ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज, उत्तराखंड की महामहिम राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य, उत्तरप्रदेश के डिप्टी सीएम केशव मौर्य व आदि सन्त , महात्मा, विधायक, नेतागण एवं कला प्रेमी उपस्थित थे। सर्व प्रथम शंकराचार्य जी महाराज एवं महामहिम राज्यपाल व डिप्टी सीएम के हाथों से दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरुवात की गई। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने अपने आशीर्वाचन में कहा कि आज वृंदावन का विशिष्ठ दिन है। आज राधा रानी का प्राकट्य उत्सव है साथ ही संगीत सम्राट हरिदास जी का जन्मोत्सव भी है। वृंदावन एक दिव्य क्षेत्र है जहां से बड़े बड़े संगीतकार उभरे हैं। आगे महाराजश्री ने कहा कि राधा और कृष्ण में कोई अंतर नहीं है, वस्तुतः एक ही ने दोनों रूप धारण किये हुए हैं। भगवान जब अवतरित होते हैं तो उनके श्रीरूपेण को देखकर प्रत्येक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। इतना अद्भुत सौंदर्य है जिसे शब्दों में पिरोया नहीं जा सकता। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने आप को दो रूप में विभक्त कर लिया। श्रीकृष्ण ने राधा और श्रीकृष्ण ने कृष्ण बन गए। राधा रानी श्रीकृष्ण के नेत्रों से अपने आप को देखती थी। दोनों एक दूसरे के दर्शन में, मिलन के सुख में दोनों जो दंपति बने हैं इतने मग्न हो जाते हैं कि एक दूसरे की चिंता भी भूल जाते हैं। शंकराचार्य महाराज ने अंत मे कहा की इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य यदि मनुष्य में अपने ईष्ट देवता को देखे और उनके सुख में सुखी हो जाए तो आज जो भीषम परिस्थिति है वह सदा के लिए समाप्त हो जाएगा। महामहिम राज्यपाल उत्तराखंड श्रीमती बेबी रानी मौर्य, यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने अपने उद्बोधन में उपस्थित सभी वृंदावन वासियों को राधाष्टमी पर्व और स्वामी हरिदास जी की जयंती की बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित किये तथा पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त किये। तत्पश्चात विद्यार्थियों द्वारा नृत्य प्रेषित किया गया और प्रत्येक संगीत एवं नृत्य ने समूचे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  जो भगवान के अनन्य भक्त हैं वे भगवान के स्वरूप ही माने जाते हैं :: स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने वृंदावन धाम स्थित मलूक पीठ के पीठाधीश स्वामी राजेन्द्र दास जी महाराज के जन्मोत्सव में कहा - जो भगवान के अनन्य भक्त हैं वे भी भगवान के स्वरूप ही माने जाते हैं। महाराजश्री ने आगे कहा कि भगवान समस्त विश्व मे है और विश्व उनका स्वरूप है। भगवान श्रीराम ने अपने अनन्य भक्तों को संबोधित कर बताया कि मैं सेवक हूँ और सारा विश्व मेरे सामने भगवान राम हैं। इस तरह का भाव जिसका है वे भागवत कहलाते हैं और उन भागवतों में ऐसे अनेक महापुरुष हुए हैं जिन्होंने आज सनातन धर्म को बचा कर रखा है। पूज्य महाराजश्री ने बताया कि मलूक दास जी मुग़ल शासक के समय रहे, वो बड़ा संकट का समय था और उसमे भी औरंगज़ेब का जो शासन था वो तो हिंदुओं के लिए बड़ा दमनकारी था। उस समय जो भी महापुरुष थे उन्होंने सनातन धर्म को बचा कर रखा। अगर कोई व्यक्ति छुपकर पाप करता है और सोचता है उसे कोई नहीं देख रहा है तो वो गलत है। उसे भगवान देख रहा है। उसका आत्मा देख रहा है और वही आत्मा परमात्मा है। यही शिक्षा यदि लोगों तक पहुंच जाए तो अपराध खत्म हो जाएंगे। हम लोग कहा करते हैं कि दो आंख को तो धोखा दे सकते हो पर परमात्मा के हजारों आंखों को कैसे धोखा दोगे ? आप सभी धर्म रक्षा के कार्य मे सहयोग करें और अपने मठों से निकलकर लोगों के बीच पहुंचे और उन्हें जागृत करें। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के मलूक पीठ पर पहुंचते ही भव्य स्वागत किया गया तथा पुष्प वर्षा करते हुए उन्हें मंच तक ले आये और मलूक पीठ के पीठाधीश्वर राजेन्द्र दास जी महाराज ने उनका सम्मान किया एवं पादुका पूजन किये। इस अवसर पर पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि तथा द्वारका पीठ के मंत्री दंडी स्वामी सदानन्द सरस्वती, निज सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द महाराज, दंडी स्वामी सदाशिवेंद्र सरस्वती, ब्रह्मचारी ब्रह्म विद्यानन्द महाराज, ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द महाराज, ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द महाराज, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज व आदि सन्त, महात्मा एवं भक्तगण विशेष रूप से उपस्थित हुए।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  वृंदावन में प्रवेश करते ही प्राणी सच्चिदानन्द स्वरूप हो जाते हैं ::- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती।।

मौका था ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के 95 तम जन्मदिवस उत्सव के पावन अवसर पर वृंदावन के संत , महात्माओं द्वारा उनका पादुका पूजन एवं सम्मान साथ ही संत सम्मेलन। 10 सितम्बर 2018 वृंदावन स्थित फोगला आश्रम में सायं 5 बजे कार्यक्रम आयोजित था जिसमे वृंदावन के संत, महात्मा, महामंडलेश्वर आदि बहु संख्या में उपस्थित हुए और प्रत्येक संतों ने पूज्य महाराजश्री के पादुका का पूजन पश्चात पुष्पमाला पहनकर उनका श्रीधाम वृंदावन में नन्दन, वंदन, अभिनंदन किया साथ ही अपने मन के अंदर के भावों को प्रकट किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित हुए। सर्वप्रथम महाराजश्री के निज सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी महाराज ने पूज्य महाराजश्री के जीवन पर प्रकाश डाला तत्पश्चात पूज्य महाराजश्री के शिष्य प्रतिनिधि नारायण स्वरूप दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज ने अपनी बात रखी कि किस तरह आज हमारे समाज के बच्चे संस्कार से दूर होते जा रहे हैं और टीवी पर सूर्योदय देखते हैं जिस पर उन्होंने एक सच्ची वाकया भी सुनाया। स्वामिश्री: के कथन के पश्चात मंचासीन संत, महात्मा, महामंडलेश्वर आदि ने अपने मन के भाव महाराजश्री के सम्मान में, उनके कार्यों पर, उनके संकल्पों पर, उनके धर्म के प्रति अडिग रहने पर प्रकट किये। पूज्य महाराजश्री ने अपने उद्बोधन में कहा - विद्वानों ने कहा है कि वृंदावन सच्चिदानन्द स्वरूप है। जो यहां आते हैं, प्रवेश करते ही सभी प्राणी सच्चिदानन्द स्वरूप हो जाते हैं। आज जो हम यहां सब बैठे हैं प्रत्येक सच्चिदानन्द स्वरूप हैं। जो वृंदावन धाम में निवास करते हैं उनकी बात ही कुछ अलग है। आगे महाराजश्री ने कहा हम लोग यह मानते हैं कि आराध्य मनुष्य नहीं होता है। मनुष्य होने से वह आदरणीय हो सकता है, पूज्यनीय हो सकता है पर आराध्य नहीं हो सकता है। आराध्य तो सिर्फ एक है और वह है परब्रह्म परमात्मा। अंत मे महाराजश्री ने कहा कि यहां के संत, महात्मा भागवत चिंतन कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त कर रहे हैं और यही आध्यात्मिक आनंद का मार्गदर्शन वृंदावन के माध्यम से सारे विश्व को दिया जाए।