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ज्योतिष :  सूर्य और गुरु एक ही राशि में:बृहस्पति ग्रह के अस्त हो जाने से मौसम में आ सकते हैं बदलाव

ज्योतिष : सूर्य और गुरु एक ही राशि में:बृहस्पति ग्रह के अस्त हो जाने से मौसम में आ सकते हैं बदलाव

बृहस्पति ग्रह के अस्त हो जाने से मौसम में आ सकते हैं बदलाव|ज्योतिष, 19 जनवरी से 16 फरवरी तक अस्त रहेगा गुरु तारा, इसलिए इसके शुभ और अशुभ असर में आएगी कमी

वैदिक ज्योतिष के मुताबिक ग्रह का अस्त होना बहुत महत्वपूर्ण घटना है। हर साल कुछ दिनों के लिए आकाश में ग्रह दिखाई नहीं देते हैं क्योंकि वे सूर्य के बहुत करीब आ जाते हैं। इसे ग्रह का अस्त या लोप होना भी कहा जाता है। 19 जनवरी को गुरु ग्रह मकर राशि में अस्त हो गया है। इसके बाद 16 फरवरी को सुबह उदय होगा। गुरु तारा अस्त होने के दौरान शुभ काम नहीं किए जाते हैं। बृहत्संहिता ग्रंथ में कहा गया है कि गुरु के अस्त होने से देश की आर्थिक स्थिति के साथ ही मौसम में भी बदलाव होते हैं।

मौसम में अचानक बदलाव के योग

ज्योतिष पवन देव शर्मा बताते हैं कि गुरु तारा अस्त होने से मौसम में अचानक बदलाव हो सकते हैं। देश में ठंड बढ़ने के साथ ही कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है और उत्तरी राज्यों के कुछ इलाकों में बर्फबारी भी हो सकती है। ज्योतिष ग्रंथ भद्रबाहु संहिता में बताया गया है कि मकर राशि में बृहस्पति के अस्त हो जाने से उड़द, तिल, मूंग और अन्य धान महंगे होते हैं। अनाज भी महंगा होने के योग हैं। शनि के साथ गुरु का भी अस्त हो जाना अशुभ माना जाता है।

गुरु अस्त और उदय का समय

19 जनवरी से 16 फरवरी तक सूर्य से गुरु की दूरी 10 डिग्री से भी कम रहेगी। इसी स्थिति को गुरु का अस्त होना कहा जाता है। अस्त होने पर गुरु का प्रभाव कम हो जाएगा। इस साल गुरु तारा 23 दिनों के लिए अस्त हो रहा है। यानी ये ग्रह 16 फरवरी को सुबह उदय हो जाएगा।

बृहस्पति के शुभ और अशुभ फल में आएगी कमी अस्त होने से बृहस्पति ग्रह का प्रभाव कम हो जाएगा। जिससे इसके शुभ और अशुभ फलों में कमी आने लगेगी। बृहस्पति ग्रह का असर खासतौर से शिक्षा, धर्म और वैवाहिक जीवन पर पड़ता है। इसलिए इसके प्रभाव से लोगों के वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के कामों में अस्थिरता बनी रहेगी। धार्मिक मामलों से जुड़े फैसलों में देरी हो सकती है। मुहूर्त चिंतामणि ग्रंथ के मुताबिक गुरु ग्रह के अस्त होने के दौरान हर तरह के शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कामों की खरीदारी और अन्य संस्कार पूरे नहीं किए जा सकेंगे।

ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञ :पवन देव शर्मा (काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी

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