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ज्योतिष

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 बसंत पंचमी देने वाली है दस्तक, ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा और वंदना
Posted Date : 01-February-2019

बसंत पंचमी देने वाली है दस्तक, ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा और वंदना

रायपुर  हिन्दू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं। वे ब्रह्मा की मानसपुत्री हैं जो विद्या की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं। इनका नामांतर 'शतरूपा' भी है। इसके अन्य पर्याय हैं, वाणी, वाग्देवी, भारती, शारदा, वागेश्वरी इत्यादि। ये शुक्लवर्ण, श्वेत वस्त्रधारिणी, वीणावादनतत्परा तथा श्वेतपद्मासना कही गई हैं। इनकी उपासना करने से मूर्ख भी विद्वान् बन सकता है। माघ शुक्ल पंचमी को इनकी पूजा की परिपाटी चली आ रही है। देवी भागवत के अनुसार ये ब्रह्मा की स्त्री हैं।

सरस्वती माँ के अन्य नामों में शारदा, शतरूपा, वीणावादिनी, वीणापाणि, वाग्देवी, वागेश्वरी, भारती आदि कई नामों से जाना जाता है। देवी सरस्वती का पूजन करने के लिए बसंत पचंमी की इंतजार किया जाता है। माघ महीने में पूर्वी भारत में इसे बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। बंग्लादेश के पश्चमी भाग और नेपाल के कुछ हिस्सों में बसंत पचंमी मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं पूर्वी भारत में पीले कपड़े पहनती हैं। कई जगहों पर इस महीने में गुप्त नवरात्रि भी मनाई जाती है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इस बार बसंच पंचमी 10 फरवरी को पड़ने वाली है। 

संकष्टी चतुर्थी आज, 48 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, इस विधि से करें पूजन, होंगे सारे काम पूरे

इस दिन कहते हैं कि मां सरस्वती का अविर्भाव हुआ था। इस दिन पले रंग क वस्त्र पहनकर पीले रंग के पकवान खाते हैं। साथ ही ये दिन सबसे शुभ माना जाता है इसलिए सभी शुभ और मंगलकारी काम इस दिन किए जाते हैं। मां सरस्वती को ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है इसलिए इस दिन बच्चों को जोकि पढ़ाई करते हैं उन्हें अच्छी पुस्तकें भेंट की जा सकती हैं। साथ ही सरस्वती मां वीणा वादिनी थीं, इस दिन गायन में रुचि रखने वालों को भी वाद्य यंत्र भेंट दिया जा सकता है। 

बसंत पंचमी के साथ ही मौसम में भी बहार आ जाती है। इससे सरसों के फूल खिल जाते हैं और आम के पेड़ों पर बौर आ जाती हैं और साथ ही ठंड जाने के साथ मौसम खिल उठता है। 

कैसे होता है बसंत पंचमी पर पूजन?

इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है साथ ही उन्हें कमल के फूल अर्पित किए जाते हैं। 

इस दिन पुस्तकों और वाद्य यंत्रों की पूजा की जाती है। 

इस दिन दान करने का बहुत महत्व है। गरीब बच्चों को और जरुरतमंदों को दान देने से सौभाग्य बढ़ता है। इस दिन अध्ययन से संबंधी कुछ दान करने से ज्ञान में बढ़ोत्तरी होती है और मां सरस्वती का आर्शिवाद मिलता है। 

बगलामुखी जयंती: ऐसे करें उपासना, शत्रु बाधा से मिलेगी मुक्ति
Posted Date : 15-December-2018

बगलामुखी जयंती: ऐसे करें उपासना, शत्रु बाधा से मिलेगी मुक्ति

दस महाविद्या में आठवीं स्वरूप देवी बंगलामुखी का है. माता बंगलामुखी पीली आभा से युक्त हैं इसलिए इन्हें पीताम्बरा कहा जाता है. बंगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है. बंगलामुखी जयंती 23 अप्रैल 2018 (सोमवार) को है. इनका प्राकट्य स्थान गुजरात का सौराष्ट्र में माना जाता है. मां बगलामुखी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं अर्थात यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं. इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है. माता बंगलामुखी की पूजा तंत्र विधि की पूजा होती है. इसलिए इनकी पूजा बिना किसी गुरु के निर्देशन में नहीं करनी चाहिए.

