राजनीति

  पूर्व और वर्तमान वित्त मंत्रीवित्त मंत्री के बीच शब्दों के बाण पर रवि तिवारी की टिप्पणी .

पूर्व और वर्तमान वित्त मंत्रीवित्त मंत्री के बीच शब्दों के बाण पर रवि तिवारी की टिप्पणी .

टिप्पणी .

पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के द्वारा लिखे गए लेख के बाद,वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली और यशवंत सिन्हा के बीच शब्दों के बाण शुरू हो गए है। बीजेपी के अंदरूनी राजनीति में गरबा की शुरुवात हो गयी है। अभी तक इसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का पदार्पण नहीं हुआ है,लेकिन देर-सबेर होगा जरूर यदि समय रहते नवरात्र के समाप्ति की घोषणा नही की गई तो, अभी तक केवल शत्रुघ्न सिन्हा ने इसमें अपनी राय रखी है। मंत्री अरुण जेटली ने पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा द्वारा उठाये गये सवालों का कोई ठोस उत्तर देने से बचते हुए एक बेतुका खिसियाना वाला तंज कसते हुए जवाब दिया है कि यशवंत सिन्हा 80 साल की उमर में नौकरी की तलाश कर रहे हैं, इतने गम्भीर मसले पर इस तरह का जवाब जेटली जी को प्राप्त प्रतिष्ठित पद को सुशोभित नहीं करता है

 सवाल देश के भविष्य से जुड़ा है और उसे उठाया भी देश के पूर्व वित्त मंत्री ने है जो राजनीति में आने के पहले IAS रह चुके है, उसका जवाब जेटली के द्वारा इस तरह से दिया जाना देश के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लगा कर संशय पैदा करता है। इस वाद संवाद में अभी तक बीजेपी के वयोवृद्ध नेताओं का पदार्पण नहीं हुआ है- हो सकता है इसके पीछे भी नौकरी की तलाश का अहम मुद्दा हो, वैसे भी राजनेताओं की राजनीति में कोई उम्र तो होती नही तथा इस महकमे में आने वाला हर व्यक्ति अपनी हर उम्र में अपने लिए नौकरी की तलाश करता ही है यही यथावत सत्य है। अगर यह वाद विवाद आगे बढ़ा तो इस संभावनाओ से इनकार नही किया जा सकता कि नौकरी की आस में बैठे हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी भी टूटेगी और इसमें वे अपनी आहुति देकर हवन करेंगे क्योकि उन्हें भी तो नौकरी पाना है। अब तक इस खेल में सबसे आश्चर्य है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की बनी हुई चुप्पी- जो इस बात की ओर भी राजनीति इशारा करती है कि कहीं उनके इशारे पर तो यह सब नहीं हो रहा है- अरुण जेटली के ऊची उड़ती उड़ान को सीमित करने के लिए। अब तक के जेटली के कार्यकाल से बीजेपी को फायदा कम नुकसान अधिक हुआ है। 

यशवंत सिन्हा ने लिखे अपने लेख में प्रधान मंत्री को निशाने पर नही लिया है उनके निशाने पर जेटली ही है। जबकि आज इस बात को देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की सहमति के बिना कोई काम होता ही नहीं है । खैर बात जो भी हो यह एक अलग बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन गंभीर बात यह है कि श्री यशवंत सिन्हा द्वारा उठाए गए मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को गंभीरता के साथ मुद्दों पर विचार करना चाहिए क्योंकि नोटबंदी और जीएसटी के परिणाम अब तक अच्छे नहीं आ रहे हैं जिससे देश का हर पहलू प्रभावित हुआ है यह सत्य है। अगर इस पर विचार कर समय रहते कोई ठोस कदम नही उठाये गए तो बीजेपी के भविष्य पर एक प्रश्न चिन्ह भी लग सकता है।अतः बिना किसी पूर्वाग्रह के इसमें विचार की आवश्यकता है क्योकि सवाल देश का है।

Leave a comment