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पढ़े मंगलवार को क्या करें और क्या नहीं

यश कुमार लाटा : BBN24NEWS

मंगलवार का दिन हनुमानजी और मंगलदेव का है। लाल किताब के अनुसार मंगल नेक के देवता हनुमानजी और बद के देवता वेताल, भूत या जिन्न है। हर कार्य में मंगलकारी परिणाम प्राप्त करने के लिए मंगलवार का उपवास रखना चाहिए।

ये कार्य करें :
1. इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में मिश्रित सिन्दूर लगाएं।
2. मंगलवार ब्रह्मचर्य का दिन है। यह दिन शक्ति एकत्रित करने का दिन है।
3. दक्षिण, पूर्व, आ‍ग्नेय दिशा में यात्रा कर सकते हैं।
4. शस्त्र अभ्यास, शौर्य के कार्य, विवाह कार्य या मुकदमे का आरंभ करने के लिए यह उचित दिन है।
5. बिजली, अग्नि या धातुओं से संबंधित वस्तुओं का क्रय-विक्रय कर सकते हैं।
6. मंगलवार को ऋण चुकता करने का अच्छा दिन माना गया है। इस दिन ऋण चुकता करने से फिर कभी ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।


लाल किताब के अनुसार निम्नलिखित उपाय पूछकर कर सकते हैं-
 
7. मंगल को नीम के पेड़ में शाम को जल चढ़ाएं और चमेली के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार करें। हो सके तो इस दिन कहीं पर नीम का पेड़ लगाएं।
8. मंगलवार का व्रत रखकर हनुमानजी की उपासना करें। फिर किसी भी हनुमान मंदिर में मंगरवार को नारियल, सिंदूर, चमेली का तेल, केवड़े का इत्र, गुलाब की माला, पान का बीड़ा और गुड़ चना चढ़ाएं। गुड़ खाएं और खिलाएं।
9. मंगल खराब की स्थिति में सफेद रंग का सुरमा आंखों में डालना चाहिए। सफेद ना मिले तो काला सुरमा डालें।
10. बहते पानी में तिल और गुड़ से बनी रेवाड़ियां प्रवाहित करें या खांड, मसूर व सौंफ का दान करें।
11. मीठी तंदूरी रोटी कुत्ते को खिलाएं या लाल गाय को रोटी खिलाएं।
12. बुआ अथवा बहन को लाल कपड़ा दान में दें।

13. रोटी पकाने से पहले गर्म तवे पर पानी की छींटे दें।

14. मंगलवार के दिन लाल वस्त्र, लाल फल, लाल फूल, लाल चंदन और लाल रंग की मिठाई चढ़ाने से मनचाही कामना पूरी होती है।
15. मंगलवार के दिन मंदिर में ध्वजा चढ़ाकर आर्थिक समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए। पांच मंगलवार तक ऐसा करने से आर्थिक परेशानी हट जाती है।
16. मंगलवार को बढ़ के पत्ते पर आटे के पांच दीपक बनाकर रखें और उन्हें हनुमानजी के मंदिर में प्रज्वलित करके रख आएं।
 
ये कार्य न करें :
1. मंगलवार सेक्स के लिए खराब है। इस दिन सेक्स करने से बचना चाहिए।
2. मंगलवार को नमक और घी नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है।
3. पश्‍चिम, वायव्य और उत्तर दिशा में इस दिन यात्रा वर्जित।
4. मंगलवार को मांस खाना सबसे खराब होता है, इससे अच्छे-भले जीवन में तूफान आ सकता है।
6. मंगलवार को किसी को ऋण नहीं देना चाहिए वर्ना दिया गया ऋण आसानी से मिलने वाला नहीं है।
7. इस दिन भाइयों से झगड़ा नहीं करना चाहिए। हालांकि किसी भी दिन नहीं करना चाहिए।

कोरोना वायरस और मंगरोहन वाले मुडही के फूल (लेख) - एच. पी. जोशी

सावधान और सुरक्षित रहिए क्योंकि कोरोना वायरस इस तस्वीर में दिख रहे फूल जैसे नग्न आंखों से दिखाई नही देता। दीगर राज्य और विदेशों से आने वाले अथवा कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले कोई भी व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं, संक्रमित व्यक्ति के हथेली देखकर आप नही जान पाएंगे कि वह संक्रमित है या नहीं। मेरे हथेली में जो कोरोना वायरस जैसे दिख रहा है वह मुडही का फूल है, मुडही को नग्न आंखों से देखा जा सकता है मगर वास्तव में कोरोना वायरस अत्यंत तुच्छ आकार के होने के कारण विशेष वैज्ञानिक तकनीक अर्थात स्पेशल कोरोना टेस्टिंग किट से ही पता चल पाता है और दिख सकता है। इस मुडही को कोई अंधा व्यक्ति भी छूकर जान सकता है कि यह कोई फूल है सायद उन्हें लगे कि यह कोई फल है, मगर आप चाहे कितने ही अच्छे या दिव्य दृष्टि रखते हों आपको कोरोना के वायरस दिखाई नही देंगे, कोरोना वायरस की भविष्यवाणी कोई ज्योतिष भी नहीं कर सकता। आपसे अनुरोध है एक ही घर परिवार में निवासरत अपने पारिवारिक सदस्यों के अलावा शेष सभी व्यक्तियों से फिजिकल डिस्टेनसिंग रखें। जब दूसरे किसी स्थान पर या किसी अन्य व्यक्ति से मिलने जाना पड़े या किसी अन्य व्यक्ति से वार्तालाप करना पड़े तो वार्तालाप और घर से बाहर रहने के दौरान नाक और मुह को अच्छे से ढ़कने योग्य मास्क जरूर लगाएं। घर में रहें तब भी समय समय पर साबुन से हाथ धोते रहें जब साबुन से हाथ धोएं तो कम से कम 20 सेकंड तक हाथ को धोते रहें। घर या कार्यालय से बाहर जब साबुन से हाथ धोने का व्यवस्था न मिले तब अल्कोहल बेस्ड सेनेटाइजर से हाथ साफ करते रहें। लिफ्ट के बटन, गेट, संदेहास्पद वस्तुओं अथवा सामग्री इत्यादि को छूने के पहले या बाद में साबुन से हाथ धोएं या सेनेटाइजर लगाएं; घर से बाहर निकलें तो बेहतर होगा सेनेटाइजर की एक छोटी बॉटल लेकर चलें। यह उसी मुडही का फूल है जिसके तना और हरे डालियों का उपयोग छत्तीसगढी परंपरा में विवाह के दौरान मंगरोहन (लकड़ी का पुतला पुतली) बनाने और मड़वा छाने में किया जाता है। मंगरोहन मंडप के बीच में गड़ाया जाता है। मंगरोहन के सामने ही मिट्टी के 02 करसा में पानी भरकर उसके बाहरी आवरण में गोबर से चित्र बनाकर हल्दी और कुमकुम इत्यादि से रंगे हुए चाँवल से सजाया जाता है इस करसा के ढक्कन में ही तेल के जोत जलाया जाता है। जिसके चारों ओर दूल्हा दुल्हन भांवर घूमते हैं तब विवाह संपन्न होता है। सम्भव है आप इसे अर्थात मुडही को दूसरे किसी नाम से जानते हों।