बंगलामुखी पूजा के नियम और सावधानियां

शास्त्रों के अनुसार माँ बंगलामुखी की पूजा शत्रु के नाश के लिए नहीं करनी चाहिए.

बंगलामुखी की पूजा में पीले आसन, पीले वस्त्र, पीले फल और पीले भोग का प्रयोग करना चाहिए.

माँ बंगलामुखी के मंत्र जाप के लिए हल्दी की माला का प्रयोग करना चाहिए.

इनकी पूजा के लिए उपयुक्त समय संध्याकाल या मध्यरात्रि मानी गई है.

बगलामुखी जयंती के दिन माँ बगलामुखी को दो गाँठ हल्दी अर्पित करें.माँ से शत्रु और विरोधियों के शांत हो जाने की प्रार्थना करें. एक हल्दी की गाँठ अपने पास रख लें. दूसरी गाँठ को जल में प्रवाहित कर दें.ऐसा करने से हर प्रकार के शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है.

 आज देशभर में भाई दूज का त्योहार मनाया  जा रहा है जाने कैसे मानते है भाई दूज
Posted Date : 09-November-2018

आज देशभर में भाई दूज का त्योहार मनाया जा रहा है जाने कैसे मानते है भाई दूज

 रायपुर आज देशभर में भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा. कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है. रक्षाबंधन की ही तरह यह पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है.इस दिन बहन भाई का तिलक कर उसके दीर्घायु की प्रार्थना करती है. भाई भी बहन की सुरक्षा का संकल्प लेता है. बहन देवता की तरह अपने प्यारे भाई की आरती उतरती है.

बहन चावल के आटे से चौक बनाती है. इस पर भाई को बैठाकर उसकी पूजा करती है. भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाके पान, सुपारी, पुष्प इत्यादि रखकर उसके हाथ पर जल गिराती है. अब बहन भाई की आरती उतरेगी और उसके उसके हाथों में कलावा बांधेगी. इसके बाद बहन भाई को मिठाई खिलाएगी. भाई अगर बड़ा है तो बहन उसका आशीर्वाद लेगी और अगर भाई छोटा है तो वह बहन का आशीर्वाद लेगा.
 ऐसा मन जाता है की 
भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था. उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था, यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी. वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो. अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा, कार्तिक शुक्ला का दिन आया. यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया.
यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं. मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता, बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है. उसका पालन करना मेरा धर्म है. बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया. यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया. यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया.

यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो, मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करें, उसे तुम्हारा भय न रहे. यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की. इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी. ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता. इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है.
भाई दूज मुहूर्त
सुबह- 9:20 से 10:35 तक
दोपहर-1:20 से 3:15 तक
शाम-4:25 से 5:35 और 7:20 से रात 8:40 तक

अंचल में दुर्गोत्सव की धूम , पंचमी पर हुई विशेष पूजा
Posted Date : 15-October-2018

