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ये कैसा डिजिटल इंडिया...आजादी के बाद भी नही पहुची विकास की किरण

ये कैसा डिजिटल इंडिया...आजादी के बाद भी नही पहुची विकास की किरण

BBN24 के लिए सूरज लहरे की खास रिपोर्ट

राजनांदगांव := छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा से लगे बैगाओ के गांव सिंगबोरा से हर माह नियत तारीख पर कावर यात्रा निकलती है । यह यात्रा बाबा धाम या शिवमंदिर पर जल चढाने के लिये नही है , बल्कि पेट की भूख मिटाने के लिये है ।

छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर बसे गांव जहां सडक सवास्थ्य सुविधा तक नही जंगली रास्ते से 12 किमी पैदल सफर कर राशन के समान सिरपर लादकर गांव लाते है ग्रामीण जी हां जिला मुख्यालय से राजनांदगांव छुईखदान ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कोपरो के आश्रित ग्राम सिंगबोरा के बैगा आदिवासी गांव से 12 कि.मी. दूर उचित मूल्य की सरकारी राशन लेने के लिए गाँव के ग्रामीण समूह में कावर लेकर निकलते है ।

रास्ता जंगली है , इसलिए खतरा भी साथ साथ ही चलता रहता है आदिवासी इलाको में सरकार की खास पहल के बावजूद कई ऐसे गांव रह गए हैं जहां सडक नही होने की वजह से विकाश कही ठहरा हुआ लगता है ।

सिंगबोरा भी उसमें से एक है । यहां बैगा आदिवासीयों को पानी ,बिजली ,शिक्षा , चिकित्सा, जैसी बुनियादी सुविधाए नही मिल रही है ।वही ग्रामीण सूत्रो का मानना है की इस गांव में अब तक प्रशासन ने दस्तक नही दी है । जानकारी के अनुसार गांव तक पहुंचने के लिये सडक के नही होने के कारण बैगा आदिवासियों को कई नालों को पार करने के बाद वहां जंगली रास्ते से गांव पहुंचना पडता है । गांव पहुचने के पहले उन्हे दलदल और गढढो चट्टानों को भी पार करना पडता है । सडक नही होने से ग्रामीण पंगडंडी का उपयोग करते है । बारिश के दिनो में जंगली रास्ता बंद होने से गांव से बाहर नही आ सकते । सडक पर सायकल और मोटरसायकल , वाहन नही चलता जिससे ग्रामीण चावल सहित अन्य समान कावर या सिर पर लादकर लाते है । इस गांव के राशन दुकान कोपरो मे है जो गांव से करीब 12 किमी दूर है ।

अंधेरे में कटती है रात।

सिंगबोरा के रामलाल सवनूराम नेरसिह अंकलहा कोपरो के दिनेश बोरकर ने बताया कि गांव को रोशन करने सोलर सिस्टम लगाया था , जो रात में दो घंटा रोशनी देता था वो भी मरम्मत के अभाव में वर्तमान में बंद है । बिजली नही होने से रात अंधेरे मे कट रही है । यही नही गांव में पीने के उपयोगी पानी नही है । हेंड पंप है जो जल स्तर नीचे चले जाने से लोग अपने प्यास दुषित नदी से बुझाते देखा जा सकता है किसी की तबियत खराब होने पर कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंचाना पडता है। कई दफा मरीज रास्ते में ही दम तोड देने की जानकारी है । सडक नही होने से संजीवनी 108 गांव तक नही पहुंच पाती है । लोगो को 30 किमी सफर तय कर साल्हेवारा सी एस सी अस्पताल जाना पडता है। ग्राम पंचायत कोपरो में सात साल पहले अस्पताल बनना था जो अब तक नही बना है ।

