ज्योतिष

जहां तुलसी होती है वह घर मंदिर है -- ब्रह्मचारी इंदुभवानंद

जहां तुलसी होती है वह घर मंदिर है -- ब्रह्मचारी इंदुभवानंद

देवी भागवत की कथा में विस्तार देते हुए डॉ इंदुभवानंद महाराज ने बताया की तुलसी की जड़ में समस्त तीर्थों का वास होता है। तुलसी समस्त वनस्पतियों की रानी है तथा पूजा का सार है पाप रूपी ईंधन को नष्ट करने के लिए प्रज्वलित अग्नि की लपटों के समान है तुलसी। तुलसी पत्र के जल से जो व्यक्ति स्नान करता है उसे समस्त तीर्थों के स्नान का पुण्य प्राप्त होता है , जो व्यक्ति तुलसी जल प्रतिदिन पीता है वह एक लाख अश्वमेध यज्ञ करने का पुण्य प्राप्त करता है तथा कार्तिक मास में तुलसी पत्र का दान व चढ़ाने से 10000 गाय दान का पुण्य प्राप्त होता है।

प्रवेश प्रारभ

आगे उन्होंने कहा कि जिनके घर में तुलसी का पौधा होता है वह घर नहीं मंदिर कहलाता है । तुलसी सदा सर्वदा भगवान के मस्तक , वक्ष स्थल पर विराजमान रहती हैं। भौतिक दृष्टि से भी तुलसी का पौधा समस्त रोगों से मुक्त करता है तथा घर परिवार मैं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है ।ब्रह्मचारी चैतन्यानंद ने बताया कि चारों वेद के पाठ करने का पुण्य शालिग्राम शिला के पूजन में प्राप्त होता है। व्रत दान , श्राद्ध, देव पूजन तथा जो भी कर्म शालिग्राम शिला की सुनिधि मैं किया जाता है उसका अनंत गुणा पुण्य प्राप्त होता है । कथा में राजेंद्र प्रसाद शास्त्री ने कहा कि शिव शक्ति में कोई भेद नहीं है और एक रूप में शिव शक्ति है। शिव शव कहलाता है, शिव शक्ति का शाम रस्य है जिसे श्रीयंत्र कहते हैं । 

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