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  आशा से क्रोध उत्पन्न होता है : स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने 9 सितम्बर 2018 को कहा - आशा से ही क्रोध की उत्पत्ति होती है। यदि आपको किसी वस्तु या व्यवहार की आशा नहीं होगी तो आपको क्रोध कभी नहीं आएगा और न ही आप निराश होंगे। इसलिए महात्माओं के हृदय में क्रोध कभी नही आता है क्यों कि वे किसी चीज की आशा ही नहीं करते है। उक्त बातें महाराजश्री ने वृंदावन में चल रहे अपने 68 तम चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान में उपस्थित भक्तों से कहा। इस अवसर पर उनके शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती मंच पर उपस्थित थे और सत्संग सभा की अध्यक्षयता कर रहे थे।  महाराजश्री ने आगे कहा कि महात्माओं को किसी भी वस्तु की न तो कामना होती है और न ही चाहत होती है की उसके न मिलने से उनका जीवन न चले और निराशा से क्रोध की उत्पत्ति हो। महाराजश्री ने यह भी कहा कि - महात्माओं को भी कभी कभी क्रोध आ जाता है। क्रोध यदि महापुरुषों के मन मे आ भी गया तो वह "क्रोधाभास" है। आपने सुना होगा , पढ़ा भी होगा कि बड़े बड़े महात्माओं ने जिन जिन को श्राप दिया है अंत मे उन्ही का कल्याण ही हुआ है। पानी मे जैसे लकीर ठहरता नहीं है ठीक उसी तरह महात्माओं के मन मे क्रोध ठहरता नहीं है, आई और मिट गई। यदि थोड़ा भी क्रोध किसी पर रह गया हो तो समझ लो उस जीव का कल्याण ही होगा। इसलिए महात्माओं का क्रोध भी अच्छा ही होता है।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- स्वामिश्री: ने किया वृंदावन धाम की परिक्रमा।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि व क्रांतिकारी सन्त दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली श्रीधाम वृंदावन की परिक्रमा किये। उनके इस परिक्रमा में उनके द्वारा संचालित गुरुकुल के विद्यार्थियों ने भी बड़े भक्ति के साथ परिक्रमा पूरी किये। वर्षा हो रही थी और परिक्रमा बिना कहीं रुके किया जा रहा था मानो इंद्र देवता भी इस खुशी के पल को देखते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाए जिस हेतु उन्होंने पुष्प वर्षा रूपी पानी की वर्षा कर उनका नन्दन, वंदन और अभिनन्दन किया। ज्ञात हो कि स्वामिश्री महाराज का चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान वृंदावन में चल रहा है जहां वे अध्यन के साथ साथ उनसे मिलने आने वाले भक्तों को भगवान के लीला संबंधी कथा का रस पान भी करा रहे हैं।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  जब श्रीकृष्ण ने समूचे विश्व को अपने मुंह मे दिखाया ।।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के 68 वें चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान में वृंदावन की पावन धरा पर स्थित श्री शंकराचार्य निवास में संत, महात्माओं के साथ साथ भक्तों का तांता लगा हुआ है। प्रतिदिन रुद्राभिषेक के साथ साथ वेदांत अध्यन एवं सायं कालीन सत्संग आयोजित होती है जिसकी अध्यक्षता शंकराचार्य महाराजश्री के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज करते हैं । सुबह 9 बजे से चंद्रमौलेश्वर भगवान का रूद्राभिषेक दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज स्वयं करते हैं तथा पुष्पांजलि व आरती पश्चात उपस्थित भक्तों को स्वामिश्री: स्वयं चरणामृत एवं प्रसाद वितरित करते