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महिला पत्रकार का गाल थपथपाना राज्यपाल को पड़ा महंगा, लिखित बयान जारी कर मांगी माफी

महिला पत्रकार का गाल थपथपाना राज्यपाल को पड़ा महंगा, लिखित बयान जारी कर मांगी माफी

तमिलनाडु. राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित एक बार विवादों में फंस गये है. इस बार वे एक महिला पत्रकार का गाल सहलाने की वजह से विवादों में आ गये. हालांकि मामला बढ़ता देख 78 वर्षीय राज्यपाल ने आधिकारिक रूप से लिखित माफी मांगी है. जिसमें उन्होंन सफाई देते हुए कहा है कि महिला पत्रकार को पोती समझकर दुलार किया है.

बता दे कि हाल ही में कॉलेज सेक्स स्कैंडल केस में वायरल हुई ऑडियो क्लिप में उनका नाम भी शामिल था. इस मामले के सामने आने के बाद राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित सफाई देने के लिए मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. जिसमें उन्होंने एक महिला पत्रकार के गाल थपथपा. जिसके बाद उस महिला पत्रकार सहित विपक्ष ने राज्यपाल पर निशाना साधते हुए उनकी आलोचना शुरू कर दी.
हालांकि मामला बढ़ता देख राजभवन की ओर से जारी सफाई में कहा है कि उन्होंने किसी गलत उद्देश्य से महिला पत्रकार को नहीं छुआ था. राज्यपाल का कहना है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में आपने अच्छा सवाल पूछा था, जिसकी वजह से शाबासी के तौर पर मैंने आपको पोती के तौर पर समझा और गाल पर दुलार से हल्की सी थपकी दी थी. सफाई पत्र में कहा गया है कि अगर महिला पत्रकार को राज्यपाल के इस कदम से दुख पहुंचा है तो वो इसपर खेद प्रकट करते हैं और उसके लिए मांफी मांगते हैं.

यह कोई पहला मौका नहीं है जब पुरोहित विवादों में आए हों. इससे पहले भी इनके विवादास्पद बयान देश की राजनीति में बवाल पैदा कर चुके हैं. साल 2007 में पुरोहित ने ये कह कर तहलका मचा दिया था कि आरएसएस चीफ औऱ तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच एक घंटे की गुप्त मुलाकात हुई थी. जिसमें ये समझौता हुआ था कि अगर आरएसएस 1989 के चुनाव में कांग्रेस का साथ देती है तो अयोध्या राम मंदिर निर्माण में कांग्रेस उनका साथ देगी.

गौरतलब है कि देवांग आर्ट्स कॉलेज की प्रोफेसर निर्मला देवी के मामले को लेकर गवर्नर की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी. इस महिला शिक्षक पर आरोप है कि उन्होंने अपनी छात्राओं को अधिकारियों के साथ एडजस्ट करने बदले पैसे और अधिक नंबर मिलने का प्रलोभन दिया था. जिसके बाद उसको गिरफ्तार कर लिया गया था. उधर, शिक्षिका निर्मला देवी पर यह भी आरोप है कि उन्होंने राज्यपाल के नाम पर लोगों को भ्रमित किया था. उन्होंने अपने आप को राज्यपाल (पुरोहित इस यूनिवर्सिटी के चांसलर) का करीबी बताया था. हालांकि राज्यपाल ने उनके दावे को सिरे से खारिज कर दिया था.

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