राजनीति

कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन कर चंदूलाल चंद्राकर    विश्वविद्यालय होने पर NSUI नेता हनी सिंग बग्गा ने कहा सिर्फ संघ के लोग ही कर सकते है विरोध

कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन कर चंदूलाल चंद्राकर विश्वविद्यालय होने पर NSUI नेता हनी सिंग बग्गा ने कहा सिर्फ संघ के लोग ही कर सकते है विरोध

रायपुर, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के छत्तीसगढ़ प्रदेश सचिव व छात्र राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले हनी बग्गा ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित कर चंदूलाल चन्द्राकर के नाम से रखे जाने को हर मायने में सही करार देते हुए कहा है अब तक यह विश्वविद्यालय नही बल्कि संघ के पाठशाला के नाम से जाना जाता था जिसके चलते विद्यार्थी भी प्रवेश लेने कतराते थे यही वजह है कि 2008 में प्रारंभ हुए इस विश्वविद्यालय ने आज तक सही मायने में विश्वविद्यालय का दर्जा हासिल नही कर सका बल्कि एक महाविद्यालय के स्तर पर आज भी संचालित है।  हनी बग्गा ने कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय का नाम भूपेश सरकार द्वारा परिवर्तित किये जाने पर विरोध करने वालों को करारा जवाब देते हुए कहा है ऐसे लोग सिर्फ संघ के हो सकते हैं जो इस विश्वविद्यालय को अभी तक संघ के पाठशाला की तरह ही समझते रहे इसका उसी हिसाब से उपयोग कर इसका सिर्फ खुला दुरुपयोग करते रहे। तात्कालीन रमन सरकार ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना मात्र संघ के विचारधारा को जीवित रखने के लिए किया था और दुर्भाग्य से वे इसमें सफल भी रहे। पूरे विश्वविद्यालय में 98 प्रतिशत ऐसे  हैं जो संघ से जुड़े हैं और वही लोग नौकरी पर हैं, ऐसा भी नही की ये सभी आवश्यक अर्हताधारी हैं। इनके लिए विश्वविद्यालय अधिनियम से लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों की शर्तें भी मायने नही रखतीं न ही लागू हुई और डंके के चोट पर ऐसे लोग नियमित कर्मचारी से लेकर प्राध्यापक व अन्य बड़े अवधे पर आज भी काबिज हैं। हनी बग्गा ने कहा आज तक इस विश्वविद्यालय में जो भी कुलपति बना संघ का ही बना इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस विश्वविद्यालय के स्थापना का उदेश्य क्या रहा होगा।ये भी बात गौर करने वाली है कि इस विश्वविद्यालय में स्थापना के बाद से ऐसा और कोई पाठ्यक्रम नही संचालित हो सका जिससे इस विश्वविद्यालय की निजी आवक हो सके। विश्वविद्यालय ने चिन्हित कुछ महाविद्यालयों को मान्यता जरूर दी पर वहाँ जहाँ संघ का प्रचार प्रसार हो सके इन्हीं बातों से सब कुछ स्पष्ट है कि इसका उदेश्य क्या रहा है। आज 12 साल बाद भी इस विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की कुल संख्या लगभग 800 से 900 के बीच रही है, इससे साफ जाहिर है प्रदेश के विद्यार्थी संघ के विचार धारा वाले विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से कतराते रहे हैं। आज विद्यार्थियों को रोजगारमूलक शिक्षा की जरूरत है न कि संघ के प्रचारक की पिछली सरकार का उद्देश्य पारदर्शी रहता तो विश्वविद्यालय में आज हजारों लाखों की संख्या में विद्यार्थी अध्ययन करते रहते। पत्रकारिता के साथ-साथ बिजेएलएलबी जैसे पाठ्यक्रम की शुरुआत आज तक हो चुकी रहती जो आज की माँग है पर ऐसा नही हुआ इसलिए कि पिछली सरकार का एक मात्र उद्देश्य संघ का प्रचार प्रसार करना ही रहा है। हनी बग्गा ने जोर देकर कहा है उनका उदेश्य किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी निकालना कभी नही रहा है न ही वे निम्न स्तर की राजनीति करना पसंद करते हैं पर अब वे सीधे मुख्यमंत्री से मिल कर इस बात की जाँच करायेंगे की जो अयोग्य लोग आज इस विश्वविद्यालय में नौकरी कर मोटी रकम संघ के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कर रहे हैं और हर महीने अपने झोली में सरकार का लाखों रुपये ले रहे हैं उन्हें बक्सा नही जाएगा। इसकी निष्पक्ष जाँच कराई जाएगी साथ ही विश्वविद्यालय के उत्थान के लिए जिसमें विश्वविद्यालय के खुद का आवक बने ऐसे रोजगार मूलक पाठ्यक्रम को भी इसी सत्र से आरंभ करने सुझाव दिया जाएगा।

Leave a comment