अंचल में दुर्गोत्सव की धूम , पंचमी पर हुई विशेष पूजा

भूपेन्द्र गबेल .... मालखरौदा (जांजगीर-चाम्पा) । इन दिनों शारदेय नवरात्रि क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जा रहा है । जहाँ देवी उपासक व उनके पुजारी माँ अम्बे की विधिवत पूजन किया जा रहा है । वही ग्राम सूलौनी के सुकलीपाली के शांतिनगर में दुर्गोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। जहां खजरानी के महराज ईश्वर कृष्ण शास्त्री द्वारा प्रतिदिन 3 से 5 बजे तक देवी भागवत कथा सुनाई जा रही है। ग्राम सुकलीपाली सलौनी में फ्रेंड्स नवयुवक दुर्गौत्सव समिति के दुवारा तृतीय वर्ष बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। रात में माता आरती के बाद ग्राम की सभी भक्तजन लोग गरबा डांस करते है जिस से जिस से पुरे गांव का माहौल पूरा भगति मय हो गया है । उसके बाद समिति के दुवारा सभी सरधालुवो के लिये भोजन भंडारा का भी आयोजन पर्तिदिन किया जा रहा है । जिसमे प्रसाद पाने के लिए भारी संखिया में लोग पहुच रहे है । शारदीय नवरात्री के पंचमी पर आज माँ स्कन्द माता की पूजा की गई वही सप्तमी व अष्टमी की विशेष पूजा का महत्व होता है। प्रतिदिन माता के मंदिरों व पंडालों में श्रद्धालु श्रीफल फूल प्रसाद अगरबत्ती के साथ माता के दरबारों में मत्था टेंक रहे हैं। वही रात्रि में देवी जसगीत पार्टियों द्वारा जसगीत , देवी कथा , विभिन्न प्रकार की झांकियों का प्रदर्शन कर रहे हैं तथा पंडालो में रास-गरबा नृत्य करते महिलाएं, युवतियां सहित सभी वर्ग के लोग दिखाई दे रहे है। नवरात्री में अंचल पूरी तरह माता की भक्तिमय हो गया है।
कल से देवी मंदिरों में जगमगाएंगे आस्था के दीप
Posted Date : 09-October-2018

कल से देवी मंदिरों में जगमगाएंगे आस्था के दीप

भूपेन्द्र गबेल .. मालखरौदा शारदीय नवरात्र कल 10 अक्टूबर से प्रारंभ होगा । इसके साथ घरों में पूजा पाठ का दौर चलेगा । वहीं मंदिरों में दुर्गा सप्तशती के पाठ व अखंड ज्योत प्रज्वलित किए जाएंगे गली मोहल्लों में पंडाल में माता की प्रतिमाओं की स्थापना कर उनकी पूजा-अर्चना की जाएगी । अंचल में तैयारियां जोरों शोरों से चल रही है माता दुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप देने के लिए कलाकार जुटे हुए हैं चंद्रपुर के चंद्रहासिनी व नाथल दाई मंदिर तथा अड़भार में मां अष्टभुजी देवी शक्ति पीठ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। यह क्रम 9 दिन तक जारी रहेगा कलाकार शक्ति रूपा की मूर्तियां तैयार करने में जुटे हुए हैं साथ ही माता के जयकारों के साथ नगर सहित ग्रामीण अंचलों में रास - गरबा का आयोजन किया जाएगा । जहां महिला सहित बालिकाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगी । डांडिया खेलने के लिए क्षेत्रफल की महिलाएं व युवतियां उत्साहित हैं इसके लिए कई दिनों पूर्व उनकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं । मां दुर्गा का आकर्षण श्रृंगार कर महाआरती कर उत्साह और उमंग के साथ नवरात्र पर्व क्षेत्र में मनाया जाएगा । मालखरौदा क्षेत्र में देवी मंदिरों में आस्था के ज्योत प्रज्वलित होंगे वहीं दुर्गा पंडालों में मां दुर्गा की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाएगी । क्षेत्र के नवदुर्गा समितियों द्वारा जस गीत गायन प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा । जिसमें जस गीत मानस पार्टियों द्वारा माता की जसगीतों के साथ नृत्य , आकर्षक झांकियां निकाली जाएंगी देखा जाए तो क्षेत्र में नवरात्रि की तैयारियां अपना हो चुकी है।
परंपरा अनुसार आज शाम 4 बजे श्रावण-भादौ मास में सोमवार को महाकाल की शाही सवारी निकलेगी
Posted Date : 03-September-2018

परंपरा अनुसार आज शाम 4 बजे श्रावण-भादौ मास में सोमवार को महाकाल की शाही सवारी निकलेगी