विशेष : कल मदारी आज नगीना, शोक में डूबा सारा सिनेमा

WRITTEN BY : RAKESH RANJAN

सिनेमा जगत ने महज चौबीस घंटे के भीतर अपने दो बड़े सितारों को खो दिया है। कल हर दिल अज़ीज़ कलाकार इरफान खान के बाद आज दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर ने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया।  

इसे महज एक संयोग ही कहेंगे की दोनों अभिनय के कुबेर कि बीमारी के इलाज से लेकर कैंसर से मौत तक में उन दोनों के बीच काफी समानताएं देखी गईं।दरअसल, यह एक अजीब इत्तिफ़ाक़ हिन् है की ऋषि कपूर और इरफ़ान खान की मौत दो या तीन पहर के अंतराल पर हुआ। दोनों हिन् कला के धनि, दोनों हिन् कैंसर से पीड़ित, 2018 में दोनों के बीमारी का इलाज विदेशों में होना, इलाज के बाद 2019 में दोनों का वतन आना और 2020 में एकसाथ अपने चाहनेवालों को छोड़ जाना।  
ऋषि कपूर और इरफ़ान खान ने सिर्फ एक फिल्म D-DAY में एकसाथ काम किया। असल ज़िन्दगी में दोनों दोस्त इस फिल्म में बतौर कलाकार एक दूसरे के दुश्मन थे। इस फिल्म में ऋषि कपूर जहाँ एक अंडरवर्ल्ड डॉन थे वहीँ इरफ़ान खान एक रॉ एजेंट की भूमिका में थे।  जिसमे रॉ एजेंट को अंडरवर्ल्ड डॉन की तालाश थी।   
D-DAY फिल्म पूरा होने पर इरफ़ान ने अपना अनुभव साझा करते हुए ऋषि कपूर के बारे में कहा की वो एक असाधारण व्यक्ति और कलाकार हैं  जिनके साथ काम करके बहुत अच्छा लगा।  साथ हिन् इरफ़ान ने उनके बारे में यह भी बताया की फिल्म शूटिंग के दौरान वो लोगों का खूब मनोरंजन किया करते थे।
यह एक संयोग हिन् था की इस फिल्म के बाद दोनों कभी परदे पर एकसाथ नहीं दिखे। दोनों को अपनी बीमारी का पता साल 2018 में चला। दोनों साल 2018 में इलाज के लिए विदेश का रूख किया। साल 2019 में दोनों हिंदुस्तान लौटे और अपने काम में मशगूल हो गए। उन्हें अपनी बीमारी का पता था बावजूद इसके वो अपने चेहरे पर शिकन तक नहीं आने दिया। अपने चाहनेवालों से हमेशा मुस्करा कर मिलते रहते। ऋषि कपूर और इरफ़ान खान महज एक दिन के फासले  पर मौत को गले लगाया और छोड़ गए जिन्दा किरदार।

THE Beauty Tips पुराने दाग-धब्बों को भी ठीक कर देगा, शहद से बना यह नेचुरल उबटन

 दाग-धब्बे दूर करने के लिए आप कई जतन करते हैं लेकिन यह जिद्दी निशान आपके चेहरे से हटने का नाम ही नहीं लेतेl आज हम आपको इस समस्या से निजात दिलाने के लिए एक ऐसा उपाय बता रहे हैं जिससे आपके चेहरे के दाग-धब्बे जरूर साफ हो जाएंगेl शहद सेहत के लिहाज से ही नहीं बल्कि ब्यूटी सीक्रेट्स में भी इस्तेमाल किया जाता हैl आइए, जानते हैं इसके गुण- 

पुराने दाग-धब्बों पर कारगर 

आप कच्चे शहद को जले हुए निशान पर लगा सकती हैं, क्योंकि शहद में एंटीसेप्टिक और हीलिंग गुण होते हैं। नियमित रूप से जले पर शहद लगाने से दाग जल्दो गायब हो जाते हैं। आप शहद को मलाई, चंदन और बेसन के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती हैं। यह मास्कत चेहरे की अशुद्धियों को हटाता है और त्वचा को मुलायम और चिकना भी बनाता है। आपके चेहरे पर अगर कोई पुराना दाग या झाईयां हैं, तो आप इस उपाय को फॉलो करके उनसे निजात पा सकते हैं ||

इन गुणों से भरा होता है शहद 

शहद में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन ए, बी, सी, आयरन, मैगनीशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम आदि गुणकारी तत्व होते हैं। यह कार्बोहाइड्रेट का भी प्राकृतिक स्रोत है, इसलिए इसके सेवन से शरीर में शक्ति, स्फूर्ति और ऊर्जा आती है और यह रोगों से लड़ने के लिए शरीर को शक्ति देता है।

कोरोना संक्रमण के कठिन समय में भी अपने मानसिक संक्रमण से बाहर नहीं आ पा रही है भाजपा- मोहन मरकाम

ताउम्र ग़ालिब ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और वो आइना साफ़ करता रहा.. किसी के द्वारा लिखी गयी पंक्तियाँ वर्तमान समय में भाजपा पर सटीक बैठती हुई दिखाई देतीं हैं।

आज जबकि कोरोना के रूप में सम्पूर्ण मानवता पर वैश्विक संकट आ खड़ा हुआ है, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी झूठ और अफ़वाह की बुनियाद पर टिके अपने मूल चरित्र से बाहर नहीं निकल पा रही है।

कांग्रेस संगठन और सरकार ने इस लड़ाई के ख़िलाफ़ शंखनाद करते समय ही स्पष्ट कर दिया था कि हम माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा इस संक्रमण से लड़ने हेतु उठाए गये प्रत्येक सकारात्मक क़दम के साथ खड़े हैं।

जब माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा पहली बार लॉकडाउन की घोषणा की, हमने उसका स्वागत किया। जब केंद्रीय वित्त मंत्री जी द्वारा राहत पैकेज की घोषणा की गयी, राहुल जी सहित पूरी कांग्रेस पार्टी ने स्वागत किया और अन्य सुझाव भी दिए।

