ज्योतिष

लगभग साढ़े 04 किलो स्वर्ण आभूषणो से मां का किया राजकीय श्रृंगार।

लगभग साढ़े 04 किलो स्वर्ण आभूषणो से मां का किया राजकीय श्रृंगार।

अजीत मिश्रा --शारदीय(क्वांर)नवरात्र की नवमी पर सोमवार को रतनपुर महामाया मंदिर में माता के राजसी श्रृंगार से सजे स्वरूप का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी । राजसी श्रृंगार,आरती और राजसी नैवेद्य चढ़ाने के बाद ट्रस्ट द्वारा कन्या और ब्राम्हण भोज का आयोजन किया गया । इसके बाद सुबह से शाम तक भंडारा चलता रहा।


-नवरात्रि की नवमीं तिथि पर सोमवार को सुबह 06 बजे राजसी श्रृंगार के बाद मंदिर का पट खोला गया। तो दर्शनार्थीयो ने माता के भव्य स्वरूप का दर्शन किया। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि माता को रानीहार, कंठ हार, मोहर हार,ढार,चंद्रहार,पटिया समेत 9 प्रकार के हार,करधन,नथ धारण कराया गया। राजश्री श्रृंगार के बाद मां महामाया की महाआरती हुआ । इसमें ट्रस्ट के पदाधिकारी और सदस्यों के अलावा आम श्रद्धालु जन भी मौजूद रहें। पूजा अर्चना के बाद मां को राजश्री नैवेद्य समर्पित किया गया । जिसके बाद भोग प्रसाद वितरण के बाद ट्रस्ट की पुरानी धर्मशाला में कुंवारी कन्याओं के पैर धुलवाकर उन्हें आसन पर बिठाकर आरती की गई। वही कन्या भोज कराने के बाद उन्हें उपहार दिया गया। इसके बाद धर्मशाला में ही ब्राम्हण भोज का आयोजन में मंदिर के पुरोहितों समेत ब्राम्हणों को भोज कराया गया । कन्या और ब्राम्हण भोज के बाद ज्योति कलश रक्षकों को भोज कराकर उन्हें वस्त्र और दक्षिणा प्रदान की गई । इसके बाद भंडारे का आयोजन हुआ जिसमें अतिथियों को भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। कन्या, ब्राम्हण भोज और भंडारे के बाद दोपहर करीब तीन बजे पूजन सामग्री के साथ पुजारी सभी ज्योति कलश कक्ष में प्रज्जवलित मनोकामना ज्योति कलश की पूजा अर्चना किया । पूजा अर्चना के बाद मंत्रोच्चारण कर ज्योति विसर्जित की गई ।

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