 उज्जैन। श्रावण-भादौ मास में सोमवार को महाकाल की शाही सवारी निकलेगी। परंपरा अनुसार शाम 4 बजे मंदिर से चतुरंगी सेना के साथ अवंतिकानाथ शाही ठाठबाट से नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे।
भक्तों को भगवान के एक साथ छह रूपों में दर्शन होंगे। भगवान महाकाल पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ पर शिवतांडव, नंदी पर उमा-महेश, रथ पर होलकर तथा सप्तधान स्वरूप में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। रात करीब 10 बजे पालकी पुन: मंदिर पहुंचेगी।
सवारी में 64 भजन मंडलियां शामिल होगी वही 28 स्वागत मंच बनाए जाएंगे। सवारी में 4 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है जिसके मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों की ड्यूटी आ लगाई गई है ।
कलेक्टर मनीष सिंह ने पुलिस कंट्रोल रूम पर पत्रकारों से चर्चा में बताया कि सोमवार को बाबा महाकाल की अंतिम और शाही सवारी तय समय अनुसार शाम ठीक 4:00 बजे पूजन के बाद मंदिर से बाहर आएगी जो 4:35 बजे गुजरी 5:15 बजे रामघाट 7:45 बजे टंकी चौक 8:30 बजे कंठाल 9:00 बजे गोपाल मंदिर 9:45 बजे गुजरी और 10:00 बजे पुनः महाकाल मंदिर में प्रवेश करेगी।सवारी के आगे प्रचार वाहन, कड़ाबिन, पुलिस बैंड, घुड़सवार दल, स्काउट गाइड, सेवादल और 64 भजन मंडलियां चलेगी । सवारी में 15 वे क्रम पर रजत पालकी में सवार बाबा महाकाल चंद्रमौलेश्वर स्वरुप में भक्तों को दर्शन देंगे , जिसके पीछे भगवान के अन्य स्वरूप और गाजे बाजे चलेंगे 

गुरु पूर्णिमा को लगने वाला यह चन्द्र ग्रहण सदी का सबसे लम्बा चन्द्र ग्रहण होगा
Posted Date : 26-July-2018

गुरु पूर्णिमा को लगने वाला यह चन्द्र ग्रहण सदी का सबसे लम्बा चन्द्र ग्रहण होगा

रायपुर चन्द्र ग्रहण  गुरु पूर्णिमा को लगने वाला यह चन्द्र ग्रहण खग्रास चन्द्र ग्रहण होंगा। खगोलविदों के मुताबिक, यह चन्द्र ग्रहण सदी का सबसे लम्बा चन्द्र ग्रहण होगा। आमतौर पर ग्रहण एक या डेढ घंटे की अवधि वाले होते है, 27 जुलाई को पढ़ने वाला चन्द्र ग्रहण 4 घंटे तक रहेगा।चन्द्र ग्रहण की शुरुआत चन्द्रमा के उदय के साथ रात्रि 11 बजकर 54 मिनट से होगी। ग्रहण का मध्यकाल रात्रि 1 बजकर 54 मिनट पर होगा। और ग्रहण की समाप्ति 3 बजकर 49 मिनिट पर होंगी। इस तरह ग्रहण की कुल अवधि  3 घंटे 55 मिनट की होगी।
27 जुलाई को रात के समय चंद्र ग्रहण तो दिखाई देगा ही साथ ही आकाश में एक अन्य लाल रंग का चमकता हुआ पिंड मंगल भी अपना विशेष प्रभाव छोड़ने जा रहा है। दरअसल उस दिन मंगल ग्रह सूर्य के लगभग विपरीत दिशा में होगा और इसलिए यह ग्रह पृथ्वी के करीब होगा। उस दौरान लाल ग्रह मंगल और लाल रंग का चंद्रमा रात के आकाश में चकाचौंध पैदा करेंगे
यह चन्द्र ग्रहण ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण जिस राशि पर में घटित होता है उन राशि बालों पर अपना कुप्रभाव छोड़ता है। यह चन्द्र ग्रहण उत्तराषाढा और श्रवण मास में मकर  राशि में घटित हो रहा है,इसलिए मकर राशि वालों को सावधान रहने की जरूरत है। चन्द्र ग्रहण के कुप्रभाव से बचने के लिए पूजा पाठ एवं जाप करना चाहिए। यह ग्रहण मिथुन,मेष,वृष,कर्क,सिंह,कन्या,धनु,कुम्भ राशि वालों के लिए भी कष्टकारी हो सकती हैं तुला,वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए यह चन्द्र ग्रहण शुभ होगा।