लेकिन छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी कोरोना संक्रमण से लड़ने में कोई योगदान तो देना दूर, अपनी झूठ और अफ़वाह से भरे मानसिक संक्रमण से बाहर नहीं आ पा रही है।

जहाँ एक तरफ़ लगभग समाप्त हो चुका भाजपा संगठन भी कहीं किसी सेवा कार्य में दिखाई नहीं दे रहा है वहीं आश्चर्य की बात यह भी है कि प्रदेश की जनता द्वारा चुनकर लोकसभा भेजे गये भारतीय जनता पार्टी के 9 सांसदों में से सिर्फ़ 2 सांसदों से मुख्यमंत्री सहायता कोष में योगदान दिया है।

7 लोकसभा सांसदों और 2 राज्यसभा सांसद ने सांसद निधि एवं अपने वेतन से पी एम केयर्स में दान देकर और मुख्यमंत्री सहायता कोष में कोई भी योगदान न देकर न केवल अपने मानसिक दिवालियापन का परिचय दिया है बल्कि प्रदेश की जनता का भी अपमान किया है।

यह एक ऐसी लड़ाई है जो शासन और प्रशासन के स्तर पर ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर की ओर लड़ी जा रही है। ऐसे मैं अपने प्रदेश की सरकार को योगदान न देकर सीधा केंद्र सरकार के फ़ंड में सांसद निधि से दान देना समझ से परे है।

इसके अलावा भाजपा के नेताओं द्वारा प्रतिदिन सरकार के प्रयासों को झूठ और अफ़वाह के साथ सोशल मीडिया में प्रस्तुत करना भाजपा के नेताओं की अकर्मण्यता और संकट के समय भी अपनी सस्ती राजनीति से बाहर न निकल पाना दर्शाता है।

आज जब रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया अपनी रिपोर्ट में कहता है कि लॉकडाउन के बावजूद भी छत्तीसगढ़ आर्थिक क्षेत्र में वृद्धि कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ़ जब दूसरी रिपोर्ट कहती है कि संक्रमण से बाहर ग्रीन ज़ोन वाले जिलों का सर्वाधिक प्रतिशत छत्तीसगढ़ में है, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी द्वारा फैलाई जा रही नकारात्मकता को प्रदेश की महान जनता देख रही है।

हमने पहले भी कहा है और आज पुनः दोहराता हूँ, कि यह संकट पूरी मानवता पर आया हुआ संकट है। इससे हम सबको मिलकर लड़ना है। ऐसे समय में दल से ऊपर देश और मानवता को रखकर भाजपा को सोचना चाहिए।

प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ अफ़वाह फैलाने से आपका मक़सद तो सफल नहीं होगा क्योंकि सरकार के कामों की सराहना तो पूरा देश कर रहा है।

बिलासपुर पुलिस की अनोखी पहल। डीएसपी ने गाया शानदार गाना। दिया  कोरोना से दूरी बनाए रखने का संदेश। बिलासपुर के लोगों ने की सराहना। 

अजीत मिश्रा ■ बिलासपुर छत्तीसगढ़ ■ बिलासपुर पुलिस ने एक के बाद एक कई ऐसे काम किए जिनसे वे चर्चा में बने रहे हैं।  एक तरफ देश भर में कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।  तो दूसरी तरफ कोरोना जैसे महामारी से बचने के लिए बिलासपुर के एक प्रशिक्षु डीएसपी अभिनव  उपाध्याय ने सुंदर और सुरीली आवाज में गाना गाकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है प्रशिक्षु डीएसपी के इस प्रयास को छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से सराहा है भूपेश बघेल ने अपने ट्विटर अकाउंट में जाने के लिए को पोस्ट किया है।  गाने की धुन फिल्मी थी लेकिन संदेश बेहद साफ और स्पष्ट था।  लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचना है,  और दूसरों को भी बचाना है।  इस संदेश को  प्रशिक्षु DSP अभिनव उपाध्याय ने अपने गाने के माध्यम से कुछ इस तरह से लोगों के सामने प्रस्तुत किया कि, लोग ना सिर्फ उनके मोहक अंदाज और सुर में मंत्रमुग्ध हो गए बल्कि उनके लिए तालियां भी बजाएं। गौरतलब है कि प्रशिक्षु डीएसपी ने इस गाने को एक दिन पहले बिलासपुर शहर के अलग-अलग कई जगहों पर गाया है। इन्ही में से एक जगह *भारती अपार्टमेंट* के लोगों को यह गाना इतना पसंद आया कि उन्होंने ना सिर्फ इस गाने को सुनकर आनंद लिया बल्कि तालियां बजाकर प्रशिक्षु डीएसपी के इस प्रयास की सराहना की और उनका मनोबल बढ़ाया। 

क्या आपको पता है नीम की पत्‍तियां चबाने से कई रोगों में मिलेगा आराम, डायबिटीज भी होगी दूर

प्रकृति में कई ऐसे पेड़-पौधे हैं जो हमारी सेहत के लिए खास हैं। नीम की पत्तियां भी कई रोगों को दूर करने में सहायक हैं। शोध के बाद पता चला है कि नीम की पत्ती रोजाना चबाने से डायबिटीज का खतरा काफी कम हो जाता है। नीम में मौजूद फाइबर खाने को पचाने में मदद करता है और पेट की गैस को भी दूर करता है। वहीं नीम की दातून से पायरिया जबकि पत्ती चबाने से डिप्रेशन में भी आराम मिलता है।

छतीसगढ़ : डिजिटल तकनीक से आयेगी शिक्षा में गुणवत्ता

शिक्षा विभाग की पहल: शिक्षकों की कमी दूर करने तैयार किए जा रहे वीडियो लेक्चर: एनिमेशन के जरिए पाठ्यक्रम को बनाया जा रहा रोचक और ज्ञानवर्धक