बैगा आदिवासी लोग स्वास्थ्य सुविधा से वंचित, गांव में ही दम तोड देते है जिंदगी।

छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के अंतिम छोर पर सुन्दर वनांचल में बसे तकरीबन एक दर्जन से अधिक गांव ग्राम चोभर ,बगारझोला ,कोपरो , भठली, ग्वालगुंडी ,सिंगबोरा ,नवापारा , कल्लेपानी , गाताभर्री, संमुदपानी,टाटीधार , पंडरीपानी , झिलमिली,जहां आदिवासी के अलावा बैगा आदिवासी लोग निवास करते है, वह बैगा आदिवासी लोग स्वास्थय सुविधा से वंचित रह जाते है । जहां इलाज के अभाव में बिमार लोग के समय पर उचित इलाज नही होने से गांव में ही दम तोड देते है । जिस गांव में सडक तक नही वहां महतारी एक्सप्रेस 102 और संजीवनी एक्सप्रेस 108 तक की सुविधा नही है । ग्राम पंचायत कोपरो के आश्रित ग्राम सिंगबोरा में सडक सुविधा नहीं होने से बीमार लोगों को पैदल या कंधे में लादकर अस्पताल पहुंचाया जाता है । जंगली रास्ते से 12 किलो मीटर पैदल दूरी तय करते समय बिमार लोग गांव या रास्ते में ही दम तोड देते है । जंगली रास्ते से निकलने के बाद ही अच्छी सडक मिल पाती है । उन्हे इलाज के लिये ग्राम पंचायत कोपरो से 15 कि.मी.और सिंगबोरा गांव से अस्पताल की दुरी लगभग 27 कि.मी.दुरी सफर कर साल्हेवारा अस्पताल जाना पडता है । गंभीर बिमारी होने पर 55 कि.मी.ब्लाक मुख्यालय छुईखदान या जिला मुख्यालय राजनांदगांव अस्पताल के लिये 125 किलोमीटर दूरी तय करना पडता है । सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओ को टीकाकरण से लेकर हर माह लम्बी दुरी तय कर अस्पताल जाना पडता है ज्यादा परेशानी महिलाओ को होती है । गाँव के दिनेश बोरकर ,रामलाल, सवनू राम ,नेरसिंह, अंकलहा, रतीपटेल,बुधलाल.,बाहेश्रवर, रोशन पोर्ते ,मटुक सिंह मरकाम ,उमेन्द्र सिंह मरकाम,हमेर सिंह. , गोवर्धन पोर्ते, अमी विश्कर्मा ,दिपक डोंगरे,राकेश कावरे , बैसाखू राम,चमरू तोरन,मानसिंग ,बाबुलाल , रामचरन ने बताया कि 2010 में ग्राम पंचायत कोपरो में उपस्वास्थ्य केन्द्र के लिये स्वीकृत हो गया था ।अस्पताल बनने के लिये भूमिपूजन होने के बाद भी यहा अस्पताल नही बना है ।यहा 2 से 5 कि.मी.की दूरी में एक भी अस्पताल नही है । ग्राम कोपरो के लिये अस्पताल स्वीकृत हुआ था , जिन्हे जहां बकरकट्टा में बना दिए जाने की जानकारी है ग्रामीणों ने गांव मे अस्पताल नही होने से अपनी समस्या कई बार ग्राम सुराज और जनसमस्या निवारण शिविर में और जिला प्रशासन को आवेदन देने के बाद भी गांव में अब तक अस्पताल नही खुला है । वनांचल के लोगो के लिये सडक सुविधा नही होने से वहां बसे बैगा आदिवासी लोग कई लोग बिन चप्पल के खुले पैर पगडंडी यात्रा करते नजर आते है । वहा राशन के लिये लम्बी दुरी तय करना पडता है । साथ ही जरूरत मंद समान को भी सिरपर लादकर ले जाना पडता है ।

क्या कहते है SDM साहब

ग्राम सिंगबोरा में ग्रामीणों की जो समस्या है जिसमे सड़क सवास्थ्य पेयजल और विद्युत् सभी को गंभीरता से ध्यान में रखते हुए वनांचल क्षेत्र के लोगो की समस्या को जल्द ही दुरुस्त किये जाने का प्रयास किया जायेगा,प्रयास क्षेत्र में लगातार जारी है।

चित्रकान्त चाली ठाकुर एस डी एम गंडई।

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