आज का पंचांग-चौघडिया★ राशिफल ★आपका दिन शुभ मंगलमय हो.★
Posted Date : 22-June-2018

आज का पंचांग-चौघडिया★ राशिफल ★आपका दिन शुभ मंगलमय हो.★

●●ऊँ●● ●★◆ *सुप्रभात* ::::::----- ●★● *आज का पंचांग*::::---- ★आपका दिन शुभ मंगलमय हो.★ ==================== ●कलियुगाब्द................5120 ●विक्रम संवत्.............2075 ●शक संवत्................1940 ●मास..........................ज्येष्ठ ●पक्ष..........................शुक्ल ●तिथी......................दशमी रात्रि 03.21 पर्यंत पश्चात एकादशी ●रवि......................उत्तरायण ●सूर्योदय...........05.46.13 पर ●सूर्यास्त...........07.10.23 पर ●सूर्य राशि....................मिथुन ●चन्द्र राशि....................कन्या ●नक्षत्र..........................चित्रा रात्रि 02.04 पर्यंत पश्चात स्वाति ●योग...........................परिघ रात्रि 01.01 पर्यंत पश्चात शिव ●करण........................तैतिल दोप 03.19 पर्यंत पश्चात गरज ●ऋतु..........................ग्रीष्म ●दिन........................शुक्रवार ==================== ★★ *आंग्ल मतानुसार* :- 22 जून सन 2018 ईस्वी । ==================== ★ शुभ अंक......................4 ★ शुभ रंग.....................नीला ==================== ★★ *राहुकाल* :- प्रात: 10.48 से 12.28 तक । ==================== ★★ *दिशाशूल* :- पश्चिमदिशा - यदि आवश्यक हो तो जौ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें। ==================== ★★ *चौघडिया* :- प्रात: 07.26 से 09.07 तक लाभ प्रात: 09.07 से 10.47 तक अमृत दोप. 12.27 से 02.08 तक शुभ सायं 05.29 से 07.09 तक चंचल रात्रि 09.48 से 11.08 तक लाभ । ==================== ★★ *आज का मंत्र* :- ।। ॐ गन्धर्वाय नमः ।। ==================== ★★ *सुभाषितानि* -- आरोप्यते शिला शैले यत्नेन महता यथा । पात्यते तु क्षणेनाधस्तथात्मा गुणदोषयो: ॥ ◆ *अर्थात :- शिला को पर्वत के उपर ले जाना कठिन कार्य है परन्तू पर्वत के उपर से नीचे ढकेलना तो बहुत ही सुलभ है । ऐसे ही मनुष्य को सद्गुणोसे युक्त करना कठिन है पर उसे दुर्गुणों से भरना तो सुलभही है ।* ==================== ★★ *आरोग्यं सलाह* :- ◆◆ *जीरा के फायदे :-* ◆ *1. कब्ज़ की समस्या हो तो जीरा, काली मिर्च, सौंठ और करी पाउडर को बराबर मात्रा में लें और इसका मिश्रण तैयार कर लें। इसमें स्वादानुसार नमक डालकर घी में मिलाएं और चावल के साथ खाएं। राहत मिलेगी।* ◆ *2. मेथी, अजवाइन, जीरा और सौंफ 50-50 ग्राम और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर पीस लें। एक चम्मच रोज सुबह सेवन करें। इससे शुगर, जोड़ों के दर्द और पेट के विकारों से आराम मिलेगा।* ◆ *3. आंवले को भूनकर गुठली निकालकर पीसकर धीमे भूनें। फिर उसमें स्वादानुसार जीरा, अजवाइन, सेंधा नमक और थोड़ी सी भुनी हुई हींग मिलाकर गोलियाँ बना लें। इन्हें खाने से भूख बढ़ती है। इससे डकार, चक्कर और दस्त में लाभ होता है। पानी में जीरा डालकर उबालें और छानकर ठंडा करें। इस पानी से मुंह धोने से आपका चेहरा साफ और चमकदार होता है।