ज्योतिष

क्या आप जानते है यहाँ है छतीसगढ़ का अदभुत गणेश मन्दिर...

क्या आप जानते है यहाँ है छतीसगढ़ का अदभुत गणेश मन्दिर...

नीलकमल सिंह ठाकुर

बेमेतरा (नवागढ़)- 1312 वर्ष पूर्व नवागढ़ में तांत्रिक विधा से सिद्ध गणेश मंदिर की स्थापना की गई थी। मंदिर के अग्रभाग में शमी का वृक्ष है। श्रद्धालु विघ्नहर्ता के साथ-साथ शमी वृक्ष के भी दर्शन करते हैं। नवागढ़ रियासत के राजा नरबर साय ने सन् 704 में श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित की थी। गणेश जी की प्रतिमा 6 फिट ऊंचे पत्थर की बनी है। मंदिर के अग्रभाग में तांत्रिक विधा से शमी वृक्ष विराजित है। मंदिर के परिसर में अष्टकोशीय कुआं, विशालकाय पत्थरों के लेख, पुरातन विधा अौर गौरवशाली इतिहास के साक्षी हैं। गीता प्रेस गोरखपुर में प्रकाशित धार्मिक पत्रिका कल्याण के अंक में अविभाजित मध्यप्रदेश के सिद्ध गणेश स्थानों में एक नाम नवागढ़ का प्रमुखता से उल्लेखित है। माना जाता है कि नवागढ़ के गणेश मंदिर के अग्रभाग में शमी वृक्ष एक दुर्लभ संयोग है। शमी के पेड़ को शनिदेव का अवतार माना जाता है। सिद्ध गणेश मंदिर में श्रद्धालु विघ्नहर्ता के साथ-साथ शमी वृक्ष का भी दर्शन कर सकते हैं शमी वृक्ष के पूजन-दर्शन से विकार तत्वों से मुक्ति मिलती है। श्रीगणेश के इस मंदिर पर सालभर देश के कोने-कोने से भक्त कष्ट निवारण अौर मंगलकामना के लिए आते हैं। यह भारत का एक ऐसा मंदिर है, जहां श्रीगणेश अौर शमी वृक्ष के दुर्लभ दर्शन होते हैं। मंदिर के चारों अोर राज्य अौर देश के सिद्ध गणेश इस मंदिर में किए जा सकते हैं। सिद्धि के प्रमाण : शासकीय अभिलेख में लगभग १८८४ वर्ग फीट जमीन गणेश मंदिर के नाम दर्ज है। इस मंदिरमें अश्तकोनिय कुआँ व निर्माण की विधा पुरातन इतिहास का साक्षी है, मंदिर के प्रवेश द्वार पर विशालकायपत्थर में उल्लेखित लेख इसकी सिद्धि व पुरातात्त्विक महत्त्व को प्रमाणित कर रहे हैं। धार्मिक पत्रिका गीता प्रेससे प्रकाशित कल्याण में वर्षो पूर्व प्रकाशित मध्यप्रदेश के गणेश स्थान में नवागढ़ का प्रमुखता से उल्लेख है। इसमेंलिखा है की श्री तात्या जी विशम्भ्र्वंत मोहरे ने मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर बहुत प्राचीन है। मन जाता है की १८२० के पूर्व नवागढ़ करादराज गोंड़ सामंत की राजधानी थी। राजधानी के चिन्ह स्वरुप मिट्टी का किला, महामायामंदिर, गणेश मंदिर, राजा बगीचा, बावली तालाब, गोंड़ राजाओ का मकबरा तथा राज्य का विशेष प्रतीक शमी वृक्ष है। लार्ड वेलेजली की सहायक संधि व सब्सिडियरी एलायंस संधि को नागपुर के भोसला राजा ने स्वीकारकिया था। उस समय छत्तीसगढ़ नागपुर के भोसला राजा के अधीन था जिसकी राजधानी रतनपुर थी। इस संधिके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी टैक्स लगान निर्धारित करते थे। करदराज के गोंड सामंत बार-बार बढ़ाहुआ लगान देते परेशान हो गए थे, इस क्षेत्र के गोंड सामंतो ने विरोध किया। ईस्ट इंडिया के सिपाही व राजा केसिपाहियों ने मिल कर गोंडो पर आक्रमण किया। जिस युद्ध में नवागढ़ का अंतिम राजा महार सिया मारा गया। महाराष्ट्र से आये सैनिक अधिकारी कर्मचारी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे।

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