ज्योतिष

क्रोध और अहंकार होते हैं पतन के कारक।

क्रोध और अहंकार होते हैं पतन के कारक।


ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज बिलासपुर के चिचिरदा में स्थित उनके शिष्य हरीश शाह के कुंज कुटीर में आयोजित सत्संग में उपस्थित शिष्यों एवं भक्तों को धर्म सन्देश देते हुए कहा कि व्यक्ति को क्रोध पीना सीखना होगा और अहंकार को छोड़ना होगा। ये दोनों पतन के कारक होते हैं। सत्संग से पूर्व पूज्य शंकराचार्य महाराज का हरीश शाह, एमएल पांडेय, डीपी तिवारी, चंद्रप्रकाश उपाध्याय, विजय आनंद शर्मा, अशोक अग्रवाल, नरसिंह चंद्राकर, व आदि भक्तों ने एक साथ गुरु पूर्णिमा पूर्व ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द के मंत्रोच्चारण के साथ पादुका पूजन किये। इस विशेष अवसर पर रायपुर शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द , लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, ब्रह्मचारी धरानंद, आचार्य धर्मेंद्र मंच पर पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज के साथ मंचासीन थे। शंकराचार्य महाराज ने आगे अपने धर्म संदेश में कहा कि व्यक्ति को कभी भी किसी भी परिस्थिति में धर्म की राह नहीं छोड़ना चाहिए साथ ही गौ हत्या को रोकना चाहिए। उन्होंने गौ मांस निर्यात में पूरे विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत के शीर्ष स्थान पर आने हेतु चिंता व्यक्त किये तथा गौ माता के सुरक्षा और सेवा हेतु ज्यादा से ज्यादा गौ शाला का निर्माण करने हेतु आग्रह किये। आगे पूज्य महाराजश्री ने कहा कि आज के समय लोग माया के पीछे भाग रहे हैं और उसे पाने की तमन्ना में अधर्म का राह पकड़ने में भी संकोच नहीं कर रहे हैं। हम प्रत्येक को चाहिए कि आज के युवा पीढ़ी को सनातन धर्म के महत्ता के बारे में बताते हुए सत्य की राह पर चलने हेतु प्रेरित करना चाहिए। उक्त जानकारी शंकराचार्य आश्रम के समन्वयक एवं प्रवक्ता पं सुदीप्तो चटर्जी ने विज्ञप्ति जारी कर के दी और यह भी बताया कि पूज्य महाराजश्री 14 जुलाई की शाम 5आजाद हिंद एक्सप्रेस से चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान हेतु कोलकाता के लिए प्रस्थान करेंगे।

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