* ◆ *4. मानव शरीर में विभिन्न कारणों से गंदे तत्व आ जाते हैं जिन्हें शरीर पसीने और फुंसियों के रूप में बाहर निकालता है। जीरे का नियमित इस्तेमाल शरीर की शोधन की प्रक्रिया को तेज करता है और ऐसी गंदगियाँ मुंहासों और फुंसियों के तौर पर बाहर नहीं आती। इस तरह जीरे के सेवन से त्वचा साफ और सुंदर बनी रहती है।* ◆ *5. यदि आप बाल झड़ने की समस्या से ग्रसित हैं तो जीरा उसके लिए एक सही उपाय की तरह देखा जा सकता है। इसके लिए आप बाल धोने के बाद काला जीरा का तेल उस जगह पर लगाएं जहां बालों की संख्या निरंतर कम हो रही हो। ऐसा रोजाना करेंगे, तो जल्दी असर दिखाई देगा। इससे बाल घने और लंबे भी होते हैं।* ◆ *6. खुजली एक ऐसी समस्या है जिससे अधिकतर लोग परेशान रहते हैं। इससे हमारी त्वचा भी खराब होने लगती है। जीरा न केवल त्वचा को निखारने का काम करता है बल्कि खुजली जैसी परेशानी से भी राहत दिलाता है। इसके लिए आप थोड़े से पानी में जीरा उबाल लें, बाद में उसे छानकर नहाने वाले पाने में मिलाकर नहा लें। आपको आराम मिलेगा।* ==================== ★★ *आज का राशिफल* :- ★ *मेष* :- राजकीय अड़चन दूर होगी। घर-परिवार की चिंता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। व्यापार लाभदायी रहेगा। ★ *वृष* :- धन प्राप्ति सुगम होगी। घर-परिवार की चिंता रहेगी। प्रसन्नता रहेगी। संपत्ति के कार्य लाभ देंगे। कार्यसिद्धि से आशाजनक परिणाम आएंगे। ★ *मिथुन* :- स्वास्‍थ्य का ध्यान रखें। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। जल्दबाजी न करें। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। क्रोध, उत्तेजना पर संयम रखें। ★ *कर्क* :- घर-परिवार की चिंता रहेगी। जल्दबाजी से बाधा होगी। शोक समाचार मिल सकता है। दौड़धूप अधिक रहेगी। व्यापार में इच्छित सफलता मिलेगी। ★ *सिंह* :- थकान रहेगी। प्रतिष्ठा वृद्धि होगी। मेहनत का फल मिलेगा। धन प्राप्ति सुगम होगी। नौकरी, निवेश व यात्रा लाभ देंगे। ★ *कन्या* :- धनलाभ होगा। झंझटों में न पड़ें। उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। विवाद से बचें। वरिष्‍ठजनों का सहयोग मिलेगा। कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा। ★ *तुला* :- नौकरी, निवेश व यात्रा मनोनुकूल रहेंगे। अस्वस्थता संभव है। रोजगार मिलेगा। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। भूमि, जायदाद के सौदों में लाभ होगा। ★ *वृश्चिक* :- वाणी पर नियंत्रण रखें। व्ययवृद्धि होगी। शत्रु सक्रिय होंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। लाभ कम होगा। संतान की तरक्की होगी। ★ *धनु* :- धनलाभ होगा। बेचैनी रहेगी। थकान रहेगी। रुका हुआ धन मिलेगा, प्रयास करें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। कार्य की गति बढ़ेगी। ★ *मकर* :- जोखिम जल्दबाजी से बचें। हानि हो सकती है। कार्यस्‍थल पर परिवर्तन संभव है। योजना फलीभूत होगी। आर्थिक स्थिति कष्टकारी होगी। ★ *कुंभ* :- लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। जल्दबाजी से बचें। प्रमाद न करें। पूजा-पाठ में मन लगेगा। राजकीय बाधा दूर होगी। विशेष कार्य बन जाने से हर्ष होगा। ★ *मीन* :- वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। विवेक से कार्य करें, लाभ होगा। *************[जय माँ संतोषी]
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