ज्योतिष

श्री भगवान शिवरीनारायण मठ मंदिर न्यास में मनाई गई परशुराम जयंती, हुआ घट पूजन

श्री भगवान शिवरीनारायण मठ मंदिर न्यास में मनाई गई परशुराम जयंती, हुआ घट पूजन

प्रियांश केशरवानी@BBN24NEWS

धर्म की स्थापना के लिए मनुष्य का भी तन धारण करते हैं भगवान श्री हरि

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर श्री शिवरीनारायण मठ मंदिर में  अक्षय तृतीया का पावन पर्व बड़े ही श्रद्धा भक्ति पूर्वक मनाया गया,  इस अवसर पर  परंपरागत रूप से  घट स्थापित करके घट पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ  भगवान राघवेंद्र सरकार  की विशेष पूजा अर्चना की गई उनका विशेष अलौकिक श्रृंगार करके  सतुआ का भोग  लगाया गया इस अवसर पर शासन के लॉक डाउन के निर्देश का  पालन करते हुए मठ मंदिर के सीमित जन ही उपस्थित हुए

विशेष रुप से इस अवसर पर मठ मंदिर के मुख्तियार श्री सुखराम दास जी , जगन्नाथ मंदिर के पुजारी रामेश्वर दास त्यागी, राम मंदिर के पुजारी श्री नागाजी एवं श्री प्रतीक शुक्ला तथा श्री आदर्श शर्मा जी मठ तथा मंदिर न्यास के समस्त विद्यार्थी गण एवं भगवान शिवरीनारायण मठ ट्रस्ट के सम्माननीय संत गण उपस्थित हुए। घट पूजन के पश्चात श्री शिवरीनारायण भगवान, श्री जगन्नाथ जी, एवं श्री सीताराम जी को सतुआ का भोग लगाया गया प्रसाद समस्त संत जन को वितरण किया गया साथ ही घट पूजा के पश्चात 101 घड़ा नगर के सम्माननीय विप्र बंधुओं को दान स्वरूप भेंट की गई, यह कार्य मठ मंदिर के कर्मचारी श्री नरेश वर्मा एवं वैशाखी यादव द्वारा घर- घर में जाकर पहुंचाते हुए संपन्न किया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि अक्षय तृतीया का पावन पर्व भगवान परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है भगवान परशुराम जी जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अवतार है, भगवान श्री हरि ने अनेक युगों में अनेक बार धर्म की स्थापना के लिए मनुष्य का तन धारण किया रामचरितमानस में लिखा है कि विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार जब जब संसार में धर्म की हानि होती है अधर्मी, अभिमानी लोगों की वृद्धि हो जाती है तब तब भगवान विविध स्वरूप धारण कर संसार में धर्म की स्थापना के लिए मनुष्य का तन भी धारण करके उपस्थित होते हैं, यही सनातन धर्म की विशेषता है। विश्व के किसी भी धर्म में परमात्मा साक्षात मनुष्य का तन धारण करके अवतरित नहीं होते, अन्य धर्मों की मान्यता के अनुसार वहां उनके दूत धर्म स्थापना के लिए आते हैं किंतु सनातन धर्म में वह साक्षात शरीर धारण करके संसार की पीड़ा का हरण करते हैं। यही वैदिक सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता है।

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