ज्योतिष

17 साल बाद अमृत सिद्घि योग बना  रहे हैं अक्षय तृतीया

17 साल बाद अमृत सिद्घि योग बना रहे हैं अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।[3] नवीन वस्त्र, आभूषण आदि धारण करने और नई संस्था, समाज आदि की स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान अथवा किसी और प्रकार का दान, अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गंगा स्नान करने से तथा भगवत पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यहाँ तक कि इस दिन किया गया जप, तप, हवन, स्वाध्याय और दान भी अक्षय हो जाता है। यह तिथि यदि सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए दान, जप-तप का फल बहुत अधिक बढ़ जाता हैं। इसके अतिरिक्त यदि यह तृतीया मध्याह्न से पहले शुरू होकर प्रदोष काल तक रहे तो बहुत ही श्रेष्ठ मानी जाती है। यह भी माना जाता है कि आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा किए गए जाने-अनजाने अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करे तो भगवान उसके अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उसे सदगुण प्रदान करते हैं, अतः आज के दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में सदा के लिए अर्पित कर उनसे सदगुणों का वरदान माँगने की परंपरा भी है। 

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्घि और गजकेसरी दोनों योग मिलकर 17 साल बाद अमृत सिद्घि योग बना रहे हैं। इसी के चलते शहर के पंडित ने इस पर्व को मनाने के लिए 28 अप्रैल की तिथि को उचित माना क्योंकि इस वर्ष शुभ मुहूर्त के चलते अक्षय तृतीया 28 और 29 को दो दिन मनाने को लेकर लोगों में संशय की स्थिति देखी जा रही है। इस दिन सभी कार्य करना शुभ तथा फलदायक होगा वहीं 15 संस्कारों का मुहूर्त रहेगा। इस तिथि को विवाह करने वाले लोगों का दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।

पंडित किशोर तिवारी  के  अनुसार इस वर्ष साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त हैं जिसमें प्रमुख स्थान अक्षय तृृतीया का ही है। अक्षय तृतीया के दिन जो शुभ कार्य होंगे उनका क्षय नहीं होता। इस तिथि को प्रमुख रूप से शादी, सोने की खरीदारी, नया सामान, गृह प्रवेश, वाहन खरीदारी, व्यापार प्रारंभ और भूमिपूजन आदि कार्य किए जा सकते हैं जो फलदाय सिद्घ होंगे।

इस वर्ष अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में श्रद्घालु आज 28 और 29 दोनों दिन पर्व मनाने की सोच रहे हैं। पंडित पुनेश्वर तिवारी ने बताया कि पंचाग के अनुसार 28 अप्रैल को सुबह 10ः28 बजे से अक्षय तृतीया तिथि की शुरूआत हो रही है जो अगले दिन 29 अप्रैल को सुबह 6ः45 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाएगा चूंकि तृतीया पर्व पर भगवान विष्णु व देवी लक्ष्मी की पूजा दोपहर को की जाती है इसलिए आज 28 अप्रैल का मुहूर्त ठीक रहेगा। इस पर्व को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि वे इस तिथि को गुड्डे-गुड़ियों की धूमधाम से शादी रचाते हैं जिसकी तैयारी वे पहले से कर चुके हैं। इसके साथ ही शहर में अक्षय तृतीया पर सोने व चांदी के आभूषणों की जमकर खरीदारी भी होगी। शादियों के लिए मुहूर्त होने से सराफा कारोबारी उत्साहित नजर आ रहे हैं। शादियों के सीजन के चलते और अक्षय तृतीया पर बाजारों में ग्राहकी में तेजी आ गई है।

17 साल बाद बना पुनः सर्वार्थ सिद्घि व गजकेसरी योग

पंडित की माने तो इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्घि व गजकेसरी योग भी बन रहा है। इसके साथ ही अमृत सिद्घि योग भी है। जो श्रद्घालुओं के लिए विशेष फलदायी सिद्घ होगा। ऐसा दुलर्भ योग पिछली बार सन 2000 में बना था। जो इस वर्ष 2017 में 17 साल बाद फिर बन रहा है। इसके बाद ऐसा योग 2037 में बनेगा। इस मुहूर्त पर बड़ी संख्या में विवाह होते हैं।

Leave a comment