ज्योतिष

शंशय और अहंकार को केवल गुरु ही दूर कर सकता है - इंदुभवानन्द।।

शंशय और अहंकार को केवल गुरु ही दूर कर सकता है - इंदुभवानन्द।।

गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के आश्रम एवं भगवती राजराजेश्वरी मन्दिर में बड़े ही भक्तिमय परिवेश में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया गया। इस शुभ अवसर पर सात सौ से अधिक की संख्या में शिष्य एवं भक्तों ने भगवती राजराजेश्वरी एवं गुरु पूजन में सम्मिलित हुए तथा अनार व केले से अर्चन पश्चात महाआरती किये। आश्रम प्रमुख व ज्योतिषविद ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानंद के सान्निध्य व मंत्रिचचारण के बीच प्रमुख रूप से एमएल पांडेय, सुमिता ब्रह्मा, ज्योति नायर, विजय आनंद शर्मा, पंकज वर्मा, तारिणी तिवारी, ज्ञानेश शर्मा, अजय तिवारी, पंकज अग्रवाल, नरसिंह चंद्राकर, रत्नेश शुक्ला, राजू सक्सेना, सोनू चंद्राकर व आदि ने मिलकर अर्चन एवं आरती कर भगवती राजराजेश्वरी व गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किये। इस अवसर पर ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द महाराज ने उपस्थित सभी को कहा कि गुरु ही एक मात्र व्यक्ति हैं जो व्यक्ति के शंशय, क्रोध, अहंकार को समाप्त कर सकते हैं साथ ही धर्मसम्मत , सत्य की राह में चलने हेतु प्रेरणा देते हैं। उक्त जानकारी शंकराचार्य आश्रम एवं भगवती राजराजेश्वरी मन्दिर के समन्वयक एवं प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी ने साथ ही बताए कि ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द ने आगे अपने प्रवचन में कहा कि गुरु कभी शिष्य नहीं बनाते अपितु व्यक्ति गुरु का चयन कर शिष्य बनाते हैं और उनके सान्निध्य में जीवन जीने की कला, धर्म, अधर्म, आध्यात्म, शास्त्रों का ज्ञान आदि का रस पान गुरु ही कराते हैं। इसलिए संसार मे गुरु का स्थान उच्च है जो व्यक्ति के आत्मा को जागृत कर परमात्मा से मिलाते हैं साथ ही चंचल मन को शांत कर एकाग्रचित करते हैं।

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