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खबरीलाल रिपोर्ट ::- कुम्भ मेले में षंकराचार्य जी की उपेक्षा से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हुए व्यथित।।
Posted Date : 14-December-2018

खबरीलाल रिपोर्ट ::- कुम्भ मेले में षंकराचार्य जी की उपेक्षा से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हुए व्यथित।।

राज्य सरकार द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी के उपेक्षा से जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अत्यंत पीड़ा पहुंची है और वो क्षुब्ध हो गये हैं राज्य सरकार के इस कुकृत्य का निंदा करते हुए स्वामी अविमुकेश्वरनन्द ने जी ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि परमपूज्य पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज ने जिस तरह कुम्भ मेले के सन्दर्भ में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा उपेक्षा की पीड़ा को प्रकट किया है वह अत्यन्त दुःख दायिनी है । जिस देश में और प्रदेश में तथाकथित रूप से हिन्दुओं की सरकार हो,जहाँ शासक स्वयं भगवाधारी हो वहाँ सनातन धर्म के सर्वोच्च आचार्यों में से एक के प्रति ऐसा व्यवहार अकल्पनीय है । ऐसा नहीं है कि ऐसी गलती सरकारों द्वारा पहली बार हो रही हो । परम पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के साथ भी कुछ इसी तरह का व्यवहार इस सरकार का रहा है । विगत पैंसठ से अधिक वर्षों से लगातार माघमेले और कुम्भ पर्वों पर जिनका शिविर लगता था उनका शिविर अगर विगत वर्ष नहीं लगा था तो इसी सरकार की वजह से । हम आदि शंकराचार्य जी के अनुयायी भगवत्पाद आदि शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित चारों शंकराचार्य पीठों में समान श्रद्धा रखते हैं और जब कहीं उन परम श्रद्धेय पीठों या उन पर विराजे पूज्य आचार्यों का अनादर होता दिखाई देता है तो खून खौल उठता है । हमारी केन्द्र और प्रदेश की सरकारों से यह अपेक्षा है कि वे तत्काल पूज्यपाद पुरी पीठाधीश्वर जी महाराज की कुम्भ के सन्दर्भ की मानसिक पीड़ा को दूर करने के कदम उठायें अन्यथा हम सनातनी जनों को भी कुछ निर्णय लेने पड सकते हैं । हम स्मरण कराना चाहते हैं कि यह हिन्दू हितों की अनदेखी ही है जो तीन राज्यों से भाजपा सत्ता से बाहर हो चुकी है ।
पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- छगनलाल मूंधड़ा पहले निगम अध्यक्ष हैं जिन्होंने छग में बीजेपी के करारी हार के बाद इस्तीफा दिया।।
Posted Date : 12-December-2018

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- छगनलाल मूंधड़ा पहले निगम अध्यक्ष हैं जिन्होंने छग में बीजेपी के करारी हार के बाद इस्तीफा दिया।।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- आज 12-12-2018 को उद्योग भवन स्थित सभागार में एमडी अरुण प्रसाद एवं समस्त अधिकारीयों के समक्ष अपना स्तीफा सौपा । साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा की सर्वाधिक तीव्र गति से विकसित होते राज्य की श्रेणी में लाकर खड़ा करने के लिए डॉ. रमन सिंह जी एवं उनके योगदान को जनता हमेशा याद करेगी । समस्त अधिकारीयों एवं कर्मचारियों को अपने कार्यकाल के दौरान सहयोग हेतु धन्यवाद दिया तथा अधिकारीयों द्वारा प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया गया । इस अवसर पर सीएसआईडीसी के वरिष्ठ अधिकारी आलोक त्रिवेदी , एके दुबे , श्री शुक्ला , श्री एस के सोनी , श्री ओ पी बंजारे , श्री अभ्यंकर खरे , श्री जी के स्वर्णकार , श्री स्वपनिल अवस्थी सहित विभाग के अधिकारी कर्मचारी सहित मीडियकर्मी उपस्थित थे ।
पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- कब तक मंदिर यूं ही टूटते रहेंगे ??? एक अकेला दंडी सन्यासी, मंन्दिरों कि रक्षा हेतु लड़ रहे हैं , लेकिन कब तक ......
Posted Date : 09-December-2018

पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- कब तक मंदिर यूं ही टूटते रहेंगे ??? एक अकेला दंडी सन्यासी, मंन्दिरों कि रक्षा हेतु लड़ रहे हैं , लेकिन कब तक ......