हैं। सायंकालीन सत्संग में अन्य सम्मानित वक्ताओं , कथाकारों के कथा सम्पन्न होने के पश्चात अंत मे महाराजश्री अपने अमृत प्रवचनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को रस पान कराते हैं। आज महाराजश्री ने नन्हे कान्हा के बाल लीलाओं पर प्रकाश डाले। उन्होंने कहा जब भगवान कृष्ण ने मिट्टी खाई तो उनके सखाओं ने यशोदा माता को शिकायत लगाई और इसे सुनते ही यशोदा माता अपनी छड़ी लेकर कृष्ण के पास पहुंची और पूछा - क्या तूने सही में मिट्टी खाई ? इस पर कृष्ण ने कहा नहीं मैया हमने कोई मिट्टी नहीं खाई। तो फिर तेरे सखा क्यों बोल रहे हैं कि तू ने मिट्टी खाई। कृष्ण ने जवाब दिया हो सकता है वे मुझसे द्वेष रखते हों इसलिए झूटी शिकायत किये हों। पर तेरे भैया ने भी कहा कि तूने मिट्टी खाई है। नही  मैया सब झूट बोल रहे हैं। जब यशोदा मैया ने कृष्ण के दोनों हाथ पकड़कर छड़ी उठाई तो कृष्ण ने सोचा कि यशोदा मैया से पार पाना मुश्किल है, तब ऐश्वर्य शक्ति ने भगवान श्रीकृष्ण के मुँह के अंदर समूचे विश्व को दिखा दिया। ऐसी ऐसी लीलाएं करते थे हमारे नन्हे कान्हा।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- सच्चा मित्र वही है जो मित्र के हित की बात सोचता है :: शंकराचार्य ।।

द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने प्रवचन में उपस्थित भक्तों से कहा कि मित्र भी देखकर बनाना चाहिए और बहुत सोच समझकर बनाना चाहिए। खासकर महिलाओं को भी मित्र बनाने से पहले सोच विचार कर , उन्हें समझकर ही मित्रता करना चाहिए। शंकाराचार्य जी महाराज ने कहा की वही मित्र , सच्चा मित्र होता है जो मित्र के हितों की बात सोचता है। आप जो कार्य कर रहे हैं उसमें जो परिवर्तन लाता है वही आपका मित्र है। 

।। खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ।। जिन्हें हम हार समझे थे, गला अपना सजाने को। वही अब सांप बन बैठे, हमे ही काट खाने को ।।

जिन्हें हम हार समझे थे, गला अपना सजाने को। वही अब सांप बन बैठे, हमे ही काट खाने को ।। उपर्युक्त पंक्तियां आज के परिदृश्य में एक दम सही बैठती हैं। आज जिस दिशा में देश जा रहा है उसे देखते हुए प्रत्येक नागरिक शायद उपर्युक्त पंक्तियों को समझे और खुद को कोसे की जिन्हें हमने अपने लिए , अपने धर्म की रक्षा के लिए, अपने मन्दिर-मठों की रक्षा के लिए, रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने के लिए, मूल्य वृद्धि रोकने के लिए भावुक होकर चुना था वह भाजपा पार्टी सभी क्षेत्रों में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। अभी तक न तो काला धन विदेशों से वापस आया और न ही 15 लाख प्रत्येक के खाते में आये अपितु कुछ नामचीन उद्योगपति अरबों-खरबों की चपत देकर देश छोड़ चले गए और अब शायद ही सरकार की पकड़ में आये। आज स्थिति ऐसी हो गई है कि जो रुपया एक समय डॉलर के बराबर था आज वही रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे निम्नतम स्तर तक पहुंच गया है यानी एक डॉलर बराबर 70-71 रुपया। इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि देश की अर्थ व्यवस्था की स्थिति किस तरह चरमरा रही है। देश मे पढ़े लिखे इंजीनियर, प्रबंधन के विद्यार्थी व अन्य बेरोजगार घूम रहे हैं। जीएसटी ने लाखों लोगों के रोजगार को निगल लिया साथ मे  दो वर्ष गुजर गए अभी तक नोट बन्दी के फायदे सरकार गिना नहीं पाई।  