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डोंगरीडीह में भगवान कालिदास-वि़द्यामती मंदिर की स्थापना हर्शोल्लास के साथ की गई।

डोंगरीडीह में भगवान कालिदास-वि़द्यामती मंदिर की स्थापना हर्शोल्लास के साथ की गई।

जांजगीर मालखरौदा-विगत दिनों बलौदा के तहसीलदार डां रामविजय षर्मा के मुख्य आत्थिय में मालखरौदा तहसील के अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव डोंगरीडीह मे भगवान कालिदास-वि़द्यामती मंदिर की स्थापना आदिवासी परम्परा तथा विधि विधान से की गई । उल्लेखनीय है कि डां रामविजय षर्मा ने आदिवासी महाकावि कालिदास पर गहन षोध कर प्रमाणित किया है कि महाकावि कालिदास आदिवासी समाज के पण्डो जनजाति के थे। उनका जन्म 15 नवम्बर 350 ई.को सरगुजा (अम्बिकापुर) जिला के उदयपुर तहसील के आदिवासी बाहुल्य रामायण कालीन गांव मृगाडांड मे हुआ था जहा भगवान राम ने मारीच को दण्ड(डांड़) दिया था ।उनके पिता का नाम षिवदास पण्डो तथा माता का नाम तारा देवी था। कालिदास की मृत्यु 15 मार्च 450 ई़़़ को हुआ था । षुरू मे कालिदास षिव के उपासक थे तथा बाद मे काली के उपासक बन गये थे। उनका बचपन मृगाडांड बीता था तथा उन्होने मेघदूत तथा ़ऋतुसंहार की रचना मृगाडांड की सरहद मे स्थित रामगिरि पहाड़ी (रामगढ़ पहाड़ी )पर किया थ़्ा। डां रामविजय षर्मा का षोधपत्र बनारस हिन्दू विष्वविद्यालय से प्रकाषित एक अंतर्राश्ट्रीय षोध पत्रिका में प्रकाषित हुआ था । मेघदूत और ़ऋतुसंहार का अनुवाद विष्व की 100 से अधिक भाशाओं मे किया जा चुका है। बाद मे आदिवासी महाकवि कालिदास उज्जैन के राजा चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के दरबार मे गये और नौ रत्नां में उनका प्रथम स्थान था । डोंगरीडीह में भगवान कालिदास वि़द्यामती मंदिर की स्थापना समारोह के अवसर पर डोंगरीडीह सरपंच श्री दरसराम बंजारे समारोह कीअध्यक्षता की तथा जनपद सदस्य लालमणि पटेल,जनपद सदस्य फुलेष्वर चन्द्रा तथा पत्रकार राजू साहू विषिश्ट अतिथि के रूप मे थे । इस अवसर पर कालिदास प्रसाद (काला मुर्गा तथा महुआ दारू )का वितरण किया गया जिसे आदिवासी समाज तथा अतिथियों ने ग्रहण किया ।इस अवसर पर डां रामविजय षर्मा ने कालिदास विद्यामती मेला लगाने की घोशणा की ।श्री दरस राम बंजारे जो कालिदास बारहा डोंगरीडीह के अध्यक्ष भी है को कालिदास बैगा के रूप मे नियुक्त किया गया।इस अवसर पर आदिवासी समाज तथा अनुसूचित जाति समाज के लोग बड़ी संख्या मे सम्मिलित हुए

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