भारत के माननीय संवेदनशील और विकाशशील पीएम नरेंद्र मोदी के सपनों को पूरा करने का बीड़ा उठाये हैं उत्तरप्रदेश के शासन एवं प्रशासन ने। विकास क्या - विश्वनाथ कॉरिडोर / गंगा पाथवे निर्माण करने का। बहुत ही उत्तम निर्णय जिससे लोगों की परेशानी न हो और श्रद्धालुगण सीधे गंगा स्नान पश्चात बाबा विश्वनाथ का दर्शन, पूजन कर सके। क्या इस विकास और सुविधा हेतु विश्व की धर्म राजधानी माने जाने वाली काशी जो शिवजी के त्रिशूल पर बसा है , जहां बाबा विश्वनाथ का मंदिर है उसके चारों ओर स्थित पुराणों में वर्णित मंदिर, प्राचीन मंदिर, देव विग्रहों को तोड़ना जरूरी था ? क्या करोड़ों सनातन धर्मियों के आस्था के केंद्र, विश्वास के केंद्र पर कुठाराघात करना जरूरी था ? क्या दूसरे तरीके से पीएम मोदीजी के सपनों को पूरा नहीं किया जा सकता था ? क्यों पक्कामहाल उजड़ गया ? क्यों बाबा विश्वनाथ परिसर के लोगों को अपना मकान, दुकान बेचना पड़ा ? क्या लोगों ने स्वतः ही अपने मकान-दुकान को प्रशासन के हाथों में सौंप दिए ? क्या उनके ऊपर प्रशासन ने किसी तरह का दवाब नहीं बनाकर उनके मकान-दुकान को अपने कब्जे में लिए हैं और उसे तोड़ रहे हैं ? इसे स्वीकार करना थोड़ा मुश्किल है कि प्रशासन / बिचौलियों ने कोई दवाब नहीं बनाए होंगे। काशी के मंन्दिरों एवं देव विग्रहों को बचाने एक अकेला दंडी सन्यासी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती केवल सामने आए हैं साथ मे कुछ आस्थावान प्रतिष्ठित लोग, श्रद्धालु उनके साथ खड़े हुए। लेकिन काशी शहर की लाखों सनातन धर्मी जनता, इन मंन्दिरों मे माथा टेकने वाली जनता, मन्नते मांगने वाली जनता, पूजार्चना करने वाली जनता कहाँ चले गए यह बहुत ही आश्चर्य की बात है। जिस काशी में आकर लोग धन्य महसूस करते हैं, जहां लोग मोक्ष की कामना करते हैं वहां इस तरह की घटना घटित हुई यह सभी सनातन धर्मियों के समझ से परे है। तकलीफ तब और हुई जब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ने सही मायने में अपनी भूमिका अदा नहीं किये। क्या यह समझ लिया जाए कि वे देखकर भी अंधे बने हुए थे और वस्तु स्थिति को जन मानस के सामने नहीं लाए। इतना विरोध हुआ लेकिन इन्हें मेन स्ट्रीम मीडिया ने उचित स्थान नहीं दिया। यदि दिया होता तो आज काशी में मंदिर, प्राण प्रतिष्ठित देव विग्रह टूटने से बच जाते और असमय देवताओं को मृत्यु वरण नहीं करना होता। प्राण प्रतिष्टित मूर्तियों को तोड़ना किसी की हत्या कर देने के समान हैं और इस हेतु कानून के जानकारों को, संविधान के जानकारों को आगे आना चाहिए था और सरकार व प्रशासन को समझाना था। