राजनीति

खेती से पहले उद्योगों को पानी किसान विरोधी मानसिकता -कांग्रेस

खेती से पहले उद्योगों को पानी किसान विरोधी मानसिकता -कांग्रेस

रायपुर:-भाजपा सरकार के द्वारा उद्योगों से पानी बचने के बाद ही खेती के लिए पानी दिए जाने के निर्णय का कांग्रेस ने विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया सचिव सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सिचाई के बांधो एनीकटों को उद्योगों को बेचने वाली सरकार से यही उम्मीद की जा सकती है। सरकार का यह फैसला न सिर्फ किसान विरोधी है असंवेदनशील और अलोकतांत्रिक भी है सरकार ने चंद उद्योगों को राहत देने के लिए कृषक समुदाय के हितों की अनदेखी कर दिया । भाजपा सरकार के इस निर्णय से एक बार फिर से साबित हो गया कि उसकी प्राथमिकता में किसान ,खेती और गरीब है ही नही ।राज्य की 96 तहसीले सूखा ग्रस्त है ,केंद्र और राज्य सरकार अभी तक सूखे के आंकलन की रिपार्ट में तकनीकी खामियां निकालने में उलझी है । सूखा प्रभावित इलाकों में आज तक राहत कार्य शुरू नही किया गया सूखा राहत राशि का वितरण नही हुआ किसानों को फसलबीमा राशि का वितरण शुरू नही किया गया ।राज्य के 12 जिलों के किसान रवि फसल में गेहूं ,चना आलू तिवरा सरसो और अन्य दीगर वैकल्पिक फसल ले कर धान की फसल नही ले पाने की कुछ हद तक भरपाई कर सकते है लेकिन सरकार ने उनको पानी न देने का फैसला कर किसानों के जले में नमक छिड़कने का काम किया है ।उद्योग भी जरूरी है उनकी पानी की जरूरतों को नजरअंदाज नही किया जा सकता लेकिन किसानों की अनदेखी कर उद्योगों को पहले पानी देना गलत है पहले किसानों को पानी दे उसके बाद बचत पानी उद्योगों को दिया जाय ।सिचाई के रोगड़ा बांध ,सहित मुर्रा डेम ,शिवनाथ और महानदी के अनेको सिचाई के एनीकटों को सरकार पहले ही उद्योगों के हवाले कर अपनी किसान विरोधी मानसिकता का परिचय दे चुकी है अब उसके इस नए फैसले ने एक बार फिर से राज्य की दो तिहाई आबादी को निराश किया है ।

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