राज्य

खुद को हिन्दू बोल रहे हो फिर भी मन्दिर तोड़ रहे हो : अविमुक्तेश्वरानंद

खुद को हिन्दू बोल रहे हो फिर भी मन्दिर तोड़ रहे हो : अविमुक्तेश्वरानंद

खुद को हिन्दू बोल रहे हो । फिर भी मन्दिर तोड़ रहे हो ? सम्मानित से सन्त रहे हो, गोरखपुरी महन्त रहे हो मुख्यमंत्रि की कुर्सी पा, औरंगजेब से जोड़ रहे हो ? खुद को हिन्दू बोल रहे हो । फिर भी मन्दिर तोड़ रहे हो ? ले हिन्दू का वोट रहे हो , दे हिन्दू को चोट रहे हो छूटेगी इक दिन ये कुर्सी , हाय! धर्म क्यूँ छोड़ रहे हो ? खुद को हिन्दू बोल रहे हो । फिर भी मन्दिर तोड़ रहे हो ? अभी समय है आंखें खोलो, अभी समय है शिव शिव बोलो छोड़ो, जो दुष्कृत्य हो रहाहमसे क्यूँ मुख मोड़ रहे हो? खुद को हिन्दू बोल रहे हो , फिर भी मन्दिर तोड़ रहे हो ? यदि अब मन्दिर एक भी टूटा, समझो भाग्य तुम्हारा फूटा हम समझेंगे तोड़ के मन्दिर , हमसे नाता तोड़ रहे हो । खुद को हिन्दू बोल रहे हो , फिर भी मन्दिर तोड़ रहे हो ?

Leave a comment