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काशी के व्यापिरियों ने निकाला न्याय मार्च।

काशी के व्यापिरियों ने निकाला न्याय मार्च।

सुदीप्तो चटर्जी - विशेष रिपोर्ट ::- मंगलवार की देर रात काशी के विश्वनाथ मंदिर छत्ता द्वार के पास रात में दुकान तोड़ने के प्रयास किये गए और एक दुकान का ताला तोड़कर सामान फेंके गए जिसके विरोध में व्यापारियों ने बुधवार शाम 6 बजे आज राष्ट्रीय ध्वज के साथ छत्ताद्वार से चौक थाना तक व्यापारियों एक साथ होकर न्याय मार्च निकाला और थाने पर दुकान का ताला तोड़ने वाले कर्मचारियों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग को लेकर घंटों थाने पर जमे रहे। ज्ञात हो कि काशी में विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर हेतु पुराणों में वर्णित मंदिर तोड़ दिए गए जिससे वहां निवासरत देवताओं की पूजा बन्द हो गई। इस विषय को गंभीरता से लेते हुए ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि तथा श्रीविद्या मठ के प्रमुख दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिर बचाओ आंदोलन की शुरुवात की जिसे काशीवासियों के साथ साथ दूसरे संत महात्माओं ने उनका साथ दिया और विगत दिन शंखनाद पश्चात काशी के अस्सी घाट से राजघाट तक पदयात्रा किये जिसमे बटुकों के साथ साथ विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने भी पदयात्रा में शामिल होकर विरोध दर्ज करवाया। जगह जगह पदयात्रा का स्वागत किया गया। दूसरे दिन महिलाओं ने भी सूप बजाकर विरोध दर्ज करवाए। आज बुधवार नाविक संगठनों ने भी स्वामिश्री का साथ देते हुए विरोध प्रदर्शन किए। काशी को बचाने, धरोहर को बचाने, काशी को मूल स्वरूप में रखने हेतु यह आंदोलन विकट रूप धारण करते जा रहा है जिसे शासन एवं प्रशासन को त्वरित निर्णय लेते हुए कॉरिडोर के ब्लू प्रिंट में बदलाव करना होगा। काशी में देवताओं का वास है तथा धर्म नगरी के नाम से काशी प्रसिद्ध है। लोगों का मानना है यदि विध्वंश के कारण देवता काशी छोड़ देते हैं तो इसके दुष्परिणाम सामने आने लगेंगे।

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