ज्योतिष

जे राखे रघुवीर ते उबरे तेहि काल मह -आचार्य राघवाचार्य महाराज

जे राखे रघुवीर ते उबरे तेहि काल मह -आचार्य राघवाचार्य महाराज

शिवरीनारायण में बाल्मीकि रामायण पर राम कथा सुनाने का सौभाग्य मिला था

छोटे बनना सीखें इससे जीवन संवर जाएगा

●ashish kashyap

जांजगीर चाम्पा:- शिवरीनारायण तीर्थ से पूज्य महाराज जी यहां पधारे हैं यह हम सभी के लिए परम सौभाग्य की बात है आज से लगभग नौ दस वर्ष पूर्व बाल्मीकि रामायण पर राम कथा सुनाने का सौभाग्य मुझे मिला था जिसका स्मरण मुझे आज भी होता है यह बातें श्रीधाम अयोध्या से पधारे हुए अनंतश्री विभूषित श्री स्वामी राघवाचार्य जी महाराज ने व्यासपीठ की आसंदी से अभिव्यक्त की वे बिलोटिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में श्रोताओं को भागवत कथा का रसपान कराते हुए बोल रहे थे

विदित हो कि सारागांव में बिलोटिया परिवार के द्वारा अपने पूर्वजों के मोक्ष की प्राप्ति के लिए श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित महामंडलेश्वर के पद से विभूषित राजेश्री डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज के पदार्पण के पश्चात व्यासपीठ पर आसीन आचार्य जी ने कहा कि शिवरीनारायण तीर्थधाम से पूज्य महाराज जी पधारे हैं यह हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है आज से लगभग नौ-दस वर्ष पूर्व शिवरीनारायण में बाल्मीकि रामायण की कथा सुनाने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ था वह बहुत ही भव्य आयोजन था जिसका स्मरण मुझे आज भी होता है, छत्तीसगढ़ की धरती पर मेरा प्रथम आगमन था बाद में पूज्य महाराज जी ने मुझे श्री दूधाधारी मठ में भी राम कथा सुनाने के लिए आमंत्रित किया किंतु स्वास्थ्य खराब होने के कारण उपस्थित नहीं हो सका, अब पुनः उनका आदेश प्राप्त हो रहा है आने वाले समय में वह अवसर भी आएगा आचार्य जी ने कहा कि आप सभी अपने जीवन में छोटा बनना सीखे छोटे बने रहने का बहुत लाभ है बछड़ा जब छोटा होता है तो आनंद पूर्वक दुग्धपान करता है जैसे ही वह बड़ा हो जाता है तब उसे भूसा खाना और गाड़ी खींचना पड़ता है उन्होंने कहा कि सेवक का अपराध स्वामी का अपराध माना जाता है इसके लिए उन्होंने महाराज विभीषण की कथा सुना कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया आचार्य जी ने कहा कि इस संसार में सांसारिक मोह माया से वही बचसकता है जिसे भगवान रघुवीर जी बचाते हैं रामचरितमानस का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि -‘जे राखे रघुवीर ते उबरे तेही काल मह’ रघुनाथ जी जिसे बचा देते हैं उसी का बेड़ा पार होता है नहीं तो जीव को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है राजेश्री महन्त जी महाराज के साथ कथा का रसपान करने के लिए मुख्तियार सुखराम दास जी, मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव, अमरेश त्रिपाठी, योगेश उपाध्याय तथा आयोजक परिवार एवं श्रोता गण बड़ी संख्या में भगवत कथा का रसपान करने के लिए उपस्थित हुए थे।

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