राज्य

पेड़ बना परिवार का आसरा,मकान जलने के बाद झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर ।

पेड़ बना परिवार का आसरा,मकान जलने के बाद झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर ।

गरियाबंद :-ग्रामीण क्षेत्रों में आवास विहीन लोगों को आवास देने की योजना को अमलीजामा पहनाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा समय समय पर कई योजनाएँ चलाई जा रही है पूर्व में इंदिरा आवास एवं वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत इन लोगो को मकान देना सरकार की पहली प्राथमिकता है जिसके लिए करोड़ो रूपये खर्च भी किये जा रहे है ग्रामीण क्षेत्रों के आखरी कोने तक शासन की योजना का लाभ पहुँचने में शासन भले एड़ी चोटी का जोर लगा दे लेकिन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते योजना के असली हकदार को उनका हक नही मिल पा रहा है कुछ इसी तरह का मामला जनपद पंचायत गरियाबंद के ग्राम पंचायत घटोद में सामने आया है जँहा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि की लापरवाही के चलते बाल बच्चों वाला एक परिवार पिछले 1 साल से पेड़ के नीचे झोपड़ी बना के रहने को मजबूर है दो साल पहले पीड़ित गोवर्धन विश्वकर्मा अपने परिवार के साथ गांव से बाहर गया हुआ था तब उसके घर मे आग लग गई जिससे घर मे रखा पूरा समान जलकर खाक हो गया । 1 साल तो इधर उधर रहकर बिताया लेकिन फिर लोगो ने भी रखने में आनाकानी करनी शुरू कर दी तो मजबूरी वश अपने की बाड़ी में ही एक पेड़ के नीचे झोपड़ी तान ली । और अपनी पत्नी एवं बच्चों( 3 लड़की और 1 लड़के) सहित उसी में रहना शुरू कर दिया । घर जलने पर शासन द्वारा मुआवजे के तौर पर 8 हजार रुपये मिले थे जिसमें से 500 रुपये तुरंत पटवारी ने ले लिये । बाकी बचे पैसे में से 5 हजार रुपये की लड़की और कपड़ा ढंकने के लिए, एवं 1 हजार की झिल्ली बारिश से बचने के लिए लगाई थी । और बाकी बचे 1500 में घर में राशन की व्यवस्था की । इतनी तकलीफ में रहने के बाद भी परिवार वालों ने हार नही मानी थी और जैसे तैसे अपना गुजारा कर ही रहे थे कि एक दिन अचानक उनकी सबसे बड़ी 16 साल की लड़की को पीलिया हो गया और उचित इलाज के अभाव में उसकी मृत्यु हो गई । इसके बाद से पत्नी भी बीमार रहने लगी और इलाज पानी के चक्कर मे खाने पीने में दिक्कत होने लगी जिसके कारण दूसरे नंबर की लड़की को उसके मामा के घर भेजना पड़ा । तब से एक लड़की और 1 लड़का सबसे छोटा के साथ यही पर गुजर बसर कर रहे है कई बार गाँव के जनप्रतिनिधियों से भी आवास के लिए माँग की परंतु प्रतीक्षा सूची में नाम का हवाला देते हुए समय लगने की बात कही । 5 एकड़ की जमीन 20 सालों से खेती कर रहे थे परंतु वह भी लगानी भूमि निकल गई जिसके चलते आजीविका का एक संसाधन भी हाथ से चला गया । वर्तमान में लोहारी (लोहे का सामान बनाने वाला ) के कार्य जिससे दिन भर में 50-60 रुपये की आवाक हो जाती के भरोसे ही जीवन यापन हो रहा है । जिसके चलते अपने बच्चो के भविष्य के प्रति संशय की स्थिति बनी हुई है अब शासन से ही आखरी उम्मीद है ।अप्रेल में कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन लेकर गया था परंतु मैडम से मुलाकात नही हो पाई तो आवेदन देकर वापस आ गया । इस बारे में जब गाँव की महिला सरपंच कीर्ति कपिल से जब बात की तो उनका कहना था कि इस बारे में पूर्व सी ओ को अवगत करा चुकी हुँ परन्तु उनके तरफ से कोई पहल नही हुई है वर्तमान सी ओ से जब इस बारे में जानकारी ली तो उनके कहे अनुसार पीड़ित को अभी और 6 माह या साल भर का समय लग सकता है ।

क्या कहते है जिम्मेदार

प्रतीक्षा सूची में क्रम के आधार पर ही हितग्राही को आवास मिलता है इसमें किसी तरह की प्राथमिकता को आधार बना कर आवास नही दिया जा सकता । बी आर भगत सीईओ, गरियाबन्द जनपद

Leave a comment