ज्योतिष

जगह जगह निकली रथयात्रा लोगों ने किया दर्शन

जगह जगह निकली रथयात्रा लोगों ने किया दर्शन

 

शिवरीनारायण में रथयात्रा की धूम

भक्तों को मिला गजा मूंग का प्रसाद

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया दिन गुरुवार दिनांक 4 जुलाई को पूरे प्रदेश भर में रथ यात्रा का त्यौहार हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया श्री दूधाधारी मठ रायपुर, राजिम , शिवरीनारायण मठ सहित प्रमुख सभी आध्यात्मिक स्थानों पर लोगों ने भगवान जगन्नाथ जी का दर्शन लाभ प्राप्त कर अपना जीवन धन्य बनाया विदित हो कि रथयात्रा के पावन अवसर पर पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में जगन्नाथ यात्रा का यह पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया छत्तीसगढ़ की सबसे प्रमुख आध्यात्मिक तीर्थ भगवान शिवरीनारायण की पावन धरा में यह त्यौहार हर वर्ष की तरह अत्यंत ही गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ

इस अवसर पर होम, हवन ,पूजन, भोग भंडारे का भी आयोजन किया गया सायंकालीन बेला में भगवान जगन्नाथ जी भ्राता बलदाऊ जी एवं बहन सुभद्रा मैया के साथ 20 फीट ऊंचे रथ पर विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले भक्तों की खुशी एवं असीम प्रेम छलक रहा था लोग जगन्नाथ स्वामी की जय, जगन्नाथ स्वामी की जय, का जय जय कार करते हुए रथ खींचने के लिए लालायित थे एक के बाद एक लोग आकर भगवान के रथ को हाथ लगा कर खींचते हुए भगवान का जय जयकार करके अपना जीवन धन्य बनाते गए अनेक स्थानों से गुजरा रथ मठ मंदिर में पूजा-अर्चना संपन्न होने के पश्चात श्री शिवरीनारायण मंदिर के सामने खड़े हुए रथ पर भगवान को विराजित कर मंदिर प्रांगण से मध्य नगरी चौक, हनुमान मंदिर चौक, राधा कृष्ण मंदिर मेला ग्राउंड, होते हुए जनकपुरी तक ले जाया गया जगह जगह पर लोगों ने किया आरती पूजन एवं दर्शन भगवान जगन्नाथ जी का रथ जिन -जिन रास्तों से होकर गुजरा रास्तों में दूरदराज के क्षेत्र से दर्शन के लिए आए हुए लोग भगवान की एक झलक पाने के लिए आतुर दिखाई दिए भगवान को नारियल, अगरबत्ती ,पुष्प, चंदन ,तुलसी, द्रव्य अर्पित कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर अपना जीवन धन्य बनाय ।

जगह जगह पर प्रत्येक द्वारों पर जहां से भगवान का रथ गुजरा नगर वासियों ने सपरिवार भगवान का खूब सेवा सत्कार किया अपने दरवाजे पर भगवान जगन्नाथ जी को आता देख वे गदगद एवं भाव विह्वल हो गए। गजामूंग का प्रसाद जगन्नाथ यात्रा के अवसर पर विशेष रूप से प्राप्त होने वाला गजा मूंग का प्रसाद जो कि चने एवं मूंग के अंकुरित दाने से तैयार किया जाता है लोगों को प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया दशमी तिथि तक विराजेगें भगवान जनकपुरी में समाचार लिखे जाने तक भगवान की रथ यात्रा जारी थी वह धीरे धीरे चलते हुए मेला ग्राउंड के अंतिम छोर पर स्थित जनकपुरी जिसे जोगीडीपा के नाम से भी जाना जाता है पहुंचेंगे यहां भगवान आषाढ़ शुक्ल दशमी तक अपनी मौसी के घर विश्राम करेंगे दशमी तिथि को सायंकालीन बेला में पुनः वे अपने मूल स्थान के लिए प्रस्थान करेंगे रथ यात्रा में जगदीश मंदिर के पुजारी श्री त्यागी जी महाराज, मुख्तियार श्री सुखराम दास जी राम मंदिर के पुजारी श्री ज्ञान दास जी नागा ,सहित बड़े मंदिर के पुजारी गण एवं मठ मंदिर के सभी अधिकारी कर्मचारी गण भगवान की सेवा में निरंतर लगे हुए थे दूर-दूर से आए हुए श्रद्धालु गण एवं भक्तजन भी भगवान की सेवा में अपना हाथ बंटा रहे थे यह आध्यात्मिक यात्रा है जिसमें मनुष्य के जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति भगवत कृपा स्वरूप प्राप्त होती हैं इसलिए नगर के प्रत्येक नागरिक गण किसी न किसी रूप में भगवान की सेवा में तल्लीन थे वे सभी जानते हैं कि यह भगवान शिवरीनारायण की नगरी है उनकी कृपा से यहां शरीर धारण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

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