राजनीति

कोई नही किसी से कम, दंगल मे दिख रहा दोनों का दम

कोई नही किसी से कम, दंगल मे दिख रहा दोनों का दम

_________________________ चुनावी बिगुल बजने एवं सात चरणों मे चुनाव की घोषणा के साथ ही रण मे योद्धा कूद पड़े है और अपने अपने तरीके से योद्धाओं की जोर अजमाईस जारी है , वैसे तो इस दफा लोकसभा चुनाव मुद्दों से लबरेज किन्तु सीमित दायरे का संग्राम नजर आ रहा है जिसके तहत मोदी बनाम महागठबंधन के दायरे मे सिमटे हुए इस चुनाव मे स्थानीय मुद्दे एवं प्रत्याशी प्रभाव गायब है किन्तु व्यक्तिवादी केन्द्रित राजनीति वाले भाटापारा जैसे कुछ जगहों पर अवश्य ही प्रत्याशी चेहरे पर आंकलन का दौर दिख रहा है और जनमानस चेहरे की चमक एवं उसके प्रभाव पर तुलनात्मक अध्ययन करते नजर आ रहें है इसी आधार पर रायपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी भाजपा के सुनील सोनी एवं कांग्रेस के प्रमोद दुबे के व्यक्तित्व की छाप जो उभर कर आ रही है उसके विवेचन की बानगी प्रस्तुत है, _________________________ पृष्ठभूमि मे एकरूपता _________________________ महापौर बनाम पूर्व महापौर के दंगल मे गौर किया जाए तो दोनों प्रतिद्वंद्वियों की राजनैतिक पृष्ठभूमि एक है और दोनो का राजनैतिक जीवन पार्षद पद के सफर से शुरू होकर रायपुर नगर निगम के महापौर के दायित्व तक पहुँचा है इस लिहाज से दोनो की कार्यशैली एवं सफलताओं एवं उपलब्धियों का आंकलन जनमानस द्वारा इस क्षेत्र मे किए गये उनके कार्यों के आधार पर किया जा रहा है और भाटापारा के जनमानस के बीच इन्ही बिन्दुओं पर चर्चाओं का दौर जारी है, _________________________ भारी पड़ते सुनील सोनी _________________________ महापौर के कार्यकाल के आंकलन की प्रक्रिया मे इतिहास के पन्ने पलटने शुरू हो गयें है, चूंकि भाटापारा का रायपुर से रिश्ता एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले जैसा है, इसकी बानगी प्रतिदिन देखने को मिलती है क्योंकि भाटापारा के अधिकतर रहवासियों का प्रतिदिन का संबंध रायपुर से है, इसलिए रायपुर की प्रत्येक गतिविधि से भाटापारा पूरी तरह परिचित रहता है, इसी आधार पर जनमानस सुनील सोनी के महापौर कार्यकाल को याद करते हुए कहते है, आज देशभर मे स्वच्छता अभियान की पहल चल रही है किन्तु उस दौर मे जब यह मुद्दा उतना अहम नही था उस समय उनके द्वारा जनसहयोग से स्वच्छता को क्रियान्वित करने का अहम प्रयास किया गया था एवं जनसहयोग से घर घर मे स्वच्छता पात्र रखने की कोशिश की गई थी, इसके अलावा अन्य क्षेत्र मे भी महापौर की भूमिका मे वे खरे उतरते जान पड़े थे, जनमानस का यह भी कहना था अपने कार्य की बदौलत जो उन्हे लोकप्रियता प्राप्त हुई उसके मुकाबले प्रमोद दुबे के कार्यकाल मे उस तरह के आयामों का अभाव नजर आ रहा है, _________________________ व्यक्तित्व पर प्रमोद का प्रभाव _________________________ अपनी कार्यशैली एवं आयामों के आधार पर भले ही सुनील सोनी जी भारी पढ़ते दिख रहें हों, किन्तु कार्यकर्ताओं के बीच प्रमोद दुबे जी की पकड़ एवं हसमुख मिलनसार स्वभाव एवं सभी से जल्द घुलमिल जाने की उनकी प्रवृत्ति जनमानस की नजर मे प्रभावकारी एवं व्यवहार की राजनीति मे प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले भारी पड़ते नजर आ रहें हैं, अब देखना यही है कि कहीं पर कोई भारी तो कहीं पर कोई भारी मे अंततोगत्वा पलडा किसका भारी होता है

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