रायपुर - छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा हैै। इस तकनीक का उपयोग के जरिए विद्यार्थियों के लिए स्तरीय सामग्री तैयार की जा रही है। राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में विषय शिक्षकों की कमी की समस्या को हल करने के लिए वीडियो पाठ्यक्रम के जरिए पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। हाल ही में एक पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में वीडियो कॉल एप्लीकेशन का उपयोग करने की पहल की गई है।
स्कूलों में जिन विषयों के शिक्षक नहीं है, वहां विषय विशेषज्ञों के माध्यम से पढ़ाई शुरू की गई है। पांच मिनट के वीडियों और लाईव-लेक्चर के माध्यम से पढ़ाई के बाद ऑनलाईन होमवर्क भी दिया जाता है। पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 12 शासकीय स्कूल सेल, कोमाखान, चांपा, बरना, नवापारा और खरोरा, सांकरा, बालोद, कोमाखान, मुंगेली, बेमेतरा में इसकी शुरूआत 10 फरवरी से हो चुकी है। इसमें सभी विषयों की ई-कक्षाएं उपलब्ध है। आने वाले समय में इसी योजना से करीब एक हजार स्कूलों को लाभांन्वित करने का लक्ष्य है।
       स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वीडियो लैक्चर तैयार करने के लिए राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद और एनआईसी नवा रायपुर में अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए स्टूडियो स्थापित किया गया है। विशेषज्ञ शिक्षकों को पहले एनिमेशन, सिमुलेशन और टीचर लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) का उपयोग करके वीडियो व्याख्यान शूट करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस वीडियो की समीक्षा विषय-विशेषज्ञों द्वारा की जाती है और यू-ट्यूब पर अपलोड की जाती है, ताकि कोई भी इसे देख सके और सीख सके।
    तैयार की गई पाठ्य सामग्री यू-ट्यूब चैनल डीइएल छत्तीसगढ़ में अपलोड की जाती है। आम तौर पर प्रत्येक अवधारणा वीडियो लम्बाई में 4-5 मिनट का है, जो एक अध्याय के रूप में एक साथ मिले हुए हैं। स्कूल द्वारा एक टेक फ्रेंडली स्कूल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है, जिसे राज्य द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। ताकि वह बेहतर तैयारी के लिए विद्यार्थियों की मदद हेतु उचित अनुशासन और प्रक्रिया का पालन कर सके।
    चरण 1 - स्कूल हर दिन एक विषय वीडियो अंग्रेजी, जी-विज्ञान, भौतिक विज्ञान आदि जो खेलते हैं, उन छात्रों की आवश्यकता का 12 बजे तक निर्भर करता है।
    चरण 2 - छात्र वीडियो कॉलिंग एप (जूम) का उपयोग करके दोपहर 12.30 बजे विषय-विशेषज्ञ से जुड़ते हैं। छात्र ऑनलाईन शिक्षक से अपना संदेह पूछते हैं और शिक्षक यह भी परखता है कि उन्होंने बेतरतीब ढंग से चूने गए छात्रों से मौखिक प्रश्न पूछकर क्या सीखा है।
    चरण 3 - छात्रों कोे होमवर्क दिया जाता है, जिसे उन्हें अगले दिन स्कूल समन्वयक के पास जमा करना होता है। स्कूल समन्वयक तब होमवर्क को स्कैन करता है और वाट्सअप के माध्यम से सभी छबियों को संबंधित ऑनलाइन विषय शिक्षक को भेजता है।
    चरण 4 - ऑनलाइन विषय शिक्षक इस पीडीएफ का प्रिंट लेता है और प्रत्येक जमा होमवर्क को ध्यान से देखता है। शिक्षक फिर सभी प्रस्तुत करने और स्कैन करने के लिए सुधार हेतु प्रतिक्रिया लिखता है और इसे समन्वयक को वापस भेजता है। बाद में समन्वयक द्वारा इसे छात्रों के साथ साझा किया जाता है। इस प्रकार व्यक्तिगत सीखने का चक्र पूरा होता है। यह सब केवल 2 दिनों के समय में होता है।   
 लेख-सहायक संचालक द्वय ललित चतुर्वेदी,  जी.एस. केशरवानी

आखिर कब मिलेगा गोविंदा को इंसाफ...जिम्मदारो की लापरवाही से बुझा गरीब घर का चिराग


रायगढ़:- माँ बाप अपने घर के चिराग को बेहतर शिक्षा और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए घर से बाहर भेजते है ताकि उसकी जिंदगी सवर सके जिंदगी में वो बेहतर कर सके …. सभी अपनी अपनी हैसियत के अनुसार अपने घर के लाल को बेहतर शिक्षा की तालीम देने की कोशिश करते हैं चाहे अमीर हो या गरीब … जिनके पास पैसे होते हैं वो बड़े बड़े प्राइवेट स्कूल पब्लिक स्कूल भेजते है …. तो वहीं गरीब तपके के लोग अपने घर के चिराग को शासकीय छात्रावास भेजते है….उन्हें उम्मीद होती है कि उनके घर के चिराग उनका नाम रौशन करें लेकिन उन गरीब माँ बाप को क्या पता कि जहां जिन जिम्मदारो के हवाले अपने घर का चिराग को छोड़ आये हो उनकी लापरवाही से उनके घर का चिराग बुझ जाए……वो चिराग अपने घर वापस न आ पाए….

 

 

ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले कापू थाना क्षेत्र में स्थित शासकीय छात्रावास का है जहां के जिम्मदारो के लापरवाही से एक मासूम की जान चली गयी …इस छात्रावास में एक मासूम गोविंदा कुर्रे जो…..कक्षा 8वी में पढ़ता था …..जहां उसके साथी उसके साथ बेरहमी के साथ मारपीट करते थे लेकिन जिम्मदारो ने कभी इसपर ध्यान नही दिया …नतीजा उसके ही साथी बच्चों ने उसे बेरहमी के साथ मार मार कर अधमरा कर दिया ….जिसे अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी….छात्रावास में क्या क्या हुआ इसकी जानकारी मृतक के छोटे भाई रोविन्द कुर्रे के परिजनों और मीडिया को जानकारी उसने बताया कि छात्रावास में बेवजह के उसके 4 साथी उसके साथ मारपीट किया करते थे जिसकी शिकायत छात्रावास अधीक्षक से की गई मगर कोई संज्ञान नही लिया गया जिसकी वजह से उन बच्चों का हौसला और बुलन्द होते गया अंजाम आज गोविंदा आज हमारे बीच नही रहा …..आज उस गरीब परिवार के घर का चिराग तो बुझ गया मगर सिस्टम पर कई सवाल भी खड़े हो गए …सवाल पहला .. आप अपनी स्क्रीन पर जो तस्वीर देख रहे हैं इसको कहने की जरूरत नहीं कि किस तरीके से बेरहमी से उसके साथ मारपीट की गई लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर साहब का कहना है कि यह नेचुरल डेथ मृतक के शरीर पर कहीं पर भी कोई चोट के निशान नहीं है….. जिसे अंधा भी कह देगा कि गोविंदा के साथ क्रूरता के साथ मारपीट की गई लेकिन डॉक्टर साहब का कहना है कि यह नेचुरल डेथ है….. तो वही दूसरा छात्रावास में छात्रावास अधीक्षक साहब का न रहना यहां तो साहब की जब मर्जी होती है तब साहब आते हैं और जब मर्जी नहीं होती तो नहीं आते जिस दिन गोविंदा के साथ बेहरहमी के साथ मारपीट की गई उस अधीक्षक साहब रहते तो ये न होता आज उस गरीब के घर का चिराग न बुझता…. सवाल तीसरा जब सभी छात्रावास में सेक्युरिटी अनिवार्यता है तो यहां क्यो नही…मामले की लीपापोती करने वाले के ऊपर कार्यवाही होगा या नही …. सवाल तो कई खड़े हो रहे है… लेकिन क्या उस गरीब घर के चिराग को फिर से वापस लाया जा सकता है क्या सिस्टम में सुधार हो पायेगा ….या फिर नियम कानून कार्यवाही सिर्फ बड़े लोगो के लिए है और गरीबों के लिए सिर्फ बेबसी ही लिखी है….आखिर कब मिलेगा गोविंदा को इंसाफ…..

