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अमितेश शुक्ल को कैबिनेट में शामिल करने की अटकलें तेज ,  जाने किस वजह से अमितेश हो सकते है भूपेश मंत्रिमंडल में शामिल..पढ़े पूरी खबर

अमितेश शुक्ल को कैबिनेट में शामिल करने की अटकलें तेज , जाने किस वजह से अमितेश हो सकते है भूपेश मंत्रिमंडल में शामिल..पढ़े पूरी खबर

 

रायपुर - लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र सरकार के कैबिनेट का गठन भी हो चुका है। इस बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश में भूपेश सरकार के कैबिनेट में भी फेरबदेल की संभावना है। सियासी गलियारों में आजकल इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि भूपेश सरकार में नया मंत्री कौन होगा। चर्चा तो यहाँ तक है कि एक-दो नाम वर्तमान कैबिनेट से काटे भी जा सकते हैं। वैसे भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, इसलिए कयास यही लगाए जा रहे हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे। 


इस वजह से अमितेश हो सकते हैं मंत्रिमंडल में शामिल - 
चुनाव जीतने के बाद भूपेश बघेल ने सबसे पहले स्वयं मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली साथ ही टीएस बाबा तथा ताम्रध्वज साहू को मंत्री के रूप में शामिल किया. इसके बाद उन्होंने अपनी टीम में 9 अन्य विधायकों को मंत्री के रूप में शामिल किया. लेकिन इस लिस्ट में एक सीट खाली रखी गई थी जिस पर अमितेश शुक्ल के नाम पर अटकलें लगाई जा रही थी। 

अमितेश शुक्ल- रिकार्ड वोटों से दर्ज की अपनी जीत- 
राजिम विधानसभा में कुल 2 लाख 11 हजार 908 मतदाता हैं और विधानसभा चुनाव में 74.79% मतदान हुआ था। इस चुनाव में 58 हजार 132 वोटों से चुनाव जीतने का रिकार्ड अमितेश शुक्ल के नाम दर्ज हुआ । राजिम से उन्हें 56.42%  वोट शेयर प्राप्त हुआ। जबकि उनके प्रतिद्वंदी भाजपा के संतोष उपाध्याय को 23.30% वोट शेयर मिले। इस लिहाज से 33.12% के सर्वाधिक वोट डिफरेंस के साथ जीतने का रिकॉर्ड उन्होंने अपने नाम किया है। अमितेश शुक्ल की रिकार्ड जीत ये संभावना बनाती है कि उन्हें कैबिनेट में जगह मिले।    

राष्ट्रीय नेताओं ने किया था मंत्री बनने का एलान- 
उनके चुनाव अभियान के वक्त कांग्रेस के बड़े राष्ट्रीय नेताओं ने मंच से ऐलान किया था कि राजिम की जनता विधायक नहीं मंत्री चुन रही है। कांग्रेस के स्टार प्रचारक, वरिष्ठ नेता राज बब्बर, युवा नेता जयवीर शेरगिल ने विधानसभा चुनाव के दौरान राजिम में आम सभा को संबोधित करते हुए ये एलान किया था कि अमितेश को जीताकर राजिम की जनता एक मंत्री का चुनाव करने जा रही है। 
साथ ही कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता जतिन प्रसाद ने गरियाबंद की सभा में यही एलान किया था कि अमितेश शुक्ल के जीत जाने पर उन्हें मंत्री बनाया जाएगा। 
राजिम की जनता को इसकी पूरी उम्मीद थी कि अमितेश शुक्ल जीतने के बाद कैबिनेट मंत्री बनेंगे ही. शपथ ग्रहण के दौरान उन्हें मंत्री नहीं बनाने से जनता को आश्चर्य हुआ। लेकिन वहां की जनता को आज भी उम्मीद है कि अमितेश कैबिनेट में शामिल होंगे. 