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती, ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द महाराज, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज, ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानन्द महाराज, साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, बाबा विश्वनाथ मंदिर के महंत बबलू महाराज, सुनील शुक्ल, संजय पांडे, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश पांडेय, सतीश अग्रहरि आदि सन्त, विद्ववत जन ही केवल काशी के मंन्दिरों को बचाने हेतु लड़ाई शुरू किए जिस हेतु दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती जी महाराज के नेतृत्त्व में काशी की जनता को जागृत करने हेतु पंचक्रोशी की यात्रा किये, स्वामिश्री: ने पराक व्रत रखा, वाराणसी जिले के प्रत्येक गांवों में जाकर लोगों को इस घोर अनिष्ठ कार्य के बारे में बताया, सर्व देव कोपाहर महायज्ञ किये तथा विभिन्न समय अपनी आवाज बुलंद किये। इतने सब के बावजूद प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंगी और प्रशासन खुद पाप कार्य के भागीदार बने। कहावत है जो जैसा करता है उसे इस जीवन मे ही उस किये गए कार्य का फल भोगकर जाना पड़ता है । यह कहावत सच न हो इस हेतु स्वामिश्री: ने यज्ञ कर सभी लोगों की तरफ से परब्रह्म परमात्मा से माफी भी मांगे। बाबा विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने बाबा विश्वनाथ को ही वीवीआइपी बना दिया है और वीआईपी दर्शन हेतु 300/- रुपये का टिकट बेचने लगे हैं और ऑनलाइन भी टिकट बिकने लगा है। जो व्यक्ति 300/- रुपये का टिकट लेगा वह चंद मिनटों में दर्शन, पूजन कर आ जायेगा । क्या अपने ही भगवान के दर्शन हेतु अब श्रद्धालुओं को पैसे देने होंगे ? जो व्यक्ति पैसा न दे उनके दर्शन क्या नहीं होंगे ? उनके भी दर्शन होंगे जिस हेतु उन्हें आम श्रद्धालु की तरह पंक्ति में खड़े होकर घण्टों बाद दर्शन करने मिलेंगे। क्या ऐसी व्यवस्था कर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को वीआईपी और आम में नहीं बांट दिया ? इस पर कोई व्यक्ति हिम्मत कर नहीं पूछ पा रहा है कि ऐसा व्यवस्था क्यों और किसलिए बनाया गया। काशी को यदि काशी बनाये रखना है तो काशीवासियों के साथ साथ भारत के समस्त सन्त, महात्मा, सनातन धर्मियों को स्वामिश्री: के साथ खड़ा होना पड़ेगा, मंदिरों व देव विग्रहों को तोड़ने से रोकना होगा तभी पाप मुक्त हो सकते हैं। स्वामिश्री: ने कभी विकास का विरोध नहीं किये हैं। उन्होंने केवल और केवल मंदिर और देव विग्रहों को तोड़ने का विरोध किये हैं। समय बड़ा बलवान है और वह सही वक्त पर सही समय ठीक दिखा देगा। हर हर महादेव।
पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी :: स्वामिश्री ने भरी हुंकार, पूछा
Posted Date : 05-December-2018

पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी :: स्वामिश्री ने भरी हुंकार, पूछा " कहाँ है हमारे भगवान " ।।

पूरे भारत मे एक मात्र क्रांतिकारी सन्त तथा ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ही मंदिर एवं मूर्तियों के तोड़े जाने पर अपनी आवाज उठा रहे हैं और मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़कर जो विकास काशी में हो रहा है उसका तीव्र विरोध कर रहे हैं। जब कि केंद्र और उत्तरप्रदेश राज्य में हिंदुत्त्ववादी सरकार है फिर भी विकास , विकास और विकास के नाम पर प्राणप्रतिष्ठित देव विग्रहों की हत्या क्यों कि जा रही है। भगवान का पूजन, आरती, राग भोग इत्यादि प्राणप्रतिष्ठित मूर्तियों की होती है। ज्ञात हो कि काशी में पुराणों में वर्णित मंदिर हैं, अति प्राचीन मंदिर है जिनका रोजाना पूजार्चना की जाती है। ऐसी स्थिति में क्या हिंदुत्त्ववादी सरकार के मन मे कोई दया अपने आराध्य देवों पर नहीं आ रही है। विश्व के धार्मिक राजधानी के रूप में जाने जाना वाला काशी का ऐसा स्वरूप / हाल होगा शायद किसी ने कभी नहीं सोचा होगा। एक बात और गौर करने वाली है कि काशी के सनातन धर्मी जनता भी चुप है और वे क्यों चुप हैं यह वे ही बता सकते हैं। ऐसे परिस्थिति से प्रतीत होता है कि काशी की जनता शायद नास्तिक हो चुकी है या वे किसी कारण वश डरी हुई है। क्यों प्रहार हो रहे हैं सनातन धर्मियों के आस्था के केंद्र पर ? क्या मूर्ति, मन्दिर तोड़ने वालों के हाथ नहीं कांप रहे हैं ? यह किस तरह की विवशता है ? @ स्वामिश्री ने पूछा और कहा - ???? कहाँ हैं हमारे भगवान ? ???? टूटे में ही हम तो दर्शन कर के संतुष्ट हैं लेकिन मूर्ति को कम से कम टूटे में ही रहने दो। आप मूर्ति ही हटा दे रहे हो यह कहाँ का नियम है ?????यह विश्वनाथ जी के नाम से अनर्थ हो रहा है।???? जिम्मेदार अधिकारी आकर बताए हमें। ???? हम ने स्वयं नियम का पालन किया है । ???? यहां तो हमारी मूर्ति ही गायब है, हम को दर्शन करना है, ये कैसे होगा ? ऐसा कोई विकास नहीं होता ।
पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट (काशी, 29-11-2018) ::- आदर्श राम का मंदिर नहीं, आराध्य देव राम का मंदिर होगा - शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द ।।
Posted Date : 29-November-2018

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट (काशी, 29-11-2018) ::- आदर्श राम का मंदिर नहीं, आराध्य देव राम का मंदिर होगा - शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द ।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने परमधर्मादिश के आसंदी से परम् धर्मादेश सुनाते हुए कहा कि - हमे आदर्श राम का मंदिर नहीं अपितु आराध्य देव राम का मंदिर चाहिए जो हम सभी धर्माचार्यों की राय है। ज्ञात हो कि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 का आयोजन 25 से 27 नवंबर 2018 तक सीरगोवर्धनपुर, काशी में आयोजित किया गया जिसमें काशी व अन्य स्थानों पर मंदिर तोड़े जाने पर, गंगा में बढ़ते प्रदूषण पर, गंगा के अविरल प्रवाह पर, राम मंदिर निर्माण पर व अन्य मुद्दों पर उपस्थित देश एवं विदेश से पधारे धर्म सांसद एवं धर्माचार्यों ने अपनी बात बेबाकी से रखी जिसमे राम मंदिर का मुद्दा सबसे ज्यादा अहम था। परम् धर्माधीश के आसंदी से बोलते हुए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा कि आराध्य देव राम के मंदिर में प्रभु राम का सच्चिदानन्द स्वरूप विराजमान होगा। आगे उन्होंने कहा कि श्रीराम के जन्म स्थान पर कोई भी परिवर्तन नहीं होगा और प्रभु राम का मंदिर उसी स्थान पर ही बनेगा। अब सही समय है कि मुस्लिम स्वयं हिंदुओं को भगवान श्रीराम का जन्म भूमि सौंप दे और मंदिर बनाने में अपनी सहभागिता प्रदान करे। आगे शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा कि धर्म पर बांटने वालों की साजिशें कभी सफल नहीं होगी क्यों कि धर्म के नाम पर सभी भारतीय एक हैं और एक ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि काशी में आयोजित परम् धर्म संसद 1008 किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं किया गया अपितु यह आयोजन सौ करोड़ सनातनियों को अधर्म से बचाने के लिए किया गया है तथा जनवरी 2018 में होने वाले प्रयाग कुम्भ में इस बाबत और भी चर्चा होंगे।
पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- राम मंदिर को राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित करे सरकार - शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ।।
Posted Date : 28-November-2018