युवा दीपक तिवारी ने मुलमुला-नरियरा क्षेत्र के लोगां को पंक्षी और पर्यावरण संरक्षण पर जागरूक किया

जांजगीर चाँपा:- प्रदेशस्तर पर चल रहे इस अभियान में दीपक ने जांजगीर जिले सहित दुसरें जिलों में भी जाकर अबतक 4,000 चार हजार से ज्यादा लकड़ी के कलरफुल घोसला का निःशुल्क वितरण कर लिया है। साथ ही पंक्षीयों को भुख प्यास से बचाने दाना -पानी देने के लिए हजारों की संख्या में मिटट्ी के बर्तन व ब्राउन पेपर से बने दाने के पैकेट का निःशुल्क वितरण युवा दीपक तिवारी स्वयं के खर्च पर कर चुके है । और निरंतर वह इन सामाग्रीयों का निःशुल्क वितरण कर रहे है। युवा दीपक तिवारी पंक्षी संरंक्षण व संवंर्धन पर कार्य कर लोगों को जागरूक कर प्रेरित कर रहें है । इसी कड़ी में उन्होंने नरियरा , मुलमुला क्षेत्र में जगह-जगह चौक चौराहों व गलियों में लोगों को प्रेरित करने लकड़ी के कलरफुल घोसला , मिटट्ी के सकोरे ,ब्राउन पेपेर से बने आनाज वाले दानां के पैकेट व पाम्पलेट का निःशुल्क वितरण किया । साथ ही ग्रामीणों से संकल्प -पत्र भरवाकर पंक्षी और पर्यावरण संवंर्धन का संकल्प दिलाया। जांजगीर-चांपा जिले से विलुप्त हो रहे पंक्षीयों के संरंक्षण व संवंर्धन का बीड़ा उठाने वाले व स्वयं के खर्च पर पंक्षी संरंक्षण पर निरंतर अपनी सेवा दे रहे ग्राम तिलई के युवा दीपक तिवारी ने लोंगो को जागरूक करने मुलमुला नरियरा क्षेत्र में जगह -जगह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। विगत दिनों मुलमुला और नरियरा क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक स्थानों में दीपक ने अपने हाथों से तैयार किए लकड़ी के कलरफुल घोसले, मिटट्ी के सकोरे,पाम्पलेट,अनाज के दानों वाला ब्राउन पेपर के पैकेट व संकल्प पत्र का निःशुल्क वितरण किया और लोंगों को बेजुबान पंक्षीयों के लिए घर में लकड़ी के कलरफुल घोसले में सुरक्षित आसरा देने ,भुख-प्यास से बचाने मिटट्ी के सकोरे में दाना पानी रखकर उनके लिए दाना - पानी की व्यवस्था करने तथा अभियान में अपनी महत्पूर्ण सहभागिता निभाने हाथ जोड़कर आग्रह किया । दीपक ने नरियरा के पेट्रोल पंप के पास भी राह चल रहे लोंगो को घोसला,मिटट्ी के सकोरे, पाम्पलेट,व अनाज के दानों का वितरण किया और अपने साथ-साथ दुसरें लोगों को भी पंक्षी संरंक्षण पर जागरूक कर प्रेरित करने को कहा। नरियरा ,मुलुमुला क्षेत्र में आयोजित जन जागरूकता कार्यक्रमों को युवा दीपक तिवारी ने किया संबोधित।

युवा दीपक ने कहा की आप लोगों से मुझे कोई पैसा या वस्तु नहीं चाहिए आप केवल इस अभियान के लिए लोंगों को जागरूक कर प्रेरित करने में मेरा साथ दें। आज हम सभी अपनी आवश्कताओं को पूर्ण करने पुरी तरह से सक्षम है और जो चाहिए वह हासिल कर रहे है , अपने खुशी से कोई समझौता नहीं करते हमारी जिन्दगी हमें स्वतंत्र जीना अच्छा लगता है। क्योंकि हम हमारी जीवन में आने वाली समस्त समस्याओं को स्वयं हल कर लेतें है । लेकिन क्या सिर्फ अपने सुख के लिए ही जिना सही है? नही अगर हम एैसा जीवन जितें है तो यह एक स्वार्थ पूर्ण जीवन होगा ईश्वर ने सिर्फ इंसान को ही इस काबिल बनाया है। की वह अपने साथ-साथ दुसरे प्राणियों की सहायता कर सकता है, तो हमारा भी कर्तव्य बनता है कि ईश्वर के दिए इस वरदान को व्यर्थ न जाने दें।अपने इस समय और अवसर सदुपयोग करें । जीवन उसी का सार्थक जों दुसरों के काम आय। मृत्यु सत्य है जाना सभी को है एक दिन इस दुनिया से , तो क्यो ना कोई अच्छा कर्म करके जाए ,बेजुबान पंक्षीयों के प्रजाति को सुरक्षित बनाकर उन्हेंं एक नया जीवन देंतें जाए। तो हमारा जीवन निश्चित ही सार्थक बन जाएगा।

निस्वार्थ भाव से हजारों लोगों को अभियान से जोड़ा लेकिन अभियान के नाम पर किसी से कोई पैसा नही लिया है। शुरू से अभीतक स्वयं के खर्च से सभी सामान बांट रहें हैं दीपक तिवारी।

