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500 करोड़ रुपए के हवाला कांड में संजय पाठक से छिनेगा मंत्री पद

500 करोड़ रुपए के हवाला कांड में संजय पाठक से छिनेगा मंत्री पद

विशेष संवाददाता: कालेधन के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कड़े तेवरों को देखते हुए फिलहाल मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल से संजय पाठक की विदाई तय है। पार्टी की गोपनीय जांच में उनकी प्रथमदृष्टया संलिप्तता पाई गई है। वहीं हवालाकांड में शामिल बाकी लोगों पर भी कार्रवाई होगी, लेकिन इसका फैसला जांच के बाद होगा। हालांकि इसकी टाइमिंग क्या होगी, इस पर अभी तक कोई भी संकेत सामने नहीं आए है।

इसी बीच शुक्रवार को दिल्ली में मप्र के कटनी से जुड़े हवाला कांड का मामला काफी छाया रहा। इस दौरान पीएमओ से लेकर पार्टी कार्यालय सभी जगहों पर हलचल देखी गई। पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन जो भी होगा, वह कानूनी तरीके से होगा। इसके लिए ईडी को आगे किया गया है। जो जल्द ही इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। जिसके आधार पर ही कार्रवाईयां तय होगी।

पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी इस मामले को कतई राजनीतिक रंग नहीं देना चाहती है। यही वजह है कि जांच में जो भी नाम सामने आएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। माना जा रहा है कि यह मामला जिस तरीके से गर्माया हुआ है, ऐसे में पार्टी जल्द ही मामले में प्रथमदृष्टया आरोपी मंत्री संजय पाठक की विदाई कर देगी। साथ ही जांच रिपोर्ट के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। बता दें कि कटनी के हवालाकांड की जांच कर रहे एसपी गौरव तिवारी को वहां से हटाए जाने के बाद यह पूरा मामला चर्चा में आया।

प्रदेश कार्यसमिति में भी छाया रहा मुद्दा

कटनी के हवालाकांड का मुद्दा भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में भी छाया रहा। इस दौरान पार्टी के तमाम वरिष्ठों ने इस मामले को संगठन के सामने उठाया भी। साथ ही कार्रवाई की भी मांग की। बता दें कि इस बैठक में शामिल हुए पार्टी के कुछ राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भी इस मामले से राष्ट्रीय नेतृत्व को अवगत कराया।

गौरव तिवारी के समर्थन में आए भाजपा सासंद प्रहलाद पटेल, स्थानांतरण को बताया गलत

हवालाकांड की जांच कर रहे कटनी एसपी गौरव तिवारी का भाजपा सासंद प्रहलाद पटेल खुलकर समर्थन किया है। साथ ही उनके स्थानांतरण को गलत बताया है। हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी बतौर एसपी गौरव तिवारी से कभी भी कोई बात या मुलाकात नहीं हुई है, लेकिन जो भी मीडिया के जरिए सामने आ रहा है, उससे यह तो साफ है कि कार्रवाई गलत हुई है। जांच से उन्हें हटाना कई सवालों को खड़ा करता है।

 

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