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- राम मंदिर को राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित करे सरकार - शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ।।

काशी के सीरगोवर्धनपुर में आयोजित तीन दिवसीय सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 के 27 नवम्बर 2018 को समापन पश्चात 28 नवम्बर को सुबह केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में पत्रकार वार्ता में ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने ने अपने परम धर्मादेश में सरकार से आग्रह किया कि यह जनहित से जुड़ा मामला है जिस हेतु राम मंदिर मुद्दे को राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित कर आगामी शीत कालीन संसद सत्र में इस परम् धर्मादेश पर विचार कर संविधान में संशोधित करे। इस संशोधन के होने पर सर्वोच्चय न्यायालय को चार हफ्ते के अंदर अपना फैसला देना होगा अन्यथा जो स्टे लगा हुआ है वह स्वतः ही निष्प्रभावी हो जाएगा। आगे शंकराचार्य महाराज ने कहा कि यह परम धर्मादेश लोकसभा अध्यक्ष के साथ साथ सभी सांसदों को प्रतिलिपि भेजी जाएगी जिससे आगामी शीतकालीन सत्र में इस जनहित और अहम मुद्दे पर विचार हो सके और संविधान में संशोधन कर इसे राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित करे। लोकतंत्र में सरकार जनता के अविभावक के रूप में होती है इसलिए जनता की मांग को अविभावक को महत्त्व देना चाहिए साथ ही राम मंदिर मुद्दों को देश के चारों पीठ के शंकराचार्यों और धर्माचार्यों के ऊपर छोड़ देना चाहिए। प्रेस वार्ता में दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के उपस्थिति में परम धर्मादेश को पढ़कर सुनाया। ज्ञात हो कि सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 का आयोजन स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने काशी के सीरगोवर्धनपुर में आयोजित किया जिसमें शंकराचार्य के साथ साथ देश के प्रमुख सिद्ध संत, महात्मा, धर्म सांसद व जनता सम्मिलित हुए। आज के प्रेस वार्ता में ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द , ब्रह्मचारी सहजानन्द, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, ब्रह्मचारी धारानन्द, ब्रह्मचारी शारदानन्द अन्य सन्त, महात्माओं के साथ लता पांडेय, चुन्नू पंडित, रमेश उपाध्याय, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश पांडेय, बबलू महाराज व आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।
जानिए ब्रह्मचारी धारानन्द ने राम मंदिर पर क्या कहा :- पत्रकार खबरीलाल ।।
Posted Date : 28-November-2018

जानिए ब्रह्मचारी धारानन्द ने राम मंदिर पर क्या कहा :- पत्रकार खबरीलाल ।।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट (काशी, 28-11-2018) ::- काशी के सीरगोवर्धनपुर में ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि व क्रांतिकारी सन्त दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती द्वारा 25 से 27 नवंबर 2018 तक आयोजित सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 में परमहंसी स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम के ब्रह्मचारी धारानन्द जी महाराज ने कहा कि किसी भी सूरत में हम सभी 100 करोड़ सनातन धर्मियों के आराध्य भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या स्थित राम जन्म भूमि पर अतिशीघ्र बनना चाहिए और इस हेतु सर्वोच्चय न्यायालय विलंब न करते हुए इस पर त्वरित सुनवाई कर राम मंदिर निर्माण का मार्ग सुगम करे जिससे करोड़ों सनातन धर्मियों के आस्था पर किसी भी प्रकार का कुठाराघात न हो। हम सब यह चाहते है कि द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के नेतृत्त्व में देश के अन्य संत, महात्माओं व सनातन धर्मियों के अरमान पूर्ण हो। काशी में आयोजित सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 में उपस्थित देश विदेश से आये धर्म सांसद ने एक सुर में कहा कि सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर निर्माण पर अतिशीघ्र फैसला दे।
छत्तीसगढ़ भाषा दिवस पर विशेष
Posted Date : 28-November-2018