दीपक ने जिस अभियान की नीवं अपने ग्राम तिलई से रखी थी वह आज प्रदेशस्तर पर पहुंच गया है। और प्रदेशस्तर पर इसका प्रचार प्रसार हो रहा है। साथ ही हजारों लोंग भी उनके अभियान से जुड़ गए है , लेकिन दीपक आज भी अभियान के नाम पर किसी से कोई पैसा नहीं लेतें । दीपक तिवारी जांजगीर के ज्ञानज्योति उ0मा0 विद्यालय जांजगीर में शिक्षक है सारा खर्च वें अपने सैलरी का पैसा दैनिक खर्च से बचाकर करते है। उनका कहना है कि यह परोपकार का कार्य है और किसी परोपकार के कार्य को करने में किसी से पैसे नहीं लेना चाहिए। अगर हम कार्य को करने के बदले पैसे लेते है तो वह कोई परोपकार नही हुआ। मैने शुरूआत से अभी तक किसी से पैसा नही लिया और आगे भी नहीं लुगां , आगे भी यह अभियान मेरे स्वयं के खर्च पर एैसे ही चलता रहेगा। और पंक्षी संरंक्षण अभियान को बेहतर से बेहतर दिशा देने की हर संभव प्रयास इसी प्रकार करता रहुंगा। जिससे विलुप्त हो रहे पंक्षीयों के प्रजाति को बचाया जा सके। युवा दीपक बेजुबान पंक्षीयों व पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि हमारे समाज के लिए भी एक अनुकरणी कार्य कर रहे है। उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व ही जांजगीर नेत्र विभाग में जाकर अपनी दोनों आखें दान करने की घोसणा कर मृत्युउपरांत किसी के अंधेरे जीवन को रौशन करने का नेक कार्य कर चुके है। दीपक समाज में पंक्षी और पर्यावरण के साथ-साथ लोगों को नेत्रदान के प्रति भी जागरूक कर प्रेरित करतें है।

पंक्षी संरंक्षण से किसानें को भी होगा लाभ खेती में आर्थिक बचत उत्पादन अधिक

अपने प्रचार -प्रसार के दौरान किसानां को दीपक ने खेति संबंधित जानकारी देते हुए कहां की पंक्षीयों को किसान मित्र कहा गया है। आप सभी अपने घर में आंगन के साथ-साथ अपने खेतों पर भी यह लकड़ी का घोसला रखें जिससे पंक्षी आपके खेतों में उपस्थित हानिकारक किड़ों मकोडों को नस्ट कर सके । पंक्षीयों को संरक्षण प्रदान करने से वे जैविक किटों के नियंत्रण का कार्य करती है। जिससे किसानों को आर्थिक बचत होती है।परागकण में भी सहायक होते है। किटनाशक के प्रयोग से खेतों के मिटट्ी को भी बहुत नुकसान होता है।जिससे खेतों में कई तरह की बिमारियों का आना व उत्पादन क्षमता कम होने वाली समस्या से जुझना पड़ता हैं। अगर हम पंक्षीयों का संरक्षण करें उन्हें सुरक्षित रखें तो ये बेजुबान पंक्षी हमारी खेती की आर्थिक खर्च बचाने के साथ-साथ पर्यावरण को संतुलित बनाय रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर हमारी सहायता करती है। इसलिए हमें भी उनके संरक्षण व संवर्धन कर आज अति आवश्यक हैं।H

मकर संक्रांति विशेष-प्यार की पतंग ..वर्षा

प्यार की पतंग

तेरी नज़रों में ऐसी धार थी

तुमसे नज़रे क्या मिली हमारी,

पतंग के साथ-साथ दिल भी

काट के तुम अपने साथ ले गई।

तिल के लड्डुओं की ख़ुशबू पूरे घर में महक रही थी. साथ ही नमकीन भी खाने की टेबल पर सजी थी।दादा जी ने आवाज़ लगाई अरे सुधीर पतंगे खरीदे लाये हो ना और फिरकी भी सुनो वो बगल वाले शर्मा जी के घर में भी बता अना की जल्दी से वो अपने सारे काम करके हमारी छत पर आजाये सुधीर ने भी हाथ में एक तिल का लड्डू लेते हुए बोला दादा जी आप चिंता मत करो सारी तैयारी कर रखी है।पूजा को बीच में रोकते हुए दादी ने आवाज़ लगाई ममता अरी ओ ममता, ममता ने भी किचन से हड़बड़ाती हुई आवाज में कहा हां दादी।आज खाने में क्या बनाना है पता है न तुझे ममता ने भी धीमी आवाज में कहा जी दादी आज खिचड़ी बनती है तो उसी की तैयारी कर रही थी दादी ने भी तंज कसते हुआ कहा चलो कुछ तो सिखाया है तेरी माँ ने तुझे और फिर अपनी पूजा करने में मग्न हो गई।दादा जी और शर्मा जी भी छत पर पहुच चुके थे बच्चे भी सब अपनी पतंगों को हवा में उड़ा रहे थे मैंने कुछ पुराने गानों की धुन लगाई और पतंग उड़ाने में मस्त हो गया।दादा जी मूंगफलियों को हाथों में लेते हुए बोले शर्मा जी से कहने लगे यार वो भी क्या दिन थे जब हम भी खूब पतंगे उड़ाया करते थे शर्मा जी ने दादा जी को अपनी कोहनी मरते हुए मज़ाकिया अंदाज़ में कहा रुक्मणि भाभी और तुम्हारी पहली मुलाक़ात भी तो आज ही के दिन यानी मकर संक्रांति के दिन हुई थी याद है जब तुमने उनकी पतंग से कैसे ख़ुद ही अपनी पतंग कटवा ली थी और भाभी कितना ख़ुश हो गई थी की उन्होंने तुम्हारी पतंग काटी है।हां यार आज पूरे 55 साल हो गए हमारी उस पहली मुलाक़ात को पर लगता है जैसे कल की ही बात हो।उसे जब पहली बार देखा था और आज जब उसे देखता हूँ तो वो अब भी वही 20 साल पहले वाली रुक्मणि ही लगती है वो बिल्कुल नहीं बदली वही उसकी ठेठ बोली में बोलना,साधा पहनावा सब आज भी वैसा ही है हां अब थोड़ी झुर्रियां आ गई है उसके चैहरे पर ,पर वो भी अब उसकी खूबसूरती को और बड़ा देती है जब भी इन झुर्रियों को देखता हूँ उसके चैहरे पर तो हमारे प्यार की प्रगाढ़ता मुझे दिखती है और इतने सालों उसने जो मेरे और मेरे परिवार के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।कुछ देर बाद दादी ने भी एक पतंग ली और हवा में उड़ाने लगी सब की निग़ाहें उन पर ही टिक गई दादा ने भी जल्दी से एक पतंग उठाई और वो भी दादी की पतंग के पीछे अपनी पतंग से पेच लड़ाने लगे उस वक्त मानों समय 55 साल पीछे लौट गया था ।दादी और दादा की आंखों में एक चमक सी आ गई थी ज़ोर-ज़ोर से शर्मा जी की पोती कमौन दादी दादी के नारे लगाने लगी उसे देख हम सारे लड़के भी कमौन दादा दादा के नारे लगाने लगे दादा और दादी की तरफ सब की निगाहें टिक गई दादा ने एक नज़र दादी की ओर देखा तब तक दादा की पतंग हवा में लड़खड़ाती हुई नीचे गिरने लगी थी दादी ने ज़ोर से आवाज लगाई थारी पतंग कट गई से।दादा हर साल यही करते थे ताकि वो दादी की एक मुस्कान देख सके जो उन्होंने पहली बार उनकी पतंग कटने पर दादी के चैहरे पर देखी थी और दादी ने भी शरमा के पल्लू से अपना मुंह छुपा लिया। हम भी इस पल का हर साल बेसब्री से इंतज़ार करते थे कि कब दादा और दादी बीते पलों को ताज़ा करें।मैंने भी सोच रखा था कि मैं भी शर्मा जी की पोती की पतंग से खुद की पतंग कटवाऊंगा और मैंने भी ऐसा ही किया पीछे से ममता ने आवाज लगाई सुनो जी अब तक मैंने आपकी चार पतंगे काट दी है मुझे पता है आप ये जान बूझ के करते हो चलो नीचे चलते है धूप भी बहुत हो चुकी है।मैंने भी हँसते हुए उसके हाथों से पतंग का मंजा लेकर टेबल पर रख और उसको अपनी बाहों में भरते हुए हम सीढ़ियों नीचे उतर आये थे पर अब भी कई छतों में न जाने कितनी ही पतंगे अपने प्यार की तलाश में खुले आसमान में उड़ रही थी।

