छत्तीसगढ़

बारिश के साथ ही शुरू हुआ मछली बीज उत्पादन  जिले में 12 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई की जरूरत

बारिश के साथ ही शुरू हुआ मछली बीज उत्पादन जिले में 12 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई की जरूरत


 @ bbn24 : बारिश के साथ ही जिले में मछली बीज उत्पादन का काम शुरू हो गया है। इसकी शुरूआत बलौदाबाजार तहसील के ग्राम कोहरौद स्थित मछली बीज फार्म से हुआ है। आगामी 15 अगस्त तक हर चार दिन के अंतराल में बीज उत्पादन किया जाएगा। जिले के एकमात्र मछली फार्म की उत्पादन क्षमता 550 लाख स्पाॅन की है। मछली के अण्डे के फुटने के बाद अत्यंत छोटे आकार के मछली के बच्चे को स्पाॅन कहा जाता है। इसके बाद बढ़ते आकार के साथ इसे क्रमशः फ्राई एवं फिंगरलिंग के नाम से पुकारा जाता है। संपूर्ण जिले में मछली बीज की प्रति वर्ष मांग 1250 लाख की है। शासकीय फार्म से आपूर्ति के बाद शेष मांग को निजी मछलीपालक किसानों और पड़ोसी जिलों से पूर्ति की जाएगी।
            मछलीपालन विभाग के सहायक संचालक श्री बी.बी.पाण्डेय ने बताया कि इस साल वर्षा के आने में थोड़ी विलंब हुई है। वर्षा के साथ ही मौसम में बदलाव आया है। इसलिए मछली बीज फार्म कोहरौद में कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली से अण्डे निकालने का काम शुरू हो चुका है। बलौदाबाजार जिले को इस साल 550 लाख स्पाॅन के उत्पादन का लक्ष्य मिला है। इसमें से 210 लाख स्पाॅन को कोहरौद, बिलारी और सकरी स्थित सरकारी नर्सरी में स्पाॅन संवर्धन के लिए रखा जाएगा। शेष 340 लाख स्पाॅन जिले के साथ ही निकटवर्ती जिलों के मछली बीज उत्पादकों को बेचे जाएंगे। जिले में 27 निजी मछली पालकों का मौसमी तालाब संवर्धन के लिए चिन्हित किया गया है। मत्स्य संवर्धन की प्रति ईकाई लागत लगभग 40 हजार आती है। इस पर 75 प्रतिशत अनुदान मछलीपालन विभाग द्वारा दिया जाता है। यह अनुदान सामग्री के तौर पर- 25 लाख स्पाॅन, फ्राई,नेट, चूना एवं सरसों की खल्ली प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि जिले की तालाबों एवं जलाशयों में 12 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई की जरूरत होगी। जिसकी आपूर्ति एक करोड़ 10 लाख मछलीपालन विभाग से, 2 करोड़ 80 लाख निजी मछलीपालक किसानों से और 8 करोड़ 10 लाख स्टैण्डर्ड फ्राई अन्य जिलों से मंगाई जाएगी। कोहरौद फार्म में 3 जुलाई को कतला, रोहू एवं मृगल के 32 किलोग्राम फिमेल का सेट लगाया गया। इसमें 12 दिन बाद फ्राई बीज विक्रय के लिए उपलब्ध रहेगा।

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