छत्तीसगढ़ भाषा दिवस पर विशेष

छत्तीसगढ़ी भाषा किसी परिचय की मोहताज नहीं है। छत्तीसगढ़ राज्य से इसका गहरा संबंध है। यह करोड़ों छत्तीसगढ़ियों के आत्म सम्मान और उसकी अस्मिता की भाषा है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति ने नींव के पत्थर का काम किया है। छत्तीसगढ़ी के लोक में जो अलोक है वह अन्य भारतीय भाषाओं से कहीं अधिक है। छत्तीसगढ़ी छत्तीगसढ़ का दरपन है, श्रृंगार है। यह छत्तीसगढ़ियों के रग-रग में दिखाई देती है।

छत्तीसगढ़ की भाषा है छत्तीसगढ़ी। पर क्या छत्तीसगढ़ी पूरे छत्तीसगढ़ में एक ही बोली के रुप में बोली जाती है? हम पूरे छत्तीसगढ़ में बोलीगत विभेद पाते हैं। डॉ. सत्यभामा आडिल अपने "छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य" (विकल्प प्रकाशन, रायपुर, 2002 , प-.7 ) में कहते हैं कि यह बोलीगत विभेद दो आधारों - जातिगत एवं भौगोलिक सीमाओं के आधार विवेचित किये जा सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने छत्तीसगढ़ की बोलियों का निर्धारण निश्चयन किया है -

छत्तीसगढ़ी बोली बहुत ही मधुर है। इस बोली में एक अपनापन है जो हम महसूस कर सकते हैं। हिन्दी जानने वालों को छत्तीसगढ़ी बोली समझने में तकलीफ नहीं होती - "उसने कहा" को छत्तीसगढ़ी में कहते हैं "कहीस","मेरा" को कहते हैं "मोर", "हमारा" को "हमार", "तुम्हारा" को "तोर" और बहुवचन में "तुम्हार"।

छत्तीसगढ़ी - रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में जो बोली सुनाई देती है वह है छत्तीसगढ़ी।

खल्टाही - छत्तीसगढ़ की यह बोली रायगढ़ जिले के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। यह बोली हमें बालाघाट जिले के पूर्वी भाग में, कौड़िया में, साले-टेकड़ी में और भीमलाट में सुनाई देती है।

सरगुजिया- सरगुजिया छत्तीसगढ़ी बोली सरगुजा में प्रचलित है। इसके अलावा कोरिया और उदयपुर क्षेत्रों में भी बोली जाती है।

लरिया - छत्तीसगढ़ कीे यह बोली महासमुंद, सराईपाली, बसना, पिथौरा के आस-पास बोली जाती है।

सदरी कोरबा - जशपुर में रहनवाले कोरबा जाति के लोग जो बोली बोलते हैं वह है सदरी कोरबा। कोरबा जाति के लोग जो दूसरे क्षेत्र में रहते हैं जैसे पलमऊ, सरगुजा, विलासपुर आदि, वे भी यही बोली बोलते हैं।

बैगानी - बैगा जाति के लोग बैगानी बोली बोलते हैं। यह बोली कवर्धा, बालाघाट, बिलासपुर, संबलपुर में बोली जाती है।

बिंझवारी - बिंझवारी में जो बोली बोलते हैं, वही है बिंझवारी। वीर नारायन सिंह भी बिंझवार के थे। रायपुर, रायगढ़ के कुछ हिस्सो में यह बोली

जब हम छत्तीसगढ़ी कहते हैं तो उसका तात्पर्य छत्तीसगढ़ में जन्मी हल्बी और गोंड़ी भी है। यह सनातन सत्य है कि हल्बी और गोंड़ी छत्तीसगढ़ की सहोदरा भाषाएं हैं

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