||वर्षा||

छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार 2020 का आयोजन वसुंधरा प्रकृति संरक्षण समिति द्वारा श्री दूधाधारी मठ के महंत राजेश्री डॉ रामसुंदर दास जी की अध्यक्षता में आयोजित

रायपुर छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार 2020 का आयोजन वसुंधरा प्रकृति संरक्षण समिति द्वारा श्री दूधाधारी मठ के महंत राजेश्री डॉ रामसुंदर दास जी की अध्यक्षता में आयोजितआयोजन का महत्वपूर्ण उद्देश्य छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजनों एवं विविध खानपान का प्रचार प्रसार कर राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करना है। आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ी थाली (३ अलग अलग रूप में) को संयोजित एवं परिभाषित किया जायेगा। तीन अलग अलग थालियों का नामकरण निम्न तरह से किया जायेगा: *1.आहारी थाली:* आहारी थाली छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबु लिए हुए है, जिसमें भात (चावल) दाल, सब्जी, भाजी, अचार, चावल का पापड़, एवं सिलबट्टे की चटनी सम्मिलित होती है। यह सामान्य रूप से सभी घरों में खायी जाती है। *2. व्यवहारी थाली:* यह छत्तीसगढ़ के संस्कार एवं परंपरा को प्रदर्शित करती है। यह किसी भी विशेष मेहमान के लिए जैसे दामाद, समधी, सम्मानित रिश्तेदारों आदि के लिए बनायीं जाती है। आमतौर पर इसमें चौसेला (चावल आटे की पूरी या पूड़ी), सोंहारी (पूरी या पूड़ी का छत्तीसगढ़िया स्वरुप) भात (चावल), जिमीकंद की सब्जी, बैगन अथवा भिंडी आदि की तली हुयी सब्जी, भजिया कढ़ी, अथान (साबुत आम का भरवां अचार), बिजौरी, लाई बड़ी, दही मिर्च आदि का समावेश होता है। *3. त्यौहारी थाली:* छत्तीसगढ़ की माटी के विविध संस्कृति, वेशभूषा एवं परम्पराओं की भांति यहाँ के परंपरागत भोजन भी रंग बिरंगे तथा विविध स्वाद एवं खुशबु लिए होते हैं। त्यौहारी थाली हमारे रंग बिरंगे त्योहारों का प्रतिनिधित्व करती है। यह एक छत्तीसगढिया के लिए गर्व का विषय है कि हमारी संस्कृति में हर तीज त्यौहार के लिए एक अलग व्यंजन, अलग तरह का खान पान अपनाया जाता है। उदाहरण के लिए होली पर यहाँ अनरसा या अइरसा (चावल आटे और गुड़ या शक्कर के साथ बनने वाली मिठाई), दीपावली में गुझिया, पपची, पुराण लड्डू, हरेली में गुड़ का चीला, तीजा पोरा में खुरमी और ठेठरी, गोवर्धन पूजा में कद्दू और कोचई की सब्जी अन्य खाद्यान्नों के साथ अनिवार्य रूप से बनती है। यहाँ तक कि पूर्वजों को श्राद्ध के समय पूड़ी एवं उड़द दाल के बड़े के साथ मालपुए का होम हवन में प्रयोग किया जाता है। आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ी खाने में निम्नलिखित व्यंजन, खानपान शामिल हैं। इसके अनुसार ही स्टाल वितरित किया जाएगा। 1. अंगाकर रोटी, घी, गुड़ और चटनी 2. चीला, चटनी 3. फरा तथा दूध फरा 4. आहारी थाली 1 : दाल, भात, जिमिकंद की सब्जी, चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान और गुड़ की खीर। 5. खमरछठ थाली: पसहर चावल, दही, घी, भाजी साग 6. आहारी थाली 2 : दाल, भात, इड़हर की सब्जी, चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान और मालपुआ। 7. छोटी थाली : चौसेला, टमाटर चटनी (सब्जी), अनरसा 8. व्यवहारी थाली : सोंहारी (पूरी) दाल, भात, जिमिकंद की सब्जी या इड़हर, हरी/लाल चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान, बिजौरी, लाई बड़ी, और गुड़ की खीर। 9. त्योहारी थाली : सोंहारी (पूरी) दाल, भात, जिमिकंद की सब्जी/ इड़हर, डुपकी कढ़ी, हरी/लाल चटनी, चावल पापड़, दही मिर्च, अथान, बिजौरी, लाई बड़ी, और गुड़ की खीर। खाजा/लड्डू/पप्ची (त्योहारी थाली में तिहार के हिसाब से संयोजन रहेगा जैसे होली, दिवाली, गोवर्धन पूजा, दशहरा आदि) इसके अतिरिक्त भाजी, दही बड़ा, देहरोरी, मूंग/ उड़द बड़ा, बांटी रोटी, गुझिया, पूरन लड्डू, पीड़िया, चूरमा लड्डू, आयुर्वेदिक (छेवारी लड्डू) ठेठरी, खुरमी, सेवई (हाथ से बना), अथान, सुष्की या खोइला आदि के स्टाल का वितरण किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ कलेवा तिहार 2020 आयोजन की खास विशेषताएं 1. सभी स्टाल की बिक्री सुनिश्चित करने कूपन का आयोजन के पूर्व विक्रय किया जाएगा । 2. कूपन धारकों को निश्चित उपहार एवं गिफ्ट तथा फूड वाउचर दिया जाएगा ताकि आयोजन के 15 दिनों के अंदर विभिन्न स्वाद का आनंद ले सकें। आयोजन स्थल के बाहर शहर के विभिन्न स्थलों पर स्थित खाद्य उत्पादों/ फ़ूड स्टाल्स द्वारा यह गिफ्ट वाउचर प्रायोजित किया जायेगा। 3. आयोजन स्थल में प्रतिदिन संगीत संध्या का आयोजन किया जाएगा। 4. आयोजन के पश्चात खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्वरोजगार हेतु स्वतंत्र/ महिला स्व सहायता समूह को प्रशिक्षण प्रदान कर, व्यवसाय प्रारंभ करने सफलतापूर्वक संचालित करने हेतु मार्गदर्शन दिया जाएगा।

