ज्योतिष

 वट सावित्री व्रतः में इस बार बन रहा है शुभ संयोग

वट सावित्री व्रतः में इस बार बन रहा है शुभ संयोग

हिंदू धर्म के मुताबिक, जो भी स्त्री वट सावित्री व्रत रखती हैं, उनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और पति को लंबी उम्र मिलती है. इस साल इसी दिन स्नान दान की अमावस्या और शनि जयंती भी है. पंचांग के मुताबिक, गुरुवार को सुबह 5.18 मिनट पर सुर्योदय का संयोग है. इसके बाद ही महिलाएं पूजा-अर्चना के लिए वट वृक्ष के नजदीक जाएंगी और पति की लंबी उम्र की कामना, सुख-समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना करेंगी. इस व्रत की मान्यता इनती अधिक है कि इसे करवाचौथ से जरा सा भी कम नहीं आंका जाता है. 
 
वट वृक्ष के नजदीक पूजा अर्चना करने के बाद महिलाएं कथा सुनती हैं और वृक्ष की चारों ओर परिक्रमा कर उसमें कच्चा सूता बांधती हैं. पूजा की विधि यहीं समाप्त नहीं हो जाती. वट वृक्ष की पूजा के बाद महिलाएं बड़ों का आशीर्वाद लेती हैं और अपने पति की पूजा कर उनका पैर धोती हैं. सबको घर में प्रसाद देकर फिर खुद मीठा भोजन ग्रहण करती हैं. बता दें कि गुरुवार को वट वृक्ष की पूजा का समापन शुक्रवार को होगा. 
मान्यताएं
वट सावित्री व्रत में महिलाएं 108 बार बरगद की परिक्रमा कर पूजा करती हैं. कहते हैं कि गुरुवार को वट सावित्री पूजन करना बेहद फलदायक होता है. ऐसा माना जाता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस ले लिया था. इस दिन महिलाएं सुबह से स्नान कर लेती हैं और सुहाग से जुड़ा हर श्रृंगार करती हैं. मान्यता के अनुसार इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने के बाद ही सुहागन को जल ग्रहण करना चाहिए.

 महत्व
वट का मतलब होता है बरदग का पेड. बरगद एक विशाल पेड़ होता है. इसमें कई जटाएं निकली होती हैं. इस व्रत में वट का बहुत महत्व है. कहते हैं कि इसी पेड़ के नीचे स‍ावित्री ने अपने पति को यमराज से वापस पाया था. सावित्री को देवी का रूप माना जाता है. हिंदू पुराण में बरगद के पेड़े में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास बताया जाता है. मान्यता के अनुसार ब्रह्मा वृक्ष की जड़ में, विष्णु इसके तने में और शि‍व उपरी भाग में रहते हैं. यही वजह है कि यह माना जाता है कि इस पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है. 

पूजा का तरीका:
जैसा की हिंदू धर्म में इस व्रत की मान्यता है, ठीक वैसे ही इस व्रत से जुड़े पूजन को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं हैं. मान्यता के अनुसार इस दिन विवाहित महिलाएं वट वृक्ष पर जल अर्पण करती हैं और हल्दी का तिलक, सिंदूर और चंदन का लेप लगाती हैं. इस व्रत के पूजन के दौरान पेड़ को फल-फूल अर्पित करने की भी मान्यता है. 

Leave a comment