गांधी परिवार से है गहरा नाता- 
वैसे ते शुक्ल परिवार का राजनैतिक कद शुरू से ही बड़ा रहा है। लेकिन यह बात उतनी ही महत्वपूर्ण है कि अमितेश को राजनीति में लाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को जाता है। राजीव गांधी से प्रभावित होकर अमितेश ‘सेवा दल’ से जुड़े थे। और 7 दिनों तक रायपुर के महादेव घाट में  सेवादल के कैंप में सक्रिय योगदान देने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा ने अपने हाथों से सर्टिफिकेट दिया था। अमितेश खुद को राजीव गांधी के फुट सोल्जर मानते हैं। गांधी परिवार से आज भी उनका गहरा रिश्ता है। 

नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में की थी तारीफ- 
 एक ईमानदार और स्वच्छ छवि के राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले अमितेश शुक्ल की तारीफ उनके विरोधी भी करते हैं।  जोगी शासन में अमितेश पंचायत एवं ग्रामीण मंत्री थे. उस समय भाजपा के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा के सदन में खुल कर अमितेश शुक्ल की तारीफ करते हुए कहा था कि जोगी सरकार में केवल एक मंत्री ही ईमानदार है, जो कि किसी भी तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं है. यह तारीफ आज भी विधानसभा की आर्काइव में आज भी मौजूद है।

शुक्ल परिवार का छत्तीसगढ़ में प्रभाव - 
पंडित रविशंकर शुक्ल मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री रहे। उनके सुपुत्र श्यामाचरण औऱ विद्याचरण भी देश  के बड़े नेता के रूप में जाने जाते रहे। दोनों ने अपनी कर्मभूमि छत्तीसगढ़ को चुना और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की पहचान बनाई। श्यामाचरण शुक्ल राजिम विधानसभा से विधायक रहते हुए मुख्यमंत्री के रूप में छत्तीसगढ़ नें नहरों का जाल बिछाया, जिसके चलते आज भी प्रदेश के लोग उन्हें याद करते हैं। वहीं कांग्रेस के कद्दावर नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले शहीद विद्याचरण शुक्ल भी बहुत प्रभावशाली रहे। राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियाँ निभाने के बावजूद उन्होंने अपनी जड़ें छत्तीसगढ़ में ही जमाए रखी और झीरम घाटी हमले में अपने प्राणों की आहूति देकर इस प्रदेश के लिए शहीद हो गए। प्रदेश की जनता चाहे वह किसी भी जाति या समुदाय के हों उनका भावनात्मक लगाव शुक्ल परिवार से रहा है। इसके चलते भी अमितेश शुक्ल की कैबिनेट एंट्री मजबूत मानी जाती है।  
शिक्षित और अनुभवी- कॉमर्स से स्नातक और पॉलिटिकल साइंस से मास्टर्स करने वाले अमितेश ने एलएलबी की पढ़ाई की है। प्रदेश निर्माण के वक्त कांग्रेस की सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय संभाल चुके अमितेश के पास अच्छा खासा अनुभव है। 

जातिगत समीकरण से अलग है छत्तीसगढ़ की तासीर- 
भूपेश सरकार के मंत्रीमंडल को देखकर यह कयास लगाए गए थे कि जातिगत समीकरण के आधार पर मंत्रीमंडल में जगह की गई है। लेकिन प्रदेश के विधानसभा और लोकसभा के परिणाम देखे जाएं तो यह पता चलता है कि प्रदेश की जनता जातिगत समीकरण के हिसाब से नहीं बल्की लोकप्रिय और योग्य उन्मीदवार को चुनती है। वर्तमान विधानसभा चुनाव में 90 सीटों में से कांग्रेस के 7 ब्राह्मण विधायक हैं। जबकि वो सभी उन क्षेत्रों से चुनाव जीतकर आए हैं, जहां पर ब्राह्मण मतदाता बाहुलता में नहीं हैं। लोकसभा के परिणाम में भी साहू और ओबीसी वोटर की बाहुलता वाले  राजनांदगांव सीट से कांग्रेस ने जातिगत कार्ड खेलकर भोलाराम साहू को मैदान में उतारा जबकि भाजपा ने संतोष पांडे पर दाँव खेला और इस चुनाव में भाजपा ने बाजी मार ली। 
ये उम्मीद की जा रही है कि भूपेश बघेल की सरकार में मंत्रिमंडल में फेर बदल होगा और इसमें अमितेश शुक्ल को शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है।

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