दिनों दिन पेट्रोल और डीजल का रेट बढ़ते ही जा रहा है जो सीधे असर बाजार पर हो रहा है और इसमें पिस रहे हैं माध्यमवर्गी लोग। जो सरकार हिंदुत्त्व को मुद्दा बनाकर राज सिंहासन पर बैठी वही हिंदुओं के साथ छल कर बैठी। काशी में मंदिर तोड़े गए तथा देश के अन्य राज्य में भी मन्दिर तोड़े गए नाम दिया गया "विकास"। विकास के लिए हिंदुओं के पूजा स्थल, एकता का स्थल, पौराणिक मंदिर आदि को विकास नाम की चिड़िया चुग गई और राज सिंहासन पर बैठी हिंदुत्त्ववादी सरकार इस गंभीर विषय पर मौन साधी हुई है और तुष्टिकरण में व्यस्त है। जिस देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एसटी-एससी एक्ट पर फैसला दे दिया उसे सरकार ने केवल तुष्टिकरण और वोट की राजनीति हेतु अध्यादेश लाकर बदल दिया जिससे आज सम्पूर्ण सवर्ण वर्ग नाराज हैं और देश के सभी कोने से आवाज उठा रहे हैं। इससे सरकार क्या साबित करना चाह रही है कि हम न्यायालय से भी बड़े हैं। क्या संदेश अन्य देशों में गया इसका भी चिंतन शायद ही सरकार में बैठे लोगों ने किया। जब आपने एक वर्ग को संतुष्ट करने के लिए एक्ट को अध्यादेश लाकर बदल दिए तो राम मंदिर के मुद्दे के लिये क्यों एवं किसलिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार हो रहा है? जब पूर्ण बहुमत से देश की जनता ने हिंदुत्त्ववादी सरकार को राजसिंहासन सौंपा तो राममंदिर मुद्दे को भी अध्यादेश लाकर रामजन्मभूमि में ही मंदिर बनवा दे ताकि करोड़ों सनातन धर्मी आप को आशीर्वाद दे। लेकिन यह होगा नहीं क्योंकि सरकार को मालूम है कि हिन्दू संगठित नहीं है और इनमें ही डिवाइड एंड रूल पद्धति से राज करना संभव है। जिस साईं के बारे में धर्म सम्राट ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने बयान दिया था और हिंदुओं को उनकी पूजा करने से रोकने की कोशिश की थी कि वे मुस्लिम हैं तो कैसे भाजपा और संघ के नेता साईं मन्दिर में माथा टेक रहे हैं ? क्या इतना भी इल्म हिंदुत्त्ववादी सरकार को नही है की हमे हिन्दू देवी देवताओं की ही आराधना करनी चाहिए ? क्या हिंदुत्त्ववादी सरकार अब सेक्युलर हो गई है या यह भी उनकी वोट के लिए चुनावी रणनीति है। देश के प्रधान सेवक विश्व के अधिकतर देश घूम आये पर आज तक उन्हें अयोध्या जाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ। कम से कम देख कर आते कि किस तरह हम सबके आराध्य रामलला तिरपाल के नीचे दिन व्यतीत कर रहे हैं। माँ गंगा ने बुलाया है पर चार वर्ष से ऊपर हो गए माँ गंगा जैसे थी वैसे ही है, कोई परिवर्तन नहीं हुआ और न ही वाराणसी क्वेटो बना।  क्या देश के जनता के साथ धोखा नहीं हुआ ? क्या देश की जनता ने नेताओं को पहचानने में गलती नहीं की ? देश पूछ रहा है - धारा 370 कब हटेगी ? कब मन्दिर-मठों को संरक्षित किया जाएगा ? कब रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा ? कब राम मंदिर का निर्माण होगा ? कब कालेधन को वापस लाया जाएगा ? कब 15 लाख प्रत्येक के खाते में जमा होंगे ? कब तुष्टिकरण की राजनीति बन्द होगी ? कब तक देश को जातीवाद में बांटते रहोगे ? कब महंगाई कम होगी ? कब निजी स्कूल और महाविद्यालयों पर नकेल कसे जाएंगे ? कब सनातन धर्म की सही तरीके से रक्षा होगी ? कब तक महिलाओं के ऊपर जुल्म होता रहेगा ? कब तक छोटी बच्चियों पर कुकृत्य बन्द होगा ? ऐसे बहुत से और सवाल हैं जिसका सदुत्तर सिंहासन पर बैठी हिंदुत्त्ववादी सरकार को देना होगा।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज ने किया विशेष पूजन।।

