छत्तीसगढ़

रायपुर राजधानी के सड़कों पर बेतरतीब तरीक़े से घूम रहे मानसिक रूप से विक्षिप्त महिलाओं और पुरुषों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए सामाजिक संस्था अवाम ए हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी ने उनके पुनर्वास की मांग ।

रायपुर राजधानी के सड़कों पर बेतरतीब तरीक़े से घूम रहे मानसिक रूप से विक्षिप्त महिलाओं और पुरुषों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए सामाजिक संस्था अवाम ए हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी ने उनके पुनर्वास की मांग ।

विगत वर्षों से सामाजिक संस्थाओं द्वारा लम्बे समय से एक ऐसे कानून की मांग करते हुए आई हैं जिसमें मानसिक पीड़ा से जूझ रहे विक्षिप्त महिलाएं एवं पुरूष को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैय्या करा कर कर पीड़ित परिवार को उनके परिजनों तक पहुंचाने में मददगार साबित हो सके आए दिन राजधानी के सड़कों एवं विभिन्न स्थानों में रेलवे स्टेशन बसस्टैंड चौक चौराहों पर देखने को मिल रहे हैं. इनमें से अधिकांश लोगों का किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती प्रदेश सरकार को चाहिए कि ऐसे मानसिक रूप से घूम रहे विक्षिप्त महिलाओं एवं पुरुषों की सही जानकारी उपलब्ध विगत वर्षों पूर्व शहर की जनकल्याणकरी संस्था अवाम ए हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी ने इस मानवीय संवेदना के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार के समक्ष लावारिस घुमंतु विक्षिप्तों के मुद्दे को संस्था के एक प्रिति निधी मंडल ने प्रमुखता से उठाया था जिसमें मानव अधिकार आयोग ने ऐसे विक्षिप्त लोगों के लिए जो शहरों मे संज्ञान मे कारवाही करते हुए रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग द्वारा अपने आदेश मे उल्लेख किया गया था कहा गया था छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग की पहल पर पुलिस मुख्यालय द्वारा पुलिस अधीक्षक रायपुर को मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987की धारा 3के तहत थानों की सीमा मे मे स्वाच्छंद विचरण करते हुए पाये गये ऐसे व्याक्तियों को मानसिक रूप से अस्वस्थ्य हैं।उन्हें अपनी देखरेख मे रखकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराकर मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करने और ऐसे लोगों को संबोधित अस्पताल मे भर्ती कराने की कार्यवाही करनेके लिए निर्देश दिए गए ज्ञातव्य है कि राज्य मानव अधिकार आयोग ने समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार तथा अवाम ए हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी को आधार बनाकर मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्तियों को सुधबुध देने के लिए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ को आदेशित किया गया था, शासन को यह आदेशित किया था आयोग ने इस संबंध में प्राप्त सिकायतो और सूचनाओं के आधार पर मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन का ध्यान इस बात की ओर आकृष्ट करता है।कई बार विक्षिप्त महिलाओं के साथ असामाजिक तत्वों द्वारा छेड़छाड़ या बदसलूकी की जाती हैं।आयोग ने मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 की धारा 23 एवं 24 के प्रावधानो का हवाला देकर तदनुसार अवश्य कार्यवाही करने के लिए लिखा था । और राज्य सरकार द्वारा कुछ वर्षों तक मानवीय संवेदनाओं को आधार बनाकर अमल में लाया गया था लेकिन आज फिर वहीँ स्थिति जस की तस बनी हुई है शहर मे अपराधिक गतिविधियों नशेखोरी करनेवाले मनचलों को देखते हुए विक्षिप्त महिलाओं को सुरक्षित करने के लिए और मानसिक तौर से लावारिस घूमने वाली महिलाओं के लिए पुनर्वास की व्यवस्था की जाने चाहिए और प्रदेश में निस्ठावान निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाली संस्थाएँ भी अपने दायित्वों का निर्वाह करने के लिए सामने आगे आना चाहिए और साथ में सरकार की भी यह जिम्मेदारी बनती हैं कि सामाजिक संस्थाओं को भी ऐसे सामाजिक मानवीय संवेदनाओं के आधार पर इस विषय के लिए जिम्मेदारी सुनिश्चित करने चाहिए ,अवाम ए हिन्द सोशल कमेटी यह मांग करती हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार एवं शासन प्रशासन स्वास्थ्य मंत्री महिला एवं बाल विकास मंत्री जी से ऐसे मानवीय संवेदनाओं के आधार पर गम्भीर विषयों पर संज्ञान लेने की कष्ट करें ,तथा मानसिक विक्षिप्तो का इलाज करवाने का कष्ट करे । संस्था संस्थपाक सज्जाद खांन

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