छेरछेरा-छेरछेरा माई कोठी के धान ल हेरते हेरा जांजगीर ज़िले में मनाया जा रहा छेरछेरा का त्योहार

◆आशीष कश्यप BBN24NEWS.COM

जांजगीर-चांपा जिले में छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े त्यौहार छेरछेरा त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है, दरअसल आज पुष्पपुन्नी है और पुष्पपुन्नी के दिन को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े त्योहार के रूप में माना जाता है। जिसे छेरछेरा के रूप में पूरे छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है और आज के दिन गांव- गांव में बच्चो एवं बुढो के द्वारा घर-घर जाकर छेरछेरा मांगा जाता है, जिसमें उन्हें दान के रूप में रुपया पैसा और धान मिलते हैं, आज के दिन को अन्न दान के रुप में छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, इसी के चलते आज जांजगीर-चांपा जिले में छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े त्यौहार छेरछेरा को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, पुष्पपुन्नी पूर्णिमा के आने से पहले ही लगभग 15 दिन के पूर्व गांव के लोगों के द्वारा टोली बनाया जाता है, और लकड़ी के डंडे लेकर गांव- गाँव में घरों घर जाकर डंडा नृत्य किया जाता है। वही इस नृत्य में बच्चे बूढ़े एवं हर उम्र के लोगों के द्वारा घर-घर जाकर छेरछेरा मांगा जाता है जिसमें उन्हें धान व रुपए पैसे मिलते हैं।

विशेष:-छोटे सरकार का ये आक्रामक रूप सोशल मीडिया में छाया ..लोग कर रहे जमकर तारीफ ..पढ़े पूरी खबर

रायपुर:- इन दिनों सोशल मीडिया में चंद्रपुर विधानसभा के पूर्व विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव छाए हुए हैं दरसल में उनका सोशल मीडिया में छा जाना भी लाजमी है युद्धवीर सिंह जूदेव इन दिनों फुल फॉर्म में नजर आ रहे हैं क्षेत्र की जनता एवं अपने कार्यकर्ताओं के ऊपर हो रहे अत्याचार को लेकर काफी चिंतित हैं। इन दिनों युद्धवीर सिंह लगातार दौरा भी कर रहे हैं साथ ही साथ प्रशासनिक अधिकारियों को हिदायत भी दे रहे हैं कि अगर वह जनता के समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं तो वह जशपुरिया अंदाज में फैसला करेंगे। उनका यह अंदाज लोगों को काफी पसंद भी आ रहा है कोई उन्हें छत्तीसगढ़ का वीर कह रहे हैं तो कोई उन्हें बब्बर शेर तो कोई उन्हें नेता हो तो ऐसा जैसे शब्दों से उन्हें संबोधित कर रहे हैं और संबोधित करें भी क्यों ना .अगर कोई नेता अपनी जनता और अपने कार्यकर्ताओं के समस्याओं के लिए चिंतित होकर मैदान में आकर शासन-प्रशासन को ललकारे तो भला कोई तारीफ करने से रूके कैसे. और उनका आक्रामक रूप का हर एक वायरल वीडियो जमकर वायरल हो रहा है जिसे लाखों लोग देख रहे हैं और उसे पसंद भी कर रहे हैं और युद्धवीर सिंह जूदेव की जमकर तारीफ भी हो रही है चाहे वह पक्ष के लोग हो या विपक्ष के.

औकात में रहे SDM

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जशपुर जिले के पत्थलगाव नगर पंचायत में भाजपाईयों के द्वारा समारोह से बाहर आ जाने के मामले में युद्धवीर सिंह जूदेव काफी तैश में दिखे और मीडिया को दिये गए एक बयान में उन्होंने एसडीएम को दो कौड़ी का अधिकारी बता दिया औऱ कहा कि एसडीएम को औकात में रहंना चाहिए साथ ही साथ कलेक्टर और मुख्यमंत्री को भी नही छोड़ा ये वीडियो जमकर वाइरल हो रहा है और लोग इसमे युद्धवीर सिंह जूदेव की तारीफ भी कर रहे है.

पुलिस विभाग के लिए कही दो टूक

पुलिस कार्यवाही न करे तो फिर मैं कार्यवाही करूँगा और मेरा कार्यवाही तो जानते है न जॉन, जॉनी, जनार्दन, दे दनादन......

हालांकि जूदेव का ये अंदाज विरोधियों को रास नही आ रहा है मगर आम जनता और समर्थकों में इस अंदाज को जमकर पसन्द किया जा रहा है।साथ ही साथ जूदेव आक्रामक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वाइरल हो रहा है।

गरियाबंद : फलसापारा में आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह जर्जर , किराए के मकान में खाना बनाकर बच्चों को देती है आंगनवाड़ी साहिका

A REPORT BY : जुगेशर नेताम

गरियाबंद जिला के विकासखंड मैनपुर के ग्राम पलसापारा मैं आंगनवाड़ी भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है अभी तक नया भवन का निर्माण नहीं किया गया जिसके कारण आंगनवाड़ी साहिका श्रीमती भागवती नेताम किराए के मकान से खाना बनाकर बच्चों को देती है ग्राम फलसा पारा में नया भवन स्वीकृति 2016 में हुआ है लेकिन अभी तक नहीं बनाया हैं जिसके चलते भवन से वंचित रह गए हैं बच्चे आंगनवाड़ी सेहिका सरपंच सचिव एवं जिम्मेदारी अधिकारियों को कई बार आवेदन की है लेकिन अभी तक नहीं बना जिसके कारण बच्चे भवन से वंचित रह गए हैं बैठने के लिए जगह की कमी है बच्चों के बैठने के लिए बरसात के मौसम में परेशानियों का सामना करना पड़ता है नया भवन नहीं बनने के कारण आंगनवाड़ी सहिका परेशान है

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