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्रीधाम वृंदावन में स्थित श्री शंकराचार्य निवास, उड़िया बाबा आश्रम में धर्म सम्राट अनंत श्री विभूषित ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजन एवं आरती किये। तत्पश्चात महाराजश्री ने पुष्पहार पहनाए और पुष्पांजलि अर्पित किए। भगवान श्रीकृष्ण जन्म के ठीक पहले दंडी स्वामी अमृतानन्द सरस्वती महाराज ने पाठ किया और ठीक रात 12 बजे कान्हा के जन्म पश्चात साध्वीद्वय लक्ष्मी मणी एवं नील मणी शास्त्री ने " नन्द के आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की ..." , " ब्रज में हो रही जय जय कार नन्द घर लाला आयो री.." सुमधुर भजन गाकर समूचे वातावरण को और आनंदित व भक्तिमय बना दिया। इस विशेष पूजन के अवसर पर दंडी स्वामी गोविंदानन्द सरस्वती, ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द महाराज, ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द, ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द महाराज, ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द महाराज, डॉ शर्मा, अरविंद मिश्रा, कुलदीप व आदि भक्तजन उपस्थित होकर कान्हा के जन्मोत्सव को बड़े धूम धाम से मनाया। इसके पश्चात प्रत्येक उपस्थितजनों ने चरणामृत व प्रसाद ग्रहण कर अपने व्रत तोड़े तथा पूज्य महाराजश्री के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किये।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- स्वामिश्री: ने जन्माष्टमी में किया अभिषेक एवं पूजन।।

द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज ने जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर वृंदावन स्थित जयपुर मंदिर में विराजमान राधा कृष्ण मंदिर में विशेष पूजा, अभिषेक एवं महाआरती सम्पन्न किये। इस अवसर पर राजस्थान तथा वृंदावन से सैकड़ों भक्त उपस्थित हुए और पूज्य स्वामिश्री: द्वारा मध्यरात्रि को किये गए  विशेष अभिषेक, पूजन एवं महाआरती के गवाही बने और श्रीकृष्ण के जन्म उपरांत भजन व कीर्तन गाकर समूचे वातावरण को कृष्णमय बना दिये। पूजन शुरू होने से पहले कृष्ण जन्म पर केंद्रित नाटक का सुंदर मंचन कलाकारों द्वारा किया गया तथा उपस्थित महिलाओं ने नृत्य कर बड़े हर्षोल्लास के साथ कान्हा के जन्मोत्सव मनाया।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-भगवान बहुत ही दयालु होते हैं :- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज अपने अमृत प्रवचन का रस पान कराते हुए उपस्थित भक्तगणों से कहा कि - भगवान बहुत ही दयालु होते हैं। राक्षसी पूतना एक ऐसी राक्षस थी जो पवित्र नहीं थी और वह अन्य को भी अपवित्र कर देती थी। उस पूतना ने जब भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन का दूध पिलाकर मारना चाही तब भगवान ने अपनी लीला से उसकी इहलीला समाप्त कर दिए। जब वासुदेव जी की बात मानकर नन्दजी गोकुल पहुंचे तो उन्होंने देखा एक भयानक राक्षसी पड़ी हुई है और उसके स्तन पर नन्हा कृष्ण खेल रहे हैं। लोगों ने उस राक्षसी के पैर, हाथ अलग अलग कुल्हाड़ी सड़ काटकर लकड़ी से जला दिए लेकिन उसके धुंए में कोई अशुद्ध गंध नहीं था। महाराजश्री आगे कहते हैं कि जिसका स्तन भगवान पी ले उसमे अशुद्धि कहाँ रहेगी। उस राक्षसी पूतना के शरीर को भगवान कृष्ण ने शुद्ध कर दिया और उसे वही गति दिए जो उनके माता को मिलता। आगे महाराजश्री कहते हैं कि भगवान कृष्ण को मारने के नियत से पूतना ने अपने स्तन से दूध पिलाई, फिर भी उसे सद्गति मिल गई। इसलिए जो प्रेम से भगवान को खिलायेगा, उनका स्मरण करेगा, उनका नाम लेगा उसे सद्गति अवश्य मिलेगी।