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लॉक डॉउन के दौरान गेहूं खरीदी में खुल कर हो रहा भ्रष्टाचार

लॉक डॉउन के दौरान गेहूं खरीदी में खुल कर हो रहा भ्रष्टाचार

पाटन - जहां एक ओर शासन किसानों को हित की योजनाएं बना रहा है तो वहीं दूसरी ओर किसानो के साथ खुलकर अन्याय हो रहा है। ज्ञात हो कि वर्तमान में शासन द्वारा गेहूं खरीदी का कार्य बड़े जोर शोर से चल रहा है वहीं गेहूं खरीदी केंद्रों पर किसानों के साथ जम कर खुले आम लूट हो रही है और प्रशासन अपनी चिर निद्रा में लिप्त है लॉक डॉउन के चलते प्रशासन अपनी पूरी ताकत लॉक डॉउन को सफल बनाने में लगाए हुए है किन्तु अन्नदाताओं के साथ हो रहे अन्याय कि और अपने दृष्टि केंद्रित नहीं कर रहा है। तहसील मुख्यालय से महज 2 किमी दूर ही किसानों के साथ ये खेल चल रहा है। खरीदी केंद्र पर किसानों की मेहनत से उगाया गया अनाज आज खरीदी केंद्र संचालकों की मनमानी की भेंट चल रहा है। प्राप्त सूत्रों के अनुसार खरीदी केंद्र पर किसानों से अनाज भर्ती के दौरान 51 किलो 200 ग्राम अनाज लिया जा रहा है और 32 रुपए प्रति क्विंटल तुलाई भराई आदि के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है। पर देखने लायक बात यह कि उक्त कृत्य की शासन तक कोई झनक तक नहीं पड़ रही है। किसानों के बताए अनुसार खरीदी केंद्र पर शासन का कोई नुमाइंदा तक उपस्थित नहीं रहता है और वेयर हाउस मालिक अपनी मनमानी पर उतारू रहते हैं और यदि कोई किसान इसका विरोध करता है तो उसके लिए या तो वारदाना ख़तम हो जाता है या फिर उसको तूलाई के लिए घंटो इंतजार करना पड़ता है। आज अन्नदाता को परेशानी के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हो पा रहा है। किसानों के अनुसार पिछली साल भी लॉक डॉउन के कारण यही न्याय झेलना पड़ा था और इस बार भी फिर से वही समस्याएं सामने आ रही हैं क्योंकि अधिकारी इस ओर अपन ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं और इस घोटाले को मात्र किसानों को झेलना पड़ रहा है।

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